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  • राम मंदिर दान चोरी की गोपनीय जानकारी लीक करने वाले तक पहुंची पुलिस, लखनऊ कनेक्शन भी सामने आया

    राम मंदिर दान चोरी की गोपनीय जानकारी लीक करने वाले तक पहुंची पुलिस, लखनऊ कनेक्शन भी सामने आया

    नई दिल्ली ।अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान चोरी मामले की जांच अब केवल चोरी की घटनाओं तक सीमित नहीं रह गई है। पुलिस की पड़ताल मंदिर और ट्रस्ट से जुड़ी गोपनीय जानकारियों के बाहर पहुंचने की कड़ी तक भी पहुंच गई है। जांच के दौरान पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों से पूछताछ की गई है और उनके बयान दर्ज किए गए हैं।

    पूछताछ से मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस उस व्यक्ति तक पहुंची है, जिस पर दान चोरी से संबंधित संवेदनशील जानकारी एक प्रमुख राजनीतिक नेता तक पहुंचाने का संदेह है। जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित व्यक्ति की नेता से संपर्क था और वह उनसे मिलने के लिए लखनऊ भी गया था।

    गोपनीय जानकारी लीक होने का मामला उस समय जांच के दायरे में आया, जब चढ़ावा चोरी की घटना के करीब एक महीने बाद ट्रस्ट पदाधिकारियों के बीच हुई बातचीत से जुड़ी जानकारियां सामने आईं। इस बातचीत में मंदिर और ट्रस्ट के भीतर की सूचनाओं के बाहर पहुंचने को लेकर चिंता जताई गई थी।

    इसके बाद पुलिस ने यह पता लगाने पर ध्यान केंद्रित किया कि मंदिर और ट्रस्ट से जुड़ी अंदरूनी जानकारी किस व्यक्ति के माध्यम से बाहर पहुंची। जांच के दौरान एक कर्मचारी के प्रमुख राजनीतिक नेता के संपर्क में रहने और उनसे मिलने के लिए लखनऊ जाने की जानकारी सामने आई।

    पुलिस अब इस जानकारी का मिलान अन्य उपलब्ध साक्ष्यों और पूछताछ में सामने आए तथ्यों से कर रही है। जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर संदिग्ध के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

    जांच का एक हिस्सा संदिग्ध की सोशल मीडिया गतिविधियों से भी जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, जुलाई के बाद उसके फेसबुक अकाउंट से कई पोस्ट हटा दी गईं। 28 जुलाई के बाद अकाउंट पर कोई नई पोस्ट भी नहीं की गई। पुलिस ने हटाई गई पोस्ट से संबंधित डेटा हासिल करने के लिए साइबर सेल की मदद ली है।

    जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि चढ़ावा चोरी की घटना के बाद संबंधित लोगों के बीच किस तरह संपर्क हुआ और उस दौरान कौन-कौन सी सूचनाएं साझा की गईं। सोशल मीडिया गतिविधियों और आपसी संपर्कों को जांच के उपलब्ध तथ्यों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    दान चोरी मामले में बैंक के संबंधित कर्मचारियों से भी पूछताछ पूरी की जा चुकी है। भारतीय स्टेट बैंक से जुड़े सभी संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं। इनमें तीन कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ की गई। इनमें से दो कर्मचारियों से मिली जानकारी को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पुलिस इन बयानों को अन्य साक्ष्यों के साथ मिलाकर मामले की पूरी कड़ी तैयार करने में जुटी है। जांच का उद्देश्य चोरी की घटना के साथ-साथ उससे जुड़ी सूचनाओं के संभावित लीक की भूमिका को भी स्पष्ट करना है।

    मामले की विवेचना अब अंतिम चरण में बताई जा रही है। पुलिस 25 सितंबर को आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में है। जांच के दौरान दो और नाम सामने आने की संभावना भी जताई गई है, हालांकि इन नामों को लेकर अंतिम कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

    22 सितंबर को आरोपियों की गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे हो रहे हैं। कानून के अनुसार, निर्धारित अवधि के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं होने की स्थिति में आरोपियों को जमानत का अधिकार मिल सकता है। इसलिए अब आरोपपत्र दाखिल होने और आरोपियों की जमानत से जुड़े घटनाक्रम पर भी नजर बनी हुई है।

  • राम मंदिर में चंदा चोरी का बड़ा खुलासा, CCTV में 105 घटनाएं आईं सामने; 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी

    राम मंदिर में चंदा चोरी का बड़ा खुलासा, CCTV में 105 घटनाएं आईं सामने; 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी

    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मामले की जांच से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने रखी गईं। जांच के दौरान मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली गई, जिसमें चंदा चोरी की 105 घटनाओं का पता चला है। इन घटनाओं से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई।

    जांच में CCTV फुटेज के अलावा गवाहों के बयान और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों को भी शामिल किया गया। रिकॉर्डिंग का बारीकी से विश्लेषण कर घटनाओं की परिस्थितियों को समझने और संबंधित लोगों की पहचान करने की कोशिश की गई। जांच में सामने आए अलग-अलग साक्ष्यों को आपस में मिलाकर मामले की कड़ियों को जोड़ने का काम किया गया है।

    अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि मंदिर में कीमती सामान से संबंधित रसीदें सॉफ्टवेयर के जरिए तैयार की जाती हैं। इन रसीदों को सुरक्षित रखने के लिए SBI लॉकर में रखा जाता है। जांच के दौरान रसीदों की व्यवस्था, रिकॉर्ड और अन्य जरूरी सामग्री को भी देखा गया। CCTV में सामने आई 105 घटनाएं अब मामले की जांच का अहम हिस्सा बन गई हैं।

    जांच की मौजूदा स्थिति के मुताबिक पड़ताल लगभग पूरी हो चुकी है। 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद संबंधित मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेंगे। इस समयसीमा को देखते हुए मामले की जांच और आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से जांच की स्टेटस रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। हालांकि अदालत ने रिपोर्ट देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि फिलहाल मामले को सेशन जज से अपने पास लेने की आवश्यकता नहीं है। अगर आगे किसी अतिरिक्त जांच की जरूरत महसूस होती है, तो उस संबंध में उचित आदेश जारी किया जा सकता है।

    चंदा चोरी के मामले के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। ट्रस्ट में CEO व्यवस्था लागू की गई है और पूर्व सैन्य अधिकारी जितेंद्र मिश्रा को मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। नई व्यवस्था के तहत प्रशासनिक कामकाज को नए तरीके से संचालित करने की तैयारी की गई है।

    मामले में पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिन की अवधि पूरी होने की तारीख भी अहम है। बताया गया कि 25 सितंबर को यह अवधि पूरी हो रही है। यदि निर्धारित समय तक चार्जशीट दाखिल नहीं होती है तो गिरफ्तार आरोपियों को कानून के तहत स्वत: जमानत मिलने की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से समय पर आरोप पत्र दाखिल करना जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अब 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल होने और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। CCTV में सामने आई 105 घटनाओं, गवाहों के बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • राम जन्मभूमि फैसले पर स्वरा भास्कर का पुराना बयान फिर चर्चा में, कहा था- मुस्लिम दोस्तों से माफी मांगी थी

    राम जन्मभूमि फैसले पर स्वरा भास्कर का पुराना बयान फिर चर्चा में, कहा था- मुस्लिम दोस्तों से माफी मांगी थी

    नई दिल्ली ।स्वरा भास्कर का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर दोबारा चर्चा में है। वीडियो में वह अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर नवंबर 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देती नजर आ रही हैं। अपने बयान में स्वरा ने कहा था कि वह फैसले से काफी दुखी और निराश हुई थीं। उन्होंने यह भी बताया था कि फैसले के बाद उन्होंने अपने परिचित मुस्लिम दोस्तों को संदेश भेजकर माफी मांगी थी।

    वीडियो में स्वरा भास्कर ने कहा था कि राम जन्मभूमि मामले में फैसला आने के बाद उन्हें लगा था कि यह फैसला उचित नहीं था। उन्होंने कहा था कि उस समय वह काफी नाराज थीं और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि देश में ऐसा फैसला कैसे आया। उन्होंने बताया था कि उनके फोन में मौजूद कई मुस्लिम परिचितों को उन्होंने संदेश भेजे थे।

    स्वरा के अनुसार, इन लोगों में शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान और फहाद अहमद समेत कई लोग शामिल थे। उन्होंने कहा था कि एक हिंदू होने के नाते वह अपने मुस्लिम परिचितों को यह बताना चाहती थीं कि फैसले को लेकर उन्हें खेद है और वह इससे सहमत नहीं हैं। उनके इस पुराने बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने स्वरा के बयान की आलोचना की और उनके पुराने रुख को लेकर सवाल उठाए। कई लोगों ने धार्मिक नारे और टिप्पणियां भी कीं। दूसरी ओर, कुछ समर्थकों ने उनके विचार व्यक्त करने के अधिकार का समर्थन किया। उनका तर्क रहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी नागरिक को न्यायिक फैसले पर अपनी व्यक्तिगत राय या असहमति व्यक्त करने का अधिकार है।

    राम जन्मभूमि विवाद पर स्वरा भास्कर पहले भी सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति जता चुकी थीं। 2019 में फैसले के बाद उनके बयानों को लेकर विवाद हुआ था। एक वकील की ओर से उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग किए जाने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, उस समय अटॉर्नी जनरल ने इस कार्रवाई की मांग से असहमति जताई थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को अयोध्या भूमि विवाद पर सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने विवादित 2.77 एकड़ भूमि पर मंदिर निर्माण के लिए अधिकार देने का फैसला किया था। साथ ही मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।

    फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 1949 में विवादित परिसर में मूर्तियां रखे जाने और 1992 में बाबरी मस्जिद के ढांचे को गिराए जाने को कानून का उल्लंघन बताया था। अदालत ने विवादित भूमि पर रामलला के अधिकार से संबंधित निष्कर्ष भी दर्ज किए थे। फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ।

    अब स्वरा भास्कर के पुराने बयान का वीडियो फिर सामने आने से उनके 2019 के रुख पर सोशल मीडिया में चर्चा हो रही है। बयान को लेकर आलोचना और समर्थन, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

  • राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, शिकायतों के बाद हटाए गए तीन कर्मचारियों की वापसी; संदीप गुप्ता को फिर मिली पुरानी जिम्मेदारी

    राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, शिकायतों के बाद हटाए गए तीन कर्मचारियों की वापसी; संदीप गुप्ता को फिर मिली पुरानी जिम्मेदारी

    नई दिल्ली । राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में बदलाव के बीच अलग-अलग शिकायतों और आरोपों के चलते मंदिर की जिम्मेदारियों से हटाए गए तीन कर्मचारियों की वापसी हो गई है। नए पूर्णकालिक महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के आगमन के बाद संदीप गुप्ता, केडी तिवारी और बजरंग पाठक को उनके पुराने दायित्वों के साथ बहाल किया गया है। इस फैसले के बाद मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं में पुराने कर्मचारियों की भूमिकाएं फिर से बहाल होने का सिलसिला सामने आया है।

    इन तीनों कर्मचारियों को अलग-अलग मामलों के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं से हटाया गया था। संदीप गुप्ता तीर्थ यात्री सेवा केंद्र में लॉकर व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। लॉकर में सामान रखने को लेकर एक विदेशी महिला से उनकी कहासुनी हुई थी, जिसके बाद महिला ने ट्रस्ट को शिकायत दी थी। शिकायत के आधार पर तत्कालीन अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने संदीप को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। जवाब से संतुष्ट नहीं होने के बाद उन्हें काम से हटा दिया गया था।

    संदीप गुप्ता शहीद कारसेवक वासुदेव गुप्ता के बेटे हैं। मंदिर में उन्हें काम दिए जाने के पीछे परिवार की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा गया था। नए पूर्णकालिक महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के आने के बाद संदीप की बहाली की सिफारिश की गई। इसके बाद उन्हें दोबारा उसी स्थान पर तैनात कर दिया गया और पुरानी जिम्मेदारी सौंप दी गई।

    दूसरी ओर, बजरंग पाठक प्रसाद व्यवस्था के प्रभारी थे। रामजन्मभूमि परिसर में तैनात एक महिला क्षेत्राधिकारी ने अपने मेहमानों के लिए प्रसाद दिलाने की सिफारिश की थी। बजरंग पाठक ने इसके लिए ट्रस्ट से आदेश लाने की बात कही और सिफारिश के आधार पर प्रसाद उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद क्षेत्राधिकारी ने ट्रस्ट से उनकी शिकायत की थी।

    शिकायत के बाद तत्कालीन अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने रामलला के आभूषणों और दानदाताओं से प्राप्त वस्तुओं की देखरेख करने वाले केडी तिवारी तथा प्रसाद व्यवस्था प्रभारी बजरंग पाठक को राम मंदिर से हटाकर बाग बिजैसी स्थित तीर्थ क्षेत्र पुरम भेज दिया था। केडी तिवारी ने वहां अपनी नई तैनाती पर काम शुरू कर दिया था, जबकि बजरंग पाठक ने आदेश का पालन नहीं किया और कारसेवक पुरम में सेवा देते रहे। इसके बाद उन्हें भी व्यवस्था से बाहर कर दिया गया था।

    अब स्वामी गोविंद देव गिरि के फैसले के बाद केडी तिवारी और बजरंग पाठक की भी राम मंदिर की पुरानी जिम्मेदारियों पर वापसी हो गई है। इससे मंदिर की व्यवस्थाओं में कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को लेकर नए प्रशासनिक दौर की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं।

    इस बीच चढ़ावा प्रकरण के बाद महासचिव पद से त्यागपत्र देने वाले विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपतराय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र भी तीर्थ यात्री सेवा केंद्र पहुंचे। दोनों ने कर्मचारियों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि किसी भी तरह की परेशानी या समस्या होने पर उन्हें इसकी जानकारी दी जाए। दोनों ने करीब एक घंटे तक सेवा केंद्र में कर्मचारियों के साथ समय बिताया।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में तीखी नोकझोंक, खरगे और किरेन रिजिजू आमने-सामने, विपक्ष का जोरदार हंगामा

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में तीखी नोकझोंक, खरगे और किरेन रिजिजू आमने-सामने, विपक्ष का जोरदार हंगामा

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को राम मंदिर चढ़ावा से जुड़े आरोपों को लेकर राज्यसभा में सरकार और विपक्ष के बीच तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब की मांग करते हुए सदन में जोरदार हंगामा किया, जबकि सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया। लगातार शोर-शराबे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही निर्धारित समय से पहले कई बार स्थगित करनी पड़ी।

    राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चर्चा के दौरान कहा कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन में केंद्र सरकार की भूमिका रही है और मंदिर निर्माण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि चढ़ावे से जुड़े आरोपों के मामले में संबंधित एजेंसियों की ओर से क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर सदन में स्पष्ट जवाब देने की मांग की।

    खरगे के वक्तव्य का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने अतीत में राम मंदिर आंदोलन और उससे जुड़े मुद्दों का विरोध किया था। रिजिजू ने आरोप लगाया कि अब वही दल इस मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सरकार किसी भी विषय पर तथ्यों के आधार पर जवाब देने के लिए तैयार है।

    सदन में लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही पहले कुछ समय के लिए स्थगित की गई और दोबारा शुरू होने के बाद भी व्यवधान जारी रहने पर फिर स्थगन करना पड़ा। विपक्षी दलों का कहना था कि राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े आरोपों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए और सरकार अपना पक्ष स्पष्ट करे। वहीं सत्तापक्ष ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने और राजनीतिक माहौल बनाने का आरोप लगाया।

    संसद भवन परिसर में भी इस मुद्दे को लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में कई विपक्षी नेता शामिल हुए और उन्होंने सरकार से कथित आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने तथा सदन में जवाब देने की मांग दोहराई। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने विभिन्न नारे लगाकर अपनी मांगों को सार्वजनिक रूप से उठाया। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि संसद में महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं और विपक्ष को चर्चा के लिए सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए।

    मॉनसून सत्र के दौरान विभिन्न राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार तथा विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। ऐसे में राम मंदिर चढ़ावा विवाद भी संसद के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो गया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर दोनों पक्षों के बीच बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल सदन के सुचारु संचालन और लंबित विधायी कार्यों को लेकर भी राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर विधान परिषद में बवाल, सपा का हंगामा, केशव मौर्य ने किया पलटवार

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर विधान परिषद में बवाल, सपा का हंगामा, केशव मौर्य ने किया पलटवार

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मानसून सत्र के पहले दिन श्रीराम मंदिर के दानपात्र से कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। समाजवादी पार्टी ने नियम-105 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर मामले पर चर्चा की मांग की। जैसे ही नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य जवाब देने के लिए खड़े हुए, सपा सदस्य वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। लगातार हंगामे के चलते सभापति ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

    कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। शोर-शराबे के बीच केशव प्रसाद मौर्य ने अपना पक्ष रखा। दोपहर 1:52 बजे सभापति ने कार्यस्थगन प्रस्ताव अस्वीकार करते हुए मामले को अग्रिम कार्रवाई के लिए सरकार को भेजने की घोषणा की। इसके बाद विपक्षी सदस्य अपनी सीटों पर लौटे और सदन की कार्यवाही सामान्य हो सकी।

    केशव मौर्य का विपक्ष पर पलटवार
    नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए एक रुपये का भी योगदान नहीं दिया, वे अब चढ़ावे की चोरी पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बाबरी मस्जिद के नाम पर जुटाए गए चंदे का हिसाब भी सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर मंदिरों के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि भविष्य में जनता इसका जवाब देगी।

    सपा ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
    समाजवादी पार्टी ने अपने कार्यस्थगन प्रस्ताव में आरोप लगाया कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के दानपात्र से हुई कथित चोरी वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है। विपक्ष का कहना था कि पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं रही और केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई की गई। विपक्ष के नेता लाल बिहारी यादव और सदस्य किरण पाल कश्यप ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़ी दान सामग्री की चोरी गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावी कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी है।

    अन्य मुद्दे भी उठे
    सदन में सदस्य राज बहादुर सिंह चंदेल ने शिक्षकों, कर्मचारियों और सेवानिवृत्त शिक्षकों को निशुल्क एवं कैशलेस चिकित्सा योजना में शामिल करने की मांग उठाई। इस पर नेता सदन ने कहा कि सरकार इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करेगी। राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर हुए इस विवाद ने मानसून सत्र के पहले ही दिन सदन का माहौल गर्मा दिया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर MP में सियासी हलचल, भोपाल में विहिप और बजरंग दल का प्रदर्शन आज

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर MP में सियासी हलचल, भोपाल में विहिप और बजरंग दल का प्रदर्शन आज


    मध्य प्रदेश। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर संसद के मानसून सत्र के दौरान हुए राजनीतिक विवाद की गूंज अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंच गई है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने शनिवार को इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि संसद परिसर में विपक्षी सांसदों द्वारा साधु वेश धारण कर किया गया सांकेतिक प्रदर्शन भगवान श्रीराम, संत समाज और करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था का अपमान है। इसी के विरोध में भोपाल में बड़ा मार्च निकाला जाएगा।

    विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के अनुसार प्रदर्शन दोपहर में व्यापम चौराहे से शुरू होगा और कांग्रेस कार्यालय तक जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, साधु-संत और सनातन धर्म से जुड़े लोग शामिल होंगे। प्रदर्शन के बाद संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा जा सकता है। आयोजकों का कहना है कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य धार्मिक भावनाओं के सम्मान और आस्था से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराना है।

    पूरा विवाद संसद के मानसून सत्र के दौरान उस समय शुरू हुआ जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र और साधु वेश में संसद परिसर पहुंचे। उनके साथ विपक्ष के कुछ अन्य सांसद भी मौजूद थे। विपक्षी नेताओं ने राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे के उपयोग को लेकर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    हालांकि इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे धार्मिक परंपराओं और संत समाज का अपमान बताया। संगठनों का कहना है कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर साधु वेश धारण कर इस तरह का प्रदर्शन करना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। उनका आरोप है कि इस प्रकार के प्रदर्शन से धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग किया गया है।

    दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि उनका विरोध किसी धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं था, बल्कि राम मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर था। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि सार्वजनिक दान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और इसी मुद्दे को उठाने के लिए सांकेतिक प्रदर्शन किया गया।

    भोपाल में होने वाले विरोध प्रदर्शन को लेकर प्रशासन भी सतर्क है। मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाने की संभावना है। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद को देखते हुए पुलिस और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

    विश्व हिंदू परिषद ने सभी सनातन धर्मावलंबियों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है। ऐसे में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा। भोपाल में होने वाला यह प्रदर्शन अब प्रदेश की राजनीति और सामाजिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।

  • राम मंदिर दान मामले की जांच में बड़ा मोड़, SIT की रडार पर पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा, पूछताछ की तैयारी तेज

    राम मंदिर दान मामले की जांच में बड़ा मोड़, SIT की रडार पर पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा, पूछताछ की तैयारी तेज

    नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और दान राशि की कथित चोरी के मामले की जांच अब तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले में साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया को गति देते हुए जांच का दायरा ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों तक बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से जल्द पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसी उनके बयान के साथ बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का मिलान कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश करेगी।

    जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, एसआईटी पहले ही मंदिर में चढ़ावे की गिनती से जुड़े बैंक कर्मचारियों के बयान दर्ज कर चुकी है। अब जांच टीम उन अधिकारियों और पदाधिकारियों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है, जिनकी भूमिका दान राशि के प्रबंधन और रिकॉर्ड से जुड़ी रही है। इसी क्रम में डॉ. अनिल मिश्रा को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पूछताछ के दौरान बैंक लेनदेन, वित्तीय दस्तावेजों और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर उनसे कई महत्वपूर्ण सवाल किए जा सकते हैं।

    सूत्रों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट से जुड़े अन्य पदाधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। इनमें गोपाल राव का नाम भी सामने आ रहा है। हालांकि जांच एजेंसियों की ओर से अभी किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है तथा किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की विस्तृत पड़ताल की जाएगी।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की निगरानी में नई एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने आईजी किरण एस. की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। टीम में डीआईजी सोमेन वर्मा और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर को भी शामिल किया गया। सरकार का उद्देश्य जांच को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाना बताया गया है।

    हालांकि एसआईटी की औपचारिक बैठक अभी तक आयोजित नहीं हुई है, लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच कार्य लगातार जारी है। साक्ष्य जुटाने, दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया समानांतर रूप से चल रही है। इसी क्रम में 26 जुलाई को राज्य सरकार ने एसआईटी का आधिकारिक पुनर्गठन भी किया, ताकि जांच को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सके।

    दूसरी ओर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी हाल ही में आयोजित विशेष बैठक में कई प्रशासनिक फैसले लिए हैं। ट्रस्ट ने फिलहाल पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति टालने का निर्णय लिया है। साथ ही पूर्णकालिक महासचिव और प्रवक्ता नियुक्त करने की मंजूरी दी गई है। मंदिर की धार्मिक परंपराओं, पूजा व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से धार्मिक समिति के पुनर्गठन का भी फैसला लिया गया है।

    जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी या कानूनी कार्रवाई को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल एसआईटी सभी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों का मिलान कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और अहम लोगों से पूछताछ होने की संभावना जताई जा रही है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त नई SIT बनाने के निर्देश राजनीति से दूर रहकर निष्पक्ष जांच पर जोर

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त नई SIT बनाने के निर्देश राजनीति से दूर रहकर निष्पक्ष जांच पर जोर


    उत्तर प्रदेश। अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के चर्चित मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नई विशेष जांच टीम गठित करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष पारदर्शी और बिना किसी राजनीतिक प्रभाव के होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस संवेदनशील मामले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और जांच ऐसे स्तर पर पहुंचे जिससे पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।

    सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि नई एसआईटी का नेतृत्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी करें ताकि जांच पेशेवर तरीके से आगे बढ़ सके। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार वरिष्ठ अधिकारियों के नाम के साथ नई टीम का प्रस्ताव पेश करे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी जहां सरकार नई जांच टीम की जानकारी अदालत के समक्ष रखेगी।

    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच जारी है। उन्होंने कहा कि पहले गठित एसआईटी ने प्रारंभिक जांच में इसे संज्ञेय अपराध माना था जिसके बाद नियमित पुलिस जांच शुरू हुई। इस पर अदालत ने कहा कि अब जांच को और अधिक प्रभावी तथा भरोसेमंद बनाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी आवश्यक है।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में यह भी मांग उठाई गई कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जहां भी विधिवत रसीद जारी की गई है वहां उसका पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहना चाहिए। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि केवल दावों के आधार पर किसी वस्तु को दान मान लेना व्यावहारिक नहीं होगा और प्रत्येक दान का प्रमाण होना आवश्यक है।

    गौरतलब है कि यह मामला तब सामने आया जब मंदिर ट्रस्ट की ओर से चढ़ावे की गिनती के दौरान अनियमितताओं की शिकायत की गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जून में विशेष जांच टीम गठित की थी जिसने प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी। बाद में इस मामले में कई कर्मचारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उन पर चढ़ावे की गिनती के दौरान नकदी और आभूषणों में कथित गड़बड़ी करने का आरोप है।

    जांच के दौरान ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी पर भी प्रक्रिया संबंधी लापरवाही के आरोप सामने आए। आरोप है कि चढ़ावा प्रबंधन के लिए निर्धारित दिशा निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया जिससे अनियमितताओं की आशंका बनी। इसी बीच ट्रस्ट के दो प्रमुख पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा भी दे दिया जिसे स्वीकार कर लिया गया।

    सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद अब पूरे मामले की जांच नए सिरे से वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में आगे बढ़ेगी। अदालत ने साफ कर दिया है कि धार्मिक आस्था से जुड़े ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अब सभी की नजर 27 जुलाई की अगली सुनवाई पर रहेगी जहां नई एसआईटी के गठन और जांच की प्रगति पर अदालत विस्तृत समीक्षा करेगी।

  • राम मंदिर दान विवाद के बीच शिंदे-उद्धव में बढ़ी सियासी तल्खी, हिंदुत्व की विरासत और ‘राम रक्षा’ अभियान पर छिड़ा नया संग्राम

    राम मंदिर दान विवाद के बीच शिंदे-उद्धव में बढ़ी सियासी तल्खी, हिंदुत्व की विरासत और ‘राम रक्षा’ अभियान पर छिड़ा नया संग्राम

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में हिंदुत्व और राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनकी राजनीति अब सिद्धांतों के बजाय राजनीतिक सुविधा पर आधारित हो गई है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने पहले हिंदुत्व की विचारधारा से दूरी बना ली थी, वे अब राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने पर भगवान राम का नाम लेकर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

    एकनाथ शिंदे ने कहा कि हिंदुत्व किसी अवसर के अनुसार अपनाई या छोड़ी जाने वाली विचारधारा नहीं है। उनके अनुसार यह एक स्थायी आस्था और जीवन मूल्यों से जुड़ा विषय है, जिसे राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदला नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने अपनी मूल विचारधारा से समझौता किया और अब जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता बनाए रखने के लिए राम और हिंदुत्व का सहारा लिया जा रहा है।

    राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर महाराष्ट्र में राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। इसी विषय को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने राज्यभर में ‘राम रक्षा आंदोलन’ शुरू करने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    इसी घटनाक्रम के बीच नागपुर में एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उद्धव ठाकरे ने भी राज्य सरकार और अपने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधा। उन्होंने हिंदुत्व और भगवान राम के नाम पर राजनीति करने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था को राजनीतिक लाभ का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए।

    उद्धव ठाकरे की टिप्पणियों का जवाब देते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि जब राजनीतिक आधार कमजोर पड़ने लगा तो भगवान राम का नाम लिया जाने लगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “जब भगवा लगा घटने तब राम का नाम लगे रटने।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति भगवान राम के आदर्शों से दूर है, वह जनता के विश्वास पर भी खरा नहीं उतर सकता। उनके इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में हिंदुत्व, राम मंदिर और धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दे राज्य की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। विभिन्न दल इन विषयों पर अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत जनता के बीच संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में बयानबाजी और वैचारिक टकराव का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है।

    महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह विवाद केवल नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंदुत्व की विरासत, राजनीतिक पहचान और जनसमर्थन की प्रतिस्पर्धा का भी प्रतीक बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों की रणनीति और जनता की प्रतिक्रिया राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।