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  • शिवपुरी में तीन जगह होगा रावण दहन, 70 फीट के पुतले के साथ पहली बार जलेगा मेघनाद

    शिवपुरी में तीन जगह होगा रावण दहन, 70 फीट के पुतले के साथ पहली बार जलेगा मेघनाद


    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी शहर में मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व तीन प्रमुख स्थानों पर रावण दहन के साथ मनाया जाएगा। इस बार शहर में धार्मिक आयोजनों के साथ एक खास आकर्षण भी रहेगा। गांधी पार्क में 70 फीट ऊंचे रावण के पुतले के साथ पहली बार मेघनाद का पुतला भी जलाया जाएगा। वहीं, सिद्धेश्वर मंदिर मैदान में 73 साल पुरानी परंपरा के तहत रावण दहन होगा। झांसी रोड स्थित काली माता मंदिर परिसर में भी दशहरे के आयोजन की तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

    शहर के सिद्धेश्वर मंदिर मैदान, गांधी पार्क और काली माता मंदिर परिसर में अलग-अलग समय पर रावण दहन किया जाएगा। इन आयोजनों में राम-रावण युद्ध का मंचन, धार्मिक चल समारोह और शस्त्र पूजन जैसे कार्यक्रम भी शामिल हैं। आयोजक विजयादशमी के अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों में जुटे हैं।

    सिद्धेश्वर मंदिर मैदान में पंजाबी परिषद की ओर से शाम 7:30 बजे रावण दहन किया जाएगा। परिषद पिछले 73 वर्षों से इस आयोजन की परंपरा निभाती आ रही है। इस बार यहां 45 फीट ऊंचा रावण का पुतला बनाया गया है, जबकि पिछले वर्ष पुतले की ऊंचाई 51 फीट थी। पुतला तैयार करने की जिम्मेदारी इस बार भी आजाद खान ने संभाली है। रावण दहन से पहले मैदान में राम और रावण के बीच युद्ध का मंचन किया जाएगा। इसके बाद पुतले का दहन होगा।

    इस आयोजन से पहले आनंदपुर कुटिया जल मंदिर से भगवान राम की बारात और चल समारोह निकाला जाएगा। यह यात्रा हंस बिल्डिंग, ओरिएंटल बैंक, धर्मशाला रोड, मिर्ची बाजार और गोयल मेडिकल के सामने से होते हुए माधव चौक पहुंचेगी। इसके बाद चल समारोह सिद्धेश्वर मंदिर मैदान की ओर बढ़ेगा। धार्मिक उद्घोषों के बीच श्रद्धालु इस आयोजन में भाग लेंगे।

    गांधी पार्क में मानव वेलफेयर सोसायटी की ओर से रात 8 बजे रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यहां 70 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया है। इस बार आयोजन की विशेषता यह है कि रावण के साथ मेघनाद का पुतला भी जलाया जाएगा। शिवपुरी के इस आयोजन में पहली बार दोनों पुतलों का दहन होगा। कार्यक्रम में भगवान राम की भूमिका निभाने वाले कलाकार दोनों पुतलों का दहन करेंगे।

    इसी समय झांसी रोड स्थित काली माता मंदिर परिसर में नरसिंह मंदिर दशहरा समिति की ओर से रावण दहन किया जाएगा। समिति ने यहां 40 फीट ऊंचा पुतला तैयार कराया है। पिछले साल भी पुतले की ऊंचाई 40 फीट ही थी। इस परिसर में रावण दहन के साथ पथ संचलन और पुलिस शस्त्र पूजन का कार्यक्रम भी रखा गया है। समिति ने नागरिकों, समाजसेवियों और धर्मप्रेमियों से आयोजन में शामिल होने की अपील की है।

    शहर के इन तीन प्रमुख स्थानों के अलावा शिवपुरी जिले के अन्य कस्बों और क्षेत्रों में भी विजयादशमी मनाई जाएगी। विभिन्न स्थानों पर रावण दहन और धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाएगा। इस बार सिद्धेश्वर मैदान की पुरानी परंपरा और गांधी पार्क में पहली बार मेघनाद दहन शिवपुरी के दशहरा आयोजनों के प्रमुख आकर्षण रहेंगे।

  • दशहरा 2026 कब मनाया जाएगा, 20 या 21 अक्टूबर? जानें विजयादशमी की सही तारीख, दिल्ली में पूजा का शुभ मुहूर्त और रावण दहन का समय

    दशहरा 2026 कब मनाया जाएगा, 20 या 21 अक्टूबर? जानें विजयादशमी की सही तारीख, दिल्ली में पूजा का शुभ मुहूर्त और रावण दहन का समय


    नई दिल्ली ।
    दशहरा यानी विजयादशमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में दशहरे की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है। कुछ लोग 20 अक्टूबर को त्योहार मनाने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर 21 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। इसकी वजह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का दो दिनों तक रहना है। उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जबकि पश्चिम बंगाल में स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार 21 अक्टूबर को विजयादशमी का उत्सव होगा।

    हिंदू पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली में दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी और 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। इसी वजह से अलग-अलग क्षेत्रों में त्योहार मनाने की तारीख में अंतर देखने को मिल रहा है। दिल्ली और उत्तर भारत के कई हिस्सों में 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। वहीं, पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की परंपराओं के अनुसार 21 अक्टूबर को मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। इस अवसर पर सिंदूर खेला जैसी पारंपरिक रस्में भी निभाई जाती हैं।

    विजयादशमी 2026 का शुभ मुहूर्त
    दशहरे के दिन विजय मुहूर्त में पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दौरान लोग अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और शस्त्रों की पूजा करते हैं। नई दिल्ली में 20 अक्टूबर को विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में पूजा और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

    वहीं, अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1 बजकर 19 मिनट से 3 बजकर 37 मिनट तक बताया गया है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त और स्थानीय पंचांग के आधार पर मुहूर्त में अंतर हो सकता है। इसलिए पूजा करने से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

    दशहरे पर रावण दहन कब होगा?
    उत्तर भारत में दशहरे के अवसर पर 20 अक्टूबर की शाम को रामलीला के समापन के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा। इस परंपरा को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। आमतौर पर रावण दहन सूर्यास्त के बाद किया जाता है, लेकिन इसके लिए पूरे देश में एक समान समय निर्धारित नहीं है।

    अलग-अलग शहरों में रामलीला समितियां और स्थानीय आयोजक अपने कार्यक्रम के अनुसार रावण दहन का समय तय करते हैं। ऐसे में आयोजन में शामिल होने वाले लोगों को अपने शहर की रामलीला या संबंधित समिति से समय की जानकारी लेनी चाहिए।

    क्यों मनाया जाता है दशहरा?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था और माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। इसी विजय की स्मृति में दशहरे पर रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है। यह पर्व लोगों को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

    दशहरे का संबंध मां दुर्गा और महिषासुर के युद्ध से भी है। मान्यता है कि मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर उसके अत्याचारों से संसार को मुक्ति दिलाई थी। इसी कारण विजयादशमी को शक्ति, साहस और अन्याय पर विजय का प्रतीक भी माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को स्थानीय रीति-रिवाजों और धार्मिक परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है।

    शस्त्र पूजन और शमी पूजा का महत्व

    दशहरे पर शस्त्र पूजन और शमी वृक्ष की पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है। कई जगहों पर लोग अपने वाहनों, औजारों, मशीनों और कामकाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करते हैं। व्यापारी वर्ग इस दिन बही-खातों और कारोबार से जुड़ी वस्तुओं का पूजन करता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, विजयादशमी पर शुभ कार्यों की शुरुआत करना सफलता और समृद्धि की कामना से जुड़ा है। हालांकि, पूजा की विधि, मुहूर्त और त्योहार मनाने के तरीके अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित परंपराओं के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए दशहरे की तैयारी करते समय स्थानीय पंचांग और क्षेत्रीय रीति-रिवाजों का ध्यान रखना चाहिए।