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  • उदय प्रताप सिंह के खिलाफ तिरंगा अपमान का मामला खारिज कोर्ट ने कहा मंत्री के निर्देश का प्रमाण नहीं

    उदय प्रताप सिंह के खिलाफ तिरंगा अपमान का मामला खारिज कोर्ट ने कहा मंत्री के निर्देश का प्रमाण नहीं


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के परिवहन और स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से जुड़े राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने परिवाद खारिज कर दिया है। जबलपुर की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट के सामने यह प्रमाण नहीं आया कि जिस वाहन पर राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया था वह मंत्री का वाहन था या तिरंगा मंत्री के निर्देश पर वहां लगाया गया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इसी आधार पर अदालत ने मामले में आगे कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया।

    यह मामला 11 अगस्त 2024 को नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में निकाली गई तिरंगा यात्रा से जुड़ा है। गोटेगांव निवासी कौशल सिलावट ने इस संबंध में अदालत में परिवाद दायर किया था। परिवादी की ओर से आरोप लगाया गया था कि तिरंगा यात्रा के दौरान मंत्री एक खुली जीप में सवार थे और वाहन के बोनट पर राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया था। आरोप था कि झंडा इस तरह लगा हुआ था कि वह मंत्री के पैरों को स्पर्श कर रहा था।

    परिवादी ने इस घटना को राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के प्रावधानों से जोड़ते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। मामले में यह तर्क भी रखा गया था कि वाहन के बोनट या किसी अन्य हिस्से पर राष्ट्रीय ध्वज को इस तरह रखना जिससे उसकी गरिमा प्रभावित हो कानून के प्रावधानों के विपरीत है। मार्च 2026 में इसी परिवाद पर एमपी-एमएलए कोर्ट ने मंत्री को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। उस समय अदालत में यह सवाल भी उठा था कि मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश क्यों न दिया जाए।

    परिवादी पक्ष ने अदालत में घटना से संबंधित तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों को साक्ष्य के तौर पर पेश किया था। उनका कहना था कि घटना की शिकायत पहले गाडरवारा थाने में की गई लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को भी लिखित शिकायतें भेजे जाने का दावा किया गया था। परिवादी ने इसी आधार पर अदालत का रुख किया था। इन दावों का उल्लेख पहले की सुनवाई से जुड़ी रिपोर्टों में भी किया गया था।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की। रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने पाया कि पेश की गई तस्वीर में वाहन का नंबर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। साथ ही यह स्थापित करने वाला पर्याप्त प्रमाण भी सामने नहीं आया कि जिस वाहन पर तिरंगा लगाया गया था वह सरकारी वाहन या मंत्री का निजी वाहन था। इसके अलावा यह भी प्रमाणित नहीं हुआ कि राष्ट्रीय ध्वज को मंत्री के निर्देश पर वाहन पर लगाया गया था।

    इन्हीं बिंदुओं को देखते हुए अदालत ने परिवाद को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया। इसका अर्थ यह है कि इस परिवाद के आधार पर मंत्री के खिलाफ आगे की आपराधिक कार्रवाई का रास्ता इस स्तर पर बंद हो गया है।

    इस मामले की शुरुआत में अदालत की ओर से जारी नोटिस और अब परिवाद खारिज किए जाने के बीच कई महीनों तक सुनवाई चली। मार्च में सामने आई रिपोर्टों में मंत्री से जवाब मांगे जाने की जानकारी थी जबकि अब उपलब्ध रिपोर्ट में अदालत द्वारा परिवाद खारिज किए जाने की बात सामने आई है।

    फिलहाल अदालत के फैसले के बाद राव उदय प्रताप सिंह को इस परिवाद में राहत मिली है। मामले में लगाए गए आरोपों और परिवादी की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों पर अदालत ने पर्याप्त आधार नहीं पाया और इसी वजह से आगे की कार्रवाई के लिए परिवाद को स्वीकार नहीं किया।

  • तिरंगे के अपमान का आरोप: मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को कोर्ट का नोटिस, पूछा-क्यों न दर्ज हो एफआईआर?

    तिरंगे के अपमान का आरोप: मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को कोर्ट का नोटिस, पूछा-क्यों न दर्ज हो एफआईआर?


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब Rao Uday Pratap Singh के खिलाफ राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान के मामले में अदालत ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जबलपुर स्थित सांसद-विधायक मामलों की विशेष अदालत ने परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश क्यों न दिया जाए। अदालत ने उन्हें 7 अप्रैल 2026 को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।
    यह मामला मध्यप्रदेश के Narsinghpur जिले के गोटेगांव निवासी कौशल सिलावट द्वारा दायर परिवाद पर आधारित है। परिवादी के अनुसार 11 अगस्त 2024 को Gadarwara में आयोजित एक ‘तिरंगा यात्रा’ के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का अनादर किया गया। आरोप है कि इस यात्रा का नेतृत्व मंत्री राव उदय प्रताप सिंह कर रहे थे और वह एक खुली जीप के बोनट पर खड़े होकर लोगों को संबोधित कर रहे थे।

    परिवाद में कहा गया है कि इस दौरान जीप के बोनट पर तिरंगा ध्वज इस तरह लगाया गया था कि वह झुक गया था और पास खड़े व्यक्ति के पैर से भी स्पर्श हो रहा था।

    शिकायतकर्ता का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज को वाहन के बोनट, छत या किसी अन्य हिस्से पर इस प्रकार लगाना और उसे पैरों के संपर्क में आने देना राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा के खिलाफ है।

    इस मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश डी.पी. सूत्रकार ने प्रारंभिक साक्ष्यों को देखते हुए मंत्री को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने यह भी पूछा है कि क्या इस मामले में राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत अपराध दर्ज किया जाना चाहिए। इस कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को गंभीर अपराध माना गया है, जिसमें दोष सिद्ध होने पर तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।

    परिवादी कौशल सिलावट का कहना है कि उन्होंने इस घटना की शिकायत पहले स्थानीय पुलिस से की थी। उन्होंने Gadarwara Police Station में जाकर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। इसके बाद उन्होंने कई बार Narsinghpur के पुलिस अधीक्षक को भी लिखित शिकायत भेजी, लेकिन वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने पंजीकृत डाक के माध्यम से थाना प्रभारी को शिकायत भेजी तो उसे स्वीकार करने से भी इंकार कर दिया गया। उन्होंने अदालत में यह भी तर्क दिया कि यह पुलिस के वैधानिक कर्तव्यों के विपरीत है।

    परिवादी ने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसले Lalita Kumari vs Government of Uttar Pradesh (2014) का हवाला भी दिया। इस फैसले में स्पष्ट कहा गया है कि यदि किसी संज्ञेय अपराध की सूचना मिलती है तो पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होता है।

    अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों में घटना की तस्वीरें, मीडिया रिपोर्ट, डाक ट्रैकिंग रिपोर्ट और विभिन्न अधिकारियों को भेजी गई शिकायतों की प्रतियां भी शामिल हैं। इन सभी दस्तावेजों को देखते हुए विशेष अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को नोटिस जारी किया है।
    अब इस मामले में 7 अप्रैल को अदालत में सुनवाई होगी, जहां मंत्री को अपना पक्ष रखना होगा। अदालत के इस कदम के बाद प्रदेश की राजनीति में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।