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  • अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक, 3 नए सदस्य बनाए गए, CEO के नाम पर मंथन जारी

    अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक, 3 नए सदस्य बनाए गए, CEO के नाम पर मंथन जारी

    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक अयोध्या की मणिरामदास छावनी में चल रही है। बैठक में ट्रस्ट के लिए तीन नए सदस्यों की घोषणा की गई है। इनमें अयोध्या के मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के महेश भागचंदका और अयोध्या की निर्मला यादव शामिल हैं। बैठक में अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि, ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती सहित अन्य ट्रस्टी मौजूद हैं।

    राम मंदिर के पहले CEO के नाम पर अंतिम मंथन
    बैठक का सबसे अहम एजेंडा राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की नियुक्ति है। CEO के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप चुकी है। बताया जा रहा है कि कमेटी ने तीन नामों का पैनल ट्रस्ट के सामने रखा है। अब ट्रस्ट इन नामों पर चर्चा कर अंतिम नाम तय कर सकता है। बैठक के दूसरे चरण में ट्रस्ट से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा।

    पूर्व IPS राजेश पांडेय की दावेदारी सबसे मजबूत बताई जा रही
    CEO पद की चर्चा में पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। उनकी दावेदारी की खास वजह सिर्फ पुलिस और प्रशासनिक अनुभव नहीं है। वह लखनऊ के अलीगंज स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर ट्रस्ट के सचिव भी हैं। इस वजह से उन्हें मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थान के प्रबंधन का प्रत्यक्ष अनुभव भी हासिल है। राम मंदिर CEO के लिए यह अनुभव उनकी प्रोफाइल को अलग महत्व देता है।

    CEO के सामने होंगी कई बड़ी जिम्मेदारियां
    राम मंदिर CEO की भूमिका केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं होगी। अयोध्या में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या के बीच सुरक्षा व्यवस्था, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय, VIP और आम श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं तथा मंदिर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स का प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां भी CEO के सामने रहेंगी।

    इसी वजह से सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की जटिलताओं का अनुभव रखने वाले राजेश पांडेय की दावेदारी को खास माना जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला ट्रस्ट को ही करना है।

    बैठक में ये प्रमुख ट्रस्टी और आमंत्रित सदस्य मौजूद
    1. महंत नृत्य गोपाल दास
    2. कमलनयन दास
    3. स्वामी गोविंद देव गिरी
    4. डॉ. कृष्ण मोहन
    5. दिनेंद्र दास जी महाराज
    6. दिनेश चंद्र जी
    7. बजरंग बांगड़ा
    8. जगदीश आफले
    9. राज गोपाल मिनियार
    10. समीर पांडा

    ट्रस्ट डीड और नियमावली में संशोधन पर भी चर्चा
    CEO की नियुक्ति के अलावा ट्रस्ट की डीड और न्यास नियमावली में संशोधन सहित कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है। बैठक दोपहर 3 बजे ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में होनी है। अधिकांश ट्रस्टी अयोध्या पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ सदस्य ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल होंगे।

    बैठक से पहले ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि और अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन ने रामलला के दरबार में पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। दोनों ने मंदिर की मौजूदा व्यवस्थाओं का जायजा लेने के बाद बैठक की तैयारियों में हिस्सा लिया।

    चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र की वापसी पर भी नजर
    बैठक में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र को लेकर भी निर्णय अहम माना जा रहा है। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया था। हालांकि पिछले कुछ समय में दोनों की सामाजिक गतिविधियां बढ़ी हैं।

    ऐसे में ट्रस्ट में उनकी संभावित वापसी को लेकर अटकलें भी तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच की मौजूदा स्थिति में चंपत राय को लेकर राहत की बात सामने आने के बाद उनके दोबारा ट्रस्ट से जुड़ने की संभावना पर चर्चा हो सकती है। डॉ. अनिल मिश्र को लेकर ट्रस्ट क्या फैसला करता है, इस पर भी नजर रहेगी। अंतिम तस्वीर बैठक के बाद ही साफ होगी।

    संघ और VHP पदाधिकारियों के अयोध्या पहुंचने से बढ़ी हलचल
    बैठक से पहले संघ और विश्व हिंदू परिषद के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के भी अयोध्या पहुंचने की सूचना है। VHP महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा, संरक्षक दिनेश चंद्र और संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल सिंह के अयोध्या पहुंचने की जानकारी है। संघ और VHP पदाधिकारियों ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि से मुलाकात भी की। बंद कमरे में हुई इस बैठक के बाद ट्रस्ट की अहम बैठक को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले पर CM योगी का पलटवार, बोले- दोषी साधु-संत नहीं, विपक्ष का रवैया सनातन विरोधी

    राम मंदिर चढ़ावा मामले पर CM योगी का पलटवार, बोले- दोषी साधु-संत नहीं, विपक्ष का रवैया सनातन विरोधी


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की पड़ताल में अब तक कोई साधु-संत दोषी नहीं पाया गया है। ऐसे में पूरे संत समाज और मंदिर से जुड़े कर्मचारियों पर आरोप लगाना अनुचित है।

    मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान न्यायालय के निर्देश पर एसआईटी का पुनर्गठन भी किया गया, लेकिन अब तक की जांच में किसी साधु-संत की संलिप्तता सामने नहीं आई।

    ‘सनातन और रामजन्मभूमि का हमेशा विरोध किया’
    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा और कांग्रेस लगातार रामजन्मभूमि, भगवान राम और सनातन परंपरा के प्रति विरोध का रुख अपनाती रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद और सदन के भीतर विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप सनातन आस्था का अपमान हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों पर कार्रवाई हो रही है, उनका भाजपा या संत समाज से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण मिलने के बावजूद विपक्ष के कई नेताओं ने उसमें भाग नहीं लिया, जबकि अब वही लोग आस्था की बात कर रहे हैं।

    ‘यूपी की छवि खराब करने की कोशिश’
    मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष उत्तर प्रदेश की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य अब बीमारू प्रदेश की छवि से बाहर निकलकर देश की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना रहा है, लेकिन विपक्ष इसे स्वीकार नहीं कर पा रहा है। उन्होंने सदन में हुए हंगामे और मार्शलों के साथ धक्कामुक्की की भी निंदा करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है। उनके अनुसार, इस तरह का व्यवहार प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और विकास की गति को प्रभावित करने का प्रयास है।

    विधानसभा में हंगामे पर भी जताई नाराजगी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा का एजेंडा पहले से तय था, लेकिन विपक्ष ने बजट पर चर्चा करने के बजाय दूसरे मुद्दों को लेकर व्यवधान उत्पन्न किया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताते हुए विपक्ष के आचरण को “शर्मनाक” करार दिया।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगी SIT, सरकार से मांग सकती है और समय

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगी SIT, सरकार से मांग सकती है और समय


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। सूत्रों के मुताबिक, शीर्ष अदालत के निर्देशों के तहत यह रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाएगी। साथ ही, जांच पूरी करने के लिए एसआईटी उत्तर प्रदेश सरकार से अतिरिक्त समय की मांग भी कर सकती है।

    जानकारी के अनुसार, जांच अभी कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर जारी है। एसआईटी चढ़ावा गणना प्रणाली, कथित वित्तीय अनियमितताओं, बैंकिंग लेनदेन, आरोपियों की भूमिका और संबंधित दस्तावेजों की विस्तार से जांच कर रही है। हाल में पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान हुई पूछताछ और बरामदगी से मिले नए सुरागों का भी सत्यापन किया जा रहा है। इन सभी बिंदुओं की जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश की जाएगी।

    23 जून को शासन को सौंपी गई थी प्रारंभिक रिपोर्ट


    एसआईटी ने 23 जून को राम मंदिर की व्यवस्थाओं और दानराशि प्रबंधन से संबंधित अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी। सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट में मंदिर की प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन व्यवस्था से जुड़ी पांच प्रमुख खामियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में दानराशि की सुरक्षा, कर्मचारियों की नियुक्ति, खरीद प्रक्रिया, प्रसाद वितरण व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

    दानराशि की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


    जांच में पाया गया कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई नकदी को मंदिर परिसर से बैंक तक पहुंचाने और गणना कक्ष में उसकी गिनती के दौरान पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था नहीं थी। एसआईटी का मानना है कि इसी वजह से दानराशि प्रबंधन प्रणाली में कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है।

    सोने-चांदी के आभूषणों का रिकॉर्ड भी अधूरा


    रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धालुओं की ओर से भेंट किए गए सोने और चांदी के आभूषणों का समुचित अभिलेखीकरण नहीं किया जा रहा था। जांच में ऐसे कई उदाहरण सामने आए, जहां मूल्यवान धातुओं के संग्रहण और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।

    नियुक्तियों और खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल


    एसआईटी ने अपनी जांच में यह भी पाया कि कुछ पदों पर नियुक्तियां तय प्रक्रिया और योग्यता के बजाय सिफारिशों के आधार पर की गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हुई। इसके अलावा सामग्री खरीद की प्रक्रिया को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि कुछ मामलों में टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी और कुछ खरीद में कमीशनखोरी तथा निर्धारित नियमों के पालन में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।

    प्रसाद वितरण और सीता रसोई में भी मिलीं कमियां


    एसआईटी की जांच में प्रसाद वितरण व्यवस्था और सीता रसोई के संचालन में भी कई कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य सामग्री और अन्य सामानों की खरीद कई बार बाजार मूल्य से अधिक दरों पर की गई, जिससे वित्तीय अनुशासन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं।

    सुधारात्मक कदमों की सिफारिश


    सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में वित्तीय व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाने, जवाबदेही तय करने और प्रशासनिक सुधार लागू करने की सिफारिश की है। राज्य सरकार रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 40 दिनों के CCTV में 70 चोरियां रिकॉर्ड, जेब-जूतों में नकदी छिपाते दिखे कर्मचारी

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 40 दिनों के CCTV में 70 चोरियां रिकॉर्ड, जेब-जूतों में नकदी छिपाते दिखे कर्मचारी


    अयोध्‍या । अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले के बीच सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हाईलेवल बैठक हुई. करीब पांच घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों से लेकर जांच की प्रगति और ट्रस्ट की आगे की रणनीति पर विस्तार से मंथन किया गया.

    एसआईटी जांच में कई बड़े खुलासे
    बैठक के बाद ट्रस्ट ने कई अहम फैसलों पर मुहर लगाई, जिन पर सभी की नजरें टिकी थीं. दूसरी ओर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित चोरी और गबन के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है.

    40 दिन में 70 बार चोरी
    SIT की जांच के अनुसार, 27 अप्रैल 2026 से 5 जून 2026 (लगभग 40 दिन ) के बीच उपलब्ध CCTV फुटेज में गिनती कक्ष के अंदर कई बार कर्मचारियों को नोटों की गड्डियां और खुले रुपये अपने कपड़ों, जेबों, जूतों तथा अन्य स्थानों पर छिपाते हुए देखा गया. जांच रिपोर्ट में ऐसे करीब 70 संदिग्ध मामलों का उल्लेख किया गया है. जांच में साफ हुआ कि यह कोई एक-दो बार नहीं बल्कि कई दिनों तक दोहराई जाने वाली एक व्यवस्थित प्रक्रिया थी. गिनती कक्ष में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया. एंट्री और एग्जिट के समय तलाशी नहीं ली गई. कर्मचारियों के निजी सामान पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं था.

    जेबों- जूतों में भी पैसे छुपाकर ले गए आरोपी
    जांच में मालूम हुआ कि कई हंडियों की नकदी मिलाकर गिनी जाती थी और मूल्यवान वस्तुओं के रिकॉर्ड एवं सत्यापन में भी गंभीर कमियां पाई गईं. SIT ने प्रथम दृष्टया छह लोगों की संलिप्तता बताई है. इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकूल मिश्र, लवकुश मिश्र , मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रामशंकर मिश्र का नाम शामिल है.

    रिपोर्ट के अनुसार, जांच से पहले ही कुछ कर्मचारियों से लगभग 78.94 लाख रुपये की बरामदगी का संकेत मिला. इसके अलावा 4 जून 2026 को गिनती कक्ष से लगभग 2.25 लाख रुपये की अतिरिक्त बरामदगी का भी उल्लेख किया गया है.SIT ने पाया संबंधित कर्मचारियों के बैंक खातों में उनकी घोषित आय की तुलना में अधिक नकद जमा और वित्तीय लेन-देन मिले हैं, जिनकी विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई गई है. जांच से सुरक्षा व्यवस्था, CCTV निगरानी, SOP के अनुपालन, तलाशी व्यवस्था और पर्यवेक्षण में गंभीर लापरवाही रही, जिससे चोरी और गबन जैसी घटनाओं को रोकने में विफलता हुई. मूल्यवान वस्तुओं के प्रबंधन और रिकॉर्ड प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की सिफारिश की गई है.

  • अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक चढ़ावा चोरी मामले के बाद लिए जा सकते हैं अहम निर्णय

    अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक चढ़ावा चोरी मामले के बाद लिए जा सकते हैं अहम निर्णय


    उत्तरप्रदेश। अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को शुरू हो गई। इस बैठक पर देशभर के श्रद्धालुओं और आम लोगों की नजरें टिकी हैं क्योंकि इसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों सहित कई अहम मुद्दों पर फैसला लिया जाना है।

    बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास व्हीलचेयर पर पहुंचकर शामिल हुए। महासचिव चंपत राय भी बैठक में मौजूद रहे जबकि अनिल मिश्रा बैठक शुरू होने तक नहीं पहुंचे। जानकारी के अनुसार ट्रस्ट के कुछ पदेन सदस्य और केंद्र तथा उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि भी प्रत्यक्ष रूप से बैठक में शामिल नहीं हुए और उनके ऑनलाइन जुड़ने की संभावना जताई गई।

    बताया जा रहा है कि चढ़ावा चोरी की घटना सार्वजनिक होने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया था। ट्रस्ट की बैठक में इन इस्तीफों को स्वीकार करने या आगे की कार्रवाई को लेकर विचार किया जा रहा है। ट्रस्ट में कुल 14 सदस्य हैं जिनमें चार पदेन सदस्य शामिल हैं। किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए दो तिहाई सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है जबकि पदेन सदस्यों के मतों की गणना नहीं की जाती।

    बैठक से पहले ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने एक बयान जारी कर कहा कि मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना से वे बेहद आहत हैं। उन्होंने कहा कि जिसने भी ऐसा महापाप किया है उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    बैठक के दौरान ट्रस्ट के सदस्यों ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम पर भरोसा जताया। उनका कहना था कि इस घटना से देशभर में गलत संदेश गया है और करोड़ों रामभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है।

    सूत्रों के अनुसार यदि महासचिव पद पर बदलाव होता है तो विश्व हिंदू परिषद के बजरंग बागड़ा का नाम सामने आ सकता है। वहीं ट्रस्टी पद के लिए नीरज दौनेरिया के नाम पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन संभावित नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।

    इस बीच चढ़ावा चोरी मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ पहले ही खारिज कर चुकी है। अदालत ने कहा कि इसी विषय से संबंधित मामला पहले से सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में अब सभी की निगाहें ट्रस्ट की बैठक में लिए जाने वाले निर्णय और जांच की अगली दिशा पर टिकी हुई हैं।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर जनता में उबाल, भोपालवासियों ने कहा- यह सिर्फ पैसे नहीं आस्था की चोरी, दोषियों को मिले उम्रकैद

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर जनता में उबाल, भोपालवासियों ने कहा- यह सिर्फ पैसे नहीं आस्था की चोरी, दोषियों को मिले उम्रकैद


    नई दिल्ली । अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से कथित रूप से रकम गायब किए जाने के मामले ने पूरे देश में नाराजगी पैदा कर दी है। पुलिस जांच के अनुसार दानपात्रों से निकाली गई नकदी में 42 दिनों के दौरान कई बार हेराफेरी किए जाने के आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियां मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और अब तक कई कर्मचारियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। इस घटना के बाद लोगों में गहरा आक्रोश है और इसे केवल धन की चोरी नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट माना जा रहा है।

    इसी मुद्दे पर भोपाल में लोगों की राय भी सामने आई। अधिकांश लोगों ने कहा कि मंदिर में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ दान करते हैं। ऐसे में यदि कोई उस चढ़ावे में हेराफेरी करता है तो वह केवल कानून नहीं बल्कि धार्मिक विश्वास का भी अपराधी है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

    कई लोगों ने मांग की कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों को आजीवन कारावास जैसी सख्त सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक संस्थानों की पवित्रता से खिलवाड़ करने का साहस न कर सके। कुछ लोगों ने कहा कि ऐसे कृत्य करने वालों को समाज में कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए क्योंकि उन्होंने लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

    कुछ नागरिकों ने भरोसा जताया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। वहीं कुछ लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर मिलीभगत हुई है तो उससे जुड़े सभी लोगों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

    इस बीच जांच एजेंसियां पूरे मामले के दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी तरह की कथित अनियमितता को लोग बेहद गंभीरता से देख रहे हैं। आम लोगों का मानना है कि मंदिरों में आने वाले दान की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास हमेशा कायम रहे।

  • राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की चोरी का विवाद गहराया, चंपत राय पर उठे सवाल, जांच से तय होगा आगे का रास्ता

    राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की चोरी का विवाद गहराया, चंपत राय पर उठे सवाल, जांच से तय होगा आगे का रास्ता


    लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस विवाद के केंद्र में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय आ गए हैं, जिनकी भूमिका को लेकर अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

    राम मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चंपत राय लंबे समय से ट्रस्ट के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते रहे हैं। समर्थक उन्हें अनुशासित और समर्पित कार्यकर्ता मानते हैं, वहीं आलोचक उन पर निर्णयों में एकतरफा रवैया अपनाने के आरोप लगाते रहे हैं।

    ट्रस्ट में बढ़ता असंतोष और पुराने विवाद

    सूत्रों और चर्चा के अनुसार, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई पुराने संत और महंत ट्रस्ट के गठन से ही कुछ फैसलों से असंतुष्ट रहे हैं। उनका आरोप रहा है कि आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कई प्रमुख संतों और संस्थाओं को निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा गया।

    ट्रस्ट में अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और अन्य पदों की मौजूदगी के बावजूद, लंबे समय से यह धारणा रही है कि प्रशासनिक और संगठनात्मक निर्णयों में चंपत राय की भूमिका प्रमुख रही है। इसी कारण कुछ सदस्यों के बीच असंतोष की स्थिति भी बनी रही।

    चढ़ावे की चोरी का मामला और बढ़ता विवाद

    हाल ही में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले के बाद चंपत राय पर भी राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ पूर्व जुड़े लोगों और संतों ने सार्वजनिक रूप से आलोचना भी की है, जबकि कुछ ने जांच की मांग की है।

    हालांकि, चंपत राय को लेकर उनके समर्थक यह भी मानते हैं कि उनका सार्वजनिक जीवन पारदर्शिता और सादगी से जुड़ा रहा है और उन पर सीधे तौर पर किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप साबित नहीं हुआ है।

    सरकार और ट्रस्ट की प्रतिक्रिया

    इस पूरे मामले पर सरकार और ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों ने संयमित प्रतिक्रिया दी है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने ट्रस्ट के कार्यों में कुछ व्यवस्थागत कमियों की बात स्वीकार की है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर किसी भी तरह के गंभीर आरोपों से इनकार किया है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हालिया घटनाक्रमों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के चरित्र पर बिना ठोस आधार के टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।

    आगे क्या होगा?

    सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच जारी है और यदि आवश्यकता पड़ी तो ट्रस्ट के ढांचे में बदलाव या पुनर्गठन पर भी विचार किया जा सकता है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट होगी। फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और आगे की स्थिति जांच रिपोर्ट और आधिकारिक निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

  • राम मंदिर और संसद भवन को निशाना बनाने की साजिश नाकाम, दिग्ध गिरफ्तार

    राम मंदिर और संसद भवन को निशाना बनाने की साजिश नाकाम, दिग्ध गिरफ्तार

    नई दिल्ली। देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश करते हुए चार कट्टरपंथी संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की इस कार्रवाई में महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार से जुड़े इन आरोपियों के तार सामने आए हैं।
    जांच में खुलासा हुआ है कि ये लोग देश में कथित ‘खिलाफत’ और ‘गजवा-ए-हिंद’ के नाम पर आतंकी गतिविधियों की योजना बना रहे थे।

    बड़े ठिकाने थे निशाने पर

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के निशाने पर राम मंदिर अयोध्या, संसद भवन और कई सैन्य प्रतिष्ठान थे। इनके पास से आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बरामद की गई है।

    दिल्ली में की थी रेकी

    जांच में सामने आया है कि एक आरोपी सोशल मीडिया के जरिए ग्रुप बनाकर कट्टर विचारधारा से जुड़ी चर्चाएं करता था। इसी प्लेटफॉर्म पर संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने की योजना साझा की जा रही थी।

    बताया जा रहा है कि दिसंबर 2025 में आरोपी ने दिल्ली आकर लाल किला और इंडिया गेट की रेकी भी की थी।

    क्राउडफंडिंग से जुटा रहे थे पैसे

    जांच एजेंसियों के अनुसार, मॉड्यूल के कुछ सदस्य रिमोट कंट्रोल से चलने वाले IED तैयार करने के लिए स्थानीय स्तर पर सामान जुटा रहे थे। वहीं एक अन्य आरोपी सोशल मीडिया के जरिए लोगों को हथियार और विस्फोटक इकट्ठा करने के लिए उकसा रहा था।
    क्राउडफंडिंग के लिए बैंक अकाउंट और QR कोड भी साझा किए जा रहे थे।

    सोहेल के मोबाइल से खुला राज

    इस पूरे नेटवर्क में बिहार के कटिहार जिले का एक युवक सोहेल भी शामिल बताया जा रहा है, जिसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने दिल्ली से गिरफ्तार किया।
    जांच में उसका मोबाइल सबसे बड़ा सबूत बना। कॉल डिटेल, सोशल मीडिया अकाउंट और चैट्स की फॉरेंसिक जांच में कई संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले हैं।

    कटिहार के पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी के मुताबिक, केंद्रीय एजेंसी को मिले इनपुट के आधार पर पहले सोहेल को स्थानीय स्तर पर हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। उसके मोबाइल की वैज्ञानिक जांच के बाद उसे दिल्ली बुलाया गया, जहां से उसे गिरफ्तार किया गया।

    गांव और परिवार पर निगरानी

    पुलिस अब आरोपी के गांव और उसके संपर्क में आने वाले लोगों पर भी नजर रख रही है। जांच एजेंसियां बैंक खातों और ऑनलाइन गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही हैं।

    सूत्रों के अनुसार, सोहेल पेशे से प्लंबर है और उसकी गतिविधियां लंबे समय से संदिग्ध बताई जा रही थीं।

    कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत

    फॉरेंसिक जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार कर रहे थे और किसी बड़े हमले की साजिश रच रहे थे। एजेंसियां अब इनके संभावित नेटवर्क और विदेशी कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं।

    कुल मिलाकर, समय रहते इस साजिश का खुलासा होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

  • चैत्र नवरात्र के पहले दिन अयोध्या आएंगी राष्ट्रपति, आम श्रद्धालु कर सकेंगे रामलला के दर्शन

    चैत्र नवरात्र के पहले दिन अयोध्या आएंगी राष्ट्रपति, आम श्रद्धालु कर सकेंगे रामलला के दर्शन



    नई दिल्ली। वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर 19 मार्च से अयोध्या में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हो रहा है। इस दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु राम मंदिर में श्रीराम यंत्र स्थापना के लिए अयोध्या आएंगी। वहीं, इसी तिथि से चैत्र रामनवमी मेला और वासंतिक नवरात्र का भी शुभारंभ होगा। प्रतिपदा का दिन हिंदी नववर्ष का पहला दिन भी है, जिससे रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।

    भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में तय किया गया कि नवरात्र के प्रथम दिन वीआईपी पास धारकों के लिए दर्शन बंद रहेंगे। आम श्रद्धालु सामान्य दर्शन मार्ग से श्रीराम लला के दर्शन कर सकेंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपतराय ने बताया कि सुबह 6 बजे से शाम तक अनवरत दर्शन जारी रहेगा।

    समारोह और आमंत्रित अतिथि

    रंगमहल बैरियर यानी क्रॉसिंग वन से सिर्फ आमंत्रित अतिथियों को श्रीराम यंत्र स्थापना समारोह में प्रवेश दिया जाएगा। मंदिर आंदोलन के सहयात्रियों को इस अवसर पर आमंत्रित नहीं किया गया है। केवल राम मंदिर निर्माण के लिए निधि समर्पण अभियान में शामिल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कार्यकर्ता (करीब 3,500) और विश्व हिन्दू परिषद के अखिल भारतीय टोली के 45 पदाधिकारी तथा 300 संतों को शामिल किया गया है।

    इसके अलावा मंदिर निर्माण में लगी विभिन्न एजेंसियों के कर्मयोगियों के पारिवारिक सदस्य समेत लगभग 1,800 लोगों को भी व्यक्तिगत आमंत्रण भेजा गया है। चंपतराय ने बताया कि आमंत्रण हस्तांतरणीय नहीं है और अतिथियों के साथ सुरक्षा कर्मियों या अंगरक्षकों का प्रवेश नहीं होगा। समारोह स्थल पर किसी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र या हथियार ले जाने की अनुमति नहीं है। सिख परंपरा के आमंत्रित श्रद्धालुओं को कानूनी वैध हथियार और पांच पहचान चिन्हों सहित कटार ले जाने की अनुमति दी गई है। मोबाइल उपकरणों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। सभी अतिथि 18 मार्च तक अयोध्या पहुँच जाएंगे।

    ठहरने और भोजन की व्यवस्था

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपतराय ने बताया कि अतिथियों के ठहरने और भोजन-जलपान की पूरी व्यवस्था ट्रस्ट द्वारा की गई है। गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं में लगभग 3,000 कमरे बुक किए गए हैं। अलग-अलग जोनों के अनुसार भोजनालय तय किए गए हैं और कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने के लिए विशेष टोलियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। नगर निगम ने भी सभी अतिथि ठहराव स्थलों पर विशेष सजावट और तैयारियां कर दी हैं, जिसकी झलक भक्तों को 18 मार्च से दिखाई देने लगेगी।

  • राहुल गांधी की राम से तुलना पर सियासी बवाल, नाना पाटोले के बयान को संजय निरुपम ने बताया हास्यास्पद

    राहुल गांधी की राम से तुलना पर सियासी बवाल, नाना पाटोले के बयान को संजय निरुपम ने बताया हास्यास्पद

    नई दिल्ली।कांग्रेस नेता नाना पाटोले द्वारा राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से किए जाने पर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। इस बयान पर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। गुरुवार को उन्होंने इसे न केवल हास्यास्पद बयान बताया बल्कि कांग्रेस पार्टी के राम के प्रति रुख पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

    संजय निरुपम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का इतिहास भगवान राम और राम मंदिर के विरोध से जुड़ा रहा है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर कांग्रेस ने हमेशा बाधाएं खड़ी कीं और कई बार भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल उठाए। ऐसे में राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से करना पूरी तरह अनुचित और हास्यास्पद है।उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस नेताओं को भगवान राम के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं करना चाहिए। निरुपम के अनुसार कांग्रेस पार्टी के आचरण और उसके नेताओं की गतिविधियों को देखते हुए उनकी तुलना भगवान राम से नहीं बल्कि रावण से की जानी चाहिए। उन्होंने कहा राम के नाम को बदनाम मत कीजिए। जिन लोगों का आचरण राम के आदर्शों से मेल नहीं खाता वे ऐसी तुलना करने के अधिकारी नहीं हैं।

    दरअसल यह विवाद तब शुरू हुआ जब बुधवार को कांग्रेस नेता नाना पाटोले से राहुल गांधी के राम मंदिर न जाने को लेकर सवाल किया गया। इसके जवाब में पाटोले ने कहा था कि कांग्रेस भगवान राम का काम कर रही है और राहुल गांधी शोषितों पीड़ितों और वंचितों के लिए वही कार्य कर रहे हैं जो भगवान राम ने किया था। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी देशभर में न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और जब वे अयोध्या जाएंगे तो राम मंदिर में प्रार्थना करेंगे।नाना पाटोले ने यह भी दावा किया कि जब रामलला के मंदिर के ताले बंद थे तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें खुलवाने का आदेश दिया था। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया।

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नाना पाटोले राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से जोड़कर विवादों में आए हों। इससे पहले अक्टूबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी उन्होंने राहुल गांधी और भगवान राम के नाम को जोड़ते हुए बयान दिया था जिस पर भाजपा नेताओं ने कड़ा विरोध जताया था।उस समय पाटोले ने सफाई देते हुए कहा था कि कांग्रेस राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से नहीं करती बल्कि यह केवल एक संयोग है कि दोनों के नामआर अक्षर से शुरू होते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि भगवान राम शंकराचार्य और राहुल गांधी की यात्राओं में समानता बताना तुलना नहीं है।

    हालांकि भाजपा नेताओं ने उनके इस तर्क को खारिज करते हुए इसे हिंदू भावनाओं का अपमान बताया था। भाजपा नेता सीआर केशवन ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नाना पाटोले से सवाल किया था कि राहुल गांधी अब तक अयोध्या राम मंदिर क्यों नहीं गए।अब एक बार फिर इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और राहुल गांधी कांग्रेस तथा राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर सियासी टकराव तेज हो गया है।