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  • रामायण में रावण बने यश को पर्दे पर देख भावुक हुआ बेटा, जटायु की मौत पर छलके आंसू, साई पल्लवी ने बताया दिल छूने वाला किस्सा..

    रामायण में रावण बने यश को पर्दे पर देख भावुक हुआ बेटा, जटायु की मौत पर छलके आंसू, साई पल्लवी ने बताया दिल छूने वाला किस्सा..

    नई दिल्ली ।कन्नड़ सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता यश अब बड़े पर्दे पर रावण की भूमिका में नजर आने वाले हैं। निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म रामायण को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता बनी हुई है। फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर लॉस एंजेलिस में आयोजित किया गया, जहां यश अपने पूरे परिवार के साथ पहुंचे थे। इस खास मौके पर उनकी पत्नी राधिका पंडित और दोनों बच्चे यथर्व तथा आयरा भी मौजूद थे। इस दौरान उनके परिवार ने एक साथ फिल्म देखी। यश के लिए यह मौका इसलिए भी खास था, क्योंकि उनके बच्चों ने पहली बार कोई फिल्म बड़े पर्दे पर देखी थी।

    यश ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने हाल ही में अपने दोनों बच्चों को उनकी पहली फिल्म दिखाई। वर्ल्ड प्रीमियर के दौरान बच्चों ने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बैठकर रामायण देखी। अभिनेता के मुताबिक, फिल्म देखते समय बच्चों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके बच्चे अभी जीवन की शुरुआती अवस्था में हैं और धीरे-धीरे यह समझ रहे हैं कि सार्वजनिक जगहों पर किस तरह व्यवहार करना चाहिए और दूसरों के प्रति सम्मान कैसे व्यक्त करना चाहिए।

    हालांकि, फिल्म देखने के बाद उनके बेटे यथर्व की प्रतिक्रिया ने सभी का ध्यान खींचा। यश अपने बेटे के अनुभव के बारे में बता रहे थे, तभी फिल्म में सीता की भूमिका निभाने वाली साई पल्लवी ने उस भावुक पल से जुड़ा एक खास किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि जब सभी लोग फिल्म देखकर सिनेमाघर से बाहर निकल रहे थे, तब उन्होंने यश के बेटे को रोते हुए देखा। साई पल्लवी ने बच्चे के पास जाकर उससे पूछा कि आखिर वह क्यों रो रहा है।

    इस पर यथर्व ने बताया कि उसे फिल्म में पक्षी जटायु की मौत देखकर बहुत दुख हुआ। उसने कहा कि उसे जटायु का मरना अच्छा नहीं लगा। इतना ही नहीं, बच्चे ने अपने पिता यश से यह सवाल भी किया कि उन्होंने जटायु को क्यों मारा। दरअसल, फिल्म में यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं और जटायु की मृत्यु का प्रसंग कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पर्दे पर दिखाई गई इस घटना को देखकर यथर्व इतना भावुक हो गया कि उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे।

    साई पल्लवी ने इस प्रतिक्रिया को बेहद प्यारा और भावुक करने वाला अनुभव बताया। उनके अनुसार, यथर्व को संभवतः यह जानकारी है कि उनके पिता फिल्मों में अभिनय करते हैं और पर्दे पर दिखाई जाने वाली घटनाएं वास्तविक नहीं होतीं। इसके बावजूद जटायु की मौत का दृश्य उसे दुखी कर गया। बच्चे ने फिल्म के घटनाक्रम को एक वास्तविक घटना की तरह महसूस किया और अपने पिता से उसका कारण जानना चाहा। इस प्रतिक्रिया ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया।

    यश और राधिका पंडित के दो बच्चे हैं। उनके बेटे यथर्व का जन्म 30 अक्टूबर 2019 को हुआ था, जबकि बेटी आयरा का जन्म 2 दिसंबर 2018 को हुआ था। रामायण के वर्ल्ड प्रीमियर में दोनों बच्चों की मौजूदगी परिवार के लिए एक यादगार अनुभव बन गई।

    फिल्म रामायण में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि साई पल्लवी सीता के किरदार में नजर आएंगी। यश इसमें रावण की भूमिका निभाने के साथ फिल्म के सह-निर्माता भी हैं। इसके अलावा रवि दुबे और अरुण गोविल भी फिल्म का हिस्सा हैं। नमित मल्होत्रा ने फिल्म का निर्माण किया है और इसका निर्देशन नितेश तिवारी ने किया है। फिल्म 5 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

  • रावण को पूरी तरह बुरा नहीं मानतीं साई पल्लवी, रामायण पर बयान से सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस..

    रावण को पूरी तरह बुरा नहीं मानतीं साई पल्लवी, रामायण पर बयान से सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस..

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री साई पल्लवी का रावण के व्यक्तित्व को लेकर दिया गया बयान चर्चा का विषय बन गया है। फिल्म रामायण के वर्ल्ड प्रीमियर के दौरान उन्होंने कहा कि रावण पूरी तरह बुरा नहीं था। उनके इस कथन के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने उनके विचारों पर सवाल उठाए, जबकि कई लोगों ने बयान का समर्थन करते हुए रावण के व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं की ओर ध्यान दिलाया।

    27 अक्टूबर को लॉस एंजेलिस में आयोजित फिल्म के वर्ल्ड प्रीमियर के दौरान साई पल्लवी ने भारतीय संस्कृति और महाकाव्य रामायण के महत्व पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और महाकाव्यों को समझने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए यह फिल्म एक अच्छी शुरुआत साबित हो सकती है। उनके मुताबिक, रामायण को धर्मग्रंथ मानकर उस पर विश्वास करने वालों के लिए आत्मचिंतन करना भी जरूरी है।

    साई पल्लवी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद अच्छाइयों और बुराइयों को पहचानना चाहिए। समय के साथ अपनी कमियों को समझकर उनमें सुधार करने का प्रयास करना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने रावण का उल्लेख करते हुए कहा कि वह पूरी तरह बुरा नहीं था। अभिनेत्री ने अपने बयान के माध्यम से इस बात पर जोर दिया कि लोगों को अपने भीतर मौजूद बुराइयों को पहचानकर खुद को बेहतर बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

    हालांकि, रावण को लेकर उनकी यह टिप्पणी सामने आने के बाद कई लोगों ने नाराजगी जताई। कुछ यूजर्स का कहना था कि रावण के कृत्यों को देखते हुए उसके बारे में इस तरह की बात करना उचित नहीं है। एक यूजर ने सवाल उठाया कि किसी अपहरण करने वाले की तारीफ कैसे की जा सकती है। कुछ लोगों ने अभिनेत्री से अपने बयान को स्पष्ट करने की भी मांग की।

    दूसरी ओर, साई पल्लवी के समर्थन में भी कई प्रतिक्रियाएं सामने आईं। समर्थकों ने कहा कि रावण के व्यक्तित्व को केवल एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं है। कुछ लोगों ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि देश के कई हिस्सों में दशहरे पर रावण का दहन किया जाता है, जबकि कुछ स्थानों पर उसकी पूजा भी होती है। उनके अनुसार, यह अंतर रावण को लेकर प्रचलित विभिन्न मान्यताओं और विचारों को दर्शाता है।

    कुछ यूजर्स ने रावण के शिवभक्त और महान संगीतज्ञ होने का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके व्यक्तित्व में अच्छाइयां भी थीं। उनका मानना था कि साई पल्लवी की बात को संदर्भ से अलग करके विवाद का विषय बनाया जा रहा है। इस तरह अभिनेत्री के बयान पर आलोचना और समर्थन, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

    इस विवाद के बीच फिल्म रामायण भी चर्चा में बनी हुई है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी यह फिल्म दो भागों में रिलीज होने वाली है। फिल्म का पहला भाग 5 नवंबर को दिवाली के अवसर पर रिलीज होना निर्धारित है, जबकि दूसरा भाग दिवाली 2027 के आसपास आने की योजना है।

    फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका में दिखाई देंगे। वहीं, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म की कास्टिंग और अन्य पहलुओं के साथ अब साई पल्लवी का बयान भी चर्चा का हिस्सा बन गया है।

  • 2014 में ही एआर रहमान को मिला था रामायण से जुड़ने का संकेत, यश ने भी सुनाया संगीत से जुड़ा खास किस्सा

    2014 में ही एआर रहमान को मिला था रामायण से जुड़ने का संकेत, यश ने भी सुनाया संगीत से जुड़ा खास किस्सा

    नई दिल्ली । संगीतकार एआर रहमान ने फिल्म रामायण से अपने जुड़ाव की एक दिलचस्प कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि करीब एक दशक पहले, वर्ष 2014 में सतीश नाम के एक व्यक्ति ने उन्हें ईमेल भेजकर एक सपना बताया था। उस व्यक्ति का दावा था कि उसने सपने में रहमान को महाकाव्य रामायण के लिए संगीत तैयार करते हुए देखा है। अब रहमान इस महाकाव्य पर आधारित फिल्म के संगीत से जुड़े हैं। ऐसे में वर्षों पहले मिला वह संदेश एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।

    21 अक्टूबर को चेन्नई में आयोजित फिल्म के एल्बम लॉन्च कार्यक्रम के दौरान रहमान ने इस पुराने ईमेल का जिक्र किया। उन्होंने दर्शकों को बताया कि सतीश नाम के व्यक्ति ने उनसे संपर्क कर अपने सपने के बारे में लिखा था। रहमान ने उस संदेश को साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में उस व्यक्ति ने उनसे कहा था कि वह रामायण के लिए संगीत तैयार करेंगे।

    ईमेल में सतीश ने लिखा था कि रहमान उन्हें सुबह-सुबह सपने में दिखाई दिए थे। उन्हें विश्वास था कि उनका सपना सच होगा। संदेश में यह भी कहा गया था कि रहमान भारत और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संगीत कार्यक्रम कर रहे हैं, जिनमें महान महाकाव्य रामायण को प्रस्तुत किया जा रहा है। उस समय भेजे गए इस संदेश में व्यक्त की गई कल्पना अब फिल्म के साथ रहमान के जुड़ने के संदर्भ में खास लग रही है।

    रामायण पर आधारित यह फिल्म दो भागों में बनाई जा रही एक लाइव-एक्शन परियोजना है। इसका नाम रामायण: राइज ऑफ ए लीजेंड बताया गया है। फिल्म में एआर रहमान ऑस्कर विजेता संगीतकार हंस जिमर के साथ मिलकर संगीत तैयार कर रहे हैं। हंस जिमर हॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों के संगीत के लिए पहचाने जाते हैं। दोनों संगीतकारों के साथ आने से फिल्म के संगीत को लेकर भी दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

    कार्यक्रम में फिल्म में रावण की भूमिका निभा रहे अभिनेता यश भी मौजूद थे। उन्होंने एआर रहमान के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हुए बताया कि उनके संगीत ने तमिल भाषा सीखने में मदद की। यश ने कहा कि वह रहमान के बहुत बड़े प्रशंसक हैं और उनकी फिल्म जेंटलमैन के गानों पर नृत्य किया करते थे। उन्होंने तमिल फिल्म उद्योग में रहमान के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।

    यश ने कहा कि जब वह तमिल गानों को हिंदी में सुनते हैं, तो उन्हें लगता है कि उनमें कुछ कमी रह जाती है। उन्होंने खुशी जताई कि रहमान रामायण के लिए संगीत तैयार कर रहे हैं और उन्हें इस फिल्म में उनके संगीत पर अभिनय करने का अवसर मिला है।

    अभिनेता ने रावण का किरदार निभाने को लेकर भी अपनी बात रखी। उनके अनुसार, कई लोगों ने उनसे पूछा कि वह रावण की भूमिका क्यों निभाना चाहते हैं, जबकि इस पात्र को आमतौर पर नकारात्मक रूप में देखा जाता है। यश ने कहा कि कलाकार अलग-अलग किरदार निभाते हैं और हर किरदार में एक अलग तरह की ऊर्जा होती है। उन्होंने बताया कि रावण की भूमिका निभाते समय उन्होंने शिव जी का शिव तांडव गीत सुना, जिससे उन्हें ऊर्जा मिली। उन्होंने इस गीत के लिए रहमान का आभार भी जताया और कहा कि वह पहले भी शिव जी के कई गीत सुनते थे।

    फिल्म में भगवान राम की भूमिका रणबीर कपूर, सीता की भूमिका साई पल्लवी, रावण की भूमिका यश, हनुमान की भूमिका सनी देओल और लक्ष्मण की भूमिका रवि दुबे निभा रहे हैं। इनके अलावा अरुण गोविल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह, विवेक ओबेरॉय, कुणाल कपूर और काजल अग्रवाल भी फिल्म का हिस्सा हैं। फिल्म की निर्धारित रिलीज तारीख 5 नवंबर 2026 रखी गई है, जो दिवाली के अवसर पर पड़ती है।

  • दशहरा 2026 आज, विजयादशमी पर जानें पर्व का महत्व, शुभ मुहूर्त और अपनों को बधाई देने के खास संदेश

    दशहरा 2026 आज, विजयादशमी पर जानें पर्व का महत्व, शुभ मुहूर्त और अपनों को बधाई देने के खास संदेश

    नई दिल्ली । दशहरा और विजयादशमी का पर्व मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जा रहा है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर देशभर में लोग भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना करते हैं और रावण दहन के माध्यम से बुराइयों के अंत का संदेश देते हैं। दशहरा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि यह सत्य, साहस, सदाचार और सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है।

    विजयादशमी के अवसर पर परिवार, दोस्तों और प्रियजनों को शुभकामनाएं देने की परंपरा भी खास महत्व रखती है। लोग इस दिन संदेशों, प्रेरणादायक विचारों और सामाजिक माध्यमों पर साझा किए जाने वाले स्टेटस के जरिए एक-दूसरे को पर्व की बधाई देते हैं। शुभकामना संदेशों में सुख, शांति, समृद्धि, सफलता और खुशहाली की कामना प्रमुख रूप से शामिल रहती है।

    दशहरा हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध किया था। इस घटना को अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में याद किया जाता है। वहीं, कुछ परंपराओं में विजयादशमी को देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जोड़कर देखा जाता है। इस तरह यह पर्व अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं के माध्यम से शक्ति, धर्म और सत्य की स्थापना का संदेश देता है।

    दशहरे पर रावण दहन की परंपरा इस पर्व का प्रमुख आकर्षण है। रावण के दस सिरों को प्रतीकात्मक रूप से मनुष्य के भीतर मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियों से जोड़ा जाता है। इनमें अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, घृणा, भय और वासना जैसी बुराइयां शामिल हैं। रावण दहन के जरिए लोगों को यह संदेश दिया जाता है कि जीवन में केवल बाहरी बुराइयों का विरोध करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपनी गलत आदतों और नकारात्मक विचारों को दूर करने का प्रयास भी जरूरी है।

    20 अक्टूबर को दशहरा पूजा के लिए बताए गए प्रमुख शुभ समय में विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक निर्धारित बताया गया है। वहीं, प्रदोष काल शाम 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा। इसी समय को ध्यान में रखते हुए रावण दहन शाम 5 बजकर 47 मिनट के बाद करने का उल्लेख है। हालांकि, पूजा और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए स्थानीय पंचांग तथा क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित माना जाता है।

    दशहरे पर भेजे जाने वाले शुभकामना संदेशों में भगवान श्रीराम की कृपा, परिवार की खुशहाली और जीवन में सफलता की कामना की जाती है। लोग अपने प्रियजनों को संदेश भेजकर उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बने रहने की प्रार्थना करते हैं। कुछ संदेश जीवन की चुनौतियों का सामना करने, कठिन परिस्थितियों में साहस बनाए रखने और सत्य का साथ देने की प्रेरणा देते हैं।

    प्रेरणादायक विचारों में यह संदेश प्रमुख है कि बुराई चाहे कितनी भी प्रभावशाली क्यों न दिखाई दे, अंततः अच्छाई का महत्व बना रहता है। विजयादशमी लोगों को अपने व्यवहार में प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता अपनाने की सीख भी देती है। इस अवसर पर अहंकार और नफरत छोड़कर आपसी सम्मान तथा विश्वास को मजबूत करने का संकल्प लिया जा सकता है।

    WhatsApp स्टेटस के जरिए भी लोग दशहरा की शुभकामनाएं साझा करते हैं। जय श्रीराम, सत्य की जीत और असत्य के अंत जैसे संदेश इस अवसर पर विशेष रूप से प्रासंगिक रहते हैं। इन संदेशों का उद्देश्य पर्व की भावना को अपनों तक पहुंचाना और जीवन में अच्छे विचारों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

    दशहरा 2026 का पर्व धार्मिक आस्था के साथ आत्ममंथन का अवसर भी प्रदान करता है। भगवान श्रीराम की विजय और रावण दहन की परंपरा लोगों को याद दिलाती है कि सत्य, संयम और सदाचार का रास्ता जीवन में महत्वपूर्ण है। विजयादशमी पर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देने के साथ अपनी बुराइयों को दूर करने और सकारात्मक बदलाव की शुरुआत करने का संकल्प इस त्योहार के संदेश को सार्थक बना सकता है।

  • महाराष्ट्र के सांगोला गांव में दशहरे पर नहीं जलता रावण, 350 साल से ग्राम देवता मानकर होती है पूजा

    महाराष्ट्र के सांगोला गांव में दशहरे पर नहीं जलता रावण, 350 साल से ग्राम देवता मानकर होती है पूजा


    नई दिल्ली ।
    देशभर में दशहरे के अवसर पर रावण के पुतले का दहन करके बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र के अकोला जिले में स्थित सांगोला गांव की परंपरा इससे बिल्कुल अलग है। यहां विजयादशमी के दिन रावण का पुतला जलाने के बजाय दस सिरों वाले दशानन की पूजा की जाती है। पातुर तहसील के इस गांव में ग्रामीण रावण को अपना ग्राम देवता और रक्षक मानते हैं। उनकी मान्यता है कि रावण की आराधना से गांव में सुख-समृद्धि बनी रहती है। करीब 350 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में आज भी गांव के लोग उत्साह और श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं।

    सांगोला में दशहरे के दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान गांव के लोग एकत्र होकर अपनी पुरानी धार्मिक परंपरा निभाते हैं। यहां रावण की प्रतिमा की पूजा केवल दशहरे तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे साल नियमित रूप से उसकी आराधना की जाती है। महिलाएं भी इस परंपरा में श्रद्धापूर्वक भाग लेती हैं। देश के कई हिस्सों में जहां दशहरा रावण दहन के साथ मनाया जाता है, वहीं सांगोला में उसकी पूजा गांव की विशिष्ट पहचान बन चुकी है।

    स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, रावण की पूजा की शुरुआत लगभग 350 साल पहले हुई थी। बताया जाता है कि उस समय गांव में एक ऋषि महाराज रहते थे, जिन्हें ग्रामीण श्रद्धा की दृष्टि से देखते थे। मान्यता है कि अपने अंतिम समय में ऋषि महाराज ने ऐसी प्रतिमा स्थापित करने की इच्छा जताई थी, जिसमें दस बिंदु या चिह्न हों। हालांकि, प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकार ने दस मुखों वाली प्रतिमा तैयार कर दी। यह प्रतिमा रावण के स्वरूप जैसी दिखाई देती थी।

    ग्रामीणों के अनुसार, जब इस प्रतिमा को बैलगाड़ी से गांव लाया जा रहा था, तब बैलगाड़ी गांव की सीमा पार नहीं कर सकी। इस घटना को ग्रामीणों ने दैवी संकेत के रूप में देखा। इसके बाद प्रतिमा को उसी स्थान पर स्थापित कर दिया गया। इसी घटना को सांगोला में रावण को ग्राम देवता मानकर पूजा करने की परंपरा की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती यह लोकमान्यता आज भी गांव के धार्मिक जीवन का हिस्सा है।

    रावण के भक्त ज्ञानेश्वर महाराज धाकरे के अनुसार, गांव में दशानन की पूजा उसके चरित्र के प्रत्येक पहलू का समर्थन करने के उद्देश्य से नहीं की जाती। उनके मुताबिक, रावण की भगवान शिव के प्रति भक्ति, आराधना और साधना के सम्मान में उसकी पूजा होती है। उनका कहना है कि रावण सोने की लंका का राजा था और गांव के लोग उसकी आराधना करते हुए अपने गांव को भी सुखी तथा समृद्ध मानते हैं। ग्रामीण इस खुशहाली को रावण महाराज की कृपा से जोड़ते हैं।

    सांगोला के निवासियों का विश्वास है कि रावण महाराज की पूजा से गांव में सुख-समृद्धि बनी रहती है और संकटों से रक्षा होती है। इसी आस्था के कारण दशहरे पर होने वाला पूजन पूरे गांव के लिए विशेष महत्व रखता है। महिलाओं सहित ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी इस परंपरा को जीवंत बनाए हुए है। करीब साढ़े तीन सदियों से चली आ रही यह मान्यता दिखाती है कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में दशहरे से जुड़ी धार्मिक परंपराएं स्थानीय इतिहास, लोकविश्वास और समुदाय की आस्था के अनुसार अलग-अलग रूप लेती हैं।

  • देशभर में आज दशहरे की धूम…. शाम को जलेंगे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले

    देशभर में आज दशहरे की धूम…. शाम को जलेंगे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले


    नई दिल्ली।
    बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने वाला विजयादशमी (दशहरा) (Vijayadashami- Dussehra 2026) का पर्व इस साल आज यानी 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में दशहरे (Dussehra 2026) को धर्म की स्थापना, साहस और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण (Ravana) का अंत किया था। वहीं, देवी दुर्गा (Goddess Durga) ने महिषासुर का वध करके देवताओं और संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इन घटनाओं की स्मृति में दशहरा देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन भी किया जाता है।

    पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विजयादशमी पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करने और उपयोगी वस्तुएं दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिषीय परंपराओं में राशि के अनुसार दान करने का भी उल्लेख मिलता है। यदि आप दशहरे पर दान करने की योजना बना रहे हैं, तो अपनी राशि के मुताबिक इन वस्तुओं का चुनाव कर सकते हैं।


    राशि के अनुसार दशहरे पर क्या दान करें?

    – मेष राशि: मेष राशि के जातक विजयादशमी पर गेहूं और गुड़ का दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है।

    – वृषभ राशि: इस राशि के लोगों के लिए चावल और आटे का दान करना अच्छा माना जाता है। जरूरतमंद परिवारों को ये खाद्य सामग्री दी जा सकती है।

    – मिथुन राशि: मिथुन राशि वाले साबुत मूंग और हरी सब्जियों का दान कर सकते हैं। इससे जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    – कर्क राशि: कर्क राशि के जातक दूध और दही का दान कर सकते हैं। दान करते समय इनकी स्वच्छता और गुणवत्ता का ध्यान रखें।

    – सिंह राशि: सिंह राशि वालों के लिए गुड़, मूंगफली और सेब का दान करना शुभ माना जाता है।

    – कन्या राशि: कन्या राशि के जातक हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां दान कर सकते हैं। इन्हें जरूरतमंद महिलाओं को देना एक अच्छा विकल्प है।

    – तुला राशि: तुला राशि वाले सफेद वस्त्र और अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार धन का दान कर सकते हैं।

    – वृश्चिक राशि: इस राशि के लोगों के लिए सेब और कपड़ों का दान करना अच्छा माना जाता है।

    – धनु राशि: धनु राशि के जातक पीले रंग के वस्त्र और अनाज जरूरतमंदों को दान कर सकते हैं।

    – मकर राशि: मकर राशि वाले कपड़े, खाद्यान्न और धन का दान कर जरूरतमंदों की सहायता कर सकते हैं।

    – कुंभ राशि: कुंभ राशि के जातक नीले रंग के वस्त्र या जरूरतमंद लोगों को जूते-चप्पल दान कर सकते हैं।

    – मीन राशि: मीन राशि के लोग दशहरे पर खिचड़ी बनाकर जरूरतमंदों को भोजन करा सकते हैं।

    विजयादशमी पर दान करते समय अपनी आर्थिक स्थिति और सामने वाले व्यक्ति की जरूरत को प्राथमिकता दें। दान का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता करना भी होना चाहिए। भोजन, कपड़े, अनाज या दैनिक उपयोग की वस्तुएं अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान की जा सकती हैं। किसी भी तरह के दिखावे से बचें और सेवा भाव के साथ दान करें।

  • रामायण की नई झलक में सीता की तलवारबाजी, मिथिला में शस्त्र विद्या और रावण के शिव तांडव के अनदेखे दृश्य आए सामने

    रामायण की नई झलक में सीता की तलवारबाजी, मिथिला में शस्त्र विद्या और रावण के शिव तांडव के अनदेखे दृश्य आए सामने


    नई दिल्ली । फिल्म रामायण की नई झलक में इस बार माता सीता के ऐसे रूप को दिखाया गया है, जो पहले सामने आए दृश्यों से अलग है। नए वीडियो में सीता को युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते और मिथिला में छोटी बच्चियों को शस्त्र विद्या सिखाते हुए देखा जा सकता है। इसके साथ ही भगवान राम के युद्ध से जुड़े दृश्य, रावण का शिव तांडव और कुबेर की नगरी में उसके युद्ध की झलक भी दिखाई गई है। फिल्म से जुड़े इन नए दृश्यों ने इसकी कहानी, भव्यता और पात्रों के अलग-अलग रूपों को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।

    नई झलक में फिल्म के कुछ ऐसे दृश्य भी शामिल किए गए हैं, जो इससे पहले जारी किए गए ट्रेलर में देखने को नहीं मिले थे। इनमें माता सीता की युद्ध में भागीदारी का दृश्य खास है। कहानी के अनुसार, 14 हजार राक्षसों के साथ भगवान राम के युद्ध का उल्लेख मिलता है और नई झलक में सीता के भी इस संघर्ष से जुड़े होने की तस्वीर दिखाई गई है। इसके अलावा मिथिला में छोटी बच्चियों को शस्त्र विद्या सिखाती सीता का दृश्य उनके व्यक्तित्व के एक अलग पक्ष को सामने लाता है।

    वीडियो में भगवान राम से जुड़े कुछ नए दृश्य भी देखने को मिलते हैं। फिल्म के पहले टीजर में दिखाए गए एक राक्षस के रूप को लेकर दर्शकों की ओर से सवाल उठाए गए थे। नई झलक में उस दृश्य को बदले हुए रूप में पेश किया गया है। इसके साथ ही रावण के युद्ध और भगवान शिव के प्रति उसकी भक्ति को दर्शाने वाले शिव तांडव के दृश्य भी शामिल किए गए हैं। इन झलकियों में युद्ध, भक्ति और पौराणिक कथा से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को दिखाने की कोशिश की गई है।
    वीडियो में फिल्म के प्रमुख कलाकार रणबीर कपूर, निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी भी नजर आते हैं। तीनों फिल्म की कहानी, उसके वैश्विक स्तर और निर्माण से जुड़े अपने विचार साझा करते हैं। रणबीर कपूर का कहना है कि रामायण की कहानी को अधिक से अधिक सही और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। उनके मुताबिक, इस कथा को दर्शकों तक पहुंचाने में उसकी मूल भावना और प्रस्तुति की गुणवत्ता महत्वपूर्ण है।

    निर्माता नमित मल्होत्रा ने रामायण की कहानी को ऐसी कथा बताया, जिसमें इसे भव्य बनाने वाले कई तत्व मौजूद हैं और जो अलग-अलग तरह के दर्शकों से जुड़ सकती है। निर्देशक नितेश तिवारी भी इस विचार से सहमत दिखाई देते हैं। उनका मानना है कि रामायण की कहानी दुनिया के हर हिस्से के लोगों से जुड़ने की क्षमता रखती है। इसमें पिता और पुत्र के प्रेम, एक सुंदर प्रेम कहानी और विपरीत परिस्थितियों में आगे बढ़ने वाले पात्र की कथा जैसे पहलू शामिल हैं।

    इस परियोजना के निर्माण के बारे में बात करते हुए नमित मल्होत्रा ने बताया कि जब उन्हें रामायण बनाने का अवसर मिला, तो उन्हें लगा कि इस कहानी को बड़े स्तर पर पर्दे पर लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ फिल्में केवल योजना बनाकर नहीं बनाई जातीं, बल्कि परिस्थितियां उन्हें आकार देती हैं। रणबीर कपूर ने भी नमित के प्रयासों की सराहना की। उनके अनुसार, निर्माता ने भारतीय फिल्म उद्योग में बड़े स्तर की तकनीक, संसाधनों और प्रतिभाओं को साथ लाने का काम किया है।

    नमित मल्होत्रा के मुताबिक, फिल्म के निर्माण में दुनियाभर के करीब 10 हजार लोग काम कर रहे हैं। नितेश तिवारी ने बड़े स्तर पर फिल्म बनाने की क्षमता को लेकर नमित की कंपनी डीएनईजी पर भरोसा जताया। नमित ने यह भी बताया कि उन्होंने करीब 30 साल पहले अपनी कंपनी की शुरुआत एक गैरेज से की थी। आठ बार ऑस्कर जीतने के बाद वह रामायण जैसे बड़े प्रोजेक्ट पर काम करने के अवसर का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने फिल्म से जुड़े विभिन्न प्रतिभाशाली लोगों के योगदान का भी उल्लेख किया।

    फिल्म रामायण को दुनियाभर में 5 नवंबर को रिलीज करने की तैयारी है। नई झलक में सीता के युद्ध कौशल, राम के संघर्ष और रावण की भक्ति से जुड़े दृश्यों को शामिल करके कहानी के कई पहलुओं की झलक दिखाई गई है। अब दर्शकों की नजर फिल्म की रिलीज पर है, जहां इन पात्रों और घटनाओं को बड़े पर्दे पर विस्तार से देखने का अवसर मिलेगा।

  • समुद्र किनारे स्थित इस पौराणिक शिवधाम का रावण से क्या है गहरा संबंध, जानिए 123 फीट ऊंची प्रतिमा का रहस्य

    समुद्र किनारे स्थित इस पौराणिक शिवधाम का रावण से क्या है गहरा संबंध, जानिए 123 फीट ऊंची प्रतिमा का रहस्य

    नई दिल्ली ।कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के अंतर्गत आने वाले भटकल तालुका में स्थित मुरुदेश्वर मंदिर देश के सबसे प्रमुख और भव्य धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। अरब सागर के तट पर कंदुका पहाड़ी पर स्थित यह पावन धाम अपनी अटूट धार्मिक आस्था, अद्वितीय वास्तुकला और मनोरम प्राकृतिक सुंदरता के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है। तीन तरफ से नीले समुद्र से घिरे होने के कारण इस मंदिर परिसर की छटा अत्यंत आकर्षक और अद्भुत दिखाई देती है।

    मुरुदेश्वर मंदिर का पौराणिक इतिहास लंकापति रावण और भगवान शिव के परम पवित्र आत्मलिंग की कथा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंकाधिपति रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के उद्देश्य से अत्यंत कठोर तपस्या की थी। रावण की इस कठिन भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उसे अपना आत्मलिंग प्रदान किया था, लेकिन इसके साथ एक विशेष शर्त भी रखी गई थी कि इसे रास्ते में कहीं भी भूमि पर नहीं रखा जाना चाहिए।

    पौराणिक प्रसंगों के मुताबिक, जब रावण उस दिव्य आत्मलिंग को लेकर अपनी राजधानी लंका की ओर बढ़ रहा था, तब देवताओं ने विशेष परिस्थितियां निर्मित कर दीं। इन्हीं परिस्थितियों के प्रभाव में आकर रावण ने अनजाने में आत्मलिंग को एक स्थान पर जमीन पर रख दिया। इसके बाद लाख कोशिशों के बावजूद वह उस शिवलिंग को दोबारा भूमि से नहीं उठा सका। माना जाता है कि इसी प्रक्रिया में आत्मलिंग के कुछ अंश जिन-जिन पवित्र स्थानों पर गिरे, उनमें मुरुदेश्वर की भूमि भी शामिल थी।

    इस ऐतिहासिक और धार्मिक परिसर की सबसे बड़ी और मुख्य विशेषता यहां स्थापित भगवान शिव की अत्यंत विशाल प्रतिमा है। खुले आकाश के नीचे निर्मित यह प्रतिमा ध्यान मुद्रा में बैठी हुई अवस्था में स्थापित की गई है, जिसकी कुल ऊंचाई 123 फीट बताई जाती है। अरब सागर के किनारे स्थित होने के कारण यह भव्य प्रतिमा काफी दूर से ही श्रद्धालुओं को स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगती है। सूर्य की किरणों के बीच समुद्र की उठती लहरों के साथ इस प्रतिमा का दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

    धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह मंदिर अपनी स्थापत्य कला और वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। मंदिर परिसर में बना विशाल एवं बहुमंजिला गोपुरम, जिसे ‘राजा गोपुरा’ कहा जाता है, यहां की प्रमुख संरचनात्मक पहचान है। श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए इस विशाल गोपुरम की ऊपरी मंजिलों तक जाने की व्यवस्था की गई है, जहां से पूरे मंदिर परिसर, विशाल शिव प्रतिमा और दूर तक फैले अरब सागर का विहंगम दृश्य साफ देखा जा सकता है।

    मंदिर की पारंपरिक नक्काशी और भव्य बनावट में दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला की गहरी छाप नजर आती है। समुद्र, पहाड़ी और मंदिर का यह विहंगम संयोजन यहां आने वाले हर व्यक्ति को एक नया और आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले तीर्थयात्री भी इस पवित्र स्थल के दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं।

    आज के समय में मुरुदेश्वर एक बहुत बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। साल भर यहां देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने आते हैं। महाशिवरात्रि जैसे पावन और बड़े धार्मिक पर्वों पर तो यहां श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ता है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यहां का शांत समुद्री तट और प्राकृतिक नजारे भी पर्यटकों को निरंतर अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

    संक्षेप में कहा जाए तो मुरुदेश्वर धाम पौराणिक कथाओं, प्राचीन मान्यताओं, दक्षिण भारतीय वास्तुकला और समुद्री सौंदर्य का एक दुर्लभ एवं अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। 123 फीट ऊंची विशालकाय शिव प्रतिमा इस पावन स्थल को एक विशिष्ट पहचान देती है, वहीं रावण और आत्मलिंग से जुड़ी पौराणिक गाथा इसके धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को और अधिक मजबूत बनाती है।

  • उद्धव ठाकरे का BJP पर तंज: ‘इतनी बेशर्म कि रावण को भी अपने पार्टी में शामिल कर सकती है’

    उद्धव ठाकरे का BJP पर तंज: ‘इतनी बेशर्म कि रावण को भी अपने पार्टी में शामिल कर सकती है’

    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे और भाजपा के बीच जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। नासिक में अपनी चचेरे भाई और मनसे प्रमुख राज ठाकरे के साथ आयोजित संयुक्त चुनावी रैली में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह पार्टी इतनी बेशर्म हो गई है कि वह असुर सम्राट रावण को भी अपने खेमे में शामिल कर सकती है।

    चुनावी हिंदुत्व पर आरोप

    उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी का हिंदुत्व केवल चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने नासिक महानगरपालिका की उस योजना पर भी सवाल उठाया, जिसमें अगले साल के कुंभ मेले के लिए ‘साधुग्राम’ बनाने के लिए पेड़ों को काटने का प्रस्ताव है। उद्धव ने पूछा कि भाजपा का हिंदुत्व वास्तविक है या सिर्फ राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

    दागी नेताओं को प्राथमिकता देने का आरोप

    शिवसेना प्रमुख ने भाजपा के “दागी” नेताओं को पार्टी में प्राथमिकता देने का आरोप भी लगाया। उद्धव ने कहा कि कई वफादार नेताओं को नजरअंदाज किया गया है, जबकि पार्टी उन्हें सही अवसर नहीं दे रही। उन्होंने इस रवैये को दुखद बताया और भाजपा के आचरण पर सवाल उठाए।

    प्रधानमंत्री पर भी टिप्पणी

    यह पहली बार नहीं है जब उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर सीधे निशाना साधा हो। कुछ दिन पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने कहा कि पीएम पहले चुनाव में प्रचार कर रहे थे, लेकिन अब उनकी पार्टी को कमजोर करने में लगी हुई है।

    महाराष्ट्र में चुनावी हालात

    महाराष्ट्र में राजनीतिक परिस्थितियां इस समय उलझी हुई हैं। 15 जनवरी को राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव होने हैं और मतगणना 16 जनवरी को होगी। इस बार शिवसेना को तोड़कर अलग पार्टी बनाने वाले एकनाथ शिंदे भी भाजपा के साथ चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में उद्धव ठाकरे ने भाजपा और शिंदे दोनों पर निशाना साधा है और जनता के बीच अपनी पार्टी के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की।

    उद्धव ठाकरे की नासिक रैली में भाजपा पर तंज और हिंदुत्व को लेकर सवाल, साथ ही शिंदे के सहयोग पर निशाना, महाराष्ट्र की चुनावी राजनीति में नई हलचल पैदा कर रही है। चुनावों से पहले दोनों राजनीतिक धड़ों के बीच जुबानी जंग और आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।