Tag: Ram Mandir Donation

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर जनता में उबाल, भोपालवासियों ने कहा- यह सिर्फ पैसे नहीं आस्था की चोरी, दोषियों को मिले उम्रकैद

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर जनता में उबाल, भोपालवासियों ने कहा- यह सिर्फ पैसे नहीं आस्था की चोरी, दोषियों को मिले उम्रकैद


    नई दिल्ली । अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से कथित रूप से रकम गायब किए जाने के मामले ने पूरे देश में नाराजगी पैदा कर दी है। पुलिस जांच के अनुसार दानपात्रों से निकाली गई नकदी में 42 दिनों के दौरान कई बार हेराफेरी किए जाने के आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियां मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और अब तक कई कर्मचारियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। इस घटना के बाद लोगों में गहरा आक्रोश है और इसे केवल धन की चोरी नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट माना जा रहा है।

    इसी मुद्दे पर भोपाल में लोगों की राय भी सामने आई। अधिकांश लोगों ने कहा कि मंदिर में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ दान करते हैं। ऐसे में यदि कोई उस चढ़ावे में हेराफेरी करता है तो वह केवल कानून नहीं बल्कि धार्मिक विश्वास का भी अपराधी है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

    कई लोगों ने मांग की कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों को आजीवन कारावास जैसी सख्त सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक संस्थानों की पवित्रता से खिलवाड़ करने का साहस न कर सके। कुछ लोगों ने कहा कि ऐसे कृत्य करने वालों को समाज में कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए क्योंकि उन्होंने लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

    कुछ नागरिकों ने भरोसा जताया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। वहीं कुछ लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर मिलीभगत हुई है तो उससे जुड़े सभी लोगों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

    इस बीच जांच एजेंसियां पूरे मामले के दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी तरह की कथित अनियमितता को लोग बेहद गंभीरता से देख रहे हैं। आम लोगों का मानना है कि मंदिरों में आने वाले दान की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास हमेशा कायम रहे।

  • राम मंदिर चंदे पर दिग्विजय का बड़ा अभियान! महाकाल से रामलला तक 1000 किलोमीटर पैदल यात्रा का ऐलान

    राम मंदिर चंदे पर दिग्विजय का बड़ा अभियान! महाकाल से रामलला तक 1000 किलोमीटर पैदल यात्रा का ऐलान


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे की पारदर्शिता को लेकर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक अभियान शुरू करने की घोषणा की है। भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर से उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर से अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर तक लगभग 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली जाएगी। उनका कहना है कि इस यात्रा का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का प्रचार नहीं बल्कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर के श्रद्धालुओं से जुटाए गए चंदे का सार्वजनिक हिसाब मांगना होगा।

    दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह पदयात्रा पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान कांग्रेस का प्रचार नहीं किया जाएगा और वे स्वयं फेसबुक एक्स सहित किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यह अभियान केवल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग के लिए होगा ताकि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखा जा सके।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने भी राम मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार रुपए का योगदान दिया था। उनके पास आज भी चंदे की रसीद और चेक की प्रति सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि देशभर के करोड़ों लोगों ने भगवान राम के प्रति आस्था के साथ दान दिया था इसलिए यह जानना उनका अधिकार है कि उस धन का उपयोग किस प्रकार किया गया।

    उन्होंने घोषणा की कि 5 या 6 जुलाई को वरिष्ठ अधिवक्ताओं से चर्चा करने के बाद अयोध्या जाकर अदालत में याचिका दायर करेंगे। उनके अनुसार अदालत से अनुरोध किया जाएगा कि राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे का पूरा वित्तीय विवरण सार्वजनिक कराया जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

    दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि उनकी पदयात्रा में उन सभी लोगों का स्वागत होगा जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा से जुड़े लोग यदि चंदे की पारदर्शिता चाहते हैं तो वे इस यात्रा में शामिल हो सकते हैं। यात्रा के दौरान वे अपनी दान रसीद और चेक की प्रतियां भी साथ लेकर चलेंगे ताकि यह संदेश दिया जा सके कि दानदाताओं को अपने योगदान का हिसाब मांगने का पूरा अधिकार है।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े कुछ ट्रस्टों की आर्थिक पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उज्जैन के महाकाल मंदिर क्षेत्र में ट्रस्ट द्वारा विकसित गेस्ट हाउस और होटल परियोजना की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी भी धार्मिक ट्रस्ट को जनता से चंदा मिलता है तो उसकी आय और खर्च का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि यदि अदालत में वित्तीय अनियमितता साबित होती है तो वे अपना दान वापस लेकर किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को दान कर देंगे। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि अपने घर के बाहर एक तख्ती लगाएंगे जिस पर लिखा होगा कि चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है। दिग्विजय सिंह के इस ऐलान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होने की संभावना है।