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  • राहुल गांधी ने रामलीला मैदान की महारैली का रूट मैप किया साझा, व्यापारियों ने उठाई रद्द करने की मांग

    राहुल गांधी ने रामलीला मैदान की महारैली का रूट मैप किया साझा, व्यापारियों ने उठाई रद्द करने की मांग

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इंडिया गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली आयोजित करने जा रहा है। इस रैली से पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इसका रूट मैप साझा करते हुए लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर रैली का रास्ता बताते हुए देशभर के लोगों से दिल्ली पहुंचने का आग्रह किया।

    राहुल गांधी ने 31 अक्टूबर को रैली का नक्शा साझा करते हुए लिखा, ‘कल मिलते हैं, साथ चलते हैं।’ उनके द्वारा साझा किए गए कार्यक्रम के अनुसार, रैली का मार्ग कनॉट प्लेस से शुरू होकर मिंटो रोड जंक्शन और अजमेरी गेट होते हुए रामलीला मैदान तक पहुंचेगा। इंडिया गठबंधन की इस रैली में हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    इस आयोजन को लेकर दिल्ली में तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। शुक्रवार को हुई बारिश के कारण रामलीला मैदान में पानी भर गया था, जिससे आयोजन की तैयारियों को लेकर अतिरिक्त काम करना पड़ा। हालांकि, शनिवार को मैदान में पानी निकालने और अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम किया गया। आयोजकों की ओर से मैदान को रैली के लिए तैयार करने की प्रक्रिया जारी रही।

    महारैली को लेकर जहां विपक्षी गठबंधन के नेता और कार्यकर्ता जुटने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने इस आयोजन के समय पर सवाल उठाए हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने राहुल गांधी से एक बार फिर रैली रद्द करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि दीपावली के प्रमुख कारोबारी समय में बड़े आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के कारण बाजारों में व्यापार प्रभावित हो सकता है।

    सीटीआई ने अपनी अपील में राहुल गांधी के ‘नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान’ वाले संदेश का उल्लेख किया। संगठन का कहना है कि दिल्ली के व्यापारियों की दुकानें भी ग्राहकों के साथ आपसी विश्वास, प्रेम और सहयोग के आधार पर चलती हैं। ऐसे में दीपावली के व्यस्त कारोबारी मौसम में बाजारों और दुकानों का कारोबार प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मोहब्बत की दुकान का संदेश देते रहे हैं, लेकिन दिल्ली में रैली के आयोजन से पुरानी व्यापारिक दुकानों के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है। उनके मुताबिक, चांदनी चौक और आसपास के बाजारों में कई दुकानें पीढ़ियों से कारोबार कर रही हैं। इन बाजारों का व्यापार केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका भी इससे जुड़ी हुई है।

    बृजेश गोयल ने कहा कि दिल्ली के चांदनी चौक की परांठे वाली दुकानें, खारी बावली के मसालों का कारोबार, सदर बाजार की चूड़ी और बिंदी की दुकानें तथा चांदनी चौक के लहंगे के बाजार की अपनी अलग पहचान है। इसी तरह दरियागंज में एसी का कारोबार, चावड़ी बाजार में सैनिटरी सामान की दुकानें और करोल बाग की मशहूर कुल्फी की दुकानें भी दिल्ली के व्यापारिक बाजारों का हिस्सा हैं।

    उन्होंने कहा कि इन दुकानों से जुड़े प्रत्येक कारोबार पर करीब 10 से 20 लोगों के परिवारों की आजीविका निर्भर करती है। ऐसे में दीपावली जैसे बड़े त्योहार के ठीक पहले व्यापारिक गतिविधियों में बाधा आने से दुकानदारों और उनसे जुड़े लोगों को नुकसान हो सकता है। व्यापारियों की चिंता है कि रैली के कारण बाजारों तक ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई तो त्योहार के दौरान होने वाली बिक्री पर असर पड़ सकता है।

    सीटीआई ने राहुल गांधी से अपील की है कि वे व्यापारियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए महारैली आयोजित करने के फैसले पर दोबारा विचार करें। संगठन का कहना है कि राजनीतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ उन व्यापारियों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, जिनके लिए दीपावली का समय पूरे साल के कारोबार में महत्वपूर्ण होता है।

    फिलहाल 1 नवंबर को होने वाली महारैली को लेकर राजनीतिक तैयारियों के साथ व्यापारिक संगठनों की आपत्तियां भी सामने आ रही हैं। एक तरफ राहुल गांधी ने रैली में अधिक से अधिक लोगों के शामिल होने का आह्वान किया है, वहीं दूसरी तरफ व्यापारियों ने त्योहार के मौसम में बाजारों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। अब इस आयोजन के दौरान रैली के मार्ग और आसपास के बाजारों में कारोबार की स्थिति पर भी नजर रहेगी।

  • दिवाली से पहले राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता, दिल्ली के 20 बड़े बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू

    दिवाली से पहले राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता, दिल्ली के 20 बड़े बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू


    नई दिल्ली । दिवाली से पहले दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने रामलीला मैदान में प्रस्तावित राजनीतिक रैली को लेकर चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय में बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के पहुंचने से राजधानी के प्रमुख बाजारों में यातायात प्रभावित हो सकता है। इसका असर दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच और खरीदारी पर पड़ने की आशंका है। इसी मुद्दे को लेकर व्यापारियों ने राहुल गांधी से अपील की है कि दिवाली के दौरान बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की स्थिति पैदा न हो।

    चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इस संबंध में रामलीला मैदान के आसपास स्थित प्रमुख बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू करने की घोषणा की है। संगठन के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, पोस्टरों के माध्यम से राहुल गांधी तक व्यापारियों की चिंता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान का संदेश है कि जिस तरह मोहब्बत और आपसी विश्वास की बात की जाती है, उसी तरह व्यापारियों की दुकानें भी ग्राहकों के साथ भरोसे और संबंधों के आधार पर चलती हैं। ऐसे में दिवाली जैसे बड़े त्योहार के दौरान उनके कारोबार को प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    बृजेश गोयल ने कहा कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में मोहब्बत की दुकान का संदेश देते रहे हैं, लेकिन प्रस्तावित रैली के कारण दिल्ली के करीब 300 साल पुराने बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इन बाजारों में अलग-अलग तरह की दुकानें हैं, जिनसे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। चांदनी चौक की परांठे वाली दुकानें, खारी बावली के मसालों का कारोबार, सदर बाजार में चूड़ी-बिंदी की दुकानें और चांदनी चौक में लहंगों का व्यापार इसकी प्रमुख पहचान हैं।

    इसके अलावा दरियागंज में एसी का कारोबार, चावड़ी बाजार में सैनिटरी सामान की दुकानें और करोल बाग में कुल्फी की दुकानें भी स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों का हिस्सा हैं। संगठन का कहना है कि इन दुकानों का कारोबार केवल बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार और परिवारों को नियमित आय मिलती है।

    CTI ने रामलीला मैदान से लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजारों में पोस्टर अभियान चलाने की बात कही है। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, नया बाजार, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, दरियागंज, कनॉट प्लेस, करोल बाग, नबी करीम, पहाड़गंज, अजमेरी गेट, लाहौरी गेट, जनपथ, पालिका बाजार, बल्लीमारान और किनारी बाजार शामिल हैं।

    व्यापारियों की चिंता का एक प्रमुख कारण रैली में संभावित रूप से जुटने वाली बड़ी भीड़ और वाहनों की संख्या है। बृजेश गोयल के अनुसार, रैली में करीब 10 लाख लोगों और 20 हजार वाहनों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यदि इतनी बड़ी संख्या में लोग और गाड़ियां आसपास के इलाकों में पहुंचती हैं, तो बाजारों में आवागमन प्रभावित हो सकता है। इससे ग्राहकों को दुकानों तक पहुंचने में परेशानी होने और व्यापारियों को दुकानें बंद करने की नौबत आने की आशंका है।

    उन्होंने यह भी कहा कि रामलीला मैदान में लगभग 100 बसों की पार्किंग तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी रैली के दौरान यातायात और पार्किंग प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। संगठन ने दावा किया है कि दिवाली से ठीक पहले होने वाले इस आयोजन के कारण दिल्ली का लगभग 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तक का त्योहारों का कारोबार प्रभावित हो सकता है।

    CTI के मुताबिक, इस संभावित व्यवधान का असर करीब 20 लाख व्यापारियों और उनसे जुड़े लगभग 75 लाख लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है। संगठन ने धनतेरस और दिवाली से पहले बाजारों में सामान्य कारोबार बनाए रखने की मांग उठाई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां सुचारु रहना जरूरी है।

  • दिल्ली के 20 बड़े बाजारों पर महारैली का असर पड़ने की आशंका, 12 हजार करोड़ के कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता

    दिल्ली के 20 बड़े बाजारों पर महारैली का असर पड़ने की आशंका, 12 हजार करोड़ के कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता

    नई दिल्ली ।दिल्ली में 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की महारैली को लेकर व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि रैली के कारण मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली के प्रमुख बाजारों में यातायात प्रभावित हो सकता है। इसका असर धनतेरस और दिवाली से पहले होने वाले कारोबार पर पड़ने की आशंका है। इस संबंध में चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है।

    कांग्रेस की इस महारैली में करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान है। व्यापारिक संगठन का दावा है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के लिए 15 से 20 हजार वाहनों की जरूरत पड़ सकती है। संगठन के अनुसार, रामलीला मैदान में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं है। यहां 200 बड़ी बसों को खड़ा करने की भी पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बड़ी संख्या में बसों, कारों और अन्य वाहनों के मध्य दिल्ली में पहुंचने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

    CTI ने अपने पत्र में बताया है कि रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के करीब 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजार स्थित हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार, किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट, अजमेरी गेट, पहाड़गंज और दरियागंज शामिल हैं।

    संगठन के मुताबिक, इन बाजारों में प्रतिदिन 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। यहां दिल्ली के नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर और मंगोलपुरी समेत 56 औद्योगिक क्षेत्रों से करीब पांच हजार ट्रक और टेंपो माल लेकर पहुंचते हैं। इसके अलावा रोजाना लगभग तीन हजार ट्रक इन बाजारों से सामान लेकर गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत सहित एनसीआर के 25 शहरों तथा देश के विभिन्न राज्यों में जाते हैं।

    CTI का कहना है कि रैली का असर केवल 1 नवंबर तक सीमित नहीं रह सकता। संगठन के अनुसार, 31 अक्टूबर की दोपहर से ही सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर बॉर्डर पर वाहनों की आवाजाही बढ़ सकती है। शाम से बहादुर शाह जफर मार्ग और जेएलएन मार्ग पर बैरिकेडिंग होने की आशंका भी जताई गई है। ट्रांसपोर्टरों की ओर से 31 अक्टूबर से ही मालवाहक गाड़ियां भेजने में असमर्थता जताए जाने की बात कही गई है।

    व्यापारियों ने अपनी आशंका के समर्थन में 10 अक्टूबर का उदाहरण भी दिया है। CTI के अनुसार, उस दिन जंतर-मंतर पर पांच से सात हजार लोगों की मौजूदगी के बावजूद मध्य दिल्ली में करीब आठ घंटे तक यातायात प्रभावित रहा था। ऐसे में 10 लाख लोगों की प्रस्तावित भीड़ के कारण स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    संगठन ने सोनिया गांधी के सामने दो विकल्प रखे हैं। पहली मांग है कि महारैली को दिवाली के बाद 10 या 11 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए। दूसरा विकल्प यह दिया गया है कि यदि रैली निर्धारित समय पर ही करनी है तो इसे रामलीला मैदान के बजाय बुराड़ी मैदान में कराया जाए, जहां संगठन के अनुसार 15 हजार वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था हो सकती है।

    CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि व्यापारी रैली का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि त्योहारों के सबसे व्यस्त कारोबारी समय में अपने व्यापार को सुरक्षित रखना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली है। संगठन ने राहुल गांधी से भी रैली आगे बढ़ाने की अपील की थी, लेकिन उनकी ओर से इनकार किए जाने के बाद अब सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अंतिम गुहार लगाई गई है।

  • राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता बरकरार, दिल्ली में 10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान

    राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता बरकरार, दिल्ली में 10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान

    नई दिल्ली । दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर व्यापारिक संगठनों की चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों ने एक बार फिर कार्यक्रम की तारीख बदलने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि दिवाली के आसपास चल रहे खरीदारी के महत्वपूर्ण सीजन में रैली आयोजित होने से राजधानी के प्रमुख बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है। व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने आशंका जताई है कि स्थिति गंभीर होने पर व्यापारियों को करीब 10,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    यह मांग ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया है कि रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली आयोजित करने का उनका इरादा बरकरार है। सीटीआई ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भी पत्र की प्रति भेजकर अनुरोध किया है कि वह इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के दूसरे सहयोगी दलों के साथ चर्चा करें। संगठन का कहना है कि रैली के आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर बाजारों में कारोबार करने वाले व्यापारी असमंजस में हैं।

    राहुल गांधी ने सोमवार को व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा था कि उनकी चिंताओं को सुना जा रहा है और उनकी परवाह की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार ने मेट्रो बंद कर दी, सड़कों को सील कर दिया और राजधानी में लॉकडाउन जैसी स्थिति बना दी। उन्होंने यह भी कहा था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने पर विरोध प्रदर्शन 30 सेकंड में समाप्त हो सकता है। हालांकि, सीटीआई का कहना है कि इस बयान से व्यापारियों की व्यावहारिक चिंताएं दूर नहीं हुई हैं।

    सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, रामलीला मैदान के आसपास स्थित 20 प्रमुख बाजारों के व्यापारी रैली की घोषणा के बाद से चिंतित हैं। कारोबारियों के सवाल हैं कि क्या 31 अक्टूबर से ही बैरिकेडिंग शुरू हो जाएगी, क्या प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रतिबंध लगाए जाएंगे और क्या ग्राहकों को बाजारों तक पहुंचने में परेशानी होगी। इन व्यवस्थाओं का असर खरीदारी और माल की आवाजाही पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    व्यापारियों ने रैली में शामिल होने वाले लोगों और वाहनों की संभावित संख्या पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, यदि आयोजकों के अनुमान के मुताबिक रैली में 10 लाख लोग और 15,000 से 20,000 वाहन पहुंचते हैं, तो पार्किंग की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती होगी। सीटीआई का दावा है कि रामलीला मैदान के आसपास 200 वाहनों के लिए भी अधिकृत पार्किंग उपलब्ध नहीं है। संगठन के मुताबिक, इस आयोजन से करीब 21 प्रमुख बाजार सीधे प्रभावित हो सकते हैं।

    सीटीआई ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का भी उल्लेख किया है। संगठन के अनुसार, उस कार्यक्रम में 3,000 से 4,000 लोग शामिल हुए थे, लेकिन इसके कारण मध्य दिल्ली के बड़े हिस्से में यातायात प्रतिबंध लगाए गए और व्यापारियों को लगभग 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन का अनुमान है कि 1 नवंबर को प्रस्तावित बड़ी रैली से पुरानी दिल्ली और मध्य दिल्ली में व्यापारिक गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं।

    व्यापारियों ने सुझाव दिया है कि रैली को भाई दूज के बाद, यानी 10 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए। यदि तारीख बदलना संभव नहीं है, तो कार्यक्रम को रामलीला मैदान के बजाय बुराड़ी ग्राउंड या जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कराने पर विचार किया जाए। उनका तर्क है कि इससे आसपास के व्यावसायिक क्षेत्रों पर पड़ने वाला असर कम किया जा सकता है।

    कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के महासचिव और भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने भी राहुल गांधी के बयान को व्यापारियों की चिंताओं का समाधान नहीं माना। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मेट्रो बंद करने और सड़कें सील करने की जरूरत पड़ी, तो प्रशासन ने ऐसा क्यों किया। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की मुख्य चिंता त्योहारी सीजन में कारोबार को बड़े राजनीतिक आयोजनों के कारण होने वाले व्यवधान से बचाना है।

  • वोट बचाओ रैली पर राहुल गांधी का बीजेपी पर तंज, बोले- अगले सात दिन भी इसी जोश से प्रचार करते रहिए

    वोट बचाओ रैली पर राहुल गांधी का बीजेपी पर तंज, बोले- अगले सात दिन भी इसी जोश से प्रचार करते रहिए


    नई दिल्ली ।लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी और उसके सहयोगी दल खुद ही इस रैली का प्रचार कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कटाक्ष किया कि सत्तारूढ़ दल अगले सात दिनों तक भी इसी उत्साह और लगन के साथ प्रचार जारी रखे।

    राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए लोगों से इस रैली और मार्च में शामिल होने की अपील की। विपक्षी दलों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों के खिलाफ आवाज उठाना है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर उठा रहे हैं।

    राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और इस प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने दावा किया कि सवाल उठाने वालों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया है। राहुल गांधी ने कहा कि अब देश इस मुद्दे पर चुप नहीं रहेगा। उन्होंने मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लोगों से एकजुट होने का आह्वान किया।

    उन्होंने छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों सहित लोकतंत्र को लेकर चिंतित नागरिकों से रैली में पहुंचने की अपील की। राहुल गांधी के मुताबिक, वोट नागरिकों का अधिकार है और इसकी सुरक्षा के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। विपक्ष इस अभियान के जरिए मतदाता सूची की प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता का सवाल उठा रहा है।

    रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच इसकी तारीख पर भी विवाद सामने आया है। कार्यक्रम 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होना प्रस्तावित है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से इस तारीख पर पुनर्विचार करने की मांग की है। बीजेपी का कहना है कि 1 नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी है और इस दिन राजनीतिक रैली आयोजित करने से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं।

    बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस पर इस तारीख के चयन को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने सिख समुदाय और व्यापारियों की भावनाओं का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा। इस तरह रैली का मुद्दा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के साथ-साथ तारीख को लेकर राजनीतिक विवाद का विषय भी बन गया है।

    राहुल गांधी ने बीजेपी की आपत्ति के बीच अपने बयान में सत्तारूढ़ दल और उसके सहयोगियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि वे रैली का प्रचार जोर-शोर से कर रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि बीजेपी अगले सात दिनों तक भी इसी तरह प्रचार करती रहे, ताकि कार्यक्रम की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।

    ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली के जरिए विपक्ष मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर, बीजेपी ने आयोजन की तारीख को लेकर आपत्ति जताई है। ऐसे में 1 नवंबर को होने वाला यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया है। रैली में भागीदारी और दोनों पक्षों की आगे की प्रतिक्रियाओं पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।

  • दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को कांग्रेस की रैली, दिल्ली पुलिस ने जारी की एनओसी

    दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को कांग्रेस की रैली, दिल्ली पुलिस ने जारी की एनओसी

    नई दिल्ली । दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर 2026 को कांग्रेस की रैली आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम के आयोजन के लिए दिल्ली पुलिस ने अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी कर दिया है। इसके साथ ही रैली के आयोजन का रास्ता साफ हो गया है। कांग्रेस ने कार्यक्रम के लिए पहले दिल्ली पुलिस से अनुमति मांगी थी। इसके बाद निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर रैली आयोजित करने की मंजूरी दी गई।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, रामलीला मैदान में निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर 25 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी गई है। इस अवधि में संबंधित शर्तों का पालन करते हुए आयोजन किया जा सकेगा। कांग्रेस की प्रस्तावित रैली इसी समयावधि के दौरान 1 नवंबर को आयोजित होगी।

    दिल्ली पुलिस की ओर से जारी एनओसी कार्यक्रम के आयोजन से संबंधित अनुमति का हिस्सा है। रैली के लिए निर्धारित स्थान और समयावधि तय होने के बाद कांग्रेस को आयोजन की तैयारी करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, अनुमति के साथ जुड़ी अन्य शर्तों और व्यवस्थाओं का पालन करना आयोजकों के लिए जरूरी होगा।

    रामलीला मैदान दिल्ली में सार्वजनिक सभाओं और राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रमुख स्थलों में शामिल है। यहां रैली आयोजित करने के लिए संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेना आवश्यक होता है। कांग्रेस ने भी इसी प्रक्रिया के तहत दिल्ली पुलिस से मंजूरी मांगी थी। अब अनुमति मिलने के बाद 1 नवंबर को होने वाले कार्यक्रम की तैयारियां आगे बढ़ाई जा सकती हैं।

    अनुमति की अवधि 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक निर्धारित की गई है, जबकि कांग्रेस की रैली के लिए 1 नवंबर की तारीख तय है। इस तरह आयोजन निर्धारित समयसीमा के भीतर होगा। कार्यक्रम के दौरान प्रशासन की ओर से तय शर्तों का पालन करना होगा।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी में रैली के मुख्य वक्ताओं, इसमें शामिल होने वाले नेताओं की संख्या, आयोजन के उद्देश्य और कार्यक्रम के विस्तृत समय-सारिणी का उल्लेख नहीं है। इसलिए इन विषयों को लेकर कोई निश्चित जानकारी सामने नहीं आई है। अभी स्पष्ट रूप से यह बताया गया है कि कांग्रेस की रैली 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होगी और दिल्ली पुलिस ने इसके आयोजन के लिए एनओसी जारी की है।

    रैली से पहले आयोजकों को स्थल पर कार्यक्रम की व्यवस्थाएं निर्धारित शर्तों के अनुसार करनी होंगी। अनुमति की अवधि समाप्त होने से पहले आयोजन संबंधी गतिविधियां पूरी करनी होंगी। दिल्ली पुलिस की मंजूरी के बाद अब इस राजनीतिक कार्यक्रम की तारीख और स्थान औपचारिक रूप से तय हो गए हैं।

  • तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरे युवा, इंदौर में भाजपा की यात्रा में दिखा जोरदार उत्साह..

    तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरे युवा, इंदौर में भाजपा की यात्रा में दिखा जोरदार उत्साह..

     मध्य प्रदेश:  के इंदौर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से बड़ी तिरंगा यात्रा निकाली गई। टंट्या भील चौराहे से शुरू हुई इस यात्रा में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, युवा, नेता और आम नागरिक शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लेकर लोग देशभक्ति के नारे लगाते हुए शहर की सड़कों से आगे बढ़े।

    यात्रा के दौरान कई स्थानों पर तिरंगे नजर आए और माहौल में देशभक्ति का रंग दिखाई दिया। आयोजन में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और पदाधिकारी भी मौजूद रहे। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम को पार्टी की ओर से बड़े जनसंपर्क और संगठनात्मक सक्रियता के प्रदर्शन के तौर पर भी देखा गया।

    इंदौर में यह यात्रा ऐसे समय निकाली गई, जब शहर का टंट्या भील चौराहा पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां युवाओं की ओर से शिक्षा और परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया गया था। इसी पृष्ठभूमि में भाजपा की तिरंगा यात्रा को राजनीतिक संदेश से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

    हालांकि यात्रा में किसी एक मुद्दे को केंद्र में रखने के बजाय राष्ट्रभक्ति को प्रमुख विषय बनाया गया। कार्यकर्ताओं और युवाओं ने हाथों में तिरंगा लेकर यात्रा में हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण शहर में कई जगह आयोजन को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ।

    यात्रा में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अलावा विधायक मधु वर्मा, रमेश मेंदोला और भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा समेत कई नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आम नागरिक भी यात्रा का हिस्सा बने। इससे आयोजन का दायरा केवल पार्टी कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहा।

    तिरंगा यात्रा में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से दिखाई दी। बड़ी संख्या में युवा तिरंगा लेकर आगे बढ़ते नजर आए। भाजपा की ओर से युवाओं की इस भागीदारी को संगठन के प्रति समर्थन और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रभक्ति की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।

    टंट्या भील चौराहे पर हाल में हुए प्रदर्शन के बाद भाजपा की ओर से निकाली गई यह यात्रा शहर की राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रही। एक ओर जहां युवाओं से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन हुआ, वहीं दूसरी ओर भाजपा ने तिरंगा यात्रा के जरिए राष्ट्रभक्ति को केंद्र में रखते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

    यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। सड़क पर तिरंगा लेकर चल रहे लोगों और देशभक्ति के नारों से माहौल में उत्सव जैसा वातावरण बना रहा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए भाजपा ने संगठन की सक्रियता के साथ युवाओं और आम लोगों की भागीदारी को भी सामने रखा।

    इंदौर में स्वतंत्रता दिवस के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के बीच भाजपा की यह तिरंगा यात्रा राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से चर्चा में रही। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने आयोजन को व्यापक रूप दिया और शहर में राष्ट्रभक्ति से जुड़े कार्यक्रमों के बीच इसकी अलग पहचान बनी।

  • जम्मू-कश्मीर के रामबन में राष्ट्रीय राजमार्ग पर ई-रिक्शा तिरंगा रैली ने हर घर तिरंगा अभियान को जनभागीदारी का रूप दिया

    जम्मू-कश्मीर के रामबन में राष्ट्रीय राजमार्ग पर ई-रिक्शा तिरंगा रैली ने हर घर तिरंगा अभियान को जनभागीदारी का रूप दिया

    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में स्वतंत्रता दिवस से पहले हर घर तिरंगा अभियान के तहत आयोजित ई-रिक्शा तिरंगा रैली ने राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और नागरिक भागीदारी का संदेश दिया। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर निकली इस रैली में करीब 300 ई-रिक्शा और ऑटो चालकों ने हिस्सा लिया। रैली के दौरान वाहनों पर तिरंगा लहराता नजर आया और प्रतिभागियों ने देशभक्ति के नारे लगाए।

    रैली का उद्देश्य हर घर तिरंगा अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ना और नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के प्रति जागरूक करना रहा। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई कि वे अपने घरों पर तिरंगा लगाएं और राष्ट्रीय ध्वज को पूरी गरिमा एवं सम्मान के साथ प्रदर्शित करें।

    अतिरिक्त उपायुक्त वरुणजीत सिंह चरक के नेतृत्व में आयोजित यह रैली कैफेटेरिया मोड़ से शुरू हुई। इसके बाद ई-रिक्शा और ऑटो का काफिला राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-44 के साथ आगे बढ़ते हुए करोल क्षेत्र से गुजरा और जिला कार्यालय पहुंचकर इसका समापन हुआ। पूरे मार्ग पर तिरंगे से सजे वाहनों की मौजूदगी ने अभियान को अलग पहचान दी।

    रैली में प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने भी उत्साह के साथ भाग लिया। एआरटीओ वरुण भासिन, डिप्टी एसपी कुलदीप राज, मुख्यालय तहसीलदार रीजूता महाजन और नगर निकाय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरदर्शन जमवाल समेत कई अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

    अतिरिक्त उपायुक्त वरुणजीत सिंह चरक ने कहा कि जिले में हर घर तिरंगा अभियान के तहत कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने ई-रिक्शा और ऑटो रैली को जनभागीदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण बताते हुए लोगों से अपने घरों पर तिरंगा लगाने का आग्रह किया।

    उन्होंने कहा कि अभियान तभी प्रभावी रूप ले सकता है, जब इसमें समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित हो। प्रशासन का जोर इस बात पर रहा कि राष्ट्रीय ध्वज केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रत्येक परिवार तक सम्मानपूर्वक पहुंचे।

    रैली में शामिल करीब 300 ई-रिक्शा चालकों की भागीदारी ने स्थानीय परिवहन समुदाय को भी अभियान से जोड़ा। तिरंगा लेकर आगे बढ़ते वाहनों और देशभक्ति के नारों से राष्ट्रीय राजमार्ग का वातावरण उत्साहपूर्ण नजर आया। स्थानीय स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि राष्ट्रीय पर्व से जुड़े अभियान में समाज के विभिन्न वर्ग अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

    स्वतंत्रता दिवस से पहले रामबन जिले में कई स्तरों पर तिरंगा रैलियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ई-रिक्शा तिरंगा रैली इसी क्रम का हिस्सा रही, जिसमें प्रशासन और आम नागरिकों की संयुक्त भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान, देश के प्रति नागरिक जिम्मेदारी और स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

  • शानदार तेजी के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 965 अंक उछला तो निफ्टी 24,334 के पार; बैंकिंग और आईटी शेयरों ने दिखाई दमदार मजबूती

    शानदार तेजी के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 965 अंक उछला तो निफ्टी 24,334 के पार; बैंकिंग और आईटी शेयरों ने दिखाई दमदार मजबूती

    नई दिल्ली ।सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को बड़ी राहत दी। वैश्विक स्तर पर मिले-जुले संकेतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद घरेलू बाजार में खरीदारी का मजबूत माहौल देखने को मिला। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 964.58 अंकों की बढ़त के साथ 78,151.45 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 261.55 अंक चढ़कर 24,334.30 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त ने बाजार में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाया।

    कारोबार की शुरुआत भी सकारात्मक रही। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से ऊपर खुला और दिनभर खरीदारी के दम पर लगातार मजबूत बना रहा। कारोबार के दौरान यह 78,282.55 के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी ने भी शुरुआती बढ़त को बरकरार रखते हुए दिन के दौरान 24,367.30 का इंट्रा-डे हाई बनाया। बाजार बंद होने तक प्रमुख सूचकांक अपने ऊंचे स्तरों के करीब बने रहे, जिससे पूरे कारोबारी सत्र में सकारात्मक रुझान देखने को मिला।

    बाजार की तेजी में सबसे बड़ी भूमिका बैंकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों ने निभाई। निजी बैंकों में मजबूत खरीदारी के कारण निफ्टी प्राइवेट बैंक सूचकांक सबसे अधिक बढ़त दर्ज करने वाला सेक्टर रहा। इसके अलावा आईटी, बैंकिंग, रियल्टी और ऑटो सेक्टर में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बड़े शेयरों ने प्रमुख सूचकांकों को मजबूती प्रदान की। निफ्टी 50 में टेक महिंद्रा, टीसीएस, कोटक महिंद्रा बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर प्रमुख बढ़त दर्ज करने वालों में शामिल रहे।

    हालांकि बाजार का रुख पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा। फार्मा, हेल्थकेयर, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में कुछ दबाव देखने को मिला। इसी तरह मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित कमजोरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर इन वर्गों पर देखने को मिला, लेकिन बड़े शेयरों में मजबूत खरीदारी ने पूरे बाजार को सकारात्मक दिशा दी।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कई कारोबारी सत्रों से सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद बाजार ने महत्वपूर्ण तकनीकी ब्रेकआउट दिया है। इसे निवेशकों के बढ़ते भरोसे और मजबूत बाजार धारणा का संकेत माना जा रहा है। तकनीकी संकेतकों के अनुसार निफ्टी अभी भी अपने प्रमुख मूविंग एवरेज के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि आरएसआई में भी सकारात्मक संकेत दिखाई दिए हैं। इससे निकट भविष्य में बाजार की मजबूती बरकरार रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है तो निफ्टी आने वाले कारोबारी सत्रों में 24,800 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। वहीं 24,200 का स्तर निकट अवधि के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर से नीचे जाता है तो कुछ समय के लिए सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है। फिलहाल घरेलू आर्थिक संकेतकों, कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी, क्योंकि यही कारक आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • अमेरिका-ईरान शांति समझौते से बाजार में लौटा भरोसा, सेंसेक्स 1200 अंक उछला, निफ्टी 24 हजार के करीब पहुंचा

    अमेरिका-ईरान शांति समझौते से बाजार में लौटा भरोसा, सेंसेक्स 1200 अंक उछला, निफ्टी 24 हजार के करीब पहुंचा

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को घरेलू बाजारों ने मजबूत शुरुआत की और प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स तथा निफ्टी में डेढ़ प्रतिशत के आसपास की तेजी दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव कम होने की संभावना ने निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल तैयार किया, जिसका लाभ भारतीय बाजार को भी मिला।

    कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों में खरीदारी का उत्साह देखने को मिला। बीएसई सेंसेक्स ने करीब 1,200 अंकों की मजबूती के साथ कारोबार शुरू किया, जबकि एनएसई निफ्टी भी लगभग 24 हजार अंकों के स्तर के करीब पहुंच गया। शुरुआती घंटों में दोनों प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ हरे निशान में कारोबार करते रहे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर जोखिम कम होने की धारणा ने निवेशकों को इक्विटी बाजारों की ओर आकर्षित किया है।

    विशेष रूप से व्यापक बाजार में भी मजबूती देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अच्छी खरीदारी दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि तेजी केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। निवेशकों ने विभिन्न क्षेत्रों में सक्रियता दिखाई और बाजार का समग्र रुझान सकारात्मक बना रहा।

    सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो धातु, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं से जुड़े शेयरों में उल्लेखनीय तेजी रही। वित्तीय सेवाओं, तेल एवं गैस तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर, फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र में सीमित दबाव दर्ज किया गया, हालांकि इससे बाजार की कुल सकारात्मक धारणा पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।

    बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबर रही। दोनों देशों के बीच शांति समझौते की दिशा में हुई प्रगति को वैश्विक निवेशकों ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के संचालन को लेकर बनी अनिश्चितता दूर होने से ऊर्जा आपूर्ति संबंधी चिंताएं भी कम हुई हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके सुचारु संचालन से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता आने की उम्मीद बढ़ी है।

    इस सकारात्मक घटनाक्रम का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई। तेल की कीमतों में कमी को भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। इससे आयात बिल पर दबाव घट सकता है और महंगाई नियंत्रण में रखने के प्रयासों को भी समर्थन मिल सकता है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में शांति प्रक्रिया आगे बढ़ती है और ऊर्जा आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए परिस्थितियां और अधिक अनुकूल हो सकती हैं। कम तेल कीमतों का लाभ उद्योगों, परिवहन क्षेत्र और उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। साथ ही आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति से जुड़े अनुमानों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

    फिलहाल बाजार की दिशा वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर बनी हुई है, लेकिन सप्ताह की शुरुआत जिस मजबूती के साथ हुई है, उसने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान समझौते से जुड़े आगे के घटनाक्रम और वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति निवेशकों की नजर में प्रमुख कारक बने रहेंगे।