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  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिले नए थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, सैन्य नेतृत्व और सर्वोच्च कमांडर के बीच हुआ औपचारिक संवाद

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिले नए थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, सैन्य नेतृत्व और सर्वोच्च कमांडर के बीच हुआ औपचारिक संवाद

    नई दिल्ली । भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उनकी पत्नी कोमल सेठ भी उनके साथ मौजूद रहीं। थलसेना प्रमुख का पदभार संभालने के बाद राष्ट्रपति के साथ यह उनकी पहली औपचारिक मुलाकात रही, जिसे सैन्य नेतृत्व और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के बीच संस्थागत संवाद की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भारतीय सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर हैं। ऐसे में सेना के नए प्रमुख की यह मुलाकात औपचारिक परंपराओं के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था में शीर्ष नेतृत्व के बीच समन्वय और संवाद का भी महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है। समय-समय पर सेना के वरिष्ठ अधिकारी राष्ट्रपति से मुलाकात कर सैन्य परंपराओं और संस्थागत संबंधों को आगे बढ़ाते रहे हैं।

    हाल ही में भारतीय सेना के 31वें थलसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने वाले जनरल धीरज सेठ एक अनुभवी सैन्य अधिकारी हैं। बख्तरबंद कोर से जुड़े रहे जनरल सेठ ने अपने लंबे सैन्य करियर में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। सेना प्रमुख बनने से पहले वह उप-थलसेना प्रमुख के पद पर कार्यरत थे और विभिन्न महत्वपूर्ण सैन्य नियुक्तियों का अनुभव भी रखते हैं।

    कार्यभार ग्रहण करने के बाद जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सैन्य क्षमताओं को मजबूत बनाने को अपनी प्रमुख प्राथमिकता बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सेना को तकनीक आधारित, अधिक सक्षम और तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप तैयार करना उनकी कार्ययोजना का प्रमुख हिस्सा होगा।

    उनकी रणनीतिक प्राथमिकताओं में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैन्य क्षमताओं का विस्तार, स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा, आत्मनिर्भरता को मजबूत करना तथा तीनों सेनाओं के बीच बेहतर संयुक्त संचालन क्षमता विकसित करना शामिल है। उनका मानना है कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीकी श्रेष्ठता और समन्वित सैन्य संचालन निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

    थलसेना प्रमुख बनने के बाद जनरल धीरज सेठ ने अपना दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया है, जिसमें भारतीय सेना को आधुनिक, तकनीक-सक्षम और बहुआयामी सुरक्षा चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार करने पर विशेष बल दिया गया है। उनका मार्गदर्शक मंत्र ‘जय से विजय’ सैन्य क्षमता, नवाचार, आत्मनिर्भरता और संयुक्तता को बढ़ावा देने की सोच को दर्शाता है।

    राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले जनरल धीरज सेठ ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी शिष्टाचार भेंट की थी। इस दौरान सेना के आधुनिकीकरण, रक्षा तैयारियों और भविष्य की रणनीतिक आवश्यकताओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई थी। नई जिम्मेदारी संभालने के बाद शीर्ष राजनीतिक और संवैधानिक नेतृत्व के साथ उनकी ये मुलाकातें भारतीय सेना की भावी दिशा और संस्थागत समन्वय को मजबूत करने की प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही हैं। आने वाले समय में सेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को बढ़ावा देने की दिशा में उनके नेतृत्व से महत्वपूर्ण पहल की उम्मीद की जा रही है।

  • पद्म भूषण सम्मान के बाद सामने आया अलका याग्निक का भावुक वीडियो, व्हीलचेयर पर दिखीं गायिका; फैंस ने की जल्द स्वस्थ होने की कामना

    पद्म भूषण सम्मान के बाद सामने आया अलका याग्निक का भावुक वीडियो, व्हीलचेयर पर दिखीं गायिका; फैंस ने की जल्द स्वस्थ होने की कामना

    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत की दिग्गज पार्श्व गायिका अलका याग्निक को हाल ही में देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इस सम्मान के बाद राष्ट्रपति भवन से उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने उनके लाखों प्रशंसकों को भावुक कर दिया है। वीडियो में अलका याग्निक व्हीलचेयर पर बैठी दिखाई दे रही हैं और उन्हें सहारा देकर आगे ले जाया जा रहा है। उनकी कमजोर शारीरिक स्थिति को देखकर प्रशंसकों ने चिंता व्यक्त की है और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

    पद्म भूषण सम्मान भारतीय संगीत में उनके लंबे और उत्कृष्ट योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। दशकों तक अपनी मधुर आवाज से श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाली अलका याग्निक ने हिंदी फिल्म संगीत को अनेक यादगार गीत दिए हैं। ऐसे में सम्मान समारोह के बाद सामने आए वीडियो ने लोगों का ध्यान उनके स्वास्थ्य की ओर भी आकर्षित कर दिया है।

    सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आते ही प्रशंसकों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। अनेक लोगों ने उनके अच्छे स्वास्थ्य और मजबूत मनोबल की कामना करते हुए संदेश साझा किए। प्रशंसकों का कहना है कि अलका याग्निक की आवाज भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर है और वे उन्हें जल्द स्वस्थ होकर फिर सक्रिय रूप में देखना चाहते हैं।

    अलका याग्निक पिछले कुछ समय से एक दुर्लभ स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रही हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने सार्वजनिक रूप से बताया था कि उन्हें सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस नामक बीमारी हो गई है। यह ऐसी स्थिति है जो व्यक्ति की सुनने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। उन्होंने बताया था कि एक वायरल संक्रमण के बाद अचानक उन्हें सुनने में परेशानी होने लगी थी, जिसके बाद चिकित्सकीय जांच में इस बीमारी का पता चला।

    गायिका ने उस समय अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा था कि एक यात्रा के दौरान उन्हें अचानक महसूस हुआ कि उनकी सुनने की क्षमता प्रभावित हो रही है। यह उनके लिए बेहद अप्रत्याशित और चुनौतीपूर्ण स्थिति थी। इसके बाद उन्होंने उपचार और स्वास्थ्य सुधार पर ध्यान केंद्रित किया। इस बीमारी का प्रभाव उनके पेशेवर जीवन पर भी पड़ा और उन्हें अपने संगीत संबंधी कार्यों में सीमित सक्रियता रखनी पड़ी।

    संगीत उद्योग में अलका याग्निक का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने कई पीढ़ियों के श्रोताओं को अपनी आवाज से प्रभावित किया है और हजारों गीतों को अपनी गायकी से यादगार बनाया है। उनकी आवाज रोमांटिक, भावनात्मक और मधुर गीतों की पहचान बन चुकी है। यही कारण है कि उन्हें मिला पद्म भूषण सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत करियर की उपलब्धि है, बल्कि भारतीय संगीत जगत के लिए भी गर्व का विषय माना जा रहा है।

    हालांकि स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के कारण उनकी सार्वजनिक उपस्थिति पहले की तुलना में कम हुई है, लेकिन उनके प्रशंसकों का स्नेह और समर्थन लगातार बना हुआ है। पद्म भूषण सम्मान के साथ सामने आए इस वीडियो ने एक बार फिर यह दिखाया कि देशभर में उनके प्रति लोगों के मन में कितना सम्मान और लगाव है।

    अलका याग्निक के प्रशंसकों को उम्मीद है कि वह जल्द बेहतर स्वास्थ्य के साथ सामान्य जीवन में लौटेंगी। वहीं संगीत प्रेमियों का मानना है कि भारतीय संगीत में उनके योगदान को आने वाले वर्षों तक उसी सम्मान और आदर के साथ याद किया जाता रहेगा, जिसके लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया है।

  • पद्मश्री से सम्मानित हुए दिवंगत सतीश शाह, राष्ट्रपति भवन में गूंजा उनके योगदान का सम्मान; रुपाली गांगुली और देवेन भोजानी हुए भावुक

    पद्मश्री से सम्मानित हुए दिवंगत सतीश शाह, राष्ट्रपति भवन में गूंजा उनके योगदान का सम्मान; रुपाली गांगुली और देवेन भोजानी हुए भावुक


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा और टेलीविजन जगत के प्रतिष्ठित अभिनेता सतीश शाह को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान प्रदान किए जाने के बाद मनोरंजन जगत में भावनात्मक माहौल देखने को मिला। चार दशक से अधिक समय तक अपने अभिनय, हास्य शैली और विविध किरदारों से दर्शकों का दिल जीतने वाले सतीश शाह को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके भारतीय मनोरंजन उद्योग में लंबे और उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया।

    राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में सतीश शाह की ओर से यह पुरस्कार उनके परिवार के सदस्य ने स्वीकार किया। समारोह के दौरान अभिनेता को याद करते हुए उनके सहयोगियों और प्रशंसकों ने उनके कार्यों को भारतीय मनोरंजन जगत की अमूल्य धरोहर बताया। सतीश शाह के निधन के बाद मिला यह सम्मान उनके दशकों लंबे रचनात्मक सफर की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति माना जा रहा है।

    सतीश शाह के साथ लंबे समय तक काम कर चुके अभिनेता और निर्देशक देवेन भोजानी ने इस अवसर पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरी तरह से सतीश शाह के व्यक्तित्व और योगदान के अनुरूप है, लेकिन सभी को इस बात का अफसोस रहेगा कि वह स्वयं इस सम्मान को ग्रहण करने के लिए उपस्थित नहीं थे। उन्होंने अभिनेता को याद करते हुए कहा कि उनकी प्रतिभा, विनम्रता और कार्य के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

    अभिनेत्री रुपाली गांगुली ने भी सतीश शाह को याद करते हुए भावनात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें बहुत पहले मिल जाना चाहिए था और काश वह स्वयं इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बन पाते। रुपाली ने उनके साथ बिताए गए पेशेवर और व्यक्तिगत अनुभवों को याद करते हुए उन्हें भारतीय मनोरंजन जगत का एक असाधारण कलाकार बताया।

    सतीश शाह का अभिनय करियर कई दशकों तक फैला रहा। उन्होंने फिल्मों और टेलीविजन दोनों माध्यमों में अपनी अलग पहचान बनाई। अपने सहज अभिनय, सटीक कॉमिक टाइमिंग और बहुआयामी किरदारों के कारण वह दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे। उन्होंने गंभीर, सामाजिक और हास्य प्रधान भूमिकाओं में समान दक्षता दिखाई और अपने अभिनय से हर वर्ग के दर्शकों को प्रभावित किया।

    फिल्मों में उनकी उपस्थिति जितनी प्रभावशाली रही, उतना ही बड़ा योगदान उन्होंने टेलीविजन जगत में भी दिया। कई लोकप्रिय धारावाहिकों और कॉमेडी कार्यक्रमों में निभाए गए उनके किरदार आज भी दर्शकों के बीच याद किए जाते हैं। विशेष रूप से पारिवारिक और हास्य आधारित कार्यक्रमों में उनकी भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।

    मनोरंजन उद्योग के अनेक कलाकारों का मानना है कि सतीश शाह उन चुनिंदा अभिनेताओं में शामिल थे जिन्होंने अभिनय को केवल पेशा नहीं बल्कि कला के रूप में जिया। उनके संवाद, अभिव्यक्ति और किरदारों की प्रस्तुति ने भारतीय दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। पद्मश्री सम्मान उनके इसी दीर्घकालिक योगदान और सांस्कृतिक प्रभाव की औपचारिक पहचान है।

    मरणोपरांत मिला यह सम्मान न केवल सतीश शाह के परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि उन लाखों दर्शकों के लिए भी विशेष महत्व रखता है जिन्होंने वर्षों तक उनके अभिनय का आनंद लिया। भारतीय मनोरंजन जगत में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा और उनका नाम देश के प्रतिष्ठित कलाकारों की सूची में सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा।