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  • जेल से रिहा होते ही आजम खान को ED ने किया गिरफ्तार, आज कोर्ट में पेशी

    जेल से रिहा होते ही आजम खान को ED ने किया गिरफ्तार, आज कोर्ट में पेशी


    लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शनिवार शाम रामपुर जेल से रिहा होते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ईडी की टीम उन्हें अपने साथ ले गई। अब एजेंसी रविवार सुबह करीब 10 बजे आजम खान को कोर्ट में पेश कर कस्टडी की मांग करेगी।

    दरअसल, ईडी ने आजम खान के खिलाफ 14 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज किया था। दूसरी ओर, हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की जेल से रिहाई की उम्मीद थी। इसी बीच ईडी की टीम सीआरपीएफ जवानों के साथ रामपुर जेल के बाहर पहुंच गई। जेल से बाहर आते ही टीम ने आजम खान को हिरासत में ले लिया और बाद में गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। अब्दुल्ला आजम की रिहाई को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    दो पैन कार्ड मामले में हाईकोर्ट से मिली थी राहत

    आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने दो पैन कार्ड मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दोनों ने क्रिमिनल रिवीजन याचिका दाखिल कर दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत पर रिहा करने की मांग की थी।

    15 अक्टूबर को मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद जस्टिस समित गोपाल की एकल पीठ ने दोनों की जमानत याचिका मंजूर करते हुए सजा निलंबित कर दी। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग अदालत ने खारिज कर दी थी।

    रिहाई के बाद आजम खान ने उठाए सवाल

    रामपुर जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब कहने के लिए क्या बचा है और वह क्या कह सकते हैं। उनके मुताबिक, कानून का अस्तित्व ही खत्म हो गया है।

    आजम खान ने सवाल किया, ‘क्या मुस्लिम होने की यही सजा है?’ उन्होंने कहा कि उनकी गलती सिर्फ इतनी थी कि एक मुस्लिम ने यूनिवर्सिटी बनाई। उन्होंने बच्चों के लिए स्कूल बनाए और क्या यही उनका अपराध है?

    ED ने 1,170 करोड़ की संपत्तियां अटैच करने का किया था दावा

    प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को बताया था कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत रामपुर स्थित आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और भवनों को अटैच किया है। एजेंसी के मुताबिक, इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये है।

    ईडी का आरोप है कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित सरकारी फंड का इस्तेमाल निजी यूनिवर्सिटी के निर्माण में किया गया। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि आजम खान ने उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री और जल निगम में कैबिनेट मंत्री रहते हुए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कथित अनियमितताओं के लिए किया।

    वहीं, रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने जुलाई में यूनिवर्सिटी परिसर की 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी की ओर से अपील दायर की गई थी। ईडी ने इस मामले में अगस्त में छापेमारी कर आजम खान से पूछताछ भी की थी।

    अखिलेश यादव बोले- वक्त बदलता है तो तख्त भी बदल जाता है

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आजम खान के समर्थन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, ‘आज के हुक्मरानों को याद रहे, जब वक्त बदल जाता है तो तख्त बदल जाता है।’

    अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खान के खिलाफ मुकदमों की जो साजिश की जा रही है, उसे पूरा देश ही नहीं, बल्कि दुनिया देख रही है। उन्होंने एक उम्रदराज व्यक्ति को बार-बार मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने को बेहद कायराना हरकत बताया।

    सपा प्रमुख ने कहा कि सत्ता जिस गलत रवायत को बढ़ावा दे रही है, हवा बदलने पर उसे खुद भी इसका सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब नाइंसाफी हद से गुजर जाती है तो वह जुल्म करने वालों के लिए ही कहर बन जाती है। अखिलेश ने इस पूरी कार्रवाई को बेहद निंदनीय बताया।

    इससे पहले अखिलेश यादव ने जेल में आजम खान से मुलाकात की थी। उन्होंने बीजेपी सरकार पर आजम खान के खिलाफ राजनीतिक बदले की कार्रवाई करने का आरोप लगाया था। अखिलेश ने यह भी दावा किया था कि उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए हैं।

  • रामपुर जेल में आजम खान से मिले अखिलेश यादव, एक घंटे की मुलाकात के बाद 2027 चुनाव को लेकर भाजपा पर साधा निशाना

    रामपुर जेल में आजम खान से मिले अखिलेश यादव, एक घंटे की मुलाकात के बाद 2027 चुनाव को लेकर भाजपा पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को रामपुर जिला जेल में पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। मुलाकात के बाद जेल से बाहर आए अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि समाजवादी पार्टी का लक्ष्य भाजपा को सत्ता से हटाना है। इस मुलाकात को उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों और पार्टी के राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

    अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि समाजवादी पार्टी का उद्देश्य स्पष्ट है और पार्टी के कार्यकर्ता भाजपा को हराने के लिए मजबूती से काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी दल का जनाधार कमजोर हो रहा है और आगामी चुनावों में उसे जनता के विरोध का सामना करना पड़ेगा। अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता भाजपा को सत्ता से बाहर करने का फैसला करेगी। ये बयान सपा अध्यक्ष की राजनीतिक रणनीति और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी के रुख को दर्शाते हैं।

    सपा प्रमुख ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन परिणामों से जनता का संदेश सामने आ चुका है। अखिलेश यादव के मुताबिक, 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की रणनीति में पीडीए की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। पीडीए से आशय पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों से है। पार्टी इस सामाजिक समीकरण के साथ सामाजिक न्याय और जमीनी मुद्दों को भी अपने राजनीतिक अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाने पर जोर दे रही है।

    मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और अन्य शिक्षण संस्थानों से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों की स्थापना का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से वंचित और पीडीए समुदायों को आगे बढ़ने का अवसर देना रहा है। उनके बयान में शिक्षा, सामाजिक न्याय और संस्थानों पर हो रही कार्रवाई से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। हालांकि, इन कार्रवाइयों के विशिष्ट मामलों और उनके कानूनी पहलुओं का विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

    आजम खान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे हैं और रामपुर की राजनीति में उनका लंबे समय से प्रभाव रहा है। ऐसे में अखिलेश यादव की उनसे जेल में हुई मुलाकात को पार्टी के भीतर संपर्क और राजनीतिक एकजुटता के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। मुलाकात के दौरान किन विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, जेल से बाहर आने के बाद अखिलेश यादव की टिप्पणियों में भाजपा के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष और 2027 के चुनाव की तैयारी प्रमुख रही।

    रामपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज होने की संभावना है। समाजवादी पार्टी के समर्थकों के लिए यह मुलाकात वरिष्ठ नेताओं के बीच संवाद का संकेत है, जबकि इसके राजनीतिक प्रभाव का आकलन आगामी घटनाक्रम और पार्टी की रणनीति के आधार पर किया जा सकेगा। फिलहाल अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से भाजपा को हराने और पीडीए के मुद्दों को आगामी विधानसभा चुनाव में केंद्र में रखने का संदेश दिया है।

  • जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई से गरमाई सियासत, अखिलेश यादव ने BJP पर लगाया शिक्षा को सांप्रदायिक नजरिए से देखने का आरोप

    जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई से गरमाई सियासत, अखिलेश यादव ने BJP पर लगाया शिक्षा को सांप्रदायिक नजरिए से देखने का आरोप

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा यूनिवर्सिटी परिसर की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण बताते हुए ध्वस्तीकरण आदेश जारी किए जाने के बाद मामला प्रदेश की सियासत में चर्चा का केंद्र बन गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए शिक्षा के क्षेत्र में राजनीति करने का आरोप लगाया है।

    अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा को शिक्षा के क्षेत्र में भी सांप्रदायिकता दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा, शिक्षकों, छात्रों और शिक्षा के बाद मिलने वाले रोजगार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दे रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जा रही है तो अन्य संस्थानों और इमारतों पर भी समान कार्रवाई होनी चाहिए।

    जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया जब रामपुर विकास प्राधिकरण ने परिसर में मौजूद कई भवनों को नियमों के अनुरूप स्वीकृति नहीं मिलने का हवाला देते हुए कार्रवाई का आदेश जारी किया। यह यूनिवर्सिटी समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में जानी जाती है और लंबे समय से राजनीतिक चर्चाओं में रही है।

    इस बीच यूनिवर्सिटी परिसर से गुजरने वाली सड़क को लेकर भी नया विवाद सामने आया है। लोक निर्माण विभाग यानी PWD ने यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर बोर्ड लगाकर स्पष्ट किया है कि यह सड़क आम जनता के उपयोग के लिए है। विभाग का कहना है कि यह सड़क सरकारी धन से बनाई गई है और इसे किसी भी नागरिक के आवागमन के लिए रोका नहीं जा सकता।

    PWD अधिकारियों के अनुसार, अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2016-17 के दौरान यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट से परिसर के अंदर तक लगभग 3.30 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण कराया गया था। इस परियोजना की लागत करीब 16 करोड़ रुपये बताई गई थी। विभाग का कहना है कि सड़क सार्वजनिक संपत्ति है और इसका उपयोग आम लोगों के लिए होना चाहिए।

    PWD अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2019 में यूनिवर्सिटी की ओर से मुख्य गेट बंद कर दिया गया था, जिसके बाद आम लोगों और विभागीय अधिकारियों की आवाजाही प्रभावित हुई। इस मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया भी चली। पहले हाईकोर्ट और फिर निचली अदालत में सुनवाई हुई। विभाग के अनुसार, अदालतों में अलग-अलग स्तर पर मामले की सुनवाई के बाद अब सार्वजनिक मार्ग को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए बोर्ड लगाया गया है।

    वहीं, जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन और उससे जुड़े पक्षों की ओर से भी अपनी दलीलें रखी जा रही हैं। यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों का कहना है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है और उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए समय दिया गया है।

    फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी मामला प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक विवाद दोनों का केंद्र बना हुआ है। एक तरफ भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश और सड़क को लेकर सरकारी विभाग सक्रिय हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रहा है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और प्रशासन की आगे की कार्रवाई से इस मामले की दिशा तय होगी।

  • जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतें गिराने के आदेश पर सियासत तेज, विपक्ष ने सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल

    जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतें गिराने के आदेश पर सियासत तेज, विपक्ष ने सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए उन्हें गिराने के प्रशासनिक आदेश के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर सरकार इसे कानून के दायरे में की जा रही कार्रवाई बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कदम बताते हुए सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं।

    जिला प्रशासन ने विश्वविद्यालय परिसर की 40 में से 38 इमारतों को अवैध निर्माण की श्रेणी में रखते हुए उनके विध्वंस के आदेश जारी किए हैं। यह विश्वविद्यालय समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट माना जाता है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित निर्माणों को लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है और सभी निर्णय नियमों के अनुरूप लिए गए हैं।

    मामले पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता कानून व्यवस्था बनाए रखना है। उनके अनुसार, सरकार किसी भी मामले में कानून से समझौता नहीं करेगी और जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी पारदर्शिता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है।

    वहीं विपक्ष ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। आरजेडी नेता मनोज कुमार झा ने विश्वविद्यालय को लेकर जारी विध्वंस नोटिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के प्रति इस तरह का रवैया उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बुलडोजर की कार्रवाई का चयनात्मक इस्तेमाल कर रही है और गंभीर अपराधों के मामलों में ऐसी सख्ती दिखाई नहीं देती। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा संस्थानों का सम्मान होना चाहिए और कानून का समान रूप से पालन कराया जाना चाहिए।

    जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2006 में की गई थी, जबकि इसका औपचारिक उद्घाटन वर्ष 2012 में हुआ था। विश्वविद्यालय लगभग 1500 बीघा भूमि में फैला हुआ है। परिसर के लिए खरीदी गई जमीन और निर्माण कार्य को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद जारी हैं। प्रशासन और जांच एजेंसियां पिछले कई वर्षों से विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न मामलों की जांच कर रही हैं।

    बताया जाता है कि मोहम्मद आजम खान के खिलाफ दर्ज कई मामलों का संबंध भी जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े भूमि और निर्माण विवादों से है। इन्हीं मामलों के आधार पर समय-समय पर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाती रही है। राज्य में वर्ष 2017 के बाद विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की गति तेज हुई, जिसके बाद कई कानूनी प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई गईं।

    फिलहाल जौहर विश्वविद्यालय को लेकर जारी विध्वंस आदेश राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। सरकार इसे पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है, जबकि विपक्ष निष्पक्षता और कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठा रहा है। अब सभी की नजर इस मामले में आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं बल्कि राज्य की राजनीतिक और कानूनी बहस पर भी पड़ सकता है।

  • राम भक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे, जनता ने बदली राजनीति की दिशा: रामपुर में बोले योगी आदित्यनाथ

    राम भक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे, जनता ने बदली राजनीति की दिशा: रामपुर में बोले योगी आदित्यनाथ

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामपुर में 690 करोड़ रुपये की लागत वाली 102 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और राम भक्तों के खिलाफ कार्रवाई करते थे, वही आज आस्था की बात करते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे जनता की लोकतांत्रिक शक्ति का परिणाम बताते हुए कहा कि जनसमर्थन ने राजनीतिक दलों को अपना रुख बदलने के लिए मजबूर किया है।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या आज अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के नए स्वरूप में दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ऐसे हालात थे जब “जय श्रीराम” के उद्घोष पर कार्रवाई होती थी और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। उनका कहना था कि समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदली हैं और अब वही दल भगवान राम और आस्था की बात करते नजर आते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के मतदान और विश्वास ने प्रदेश की राजनीति की दिशा बदली है। उन्होंने दावा किया कि पहले जिन राजनीतिक दलों ने भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया, आज वे भी सार्वजनिक रूप से धार्मिक आस्था की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय ही सबसे बड़ी शक्ति होता है और उसी के कारण राजनीतिक दलों को अपनी सोच बदलनी पड़ी है।

    योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि रामपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में विकास की नई पहचान बनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले गरीबों और कमजोर वर्गों की जमीनों पर अवैध कब्जे होते थे तथा प्रशासनिक व्यवस्था निष्पक्ष नहीं थी। उनका कहना था कि वर्तमान सरकार ने कानून का शासन स्थापित करने और विकास को प्राथमिकता देने का प्रयास किया है।

    उन्होंने राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के सहयोग से कई ऐसी परियोजनाएं पूरी हुई हैं जिन्हें पहले असंभव माना जाता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास की नई गति हासिल की है और राज्य आर्थिक प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश अब तेज़ी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।

    सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव था और न्यायालयों को हस्तक्षेप करना पड़ता था। उनके अनुसार वर्तमान सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में काम किया है, जिससे युवाओं का भरोसा बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, दीपावली और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे आयोजन बिना किसी बाधा के पूरे उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और धार्मिक आयोजनों को सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रामपुर के लिए स्वीकृत विभिन्न विकास परियोजनाओं को क्षेत्र की प्रगति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे, जनसुविधाओं और विकास कार्यों के विस्तार से क्षेत्र के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा प्रदेश के समग्र विकास को नई गति प्राप्त होगी।