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  • अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर सियासी घमासान, रामलला के दर्शन नहीं करने को लेकर संतों और भाजपा नेताओं ने उठाए सवाल

    अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर सियासी घमासान, रामलला के दर्शन नहीं करने को लेकर संतों और भाजपा नेताओं ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर भाजपा नेताओं और संतों ने सवाल उठाए हैं। अखिलेश यादव बीते दिन पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में शामिल होने अयोध्या पहुंचे थे। हालांकि, उनके राम मंदिर में रामलला के दर्शन नहीं करने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर समेत भाजपा नेताओं ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा।

    उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस तरह की राजनीति की जा रही है, उससे खुद अखिलेश यादव के सशंकित होने का संकेत मिलता है। राजभर ने कहा कि यदि अखिलेश यादव अयोध्या गए थे, तो उन्हें हनुमानगढ़ी और भगवान राम के दर्शन भी कर लेने चाहिए थे। उनके मुताबिक, ऐसा करने से इस तरह के सवाल खड़े नहीं होते। राजभर ने श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन स्थल पर नारेबाजी को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जहां भागवत कथा हो रही है, वहां अखिलेश यादव के लोग नारेबाजी कर रहे हैं। उन्होंने इस कृत्य की निंदा करते हुए कहा कि भागवत कथा के स्थान को राजनीतिक मंच बनाना अखिलेश यादव को ही शोभा देता है।

    उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस मामले में समाजवादी पार्टी को आत्मावलोकन करने की सलाह दी। भाजपा नेता ने सपा पर मुस्लिम तुष्टिकरण और जाति के नाम पर वोट मांगने की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसी राजनीति करने वाले लोग उत्तर प्रदेश में सफल नहीं होंगे। पाठक ने अयोध्या में प्रचंड बहुमत के साथ जीत हासिल करने का दावा भी किया। उनके बयान से स्पष्ट है कि भाजपा नेता अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को आगामी चुनावों के राजनीतिक संदर्भ में देख रहे हैं।

    भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी ने भी अखिलेश यादव के दौरे को लेकर पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने सत्ता में रहते हुए अयोध्या को भुला दिया था। त्रिपाठी ने कहा कि योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद अयोध्या में 50 हजार से अधिक की परियोजनाएं आई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर भाजपा का मंदिर नहीं है, लेकिन अयोध्या पहुंचने के बावजूद अखिलेश यादव रामलला के दर्शन करने नहीं गए। उनके बयान में अयोध्या के विकास और राम मंदिर से जुड़े मुद्दों को लेकर सपा की भूमिका पर सवाल उठाए गए।

    अखिलेश यादव के राम मंदिर में दर्शन नहीं करने को लेकर संतों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। अयोध्या दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के मंच से भगवान कृष्ण और न्याय की बात की, लेकिन राम के बारे में कुछ नहीं कहा। यह बात संतों को खटकी और उनके दौरे को लेकर सवाल उठने लगे। इस तरह धार्मिक आयोजन में उनकी मौजूदगी और रामलला के दर्शन नहीं करने का मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

    उत्तर प्रदेश में कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में नेताओं के दौरे और बयानों को चुनावी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर उठे सवालों के बीच भाजपा नेताओं ने सपा की राजनीतिक रणनीति और धार्मिक मुद्दों पर उसके रुख को निशाने पर लिया है। वहीं, इस पूरे विवाद का केंद्र अखिलेश यादव का भागवत कथा में शामिल होना और रामलला के दर्शन नहीं करना बना हुआ है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मुद्दे पर संसद परिसर में विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन, साधु के वेश में दिखे पप्पू यादव और राहुल गांधी ने दिया चढ़ावा

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मुद्दे पर संसद परिसर में विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन, साधु के वेश में दिखे पप्पू यादव और राहुल गांधी ने दिया चढ़ावा

    नई दिल्ली । अयोध्या राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर संसद परिसर में विपक्षी दलों ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने नाटक के माध्यम से कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। इस दौरान पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में दिखाई दिए, जबकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसद प्रदर्शन में शामिल हुए।

    प्रदर्शन के दौरान संसद परिसर में एक प्रतीकात्मक दान पेटी रखी गई थी। विपक्षी नेताओं ने नाटक के जरिए अपनी बात रखने की कोशिश की। इस दौरान राहुल गांधी सहित अन्य सांसद दान पेटी में चढ़ावा डालते हुए नजर आए। वहीं, प्रदर्शन के एक हिस्से में पप्पू यादव साधु के रूप में दान पेटी लेकर जाते हुए दिखाई दिए, जिसके बाद अन्य सांसदों ने उन्हें रोकने और विरोध जताने का अभिनय किया।

    विपक्षी सांसदों ने इस प्रदर्शन के जरिए सरकार पर निशाना साधने की कोशिश की। नेताओं का कहना था कि वे विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं और संसद के भीतर तथा बाहर जनता से जुड़े मामलों को उठाते रहेंगे। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी भी की।

    प्रदर्शन में राम मंदिर चढ़ावा विवाद के साथ-साथ अन्य मुद्दों को भी जोड़ा गया। विपक्षी सांसदों ने पेपर लीक जैसे मामलों का भी जिक्र करते हुए सरकार से जवाब मांगने की बात कही। प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों में चढ़ावा चोरी और पेपर चोरी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

    इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा अध्यक्ष ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि संसद और उसके परिसर की गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। उन्होंने सदस्यों को सलाह दी कि संसद परिसर में ऐसे तरीके अपनाने से बचना चाहिए, जिससे सदन की मर्यादा प्रभावित हो।

    लोकसभा अध्यक्ष ने सांसदों से संसदीय परंपराओं और नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक बहस और चर्चा का स्थान है, इसलिए विरोध दर्ज कराने के दौरान भी गरिमा और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।

    घटना के बाद संसद की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी हुई। हालांकि विपक्षी नेताओं ने अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए कहा कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे।

    राजनीतिक जानकारों के अनुसार, संसद सत्र के दौरान विपक्ष अक्सर अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाता है। इस बार राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर किए गए प्रतीकात्मक प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।

    वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से संसदीय गरिमा और विरोध के तरीकों को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद की बहस और राजनीतिक बयानबाजी में चर्चा का विषय बना रह सकता है।