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  • अटारी-वाघा बॉर्डर पर पाकिस्तानी रेंजर की सलामी बनी चर्चा, भारतीय अधिकारी के जवाब ने क्यों खींचा सबका ध्यान

    अटारी-वाघा बॉर्डर पर पाकिस्तानी रेंजर की सलामी बनी चर्चा, भारतीय अधिकारी के जवाब ने क्यों खींचा सबका ध्यान

    नई दिल्ली । अटारी-वाघा सीमा पर आयोजित समारोह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक पाकिस्तानी रेंजर भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी को सलामी देता दिखाई देता है। इसके जवाब में भारतीय अधिकारी सलामी लौटाने के बजाय सिर हिलाकर अभिवादन करते नजर आते हैं। इसी दृश्य को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और सैन्य परंपराओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    वीडियो सामने आने के बाद कुछ पाकिस्तानी सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया कि भारतीय अधिकारी ने औपचारिक रूप से सलामी का जवाब क्यों नहीं दिया। उनका कहना था कि सैन्य परंपराओं के अनुसार सलामी का जवाब सलामी से ही दिया जाना चाहिए। हालांकि, इस बहस के बीच कई लोगों ने सैन्य प्रोटोकॉल और वरिष्ठ अधिकारियों की परंपराओं का हवाला देते हुए अलग दृष्टिकोण भी रखा।

    एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने इस विषय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हर परिस्थिति में सलामी लौटाने के लिए बाध्य नहीं होते। कई अवसरों पर वे सिर हिलाकर, मुस्कुराकर या मौखिक अभिवादन के माध्यम से भी सम्मान व्यक्त करते हैं। उनके अनुसार यह तरीका भी सैन्य शिष्टाचार का हिस्सा माना जाता है और इससे अधीनस्थ जवानों के प्रति सम्मान तथा सौहार्द का संदेश जाता है।

    सैन्य मामलों के जानकारों का भी मानना है कि विभिन्न देशों की सेनाओं में सलामी देने और उसका जवाब देने से जुड़े नियम परिस्थितियों, पद और आयोजन की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। हर औपचारिक कार्यक्रम में दोनों पक्षों के अधिकारियों द्वारा एक जैसी प्रतिक्रिया देना अनिवार्य नहीं होता। कई बार निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत केवल सम्मान प्रकट करना ही पर्याप्त माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच आयोजित सीमा समारोहों, ध्वज बैठक, कमांडर स्तर की वार्ता या अन्य आधिकारिक आयोजनों में दोनों देशों की सेनाएं तय सैन्य परंपराओं और प्रोटोकॉल का पालन करती हैं। इनका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में अनुशासन बनाए रखना और औपचारिक संवाद के दौरान पेशेवर माहौल कायम रखना होता है।

    अटारी-वाघा सीमा पर होने वाला बीटिंग रिट्रीट समारोह वर्षों से दोनों देशों के बीच सैन्य अनुशासन और औपचारिक परंपराओं का प्रतीक माना जाता है। इसमें दोनों देशों के सुरक्षा बल निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजनों में व्यक्तिगत व्यवहार भी सैन्य प्रोटोकॉल और पदानुक्रम के अनुरूप होता है।

    वायरल वीडियो ने भले ही सोशल मीडिया पर बहस को जन्म दिया हो, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसे किसी असामान्य घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार भारतीय अधिकारी द्वारा सिर हिलाकर अभिवादन करना भी सम्मान प्रकट करने का एक स्वीकृत तरीका माना जाता है और यह सैन्य शिष्टाचार के दायरे में आता है।

    इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि सैन्य परंपराएं केवल सलामी तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि उनमें अनुशासन, पदानुक्रम, औपचारिक प्रोटोकॉल और पारस्परिक सम्मान जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल होते हैं। यही कारण है कि अलग-अलग परिस्थितियों में अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी निर्धारित नियमों और प्रचलित सैन्य परंपराओं के अनुरूप अलग हो सकती है।

  • रावलकोट में प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी से बढ़ा तनाव, PoK में सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

    रावलकोट में प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी से बढ़ा तनाव, PoK में सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलकोट क्षेत्र में मंगलवार को प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच हुई कथित झड़प के बाद स्थिति अत्यधिक तनावपूर्ण बनी हुई है। स्थानीय संगठनों का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी रेंजर्स द्वारा की गई गोलीबारी में कई लोगों की जान गई, जबकि बड़ी संख्या में नागरिक अब भी प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं। घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में असंतोष और विरोध का माहौल गहरा गया है।

    स्थानीय दावों के अनुसार, मंगलवार तड़के बड़ी संख्या में नागरिक अपने विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। आरोप है कि हालात बिगड़ने पर सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की। हालांकि, इस संबंध में स्वतंत्र रूप से सभी दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी गई है।

    जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन को दबाने के लिए सुरक्षा बल लगातार बल प्रयोग कर रहे हैं। संगठन का दावा है कि 5 जून से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक लगभग 70 लोगों की मौत हो चुकी है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन संगठन का कहना है कि हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं और नागरिकों में व्यापक असंतोष व्याप्त है।

    गोलीबारी की खबरों के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं दिखे। बड़ी संख्या में लोग चिनार चौक और आसपास के क्षेत्रों में एकत्र रहे तथा आंदोलन जारी रखने की बात कही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक विरोध जारी रहेगा। क्षेत्र में लगातार लोगों की आवाजाही और जुटान के कारण स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।

    इस घटनाक्रम पर पाकिस्तान के राजनीतिक हलकों से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेता डॉ. शहबाज गिल ने सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाएं क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बल प्रयोग से हालात सामान्य होने के बजाय और जटिल हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने मृतकों की संख्या और घटनाओं की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    शहबाज गिल ने यह भी दावा किया कि गोलीबारी में जान गंवाने वाले अधिकांश लोग युवा थे। उन्होंने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनके अनुसार, ऐसे घटनाक्रमों से स्थानीय लोगों में असुरक्षा और असंतोष की भावना बढ़ रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और आधिकारिक पक्ष की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

    इस बीच, कश्मीर एक्शन कमेटी के नेताओं ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि वह आने वाले दिनों में अपनी अगली रणनीति सार्वजनिक करेगा। प्रदर्शन से जुड़े प्रतिनिधियों ने यह भी संकेत दिया है कि विभिन्न स्थानों पर विरोध कार्यक्रम जारी रखे जाएंगे। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    रावलकोट की मौजूदा स्थिति पर स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है। घटनाओं के संबंध में अलग-अलग पक्षों की ओर से विभिन्न दावे किए जा रहे हैं, जबकि वास्तविक स्थिति को लेकर स्पष्ट तस्वीर आधिकारिक जानकारी और आगे आने वाली जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। फिलहाल, क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

  • PoK में बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले पाकिस्तान अलर्ट, 4000 जवान और रेंजर्स की 7 विंग तैनात करने की तैयारी

    PoK में बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले पाकिस्तान अलर्ट, 4000 जवान और रेंजर्स की 7 विंग तैनात करने की तैयारी


    नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 15 जुलाई को प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च से पहले पाकिस्तान समर्थित स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। संभावित अशांति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है।

    सीएनएन-न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, एक गोपनीय आधिकारिक दस्तावेज में PoK के गृह विभाग ने इस्लामाबाद से 4,000 अतिरिक्त जवानों और पाकिस्तान रेंजर्स की सात विंग्स की तत्काल तैनाती की मांग की है। यह मांग क्षेत्र में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और तनावपूर्ण हालात को देखते हुए की गई है।

    यह कदम संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर और सैकड़ों अन्य कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद बढ़े जन आक्रोश के बीच उठाया गया है।

    गोपनीय पत्र में सुरक्षा बलों की मांग
    रिपोर्ट के मुताबिक, PoK गृह विभाग की ओर से पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के सचिव को 8 जुलाई को भेजे गए पत्र को ‘अति आवश्यक’ और ‘गोपनीय’ बताया गया है। इसमें कहा गया है कि JAAC की ओर से आयोजित लॉन्ग मार्च, विरोध प्रदर्शन और धरनों के कारण क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति गंभीर हो गई है।

    प्रशासन का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था इस स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है। अतिरिक्त बलों की तैनाती का उद्देश्य प्रदर्शनों के प्रभाव को नियंत्रित करना, प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखना और पहले से तैनात सुरक्षा कर्मियों पर दबाव कम करना बताया गया है।

    आधे जवान हथियारों से लैस, आधे को मिलेगा दंगा-रोधी उपकरण
    गोपनीय दस्तावेज के अनुसार, मांगी गई अतिरिक्त फोर्स PoK में पहले से मौजूद सुरक्षा बलों के अतिरिक्त होगी। प्रशासन ने मांग की है कि आने वाले सुरक्षा कर्मियों में 50 प्रतिशत जवान आधुनिक हथियारों और पर्याप्त गोला-बारूद से लैस हों, जबकि बाकी 50 प्रतिशत जवानों को दंगा-रोधी उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।

    दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि यदि दंगा नियंत्रण उपकरणों की कमी हो तो तैनाती से पहले पाकिस्तान के केंद्रीय स्टॉक से इसकी व्यवस्था की जाए।

    JAAC पर लगाए गए हिंसा के आरोप
    PoK प्रशासन ने मौजूदा तनाव के लिए संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को जिम्मेदार ठहराया है। प्रशासन का आरोप है कि पुंछ और रावलकोट में लगातार धरने और पड़ोसी जिलों में रैलियां आयोजित कर लोगों को उकसाया जा रहा है।

    प्रशासन ने यह दावा भी किया है कि प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े सशस्त्र लोग मुजफ्फराबाद और मीरपुर डिवीजनों में माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों और नागरिकों को निशाना बनाने तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले ट्रकों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।

    PoK प्रशासन का दावा है कि हिंसा में अब तक चार सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है और 174 अन्य घायल हुए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

    15 जुलाई के मार्च से पहले बढ़ी चिंता
    15 जुलाई के प्रस्तावित बड़े मार्च से पहले इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की मांग को लेकर क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई है कि भारी सुरक्षा तैनाती के जरिए सरकार प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई कर सकती है।

    JAAC पिछले कुछ समय से PoK में जनता की मांगों और अधिकारों को लेकर सक्रिय संगठन के रूप में सामने आई है। समिति का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार और स्थानीय प्रशासन बिजली की ऊंची कीमतों, आटे की कमी और बुनियादी अधिकारों से जुड़े मुद्दों का समाधान करने में विफल रहे हैं। संगठन का कहना है कि इन मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग किया जा रहा है।