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  • रीलबाजी से लेकर सड़क पर विरोध तक, मध्यप्रदेश की राजनीति के तीन वीडियो बने चर्चा का विषय

    रीलबाजी से लेकर सड़क पर विरोध तक, मध्यप्रदेश की राजनीति के तीन वीडियो बने चर्चा का विषय


    मध्यप्रदेश। । मध्यप्रदेश की राजनीति में मंगलवार का दिन कई ऐसे घटनाक्रमों का गवाह बना जिन्होंने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस छेड़ दी। कहीं मंत्री खेत में हल चलाते नजर आए तो कहीं विधायक कार्यकर्ताओं के दिए गुलदस्ते फेंकते दिखाई दिए। दूसरी ओर मुख्यमंत्री के काफिले के लिए ट्रैफिक रोके जाने से नाराज लोगों ने वीआईपी संस्कृति पर सवाल उठाए। इन तीनों घटनाओं ने आम लोगों के बीच शासन व्यवस्था नेताओं की कार्यशैली और जनता की अपेक्षाओं को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी।

    बड़वानी दौरे के दौरान प्रदेश के मंत्री गौतम टेटवाल अचानक सड़क किनारे एक खेत में पहुंच गए और किसानों की तरह बैलों के साथ हल चलाने लगे। इस दौरान कैमरे भी चालू रहे और पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारित किया गया। हालांकि यह प्रयास उस समय चर्चा का विषय बन गया जब बैलों की रफ्तार तेज होने पर मंत्री उनके पीछे खिंचते चले गए और उनका संतुलन बिगड़ गया। यह वीडियो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    वीडियो सामने आने के बाद लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे किसानों से जुड़ने का प्रयास बताया तो कई लोगों ने इसे केवल प्रचार और रीलबाजी करार दिया। कई यूजर्स का कहना था कि किसानों की वास्तविक समस्याओं जैसे खाद बीज सिंचाई और फसल की कीमतों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। वहीं कुछ लोगों ने मंत्री के प्रयास को सकारात्मक बताते हुए इसे खेतों से जुड़ाव का प्रतीक भी माना।

    इसी दिन भोपाल से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा का भी एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। जन्मदिन के अवसर पर समर्थक उन्हें लगातार गुलदस्ते भेंट कर रहे थे लेकिन विधायक उन्हें लेते ही एक ओर रख या फेंकते नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने इसे कार्यकर्ताओं की भावनाओं के प्रति असम्मान बताया जबकि कुछ लोगों का कहना था कि बड़ी संख्या में आए समर्थकों के कारण गुलदस्ते संभालना संभव नहीं था इसलिए ऐसा दृश्य दिखाई दिया।

    उधर ग्वालियर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के काफिले के गुजरने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के तहत कुछ समय के लिए ट्रैफिक रोक दिया गया। इससे सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और लोगों को इंतजार करना पड़ा। कई वाहन चालकों ने नाराजगी जताई और हॉर्न बजाकर विरोध दर्ज कराया। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया जिसमें वीआईपी मूवमेंट के कारण आम नागरिकों को होने वाली असुविधा पर सवाल उठाए गए। कुछ स्थानों पर लोगों और पुलिस के बीच बहस भी देखने को मिली।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि जनप्रतिनिधियों की सार्वजनिक गतिविधियों और आम जनता की अपेक्षाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। सोशल मीडिया के दौर में नेताओं का हर कदम कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाता है और उस पर तुरंत प्रतिक्रिया भी सामने आने लगती है। ऐसे में राजनीतिक व्यक्तित्वों के व्यवहार और सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर लोगों की संवेदनशीलता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों का जनता से संवाद और जुड़ाव महत्वपूर्ण है लेकिन साथ ही सार्वजनिक आचरण और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में जनता की सुविधा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यही कारण है कि दिनभर की इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया और सोशल मीडिया पर भी लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहीं।

  • किसानों के अनाज से सजी पीएम मोदी की भव्य रंगोली, 12 साल के कार्यकाल पर भोपाल में विशेष आयोजन

    किसानों के अनाज से सजी पीएम मोदी की भव्य रंगोली, 12 साल के कार्यकाल पर भोपाल में विशेष आयोजन


    मध्यप्रदेश । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने और देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी भोपाल में भाजपा द्वारा एक विशेष और अनूठा आयोजन किया गया। शहर के नीलबड़ स्थित दुर्गा माता मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों के अनाज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशाल और आकर्षक रंगोली बनाई गई, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

    इस आयोजन की पहल भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने की। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन स्थल पर सुबह से ही भाजपा कार्यकर्ताओं, किसानों और स्थानीय नागरिकों की बड़ी संख्या जुटने लगी थी। धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल के बीच प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को याद किया गया।

    कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण किसानों के अनाज से तैयार की गई रंगोली रही। इस रंगोली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया। रंगोली के निर्माण में विभिन्न प्रकार के अनाज का उपयोग किया गया, जो देश के अन्नदाताओं के सम्मान और कृषि क्षेत्र के महत्व को भी प्रदर्शित करता है। उपस्थित लोगों ने इस अनूठी कलाकृति की सराहना करते हुए इसे प्रधानमंत्री और किसानों के बीच मजबूत संबंध का प्रतीक बताया।

    कार्यक्रम के दौरान सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और भाजपा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इसके पश्चात मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और आरती संपन्न हुई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ, दीर्घायु और सफल जीवन की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने देश की प्रगति, समृद्धि और विकास के लिए भी प्रार्थना की।

    विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने विकास, सुशासन और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। उन्होंने बताया कि किसानों द्वारा उपलब्ध कराए गए अनाज से रंगोली बनाकर अन्नदाता वर्ग की भावनाओं को भी सम्मान दिया गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रधानमंत्री के कार्यों के प्रति आभार व्यक्त करना और जनभागीदारी के माध्यम से उनके योगदान को याद करना था।

    उधर, भाजपा के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने नेहरू नगर स्थित करुणाधाम आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यहां ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया गया। इस अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी, किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा, जिला अध्यक्ष रविंद्र यति, प्रदेश सह-मीडिया प्रभारी बृजगोपाल लोया सहित अनेक भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

    धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता के संदेश के साथ आयोजित यह कार्यक्रम भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण जनसंपर्क अभियान भी साबित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।

  • वंदे मातरम की अनिवार्यता पर सियासत तेज, BJP का कांग्रेस पर हमला कांग्रेस ने किया पलटवार

    वंदे मातरम की अनिवार्यता पर सियासत तेज, BJP का कांग्रेस पर हमला कांग्रेस ने किया पलटवार


    भोपाल । वंदे मातरम की अनिवार्यता को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम अनिवार्य किए जाने के निर्देश जारी होने के बाद बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं।

    बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जिन्ना के सामने घुटने टेक दिए थे और मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम को अनिवार्य नहीं किया। शर्मा ने कहा कि जिस दिन वंदे मातरम के जयघोष के साथ देश को आजादी मिली, उसी दिन इसे अनिवार्य कर देना चाहिए था, लेकिन कांग्रेस ने इसकी अनिवार्यता समाप्त कर दी और इसके कई अंश हटा दिए।

    मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी वंदे मातरम को देश के लिए मंत्र बताते हुए कहा कि इसे बहुत पहले अनिवार्य हो जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश में कई सुधार कर रहे हैं और यह भी उसी दिशा में एक कदम है।

    वहीं कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। कांग्रेस नेता और पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि वंदे मातरम हमेशा से कार्यक्रमों का हिस्सा रहा है और यह आजादी की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि जो लोग आजादी की लड़ाई में शामिल नहीं थे, वे आज राष्ट्रभक्ति का प्रमाण पत्र बांट रहे हैं। शर्मा ने आरोप लगाया कि मदरसों के नाम पर राजनीति की जा रही है, जबकि वहां भी वंदे मातरम गाया जाता है।

    कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि वंदे मातरम के सम्मान पर कभी आपत्ति नहीं रही, लेकिन कुछ शब्दों को लेकर पहले आपत्तियां थीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत का सम्मान सभी करते हैं, लेकिन गाने या न गाने का प्रश्न व्यक्तिगत और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है।

    केंद्र सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, राष्ट्रपति और राज्यपाल के कार्यक्रमों सहित सभी सरकारी आयोजनों में वंदे मातरम अनिवार्य होगा। तिरंगा फहराने के अवसर पर भी इसे गाया जाएगा। निर्देशों में छह अंतरों वाला पूरा संस्करण शामिल करने, जन गण मन से पहले वंदे मातरम बजाने और सम्मान में खड़ा होना अनिवार्य करने की बात कही गई है। इसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है। इन निर्देशों के बाद प्रदेश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।