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  • ब्रिक्स समिट में भाग नहीं लेगा बांग्लादेश… PM तारिक रहमान को न्योता नहीं मिलने का दिया हवाला

    ब्रिक्स समिट में भाग नहीं लेगा बांग्लादेश… PM तारिक रहमान को न्योता नहीं मिलने का दिया हवाला


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) के आउटरीच सेशन में प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Prime Minister Tariq Rahman) के शामिल होने का न्योता ठुकरा दिया है। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत तौर पर इस बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था, बल्कि यह न्योता BIMSTEC के मौजूदा चेयर को दिया गया था।

    बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में साफ किया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के BRICS समिट में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री को आमंत्रित ही नहीं किया गया, तो सरकार की ओर से किसी प्रतिनिधि को भेजने की भी कोई वजह नहीं है।


    ‘हमारे PM को किसने बुलाया? BIMSTEC चेयर को न्योता मिला था’

    हुमायूं कबीर ने कहा, “हम कैसे जाएंगे? क्या बांग्लादेश सरकार से किसी को आमंत्रित किया गया है? हमारे प्रधानमंत्री को आमंत्रित नहीं किया गया था।” जब उनसे पूछा गया कि प्रधानमंत्री को न्योता दिए जाने की बात क्यों कही जा रही है, तो उन्होंने जवाब दिया, “आपको किसने बताया कि हमारे प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया गया था? BIMSTEC चेयर को आमंत्रित किया गया था। फिर आप यह सवाल क्यों पूछ रहे हैं?”

    BRICS समिट का आउटरीच सेशन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होना है। इसमें सदस्य और साझेदार देशों के नेताओं के साथ आउटरीच के लिए आमंत्रित किए गए नेता भी शामिल होंगे।


    भारत ने क्या कहा था?

    भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में नई दिल्ली में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को BIMSTEC के मौजूदा चेयर के तौर पर 18वें BRICS समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। जायसवाल ने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री के लिए एक अलग द्विपक्षीय निमंत्रण फरवरी से ही मौजूद है।

    बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि तारिक रहमान की भारत की पहली यात्रा बहुपक्षीय यात्रा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सरकार भारत के साथ प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय यात्रा की व्यवस्था करने पर काम कर रही है और इसके लिए उचित समय का इंतजार किया जा रहा है।


    भारत-बांग्लादेश रिश्तों में तनाव के बीच आया फैसला

    बांग्लादेश का यह फैसला ऐसे समय आया है जब नई दिल्ली और ढाका के रिश्तों में तनाव बना हुआ है। इसकी वजहों में भारत में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मौजूदगी, उनके प्रत्यर्पण की मांग और पानी के बंटवारे से जुड़े समझौतों समेत कुछ अन्य लंबित मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा बांग्लादेश की चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकी को भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव के संदर्भ में बताया गया है।

    फरवरी में भारत ने भेजे थे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला
    भारत ने 17 फरवरी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बांग्लादेश भेजा था। वह 12 फरवरी के आम चुनाव के बाद तारिक रहमान की BNP सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे। ओम बिरला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तारिक रहमान के लिए एक पत्र भी लेकर गए थे। इसमें प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बांग्लादेशी समकक्ष को बधाई दी थी और उन्हें पत्नी तथा बेटी के साथ भारत आने का निमंत्रण दिया था।

  • तमिलनाडु में TVK का कमाल…. लेकिन अभी राजनीति में नहीं आना चाहते थे विजय….जानें इसकी वजह?

    तमिलनाडु में TVK का कमाल…. लेकिन अभी राजनीति में नहीं आना चाहते थे विजय….जानें इसकी वजह?


    चेन्नई।
    सोमवार को आए तमिलनाडु विधानसभा (Tamil Nadu Assembly elections) के चुनावी नतीजों में हाल ही में बनी पार्टी टीवीके (TVK) ने कमाल कर दिया। अपने पहले ही चुनाव में टीवीके चीफ थालापति विजय (TVK Chief Thalapathy Vijay) की पार्टी ने तमिलनाडु के 108 सीटों पर जीद दर्ज की है। आज पूरे देश में नई बनी पार्टी टीवीके और थालापति विजय की चर्चा है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब थालापति विजय राजनीति में नहीं आना चाहते थे। राजनीति में आने से पहले अपने भविष्य को लेकर विजय थालापति असमंजस में रहते थे। आइए जानते हैं उन्हें किस बात का डर था और वो राजनीति में अभी क्यों नहीं आना चाहते थे।


    किस बात का था डर

    साउथ की फिल्मों में सुपरस्टार थालापति विजय बॉक्स ऑफिस पर एकदम हिट थे और प्रदेश की जनता भी उन्हें भगवान की तरह पूजती थी, लेकिन वो राजनीति में नहीं आना चाहते थे। विजय के पिता भी चाहते थे कि वो राजनीति में आएं, लेकिन उनको अपने ऊपर पूरी तरह भरोसा नहीं था। अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर थालापति विजय निश्चित नहीं थे, इसलिए वो पार्टी नहीं बनाना चाहते थे।

    थालापति विजय ने अचानक क्यों बनाई पार्टी
    थालापति के माता-पिता उन्हें साल 2009 से ही राजनीति में लाना चाहते थे, क्योंकि पूरे तमिलनाडु में उनकी लोकप्रियता और फैन फॉलोइंग बहुत ज्यादा थी। लेकिन वो राजनीति में नहीं आए। इस दौरान वो चाहते थे कि प्रदेश में ऐसा वैक्यूम बने जब एक नई राजनीतिक पार्टी की जरूरत हो। साल 2016 में जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके (AIADMK) अपनी साख खोती दिख रही थी। तमिलनाडु में मजबूत संगठन के बावजूद अपने शीर्ष नेताओं के बीच चल रही लगातार लड़ाई के कारण एआईएडीएमके ने अपनी राजनीतिक हैसियत को खत्म कर लिया। इस दौरान विजय थालापति ने एआईएडीएमके के खिलाफ बुगल फूंक दिया और बीजेपी को भी निशाने पर लिया।

    एआईएडीएमके के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और बीजेपी के खिलाफ सांप्रदायिकता का आरोप लगाकर विजय ने जमीन पर अपना काम शुरू कर दिया। इस दौरान विजय को युवाओं और महिलाओं के बीच काफी समर्थन मिला। इसी समय विजय ने पार्टी बनाने का मन बना लिया और साल 2026 के चुनावों में कमाल करते हुए पहली बार में ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर आई।

  • अमेरिका ने बताई भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट देने की वजह, कही ये बात

    अमेरिका ने बताई भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट देने की वजह, कही ये बात


    नई दिल्ली।
    भारत (India) से समुद्री मार्ग में पहले से मौजूद रूसी कच्चे तेल (Russian Crude Oil) को खरीदकर उसे भारतीय रिफाइनरियों (Indian Refineries) की ओर मोड़ने का अनुरोध करने के बाद अब अमेरिका (America) की तरफ से भारत को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। अमेरिका ने बताया है कि आखिर उन्होंने भारत को यह रूसी तेल खरीदने की यह तथाकथित ‘छूट’ क्यों दी है। बुधवार को वाइट हाउस (White House) ने एक बयान में कहा है कि भारत को इसकी ‘इजाजत’ इसीलिए दी गई क्योंकि भारत के लोग अच्छे हैं। इस दौरान यह भी दावा किया गया कि भारत ने पूर्व में रूसी तेल ना खरीदने की उनकी शर्तों को माना है, इसीलिए अमेरिका ने भारत को यह विशेष ‘छूट’ दी।

    वाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि यह फैसला इसलिए किया गया क्योंकि भारत में हमारे साथी अच्छे लोग रहे हैं। लेविट ने कहा, “हम इस फैसले पर इसलिए पहुंचे क्योंकि भारत में हमारे साथी अच्छे साथी रहे हैं और उन्होंने पहले ही रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया था, जिस पर रोक लगी है। इसलिए, जब हम ईरानियों की वजह से दुनिया में तेल सप्लाई में इस अस्थायी कमी को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं, तो हमने भारत को रूसी तेल लेने की इजाजत दी है।”


    अमेरिका ने की थी घोषणा

    उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका ने इस फैसले को इसलिए मंजूरी दी क्योंकि भारत आने वाला यह रूसी तेल पहले से ही समुद्र मार्ग में था और रूस को इससे कोई खास वित्तीय फायदा नहीं होगा।” बता दें कि इससे पहले अमरीका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति आसान बनाने के मकसद से भारत को उन पोत पर लदे रूसी तेल की खरीद की ‘अनुमति” दी गई है, जो पहले से समुद्री मार्गों पर हैं। इस फैसले को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और US ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने मंजूरी दी है।


    क्या बोले थे अमेरिकी वित्त मंत्री

    स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में भारत को अमेरिका का अच्छा साझेदार बताया था। उन्होंने कहा था, ”दुनिया में तेल की पर्याप्त आपूर्ति है। वित्त मंत्रालय ने भारत में हमारे सहयोगियों को उस रूसी तेल की खरीद शुरू करने की कल सहमति दे दी जो पहले से समुद्र में है। भारतीयों ने बहुत अच्छा सहयोग दिया है। हमने उनसे कहा था कि वे प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीद बंद कर दें। उन्होंने ऐसा किया। वे इसकी जगह अमेरिकी तेल लेने वाले थे लेकिन दुनिया भर में तेल की अस्थायी कमी को दूर करने के लिए हमने उन्हें रूसी तेल स्वीकार करने की अनुमति दे दी है। हम रूसी तेल के अन्य प्रकारों से भी प्रतिबंध हटा सकते हैं।”


    अमेरिका ने लगाया था जुर्माना

    इससे पहले अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीद कर यूक्रेन युद्ध की फंडिंग करने का आरोप लगाते हुए कई महीनों तक मोटा जुर्माना वसूला था। अमेरिका ने भारत पर पहले 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ के अलावा 25 फीसदी जुर्माना लगा दिया था, जिसके बाद अमेरिका भारत से आयातित उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ वसूल रहा था। हालांकि अमेरिका के साथ हुई हालिया ट्रेड डील और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ को असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद अब इस टैरिफ को हटा दिया गया है।


    भारत ने स्पष्ट किया है अपना रुख

    वहीं भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। भारत ने कहा है कि ऊर्जा बाजार के उतार-चढ़ाव वाले माहौल में, नई दिल्ली अपनी 1.4 बिलियन की आबादी को प्राथमिकता देना जारी रखेगा।” बता दें कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है।