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  • RDVV जबलपुर में कुलसचिव की कुर्सी पर नहीं टिक रहा कोई, 33 महीने में 6 बदलाव, अब डीके बग्गा की होगी एंट्री

    RDVV जबलपुर में कुलसचिव की कुर्सी पर नहीं टिक रहा कोई, 33 महीने में 6 बदलाव, अब डीके बग्गा की होगी एंट्री


    जबलपुर । जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में प्रशासनिक नेतृत्व को लेकर लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पिछले पौने तीन साल के दौरान विश्वविद्यालय में छह कुलसचिव बदल चुके हैं। किसी अधिकारी ने करीब छह महीने तक जिम्मेदारी संभाली तो किसी का कार्यकाल आठ महीने के आसपास रहा। सोमवार को डॉ. रविशंकर सोनवाल के कार्यमुक्त होने के बाद कुछ समय के लिए बायो साइंस विभाग के प्रोफेसर एसएस संधू को प्रभारी कुलसचिव बनाया गया था लेकिन कुछ ही घंटों बाद उच्च शिक्षा विभाग की ओर से डीके बग्गा को नया कुलसचिव बनाए जाने का आदेश जारी हो गया। अब प्रोफेसर संधू नए कुलसचिव के ज्वाइन करने तक ही यह जिम्मेदारी संभालेंगे।

    रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से पांच जिलों के करीब 163 कॉलेज जुड़े हुए हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में कुलसचिव का पद महत्वपूर्ण माना जाता है। लगातार बदलाव के कारण प्रशासनिक कामकाज में स्थायित्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सोमवार को डॉ. रविशंकर सोनवाल के कार्यमुक्त होने के बाद कुलगुरु के आदेश पर प्रोफेसर एसएस संधू को प्रभारी कुलसचिव बनाया गया था। हालांकि देर रात भोपाल से उच्च शिक्षा विभाग का आदेश आने के बाद यह व्यवस्था भी अस्थायी साबित हुई और डीके बग्गा को नया कुलसचिव नियुक्त कर दिया गया।

    पिछले करीब पौने तीन साल में प्रोफेसर रश्मि टंडन डॉ. संतोष जाटव डॉ. रत्नेश कुरलिया आरएस बघेल प्रोफेसर सुरेंद्र सिंह और डॉ. रविशंकर सोनवाल कुलसचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इनमें आरएस बघेल की नियुक्ति शासन स्तर पर कुलसचिव के तौर पर हुई थी। उन्होंने करीब 11 महीने तक पद संभाला और इसके बाद सेवानिवृत्त हो गए। वहीं डॉ. रत्नेश कुरलिया को शासन की ओर से अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। अब नए कुलसचिव के रूप में डीके बग्गा की नियुक्ति हुई है।

    विश्वविद्यालय की स्थिति को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। यहां करीब छह हजार सीटें हैं और 29 से ज्यादा विभाग संचालित हो रहे हैं लेकिन नियमित प्राध्यापकों की संख्या महज 16 बताई जा रही है। विश्वविद्यालय में प्राध्यापकों के 156 पद स्वीकृत हैं। कई विभागों में नियमित शिक्षक नहीं होने के बावजूद शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। ऐसे में नियमित शिक्षकों को प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपे जाने से अकादमिक और शोध कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

    विश्वविद्यालय में उपकुलसचिव के अलावा तीन असिस्टेंट रजिस्ट्रार फाइनेंस कंट्रोलर और परीक्षा नियंत्रक जैसे पद भी मौजूद हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए शिक्षकों की सेवाएं लेने का मामला सामने आया है। छात्रों का कहना है कि कुलसचिव की जिम्मेदारी बार बार बदलने से विश्वविद्यालय के कामकाज पर असर पड़ रहा है। परीक्षा और परिणामों को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। ऐसे में प्रशासनिक नेतृत्व में स्थायित्व को लेकर चिंता बढ़ रही है।

    इस बीच पूर्व कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल का चार दिन पहले गुना तबादला किया गया है। इससे पहले उन्होंने कुलगुरु और राज्यपाल को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय में काम करने के माहौल को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने खुद और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर आशंका जताते हुए सुरक्षा की मांग की थी। उनका कहना था कि एक कर्मचारी को निलंबित करने के बाद उनके खिलाफ षड्यंत्र रचे जाने की आशंका है।

    अब विश्वविद्यालय में नए कुलसचिव डीके बग्गा के कार्यभार संभालने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था किस तरह आगे बढ़ती है इस पर नजर रहेगी। साथ ही शिक्षकों के रिक्त पद भरने की प्रक्रिया और परीक्षा परिणाम से जुड़े मामलों में सुधार को लेकर भी विश्वविद्यालय के अगले कदम महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

  • RDVV के कुलसचिव को निलंबित चौकीदार से खौफ, कुलगुरु को दो बार लिखा पत्र बोले कुछ भी हो सकता है मेरे साथ

    RDVV के कुलसचिव को निलंबित चौकीदार से खौफ, कुलगुरु को दो बार लिखा पत्र बोले कुछ भी हो सकता है मेरे साथ


    जबलपुर । जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय यानी आरडीवीवी में कुलसचिव की सुरक्षा को लेकर मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल ने निलंबित चौकीदार रविंद्र तिवारी से खुद को खतरा बताते हुए कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा को दो पत्र लिखे हैं। कुलसचिव ने 21 सितंबर और फिर 24 सितंबर को सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। दोनों पत्रों की प्रतियां सिविल लाइन थाना प्रभारी अपर सचिव उच्च शिक्षा विभाग और कुलगुरु के निज सचिव को भी भेजी गई हैं।

    कुलसचिव ने अपने पत्र में बताया कि रविंद्र तिवारी को कार्य में कथित कदाचरण के मामले में उनके स्तर से निलंबित किया गया है। पत्र के अनुसार कुलसचिव को आशंका है कि निलंबन के बाद उनके खिलाफ किसी तरह का षड्यंत्र रचा जा सकता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि उनके खिलाफ झूठी शिकायत की जा सकती है या उन्हें किसी तरह नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

    कुलसचिव ने अपने पत्र में चौकीदार के व्यवहार को लेकर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रविंद्र तिवारी स्वभाव से उग्र है और कई बार नशे की हालत में रहता है। पत्र के मुताबिक वह पहले भी कुलसचिव कार्यालय में नशे की हालत में आया था। उस समय कर्मचारियों ने उसे समझाइश देकर वापस भेज दिया था।

    21 सितंबर को लिखे पत्र में कुलसचिव ने विश्वविद्यालय के पूर्व सहायक कुलसचिव पवन साहू के साथ हुए कथित विवाद का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार रविंद्र तिवारी का पवन साहू के साथ झूमाझटकी गाली गलौज और अभद्र व्यवहार का विवाद हुआ था। पत्र में यह भी आरोप है कि पवन साहू के घर जाकर गाली गलौज करने और दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया गया था।

    कुलसचिव के पत्र के मुताबिक रविंद्र तिवारी ने पवन साहू पर महिला उत्पीड़न से जुड़े आरोप भी लगाए थे। कुलसचिव ने कहा कि इस मामले की जांच चल रही है और पवन साहू ने विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ सिविल लाइन थाना पुलिस को भी आवेदन दिया था। इन घटनाओं का हवाला देते हुए कुलसचिव ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है।

    कुलसचिव ने यह भी बताया कि वह वर्तमान में जबलपुर में अकेले रह रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में वह भयग्रस्त हैं और इस वजह से कार्यालयीन कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कुलगुरु से कार्यालय और निवास दोनों जगह सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

    24 सितंबर को लिखे दूसरे पत्र में कुलसचिव ने कहा कि 21 सितंबर को दिए गए आवेदन पर अब तक कोई कार्रवाई या आदेश नहीं हुआ है। इसके बाद उन्होंने दोबारा अपनी सुरक्षा की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि वह लगातार डर और तनाव की स्थिति में हैं।

    इसी बीच कुलसचिव ने कर्मचारी नेता और पूर्व महासचिव राजेंद्र शुक्ला को भी 25 सितंबर को नोटिस जारी किया है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने समाचारों की कटिंग एक वॉट्सऐप ग्रुप में पोस्ट की जिससे कुलसचिव की छवि प्रभावित हुई। नोटिस में उनसे इस संबंध में दो दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है।

    मामले में कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। फिलहाल कुलसचिव की ओर से सुरक्षा की मांग किए जाने के बाद विश्वविद्यालय का यह मामला चर्चा में है।

  • RDVV के छात्रों का परीक्षा से बहिष्कार चार घंटे तक कुलगुरु निवास पर प्रदर्शन प्रशासन ने कहा जांच जारी

    RDVV के छात्रों का परीक्षा से बहिष्कार चार घंटे तक कुलगुरु निवास पर प्रदर्शन प्रशासन ने कहा जांच जारी


    जबलपुर । जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में गुरुवार को बीए एलएलबी चतुर्थ सेमेस्टर की हिंदी लैंग्वेज परीक्षा को लेकर विवाद खड़ा हो गया। छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा में सिलेबस से बाहर के सवाल पूछे गए हैं। प्रश्नपत्र हाथ में आने के बाद कई विद्यार्थी असमंजस में पड़ गए। छात्रों का कहना था कि उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित पाठ्यक्रम के आधार पर परीक्षा की तैयारी की थी लेकिन प्रश्नपत्र में ऐसी विषयवस्तु से सवाल पूछे गए जो उनके सिलेबस का हिस्सा नहीं थी।

    परीक्षा के दौरान छात्रों ने इस संबंध में पर्यवेक्षकों से जानकारी लेने की कोशिश की। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें इस मामले में संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद कई छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार कर दिया। परीक्षा केंद्र पर स्थिति बिगड़ने के बाद छात्र एकजुट होकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

    मामला यहीं नहीं रुका। नाराज छात्र एनएसयूआई के समर्थन के साथ कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा के निवास पर पहुंच गए। वहां छात्रों ने धरना शुरू कर दिया और प्रश्नपत्र को लेकर जांच कराने की मांग रखी। छात्रों का कहना था कि परीक्षा में अगर निर्धारित पाठ्यक्रम से अलग सवाल पूछे गए हैं तो इससे विद्यार्थियों के प्रदर्शन और परीक्षा परिणाम पर असर पड़ सकता है। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले में जल्द निर्णय लेना चाहिए।

    प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। विद्यार्थियों का आरोप था कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय पाठ्यक्रम का उचित तरीके से मिलान नहीं किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और विद्यार्थियों के हित में उचित कदम उठाने की मांग की।

    एनएसयूआई आरडीवीवी प्रभारी अंचलनाथ ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि विद्यार्थी लंबे समय तक मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में अगर परीक्षा में सिलेबस से बाहर के सवाल आ जाएं तो छात्रों के सामने परेशानी खड़ी हो जाती है। उन्होंने कहा कि छात्र कई घंटे से कुलगुरु निवास के बाहर बैठे हैं और अपनी समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं।

    छात्रों के प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव और सिविल लाइन थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने छात्रों की शिकायत को सुना और मामले की जानकारी ली। इस दौरान छात्रों की ओर से प्रश्नपत्र की जांच कराने और परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों के हित में फैसला लेने की मांग दोहराई गई।

    मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी अपना पक्ष रखा है। परीक्षा नियंत्रक प्रो. सुनील दुबे ने बताया कि छात्रों की ओर से प्रश्नपत्र में सिलेबस से बाहर के सवाल पूछे जाने की जानकारी दी गई है। विश्वविद्यालय स्तर पर इस मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और इसके आधार पर नियमानुसार आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।

    फिलहाल छात्रों की शिकायत पर विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच जारी है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रश्नपत्र में वास्तव में निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर के सवाल शामिल थे या नहीं। इसके बाद परीक्षा को लेकर आगे की प्रक्रिया और छात्रों की मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फैसला लिया जाएगा।