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  • AI से आसान होगा बैंकिंग का काम, बिना क्रेडिट हिस्ट्री वालों को भी मिलेगा कर्ज; RBI गवर्नर ने बताया नया प्लेबुक

    AI से आसान होगा बैंकिंग का काम, बिना क्रेडिट हिस्ट्री वालों को भी मिलेगा कर्ज; RBI गवर्नर ने बताया नया प्लेबुक


    नई दिल्ली। भारतीय बैंकिंग सेक्टर आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की वजह से बड़े बदलाव के दौर से गुजर सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मंगलवार को कहा कि AI क्रेडिट डिलीवरी को बदलने ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने और वित्तीय समावेशन को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बैंकों से इस तकनीक को जिम्मेदारी और सोच समझकर अपनाने की अपील की। RBI गवर्नर के मुताबिक बैंकों को AI को केवल एक नई तकनीक या सीमित अवधि वाले प्रोजेक्ट के रूप में नहीं देखना चाहिए बल्कि इसे बैंकिंग के कामकाज और निर्णय लेने के नए तरीके के तौर पर अपनाना चाहिए।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित FIBAC 2026 कॉन्फ्रेंस में उद्घाटन भाषण देते हुए मल्होत्रा ने AI को भारतीय बैंकिंग के लिए निर्णायक ताकत बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण ने भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग व्यवस्था की दिशा बदली थी और 2010 के दशक में डिजिटलाइजेशन ने वित्तीय सेवाओं का चेहरा बदल दिया था उसी तरह AI मौजूदा दशक में भारतीय बैंकिंग को नई दिशा दे सकता है। उनके मुताबिक AI का प्रभाव बैंकिंग के लगभग हर महत्वपूर्ण हिस्से पर पड़ने वाला है।

    RBI गवर्नर ने कहा कि AI को ऐसी तकनीक नहीं माना जाना चाहिए जिसे खरीदकर किसी एक परियोजना की तरह लागू कर दिया जाए और फिर काम खत्म समझ लिया जाए। इसके बजाय बैंकों को AI के इस्तेमाल की स्पष्ट रणनीति तैयार करनी होगी। जोखिम का आकलन करने से लेकर ग्राहकों को सेवाएं देने तक पूंजी की कीमत तय करने से लेकर संस्थानों के संचालन तक AI बैंकिंग के पारंपरिक तरीकों में बदलाव ला सकता है। यही वजह है कि बैंकों को इस तकनीक को अपनाने से पहले उसकी क्षमता और जोखिम दोनों को समझना होगा।

    AI का सबसे बड़ा असर क्रेडिट डिलीवरी के क्षेत्र में देखने को मिल सकता है। मौजूदा व्यवस्था में जिन ग्राहकों की औपचारिक क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती उनके लिए बैंक से कर्ज हासिल करना कई बार मुश्किल हो जाता है। AI विभिन्न प्रकार के उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करके ऐसे संभावित उधारकर्ताओं की वित्तीय स्थिति और कर्ज चुकाने की क्षमता का बेहतर आकलन करने में बैंकों की मदद कर सकता है। इससे उन लोगों तक भी औपचारिक बैंकिंग और ऋण सुविधाएं पहुंचाने में मदद मिल सकती है जो अब तक वित्तीय व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं।

    ग्राहक अनुभव के स्तर पर भी AI बैंकिंग सेवाओं को तेज और अधिक व्यक्तिगत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ग्राहकों की जरूरतों को समझकर सेवाओं को बेहतर ढंग से तैयार करने और बैंकिंग प्रक्रियाओं को आसान बनाने में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। इससे बैंकिंग संस्थानों के लिए कामकाज की दक्षता बढ़ाने और ग्राहकों को बेहतर सेवा उपलब्ध कराने के नए रास्ते खुलेंगे।

    हालांकि RBI गवर्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि AI को अपनाने की प्रक्रिया जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ानी होगी। बैंकों को यह तय करना होगा कि वे AI की दिशा खुद तय करते हैं या तकनीक को अपने हिसाब से बैंकिंग व्यवस्था को बदलने देते हैं। उन्होंने कहा कि कई बैंक पहले से AI का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि अन्य संस्थान इसकी संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में AI को लेकर बैंकिंग सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

    कुल मिलाकर RBI की ओर से दिया गया संदेश साफ है कि AI भारतीय बैंकिंग के भविष्य का अहम हिस्सा बनने जा रहा है। यदि इसे पारदर्शिता सुरक्षा और जिम्मेदारी के साथ लागू किया जाता है तो यह कर्ज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने ग्राहक सेवाओं को बेहतर करने और देश में वित्तीय समावेशन को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • वित्तीय साक्षरता शिविर में पहुंचकर आरबीआई गवर्नर ने दिया आर्थिक सशक्तिकरण का संदेश

    वित्तीय साक्षरता शिविर में पहुंचकर आरबीआई गवर्नर ने दिया आर्थिक सशक्तिकरण का संदेश

    नई दिल्ली। देहरादून जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम के दौरान आर्थिक जागरूकता और वित्तीय सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण और स्वयं सहायता समूहों से जुड़े लोगों को वित्तीय प्रणाली की बुनियादी समझ देना और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना था।

    कार्यक्रम के दौरान यह बात विशेष रूप से सामने रखी गई कि आज के समय में आर्थिक स्थिरता केवल बचत पर निर्भर नहीं है, बल्कि सही जानकारी और योजनाओं के उपयोग पर भी आधारित है। लोगों को बताया गया कि पेंशन और बीमा जैसी योजनाएं भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और हर नागरिक को इनके बारे में जागरूक होना चाहिए।

    इस अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। यह भी कहा गया कि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक बैंकिंग और वित्तीय सुविधाएं सरल तरीके से पहुंचनी चाहिए, ताकि वे मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जुड़ सकें।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने अपने स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन भी किया। उनके प्रयासों की सराहना करते हुए यह संदेश दिया गया कि ऐसे समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और इन्हें और अधिक प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है।

    लोगों को यह भी समझाया गया कि वित्तीय जानकारी को केवल व्यक्तिगत उपयोग तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों के साथ भी साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें।

    इस दौरान बैंकिंग सेवाओं को आसान बनाने के लिए मौके पर ही कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे लोगों को सीधे लाभ मिला। छोटे स्तर पर नकद और सिक्कों के आदान-प्रदान जैसी सेवाओं ने भी ग्रामीण लोगों के लिए सुविधा का काम किया।

    इसके अलावा, वित्तीय सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए मोबाइल बैंकिंग जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया गया, जिससे लोगों को अपने क्षेत्र में ही बैंकिंग सेवाएं प्राप्त हो सकें।

    कार्यक्रम में विभिन्न वित्तीय संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और वित्तीय समावेशन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि वित्तीय शिक्षा ही एक मजबूत और आत्मनिर्भर समाज की नींव है।