Tag: Ram Mandir Trust

  • अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक, 3 नए सदस्य बनाए गए, CEO के नाम पर मंथन जारी

    अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक, 3 नए सदस्य बनाए गए, CEO के नाम पर मंथन जारी

    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक अयोध्या की मणिरामदास छावनी में चल रही है। बैठक में ट्रस्ट के लिए तीन नए सदस्यों की घोषणा की गई है। इनमें अयोध्या के मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के महेश भागचंदका और अयोध्या की निर्मला यादव शामिल हैं। बैठक में अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि, ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती सहित अन्य ट्रस्टी मौजूद हैं।

    राम मंदिर के पहले CEO के नाम पर अंतिम मंथन
    बैठक का सबसे अहम एजेंडा राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की नियुक्ति है। CEO के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप चुकी है। बताया जा रहा है कि कमेटी ने तीन नामों का पैनल ट्रस्ट के सामने रखा है। अब ट्रस्ट इन नामों पर चर्चा कर अंतिम नाम तय कर सकता है। बैठक के दूसरे चरण में ट्रस्ट से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा।

    पूर्व IPS राजेश पांडेय की दावेदारी सबसे मजबूत बताई जा रही
    CEO पद की चर्चा में पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। उनकी दावेदारी की खास वजह सिर्फ पुलिस और प्रशासनिक अनुभव नहीं है। वह लखनऊ के अलीगंज स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर ट्रस्ट के सचिव भी हैं। इस वजह से उन्हें मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थान के प्रबंधन का प्रत्यक्ष अनुभव भी हासिल है। राम मंदिर CEO के लिए यह अनुभव उनकी प्रोफाइल को अलग महत्व देता है।

    CEO के सामने होंगी कई बड़ी जिम्मेदारियां
    राम मंदिर CEO की भूमिका केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं होगी। अयोध्या में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या के बीच सुरक्षा व्यवस्था, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय, VIP और आम श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं तथा मंदिर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स का प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां भी CEO के सामने रहेंगी।

    इसी वजह से सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की जटिलताओं का अनुभव रखने वाले राजेश पांडेय की दावेदारी को खास माना जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला ट्रस्ट को ही करना है।

    बैठक में ये प्रमुख ट्रस्टी और आमंत्रित सदस्य मौजूद
    1. महंत नृत्य गोपाल दास
    2. कमलनयन दास
    3. स्वामी गोविंद देव गिरी
    4. डॉ. कृष्ण मोहन
    5. दिनेंद्र दास जी महाराज
    6. दिनेश चंद्र जी
    7. बजरंग बांगड़ा
    8. जगदीश आफले
    9. राज गोपाल मिनियार
    10. समीर पांडा

    ट्रस्ट डीड और नियमावली में संशोधन पर भी चर्चा
    CEO की नियुक्ति के अलावा ट्रस्ट की डीड और न्यास नियमावली में संशोधन सहित कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है। बैठक दोपहर 3 बजे ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में होनी है। अधिकांश ट्रस्टी अयोध्या पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ सदस्य ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल होंगे।

    बैठक से पहले ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि और अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन ने रामलला के दरबार में पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। दोनों ने मंदिर की मौजूदा व्यवस्थाओं का जायजा लेने के बाद बैठक की तैयारियों में हिस्सा लिया।

    चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र की वापसी पर भी नजर
    बैठक में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र को लेकर भी निर्णय अहम माना जा रहा है। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया था। हालांकि पिछले कुछ समय में दोनों की सामाजिक गतिविधियां बढ़ी हैं।

    ऐसे में ट्रस्ट में उनकी संभावित वापसी को लेकर अटकलें भी तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच की मौजूदा स्थिति में चंपत राय को लेकर राहत की बात सामने आने के बाद उनके दोबारा ट्रस्ट से जुड़ने की संभावना पर चर्चा हो सकती है। डॉ. अनिल मिश्र को लेकर ट्रस्ट क्या फैसला करता है, इस पर भी नजर रहेगी। अंतिम तस्वीर बैठक के बाद ही साफ होगी।

    संघ और VHP पदाधिकारियों के अयोध्या पहुंचने से बढ़ी हलचल
    बैठक से पहले संघ और विश्व हिंदू परिषद के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के भी अयोध्या पहुंचने की सूचना है। VHP महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा, संरक्षक दिनेश चंद्र और संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल सिंह के अयोध्या पहुंचने की जानकारी है। संघ और VHP पदाधिकारियों ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि से मुलाकात भी की। बंद कमरे में हुई इस बैठक के बाद ट्रस्ट की अहम बैठक को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

  • यूपी: राम मंदिर ट्रस्ट की CEO सर्च कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट, पैनल में शामिल नामों पर अब ट्रस्ट करेगा फैसला

    यूपी: राम मंदिर ट्रस्ट की CEO सर्च कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट, पैनल में शामिल नामों पर अब ट्रस्ट करेगा फैसला

    लखनऊ। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। CEO के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी। अब ट्रस्ट पैनल में शामिल नामों पर विचार कर अंतिम नाम तय करेगा।

    राम मंदिर परिसर में हुई बैठक
    राम मंदिर परिसर में हुई बैठक के बाद सर्च कमेटी के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज को रिपोर्ट सौंपी। इस दौरान ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे। तीन सदस्यीय सर्च कमेटी में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हावड़े भी शामिल हैं।

    CEO के लिए नामों का पैनल तैयार
    जानकारी के मुताबिक, चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद कमेटी ने CEO पद के लिए नामों का पैनल तैयार किया है। अब ट्रस्ट इस पैनल में शामिल नामों पर चर्चा करेगा और किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लगाएगा। ट्रस्ट की 2 सितंबर को अहम बैठक प्रस्तावित है। इसी बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO के नाम की घोषणा होने की संभावना है।

    मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में होगी अहम भूमिका
    CEO की नियुक्ति को राम मंदिर के संचालन और प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नियुक्ति के बाद CEO मंदिर की प्रशासनिक और प्रबंधकीय व्यवस्थाओं के संचालन में अहम भूमिका निभाएगा। अब सभी की निगाहें 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक पर टिकी हैं, जहां राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO के नाम पर अंतिम फैसला हो सकता है।

  • Ayodhya : राम मंदिर ट्रस्ट अब हर माह वेबसाइट पर अपलोड करेगा ऑडिट रिपोर्ट, चढ़ावा चोरी के बाद बदली कार्यप्रणाली..

    Ayodhya : राम मंदिर ट्रस्ट अब हर माह वेबसाइट पर अपलोड करेगा ऑडिट रिपोर्ट, चढ़ावा चोरी के बाद बदली कार्यप्रणाली..


    अयोध्या।
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) ने चढ़ावा चोरी प्रकरण (Offering Theft Incident) के बाद अपनी कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। अब ट्रस्ट प्रत्येक माह की ऑडिट रिपोर्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करेगा, ताकि देश-विदेश के करोड़ों रामभक्त मंदिर की आय-व्यय और ट्रस्ट की गतिविधियों की जानकारी सीधे देख सकें। इसके साथ ही वेबसाइट पर ट्रस्ट के प्रशासनिक निर्णयों, निर्माण कार्यों और अन्य प्रमुख गतिविधियों का भी नियमित अपडेट किया जाएगा।

    अब तक ट्रस्ट की वित्तीय ऑडिट वर्ष में केवल एक बार वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद तैयार की जाती थी। यह रिपोर्ट ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्टियों के समक्ष प्रस्तुत की जाती थी, लेकिन आम श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध नहीं होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद हर महीने की आय, व्यय, दान, खर्च और वित्तीय स्थिति का विवरण वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा। इससे ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

    सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद लिया गया है। ट्रस्ट चाहता है कि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो तथा मंदिर के संचालन और वित्तीय व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार की शंका की स्थिति न बने। इसी उद्देश्य से वेबसाइट को सूचना का प्रमुख माध्यम बनाया जा रहा है।

    नई व्यवस्था के तहत वेबसाइट पर केवल ऑडिट रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट की प्रमुख बैठकों, प्रशासनिक फैसलों, निर्माण कार्यों की प्रगति, नई सुविधाओं, धार्मिक आयोजनों और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की जानकारी भी नियमित रूप से अपडेट की जाएगी। इससे देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु भी ट्रस्ट की कार्यप्रणाली से सीधे जुड़ सकेंगे।

  • चंपत राय ने राम भक्तों के नाम लिखी चिट्ठी, जानिए अपने ऊपर लगे आरोपों पर क्‍या कहा?

    चंपत राय ने राम भक्तों के नाम लिखी चिट्ठी, जानिए अपने ऊपर लगे आरोपों पर क्‍या कहा?


    लखनऊ । ऐसा लग रहा था कि ट्रस्ट की मीटिंग में चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद अयोध्या का माहौल शांत पड़ जाएगा, माहौल थोड़ा शांत होता दिख भी रहा था तभी चंपत राय ने अचानक पूरे माहौल को गर्मा दिया.

    SIT की शुरुआती रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के एक दिन बाद चंपत राय का एक सोशल मीडिया पोस्ट सामने आया, जिसमें उनकी अब तक की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया थी. इस ट्वीट में राम भक्तों के नाम उनकी एक चिट्ठी थी. उस चिट्ठी में उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को मनगढ़ंत करार दिया और कहा कि जल्द ही वो अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का क्रमवार ढंग से जवाब देंगे. उन्होंने अपने 41 वर्षों के प्रचारक जीवन और 1991 से अयोध्या राम मंदिर से जुड़े होने का जिक्र किया.

    चंपत राय से जुड़ी दूसरी खबर उनके एक्स पोस्ट के बाद तुरंत ही सामने आ गई. एसआईटी के सामने जो उन्होंने अपना लिखित बयान दिया था. इसका एक हिस्सा लीक हो गया और इस लीक पेपर में चंपत राय ने सीधे-सीधे दान पात्रों में रकम की गिनती और बैंक में जमा होने के जिम्मेदारियों से अपने को अलग कर दिया.

    उन्होंने कहा कि बैंक के साथ जो एमओयू साइन हुआ है. उसमें उनका साइन ही नहीं है. बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर कैसे नोट गिनने की प्रक्रिया में फेरबदल किया. कैसे उसकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं है और वह इस पूरे प्रॉसेस का हिस्सा भी नहीं थे.

    उन्होंने इशारों में चढ़ावा चोरी और दान पत्र की गड़बड़ियों को अनिल मिश्रा के मत्थे डाल दिया है क्योंकि बैंक के साथ हुए एमओयू के सिग्नेटरी अनिल मिश्रा ही है और चंपत राय को इसकी जानकारी भी नहीं थी. चंपत राय ने अब नए सिरे से पूरे माहौल को गरमा दिया है अब आरोप और प्रत्यारोपों का नया दौर शुरू हो गया है जिससे ट्रस्ट के भीतर नए सिरे से कलह शुरू हो सकता है. पूरे मामले में अब अनिल मिश्रा फंसते हुए दिखाई दे रहे हैं क्योंकि एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में भी अनिल मिश्रा पर गंभीर सवाल खड़े हैं और अब उनको नोटिस भेज कर उसे पूछताछ की तैयारी हो रही है.

    उधर, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने मीडिया से बातचीत में चंपत राय को निष्कलंक लेकिन जिद्दी बताते हुए यह माना कि उनके स्तर से लापरवाही जैसी गलतियां हुई है, लेकिन वह दोषी नहीं हो सकते उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है. एक तरफ ट्रस्ट की बैठक में अब तक के मंदिर के लिए किए गए चंपत राय के काम को सभी ने खुलकर सराहा दूसरी तरफ SIT की शुरुआती रिपोर्ट में क्लीन चिट मिल जाने पर चंपत राय ने इस पूरे मुद्दे पर अपना लंबा मौन तोड़ दिया है.

    जिस तरीके से ट्रस्ट ने चंपत राय का बचाव किया है और SIT में क्लीनचिट मिलती दिखाई दे रही है. उससे साफ है कि अब चंपत राय भी खुलकर सामने आएंगे. अब बस इंतजार एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट का है. इससे पहले ट्रस्ट की बैठक को लेकर कई मतभेद उभरे थे मसलन ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास नाराज थे, अब तक उन्हें ट्रस्ट के लोग पूछते तक नहीं थे लेकिन जब चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफा की बात आई तो उन्हें मनाकर बैठक में लाना पड़ा.

    राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के पहले छोटी छावनी में हाई वोल्टेज ड्रामा चला था. अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को मनाने पहुंचे बड़े पदाधिकारी, घंटों मंथन हुआ तब महंत नृत्य गोपाल दास आने को तैयार हए थे. यही नहीं बाहर से आने वाले ट्रस्ट के कई साधु संतों को भी मुश्किल से इस मीटिंग के लिए तैयार किया गया. बैठक से पहले महंत नृत्य गोपाल दास की ओर से एक पत्र भी जारी किया गया, जिसमें उन्होंने दान चोरी की घटना पर गहरा आघात व्यक्त किया और कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है कि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी.

    बैठक में ट्रस्ट सदस्य और निर्मोही अखाड़े के महंत महंत दिनेंद्र दास की मौजूदगी को लेकर भी दिनभर सस्पेंस बना रहा, लेकिन वे बैठक में शामिल हुए. SIT रिपोर्ट सामने आने के बाद अब ट्रस्ट से जुड़े लोग थोड़े निश्चित हो गए हैं क्योंकि चंपत राय को लगभग क्लीन चिट मिल चुकी है और ट्रस्ट ने चढ़ावे में उपहार स्वरूप मिले सभी आभूषण और कीमती उपहार का पूरा रिकॉर्ड भी जारी कर दिया है, जिसके बाद उपहार वाले चढ़ावों के चोरी की चर्चा बंद हो चुकी है हालांकि अनिल मिश्रा सवालों के घेरे में हैं जांच के बाद उन पर गाज गिर सकती है.

    नए तरीके से ट्रस्ट में होने वाले बदलाव की रूपरेखा तैयार हो चुकी है जल्द ही ट्रस्ट को नया सीईओ मिलने वाला है जिसके लिए तीन लोगों की एक कमेटी बना दी गई है और 22 को होने वाली अगली मीटिंग में ट्रस्ट के पुनर्गठन और नए सीईओ के नाम के ऐलान की उम्मीद है. चंपत राय को लगभग क्लीन चिट मिल जाना और उपहार की पूरी सूची और प्रदर्शनी के साथ सामने आने के बाद ट्रस्ट को थोड़ी राहत मिली है नए कार्यकारी महासचिव कृष्ण मोहन की नियुक्ति ने भी थोड़ा माहौल को ठंडा किया है लेकिन अभी जांच में और खुलासे होने बाकी हैं.

    अनिल मिश्रा को नोटिस भेजा जा चुका है अब जल्द ही SIT उनसे पूछताछ करेगी. उधर अयोध्या पुलिस लगातार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ में जुटी है. उम्मीद है इसमें बचे हुए खुलासे और होंगे.

  • चंपत राय की जगह कृष्ण मोहन संभालेंगे राम मंदिर ट्रस्ट की कमान, बोले- सबसे पहले व्यवस्था की कमियों को करेंगे दूर

    चंपत राय की जगह कृष्ण मोहन संभालेंगे राम मंदिर ट्रस्ट की कमान, बोले- सबसे पहले व्यवस्था की कमियों को करेंगे दूर


    अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा बदलाव किया गया है। ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को मंजूरी दे दी गई। इसके बाद कृष्ण मोहन (Krishna Mohan) को ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। खास बात यह है कि चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर दर्ज कराने वाले भी कृष्ण मोहन ही हैं।

    कौन हैं कृष्ण मोहन?
    कृष्ण मोहन उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र के चंद्रपुर गांव के रहने वाले हैं। वह भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी रह चुके हैं और महाराष्ट्र कैडर में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद कृष्ण मोहन सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे। वर्तमान में वह हरदोई शहर में रहते हुए समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। सितंबर 2025 में उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था। यह पद कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद खाली हुआ था।

    लखनऊ यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई
    कृष्ण मोहन ने अपनी शिक्षा लखनऊ यूनिवर्सिटी से पूरी की। इसके बाद उन्होंने परमाणु ऊर्जा विभाग में भी काम किया। बाद में उनका चयन भारतीय वन सेवा में हुआ, जहां उन्होंने महाराष्ट्र में लंबे समय तक सेवाएं दीं। वर्ष 2012 में रिटायर होने के बाद वह समाजसेवा के कार्यों में जुट गए।

    ट्रस्ट में उनकी नियुक्ति को सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। ट्रस्ट ने कहा है कि कृष्ण मोहन का शामिल होना समाज के व्यापक प्रतिनिधित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    जिम्मेदारी संभालते ही बताईं प्राथमिकताएं
    अंतरिम महासचिव बनने के बाद कृष्ण मोहन ने कहा कि राम मंदिर चढ़ावा मामले से सभी को दुख पहुंचा है। उन्होंने माना कि प्रबंधन और संचालन व्यवस्था में कुछ कमियां रह गई थीं, जिनका फायदा उठाया गया।

    बताई ये प्राथमिकताएं-
    1. व्यवस्था की कमियों को दूर करना और सुरक्षा में सुधार करना।
    2. चढ़ावा चोरी के आरोपियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना।
    3. ट्रस्ट की छवि और रामभक्तों के भरोसे को फिर से मजबूत करना।

    कृष्ण मोहन ने कहा कि इस घटना से समाज में अविश्वास की स्थिति बनी है, लेकिन ट्रस्ट सभी न्यासियों के साथ मिलकर अपनी व्यवस्था को बेहतर बनाएगा और लोगों का विश्वास दोबारा कायम करने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे और प्रबंधन में मौजूद खामियों को दूर किया जाएगा।

  • राम मंदिर दान विवाद पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान, ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफे की मांग

    राम मंदिर दान विवाद पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान, ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफे की मांग


    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े दान और चढ़ावे के मामले में चल रही जांच के बीच आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। उनका मानना है कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी है।

    गाजियाबाद में मीडिया से बातचीत करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था और भावनाओं का केंद्र है। ऐसे में यदि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं और जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं तो निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पदाधिकारियों को स्वयं आगे आकर नैतिक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि न्याय होना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह भी है कि न्याय होता हुआ दिखाई दे। यदि जांच के दौरान पदाधिकारी अपने पदों पर बने रहते हैं तो लोगों के मन में संदेह की स्थिति बनी रह सकती है। इसलिए जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को इस्तीफा देकर निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ करना चाहिए।

    आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी अपील की कि ट्रस्ट के वर्तमान पदाधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए जाएं और आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट का नए सिरे से गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा तथा किसी भी प्रकार के विवाद की गुंजाइश कम होगी।

    बिहार के चर्चित भरत तिवारी प्रकरण पर भी आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया से बाहर जाकर दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि कानून के शासन वाले लोकतंत्र में न्यायिक प्रक्रिया का पालन सर्वोपरि है और किसी भी मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि समाज में बढ़ती ऐसी घटनाओं पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी निर्दोष व्यक्ति के अधिकारों का हनन न हो।

    लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड पर दुख व्यक्त करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इसे व्यवस्था की विफलता बताया। उन्होंने कहा कि केवल हादसे के बाद संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से प्रभावी सुरक्षा योजनाएं और निगरानी तंत्र तैयार किया जाना चाहिए।

    उन्होंने तेजी से हो रहे शहरी विकास पर भी चिंता जताई और कहा कि विकास कार्यों के साथ सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। यदि सुरक्षा उपायों की अनदेखी की जाती है तो ऐसी त्रासदियां बार-बार सामने आती रहेंगी। उनके अनुसार प्रशासन, स्थानीय निकायों और संबंधित एजेंसियों को मिलकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

    राम मंदिर से जुड़े मामले पर दिए गए आचार्य प्रमोद कृष्णम के बयान ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अब सभी की नजर जांच की प्रगति और इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर बनी हुई है।

  • राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग तेज, पुजारी महासंघ ने PM को लिखा पत्र; CBI जांच की उठाई मांग

    राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग तेज, पुजारी महासंघ ने PM को लिखा पत्र; CBI जांच की उठाई मांग

    अयोध्या अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को लेकर कथित अनियमितताओं की चर्चाओं के बीच अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने राम मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर ट्रस्ट को भंग करने, पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    महासंघ का कहना है कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था, विश्वास और लंबे संघर्ष का प्रतीक है। ऐसे में मंदिर के संचालन और दान राशि के उपयोग को लेकर यदि किसी प्रकार के सवाल उठ रहे हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। संगठन का मानना है कि इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

    अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के अध्यक्ष महेश शर्मा ने कहा कि देशभर के श्रद्धालुओं ने राम मंदिर निर्माण और उसके विकास के लिए अपनी श्रद्धा के अनुसार धन, सोना-चांदी और अन्य मूल्यवान सामग्री दान की है। यह योगदान केवल आर्थिक नहीं बल्कि भावनात्मक और धार्मिक आस्था से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए यदि चढ़ावे या दान राशि के प्रबंधन में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

    महासंघ ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में मांग की है कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए। संगठन का कहना है कि यदि जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    संगठन के राष्ट्रीय सचिव रूपेश मेहता ने ट्रस्ट के पुनर्गठन का सुझाव भी दिया है। उनका कहना है कि यदि वर्तमान ट्रस्ट के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो सरकार को इसकी समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राम मंदिर आंदोलन में योगदान देने वाले परिवारों और मंदिर निर्माण के संघर्ष से जुड़े लोगों के योग्य प्रतिनिधियों को ट्रस्ट में शामिल किया जाए। उनका मानना है कि ऐसे लोग मंदिर की परंपराओं, संघर्ष और धार्मिक महत्व को बेहतर ढंग से समझते हैं और अधिक जिम्मेदारी के साथ इसकी सेवा कर सकते हैं।

    महासंघ ने यह भी कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। इसलिए मंदिर के संचालन और वित्तीय प्रबंधन को लेकर किसी भी प्रकार का संशय लंबे समय तक नहीं रहना चाहिए। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

    गौरतलब है कि हाल ही में राम मंदिर में चढ़ावे की राशि और दानपात्रों के प्रबंधन को लेकर कुछ रिपोर्टें सामने आई हैं, जिनमें कथित वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। हालांकि इन मामलों की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष अभी सामने आना बाकी हैं। इसी बीच पुजारी महासंघ की ओर से उठाई गई मांगों ने इस मुद्दे को नई राजनीतिक और धार्मिक चर्चा का विषय बना दिया है।

    अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों की संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं। आने वाले समय में इस मामले में क्या निर्णय लिया जाता है, यह श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।