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  • शिप्रा आरती में विवाद ने लिया हिंसक रूप, पूजन सामग्री बेचने को लेकर पुजारियों और महिलाओं के बीच हाथापाई, वायरल वीडियो जांच के दायरे में

    शिप्रा आरती में विवाद ने लिया हिंसक रूप, पूजन सामग्री बेचने को लेकर पुजारियों और महिलाओं के बीच हाथापाई, वायरल वीडियो जांच के दायरे में

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन स्थित रामघाट पर होने वाली प्रसिद्ध शिप्रा आरती के दौरान पूजन सामग्री बेचने को लेकर महिलाओं और पुजारियों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। घटना में दोनों पक्षों के कई लोगों को चोटें आई हैं। मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वायरल वीडियो को भी साक्ष्य के रूप में जांच में शामिल किया गया है।

    जानकारी के अनुसार घटना रविवार शाम उस समय हुई जब रामघाट पर प्रतिदिन की तरह शिप्रा आरती संपन्न हो रही थी। आरती समाप्त होने के बाद दीपक और अन्य पूजन सामग्री बेचने को लेकर महिलाओं और पुजारियों के बीच कहासुनी शुरू हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ ही देर में विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच हाथापाई होने लगी। घटनास्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    महिला पक्ष का आरोप है कि आरती के दौरान उन्हें पूजन सामग्री बेचने से रोका गया, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ। शिकायत में कहा गया है कि बहस के दौरान कथित रूप से गाली-गलौज की गई और विरोध करने पर पीतल की आरती से हमला किया गया। बीच-बचाव करने पहुंची अन्य महिलाओं के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है। घटना में कुछ महिलाओं को सिर और चेहरे पर चोटें आईं, जिनका उपचार कराया गया।

    दूसरी ओर पुजारी पक्ष ने भी महिलाओं पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आरती के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से महिलाओं को पूजन सामग्री बेचने से रोका गया था। इसी बात पर विवाद बढ़ गया और महिलाओं ने कथित रूप से उनके साथ धक्का-मुक्की तथा मारपीट की। पुजारियों का दावा है कि धक्का-मुक्की के दौरान उनके हाथ में मौजूद जलती हुई आरती उन्हीं पर गिर गई, जिससे उन्हें चोटें आईं।

    पुलिस के अनुसार इस झड़प में दोनों पक्षों के तीन से चार लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। किसी भी घायल की स्थिति गंभीर नहीं बताई गई है। घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल रहा, हालांकि स्थिति अब सामान्य है।

    सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दोनों पक्षों के बीच हाथापाई होती दिखाई दे रही है। वीडियो में कुछ लोग पीतल की आरती और अन्य सामान फेंकते हुए भी नजर आ रहे हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रहे घटनाक्रम का मिलान अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से किया जा रहा है, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा सके।

    महाकाल थाना पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर प्रकरण दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, वायरल वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के अनुरूप आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने धार्मिक स्थलों पर व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार के विवाद से बचने की अपील भी की है।

  • सोमवती अमावस्या पर उज्जैन में उमड़ा आस्था का सैलाब, शिप्रा तट पर कुंभ जैसा नजारा

    सोमवती अमावस्या पर उज्जैन में उमड़ा आस्था का सैलाब, शिप्रा तट पर कुंभ जैसा नजारा


    मध्यप्रदेश । धर्मनगरी उज्जैन में सोमवार को सोमवती अमावस्या के अवसर पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। अधिकमास के अंतिम दिन पड़े इस विशेष पर्व ने धार्मिक महत्व को और बढ़ा दिया, जिसके चलते तड़के से ही श्रद्धालुओं का सैलाब शिप्रा नदी के घाटों पर उमड़ पड़ा। Ram Ghat, दत्त अखाड़ा घाट और सोमकुंड पर सुबह से ही स्नान, पूजन और दान-पुण्य का क्रम शुरू हो गया, जिसने पूरे क्षेत्र को कुंभ मेले जैसी भव्यता प्रदान कर दी।

    श्रद्धालुओं ने पवित्र शिप्रा नदी में स्नान कर अपने आराध्य देवों की पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान, मंत्रोच्चार और पूजा-पाठ का वातावरण दिनभर बना रहा। दूर-दराज के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भी इस दुर्लभ अवसर का लाभ उठाया।

    धर्माचार्यों के अनुसार इस बार सोमवती अमावस्या का महत्व इसलिए और बढ़ गया है क्योंकि यह अधिकमास के अंतिम दिन पड़ रही है। धार्मिक मान्यता है कि जब अमावस्या सोमवार के दिन आती है तो उसका पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है। इसके साथ ही अमृत सिद्धि योग और अन्य शुभ संयोगों ने इस दिन को और भी विशेष बना दिया है।

    धार्मिक विद्वानों के अनुसार इस दिन किए गए स्नान, जप, तप, दान और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए धार्मिक कार्यों से पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    सोमवती अमावस्या के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की शांति और मोक्ष की कामना से तर्पण और श्राद्ध कर्म भी किए। शिप्रा तट पर सुबह से ही पंडितों और श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पितरों के निमित्त किए गए तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य से पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

    उधर, Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple सहित उज्जैन के प्रमुख मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही मंदिरों के बाहर लंबी कतारें लग गई थीं। श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन कर अपने परिवार और देश की खुशहाली की कामना की। मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए थे।

    ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार दोपहर सूर्य का वृषभ राशि से मिथुन राशि में प्रवेश भी एक विशेष परिवर्तन माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ग्रह-नक्षत्रों के इस परिवर्तन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।

    धर्माचार्यों का कहना है कि अधिकमास में यदि कोई व्यक्ति दान-पुण्य, व्रत या विशेष धार्मिक अनुष्ठान नहीं कर पाया हो तो सोमवती अमावस्या उसके लिए विशेष अवसर लेकर आती है। इस दिन श्रद्धा भाव से किए गए दान और सेवा कार्यों को अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इसी कारण श्रद्धालुओं ने अन्नदान, वस्त्रदान और अन्य धार्मिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।

    पूरे दिन उज्जैन की धार्मिक गलियों, मंदिरों और घाटों पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही। शिप्रा तट पर उमड़ी भीड़ और भक्तिभाव से सराबोर वातावरण ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि उज्जैन केवल एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है।

  • सिंहस्थ तैयारियों पर नजर: मुख्यमंत्री ने उज्जैन में किया निरीक्षण और लिया धार्मिक आशीर्वाद

    सिंहस्थ तैयारियों पर नजर: मुख्यमंत्री ने उज्जैन में किया निरीक्षण और लिया धार्मिक आशीर्वाद


    नई दिल्ली । उज्जैन दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को जय गुरुदेव आश्रम में पहुंचकर गुरुदेव उमाकांत महाराज से आशीर्वाद लिया और उनके प्रवचनों का श्रवण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि संतों और आश्रमों से मिलने वाली शिक्षा समाज को सही दिशा देती है और मानवता के प्रति समर्पण का मार्ग दिखाती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 महापर्व के लिए स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई धार्मिक स्थलों से जुड़े विकास कार्य जनभागीदारी से आगे बढ़ रहे हैं, जो एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

    आश्रम में गुरुदेव उमाकांत महाराज ने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारियों के बावजूद वे निरंतर आध्यात्मिक जुड़ाव बनाए हुए हैं और जनसेवा के कार्यों में सक्रिय हैं।

    आश्रम से निकलने के बाद मुख्यमंत्री रामघाट पहुंचे, जहां उन्होंने सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए चल रहे निर्माण और विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने घाट क्षेत्र के सौंदर्यीकरण, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की समीक्षा की।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य समयसीमा और गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार उज्जैन को न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • भीषण गर्मी ने छीनी चित्रकूट की रौनक, श्रद्धालुओं की कमी से ठप पड़ा स्थानीय कारोबार..

    भीषण गर्मी ने छीनी चित्रकूट की रौनक, श्रद्धालुओं की कमी से ठप पड़ा स्थानीय कारोबार..

    नई दिल्ली।धर्म नगरी चित्रकूट इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है, जहां तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के कारण जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। गर्म हवाओं और तेज धूप के चलते दिन चढ़ते ही सड़कों, घाटों और मंदिर परिसरों में सन्नाटा फैल जाता है। आमतौर पर श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहने वाला यह धार्मिक क्षेत्र अब सुनसान नजर आने लगा है, जिससे स्थानीय माहौल और अर्थव्यवस्था दोनों पर गहरा असर पड़ा है।

    रामघाट पर स्थिति सबसे अधिक प्रभावित दिखाई दे रही है, जहां सामान्य दिनों में सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है। लेकिन मौजूदा समय में सुबह 8 से 9 बजे के बाद ही यहां गतिविधियां लगभग समाप्त हो जाती हैं। भीषण गर्मी के कारण लोग लंबे समय तक बाहर रुकने से बच रहे हैं, जिससे घाटों और आसपास के मंदिरों में पहले जैसी रौनक नहीं रही।

    इस बदलाव का सीधा असर स्थानीय व्यापार पर पड़ रहा है। घाट किनारे छोटी-बड़ी दुकानों पर निर्भर दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की कमी के कारण उनकी बिक्री लगभग ठप हो गई है। कई दुकानदार सुबह दुकान खोलने के बाद दिन भर में बहुत कम बिक्री होने पर मजबूरन जल्दी दुकान बंद कर देते हैं। हालात ऐसे हैं कि कई बार दिन में बोहनी तक नहीं हो पा रही, जिससे रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।

    धार्मिक गतिविधियों पर भी गर्मी का असर साफ दिख रहा है। जहां पहले मंदिरों में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ रहती थी, अब वहां शांति और खालीपन नजर आता है। भजन-पूजन और धार्मिक वातावरण की रौनक कम हो गई है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ रही है। पर्यटन पर आधारित अर्थव्यवस्था होने के कारण इस कमी का असर सीधे आजीविका पर पड़ रहा है।

    स्थानीय व्यापारियों और लोगों का मानना है कि अगर घाटों पर छाया, ठंडे पेयजल और विश्राम की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो कुछ हद तक श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत मिल सकती है और उनकी आवाजाही बनी रह सकती है। फिलहाल स्थिति यह है कि तेज गर्मी के कारण चित्रकूट की धार्मिक और सांस्कृतिक रौनक अस्थायी रूप से थमती नजर आ रही है, और सभी को मौसम में बदलाव का इंतजार है।