Tag: reacts

  • ‘ब्रालेट तो छोटी-सी बात थी…’ कृति सेनन के राखी विज्ञापन पर बोलीं कंगना, राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

    ‘ब्रालेट तो छोटी-सी बात थी…’ कृति सेनन के राखी विज्ञापन पर बोलीं कंगना, राहुल गांधी पर भी साधा निशाना


    नई दिल्ली। भाजपा सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने रक्षाबंधन को लेकर कृति सेनन के विवादित ज्वैलरी विज्ञापन पर एक बार फिर प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने कहा कि उनकी आपत्ति केवल कृति के कपड़ों को लेकर नहीं थी, बल्कि विज्ञापन में रक्षाबंधन जैसे त्योहार को जिस तरह पेश किया गया, उससे थी। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित ज्वैलरी ब्रांड ने विज्ञापन वापस ले लिया था।

    ‘किसने रोका है कुछ भी पहनने से?’
    कृति सेनन के आउटफिट पर सवाल उठाए जाने को लेकर कंगना ने कहा कि किसी को भी अपनी पसंद के कपड़े पहनने से रोकने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि कृति ने क्या पहना था, बल्कि यह है कि रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार को विज्ञापन में किस रूप में दिखाया गया।

    कंगना से जब पूछा गया कि क्या कृति ईद के मौके पर भी इसी तरह के कपड़ों में पोस्ट कर सकती हैं, तो उन्होंने इस पर भी टिप्पणी की और हिंदू पारिवारिक रिश्तों में मर्यादा और सीमाओं का जिक्र किया।

    राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
    ‘डिकोड’ को दिए इंटरव्यू में कंगना ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा कृति सेनन के समर्थन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की पोस्ट में रक्षाबंधन का जिक्र नहीं था।

    कंगना ने कहा कि एक महिला रक्षाबंधन पर अपनी पसंद के कपड़े पहन सकती है, लेकिन रक्षाबंधन केवल कपड़ों या फैशन का मामला नहीं, बल्कि एक सभ्यता और धार्मिक परंपरा की अभिव्यक्ति है।

    उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह अपने नजरिए को लेकर भ्रमित हैं। कंगना ने सनातन धर्म को लेकर राहुल गांधी की सोच पर भी सवाल उठाए और कहा कि उनका नजरिया सनातन धर्म के प्रति अलग तरह का है।

    ‘ब्रालेट तो छोटी-सी चीज थी’
    कंगना ने साफ किया कि उनके मुताबिक विज्ञापन में ब्रालेट सबसे बड़ा मुद्दा नहीं था। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह था कि विज्ञापन में रक्षाबंधन से जुड़े पारंपरिक तत्व लगभग नजर नहीं आए।

    उन्होंने माता-पिता, घर, हलवा-पूरी, भगवान, टीका, अक्षत, धूप और दीप जैसे पारंपरिक प्रतीकों का जिक्र करते हुए कहा कि रक्षाबंधन को केवल आधुनिक एस्थेटिक्स के जरिए पेश नहीं किया जा सकता।

    कंगना के मुताबिक, “एक त्योहार किसी संस्कृति और सभ्यता का एस्थेटिक एक्सप्रेशन होता है।” उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन में टीका और राखी जैसे पारंपरिक प्रतीकों का अपना महत्व है। अब कंगना की इन टिप्पणियों पर कृति सेनन और राहुल गांधी की ओर से किसी प्रतिक्रिया का इंतजार है।

  • Gen-Z के मुद्दे पर थरूर का BJP पर हमला, बोले- सत्ताधारी पार्टी को लगा बड़ा झटका

    Gen-Z के मुद्दे पर थरूर का BJP पर हमला, बोले- सत्ताधारी पार्टी को लगा बड़ा झटका


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मुंबई में जेन-जी और जेन-अल्फा के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के संवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि हाल के घटनाक्रमों से सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।

    थरूर ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए ‘कॉकरोच पार्टी’ के प्रदर्शन, एक मंत्री के इस्तीफे और उसके बाद जल्दबाजी में पारित किए गए बिल के अलावा हालिया दो उपचुनावों के नतीजे भी सत्तारूढ़ दल के लिए चिंता का विषय हैं।

    BJP की गढ़ मानी जाने वाली सीट हारने का किया जिक्र
    शशि थरूर ने प्रशांत किशोर की जीत का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने BJP की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली सीट पर जीत दर्ज की है। उनके मुताबिक, इस सीट पर BJP तीन दशक से ज्यादा समय से जीतती आ रही थी और पार्टी ने यहां नौ बार जीत हासिल की थी, लेकिन अब उसे हार का सामना करना पड़ा।

    उन्होंने मध्य प्रदेश की दतिया सीट का भी उल्लेख किया और कहा कि कांग्रेस इस सीट को बरकरार रखने में सफल रही है। थरूर ने कहा कि दोनों ही सीटें हिंदी भाषी राज्यों में आती हैं और इन नतीजों से आगे के चुनावों को लेकर उम्मीद नजर आती है।

    उन्होंने कहा कि अलग-अलग समय पर होने वाले चुनाव राजनीतिक दलों को अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका देते हैं। थरूर के मुताबिक, अगले मार्च में कुछ राज्यों में चुनाव होने हैं और कांग्रेस उन राज्यों में जीत हासिल करने की स्थिति में है।

    मोहन भागवत ने Gen-Z को लेकर क्या कहा था?
    मुंबई में Gen-Z और Gen-Alpha के साथ संवाद के दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नई पीढ़ी को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि Gen-Z और Gen-Alpha पुरानी पीढ़ी की तुलना में भी अधिक देशभक्त और ईमानदार हैं और उनकी बात सुनी जानी चाहिए।

    भागवत ने यह भी कहा कि नई पीढ़ी के साथ संवाद में कमी रही, जिसकी वजह से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन जैसी स्थिति सामने आई। उन्होंने 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के कुछ दिनों बाद कहा था कि आज की युवा पीढ़ी बहुत से सवाल पूछती है।

    मोहन भागवत का यह संवाद ऐसे समय में हुआ है, जब युवा मुद्दों और Gen-Z की राजनीतिक भागीदारी को लेकर देश की राजनीति में चर्चा तेज है। इसी को लेकर शशि थरूर ने भी सत्ताधारी दल के लिए हालिया घटनाक्रमों को राजनीतिक चेतावनी के तौर पर पेश किया है।