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  • सरकारी राशन दुकान से 70 क्विंटल चावल गायब, 3 साल बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई

    सरकारी राशन दुकान से 70 क्विंटल चावल गायब, 3 साल बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई


    कांकेर । कांकेर जिले के ग्राम मूंगवाल में स्थित सरकारी राशन दुकान से 70 क्विंटल चावल गायब हो गया है। यह चावल स्थानीय राशन कार्ड धारकों को वितरण के लिए निर्धारित किया गया था, लेकिन चावल के गायब होने की जानकारी के बावजूद अब तक किसी भी अधिकारी ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। मामले की जांच के आदेश तो दिए गए हैं, लेकिन तीन साल का समय गुजरने के बावजूद अब तक जांच में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

    सेल्समैन का बयान

    दुकान के सेल्समैन, परमेश्वर तेता, ने कहा कि वह पिछले तीन साल से दुकान का संचालन कर रहे हैं और जब उन्हें यह दुकान सौंपी गई थी, तब से ही स्टॉक में कमी थी। उनका कहना है कि उन्होंने अधिकारियों को पहले ही इसकी जानकारी दे दी थी, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला है। सेल्समैन का दावा है कि उन्होंने किसी भी तरह के घोटाले या अनियमितताओं में शामिल होने की बात से इनकार किया और कहा कि स्टॉक की कमी का कारण दुकान की शुरुआत में ही था।

    कलेक्टर का आश्वासन

    कलेक्टर निलेश महादेव क्षीरसागर ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें इस मामले में शिकायत मिली है और हम इसकी जांच कर रहे हैं। निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” कलेक्टर ने यह भी बताया कि वे इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं और जांच के परिणाम के आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों को दंडित किया जाएगा।

    सरपंच की शिकायत

    ग्राम पंचायत के सरपंच, जैसारो कोर्राम ने भी इस मामले में खाद्य विभाग से शिकायत की है। उनका कहना है कि यह मामला ग्रामवासियों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है और अगर अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे उच्च अधिकारियों से इस मुद्दे को उठाएंगे यह मामला सरकारी राशन वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर घोटाले की ओर इशारा कर रहा है, जहां राशन कार्ड धारकों को निर्धारित चावल वितरित नहीं किया जा सका। इस मामले की तीन साल बाद भी सही से जांच नहीं हो पाई है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या सरकारी सिस्टम में यह तरह की अनियमितताएं सामान्य हो गई हैं। अब तक जांच की प्रक्रिया लंबी खींची गई है, लेकिन कलेक्टर के द्वारा जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस मामले में कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।

  • 1 जनवरी से ब्लैक लिस्ट हो जाएंगे ये राशन कार्ड फ्री अनाज और 7 बड़ी योजनाओं का लाभ मिलेगा रुक

    1 जनवरी से ब्लैक लिस्ट हो जाएंगे ये राशन कार्ड फ्री अनाज और 7 बड़ी योजनाओं का लाभ मिलेगा रुक


    नई दिल्ली । राशन कार्ड धारकों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई हैजिससे हजारों लाभार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अगर आप राशन कार्ड का लाभ उठाते हैंतो 31 दिसंबर से पहले एक जरूरी काम पूरा करना होगा। इस समय सीमा के बाद अगर आप यह काम नहीं करतेतो 1 जनवरी से राशन मिलना बंद हो सकता है और सात प्रमुख सरकारी योजनाओं का लाभ भी रुक सकता है।

    ई-केवाईसी प्रक्रिया अनिवार्य

    दरअसलसरकार ने राशन कार्ड धारकों के लिए ई-केवाईसी इलेक्ट्रॉनिक-नो योर कस्टमरको अनिवार्य कर दिया है। इसका मतलब है कि सभी राशन कार्ड धारकों को अपनी पहचान और अन्य जानकारी ऑनलाइन अपडेट करनी होगी। यदि यह प्रक्रिया 31 दिसंबर तक पूरी नहीं होतीतो 1 जनवरी से आपके राशन कार्ड का लाभ रुक सकता हैऔर आप फ्री राशन और अन्य योजनाओं से वंचित हो सकते हैं।

    किसे-किसे पर पड़ेगा असर

    राशन कार्ड से जुड़ी यह प्रक्रिया हर परिवार के लिए लागू हैजिनके पास सरकारी राशन कार्ड है। इसका सीधा असर उन लाभार्थियों पर होगा जो अब तक अपनी ई-केवाईसी नहीं करवा पाए हैं। इन लाभार्थियों को 1 जनवरी से राशन मिलने में समस्या हो सकती है। इसके अलावासात बड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ भी इन कार्ड धारकों को नहीं मिल पाएगाजिनमें प्रमुख रूप से फ्री राशन योजनापेंशन योजनाएंबीमा योजनाएं अन्य सरकारी मदद शामिल हैं।

    ई-केवाईसी कैसे करें

    खुशखबरी यह है कि इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आपको किसी सरकारी दफ्तर या केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं है। ई-केवाईसी मोबाइल फोन से भी किया जा सकता है। इसके लिए आपको निम्नलिखित कदम उठाने होंगे

    स्मार्टफोन या कंप्यूटर का इस्तेमाल करें।

    राज्य सरकार के आधिकारिक राशन कार्ड पोर्टल या एप्लिकेशन पर जाएं। अपना राशन कार्ड नंबर और अन्य जरूरी जानकारी डालें। आधार कार्ड और फोटो अपलोड करें।
     एक बार जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाएतो आपको एक कन्फर्मेशन मैसेज मिलेगा। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद आपको कोई परेशानी नहीं होगी और आप बिना किसी रुकावट के सभी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते रहेंगे।

    क्यों जरूरी है ई-केवाईसी

    ई-केवाईसी से राशन कार्ड की जानकारी को सही तरीके से अपडेट किया जा सकेगा और यह सुनिश्चित होगा कि केवल असली और पात्र लाभार्थी ही सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। इस प्रक्रिया से राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी।

    समय रहते सुधार लें
    अगर आपने अभी तक अपनी ई-केवाईसी नहीं करवाई हैतो यह समय है कि आप इसे जल्दी से जल्दी पूरा कर लें। ऐसा करने से आप 1 जनवरी से होने वाली किसी भी परेशानी से बच सकते हैं और आपके राशन कार्ड से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के मिलता रहेगा।

  • यूपी के भोजपुर में ‘रोहिंग्या’ संदिग्धों को मिला सरकारी आवास और राशन जांच एजेंसियां सतर्क

    यूपी के भोजपुर में ‘रोहिंग्या’ संदिग्धों को मिला सरकारी आवास और राशन जांच एजेंसियां सतर्क


    मेरठ । भोजपुर उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के भोजपुर क्षेत्र के रानी नागल गांव में सरकारी योजनाओं का गड़बड़ तरीके से वितरण किए जाने का मामला सामने आया है। गांव में रह रहे घूमंतू परिवारों को बिना उचित प्रक्रिया के मुफ्त राशन प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ और वोटर बनाने की कोशिश की गई है। इन परिवारों में से कुछ को रोहिंग्या माना जा रहा है जिनके खिलाफ खुफिया विभाग और पुलिस की जांच अब तेज़ हो गई है।

    सरकारी योजनाओं का बंदरबांट

    रानी नागल में कुछ परिवारों को सरकारी योजनाओं का फायदा गलत तरीके से दिया गया है। यह परिवार मूलतः घूमंतू समुदाय से हैं और इनका नाम असल में रजिस्टर्ड वोटर सूची में नहीं था। शिकायतों के बाद यह सामने आया कि इन परिवारों को राशन कार्ड प्रधानमंत्री आवास योजना का घर और आधार कार्ड भी जारी कर दिया गया था। इसके अलावा वोटर लिस्ट में इनका नाम जोड़ने के लिए फर्जी तरीके से प्रक्रिया की जा रही थी जिसमें केवल महिलाओं ने ही अपनी गणना प्रपत्र भरे थे।

    गांव छोड़ने पर मजबूर हुए लोग

    गांव में हो रही इस गड़बड़ी के उजागर होते ही कई परिवारों ने गांव छोड़ दिया और भागने को मजबूर हो गए। इस संदिग्ध गतिविधि की जानकारी के बाद खुफिया विभाग की टीम गांव में पहुंची और मामले की गहन जांच शुरू की। रानी नागल के पूर्व प्रधान सईदुल ने डीएम अनुज सिंह और एसएसपी सतपाल अंतिल से इस मामले की शिकायत की थी। इसके बाद एसडीएम सदर डॉ. राम तोहन मीणा द्वारा की गई जांच में यह तथ्य सामने आया कि 2018 में कुल 92 घूमंतू लोग गांव में पहुंचे थे और इनकी फर्जी वोटर बनने की प्रक्रिया चल रही थी।

    किसी और के नाम पर आवास देना

    इन घूमंतू परिवारों में से दस परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घरों में रह रहे हैं। इस योजना के तहत ये आवास ग्राम समाज की भूमि पर बने थे लेकिन सवाल उठता है कि क्या इन आवासों का नाम इन परिवारों के नाम पर दर्ज किया गया या फिर किसी और के नाम पर इन्हें आवास दिया गया। यह मामला अब जांच का विषय बन चुका है। जांच में यह भी सामने आया कि इन परिवारों के पास राशन कार्ड भी हैं और उनके आधार कार्ड भी बनवाए गए हैं। इस संदिग्ध गतिविधि का पता चलते ही खुफिया विभाग ने तुरंत अपनी टीम भेजी और मामले की गहरी जांच शुरू कर दी।

    पुलिस और खुफिया विभाग की जांच

    भोजपुर पुलिस ने भी इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस गड़बड़ी में किसकी भूमिका है। एसएसपी सतपाल अंतिल ने बताया कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही इस पर कोई बयान दिया जा सकेगा। फिलहाल खुफिया विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारी पूरी स्थिति की जांच कर रहे हैं और मामले के सभी पहलुओं को उजागर करने का प्रयास कर रहे हैं।

    फर्जी वोटर बनाने की कोशिश

    गांव में फर्जी वोटर बनाने की प्रक्रिया का खुलासा होने के बाद जांच टीम ने यह पुष्टि की कि 92 लोगों में से केवल 10 परिवारों ने ही वोटर बनने के लिए अपना गणना प्रपत्र भरा था और इन सभी ने इसे केवल महिलाओं के नाम से भरा था। इस प्रक्रिया में भी कई असंगतियां पाई गईं और यही कारण है कि जांच की दिशा और तेज़ कर दी गई है। रानी नागल गांव में हो रही इस सरकारी योजनाओं की गड़बड़ी से सवाल उठ रहे हैं कि क्या अधिकारियों ने इन गतिविधियों पर सही समय पर नजर नहीं रखी। यह मामला न केवल भ्रष्टाचार और सरकारी प्रणाली की नाकामी को उजागर करता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि गलत तरीके से योजनाओं का लाभ उठाने की कोशिश की जा रही थी। खुफिया विभाग और पुलिस की जांच अब यह निर्धारित करेगी कि इन गतिविधियों में कितनी साजिश शामिल थी और इसके पीछे कौन लोग थे।