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  • दिलजीत की फिल्म विवाद के बीच रवि किशन का बयान इतिहास और समाज के प्रति जिम्मेदार रहें फिल्म निर्माता

    दिलजीत की फिल्म विवाद के बीच रवि किशन का बयान इतिहास और समाज के प्रति जिम्मेदार रहें फिल्म निर्माता


    नई दिल्ली। भोजपुरी और हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता तथा सांसद रवि किशन ने फिल्मों में सेंसरशिप को लेकर चल रही बहस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि फिल्मों पर सेंसर बोर्ड की आपत्तियां या बदलाव की मांग कोई नई बात नहीं है बल्कि यह प्रक्रिया वर्षों से चली आ रही है। रवि किशन का कहना है कि किसी भी फिल्म निर्माता और कलाकार की जिम्मेदारी केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होती बल्कि समाज और इतिहास के प्रति भी उसकी जवाबदेही होती है।

    हाल ही में एक बातचीत के दौरान रवि किशन से अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म को लेकर उठे विवाद और सेंसरशिप पर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने साफ कहा कि उन्हें उस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्हें सिर्फ इतना पता है कि एक फिल्म रिलीज हुई और बाद में उसे हटाया गया लेकिन बिना पूरी जानकारी के किसी विवाद पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

    हालांकि सेंसरशिप के मुद्दे पर उन्होंने खुलकर अपनी राय रखी। रवि किशन ने कहा कि जब भी कोई फिल्म बनाई जाती है तब उसके निर्माता निर्देशक और कलाकारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनकी प्रस्तुति से किसी समुदाय की भावनाएं आहत न हों और किसी ऐतिहासिक घटना को गलत तरीके से प्रस्तुत न किया जाए। उनके अनुसार फिल्मों का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है और युवा पीढ़ी भी उनसे काफी प्रभावित होती है इसलिए जिम्मेदारी के साथ कंटेंट तैयार करना बेहद जरूरी है।

    उन्होंने कहा कि कलाकारों का काम केवल मनोरंजन करना नहीं बल्कि समाज के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाना भी है। यदि किसी फिल्म या कहानी में तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश किया जाता है या झूठी जानकारी दिखाई जाती है तो उसका असर लंबे समय तक लोगों की सोच पर पड़ सकता है। इसलिए लेखन से लेकर निर्माण तक हर स्तर पर सावधानी बरतनी चाहिए।

    रवि किशन ने यह भी कहा कि अगर कभी उनकी किसी फिल्म पर सेंसर बोर्ड की ओर से आपत्ति जताई जाती है तो वह सबसे पहले यह जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर समस्या क्या है। यदि किसी दृश्य या संवाद से किसी वर्ग की भावनाएं आहत होती हैं या इतिहास को गलत तरीके से दिखाया गया है तो उसमें सुधार करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। उनका कहना था कि फिल्मों के निर्माण में काफी समय मेहनत और धन लगता है इसलिए विवाद की जगह समाधान तलाशना बेहतर होता है।

    सेंसरशिप को लेकर उन्होंने इतिहास का भी जिक्र किया। रवि किशन ने कहा कि फिल्मों पर कट्स लगना या रचनात्मक अभिव्यक्ति पर सवाल उठना पहले भी होता रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई चर्चित फिल्मों को भी सेंसर बोर्ड की आपत्तियों का सामना करना पड़ा था। उनके अनुसार यह केवल आज की स्थिति नहीं है बल्कि पहले की सरकारों के समय भी ऐसी घटनाएं होती रही हैं।

    रवि किशन का मानना है कि रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग को ऐसे विषयों पर काम करते समय संवेदनशीलता और तथ्यों की सटीकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि मनोरंजन के साथ समाज में सकारात्मक संदेश भी पहुंचे।

  • गोरखपुर में सीएम योगी की रवि किशन पर हल्की चुटकी, अतिक्रमण हटाने की सलाह के साथ विकास कार्यों पर दिया जोर

    गोरखपुर में सीएम योगी की रवि किशन पर हल्की चुटकी, अतिक्रमण हटाने की सलाह के साथ विकास कार्यों पर दिया जोर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गोरखपुर दौरे के दौरान 429 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित शहर के पहले सिक्सलेन फ्लाईओवर का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने लगभग 995 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने फ्लाईओवर का निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने विकास कार्यों के साथ स्वच्छता, अतिक्रमण हटाने और जनभागीदारी पर विशेष जोर दिया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के सांसद रवि किशन का उल्लेख करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हाल ही में बारिश के दौरान रवि किशन को पानी में उतरकर नाली साफ करते देखा गया था। इस पर मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा कि नाली साफ करने से बेहतर है कि नालों पर हुए अतिक्रमण को हटाया जाए, क्योंकि इससे पानी का निकास स्वतः बेहतर हो जाएगा। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने भी मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी।

    मुख्यमंत्री ने इसी दौरान सांसद रवि किशन की ओर से आयोजित भोज का भी जिक्र किया। उन्होंने उपस्थित लोगों से पूछा कि भोजन कार्यक्रम में कितने लोग शामिल हुए थे। जब सीमित संख्या में लोगों ने हाथ उठाया तो मुख्यमंत्री ने मजाकिया लहजे में कहा कि लगता है केवल चार-पांच लोगों को ही भोजन मिला। इस पर रवि किशन ने जवाब देते हुए कहा कि पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी। दोनों नेताओं के बीच हुई इस सहज बातचीत ने कार्यक्रम का माहौल हल्का बना दिया।

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार की विकास योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगातार सड़क, पुल, फ्लाईओवर और अन्य आधारभूत ढांचे का विस्तार किया जा रहा है ताकि लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उनका कहना था कि मजबूत बुनियादी ढांचा किसी भी क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है और सरकार इसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण थी, जबकि अब राज्य में अपराध और अराजकता पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने बीते वर्षों में युवाओं के लिए रोजगार और नौकरी के अनेक अवसर उपलब्ध कराए हैं तथा विकास को बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ाया जा रहा है।

    योगी आदित्यनाथ ने लोगों से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की। उन्होंने कहा कि नालों और जल निकासी मार्गों पर अतिक्रमण नहीं होना चाहिए तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग से बचना आवश्यक है। उन्होंने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि विकास कार्य तभी लंबे समय तक प्रभावी रहेंगे जब जनता भी उनकी देखभाल और संरक्षण में अपनी जिम्मेदारी निभाएगी।

    गोरखपुर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री का संबोधन विकास परियोजनाओं, आधारभूत संरचना, स्वच्छता अभियान और जनभागीदारी जैसे विषयों पर केंद्रित रहा। वहीं सांसद रवि किशन के साथ उनका हल्का-फुल्का संवाद भी कार्यक्रम की प्रमुख चर्चा बना रहा, जिसे उपस्थित लोगों ने सहज और सकारात्मक माहौल का हिस्सा माना।