Tag: RamMandir

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में तीखी नोकझोंक, खरगे और किरेन रिजिजू आमने-सामने, विपक्ष का जोरदार हंगामा

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में तीखी नोकझोंक, खरगे और किरेन रिजिजू आमने-सामने, विपक्ष का जोरदार हंगामा

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को राम मंदिर चढ़ावा से जुड़े आरोपों को लेकर राज्यसभा में सरकार और विपक्ष के बीच तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब की मांग करते हुए सदन में जोरदार हंगामा किया, जबकि सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया। लगातार शोर-शराबे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही निर्धारित समय से पहले कई बार स्थगित करनी पड़ी।

    राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चर्चा के दौरान कहा कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन में केंद्र सरकार की भूमिका रही है और मंदिर निर्माण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि चढ़ावे से जुड़े आरोपों के मामले में संबंधित एजेंसियों की ओर से क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर सदन में स्पष्ट जवाब देने की मांग की।

    खरगे के वक्तव्य का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने अतीत में राम मंदिर आंदोलन और उससे जुड़े मुद्दों का विरोध किया था। रिजिजू ने आरोप लगाया कि अब वही दल इस मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सरकार किसी भी विषय पर तथ्यों के आधार पर जवाब देने के लिए तैयार है।

    सदन में लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही पहले कुछ समय के लिए स्थगित की गई और दोबारा शुरू होने के बाद भी व्यवधान जारी रहने पर फिर स्थगन करना पड़ा। विपक्षी दलों का कहना था कि राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े आरोपों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए और सरकार अपना पक्ष स्पष्ट करे। वहीं सत्तापक्ष ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने और राजनीतिक माहौल बनाने का आरोप लगाया।

    संसद भवन परिसर में भी इस मुद्दे को लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में कई विपक्षी नेता शामिल हुए और उन्होंने सरकार से कथित आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने तथा सदन में जवाब देने की मांग दोहराई। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने विभिन्न नारे लगाकर अपनी मांगों को सार्वजनिक रूप से उठाया। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि संसद में महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं और विपक्ष को चर्चा के लिए सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए।

    मॉनसून सत्र के दौरान विभिन्न राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार तथा विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। ऐसे में राम मंदिर चढ़ावा विवाद भी संसद के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो गया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर दोनों पक्षों के बीच बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल सदन के सुचारु संचालन और लंबित विधायी कार्यों को लेकर भी राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर विधान परिषद में बवाल, सपा का हंगामा, केशव मौर्य ने किया पलटवार

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर विधान परिषद में बवाल, सपा का हंगामा, केशव मौर्य ने किया पलटवार

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मानसून सत्र के पहले दिन श्रीराम मंदिर के दानपात्र से कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। समाजवादी पार्टी ने नियम-105 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर मामले पर चर्चा की मांग की। जैसे ही नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य जवाब देने के लिए खड़े हुए, सपा सदस्य वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। लगातार हंगामे के चलते सभापति ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

    कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। शोर-शराबे के बीच केशव प्रसाद मौर्य ने अपना पक्ष रखा। दोपहर 1:52 बजे सभापति ने कार्यस्थगन प्रस्ताव अस्वीकार करते हुए मामले को अग्रिम कार्रवाई के लिए सरकार को भेजने की घोषणा की। इसके बाद विपक्षी सदस्य अपनी सीटों पर लौटे और सदन की कार्यवाही सामान्य हो सकी।

    केशव मौर्य का विपक्ष पर पलटवार
    नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए एक रुपये का भी योगदान नहीं दिया, वे अब चढ़ावे की चोरी पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बाबरी मस्जिद के नाम पर जुटाए गए चंदे का हिसाब भी सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर मंदिरों के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि भविष्य में जनता इसका जवाब देगी।

    सपा ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
    समाजवादी पार्टी ने अपने कार्यस्थगन प्रस्ताव में आरोप लगाया कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के दानपात्र से हुई कथित चोरी वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है। विपक्ष का कहना था कि पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं रही और केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई की गई। विपक्ष के नेता लाल बिहारी यादव और सदस्य किरण पाल कश्यप ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़ी दान सामग्री की चोरी गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावी कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी है।

    अन्य मुद्दे भी उठे
    सदन में सदस्य राज बहादुर सिंह चंदेल ने शिक्षकों, कर्मचारियों और सेवानिवृत्त शिक्षकों को निशुल्क एवं कैशलेस चिकित्सा योजना में शामिल करने की मांग उठाई। इस पर नेता सदन ने कहा कि सरकार इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करेगी। राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर हुए इस विवाद ने मानसून सत्र के पहले ही दिन सदन का माहौल गर्मा दिया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर MP में सियासी हलचल, भोपाल में विहिप और बजरंग दल का प्रदर्शन आज

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर MP में सियासी हलचल, भोपाल में विहिप और बजरंग दल का प्रदर्शन आज


    मध्य प्रदेश। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर संसद के मानसून सत्र के दौरान हुए राजनीतिक विवाद की गूंज अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंच गई है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने शनिवार को इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि संसद परिसर में विपक्षी सांसदों द्वारा साधु वेश धारण कर किया गया सांकेतिक प्रदर्शन भगवान श्रीराम, संत समाज और करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था का अपमान है। इसी के विरोध में भोपाल में बड़ा मार्च निकाला जाएगा।

    विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के अनुसार प्रदर्शन दोपहर में व्यापम चौराहे से शुरू होगा और कांग्रेस कार्यालय तक जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, साधु-संत और सनातन धर्म से जुड़े लोग शामिल होंगे। प्रदर्शन के बाद संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा जा सकता है। आयोजकों का कहना है कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य धार्मिक भावनाओं के सम्मान और आस्था से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराना है।

    पूरा विवाद संसद के मानसून सत्र के दौरान उस समय शुरू हुआ जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र और साधु वेश में संसद परिसर पहुंचे। उनके साथ विपक्ष के कुछ अन्य सांसद भी मौजूद थे। विपक्षी नेताओं ने राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे के उपयोग को लेकर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    हालांकि इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे धार्मिक परंपराओं और संत समाज का अपमान बताया। संगठनों का कहना है कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर साधु वेश धारण कर इस तरह का प्रदर्शन करना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। उनका आरोप है कि इस प्रकार के प्रदर्शन से धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग किया गया है।

    दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि उनका विरोध किसी धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं था, बल्कि राम मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर था। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि सार्वजनिक दान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और इसी मुद्दे को उठाने के लिए सांकेतिक प्रदर्शन किया गया।

    भोपाल में होने वाले विरोध प्रदर्शन को लेकर प्रशासन भी सतर्क है। मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाने की संभावना है। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद को देखते हुए पुलिस और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

    विश्व हिंदू परिषद ने सभी सनातन धर्मावलंबियों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है। ऐसे में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा। भोपाल में होने वाला यह प्रदर्शन अब प्रदेश की राजनीति और सामाजिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।

  • राम मंदिर दान मामले की जांच में बड़ा मोड़, SIT की रडार पर पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा, पूछताछ की तैयारी तेज

    राम मंदिर दान मामले की जांच में बड़ा मोड़, SIT की रडार पर पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा, पूछताछ की तैयारी तेज

    नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और दान राशि की कथित चोरी के मामले की जांच अब तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले में साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया को गति देते हुए जांच का दायरा ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों तक बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से जल्द पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसी उनके बयान के साथ बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का मिलान कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश करेगी।

    जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, एसआईटी पहले ही मंदिर में चढ़ावे की गिनती से जुड़े बैंक कर्मचारियों के बयान दर्ज कर चुकी है। अब जांच टीम उन अधिकारियों और पदाधिकारियों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है, जिनकी भूमिका दान राशि के प्रबंधन और रिकॉर्ड से जुड़ी रही है। इसी क्रम में डॉ. अनिल मिश्रा को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पूछताछ के दौरान बैंक लेनदेन, वित्तीय दस्तावेजों और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर उनसे कई महत्वपूर्ण सवाल किए जा सकते हैं।

    सूत्रों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट से जुड़े अन्य पदाधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। इनमें गोपाल राव का नाम भी सामने आ रहा है। हालांकि जांच एजेंसियों की ओर से अभी किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है तथा किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की विस्तृत पड़ताल की जाएगी।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की निगरानी में नई एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने आईजी किरण एस. की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। टीम में डीआईजी सोमेन वर्मा और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर को भी शामिल किया गया। सरकार का उद्देश्य जांच को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाना बताया गया है।

    हालांकि एसआईटी की औपचारिक बैठक अभी तक आयोजित नहीं हुई है, लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच कार्य लगातार जारी है। साक्ष्य जुटाने, दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया समानांतर रूप से चल रही है। इसी क्रम में 26 जुलाई को राज्य सरकार ने एसआईटी का आधिकारिक पुनर्गठन भी किया, ताकि जांच को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सके।

    दूसरी ओर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी हाल ही में आयोजित विशेष बैठक में कई प्रशासनिक फैसले लिए हैं। ट्रस्ट ने फिलहाल पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति टालने का निर्णय लिया है। साथ ही पूर्णकालिक महासचिव और प्रवक्ता नियुक्त करने की मंजूरी दी गई है। मंदिर की धार्मिक परंपराओं, पूजा व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से धार्मिक समिति के पुनर्गठन का भी फैसला लिया गया है।

    जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी या कानूनी कार्रवाई को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल एसआईटी सभी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों का मिलान कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और अहम लोगों से पूछताछ होने की संभावना जताई जा रही है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त नई SIT बनाने के निर्देश राजनीति से दूर रहकर निष्पक्ष जांच पर जोर

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त नई SIT बनाने के निर्देश राजनीति से दूर रहकर निष्पक्ष जांच पर जोर


    उत्तर प्रदेश अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के चर्चित मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नई विशेष जांच टीम गठित करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष पारदर्शी और बिना किसी राजनीतिक प्रभाव के होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस संवेदनशील मामले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और जांच ऐसे स्तर पर पहुंचे जिससे पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।

    सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि नई एसआईटी का नेतृत्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी करें ताकि जांच पेशेवर तरीके से आगे बढ़ सके। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार वरिष्ठ अधिकारियों के नाम के साथ नई टीम का प्रस्ताव पेश करे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी जहां सरकार नई जांच टीम की जानकारी अदालत के समक्ष रखेगी।

    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच जारी है। उन्होंने कहा कि पहले गठित एसआईटी ने प्रारंभिक जांच में इसे संज्ञेय अपराध माना था जिसके बाद नियमित पुलिस जांच शुरू हुई। इस पर अदालत ने कहा कि अब जांच को और अधिक प्रभावी तथा भरोसेमंद बनाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी आवश्यक है।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में यह भी मांग उठाई गई कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जहां भी विधिवत रसीद जारी की गई है वहां उसका पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहना चाहिए। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि केवल दावों के आधार पर किसी वस्तु को दान मान लेना व्यावहारिक नहीं होगा और प्रत्येक दान का प्रमाण होना आवश्यक है।

    गौरतलब है कि यह मामला तब सामने आया जब मंदिर ट्रस्ट की ओर से चढ़ावे की गिनती के दौरान अनियमितताओं की शिकायत की गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जून में विशेष जांच टीम गठित की थी जिसने प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी। बाद में इस मामले में कई कर्मचारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उन पर चढ़ावे की गिनती के दौरान नकदी और आभूषणों में कथित गड़बड़ी करने का आरोप है।

    जांच के दौरान ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी पर भी प्रक्रिया संबंधी लापरवाही के आरोप सामने आए। आरोप है कि चढ़ावा प्रबंधन के लिए निर्धारित दिशा निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया जिससे अनियमितताओं की आशंका बनी। इसी बीच ट्रस्ट के दो प्रमुख पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा भी दे दिया जिसे स्वीकार कर लिया गया।

    सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद अब पूरे मामले की जांच नए सिरे से वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में आगे बढ़ेगी। अदालत ने साफ कर दिया है कि धार्मिक आस्था से जुड़े ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अब सभी की नजर 27 जुलाई की अगली सुनवाई पर रहेगी जहां नई एसआईटी के गठन और जांच की प्रगति पर अदालत विस्तृत समीक्षा करेगी।

  • राम मंदिर दान विवाद के बीच शिंदे-उद्धव में बढ़ी सियासी तल्खी, हिंदुत्व की विरासत और ‘राम रक्षा’ अभियान पर छिड़ा नया संग्राम

    राम मंदिर दान विवाद के बीच शिंदे-उद्धव में बढ़ी सियासी तल्खी, हिंदुत्व की विरासत और ‘राम रक्षा’ अभियान पर छिड़ा नया संग्राम

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में हिंदुत्व और राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनकी राजनीति अब सिद्धांतों के बजाय राजनीतिक सुविधा पर आधारित हो गई है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने पहले हिंदुत्व की विचारधारा से दूरी बना ली थी, वे अब राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने पर भगवान राम का नाम लेकर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

    एकनाथ शिंदे ने कहा कि हिंदुत्व किसी अवसर के अनुसार अपनाई या छोड़ी जाने वाली विचारधारा नहीं है। उनके अनुसार यह एक स्थायी आस्था और जीवन मूल्यों से जुड़ा विषय है, जिसे राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदला नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने अपनी मूल विचारधारा से समझौता किया और अब जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता बनाए रखने के लिए राम और हिंदुत्व का सहारा लिया जा रहा है।

    राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर महाराष्ट्र में राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। इसी विषय को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने राज्यभर में ‘राम रक्षा आंदोलन’ शुरू करने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    इसी घटनाक्रम के बीच नागपुर में एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उद्धव ठाकरे ने भी राज्य सरकार और अपने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधा। उन्होंने हिंदुत्व और भगवान राम के नाम पर राजनीति करने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था को राजनीतिक लाभ का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए।

    उद्धव ठाकरे की टिप्पणियों का जवाब देते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि जब राजनीतिक आधार कमजोर पड़ने लगा तो भगवान राम का नाम लिया जाने लगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “जब भगवा लगा घटने तब राम का नाम लगे रटने।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति भगवान राम के आदर्शों से दूर है, वह जनता के विश्वास पर भी खरा नहीं उतर सकता। उनके इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में हिंदुत्व, राम मंदिर और धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दे राज्य की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। विभिन्न दल इन विषयों पर अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत जनता के बीच संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में बयानबाजी और वैचारिक टकराव का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है।

    महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह विवाद केवल नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंदुत्व की विरासत, राजनीतिक पहचान और जनसमर्थन की प्रतिस्पर्धा का भी प्रतीक बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों की रणनीति और जनता की प्रतिक्रिया राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच पर इमरान मसूद के सवाल, बोले- गंभीर आरोप हैं तो अब तक FIR क्यों नहीं..

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच पर इमरान मसूद के सवाल, बोले- गंभीर आरोप हैं तो अब तक FIR क्यों नहीं..

    नई दिल्ली । राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस मामले की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि आरोप इतने गंभीर हैं तो विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अब तक अलग से प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आनी चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

    इमरान मसूद ने कहा कि इस मामले में प्रारंभिक शिकायत मंदिर ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई थी, जबकि आरोप भी ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों पर लगाए जा रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसी की भूमिका पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी दिखाई देनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि जांच में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिल रहे हैं तो संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत आवश्यक कार्रवाई भी स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक या सार्वजनिक संस्था से जुड़े मामले में जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि लोगों का भरोसा न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर कायम रहे। उनका कहना था कि जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़नी चाहिए तथा किसी भी स्तर पर पक्षपात की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा था कि जिन लोगों ने कभी रामलीला और कांवड़ यात्रा पर रोक लगाने का प्रयास किया, वही अब आस्था की बात कर रहे हैं। इस पर मसूद ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी रोक की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि रामलीला लंबे समय से भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, जिसमें विभिन्न समुदायों के लोग सहभागिता करते आए हैं। उनके अनुसार, धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

    कांग्रेस सांसद ने कहा कि समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को जोड़ना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी परंपरा या आयोजन को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व के आधार पर समझा जाना चाहिए। उनका मानना है कि सभी धार्मिक आयोजनों के प्रति सम्मान का भाव बना रहना चाहिए।

    इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व करेगा। उनके अनुसार, यदि किसी राजनीतिक गठबंधन की चर्चा हो रही है तो उसका प्रभाव केवल बयानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वह राजनीतिक स्तर पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी गठबंधन के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता कांग्रेस संगठन को मजबूत करना है। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों को अपने संगठनात्मक आधार को मजबूत करने के साथ-साथ जनता के मुद्दों पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए। फिलहाल राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच जारी है और इस पर आए राजनीतिक बयानों के बीच अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और संभावित निष्कर्षों पर बनी हुई है।

  • राम मंदिर के नए CEO को क्‍या मिलेंगी सुविधाएं? नियुक्ति प्रक्रिया हुई तेज, 18 जुलाई तक मांगे गए आवेदन

    राम मंदिर के नए CEO को क्‍या मिलेंगी सुविधाएं? नियुक्ति प्रक्रिया हुई तेज, 18 जुलाई तक मांगे गए आवेदन


    अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया तेज कर दी है। ट्रस्ट की ओर से चयनित सीईओ को वेतन और आवास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह पद पूरी तरह ट्रस्ट के अधीन होगा और नियुक्त अधिकारी वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में मंदिर के प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    18 जुलाई तक किए जा सकेंगे आवेदन
    सीईओ चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने पात्रता के मानक तय कर दिए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 18 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। इस पद के लिए उम्मीदवार का स्नातक (Graduation) होना अनिवार्य है। साथ ही प्रशासन या वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में कम से कम 20 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। आवेदन करने वाले व्यक्ति का हिंदू धर्म का अनुयायी होना भी आवश्यक शर्त रखी गई है। चयनित उम्मीदवार की नियुक्ति तीन वर्ष के लिए की जाएगी।

    22 जुलाई की बैठक से पहले हो सकता है चयन
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। संभावना जताई जा रही है कि इस बैठक से पहले ही नए सीईओ के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। नई दिल्ली में आयोजित चयन समिति की बैठक में नियुक्ति प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हावरे शामिल हैं।

    चढ़ावा चोरी मामले के बाद तेज हुई प्रक्रिया
    राम मंदिर में चढ़ावे की राशि की चोरी का मामला सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने जांच की थी। जांच के आधार पर अयोध्या पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे चढ़ावे की रकम चुराकर पहले वॉशरूम में छिपाते थे और बाद में मौका मिलने पर उसे बाहर ले जाते थे।
    राम मंदिर में चढ़ावे की राशि की चोरी का मामला सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने जांच की थी। जांच के आधार पर अयोध्या पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे चढ़ावे की रकम चुराकर पहले वॉशरूम में छिपाते थे और बाद में मौका मिलने पर उसे बाहर ले जाते थे।

    जांच में सामने आए नए खुलासे
    एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला ने राम मंदिर में नौकरी के दौरान कथित तौर पर करीब 20 लाख रुपये खर्च कर मकान बनवाया। इसके अलावा उसने अपने भाई के नाम पर एक ब्रेज़ा कार खरीदी और अपनी गर्लफ्रेंड को एक आईफोन तथा दो लाख रुपये भी दिए। जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रतापगढ़ निवासी अविनाश शुक्ला राम मंदिर में नौकरी मिलने से पहले पीने का पानी बेचने का काम करता था। मामले की जांच अभी जारी है।

  • अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग पर ट्रस्ट और सरकारों को नोटिस

    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग पर ट्रस्ट और सरकारों को नोटिस


    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामले ने अब देश की सबसे बड़ी अदालत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल यानी एसआईटी को अब तक की जांच की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत का यह कदम इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सुप्रीम कोर्ट में दायर कई जनहित याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए नकद दान और बहुमूल्य चढ़ावे के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाओं में मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच अदालत की निगरानी में कराई जाए ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील विषय में किसी तरह का संदेह न रहे। इन याचिकाओं को राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी अधिवक्ता अजय कुमार राय अधिवक्ता दिनेश कुमार यादव तथा हिन्दू धर्म परिषद की ओर से दायर किया गया है।

    मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना भी शामिल हैं इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश ने 123 वर्षों का लंबा संघर्ष देखा लेकिन अब मंदिर में आए दान और चढ़ावे को लेकर नए विवाद खड़े हो गए हैं। अदालत को यह भी बताया गया कि जांच के लिए गठित एसआईटी के पास मौजूद इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी तरह के प्रमाण नष्ट न हो सकें।

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में पक्ष रखा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया। अदालत ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह जांच की प्रगति से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की जाएगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार को तय कर दी है।

    यह पूरा मामला राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और बहुमूल्य चढ़ावे के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल का गठन किया था। अब तक इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं जांच के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं।

    सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता के बाद इस मामले पर पूरे देश की नजरें टिक गई हैं। अब जांच रिपोर्ट और अगली सुनवाई यह तय करेगी कि आरोपों में कितना दम है और आगे कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में अदालत का हर कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • राम मंदिर टिप्पणी के बीच युगों की चर्चा पर छिड़ा नया राजनीतिक विवाद, अनुपम खेर के बयान पर कांग्रेस ने साधा निशाना

    राम मंदिर टिप्पणी के बीच युगों की चर्चा पर छिड़ा नया राजनीतिक विवाद, अनुपम खेर के बयान पर कांग्रेस ने साधा निशाना

    नई दिल्ली । राम मंदिर को लेकर अभिनेता अनुपम खेर की एक टिप्पणी के बाद धार्मिक संदर्भों और सनातन काल गणना को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पर अभिनेता के एक वीडियो का उल्लेख करते हुए उनके बयान की आलोचना की और कहा कि सनातन परंपरा में वर्णित युगों के क्रम को सही ढंग से समझना आवश्यक है। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

    विवाद की शुरुआत उस बयान से हुई जिसमें अनुपम खेर राम मंदिर से जुड़े एक मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। इसी दौरान उन्होंने भगवान राम और द्वापर युग का उल्लेख किया। उनके इस कथन को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई और कहा कि सनातन परंपरा के अनुसार भगवान राम का अवतार त्रेता युग में माना जाता है, जबकि द्वापर युग भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा हुआ है। इसी आधार पर कांग्रेस ने अभिनेता के बयान को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए उनकी आलोचना की।

    सुप्रिया श्रीनेत ने अपने बयान में सनातन धर्म की पारंपरिक काल गणना का उल्लेख करते हुए चारों युगों का क्रम बताया। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग क्रमशः चार युग हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान श्रीराम का अवतार त्रेतायुग में और भगवान श्रीकृष्ण का अवतार द्वापरयुग में माना जाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने अभिनेता पर तंज कसते हुए कहा कि सार्वजनिक रूप से धार्मिक विषयों पर टिप्पणी करने से पहले तथ्यों की जानकारी होना आवश्यक है।

    दूसरी ओर, अनुपम खेर का मूल बयान राम मंदिर से जुड़े एक कथित चोरी के मामले पर था। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा था कि किसी संस्था या आस्था से जुड़े स्थान पर यदि कोई गलत घटना होती है तो उसके आधार पर पूरे संस्थान या परंपरा पर प्रश्न नहीं उठाया जाना चाहिए। इसी दौरान युगों का उल्लेख करते हुए हुई कथित तथ्यात्मक त्रुटि विवाद का कारण बन गई। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके बयान का वीडियो तेजी से साझा किया जाने लगा और विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    यह मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक परंपराओं की जानकारी और सार्वजनिक जीवन में तथ्यों की शुद्धता को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया। राजनीतिक दलों के नेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने अपने-अपने दृष्टिकोण से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने इसे सामान्य भाषाई चूक बताया, जबकि अन्य ने धार्मिक विषयों पर बोलते समय अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    वर्तमान विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर और उससे जुड़े विषय लगातार सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच यह घटनाक्रम एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि इस पूरे मामले में दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर कायम हैं, लेकिन इस बहस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भों से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक बयान देते समय तथ्यात्मक सटीकता और संतुलित भाषा का विशेष महत्व होता है।