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  • समुद्र किनारे स्थित इस पौराणिक शिवधाम का रावण से क्या है गहरा संबंध, जानिए 123 फीट ऊंची प्रतिमा का रहस्य

    समुद्र किनारे स्थित इस पौराणिक शिवधाम का रावण से क्या है गहरा संबंध, जानिए 123 फीट ऊंची प्रतिमा का रहस्य

    नई दिल्ली ।कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के अंतर्गत आने वाले भटकल तालुका में स्थित मुरुदेश्वर मंदिर देश के सबसे प्रमुख और भव्य धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। अरब सागर के तट पर कंदुका पहाड़ी पर स्थित यह पावन धाम अपनी अटूट धार्मिक आस्था, अद्वितीय वास्तुकला और मनोरम प्राकृतिक सुंदरता के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है। तीन तरफ से नीले समुद्र से घिरे होने के कारण इस मंदिर परिसर की छटा अत्यंत आकर्षक और अद्भुत दिखाई देती है।

    मुरुदेश्वर मंदिर का पौराणिक इतिहास लंकापति रावण और भगवान शिव के परम पवित्र आत्मलिंग की कथा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंकाधिपति रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के उद्देश्य से अत्यंत कठोर तपस्या की थी। रावण की इस कठिन भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उसे अपना आत्मलिंग प्रदान किया था, लेकिन इसके साथ एक विशेष शर्त भी रखी गई थी कि इसे रास्ते में कहीं भी भूमि पर नहीं रखा जाना चाहिए।

    पौराणिक प्रसंगों के मुताबिक, जब रावण उस दिव्य आत्मलिंग को लेकर अपनी राजधानी लंका की ओर बढ़ रहा था, तब देवताओं ने विशेष परिस्थितियां निर्मित कर दीं। इन्हीं परिस्थितियों के प्रभाव में आकर रावण ने अनजाने में आत्मलिंग को एक स्थान पर जमीन पर रख दिया। इसके बाद लाख कोशिशों के बावजूद वह उस शिवलिंग को दोबारा भूमि से नहीं उठा सका। माना जाता है कि इसी प्रक्रिया में आत्मलिंग के कुछ अंश जिन-जिन पवित्र स्थानों पर गिरे, उनमें मुरुदेश्वर की भूमि भी शामिल थी।

    इस ऐतिहासिक और धार्मिक परिसर की सबसे बड़ी और मुख्य विशेषता यहां स्थापित भगवान शिव की अत्यंत विशाल प्रतिमा है। खुले आकाश के नीचे निर्मित यह प्रतिमा ध्यान मुद्रा में बैठी हुई अवस्था में स्थापित की गई है, जिसकी कुल ऊंचाई 123 फीट बताई जाती है। अरब सागर के किनारे स्थित होने के कारण यह भव्य प्रतिमा काफी दूर से ही श्रद्धालुओं को स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगती है। सूर्य की किरणों के बीच समुद्र की उठती लहरों के साथ इस प्रतिमा का दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

    धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह मंदिर अपनी स्थापत्य कला और वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। मंदिर परिसर में बना विशाल एवं बहुमंजिला गोपुरम, जिसे ‘राजा गोपुरा’ कहा जाता है, यहां की प्रमुख संरचनात्मक पहचान है। श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए इस विशाल गोपुरम की ऊपरी मंजिलों तक जाने की व्यवस्था की गई है, जहां से पूरे मंदिर परिसर, विशाल शिव प्रतिमा और दूर तक फैले अरब सागर का विहंगम दृश्य साफ देखा जा सकता है।

    मंदिर की पारंपरिक नक्काशी और भव्य बनावट में दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला की गहरी छाप नजर आती है। समुद्र, पहाड़ी और मंदिर का यह विहंगम संयोजन यहां आने वाले हर व्यक्ति को एक नया और आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले तीर्थयात्री भी इस पवित्र स्थल के दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं।

    आज के समय में मुरुदेश्वर एक बहुत बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। साल भर यहां देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने आते हैं। महाशिवरात्रि जैसे पावन और बड़े धार्मिक पर्वों पर तो यहां श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ता है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यहां का शांत समुद्री तट और प्राकृतिक नजारे भी पर्यटकों को निरंतर अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

    संक्षेप में कहा जाए तो मुरुदेश्वर धाम पौराणिक कथाओं, प्राचीन मान्यताओं, दक्षिण भारतीय वास्तुकला और समुद्री सौंदर्य का एक दुर्लभ एवं अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। 123 फीट ऊंची विशालकाय शिव प्रतिमा इस पावन स्थल को एक विशिष्ट पहचान देती है, वहीं रावण और आत्मलिंग से जुड़ी पौराणिक गाथा इसके धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को और अधिक मजबूत बनाती है।

  • उद्धव ठाकरे का BJP पर तंज: ‘इतनी बेशर्म कि रावण को भी अपने पार्टी में शामिल कर सकती है’

    उद्धव ठाकरे का BJP पर तंज: ‘इतनी बेशर्म कि रावण को भी अपने पार्टी में शामिल कर सकती है’

    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे और भाजपा के बीच जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। नासिक में अपनी चचेरे भाई और मनसे प्रमुख राज ठाकरे के साथ आयोजित संयुक्त चुनावी रैली में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह पार्टी इतनी बेशर्म हो गई है कि वह असुर सम्राट रावण को भी अपने खेमे में शामिल कर सकती है।

    चुनावी हिंदुत्व पर आरोप

    उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी का हिंदुत्व केवल चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने नासिक महानगरपालिका की उस योजना पर भी सवाल उठाया, जिसमें अगले साल के कुंभ मेले के लिए ‘साधुग्राम’ बनाने के लिए पेड़ों को काटने का प्रस्ताव है। उद्धव ने पूछा कि भाजपा का हिंदुत्व वास्तविक है या सिर्फ राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

    दागी नेताओं को प्राथमिकता देने का आरोप

    शिवसेना प्रमुख ने भाजपा के “दागी” नेताओं को पार्टी में प्राथमिकता देने का आरोप भी लगाया। उद्धव ने कहा कि कई वफादार नेताओं को नजरअंदाज किया गया है, जबकि पार्टी उन्हें सही अवसर नहीं दे रही। उन्होंने इस रवैये को दुखद बताया और भाजपा के आचरण पर सवाल उठाए।

    प्रधानमंत्री पर भी टिप्पणी

    यह पहली बार नहीं है जब उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर सीधे निशाना साधा हो। कुछ दिन पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने कहा कि पीएम पहले चुनाव में प्रचार कर रहे थे, लेकिन अब उनकी पार्टी को कमजोर करने में लगी हुई है।

    महाराष्ट्र में चुनावी हालात

    महाराष्ट्र में राजनीतिक परिस्थितियां इस समय उलझी हुई हैं। 15 जनवरी को राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव होने हैं और मतगणना 16 जनवरी को होगी। इस बार शिवसेना को तोड़कर अलग पार्टी बनाने वाले एकनाथ शिंदे भी भाजपा के साथ चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में उद्धव ठाकरे ने भाजपा और शिंदे दोनों पर निशाना साधा है और जनता के बीच अपनी पार्टी के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की।

    उद्धव ठाकरे की नासिक रैली में भाजपा पर तंज और हिंदुत्व को लेकर सवाल, साथ ही शिंदे के सहयोग पर निशाना, महाराष्ट्र की चुनावी राजनीति में नई हलचल पैदा कर रही है। चुनावों से पहले दोनों राजनीतिक धड़ों के बीच जुबानी जंग और आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।