Tag: Ram Mandir Donation Theft

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी: अविनाश 85 बार रकम चोरी करते दिखा, 700 खाते खंगाले, चंपत राय के नाम एक भी नहीं

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी: अविनाश 85 बार रकम चोरी करते दिखा, 700 खाते खंगाले, चंपत राय के नाम एक भी नहीं


    अयोध्या।
    राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी के मामले में दाखिल पुलिस चार्जशीट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच के आधार पर आरोपियों की भूमिका का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। पुलिस के मुताबिक, अविनाश शुक्ला उर्फ शनि 85 बार चढ़ावे की रकम चोरी करने और चार बार अन्य आरोपियों की मदद करते कैमरे में दिखाई दिया। जांच में करीब 700 बैंक खातों को खंगाला गया, लेकिन चंपत राय के नाम कोई निजी बैंक खाता नहीं मिला।

    अविनाश 85 बार, करुणेश 2 बार रकम हटाते दिखा
    चार्जशीट के अनुसार, मंदिर परिसर के गणना कक्ष में चढ़ावे की रकम चोरी की कुल 105 घटनाएं सीसीटीवी फुटेज में सामने आईं। इनमें सबसे ज्यादा 85 घटनाओं में अविनाश शुक्ला उर्फ शनि की भूमिका दर्ज होने का दावा किया गया है। वह चार अन्य मौकों पर सह-अभियुक्तों की मदद करते भी दिखाई दिया।

    पुलिस के मुताबिक, करुणेश पांडेय दो बार रकम चोरी करते और 68 बार अन्य आरोपियों की मदद करते दिखाई दिया। मनीष कुमार यादव 16 बार चढ़ावे की रकम अपने पास रखते और 19 बार अन्य आरोपियों का सहयोग करते कैमरे में दर्ज हुआ।

    इसी तरह रमाशंकर मिश्र एक बार रकम हटाकर अपने पास रखते दिखाई दिए। लवकुश मिश्रा एक बार चोरी करते और 52 बार अन्य आरोपियों की मदद करते नजर आए। वहीं अनुकल्प मिश्र 56 बार अन्य सह-अभियुक्तों को चढ़ावे की रकम चोरी में सहयोग करते दिखाई दिए।

    पुलिस की चार्जशीट में इन घटनाओं को सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दर्ज किया गया है। ये फिलहाल अभियोजन के आरोप और जांच के निष्कर्ष हैं; आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद होगा।

    CDR में लगातार संपर्क, चैट में कैश के बंडलों का जिक्र
    जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड को भी अहम साक्ष्य माना गया है। पुलिस का दावा है कि संबंधित अवधि में आरोपियों के बीच लगातार संपर्क था। सीसीटीवी, डिजिटल, मौखिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को मिलाकर चार्जशीट में आपसी समन्वय और कथित आपराधिक षड्यंत्र की बात कही गई है।

    पुलिस के मुताबिक, अनुकल्प मिश्र के मोबाइल फोन से अविनाश शुक्ला उर्फ शनि और लवकुश मिश्र के साथ चढ़ावे की रकम को लेकर किए गए टेक्स्ट संदेश मिले। इनमें कैश के बंडलों को रखने, छिपाने, अदला-बदली करने और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने से संबंधित बातचीत का उल्लेख है।

    चार्जशीट में 25 से 30 जुलाई 2026 के सीसीटीवी फुटेज का भी जिक्र है। इसमें सुभाष श्रीवास्तव की मौजूदगी में गणना कक्ष में चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान अविनाश शुक्ला उर्फ शनि को रकम हटाकर अपने पास रखते हुए दिखने का दावा किया गया है।

    700 बैंक खातों की जांच, चंपत राय के नाम खाता नहीं
    चढ़ावा चोरी की जांच के दौरान पुलिस ने करीब 700 बैंक खातों का लेनदेन खंगाला। इनमें ट्रस्टियों, आरोपियों, संदिग्धों, गणना कर्मियों और ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों के खाते शामिल थे। ट्रस्ट के बैंक खातों को भी जांच के दायरे में रखा गया।

    जांच का मकसद यह पता लगाना था कि संदिग्ध रकम किन खातों में गई और उसका आरोपियों या अन्य संबंधित लोगों से कोई संभावित संबंध था या नहीं। पुलिस ने संदिग्धों के खातों में रकम की आवाजाही की भी पड़ताल की।

    चार्जशीट में डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के बैंक खातों के लेनदेन की तुलना अन्य आरोपियों और संदिग्धों के खातों से किए जाने का भी उल्लेख है। वहीं, विवेचना से जुड़े तथ्य के तौर पर दर्ज किया गया है कि चंपत राय के नाम कोई निजी बैंक खाता नहीं मिला।

    चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव आरोपी नहीं, गवाह
    चार्जशीट का एक अहम पहलू यह भी है कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया है। उन्हें गवाह के तौर पर शामिल किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, चार्जशीट में कुल 133 गवाहों का उल्लेख है। इसी बिंदु को लेकर अदालत में अधिवक्ता संघ ने पुलिस की विवेचना पर सवाल उठाए हैं।

    अधिवक्ता संघ ने जांच पर उठाए सवाल
    चार्जशीट दाखिल होने के बाद बुधवार को विशेष अदालत में अधिवक्ता संघ की ओर से विवेचना पर आपत्तियां दर्ज कराई गईं। संघ का कहना है कि साक्ष्य के तौर पर 10 अधिवक्ताओं के शपथपत्र दिए गए थे, लेकिन विवेचक ने उन पर कार्रवाई नहीं की।

    अधिवक्ता संघ ने यह भी सवाल उठाया कि एसआईटी के गठन से पहले आरोपियों से बरामद रुपये जिस व्यक्ति के पास रखे गए थे, उसके खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की गई।

    संघ की ओर से दावा किया गया कि चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी बनाने के बजाय गवाह बनाया गया, जबकि ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन को भी आरोपी नहीं बनाया गया। संघ का कहना है कि इनके खिलाफ प्रार्थनापत्र के जरिए साक्ष्य दिए गए थे, लेकिन विवेचक ने उन पर संज्ञान नहीं लिया।

    अधिवक्ता संघ ने इन लोगों के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल करने की मांग की है। इसके अलावा बरामदगी के समय और घटनास्थल के नक्शे को लेकर भी चार्जशीट पर सवाल उठाए गए हैं।

    अदालत में आगे होगी आरोपों और साक्ष्यों की पड़ताल
    पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डाटा, CDR, बैंकिंग लेनदेन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उनकी भूमिका बताई गई है। वहीं, चार्जशीट में शामिल आरोपों और अधिवक्ता संघ की आपत्तियों पर अंतिम फैसला अदालत को उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर करना है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा एक्शन, 8 आरोपियों के 54 रिश्तेदार और करीबी जांच के घेरे में; संपत्तियों का मांगा गया पूरा ब्योरा

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा एक्शन, 8 आरोपियों के 54 रिश्तेदार और करीबी जांच के घेरे में; संपत्तियों का मांगा गया पूरा ब्योरा


    नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर(Ayodhya Ram Mandir) के चढ़ावे में कथित चोरी और आर्थिक अनियमितताओं के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों के बाद अब उनके रिश्तेदार और करीबी भी जांच एजेंसियों की नजर में आ गए हैं। अयोध्या पुलिस और एसआईटी ने लखनऊ में आरोपियों तथा उनसे जुड़े 54 लोगों की संपत्तियों की पड़ताल शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित आर्थिक अनियमितताओं से जुड़ी रकम का इस्तेमाल कहीं जमीन मकान फ्लैट या दूसरी अचल संपत्तियां खरीदने में तो नहीं किया गया।

    जानकारी के मुताबिक आठ नामजद आरोपियों के साथ उनके 54 रिश्तेदारों और करीबियों के नाम की सूची लखनऊ प्रशासन को भेजी गई है। अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की ओर से लखनऊ के जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में पिछले दो वर्षों के दौरान आरोपियों और उनके परिजनों के नाम दर्ज या नामांतरण की गई कृषि और गैर कृषि भूमि समेत दूसरी अचल संपत्तियों का विवरण मांगा गया है। पत्र के साथ क्षेत्राधिकारी अयोध्या की रिपोर्ट भी भेजी गई है, जिसमें संबंधित लोगों की संपत्तियों की विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

    जांच का दायरा केवल राजस्व रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रखा गया है। लखनऊ की संबंधित तहसीलों के एसडीएम और निबंधन कार्यालयों के सब रजिस्ट्रारों से भी रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं। इसके अलावा लखनऊ विकास प्राधिकरण, नगर निगम और आवास विकास परिषद से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि पिछले दो वर्षों में सूची में शामिल लोगों ने जमीन, मकान, फ्लैट या किसी अन्य अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री की है या नहीं।

    एसआईटी यह भी जोड़ने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों के कथित आर्थिक लेनदेन और संपत्तियों में हुई गतिविधियों के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं। जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि आरोपियों या उनके करीबियों की संपत्ति में हाल के वर्षों में अचानक या असामान्य बढ़ोतरी हुई है या नहीं। अगर रिकॉर्ड में कोई संदिग्ध लेनदेन सामने आता है तो वह मामले की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।

    इस मामले में आठ प्रमुख आरोपियों के अलावा 54 रिश्तेदारों और करीबियों को जांच के दायरे में लाया गया है। सूची में शामिल लोगों के नाम और पते के आधार पर अलग-अलग विभागों से जानकारी जुटाई जा रही है। अयोध्या के साथ लखनऊ और दूसरे जिलों से जुड़े संपत्ति रिकॉर्ड भी जांचे जा रहे हैं। जांच एजेंसियां कथित गबन की रकम के संभावित इस्तेमाल और उसके स्रोत के बीच कड़ी तलाश रही हैं।

    इसी बीच आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के मामले में भी अदालत की कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है। विवेचना के दौरान बंद किए गए पेंशन खाते को दोबारा खोलने के लिए आरोपी की ओर से अदालत में प्रार्थना पत्र दिया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने विवेचक और सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी को 13 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। अदालत ने बैंक खाते में आई धनराशि के सत्यापन से संबंधित रिपोर्ट और आवश्यक कार्रवाई पूरी कर आख्या पेश करने को कहा है।

    अदालत के आदेश के मुताबिक आरोपी के जेल जाने के बाद खाते में आई पेंशन राशि से जुड़े तथ्य भी जांच का हिस्सा हैं। अब विवेचक को बैंक रिकॉर्ड के सत्यापन से संबंधित स्थिति स्पष्ट करनी होगी। ऐसे में राम मंदिर दान चोरी मामले में एक तरफ एसआईटी आरोपियों और उनके करीबियों की संपत्तियों की जांच आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ अदालत में बैंक खातों और धनराशि से जुड़े पहलुओं पर भी सुनवाई जारी है। आने वाले दिनों में संपत्ति और वित्तीय रिकॉर्ड से सामने आने वाले तथ्य इस मामले की जांच की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकते हैं।

  • उज्जैन से दिग्विजय सिंह का केंद्र और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा प्रहार बोले चंपत राय पर हो केस दर्ज

    उज्जैन से दिग्विजय सिंह का केंद्र और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा प्रहार बोले चंपत राय पर हो केस दर्ज


    मध्यप्रदेश । उज्जैन दौरे पर पहुंचे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले को लेकर केंद्र सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की। दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किया गया था इसलिए ट्रस्ट की जवाबदेही भी केंद्र सरकार की बनती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चांदी की ईंटों जेवरात नकदी और विदेशी चंदे के प्रबंधन में गड़बड़ियां हुई हैं जिनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

    उज्जैन के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन संगठनों का धर्म और धार्मिक कार्यों से कोई सरोकार नहीं है बल्कि उनका उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना है। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर के नाम पर सनातन समाज की भावनाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने चंपत राय को संघ का प्रचारक बताते हुए कहा कि उन्हें धार्मिक परंपराओं से कोई संबंध नहीं है और उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

    दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि धार्मिक परंपराओं का पालन नहीं किया गया और पूजा की प्रक्रिया शास्त्रीय नियमों के अनुरूप नहीं थी। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले में ट्रस्ट के सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका की जांच कराई जाए और आवश्यक होने पर उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाए।

    उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल प्रेस वार्ताओं तक सीमित नहीं रखेगी बल्कि गांव गांव और घर घर तक पहुंचाएगी। उन्होंने बताया कि उज्जैन जिले की 609 पंचायतों में कांग्रेस ने दल और मंडल स्तर पर समितियां गठित की हैं जो लोगों के बीच जाकर राम मंदिर दान चोरी के मामले की जानकारी देंगी और पूरे घटनाक्रम को जनता के सामने रखेंगी।

    प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं और मंदिर की जमीन को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि महाकाल मंदिर की जमीन आरएसएस से जुड़ी संस्थाओं को दी गई और वहां गेस्ट हाउस बनाए गए जबकि साधु संतों की उपेक्षा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान व्यवस्था में आम श्रद्धालुओं और संत समाज को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    इंदौर उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन के नामकरण को लेकर चल रहे विवाद पर भी उन्होंने अपनी राय रखी। उनका कहना था कि इस क्षेत्र के नाम में इंदौर का नाम पहले होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को सलाह देते हुए कहा कि प्रशासनिक स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों की जिम्मेदारी आखिरकार सरकार पर ही आती है इसलिए अधिकारियों पर प्रभावी नियंत्रण रखना जरूरी है।

    प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने कुछ दस्तावेज भी दिखाए और दावा किया कि उनके पास जमीन घोटाले से जुड़े नए साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की पूरी जांच के बाद संबंधित लोगों के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे और पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।