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  • पंच परिवर्तन से स्थापित होगा भारतीयता का गौरव : सुरेश सोनी

    पंच परिवर्तन से स्थापित होगा भारतीयता का गौरव : सुरेश सोनी


    जबलपुर। अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी ने कहा कि संघ की स्थापना एक निश्चित उद्देश्य के साथ हुई थी और शताब्दी मनाना उसका मूल लक्ष्य नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत का प्राचीन दर्शन और संस्कृति विश्व के लिए कल्याणकारी है, जिसे पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का कार्य तब तक चलता रहेगा, जब तक समाज और संघ में पूर्ण एकरूपता नहीं आ जाती।

    यह बातें सुरेश सोनी ने गत दिवस शनिवार को राष्‍ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जबलपुर महानगर के तत्वावधान में श्रीजानकीरमण महाविद्यालय में साहित्यकार एवं इतिहासकार श्रेणी की प्रमुख जन गोष्ठी तथा ‘संघिका’ पुस्तक के प्रथम भाग का लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में कही। कार्यक्रम में शरदचंद पालन मुख्य अतिथि एवं विभाग संघ चालक कैलाश गुप्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता की पूजा-अर्चना एवं ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन से हुआ। अतिथियों का परिचय डॉ. अभिजात कृष्ण त्रिपाठी ने दिया। इस अवसर पर डॉ. आनंद सिंह राणा द्वारा लिखित महाकौशल प्रांत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास पर आधारित पुस्तक ‘संघिका’ के प्रथम भाग का विमोचन किया गया। पुस्तक का परिचय एवं समीक्षा दीपक द्विवेदी ने प्रस्तुत की, जबकि कार्यक्रम की प्रस्तावना अल्केश चतुर्वेदी ने रखी।


    सुरेश सोनी ने बताया कि शताब्दी वर्ष के निमित्त देशभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया गया, जिसके तहत 10 करोड़ से अधिक परिवारों से संपर्क और संवाद स्थापित किया गया तथा 60 हजार से अधिक स्थानों पर हिंदू सम्मेलनों का आयोजन हुआ। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति निर्माण, समाज को एकसूत्र में बांधना और राष्ट्र के प्रति जागरूकता पैदा करना आवश्यक है। संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने इन विचारों को व्यवहारिक रूप दिया।

    उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन की विभिन्न धाराओं क्रांतिकारी, अहिंसक और सैन्य का उल्लेख करते हुए बताया कि संघ के संस्थापक ने इन सभी आयामों को समझकर समाज निर्माण का कार्य किया। सुरेश सोनी ने कहा कि वर्तमान समय में समाज का मूल दोष आत्मकेंद्रित होना है, जबकि भारतीय संस्कृति ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के सिद्धांत पर आधारित है। संघ का स्वयंसेवक भाषा, जाति और क्षेत्र से ऊपर उठकर राष्ट्र को सर्वोपरि मानता है और निस्वार्थ सेवा उसका आधार है।

    उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ को समाज परिवर्तन का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि इसमें कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्वदेशी जीवन शैली, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य बोध शामिल हैं। उन्होंने परिवार व्यवस्था को भारतीय समाज की मूल इकाई बताते हुए इसे सुदृढ़ करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व एक ऐसा विचार है जो वैश्विक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत कर सकता है। भारतीय परंपरा में समस्त सृष्टि को एक मानने की भावना निहित है, जो विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।

    मुख्य अतिथि शरदचंद पालन ने अपने संबोधन में शताब्दी वर्ष के संदर्भ में राष्ट्र निर्माण में साहित्यकारों और इतिहासकारों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। कार्यक्रम में नूपुर देशकर ने एकल गीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के अंत में जिज्ञासा-समाधान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सुरेश सोनी ने साहित्यकारों एवं इतिहासकारों के प्रश्नों के उत्तर दिए। इस गोष्ठी में लगभग 250 साहित्यकार एवं इतिहासकार शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आनंद सिंह राणा ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. अभिजात कृष्ण त्रिपाठी ने किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

  • भोपाल में हिट-एंड-रन हादसा: संघ प्रचारक विनय सिंह की दर्दनाक मौत, चालक फरार

    भोपाल में हिट-एंड-रन हादसा: संघ प्रचारक विनय सिंह की दर्दनाक मौत, चालक फरार



    भोपालभोपाल के ईंटखेड़ी इलाके में गुरुवार दोपहर एक तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के प्रचारक विनय सिंह और उनके साथी को टक्कर मार दी। हादसे में संघ प्रचारक विनय सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथी को गंभीर चोटें आई हैं। चार पहिया वाहन चालक हादसे के बाद मौके से फरार हो गया। पुलिस फिलहाल आरोपी की तलाश में जुटी हुई है और CCTV फुटेज और गवाहों के आधार पर उसे पकड़ने की कोशिश कर रही है।

    हादसे का विवरण
    विनय सिंह 55 वर्षीय थे और ग्राम मेघराकलां, बैरसिया के रहने वाले थे। वह खेती-किसानी के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सक्रिय प्रचारक का काम भी कर रहे थे। गुरुवार दोपहर वह अपने मित्र के साथ बाइक पर गोलखेड़ी से घर लौट रहे थे, तभी एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी।

    पुलिस कार्रवाई
    ईंटखेड़ी पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों और CCTV कैमरों के माध्यम से वाहन की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने बताया कि हिट-एंड-रन के मामलों में आरोपी को पकड़ने के लिए विशेष टीम बनाकर पूरे इलाके में सघन जांच की जा रही है।

    स्थानीय और संघ प्रतिक्रिया
    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थानीय पदाधिकारियों ने घटना पर शोक व्यक्त किया और परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि विनय सिंह समाज सेवा और प्रचार के कार्य में हमेशा सक्रिय रहे और उनका योगदान याद किया जाएगा।

    यह घटना राजधानी में सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों के बढ़ते खतरे पर चिंता बढ़ा रही है। पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि किसी ने आरोपी वाहन को देखा हो या उसकी जानकारी हो, तो तुरंत स्थानीय थाने को सूचना दें।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रो. राजेन्द्र सिंह 'रज्जू भैया' का किया पुण्य स्मरण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रो. राजेन्द्र सिंह 'रज्जू भैया' का किया पुण्य स्मरण


    भोपाल। गुरूवार, 29 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैया’ की जयंती पर उनका पुण्य स्मरण किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रो. रज्जू भैया का प्रखर व्यक्तित्व, उनके विचार और कृतित्व हमेशा राष्ट्रसेवकों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेंगे। उन्होंने विशेष रूप से रज्जू भैया की मां भारती और राष्ट्र की सेवा में समर्पित जीवन की सराहना की और कहा कि उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करेंगे।

    मुख्यमंत्री के इस स्मरण ने राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के क्षेत्र में रज्जू भैया की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया। उनकी जयंती पर देशभर में उनके योगदान और विचारों को याद किया जा रहा है।

  • तीन फीसदी भी स्वयंसेवक बनें तो समाज में आ सकता है सकारात्मक बदलाव सुनील आंबेकर

    तीन फीसदी भी स्वयंसेवक बनें तो समाज में आ सकता है सकारात्मक बदलाव सुनील आंबेकर


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने रविवार को ‘दिल्ली महोत्सव 2026’ में हिस्सा लिया और संघ के 100 साल की यात्रा पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि यदि समाज के महज तीन फीसदी लोग भी स्वयंसेवक बनेंतो इससे समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

    सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जीवन और कार्य राष्ट्रीयता से प्रेरित था। उनका मानना था कि स्वतंत्रता के बाद भी देश की स्वाधीनता कायम रहनी चाहिए और राष्ट्र को समृद्धि की दिशा में ले जाना चाहिए। हेडगेवार ने इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थीताकि हिंदू समाज को एकजुट किया जा सके और देश में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।

    संघ की शाखाओं का महत्व

    आंबेकर ने संघ की शाखाओं के बारे में विस्तार से बतायाजो जीवन के मूल्यों को सिखाने का एक मंच प्रदान करती हैं। एक घंटे की शाखाओं में स्थानीय लोग इकट्ठा होते हैंव्यायाम करते हैंचर्चाएं होती हैं और महापुरुषों के जीवन को याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि शाखाओं में अनुशासन का अभ्यास कराया जाता हैऔर भगवा ध्वज के सामने रोज संकल्प लिया जाता है कि मैं ऐसा व्यक्ति बनूं जैसा देश और समाज के लिए आवश्यक है। आंबेकर ने बताया कि देशभर में रोजाना 87,000 से अधिक शाखाएं लगती हैंजबकि 32,000 शाखाएं सप्ताह में एक बार होती हैं। इसके अलावासुबह और शाम के समय भी विभिन्न शाखाएं आयोजित होती हैं।

    संघ की विचारधारा और समाज में बदलाव

    सुनील आंबेकर ने संघ की विचारधारा और उसके कार्यों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि संघ के विचारों को कई लोग मानते हैंजबकि अन्य लोग उसके कार्यों में सहयोग करते हैं। डॉ. हेडगेवार ने कहा था कि यदि शहरों और गांवों में एक से तीन फीसदी लोग भी स्वयंसेवक बनते हैंतो समाज में वह सकारात्मक वातावरण उत्पन्न किया जा सकता हैजिसे संघ बनाना चाहता है।

    आंबेकर ने यह भी जोड़ा कि संघ का संगठन और शाखाएं देश के विभिन्न हिस्सों में अपने कार्यों को लेकर सक्रिय हैं और आने वाले समय में जब तक देश को इसकी आवश्यकता होगीसंघ का यह प्रयास जारी रहेगा।सुनील आंबेकर का यह बयान संघ के कार्यों और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के महत्व को उजागर करता है। उन्होंने स्वयंसेवकों की भूमिका पर जोर देते हुए यह संदेश दिया कि समाज को बेहतर बनाने के लिए हमें अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने की आवश्यकता है।