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  • आईएमडीबी 2026 की सूची में शीर्ष पर रणबीर कपूर की 'रामायण', 'अल्फा' और 'किंग' जैसी महाफिल्मों को पछाड़ा

    आईएमडीबी 2026 की सूची में शीर्ष पर रणबीर कपूर की 'रामायण', 'अल्फा' और 'किंग' जैसी महाफिल्मों को पछाड़ा

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा प्रेमियों के बीच आगामी फिल्मों को लेकर उत्सुकता चरम पर पहुंच गई है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण आईएमडीबी द्वारा जारी की गई साल 2026 की सबसे प्रतीक्षित फिल्मों की हालिया सूची में देखने को मिला है। इस प्रतिष्ठित सूची में अभिनेता रणबीर कपूर की मुख्य भूमिका वाली पौराणिक फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ ने अन्य सभी बड़ी और बहुप्रतीक्षित फिल्मों को पछाड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है। वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में बॉक्स ऑफिस पर कई फिल्मों ने शानदार सफलता दर्ज की है, जिसके बाद अब साल के उत्तरार्ध में रिलीज होने वाली बड़ी फिल्मों पर दर्शकों की निगाहें टिकी हुई हैं। आईएमडीबी की यह रैंकिंग दर्शाती है कि आगामी महीनों में पौराणिक कथाओं, स्पाई थ्रिलर, एक्शन और ड्रामा शैलियों के बीच कड़ा मुकाबला होने वाला है, जिसमें फिलहाल ‘रामायण’ सबसे आगे चल रही है।

    नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस महत्वाकांक्षी फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों और समीक्षकों के बीच जबरदस्त चर्चा है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम के मुख्य किरदार को जीवंत कर रहे हैं, जबकि दक्षिण भारतीय सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता की भूमिका में नजर आएंगी। इस फिल्म की स्टार कास्ट को लेकर भी खासा उत्साह है, जिसमें कन्नड़ सुपरस्टार यश रावण के रूप में, सनी देओल हनुमान की भूमिका में और टीवी व फिल्म अभिनेता रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में दिखाई देंगे। फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा कर रहे हैं, जबकि यश भी इसके सह-निर्माता के रूप में जुड़े हुए हैं। यह फिल्म इस साल दिवाली के बड़े त्योहार पर सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके चलते इसे इस साल की सबसे बड़ी रिलीज माना जा रहा है।

    आईएमडीबी की इस सूची में दूसरे पायदान पर यशराज फिल्म्स के बैनर तले बन रही स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘अल्फा’ ने अपनी जगह बनाई है। शिव रवैल द्वारा निर्देशित इस फिल्म में आलिया भट्ट और शरवरी वाघ मुख्य भूमिकाओं में एक्शन करती नजर आएंगी। इनके साथ ही फिल्म में बॉबी देओल और अनिल कपूर भी महत्वपूर्ण किरदारों में शामिल हैं, जो फिल्म के आकर्षण को और बढ़ाते हैं। इस बहुप्रतीक्षित सूची में तीसरा स्थान कन्नड़ अभिनेता यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ को मिला है, जिसका निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है। इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में यश के साथ नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

    सूची के चौथे स्थान पर बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान की बहुचर्चित फिल्म ‘किंग’ का कब्जा है, जिसका निर्देशन सिद्धार्थ आनंद कर रहे हैं। इस फिल्म में शाहरुख खान के साथ दीपिका पादुकोण और सुहाना खान भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगी, जिससे यह फिल्म साल के अंत में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है। इसके बाद पांचवें स्थान पर टी-सीरीज और देवगन फिल्म्स के संयुक्त निर्माण में बनी कॉमेडी फ्रैंचाइजी की अगली कड़ी ‘धमाल 4’ शामिल है, जिसमें अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं।

    सूची में ओटीटी प्लेटफॉर्म की बेहद लोकप्रिय सीरीज के सिनेमाई रूपांतरण ‘मिर्जापुर द मूवी’ को भी महत्वपूर्ण स्थान मिला है, जिसमें पंकज त्रिपाठी, अली फजल, जितेंद्र कुमार और दिव्येंदु शर्मा जैसे कलाकार बड़े पर्दे पर धमाल मचाने आ रहे हैं। इसके साथ ही श्रद्धा कपूर की मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘इथा’ भी इस सूची का हिस्सा बनी है, जिसका निर्देशन लक्ष्मण उत्तेकर कर रहे हैं। आगामी महीनों में होने वाली इन बड़ी रिलीज से स्पष्ट है कि भारतीय सिनेमा उद्योग के लिए साल 2026 का दूसरा भाग व्यावसायिक और रचनात्मक दोनों ही दृष्टिकोणों से बेहद महत्वपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक होने वाला है।

  • घर में धार्मिक ग्रंथ रखने से पहले जान लें वास्तु के ये अहम नियम सही दिशा बदल सकती है जीवन की सकारात्मक ऊर्जा

    घर में धार्मिक ग्रंथ रखने से पहले जान लें वास्तु के ये अहम नियम सही दिशा बदल सकती है जीवन की सकारात्मक ऊर्जा


    नई दिल्ली। सनातन परंपरा में रामायण भगवत गीता हनुमान चालीसा और अन्य धार्मिक ग्रंथों को केवल पुस्तक नहीं बल्कि आस्था और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इन्हें घर में सम्मानपूर्वक रखने की सलाह दी जाती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि इन पवित्र ग्रंथों को सही दिशा और उचित स्थान पर रखा जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और परिवार के सदस्यों के जीवन में सुख शांति तथा समृद्धि का वास होता है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार धार्मिक ग्रंथों को रखने के लिए घर की पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। पूर्व दिशा को ज्ञान प्रकाश और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है क्योंकि इसी दिशा से सूर्य का उदय होता है। वहीं यदि घर में पूजा का स्थान बनाया गया है तो उसका सबसे उपयुक्त स्थान ईशान कोण यानी उत्तर पूर्व दिशा माना जाता है। ऐसे में धार्मिक पुस्तकों को भी पूजा स्थल के आसपास सम्मानपूर्वक रखना शुभ माना जाता है।

    धार्मिक ग्रंथों को रखते समय इस बात का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें भगवान की मूर्ति या तस्वीर के बाईं ओर रखा जाए। कई लोग सुविधा के लिए इन्हें मंदिर की शेल्फ या मंदिर के ऊपर रख देते हैं लेकिन वास्तु के अनुसार ऐसा करना उचित नहीं माना जाता। इन पुस्तकों के लिए अलग स्थान या अलग शेल्फ बनाना अधिक शुभ माना जाता है ताकि उनका सम्मान बना रहे।

    वास्तु शास्त्र यह भी कहता है कि धार्मिक ग्रंथों को कभी भी ऐसी जगह नहीं रखना चाहिए जहां गंदगी रहती हो या जहां उनका अनादर होने की संभावना हो। बेडरूम में भी इन पवित्र पुस्तकों को रखने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारण से इन्हें दूसरे कमरे में रखना पड़े तो साफ सुथरी और शांत जगह का चयन करना चाहिए।

    एक और महत्वपूर्ण नियम यह है कि धार्मिक पुस्तकों को एक दूसरे के ऊपर ढेर बनाकर नहीं रखना चाहिए। प्रत्येक पुस्तक को अलग स्थान देना चाहिए ताकि उनका सम्मान बना रहे। साथ ही इन पुस्तकों को खड़ी अवस्था में रखने के बजाय समतल स्थिति में रखना बेहतर माना जाता है।

    धार्मिक ग्रंथों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें लाल या पीले रंग के स्वच्छ कपड़े में लपेटकर रखने की परंपरा भी बताई गई है। लाल और पीला रंग शुभता तथा आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वहीं काले या नीले रंग के कपड़े में धार्मिक ग्रंथों को रखने से बचने की सलाह दी जाती है।

    इन छोटे छोटे वास्तु नियमों का पालन करने से न केवल धार्मिक ग्रंथों का सम्मान बना रहता है बल्कि घर का वातावरण भी सकारात्मक और शांत बना रहता है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक और पारंपरिक विश्वास हैं। इनका पालन व्यक्ति अपनी आस्था और श्रद्धा के अनुसार कर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पवित्र ग्रंथों को हमेशा स्वच्छता सम्मान और श्रद्धा के साथ रखा जाए क्योंकि यही उनकी वास्तविक मर्यादा मानी जाती है।

  • दर्शकों की बदलती पसंद: कंटेंट, संस्कृति और भव्यता का नया संगम रच रहा सिनेमा

    दर्शकों की बदलती पसंद: कंटेंट, संस्कृति और भव्यता का नया संगम रच रहा सिनेमा


    नई दिल्ली। पिछले कुछ वर्षों में दर्शकों की पसंद में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां दर्शक सिर्फ मनोरंजन के लिए कॉमेडी या एक्शन फिल्में देखते थे, वहीं अब वे ऐसी कहानियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं जो दिल को छू जाएं और लंबे समय तक याद रहें। अब फिल्मों में इमोशन, गहराई और सच्चाई की मांग बढ़ गई है। यही कारण है कि फिल्म इंडस्ट्री भी अब कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों पर ज्यादा फोकस कर रही है, जहां कहानी और प्रस्तुति को प्राथमिकता दी जा रही है।
    माइथोलॉजी और लोककथाएं भारतीय समाज का अहम हिस्सा रही हैं। इन कहानियों में हमारी संस्कृति, परंपराएं और आस्था की झलक मिलती है। जब इन्हें आधुनिक अंदाज में फिल्मों या वेब सीरीज के जरिए पेश किया जाता है, तो दर्शकों के साथ एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव बनता है। यही वजह है कि आजकल फिल्ममेकर्स इन विषयों को बड़े स्तर पर प्रस्तुत करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
    इस ट्रेंड को मजबूत करने में Kantara का बड़ा योगदान रहा है। Rishab Shetty की इस फिल्म ने दिखाया कि जड़ों से जुड़ी सच्ची कहानी भाषा की सीमाओं को पार कर सकती है। फिल्म में लोकदेवता, परंपरा और प्रकृति के रिश्ते को बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसे पूरे देश के दर्शकों ने सराहा। इसकी सफलता ने फिल्म इंडस्ट्री का नजरिया बदल दिया और कंटेंट की ताकत को फिर साबित किया।इसी सफलता के बाद फिल्ममेकर्स का भरोसा मजबूत हुआ है और अब वे बड़े सितारों के बजाय दमदार कहानियों पर ध्यान दे रहे हैं। पौराणिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित कई नई फिल्में और वेब सीरीज बन रही हैं, जिनमें सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि इंसानी रिश्तों और समाज की सच्चाई को भी दिखाया जा रहा है। दर्शकों को यही ईमानदारी पसंद आ रही है।
    इसी कड़ी में Ramayana जैसे बड़े प्रोजेक्ट पर भी तेजी से काम चल रहा है। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। इसे भव्य सेट्स, आधुनिक वीएफएक्स और नई तकनीक के साथ पेश करने की तैयारी है, ताकि हर वर्ग के दर्शकों को एक अलग और यादगार अनुभव मिल सके।
    आज के दौर में फिल्मों की भव्यता भी दर्शकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा रही है। इंटरनेशनल स्तर के विजुअल्स, शानदार बैकग्राउंड म्यूजिक और दमदार प्रेजेंटेशन से फिल्म का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। हालांकि, केवल भव्यता ही काफी नहीं होतीकहानी में भावनात्मक गहराई और सच्चाई भी उतनी ही जरूरी है, तभी फिल्म दिलों में जगह बना पाती है।
    अब माइथोलॉजी फिल्मों का क्रेज युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। पहले जहां इन्हें सिर्फ बड़े उम्र के लोगों तक सीमित माना जाता था, वहीं अब युवा भी इन कहानियों को पसंद कर रहे हैं। नए अंदाज, तेज रफ्तार कहानी और हाई-क्वालिटी विजुअल्स के कारण उन्हें इसमें एक्शन, ड्रामा और इमोशन का बेहतरीन मिश्रण मिलता है।
    इस बदलाव में OTT platforms का भी बड़ा योगदान है। ओटीटी ने फिल्ममेकर्स को ज्यादा स्वतंत्रता दी है, जिससे वे अपनी कहानियों को विस्तार से दिखा पा रहे हैं। खासकर पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियां वेब सीरीज के रूप में दर्शकों तक बेहतर तरीके से पहुंच रही हैं। धीरे-धीरे आगे बढ़ने वाली इन कहानियों से दर्शकों का जुड़ाव भी मजबूत होता है।
    कुल मिलाकर, दर्शकों की बदलती पसंद ने फिल्म इंडस्ट्री को एक नई दिशा दी है, जहां कंटेंट, संस्कृति और भव्यता का संतुलन बनाकर ऐसी कहानियां पेश की जा रही हैं, जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि एक यादगार अनुभव बन जाती हैं।
  • हनुमान जी को मिला था शक्ति भूलने का श्राप, इसके पीछे की पौराणिक कहानी

    हनुमान जी को मिला था शक्ति भूलने का श्राप, इसके पीछे की पौराणिक कहानी


    नई दिल्ली। मंगलवाल का दिन हनुमान जी की पूजा अर्चना के लिए बहुत ही खास होता है। इस दिन व्रत रहने से आपके ऊपर उनकी कृपा बानी रहती है। कहा जाता हैं कि, बचपन से ही हनुमान जी को कई सिद्धियां और चमत्कारी शक्तियां प्राप्त थीं। उनके पास असीम शक्तियां थीं। वे पहाड़ उठा सकते थे, समुद्र लांघ सकते थे और सूरज को निगल सकते थे।लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि वो अपनी शक्तियां को ही भूल गए तो चलिए इससे जुड़ी कथा जानते हैं।

    हनुमान जी को मिला था ऐसा श्राप
    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी बचपन से ही अत्यंत शक्तिशाली, तेजस्वी और चंचल स्वभाव के थे। वे अपनी दिव्य शक्तियों का प्रयोग खेल-खेल में ही करने लगते थे। कभी वे ऋषि-मुनियों के आश्रमों में पहुंच जाते, तो कभी उनकी साधना में बाधा डालते।

    एक बार कई महान ऋषि-मुनि वन में तपस्या कर रहे थे। तभी बाल स्वरूप हनुमान जी वहां पहुंचे और अपनी चंचलता के कारण उन्होंने ऋषियों को परेशान करना शुरू कर दिया।ऋषियों ने पहले तो उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब वे नहीं माने, तब उन्हें क्रोध आ गया।तब ऋषियों ने हनुमान जी को श्राप दिया कि वे अपनी सारी दिव्य शक्तियों को भूल जाएंगे।

    श्राप का ये था तोड़
    यह श्राप पूर्ण रूप से दंड देने के लिए नहीं था, बल्कि उनके हित में ही था। ऋषियों ने यह भी कहा कि जब कोई उन्हें उनकी शक्तियों की याद दिलाएगा, तब वे पुनः अपनी शक्ति को पहचान लेंगे और उसका उपयोग धर्म के कार्यों में करेंगे।

    नारद मुनि और जामवंत ने याद दिलाई थी शक्तियां
    जब भगवान राम की सेवा का समय आया और सीता माता की खोज के लिए समुद्र पार करना था, तब हनुमान जी अपनी शक्ति को भूल चुके थे। उस समय नारद मुनि और जामवंत ने उन्हें उनकी शक्तियों का स्मरण कराया। तभी हनुमान जी को अपनी अपार शक्ति का बोध हुआ और उन्होंने विशाल रूप धारण कर समुद्र लांघ लिया। इसके बाद उन्होंने राम भगवान की।

  • सदीभर का सिनेमाई सफर कैसे रामायण ने हर दौर में जीता दर्शकों का दिल

    सदीभर का सिनेमाई सफर कैसे रामायण ने हर दौर में जीता दर्शकों का दिल


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में रामायण केवल एक कहानी नहीं बल्कि भावनाओं आस्था और सांस्कृतिक पहचान का आधार रही है यही कारण है कि सिनेमा की शुरुआत से लेकर आज के आधुनिक दौर तक यह महाकाव्य लगातार नए रूपों में दर्शकों के सामने आता रहा है और हर बार उतनी ही गहराई से लोगों के दिलों को छूता है

    इस सफर की शुरुआत साल 1917 में हुई जब दादासाहेब फाल्के ने मूक फिल्म लंका दहन बनाई उस दौर में तकनीक सीमित थी लेकिन आस्था असीम थी इस फिल्म में अण्णा सालुंके ने राम और सीता दोनों की भूमिका निभाई जो अपने आप में अनोखा प्रयोग था यह फिल्म भारतीय सिनेमा की शुरुआती सफलताओं में शामिल हुई और इसने पौराणिक कथाओं को परदे पर लाने की परंपरा शुरू की

    इसके बाद दशकों तक इस महागाथा पर फिल्में बनती रहीं राम राज्य जैसी फिल्में अपने समय की बड़ी हिट साबित हुईं जबकि संपूर्ण रामायण ने पूरी कथा को विस्तार से दिखाने की कोशिश की आगे चलकर रामायण द लीजेंड ऑफ प्रिंस रामा जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की एनीमेशन फिल्म ने इस कहानी को वैश्विक पहचान दिलाई वहीं हनुमान बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय हुई

    अगर कुल आंकड़ों की बात करें तो मुख्य कथा पर लगभग पचास फिल्में बन चुकी हैं जबकि अलग अलग पात्रों और घटनाओं को जोड़कर यह संख्या साठ से ज्यादा हो जाती है एनीमेशन और लघु फिल्मों को मिलाकर यह आंकड़ा करीब दो सौ तक पहुंचता है जो इस बात का प्रमाण है कि हर दौर इस कथा को अपने तरीके से जीना चाहता है

    टीवी की दुनिया में रामानंद सागर की रामायण ने इतिहास रच दिया अरुण गोविल दीपिका चिखलिया और सुनील लहरी द्वारा निभाए गए किरदार इतने लोकप्रिय हुए कि दर्शकों ने उन्हें पूजनीय मान लिया 1987 से 1988 के बीच प्रसारित इस शो के दौरान सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था और 2020 में दोबारा प्रसारण के समय भी इसने रिकॉर्ड तोड़ दिए

    इसके बाद भी कई टीवी शोज आए जैसे सीता के राम और श्रीमद रामायण कुल मिलाकर हिंदी में कई बड़े और छोटे संस्करण बनाए जा चुके हैं जो इस कथा की निरंतर लोकप्रियता को दर्शाते हैं

    अब एक बार फिर यह महाकाव्य बड़े स्तर पर लौट रहा है निर्देशक नितेश तिवारी की नई फिल्म रामायण में रणबीर कपूर साई पल्लवी यश सनी देओल जैसे बड़े कलाकार नजर आएंगे इसे वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की तैयारी है और इसका पहला भाग दिवाली 2026 में रिलीज होगा

    असल में रामायण की शक्ति इसकी कालातीतता में है इसमें त्याग कर्तव्य प्रेम और धर्म जैसे जीवन के मूल मूल्य समाहित हैं यही वजह है कि तकनीक बदलती है माध्यम बदलते हैं लेकिन यह कथा हर पीढ़ी के लिए नई बनी रहती है और आगे भी यूं ही प्रेरणा देती रहेगी

  • ‘रामायण’ में ‘पंचायत’ के प्रह्लाद चा की एंट्री? कुंभकर्ण के रोल में नजर आ सकते हैं फैसल मलिक

    ‘रामायण’ में ‘पंचायत’ के प्रह्लाद चा की एंट्री? कुंभकर्ण के रोल में नजर आ सकते हैं फैसल मलिक


    मुंबई। निर्देशक नितेश तिवारी (Nitesh Tiwari) की मेगा बजट फिल्म रामायण (Ramayana) को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है। फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसके बजट, तकनीक और स्टार कास्ट को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं।

    फिल्म में रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की भूमिका निभाते नजर आएंगे, जबकि Sai Pallavi माता सीता का किरदार निभाएंगी। वहीं Yash रावण और Sunny Deol हनुमान की भूमिका में दिखाई देंगे।

    कुंभकर्ण के रोल में फैसल मलिक!

    रिपोर्ट्स के मुताबिक लोकप्रिय वेब सीरीज Panchayat में ‘प्रह्लाद चा’ का किरदार निभाने वाले अभिनेता Faisal Malik को फिल्म में रावण के भाई कुंभकर्ण की भूमिका के लिए चुना गया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने इस किरदार के लिए फिल्म का पहला शेड्यूल भी पूरा कर लिया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई के प्राइम फोकस स्टूडियो में कुंभकर्ण के इंट्रोडक्शन सीन की शूटिंग की गई, जिसमें रावण की भूमिका निभा रहे यश भी मौजूद थे। सूत्रों का कहना है कि फैसल मलिक की लंबाई और व्यक्तित्व इस किरदार के लिए बिल्कुल फिट बैठते हैं।

    इंटरनेशनल टीम के साथ शूटिंग

    बताया जा रहा है कि फिल्म के कई हिस्सों की शूटिंग एक इंटरनेशनल तकनीकी टीम के साथ की जा रही है। हाई-एंड वीएफएक्स और ग्राफिक्स के जरिए इसे बड़े पैमाने पर तैयार किया जा रहा है, जिसकी तुलना James Cameron की फिल्म Avatar जैसी भव्य फिल्मों से की जा रही है। हालांकि दूसरे भाग के बड़े युद्ध दृश्यों की शूटिंग अभी बाकी है।

    दिवाली 2026 पर रिलीज की तैयारी

    रिपोर्ट्स के अनुसार ‘रामायण’ का पहला भाग Diwali 2026 के आसपास रिलीज किया जा सकता है, जिसे लेकर फैंस के बीच काफी उत्सुकता है।

    हालांकि अब तक फैसल मलिक की कास्टिंग को लेकर फिल्म की टीम की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में Raghav Juyal के रावण के बेटे मेघनाद की भूमिका निभाने की भी चर्चा है, लेकिन इसकी भी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    फिल्म में Ravi Dubey, Kajal Aggarwal, Arun Govil, Rakul Preet Singh और Lara Dutta जैसे कलाकारों के भी शामिल होने की खबरें सामने आ चुकी हैं।

  • शबरी जयंती पर CM डॉ. मोहन यादव ने दी शुभकामनाएं, मां शबरी को भक्ति की मिसाल बताया

    शबरी जयंती पर CM डॉ. मोहन यादव ने दी शुभकामनाएं, मां शबरी को भक्ति की मिसाल बताया


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मां शबरी जयंती के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम की परम भक्त मां शबरी ने आस्था, श्रद्धा और भक्ति को जीवन का सर्वोच्च मार्ग बताया। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि मां शबरी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा है और उनके आदर्शों को आत्मसात करना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मां शबरी ने अपनी साधना और भक्ति के माध्यम से यह सिखाया कि सच्ची भक्ति में जाति, वर्ग या सामाजिक स्थिति का कोई महत्व नहीं होता। उन्होंने कहा कि मां शबरी का जीवन संदेश है कि श्रद्धा और समर्पण से हर मुश्किल आसान हो जाती है। मुख्यमंत्री ने मां से प्रार्थना की कि उनकी कृपा सभी पर बनी रहे और देश-समाज में शांति, समृद्धि और सुख-शांति बनी रहे।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शबरी जयंती का पर्व हमें प्रेम, धैर्य और सेवा की भावना से प्रेरित करता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस पावन दिन पर भगवान श्रीराम और मां शबरी की भक्ति में लीन होकर अपने जीवन को सकारात्मक बनाएं और समाज में भाईचारे का संदेश फैलाएं।