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  • तकनीक और आस्था का अद्भुत संगम, मैग्नेटिक रामायण में छूते ही सुनाई देती हैं रामचरितमानस की चौपाइयां

    तकनीक और आस्था का अद्भुत संगम, मैग्नेटिक रामायण में छूते ही सुनाई देती हैं रामचरितमानस की चौपाइयां


    ग्वालियर । ग्वालियर के स्वदेशी मेले में इस बार धार्मिक आस्था और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। मेले में रखी गई मैग्नेटिक रामायण लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस खास पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें लिखी रामचरितमानस की चौपाइयों और श्रीमद्भागवत के श्लोकों को छूते ही उनका पाठ सुनाई देने लगता है। इससे श्रद्धालुओं को धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने के साथ साथ सुनने का अवसर भी मिल रहा है। पारंपरिक धार्मिक साहित्य को तकनीक की मदद से लोगों तक पहुंचाने का यह प्रयास खास तौर पर बच्चों और बुजुर्गों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

    छूते ही सुनाई देने लगता है चौपाइयों का पाठ

    बोलने वाली रामायण की खासियत के बारे में वंदना भदौरिया ने बताया कि इसमें रामचरितमानस की चौपाइयां और श्रीमद्भागवत के श्लोक मुद्रित हैं। पुस्तक में विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके माध्यम से पाठक किसी चौपाई या श्लोक को छूते हैं तो उससे संबंधित पाठ सुनाई देने लगता है। इस सुविधा के कारण लोगों को धार्मिक ग्रंथों का पाठ सुनने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। वे अपनी पसंद की चौपाई या श्लोक चुनकर उसका पाठ सुन सकते हैं।

    धार्मिक ग्रंथों में कई बार शब्दों के सही उच्चारण और उनके भाव को समझना लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। पाठ सुनने से लोगों को शब्दों का उच्चारण समझने और धार्मिक साहित्य से जुड़ने में मदद मिलती है। जो लोग नियमित रूप से रामचरितमानस या श्रीमद्भागवत का पाठ करना चाहते हैं उनके लिए भी यह पुस्तक एक अलग अनुभव प्रदान करती है।

    बच्चों और बुजुर्गों के लिए खास सुविधा

    मैग्नेटिक रामायण की यह तकनीक अलग अलग उम्र के लोगों के लिए उपयोगी है। छोटे बच्चों को धार्मिक चौपाइयों और श्लोकों से परिचित कराने में यह तरीका मददगार हो सकता है। बच्चे पुस्तक में लिखे पाठ को देखकर और उसे सुनकर धार्मिक साहित्य के प्रति रुचि विकसित कर सकते हैं। वहीं बुजुर्गों और उन लोगों के लिए भी यह सुविधा लाभकारी है जिन्हें धार्मिक ग्रंथ पढ़ने में कठिनाई होती है।

    पुस्तक को छूकर पाठ सुनने की सुविधा धार्मिक साहित्य को अधिक सहज और सरल बनाती है। इसमें पाठक अपनी पसंद के हिस्से को सुन सकते हैं और अपनी सुविधा के अनुसार समय दे सकते हैं। इस तरह पढ़ने और सुनने का मेल धार्मिक ग्रंथों को समझने का एक नया तरीका प्रस्तुत करता है।

    परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास

    आमतौर पर धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन पढ़कर या किसी व्यक्ति से पाठ सुनकर किया जाता है। लेकिन मैग्नेटिक रामायण इस अनुभव को तकनीक के माध्यम से अलग रूप देती है। इसमें धार्मिक ग्रंथों की पारंपरिक सामग्री के साथ ऐसी सुविधा जोड़ी गई है जिससे पाठक सीधे चौपाइयों और श्लोकों का पाठ सुन सकते हैं।

    स्वदेशी मेले में इस पुस्तक को देखने और इसकी कार्यप्रणाली समझने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। यह पहल दिखाती है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है। मैग्नेटिक रामायण केवल एक पुस्तक के रूप में ही नहीं बल्कि पढ़ने और सुनने को जोड़ने वाले माध्यम के रूप में भी लोगों का ध्यान खींच रही है।

  • रामचरितमानस पर सपा का बदला रुख: अखिलेश यादव ने इसे बताया ‘सांस्कृतिक संविधान’, यूपी की राजनीति में फिर गरमाई बहस

    रामचरितमानस पर सपा का बदला रुख: अखिलेश यादव ने इसे बताया ‘सांस्कृतिक संविधान’, यूपी की राजनीति में फिर गरमाई बहस




    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर रामचरितमानस को लेकर समाजवादी पार्टी का रुख चर्चा में है। लोकसभा चुनाव से पहले जिस मुद्दे पर सपा के भीतर विवाद और राजनीतिक टकराव देखने को मिला था, अब उसी पर पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का रुख काफी नरम और अलग नजर आ रहा है।

    हाल ही में लखनऊ में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक वकील के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद मामला फिर सुर्खियों में आया। बताया गया कि वकील के हाथ में रामचरितमानस की प्रति थी। इसी घटना के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए रामचरितमानस को “सांस्कृतिक संविधान का एक रूप” और “नैतिक आचार संहिता” बताया, जिससे राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है।

    पहले विवाद, अब नया रुख
    लोकसभा चुनाव 2024 से पहले समाजवादी पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस के कुछ दोहों को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने इन दोहों को महिलाओं, दलितों और पिछड़ों के प्रति अपमानजनक बताते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी। इस बयान के बाद बीजेपी ने सपा पर तीखा हमला बोला था और मामला राजनीतिक रूप से काफी गरमा गया था।

    बाद में यह विवाद इतना बढ़ा कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उस समय अखिलेश यादव ने इस पूरे विवाद पर खुलकर कोई सख्त रुख नहीं अपनाया था, लेकिन अब उनका बदला हुआ स्टैंड राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    चुनावी रणनीति या जनभावना का असर?
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी अपनी छवि को व्यापक जनसमर्थन के अनुरूप ढालने की कोशिश कर रही है। रामचरितमानस जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर नरम रुख अपनाकर सपा आम मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

    वहीं बीजेपी का आरोप है कि सपा राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए अब धार्मिक प्रतीकों का सहारा ले रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे हैं, वे अब धार्मिक ग्रंथों का सम्मान दिखा रहे हैं।

    विपक्ष और सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया
    इस मुद्दे पर कांग्रेस ने अखिलेश यादव के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि रामचरितमानस भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का हिस्सा है और इसे राजनीति से अलग रखकर देखा जाना चाहिए। वहीं बसपा ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी से दूरी बनाए रखी है।

    यूपी की सियासत में नया मोड़
    रामचरितमानस को लेकर सपा के बदले सुर ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सांस्कृतिक और धार्मिक विमर्श को केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों में यह मुद्दा सियासी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।फिलहाल यह साफ है कि यूपी की राजनीति में धर्म और संस्कृति एक बार फिर रणनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा बनते जा रहे हैं।

  • क्यों हनुमान जी थे लक्ष्मण से भी प्रिय प्रभु श्री राम के लिए? पढ़ें यह भावुक प्रसंग

    क्यों हनुमान जी थे लक्ष्मण से भी प्रिय प्रभु श्री राम के लिए? पढ़ें यह भावुक प्रसंग


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में मंगलवार का दिन विशेष रूप से शक्ति भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यह दिन प्रभु श्री राम के परम भक्त हनुमान जी को समर्पित है। गोस्वामी तुलसीदास की काव्य कृति श्रीरामचरितमानस के किष्किंधा कांड में एक ऐसा भावुक प्रसंग मिलता हैजो श्री राम और हनुमान जी के अटूट प्रेम को दर्शाता है। इस प्रसंग में श्री राम ने हनुमान जी को अपने छोटे भाई लक्ष्मण से भी दोगुना प्रिय बताया है। आइए जानेंआखिर क्यों हनुमान जी थे श्री राम के लिए लक्ष्मण से भी अधिक प्रिय।

    ऋष्यमूक पर्वत पर हनुमान जी से पहली मुलाकात

    जब श्री राम और लक्ष्मण माता सीता की खोज में वन-वन भटक रहे थेतो वे किष्किंधा के ऋष्यमूक पर्वत के पास पहुंचे। वहां वानरराज सुग्रीवजो पहले ही बाली से भयभीत थेउन्हें देखकर डर गए। उन्हें संदेह हुआ कि कहीं ये दोनों प्रभु श्री राम के विरोधी तो नहीं हैं। इस कारण सुग्रीव ने हनुमान जी को ब्राह्मण का रूप धारण कर भेजाताकि वह यह पता कर सकें कि ये दोनों व्यक्ति कौन हैं।हनुमान जी ने ब्राह्मण का रूप अपनाया और श्री राम से उनका परिचय पूछा। जब श्री राम ने कहा कि वे दशरथ के पुत्र हैं और माता सीता की खोज में निकले हैंतब हनुमान जी ने तुरंत अपना असली रूप प्रकट किया और श्री राम के चरणों में गिर पड़े। इस घटना ने श्री राम और हनुमान जी के बीच के अटूट प्रेम की शुरुआत की।

    मम प्रिय लक्ष्मण ते दूना – जब श्री राम भावुक हुए

    हनुमान जीजो अपने प्रभु से मिलकर अत्यधिक भावुक हो गए थेउन्होंने अपनी भूल के लिए श्री राम से क्षमा मांगी। हनुमान जी ने कहाहे भगवान! मैं मूर्ख हूंलेकिन आपने मुझे क्यों नहीं पहचाना? इस पर श्री राम ने हनुमान जी को गले से लगा लिया और कहा:सुनु कपि जियँ मानसि जनि ऊना। तैं मम प्रिय लछिमन ते दूना॥ समदरसी मोहि कह सब कोऊ। सेवक प्रिय अनन्य गति सोऊ॥अर्थ: श्री राम ने कहाहे हनुमान! अपने मन में कोई ग्लानि मत लाओ। तुम मुझे लक्ष्मण से भी दो गुने प्रिय हो। भले ही दुनिया मुझे समदर्शी कहेलेकिन मुझे वह सेवक सबसे प्रिय है जो पूरी तरह से मेरे शरण में रहता है और अनन्य भाव से समर्पित होता है।

    हनुमान जी क्यों थे श्री राम के लिए इतने प्रिय

    लक्ष्मण जीश्री राम के छोटे भाई थे और वे हमेशा उनके साथ रहते थेलेकिन हनुमान जी ने स्वयं को एक सेवक के रूप में पूरी तरह से समर्पित कर दिया था। शास्त्रों के अनुसारजो भक्त अपना अहंकार त्यागकर पूरी तरह से ईश्वर के शरण में रहता हैवह उनके लिए परिवार से भी बढ़कर होता है। यही कारण है कि हनुमान जी को श्री राम ने भरत सम भाई और लक्ष्मण से दूना प्रिय कहा।

    मंगलवार और हनुमान जी का विशेष संबंध

    यह मान्यता है कि हनुमान जी और श्री राम की पहली मुलाकात मंगलवार के दिन हुई थीइसलिए यह दिन हनुमान जी के साथ-साथ श्री राम की पूजा के लिए भी विशेष माना जाता है। बड़ा मंगल और बुढ़वा मंगल जैसे पर्व भी इसी दिन के साथ जुड़ी हुई हैंजो दर्शाते हैं कि प्रभु और भक्त का यह मिलन उसी समय हुआ था। इस प्रसंग से यह साफ होता है कि हनुमान जी का श्री राम के प्रति समर्पण और प्रेम अत्यधिक गहरा थाऔर इसीलिए श्री राम ने उन्हें अपने हृदय से लगाया और उन्हें लक्ष्मण से भी प्रिय माना।