Tag: Ranji Trophy

  • शतक लगाने के बाद मैदान पर रो पड़े अभिषेक पोरेल, जमानत पर बाहर आने के बाद भावुक हुए बंगाल के विकेटकीपर

    शतक लगाने के बाद मैदान पर रो पड़े अभिषेक पोरेल, जमानत पर बाहर आने के बाद भावुक हुए बंगाल के विकेटकीपर


    नई दिल्ली:
    बंगाल के विकेटकीपर-बल्लेबाज अभिषेक पोरेल ने रणजी ट्रॉफी मुकाबले में शतक लगाने के बाद मैदान पर भावुक प्रतिक्रिया दी। पारी के दौरान उन्होंने अपना शतक पूरा किया तो उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। हाल के दिनों में निजी जीवन में मुश्किल दौर से गुजर रहे पोरेल के लिए यह पारी खास रही। दुष्कर्म के आरोप से जुड़े एक मामले में जमानत मिलने के कुछ दिन बाद उन्होंने क्रिकेट के मैदान पर वापसी की थी। शतक पूरा करने के बाद उनकी भावुकता ने सबका ध्यान खींचा। इस दौरान उन्होंने अपने अनुभवों और बीते दिनों के मानसिक दबाव को लेकर भी बात की।

    पोरेल ने रणजी ट्रॉफी में बंगाल की ओर से खेलते हुए महत्वपूर्ण पारी खेली। घरेलू क्रिकेट में विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में अपनी पहचान बना चुके पोरेल के लिए यह प्रदर्शन ऐसे समय आया, जब वह कानूनी मामले के कारण चर्चा में थे। जमानत पर रिहा होने के बाद मैदान पर उतरना उनके लिए आसान नहीं रहा होगा, लेकिन उन्होंने खेल पर ध्यान केंद्रित करते हुए शतक बनाया। पारी पूरी होने के बाद उनकी आंखों में आंसू दिखाई दिए। यह भावुक क्षण उनके लिए क्रिकेट में वापसी और मुश्किल परिस्थितियों के बीच प्रदर्शन करने के महत्व को दर्शाता है।

    पोरेल से जुड़े मामले में उन पर दुष्कर्म का आरोप लगाया गया है। इस मामले में उन्हें जमानत मिली है, लेकिन जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से मुक्त होना नहीं है। मामले की कानूनी प्रक्रिया अपने अनुसार आगे बढ़ेगी और आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। ऐसे मामलों में आरोप और दोषसिद्धि के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। पोरेल की ओर से अपनी भावनाओं और हालात को लेकर की गई बातों ने उनके निजी संघर्ष को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, इस मामले से जुड़े आरोपों के संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा, जब तक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।

    बंगाल की टीम के लिए रणजी ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंट में खिलाड़ियों का प्रदर्शन अहम होता है। पोरेल ने अपने शतक के जरिए टीम के लिए उपयोगी योगदान दिया। विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर उनकी भूमिका केवल विकेट के पीछे जिम्मेदारी निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय रन बनाना भी उनकी अहम जिम्मेदारी है। इस पारी ने दिखाया कि निजी चुनौतियों के बीच भी उन्होंने मैदान पर अपना योगदान देने की कोशिश की। हालांकि, किसी एक पारी के आधार पर उनके भविष्य या मामले से जुड़े घटनाक्रम के बारे में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    शतक के बाद पोरेल का भावुक होना उनके लिए इस उपलब्धि के व्यक्तिगत महत्व को दर्शाता है। हालिया परिस्थितियों के बीच मैदान पर लौटकर रन बनाना उनके लिए एक महत्वपूर्ण पल रहा। खेल में खिलाड़ियों को प्रदर्शन के साथ-साथ निजी जीवन की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। लेकिन कानूनी मामले की गंभीरता को देखते हुए क्रिकेट प्रदर्शन और आरोपों से जुड़ी प्रक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है। फिलहाल पोरेल की रणजी ट्रॉफी पारी चर्चा में है, जबकि उनके खिलाफ चल रहे मामले का नतीजा कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

  • टीम इंडिया में चयन नहीं होने पर मोहम्मद शमी ने तोड़ी चुप्पी, चयनकर्ताओं पर साधा निशाना, बोले मौका नहीं मिला तो यह मेरा नुकसान नहीं

    टीम इंडिया में चयन नहीं होने पर मोहम्मद शमी ने तोड़ी चुप्पी, चयनकर्ताओं पर साधा निशाना, बोले मौका नहीं मिला तो यह मेरा नुकसान नहीं


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम में अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की वापसी के बाद मोहम्मद शमी के चयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ भुवनेश्वर कुमार को लंबे इंतजार के बाद टी20 टीम में जगह मिली है तो दूसरी तरफ मोहम्मद शमी अब भी भारतीय टीम में वापसी का इंतजार कर रहे हैं। घरेलू क्रिकेट में बंगाल की ओर से खेलने जा रहे शमी ने टीम में चयन नहीं होने को लेकर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि पिछले दो से तीन साल से उनके साथ यही स्थिति बनी हुई है और लगातार प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें टीम इंडिया में मौका नहीं मिल रहा है।
    रेवस्पोर्ट्स से बातचीत के दौरान जब शमी से भुवनेश्वर कुमार की वापसी और खुद के लंबे समय से टीम से बाहर रहने के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि भुवनेश्वर को भारत के लिए खेलने का मौका मिला है और यह उनके लिए अच्छी बात है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भुवनेश्वर के चयन से उनका कोई लेना देना नहीं है। शमी ने कहा कि उन्हें जहां भी खेलने का अवसर मिलेगा वह अपना शत प्रतिशत प्रदर्शन करेंगे। फिलहाल उनका पूरा ध्यान रणजी ट्रॉफी के मुकाबलों पर है।
    शमी ने अपने बयान में चयन को लेकर नाराजगी भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पिछले दो से तीन वर्षों से उनके साथ ऐसा ही हो रहा है। वह लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और बंगाल के लिए खेलते हुए अपनी फिटनेस भी साबित कर चुके हैं। इसके बावजूद अगर उन्हें दोबारा भारतीय टीम के लिए खेलने का मौका नहीं मिलता है तो यह उनका नुकसान नहीं होगा। उनके इस बयान के बाद अनुभवी तेज गेंदबाजों के चयन और टीम इंडिया में वापसी के अवसरों को लेकर बहस तेज हो गई है।
    36 वर्षीय मोहम्मद शमी ने भारत के लिए अपना आखिरी मुकाबला 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी में खेला था। इसके बाद से वह भारतीय टीम से बाहर चल रहे हैं। फिटनेस से जुड़ी समस्याओं और युवा खिलाड़ियों को प्राथमिकता दिए जाने को उनके टीम से बाहर रहने की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। हालांकि शमी घरेलू क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी के दम पर वापसी की उम्मीद बनाए हुए हैं। रणजी ट्रॉफी में बंगाल की टीम का हिस्सा होने के कारण उनके पास एक बार फिर अपनी क्षमता दिखाने का अवसर है।
    दूसरी ओर भुवनेश्वर कुमार ने आईपीएल 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टी20 टीम में वापसी की है। उन्हें न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम में शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि उन्हें 2027 में होने वाले वनडे विश्व कप की योजनाओं के मद्देनजर भी परखा जा सकता है। भुवनेश्वर की वापसी ने अनुभवी गेंदबाजों की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
    वेस्टइंडीज के खिलाफ मौजूदा सीरीज में भारतीय गेंदबाजों के प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सपाट पिचों पर गेंदबाजों को मिल रही चुनौती के बीच क्रिकेट प्रशंसक और विशेषज्ञ अनुभवी खिलाड़ियों को मौका देने की मांग कर रहे हैं। ऐसे माहौल में शमी का बयान चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि टीम में चयन का अंतिम फैसला चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन की रणनीति पर निर्भर करता है। शमी के लिए फिलहाल रणजी ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करना और अपनी गेंदबाजी की लय बनाए रखना अहम होगा। उनका घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन आने वाले समय में टीम इंडिया में वापसी की संभावनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
  • सूर्यकुमार यादव को रणजी टीम में भी नहीं मिली जगह, उपलब्धता बताने के बाद चयन से बाहर होने पर उठे बड़े सवाल

    सूर्यकुमार यादव को रणजी टीम में भी नहीं मिली जगह, उपलब्धता बताने के बाद चयन से बाहर होने पर उठे बड़े सवाल


    नई दिल्ली। सूर्यकुमार यादव के क्रिकेट करियर को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। टीम इंडिया से बाहर होने के बाद अब उन्हें मुंबई की रणजी ट्रॉफी टीम में भी जगह नहीं मिली है। खास बात यह है कि मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन की चयन बैठक से पहले सूर्यकुमार यादव से पूछा गया था कि क्या वह रणजी ट्रॉफी का मुकाबला खेलना चाहते हैं। बताया गया कि सूर्या ने इसके लिए अपनी सहमति भी जताई थी। इसके बावजूद जब मुंबई की टीम का ऐलान हुआ तो उनका नाम स्क्वॉड में नहीं था। इस फैसले ने क्रिकेट जगत में नई चर्चा छेड़ दी है।

    मुंबई को रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन का अपना पहला मुकाबला 11 अक्टूबर से वानखेड़े स्टेडियम में चंडीगढ़ के खिलाफ खेलना है। इस मुकाबले के लिए घोषित टीम की कप्तानी अनुभवी सिद्धेश लाड को सौंपी गई है जबकि युवा बल्लेबाज आयुष म्हात्रे को उपकप्तान बनाया गया है। टीम में यशस्वी जायसवाल मुशीर खान सरफराज खान सुवेद पारकर शम्स मुलानी तनुष कोटियन और तुषार देशपांडे जैसे खिलाड़ी शामिल हैं लेकिन सूर्यकुमार यादव का नाम नदारद है।

    मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के चयन प्रमुख राजेश पवार ने सूर्यकुमार यादव के चयन को लेकर वजह भी बताई है। उनके मुताबिक सूर्या ने पिछले करीब 18 महीनों से कोई रेड बॉल मुकाबला नहीं खेला है। चयनकर्ताओं का मानना है कि उन्हें पहले कुछ मैचों में खेलकर लंबे फॉर्मेट की लय हासिल करनी चाहिए। इसके बाद उन्हें टीम में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि जब चयनकर्ताओं ने खुद सूर्यकुमार से उनकी उपलब्धता को लेकर संपर्क किया था तो फिर उन्हें शुरुआती मुकाबले के लिए टीम में क्यों नहीं चुना गया।

    सूर्यकुमार यादव ने टी20 क्रिकेट में भारतीय टीम के लिए लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया है। वह टीम इंडिया की कप्तानी भी कर चुके हैं और टी20 विश्व कप में भारत की सफलता के दौरान उनकी भूमिका काफी अहम रही थी। ऐसे में रणजी टीम से बाहर होना उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं माना जा रहा है। खासकर तब जब वह खुद रेड बॉल क्रिकेट में वापसी की इच्छा जाहिर कर चुके हैं।

    मुंबई की टीम के सामने इस सीजन की शुरुआत में एक और चुनौती भी है। पिछले सीजन में टीम की कप्तानी करने वाले शार्दुल ठाकुर शुरुआती मुकाबलों में उपलब्ध नहीं रहेंगे। ट्रेनिंग के दौरान उनकी दाहिने हाथ की बीच वाली उंगली में मामूली फ्रैक्चर हुआ है। माना जा रहा है कि वह कम से कम शुरुआती दो मैचों से बाहर रह सकते हैं।

    अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सूर्यकुमार यादव रणजी क्रिकेट में वापसी के लिए किस तरह की तैयारी करते हैं और मुंबई के चयनकर्ता उन्हें अगले मुकाबलों में मौका देते हैं या नहीं। फिलहाल उनकी गैरमौजूदगी ने भारतीय क्रिकेट में उनके भविष्य को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।

  • 60 विकेट लेकर जम्मू-कश्मीर को बनाया रणजी चैंपियन अब इंग्लैंड में आजमाएंगे किस्मत! आकिब नबी पर टीम इंडिया की नजर

    60 विकेट लेकर जम्मू-कश्मीर को बनाया रणजी चैंपियन अब इंग्लैंड में आजमाएंगे किस्मत! आकिब नबी पर टीम इंडिया की नजर


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी के लिए भारतीय क्रिकेट में एक और बड़ा मौका दस्तक दे रहा है। रणजी ट्रॉफी के पिछले सीजन में अपनी घातक गेंदबाजी से तहलका मचाने वाले नबी अब इंग्लैंड की काउंटी चैंपियनशिप में सरे की टीम के लिए खेलते नजर आ सकते हैं। उन्हें मौजूदा डिवीजन वन सीजन के कुछ मुकाबलों के लिए सरे के साथ जोड़े जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि वह 2 सितंबर से द ओवल में यॉर्कशायर के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। इसके बाद ससेक्स और ग्लैमॉर्गन के खिलाफ होने वाले मुकाबलों में भी उनके खेलने की संभावना जताई जा रही है।

    आकिब नबी ने रणजी ट्रॉफी के पिछले सीजन में अपनी गेंदबाजी से जबरदस्त प्रभाव छोड़ा था। उन्होंने महज 12.56 की औसत से 60 विकेट हासिल किए और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। उनकी शानदार गेंदबाजी के दम पर जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया। घरेलू क्रिकेट में इस प्रदर्शन के बाद नबी को भारतीय टीम के भविष्य के तेज गेंदबाजों में एक महत्वपूर्ण नाम माना जा रहा है।

    इंग्लैंड का संभावित काउंटी कार्यकाल नबी के लिए सिर्फ विदेशी क्रिकेट खेलने का मौका नहीं होगा बल्कि भारतीय टीम के नजरिए से भी इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टीम मैनेजमेंट और राष्ट्रीय चयनकर्ता न्यूजीलैंड के आगामी टेस्ट दौरे को ध्यान में रखते हुए नबी को तेज गेंदबाजों के अनुकूल परिस्थितियों में खेलने का अनुभव दिलाना चाहते हैं। इंग्लैंड में रेड कूकाबुरा गेंद से गेंदबाजी करते हुए नबी की स्विंग और परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाने की क्षमता को परखा जा सकता है। न्यूजीलैंड में टेस्ट क्रिकेट के दौरान भी तेज गेंदबाजों को अनुकूल परिस्थितियां मिलने की उम्मीद रहती है ऐसे में यह अनुभव उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

    नबी श्रीलंका के खिलाफ भारत की हालिया टेस्ट सीरीज का भी हिस्सा रहे थे। भारत ने यह सीरीज 1-0 से अपने नाम की लेकिन नबी को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली थी। अब इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेलने का मौका उन्हें विदेशी परिस्थितियों में खुद को साबित करने का अवसर देगा। खास बात यह है कि इंग्लैंड में कई भारतीय खिलाड़ी पहले से काउंटी क्रिकेट में सक्रिय हैं जिससे नबी को वहां के माहौल और परिस्थितियों को समझने में भी मदद मिल सकती है।

    इंग्लैंड में भारतीय खिलाड़ियों की मौजूदगी की बात करें तो बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार वार्विकशायर के साथ फिर जुड़ने वाले हैं। कुलदीप यादव भी यॉर्कशायर के लिए काउंटी क्रिकेट खेलने लौटेंगे। सरे की टीम में भारतीय लेग स्पिनर राहुल चाहर और अनकैप्ड बल्लेबाजी ऑलराउंडर महिपाल लोमरोर भी शामिल हैं। ऐसे में नबी को विदेशी परिस्थितियों में भारतीय खिलाड़ियों के साथ खेलने और अनुभव साझा करने का मौका मिल सकता है।

    काउंटी चैंपियनशिप में अपना संभावित कार्यकाल पूरा करने के बाद नबी के इंडिया ए टीम से जुड़ने की उम्मीद है। 22 सितंबर से पुडुचेरी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले दो रेड बॉल मुकाबलों में उनके खेलने की संभावना है। इसके बाद जम्मू-कश्मीर की टीम के साथ उनके जुड़ने को लेकर भी स्थिति पर नजर रहेगी क्योंकि 1 से 5 अक्टूबर तक श्रीनगर में रेस्ट ऑफ इंडिया के खिलाफ ईरानी कप मुकाबला होना है।

    इस बीच भारतीय तेज गेंदबाजी के अनुभवी चेहरे मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार के भी काउंटी चैंपियनशिप के बाद के चरणों में खेलने की संभावना जताई गई है। दोनों फिलहाल दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में ईस्ट जोन की ओर से खेल रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में भारतीय तेज गेंदबाजों के लिए विदेशी परिस्थितियों में खुद को परखने के कई अहम मौके सामने आ सकते हैं। आकिब नबी के लिए सरे का संभावित काउंटी कार्यकाल इसी दिशा में उनके करियर का बड़ा पड़ाव साबित हो सकता है।

  • 9 मैचों में 5 शतक, 781 रन… पडिक्कल से भी आगे निकला ये धुरंधर, 25 साल के अमन मोखाड़े ने उड़ाया गर्दा

    9 मैचों में 5 शतक, 781 रन… पडिक्कल से भी आगे निकला ये धुरंधर, 25 साल के अमन मोखाड़े ने उड़ाया गर्दा


    नई दिल्ली । जब कोई बल्लेबाज शानदार फॉर्म में होता है, तो उसे रोक पाना किसी भी गेंदबाजी आक्रमण के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों भारतीय घरेलू क्रिकेट में देखने को मिल रहा है, जहां एक 25 साल का युवा बल्लेबाज गेंदबाजों पर कहर बनकर टूट पड़ा है। यह खिलाड़ी कोई और नहीं, बल्कि विदर्भ के सलामी बल्लेबाज अमन मोखाड़े हैं, जिन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में अपने बल्ले से रनों की झड़ी लगा दी है। अमन मोखाड़े ने इस टूर्नामेंट में अब तक 9 मैच खेले हैं और इनमें 5 शानदार शतक जड़ चुके हैं। इन 9 पारियों में उनके बल्ले से कुल 781 रन निकले हैं, जिससे वह इस सीजन के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं।
    उन्होंने कर्नाटक के स्टार बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल को भी पीछे छोड़ दिया है, जिनके नाम इस टूर्नामेंट में 721 रन दर्ज हैं। अमन की इस विस्फोटक बल्लेबाजी का ही नतीजा है कि विदर्भ की टीम ने विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल में जगह बना ली है और अब खिताब जीतने से सिर्फ एक कदम दूर है। दाएं हाथ के इस ओपनर ने टूर्नामेंट की शुरुआत भी धमाकेदार अंदाज में की थी। पहले ही मैच में उन्होंने 110 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली, जबकि दूसरे मुकाबले में 82 रन बनाए। इसके बाद तो मानो शतकों की बारिश ही हो गई। हर मैच में अमन का आत्मविश्वास और तकनीक देखने लायक रही, जिसने चयनकर्ताओं और क्रिकेट एक्सपर्ट्स का ध्यान खींचा है।

    शानदार फॉर्म के चलते अमन मोखाड़े ने एक बड़ा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है। वह अब लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज 1000 रन पूरे करने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं। उन्होंने यह कारनामा सिर्फ 16 पारियों में कर दिखाया, जिससे उन्होंने देवदत्त पडिक्कल और अभिनव मुकुंद का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने 1000 रन तक पहुंचने में 17 पारियां खेली थीं। इतना ही नहीं, अमन ने इस मामले में साउथ अफ्रीका के महान बल्लेबाज ग्रीम पोलॉक की बराबरी भी कर ली है, जिन्होंने भी 16 पारियों में 1000 लिस्ट-ए रन पूरे किए थे।

    अमन मोखाड़े का बल्ला सिर्फ विजय हजारे ट्रॉफी में ही नहीं, बल्कि पूरे घरेलू सीजन में आग उगलता नजर आया है। रणजी ट्रॉफी में उन्होंने 7 पारियों में 577 रन बनाए थे, जबकि सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उनके नाम 206 रन दर्ज हैं। अब विजय हजारे ट्रॉफी में 781 रन बनाकर उन्होंने यह साफ कर दिया है कि वह लंबे रेस के घोड़े हैं। क्रिकेट फैंस के लिए अमन मोखाड़े भले ही नया नाम हों, लेकिन उनकी कहानी बेहद दिलचस्प है। 16 जनवरी 2001 को जन्मे अमन ने ज्वाला सिंह से कोचिंग ली है, जिन्होंने भारतीय टीम के युवा स्टार यशस्वी जायसवाल को भी तैयार किया है। अमन एक आक्रामक ओपनर होने के साथ-साथ लेग ब्रेक गेंदबाजी भी कर सकते हैं। अब 18 जनवरी को विजय हजारे ट्रॉफी का फाइनल खेला जाना है और सभी की नजरें एक बार फिर इस रन मशीन पर टिकी होंगी।