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  • 16 से 19 जुलाई के बीच कई शहरों में अलग-अलग दिनों पर बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले जरूर देखें अपने शहर की छुट्टियों की सूची

    16 से 19 जुलाई के बीच कई शहरों में अलग-अलग दिनों पर बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले जरूर देखें अपने शहर की छुट्टियों की सूची


    नई दिल्ली ।
    अगले सप्ताह बैंकिंग सेवाओं से जुड़ा कोई भी आवश्यक कार्य करने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए बैंक अवकाश की जानकारी पहले से जानना महत्वपूर्ण होगा। 16 जुलाई से 19 जुलाई के बीच देश के अलग-अलग शहरों में स्थानीय पर्वों, स्मृति दिवस और साप्ताहिक अवकाश के कारण बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। ऐसे में ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि बैंक पहुंचने से पहले अपने शहर में लागू अवकाश की स्थिति अवश्य जांच लें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    16 जुलाई को देश के कुछ चुनिंदा शहरों में बैंक बंद रहेंगे। इस दिन भुवनेश्वर, देहरादून और इंफाल में स्थानीय पर्वों और सांस्कृतिक आयोजनों के चलते बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। ओडिशा में रथ यात्रा तथा उत्तराखंड में हरेला पर्व के अवसर पर अवकाश रहेगा, जबकि संबंधित स्थानीय अवकाश के कारण इंफाल में भी बैंक सेवाएं प्रभावित रहेंगी। इन शहरों में ग्राहकों को अपने बैंकिंग कार्य निर्धारित तिथि से पहले या बाद में निपटाने की योजना बनानी चाहिए।

    17 जुलाई को बैंक अवकाश केवल मेघालय की राजधानी शिलांग में रहेगा। यहां तिरोत सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर सरकारी अवकाश घोषित होने के कारण बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। यह अवकाश केवल स्थानीय स्तर पर लागू होगा, इसलिए देश के अन्य हिस्सों में सामान्य बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी।

    18 जुलाई को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में द्रुकपा त्शे-जी पर्व के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे। यह पर्व स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, जिसके कारण इस दिन बैंक शाखाओं में नियमित कामकाज नहीं होगा। गंगटोक के अलावा देश के अधिकांश शहरों में बैंक सामान्य रूप से खुले रहेंगे।

    19 जुलाई को रविवार होने के कारण पूरे देश में सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक शाखा स्तर पर बंद रहेंगे। यह नियमित साप्ताहिक अवकाश है और देशभर में लागू होगा। जिन ग्राहकों को नकद जमा, चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट या अन्य शाखा आधारित सेवाओं की आवश्यकता है, उन्हें रविवार से पहले अपने कार्य पूरे करने चाहिए।

    हालांकि शाखाएं बंद रहने के बावजूद डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम, कार्ड भुगतान और अन्य ऑनलाइन सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगी। ग्राहक धन हस्तांतरण, बिल भुगतान, बैलेंस जांच और अन्य डिजिटल लेनदेन पहले की तरह कर सकेंगे।

    भारतीय रिजर्व बैंक प्रत्येक वर्ष और प्रत्येक महीने के लिए बैंक अवकाश की सूची जारी करता है, जिसमें राष्ट्रीय अवकाशों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों और शहरों के स्थानीय त्योहारों एवं विशेष अवसरों को भी शामिल किया जाता है। यही कारण है कि पूरे देश में सभी शहरों में एक ही दिन बैंक बंद नहीं रहते। ऐसे में किसी भी महत्वपूर्ण बैंकिंग कार्य के लिए शाखा जाने से पहले अपने शहर में लागू अवकाश की जानकारी की पुष्टि करना ग्राहकों के लिए सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। इससे समय की बचत होगी और बैंकिंग कार्य बिना किसी अनावश्यक परेशानी के पूरे किए जा सकेंगे।

  • तिरुपति बालाजी की तर्ज पर होगा महोत्सव, वेंकटेश मंदिर में सात दिन तक होंगे धार्मिक आयोजन

    तिरुपति बालाजी की तर्ज पर होगा महोत्सव, वेंकटेश मंदिर में सात दिन तक होंगे धार्मिक आयोजन


    इंदौर । इंदौर के छत्रीबाग स्थित श्रीलक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान में 10 से 16 जुलाई तक श्रीब्रह्मोत्सव एवं रथयात्रा महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। सात दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक महोत्सव में भगवान वेंकटेश के विशेष पूजन, महाभिषेक, उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। महोत्सव का मुख्य आकर्षण 16 जुलाई को निकलने वाली भगवान वेंकटेश की गौरवशाली रजत रथयात्रा रहेगी, जो नगर भ्रमण करते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन देगी।

    इस वर्ष महोत्सव का आयोजन तिरुपति बालाजी मंदिर की परंपरा और वैभव की तर्ज पर किया जा रहा है। मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा, जहां शंख, चक्र और तिलक की भव्य सजावट श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेगी। आयोजन की शुरुआत 9 जुलाई की शाम विश्वकसेन पूजन और सुंदरकांड पाठ से होगी। दोपहर में श्री वेंकटेश महिला मंडल की ओर से सुंदरकांड का आयोजन भी किया जाएगा।

    10 जुलाई को ध्वजारोहण के साथ श्रीब्रह्मोत्सव का विधिवत शुभारंभ होगा। यह अनुष्ठान अनंतश्रीविभूषित श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री नागोरिया पीठाधीश्वर स्वामी विष्णुप्रपन्नाचार्य महाराज के सान्निध्य में संपन्न होगा। इसके बाद प्रतिदिन अलग-अलग धार्मिक आयोजन किए जाएंगे।

    11 जुलाई को भगवती श्रीमहालक्ष्मी का महाभिषेक होगा और 500 दंपति सामूहिक कुमकुम अर्चना में भाग लेंगे। 12 जुलाई को भगवान श्री वेंकटेश का 108 रजत कलशों से महाभिषेक किया जाएगा तथा रात्रि में छत्रीबाग क्षेत्र में छोटी रथयात्रा निकाली जाएगी।

    13 जुलाई को वसंतोत्सव और तिरुपावड़ा उत्सव का आयोजन होगा। 14 जुलाई को भगवान वेंकटेश का कल्याण उत्सव और विवाहोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर बारात निकलेगी तथा विवाह की सभी पारंपरिक रस्में निभाई जाएंगी। रात्रि में परकाल स्वामी की लीला पर आधारित नाटिका का मंचन भी होगा।

    15 जुलाई को भगवान के पुष्प बंगला दर्शन होंगे। वृंदावन और इंदौर के कलाकार सुगंधित फूलों और विशेष सजावटी सामग्री से मनोहारी पुष्प बंगला तैयार करेंगे, जिसमें भगवान वेंकटेश के विशेष दर्शन श्रद्धालुओं को प्राप्त होंगे।

    महोत्सव का समापन 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा के साथ होगा। भगवान वेंकटेश वर्ष में एक बार निकलने वाले रजत रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। रथयात्रा में दक्षिण भारतीय संस्कृति की झलक, पारंपरिक वाद्य यंत्र, धार्मिक झांकियां और भक्ति संगीत श्रद्धालुओं को आकर्षित करेंगे।

    पूरे महोत्सव के दौरान भगवान का प्रतिदिन विशेष श्रृंगार किया जाएगा। भजन संध्या, धार्मिक प्रवचन और संतों का सान्निध्य भी श्रद्धालुओं को मिलेगा। आयोजन में स्वामी विष्णुप्रपन्नाचार्य महाराज, स्वामी विद्याभास्कर महाराज, स्वामी रंगनाथाचार्य महाराज, स्वामी अनंताचार्यजी महाराज, स्वामी वेंकटेशप्रपन्नाचार्य महाराज, स्वामी दामोदराचार्यजी महाराज, संत इन्द्रेश महाराज, युवराज स्वामी माधवप्रपन्नाचार्य महाराज, गोवत्स राधाकृष्ण महाराज और पुण्डरीकाक्षाचार्य महाराज सहित अनेक संत शामिल होंगे।

  • जुलाई 2026 का धार्मिक कैलेंडर जारी, देवशयनी एकादशी, रथयात्रा, गुरु पूर्णिमा समेत जानिए किस दिन कौन-सा व्रत और त्योहार

    जुलाई 2026 का धार्मिक कैलेंडर जारी, देवशयनी एकादशी, रथयात्रा, गुरु पूर्णिमा समेत जानिए किस दिन कौन-सा व्रत और त्योहार

    नई दिल्ली। जुलाई 2026 का महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस महीने आषाढ़ और श्रावण मास से जुड़े अनेक प्रमुख व्रत एवं त्योहार मनाए जाएंगे। भगवान विष्णु, भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और गुरु परंपरा से जुड़े कई पर्व पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाए जाएंगे। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान, दान-पुण्य और भजन-कीर्तन का आयोजन होगा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखकर धार्मिक परंपराओं का पालन करेंगे।

    महीने की शुरुआत 3 जुलाई को कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी से होगी। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक गणेश पूजा और व्रत करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं तथा सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इसके बाद 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। वैष्णव परंपरा के अनुसार 11 जुलाई को वैष्णव योगिनी एकादशी का पालन किया जाएगा।

    12 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत मनाया जाएगा, जो भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बाद 14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या और दर्श अमावस्या का पर्व आएगा। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, दान और पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु अपने पूर्वजों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ धार्मिक अनुष्ठान करेंगे।

    15 जुलाई से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ होगा। यह पर्व देवी साधना और शक्ति उपासना के लिए विशेष महत्व रखता है। इसी दिन चंद्र दर्शन का भी संयोग रहेगा। 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसे देशभर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसी दिन सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करने पर कर्क संक्रांति भी मनाई जाएगी, जिसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाता है।

    महीने के उत्तरार्ध में 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का पर्व आएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और चातुर्मास का शुभारंभ होता है। इसके अगले दिन 26 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत रहेगा, जिसमें भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। 27 जुलाई से जयापार्वती व्रत प्रारंभ होगा, जिसे विशेष रूप से वैवाहिक सुख और परिवार की मंगलकामना के लिए किया जाता है। 28 जुलाई को कोकिला व्रत मनाया जाएगा, जिसमें माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।

    29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा, व्यास पूजा और आषाढ़ पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाएगा। भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा को ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्मिक परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपने गुरुजनों का सम्मान करते हैं और महर्षि वेदव्यास को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि गुरु के प्रति श्रद्धा और सेवा से ज्ञान, सफलता और जीवन में सही मार्गदर्शन प्राप्त होता है।

    महीने का समापन 30 जुलाई को इष्टि अनुष्ठान के साथ होगा। पूरे जुलाई माह में विभिन्न धार्मिक पर्वों के कारण मंदिरों में विशेष आयोजन, पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों की रौनक देखने को मिलेगी। श्रद्धालु इस दौरान व्रत, दान, जप और पूजा के माध्यम से आध्यात्मिक साधना करते हुए सुख, समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करेंगे।