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  • दूरदर्शन की रामायण ने रचा था कमाई का इतिहास, 78 एपिसोड से विज्ञापन बाजार में आया बड़ा बदलाव

    दूरदर्शन की रामायण ने रचा था कमाई का इतिहास, 78 एपिसोड से विज्ञापन बाजार में आया बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली । टेलीविजन के शुरुआती दौर में कुछ ऐसे धारावाहिक आए, जिन्होंने केवल मनोरंजन तक अपनी पहचान सीमित नहीं रखी, बल्कि पूरे टीवी उद्योग के काम करने के तरीके को बदल दिया। रामानंद सागर की ‘रामायण’ भी ऐसा ही धारावाहिक था, जिसने प्रसारण के दौरान दर्शकों की जबरदस्त दिलचस्पी हासिल की और कमाई के मामले में भी नया रिकॉर्ड बनाया।

    दूरदर्शन पर प्रसारित इस धारावाहिक के कुल 78 एपिसोड थे। इसके प्रसारण के दौरान देशभर में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। उस समय टेलीविजन घरों में मनोरंजन का प्रमुख माध्यम बन रहा था और रामायण ने दर्शकों के बीच ऐसी जगह बनाई कि इसके प्रसारण के दौरान लोगों की दिनचर्या तक प्रभावित होने लगी थी।

    पुराने आंकड़ों के अनुसार, पहली बार प्रसारण के समय रामायण को करीब 4 करोड़ लोगों ने देखा था। इसकी लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं रही। धारावाहिक को 53 देशों में प्रसारित किया गया और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी इसे बड़ी संख्या में दर्शक मिले।

    उपलब्ध आंकड़ों में बताया गया है कि दुनिया भर में रामायण को 65 करोड़ से अधिक दर्शकों ने देखा। इसी वजह से इसे अपने दौर के सबसे अधिक देखे जाने वाले पौराणिक टेलीविजन धारावाहिकों में शामिल किया जाता है। दोबारा प्रसारण के दौरान भी इसकी लोकप्रियता देखने को मिली और नई पीढ़ी के दर्शकों ने भी इसे काफी पसंद किया।

    रामायण की सफलता का असर इसकी कमाई पर भी दिखाई दिया। एक रिपोर्ट के अनुसार, पहले टेलीकास्ट के दौरान इस धारावाहिक ने दूरदर्शन के लिए करीब 23 करोड़ रुपये की कमाई की थी। यह आंकड़ा उस दौर के टेलीविजन बाजार को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण माना गया।

    इस कमाई में विज्ञापनों की बड़ी भूमिका रही। धारावाहिक की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कई बड़े ब्रांड इससे जुड़े। कोलगेट, हिंदुस्तान लीवर और अरविंद मफतलाल जैसे ब्रांड्स ने इसके साथ विज्ञापन किए। रामायण के जरिए टेलीविजन कार्यक्रमों के साथ विज्ञापन जोड़ने की संभावनाएं भी तेजी से बढ़ीं।

    उस दौर में टेलीविजन धारावाहिकों के साथ विज्ञापनों का कारोबार आज की तरह व्यापक नहीं था। रामायण की लोकप्रियता ने कंपनियों को यह समझने का मौका दिया कि किसी लोकप्रिय कार्यक्रम के साथ जुड़कर बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच बनाई जा सकती है। इसके बाद टेलीविजन पर विज्ञापन बाजार के विस्तार का रास्ता और मजबूत हुआ।

    रामायण की सफलता इसलिए भी खास रही क्योंकि इसने एक साथ कहानी, धार्मिक आस्था, दर्शकों की भागीदारी और व्यावसायिक सफलता को जोड़ा। इसके पात्र और कलाकार घर-घर में पहचाने जाने लगे। आज भी इस धारावाहिक से जुड़ी यादें दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती हैं।

    इसी वजह से रामानंद सागर की रामायण को भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। 78 एपिसोड वाले इस धारावाहिक ने न केवल बड़ी दर्शक संख्या हासिल की, बल्कि कमाई और विज्ञापन के क्षेत्र में भी ऐसा प्रभाव छोड़ा, जिसकी चर्चा दशकों बाद भी होती है।

  • रामायण पर कास्टिंग विवाद: रणबीर कपूर को भगवान राम के रूप में स्वीकार नहीं कर पाए रामानंद सागर के पोते, बोले नए चेहरे को मिलना चाहिए था मौका

    रामायण पर कास्टिंग विवाद: रणबीर कपूर को भगवान राम के रूप में स्वीकार नहीं कर पाए रामानंद सागर के पोते, बोले नए चेहरे को मिलना चाहिए था मौका


    नई दिल्ली । दर्शकों को ‘रामायण’ जैसा लोकप्रिय सीरियल देने वाले मशहूर फिल्म निर्माता रामानंद सागर के पोते शिव सागर ने नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ में रणबीर कपूर की कास्टिंग पर नाराजगी जताई है। शिव सागर का कहना है कि संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘एनिमल’ में नैतिक रूप से जटिल किरदार निभाने के बाद उनके लिए रणबीर कपूर को भगवान राम के रूप में स्वीकार करना मुश्किल है।

    शिव सागर ने कहा कि एक कास्टिंग को छोड़कर उन्हें फिल्म की बाकी कास्टिंग काफी पसंद है। व्यक्तिगत रूप से वह रणबीर कपूर को भगवान राम के रूप में स्वीकार नहीं कर सकते, क्योंकि ‘एनिमल’ के बाद उनके लिए रणबीर को राम के तौर पर देखना मुश्किल है। उनके मुताबिक भगवान राम की भूमिका के लिए किसी नए चेहरे को लिया जाना चाहिए था।

    उन्होंने कहा कि फिल्म में यश और साई पल्लवी जैसे कलाकार अच्छे लग रहे हैं। उनके अनुसार इन कलाकारों के साथ कोई पुरानी छवि या पिछली भूमिकाओं का बोझ नहीं जुड़ा है। शिव सागर का मानना है कि इसी वजह से पौराणिक किरदारों के लिए अक्सर नए चेहरों को मौका दिया जाता है, ताकि दर्शकों के मन में कलाकार की कोई पुरानी छवि पहले से मौजूद न हो।

    हालांकि, शिव सागर ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत तौर पर उन्हें रणबीर कपूर से कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने रणबीर को एक अच्छा अभिनेता बताया और कहा कि दर्शकों ने उन्हें अलग-अलग तरह के किरदारों में देखा है। उनके मुताबिक रणबीर को इस प्रोजेक्ट में इसलिए चुना गया होगा क्योंकि फिल्म की मार्केटिंग के लिहाज से उनकी लोकप्रियता महत्वपूर्ण हो सकती है। उनका मानना है कि रणबीर के बिना फिल्म की मार्केटिंग उतनी प्रभावी नहीं होती, इसलिए इस पहलू को भी ध्यान में रखा गया होगा।

    शिव सागर ने यह भी कहा कि रणबीर कपूर को ‘रामायण’ में देखने के बाद दर्शक उन्हें किस तरह स्वीकार करते हैं, इसका फैसला जनता ही करेगी। उनके मुताबिक भगवान राम और रामायण को लेकर भारतीय दर्शकों की भावनाएं बेहद गहरी हैं। उन्होंने कहा कि भारत में राम को केवल पौराणिक कथा का हिस्सा नहीं माना जाता, बल्कि लोग उन्हें अपने इतिहास और आस्था से जोड़कर देखते हैं। ऐसे में भगवान राम की भूमिका को लेकर दर्शकों की संवेदनशीलता स्वाभाविक है।

    इसी बीच कर्जत में राम मंदिर का निर्माण भी सागर परिवार के लिए बेहद खास पड़ाव बन गया है। मंदिर का सपना सबसे पहले रामानंद सागर ने देखा था, जिन्होंने 1987 में लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘रामायण’ बनाया था। उनके बेटे प्रेम सागर ने इस सपने को आगे बढ़ाया और राजस्थान से भगवान राम की मूर्ति भी मंगवाई थी।

    प्रेम सागर के निधन के बाद उनके बेटे शिव सागर ने कर्जत में मंदिर का निर्माण कार्य पूरा किया। इस तरह रामानंद सागर की तीन पीढ़ियों से जुड़ा यह सपना आखिरकार पूरा हुआ। एक तरफ परिवार भगवान राम से जुड़े अपने सपने को पूरा कर चुका है, वहीं दूसरी तरफ शिव सागर ने नई फिल्म में भगवान राम की भूमिका के लिए रणबीर कपूर की कास्टिंग को लेकर अपनी स्पष्ट निजी राय रखी है।