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  • अमेरिका की चेतावनी: चीन पर निर्भर क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन बन सकती है राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती

    अमेरिका की चेतावनी: चीन पर निर्भर क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन बन सकती है राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर रणनीतिक महत्व रखने वाले क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर अमेरिका ने गंभीर चिंता जताई है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा है कि दुनिया भर में जरूरी खनिजों के उत्पादन और प्रोसेसिंग पर एक ही देश की अत्यधिक निर्भरता आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। उनके अनुसार लिथियम, कोबाल्ट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और ग्रेफाइट जैसे खनिज आधुनिक तकनीक, रक्षा प्रणालियों, इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर्स और रिन्यूएबल एनर्जी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, और इन पर सीमित देशों का नियंत्रण वैश्विक असंतुलन पैदा कर सकता है।

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने संसद में दिए बयान में कहा कि यदि किसी जरूरी संसाधन की सप्लाई का लगभग पूरा हिस्सा एक ही देश पर केंद्रित हो जाए, तो यह स्थिति केवल आर्थिक जोखिम नहीं बल्कि रणनीतिक कमजोरी भी बन जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी निर्भरता संकट के समय राजनीतिक और आर्थिक दबाव बनाने का माध्यम बन सकती है, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका रहती है।

    उन्होंने बताया कि अमेरिका इस स्थिति से निपटने के लिए दुनिया के कई देशों के साथ साझेदारी बढ़ा रहा है ताकि सप्लाई चेन को अधिक विविध और संतुलित बनाया जा सके। इसके तहत केवल कच्चे माल की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उनकी प्रोसेसिंग क्षमता को भी विभिन्न देशों में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। उनका कहना था कि अब यह रणनीति अमेरिकी विदेश नीति का एक अहम हिस्सा बन चुकी है और लगभग सभी राजनयिक मिशनों में इस विषय पर काम किया जा रहा है।

    इस मुद्दे को लेकर अमेरिका की नीति चीन के बढ़ते वैश्विक प्रभाव के संदर्भ में और अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमेरिकी पक्ष का मानना है कि क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में रक्षा और तकनीकी क्षेत्र में गंभीर चुनौतियां खड़ी कर सकती है। इसी कारण अमेरिका कई देशों को साथ लेकर एक व्यापक सप्लाई नेटवर्क बनाने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता को कम किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में रेयर अर्थ और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की भूमिका लगातार बढ़ रही है, जिससे इनके उत्पादन और आपूर्ति पर नियंत्रण रखने वाले देशों की रणनीतिक शक्ति भी बढ़ती जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा और अधिक तेज होती दिख रही है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यापार और तकनीकी संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि केवल खनिज ही नहीं, बल्कि दवा निर्माण जैसे अन्य क्षेत्रों में भी उत्पादन का अत्यधिक केंद्रीकरण चिंता का विषय है। उनके अनुसार भविष्य की वैश्विक नीतियों में सप्लाई चेन की सुरक्षा और विविधीकरण को प्राथमिकता देना अनिवार्य हो गया है, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में दुनिया को बड़े व्यवधान से बचाया जा सके।

  • ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात से बदलेगा वैश्विक शक्ति संतुलन? ईरान, रूस और रेयर अर्थ पर टिकी दुनिया की नजर

    ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात से बदलेगा वैश्विक शक्ति संतुलन? ईरान, रूस और रेयर अर्थ पर टिकी दुनिया की नजर



    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा को लेकर वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ईरान, रूस और रेयर अर्थ जैसे मुद्दों पर अमेरिका-चीन के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार इस दौरे में ईरान से जुड़ा तेल व्यापार, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और चीन द्वारा रूस को दिए जा रहे समर्थन जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो सकती है। इसके साथ ही अमेरिका की नजर चीन के रेयर अर्थ मिनरल्स पर भी है, जो वैश्विक तकनीकी उद्योग के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और अमेरिका के बीच यह बातचीत केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी पड़ेगा। खासकर ईरान संकट और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दे इस बैठक को और जटिल बना रहे हैं।

    भारत के दृष्टिकोण से यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका और चीन दोनों ही उसकी रणनीतिक साझेदारी और सुरक्षा नीति पर अप्रत्यक्ष प्रभाव डालते हैं। दोनों देशों के रिश्तों में किसी भी बदलाव का असर भारत की कूटनीति और क्षेत्रीय रणनीति पर साफ दिखाई दे सकता है।

    कुल मिलाकर, ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात सिर्फ एक कूटनीतिक बैठक नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति के कई बड़े समीकरणों को प्रभावित करने वाला अहम घटनाक्रम माना जा रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।