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  • दिवाली पर घर में बनाएं शाही सोहन हलवा, देसी घी और मेवों से तैयार होगी स्वादिष्ट पारंपरिक मिठाई

    दिवाली पर घर में बनाएं शाही सोहन हलवा, देसी घी और मेवों से तैयार होगी स्वादिष्ट पारंपरिक मिठाई

    नई दिल्ली ।दिवाली का त्योहार मिठाइयों के बिना अधूरा माना जाता है। इस मौके पर घरों में मेहमानों के स्वागत के लिए तरह-तरह के पकवान और मिठाइयां तैयार की जाती हैं। आमतौर पर लोग बाजार से मिठाइयां खरीदते हैं, लेकिन इस बार त्योहार पर कुछ अलग बनाने की योजना है तो घर पर पारंपरिक सोहन हलवा तैयार कर सकते हैं। देसी घी, चीनी, गेहूं के आटे और ढेर सारे मेवों से बनने वाली यह मिठाई स्वाद के साथ त्योहार की मिठास भी बढ़ा सकती है।

    सोहन हलवा उत्तर भारत की प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाइयों में शामिल है। इसकी खास पहचान गाढ़ी बनावट, हल्के खिंचाव और घी की खुशबू से होती है। इसमें काजू, बादाम और पिस्ता जैसे मेवे मिलाने से इसका स्वाद और बेहतर हो जाता है। इसे तैयार करने में थोड़ा समय और लगातार मेहनत की जरूरत होती है, लेकिन सही तरीके से बनाने पर हलवा अच्छी तरह जमता है और इसे मनचाहे आकार में काटकर परोसा जा सकता है।

    इसे बनाने के लिए 4 बड़े चम्मच अंकुरित गेहूं का आटा, 4 बड़े चम्मच मैदा, एक कप चीनी, एक कप देसी घी और एक कप पानी की जरूरत होगी। इसके अलावा आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर, 2 बड़े चम्मच बारीक कटे काजू, 2 बड़े चम्मच बादाम और एक बड़ा चम्मच पिस्ता लेना होगा।

    हलवा बनाने की शुरुआत सांचे तैयार करने से करें। इसके लिए छोटी स्टील की कटोरियों या किसी चौड़े सांचे में थोड़ा देसी घी लगाकर चिकना कर लें। अब इनके तले में कटे हुए काजू, बादाम और पिस्ता फैला दें। इससे हलवा जमने के बाद ऊपर की तरफ मेवे दिखाई देंगे और मिठाई आकर्षक लगेगी।

    इसके बाद एक बर्तन में अंकुरित गेहूं का आटा और मैदा डालें। इसमें धीरे-धीरे पानी मिलाकर अच्छी तरह फेंटें। ध्यान रखें कि घोल में किसी तरह की गांठ न रहे। अब इसे कुछ देर के लिए अलग रख दें।

    अगले चरण में भारी तले वाली कड़ाही में चीनी और पानी डालकर गर्म करें। चीनी पूरी तरह घुल जाने के बाद तैयार आटे का घोल धीरे-धीरे चाशनी में मिलाएं। इस दौरान मिश्रण को लगातार चलाते रहना जरूरी है, ताकि वह कड़ाही के तले में चिपके नहीं और उसमें गांठें न बनें।

    जब मिश्रण गाढ़ा होने लगे तो इसमें थोड़ा-थोड़ा करके देसी घी डालें। हर बार घी डालने के बाद मिश्रण को अच्छी तरह चलाएं। इसे मध्यम से धीमी आंच पर पकाते रहें। सोहन हलवे की सही बनावट पाने के लिए इस प्रक्रिया में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। लगातार चलाने से मिश्रण समान रूप से पकता है।

    जब हलवा गाढ़ा होकर कड़ाही के किनारों को छोड़ने लगे और उसमें चमक दिखाई देने लगे, तब इलायची पाउडर मिला दें। इसके बाद गैस बंद कर दें। तैयार मिश्रण को तुरंत घी लगे सांचों में डालें और ऊपर से बचे हुए मेवे सजा दें।

    हलवे को कमरे के तापमान पर करीब 3 से 4 घंटे तक जमने दें। अच्छी तरह सेट होने के बाद इसे सांचे से निकालकर मनचाहे आकार में काट लें। इस तरह घर पर तैयार सोहन हलवा मेहमानों को परोसने के लिए तैयार हो जाएगा।

    हलवा बनाते समय कुछ सावधानियां रखना भी जरूरी है। हमेशा भारी तले वाली कड़ाही का इस्तेमाल करें और आटे के घोल को अच्छी तरह फेंटें। घी एक साथ डालने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिलाएं। पकाते समय मिश्रण लगातार चलाते रहें। तैयार हलवे को सांचे में डालने में देरी न करें, क्योंकि ठंडा होने पर यह जल्दी जमने लगता है। पूरी तरह ठंडा और सेट होने के बाद ही इसके टुकड़े काटें।

    तैयार सोहन हलवे को एयरटाइट डिब्बे में रखकर सुरक्षित रखा जा सकता है। दिवाली से पहले इसे तैयार करने से त्योहार के दिन मिठाई बनाने की भागदौड़ कम होगी और घर आए मेहमानों को पारंपरिक स्वाद वाली मिठाई परोसने का मौका मिलेगा।

  • शरद पूर्णिमा पर बनाएं ब्राउन राइस की हेल्दी खीर, स्वाद के साथ पोषण का रखें ध्यान..

    शरद पूर्णिमा पर बनाएं ब्राउन राइस की हेल्दी खीर, स्वाद के साथ पोषण का रखें ध्यान..

    नई दिल्ली । शरद पूर्णिमा का त्योहार चांदनी रात, पूजा-पाठ और पारंपरिक पकवानों के लिए खास माना जाता है। इस अवसर पर कई घरों में दूध और चावल से बनी खीर तैयार की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात खीर को चांदनी में रखने और अगले दिन उसका सेवन करने की परंपरा है। अगर आप इस बार पारंपरिक खीर में कुछ बदलाव करना चाहते हैं, तो ब्राउन राइस से बनी खीर एक विकल्प हो सकती है। इसे दूध, मेवे, इलायची और केसर के साथ तैयार किया जा सकता है। हालांकि, इसे हेल्दी बनाने के लिए मिठास और मात्रा का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन चंद्रमा पूर्ण अवस्था में दिखाई देता है और कई घरों में मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर का सेवन शुभ माना जाता है। इसी परंपरा के कारण इस पर्व को खीर पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। दूध, चावल और मेवों से तैयार खीर त्योहार की परंपरा और पारिवारिक उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    इस बार खीर को अलग अंदाज में बनाने के लिए सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस का इस्तेमाल किया जा सकता है। ब्राउन राइस में फाइबर और कुछ जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। वहीं, दूध से प्रोटीन और कैल्शियम मिलता है। बादाम और पिस्ता जैसे मेवे खीर में स्वाद और पोषक तत्व जोड़ते हैं। मिठास के लिए ब्राउन शुगर का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन ध्यान रखें कि इसमें भी चीनी होती है। इसलिए इसे शुगर-फ्री विकल्प नहीं समझना चाहिए और इसकी मात्रा सीमित रखनी चाहिए।

    ब्राउन राइस की खीर बनाने के लिए ब्राउन राइस, अपनी पसंद के अनुसार फुल क्रीम या अन्य दूध, थोड़ी ब्राउन शुगर, इलायची पाउडर, कटे हुए बादाम और पिस्ता तथा केसर की जरूरत होगी। सामग्री की मात्रा खीर बनाने वाले लोगों की संख्या के अनुसार तय की जा सकती है।

    खीर बनाने के लिए सबसे पहले ब्राउन राइस को अच्छी तरह धो लें और लगभग 30 मिनट तक पानी में भिगोकर रखें। इससे चावल को पकने में मदद मिलेगी। इसके बाद एक भारी तले वाले बर्तन में दूध गर्म करें। दूध में उबाल आने पर भीगे हुए चावल डाल दें। अब इसे धीमी आंच पर पकने दें और बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि चावल बर्तन के तले में न चिपके।

    जब चावल अच्छी तरह नरम हो जाएं और दूध गाढ़ा होने लगे, तो खीर को आंच से उतार लें। इसे थोड़ा ठंडा होने दें और फिर स्वाद के अनुसार ब्राउन शुगर मिलाएं। अंत में इलायची पाउडर, केसर और कटे हुए बादाम-पिस्ता डालकर अच्छी तरह मिला दें। इस तरह ब्राउन राइस की खीर तैयार हो जाएगी। चावल के प्रकार और पकाने के तरीके के अनुसार इसे तैयार होने में अधिक समय लग सकता है, इसलिए चावल के पूरी तरह नरम होने तक पकाना जरूरी है।

    खीर को संतुलित आहार का हिस्सा बनाने के लिए अतिरिक्त चीनी डालने से बचें और ब्राउन शुगर भी सीमित मात्रा में इस्तेमाल करें। मेवे स्वाद बढ़ाते हैं, लेकिन उनकी मात्रा भी अपनी जरूरत के अनुसार रखें। यदि आप मधुमेह या किसी अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण मीठे का सेवन सीमित करते हैं, तो खीर की मात्रा और मिठास का विशेष ध्यान रखें।

    शरद पूर्णिमा पर खीर को चांदनी में रखने की परंपरा निभाते समय खाद्य सुरक्षा को नजरअंदाज न करें। दूध से बनी खीर को पूरी रात खुले में या कमरे के तापमान पर छोड़ने से उसमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ सकता है। खीर को ढककर रखें और लंबे समय तक बाहर न छोड़ें। सुरक्षित रखने के लिए इसे उचित समय पर फ्रिज में रखें। इस तरह त्योहार की परंपरा निभाने के साथ स्वाद और सेहत, दोनों का ध्यान रखा जा सकता है।

  • घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा क्रिस्पी मसाला डोसा, आसान बैटर और स्वादिष्ट आलू की फिलिंग से तैयार करें नाश्ता

    घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा क्रिस्पी मसाला डोसा, आसान बैटर और स्वादिष्ट आलू की फिलिंग से तैयार करें नाश्ता

    नई दिल्ली । सुबह के नाश्ते में अगर स्वादिष्ट और पेट भरने वाली डिश बनाने का मन है, तो मसाला डोसा एक अच्छा विकल्प हो सकता है। बाहर मिलने वाले कुरकुरे डोसे और मसालेदार आलू की फिलिंग का स्वाद घर पर भी आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। सही तरीके से बैटर तैयार करने, उसे पर्याप्त समय तक फर्मेंट करने और तवे का तापमान ठीक रखने से डोसा बाहर से कुरकुरा और अंदर से हल्का नरम बन सकता है।

    मसाला डोसा बनाने के लिए सबसे पहले बैटर तैयार किया जाता है। इसके लिए 2 कप चावल, 1 कप उड़द दाल और 1 छोटा चम्मच मेथी दाना चाहिए। चावल और उड़द दाल को अच्छी तरह धोकर पानी में भिगो दें। मेथी दाने को चावल के साथ भिगोया जा सकता है। इन्हें करीब 5 से 6 घंटे तक भिगोने के बाद चावल और दाल को अलग-अलग या साथ में पीसकर थोड़ा गाढ़ा बैटर तैयार करें।

    अब बैटर को ढककर करीब 8 से 10 घंटे के लिए गर्म जगह पर रखें, ताकि अच्छी तरह फर्मेंटेशन हो सके। डोसा बनाने से पहले बैटर में स्वादानुसार नमक और जरूरत के मुताबिक थोड़ा पानी मिलाएं। बैटर की कंसिस्टेंसी ऐसी रखें कि उसे तवे पर आसानी से फैलाया जा सके।

    डोसे के लिए आलू की मसालेदार फिलिंग बनाने के लिए 4 से 5 आलू उबालकर छील लें और उन्हें हल्का मैश कर लें। इसके बाद पैन में थोड़ा तेल गर्म करें। इसमें 1 छोटा चम्मच राई, 8 से 10 करी पत्ते और 2 बारीक कटी हरी मिर्च डालें। इसके बाद एक बारीक कटा प्याज डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें।

    अब इसमें आधा छोटा चम्मच हल्दी, आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएं। इसके बाद मैश किए हुए आलू डालें और सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर कुछ मिनट तक पकाएं। गैस बंद करने के बाद इसमें थोड़ा हरा धनिया डाल दें। इस तरह डोसे के लिए स्वादिष्ट आलू की फिलिंग तैयार हो जाएगी।

    अब डोसा बनाने के लिए तवा गर्म करें और उस पर हल्का तेल लगाएं। एक करछी बैटर तवे पर डालकर उसे गोल आकार में पतला फैलाएं। डोसे के किनारों पर थोड़ा तेल या घी डालें और मध्यम आंच पर पकने दें। जब डोसा नीचे से सुनहरा और कुरकुरा होने लगे, तो उसके बीच में तैयार आलू की फिलिंग रखें।

    आलू की फिलिंग रखने के बाद डोसे को दोनों तरफ से मोड़कर प्लेट में निकाल लें। इसी तरह बचे हुए बैटर और आलू की फिलिंग से बाकी डोसे तैयार किए जा सकते हैं। अगर डोसा ज्यादा क्रिस्पी पसंद है, तो बैटर को तवे पर बहुत पतली परत में फैलाना चाहिए और मध्यम आंच पर पर्याप्त समय तक पकाना चाहिए।

    गरमा-गरम मसाला डोसा नारियल चटनी, टमाटर की चटनी और सांभर के साथ परोसा जा सकता है। इस तरह सामान्य सामग्री और आसान प्रक्रिया से घर पर स्वादिष्ट, कुरकुरा और मसालेदार मसाला डोसा तैयार किया जा सकता है।

  • गणेशोत्सव पर घर में बनाएं हलवाई जैसे दानेदार मोतीचूर लड्डू, बेसन से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई की आसान रेसिपी

    गणेशोत्सव पर घर में बनाएं हलवाई जैसे दानेदार मोतीचूर लड्डू, बेसन से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई की आसान रेसिपी

    नई दिल्ली । गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश को भोग लगाने के लिए मोदक और अलग-अलग तरह की मिठाइयां तैयार की जाती हैं। इनमें मोतीचूर के लड्डू भी काफी पसंद किए जाते हैं। बाजार से मिठाई खरीदने के बजाय इस बार घर पर ही बेसन से दानेदार और स्वादिष्ट मोतीचूर लड्डू तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए किसी खास सांचे या बहुत ज्यादा सामान की जरूरत नहीं है। सामान्य रसोई में मौजूद सामग्री से भी इसे आसानी से बनाया जा सकता है।

    मोतीचूर लड्डू बनाने के लिए एक कप बेसन, तीन-चौथाई कप पानी, एक कप चीनी, आधा कप पानी, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर, एक चुटकी ऑरेंज या येलो फूड कलर, एक बड़ा चम्मच मगज के बीज और तलने के लिए देसी घी या तेल की जरूरत होगी। चाशनी के लिए आधा छोटा चम्मच नींबू का रस भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे चाशनी जमने से बची रहती है।

    सबसे पहले एक बाउल में एक कप बेसन लें। इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए चिकना और बिना गुठलियों वाला पतला घोल तैयार करें। घोल बहुत ज्यादा गाढ़ा नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसी से बूंदी के छोटे-छोटे दाने तैयार किए जाएंगे।

    अब कड़ाही में घी या तेल गर्म करें। एक छेद वाली सामान्य कड़छी या कद्दूकस की मदद से बेसन का घोल गर्म तेल में डालें। कड़छी को कड़ाही के ऊपर हल्का थपथपाने पर घोल की छोटी-छोटी बूंदें तेल में गिरने लगेंगी। इन बूंदियों को केवल 10 से 15 सेकंड तक हल्का तलना है। इन्हें ज्यादा देर तक तलने से बूंदी कड़क हो सकती है, जबकि मोतीचूर लड्डू के लिए नरम दाने जरूरी होते हैं।

    इसके बाद चाशनी तैयार करें। एक पैन में एक कप चीनी और आधा कप पानी डालकर गर्म करें। इसमें एक चुटकी फूड कलर, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर और आधा छोटा चम्मच नींबू का रस डालें। इसे तब तक गर्म करें जब तक चीनी पूरी तरह घुलकर हल्की चिपचिपी चाशनी न बन जाए। इसके लिए एक तार की चाशनी तैयार करने की जरूरत नहीं है।

    अगर तैयार बूंदी के दाने थोड़े बड़े या असमान हैं, तो उन्हें ठंडा होने के बाद मिक्सी के जार में डालकर केवल एक-दो सेकंड चलाया जा सकता है। इससे बूंदी बारीक और दानेदार हो जाएगी तथा मोतीचूर जैसा टेक्सचर तैयार होगा। ध्यान रखें कि मिक्सी को ज्यादा देर तक न चलाएं।

    अब तैयार बूंदी को गरमा-गरम चाशनी में डालें और धीमी आंच पर करीब दो मिनट तक पकाएं। इस दौरान बूंदी चाशनी को अच्छी तरह सोख लेगी। इसके बाद गैस बंद कर दें और मिश्रण में मगज के बीज डालकर मिला दें। मिश्रण को ढककर करीब 10 मिनट के लिए छोड़ दें।

    जब मिश्रण हल्का गुनगुना रह जाए, तो हाथों में थोड़ा सा घी लगाएं और इसे गोल आकार देते हुए लड्डू बांध लें। इस तरह घर पर ही दानेदार और स्वादिष्ट मोतीचूर लड्डू तैयार हो जाएंगे। इन्हें भगवान गणेश को भोग में चढ़ाने के साथ परिवार के सदस्यों को भी परोसा जा सकता है।

  • Besan Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं खस्ता मावा मोदक, बेसन और मेवों से तैयार करें स्वादिष्ट भो

    Besan Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं खस्ता मावा मोदक, बेसन और मेवों से तैयार करें स्वादिष्ट भो


    नई दिल्ली ।
    गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाने की परंपरा है। आमतौर पर मोदक चावल के आटे से तैयार किए जाते हैं, लेकिन इस बार घर में मौजूद बेसन से भी स्वादिष्ट मोदक बनाए जा सकते हैं। बेसन का सोंधापन और मावा-मेवों की भरावन इस मिठाई को अलग स्वाद देती है। गणेश चतुर्थी के मौके पर घर पर तैयार किए गए इन मोदक को बप्पा को भोग के रूप में अर्पित किया जा सकता है।

    बेसन मावा मोदक बनाने के लिए सबसे पहले इसकी बाहरी परत के लिए सामग्री तैयार करनी होगी। इसके लिए डेढ़ कप बेसन, आधा कप देसी घी, दो बड़े चम्मच सूजी, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर और तीन चौथाई कप पिसी चीनी की जरूरत होगी।

    मोदक के अंदर भरने वाली स्टफिंग के लिए आधा कप मावा या खोया लिया जाता है। इसमें दो बड़े चम्मच कद्दूकस किया हुआ नारियल, दो बड़े चम्मच बारीक कटे काजू-बादाम, एक छोटा चम्मच चिरौंजी, चुटकी भर जायफल और इलायची पाउडर तथा दो बड़े चम्मच पिसी चीनी मिलाई जाती है।

    मोदक की स्टफिंग तैयार करने के लिए सबसे पहले एक पैन में मावा डालकर धीमी आंच पर करीब दो से तीन मिनट तक भूनें। मावा हल्का गुलाबी होने लगे तो इसमें कटे हुए काजू-बादाम, चिरौंजी और कद्दूकस किया हुआ नारियल डालें। इसके बाद जायफल और इलायची पाउडर मिलाकर गैस बंद कर दें।

    मिश्रण को हल्का गुनगुना होने दें। इसके बाद इसमें दो बड़े चम्मच पिसी चीनी डालकर अच्छी तरह मिला लें। तैयार मावा-मेवे की स्टफिंग को एक तरफ रख दें।

    अब मोदक की बाहरी परत तैयार करने की बारी है। इसके लिए भारी तले की कढ़ाई में देसी घी गर्म करें। इसमें दो बड़े चम्मच सूजी और डेढ़ कप बेसन डालें। दोनों को धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें। करीब आठ से दस मिनट तक भूनने के बाद बेसन से सोंधी खुशबू आने लगेगी और उसका रंग हल्का सुनहरा हो जाएगा।

    बेसन अच्छी तरह भुन जाने के बाद गैस बंद कर दें और मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने दें। जब यह हाथ लगाने लायक गुनगुना रह जाए, तब इसमें पिसी चीनी और इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें।

    अब मोदक का सांचा लें और उसमें हल्का सा घी लगा दें। सांचे में बेसन का मिश्रण दोनों तरफ दबाकर भरें और बीच में थोड़ी जगह बना लें। इसी खाली जगह में तैयार मावा और मेवों की स्टफिंग भरें। इसके बाद ऊपर से थोड़ा बेसन का मिश्रण लगाकर सांचे को नीचे की तरफ से बंद कर दें।

    सांचे को खोलने पर बेसन मावा मोदक तैयार हो जाएगा। इसी प्रक्रिया से बाकी मोदक भी बनाए जा सकते हैं। बेसन से तैयार बाहरी परत का सोंधापन और मावा, नारियल, काजू, बादाम तथा चिरौंजी से बनी स्टफिंग इसके स्वाद को खास बनाती है। गणेशोत्सव के दौरान इन मोदक को बप्पा को भोग के रूप में अर्पित किया जा सकता है।

    इस तरह घर में उपलब्ध बेसन से बिना पारंपरिक चावल के आटे के भी मोदक तैयार किए जा सकते हैं। रेसिपी में बेसन को धीमी आंच पर अच्छी तरह भूनना और स्टफिंग को सही तरीके से तैयार करना इसके स्वाद और बनावट का अहम हिस्सा है। तैयार मोदक देखने में आकर्षक और खाने में खस्ता तथा सोंधे होते हैं।

  • रक्षाबंधन पर घर में बनाएं खस्ता मावा गुजिया, मावे और ड्राई फ्रूट्स की भरावन से बढ़ेगा त्योहार का स्वाद

    रक्षाबंधन पर घर में बनाएं खस्ता मावा गुजिया, मावे और ड्राई फ्रूट्स की भरावन से बढ़ेगा त्योहार का स्वाद

    नई दिल्ली ।रक्षाबंधन का त्योहार भाई और बहन के रिश्ते में मिठास और अपनापन बढ़ाने वाला अवसर है। इस खास दिन पर घर में बनी मिठाई का स्वाद अलग ही होता है। अगर इस बार बाजार से मिठाई खरीदने के बजाय कुछ खास तैयार करना चाहती हैं तो मावा गुजिया एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

    मावा गुजिया बाहर से कुरकुरी और अंदर से मुलायम तथा स्वादिष्ट होती है। इसकी भरावन में मावा, पिसी चीनी, काजू, बादाम, किशमिश और इलायची का इस्तेमाल किया जाता है। इन चीजों का मिश्रण गुजिया को पारंपरिक स्वाद के साथ खुशबूदार भी बनाता है।

    गुजिया बनाने के लिए सबसे पहले मैदा तैयार किया जाता है। दो कप मैदा में करीब दो बड़े चम्मच घी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। घी और मैदा को हथेलियों के बीच रगड़कर देखें। अगर मिश्रण दबाने पर आसानी से बंधने लगे तो मोयन सही माना जा सकता है।

    इसके बाद थोड़ा थोड़ा पानी डालते हुए सख्त आटा गूंथ लें। गुजिया का आटा बहुत नरम नहीं होना चाहिए। आटा तैयार होने के बाद उसे ढककर करीब 15 से 20 मिनट के लिए रख दें। इससे आटा बेलने के लिए अच्छी तरह तैयार हो जाता है।

    अब गुजिया की भरावन तैयार करें। कड़ाही को धीमी आंच पर गर्म करके उसमें मावा डालें। मावे को लगातार चलाते हुए हल्का भूनें। इसका उद्देश्य मावे की अतिरिक्त नमी कम करना और उसकी खुशबू को उभारना है। मावा भुन जाने के बाद गैस बंद कर दें और उसे पूरी तरह ठंडा होने दें।

    मावा ठंडा होने के बाद इसमें पिसी चीनी, बारीक कटे काजू और बादाम, किशमिश तथा इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें। मावा गर्म रहते हुए चीनी डालने से भरावन अधिक गीली हो सकती है, इसलिए ठंडा होने के बाद ही चीनी मिलाना बेहतर रहता है।

    इसके बाद तैयार आटे को बराबर हिस्सों में बांटकर छोटी छोटी लोइयां बना लें। प्रत्येक लोई को बेलकर छोटी पूरी जैसा आकार दें। पूरी को बहुत ज्यादा पतला न रखें, क्योंकि पतली परत भरावन डालते समय आसानी से फट सकती है।

    अब पूरी के बीच में तैयार मावे की उचित मात्रा रखें। किनारे पर हल्का पानी लगाकर पूरी को मोड़ दें और अर्धचंद्राकार आकार में बंद करें। किनारों को उंगलियों से अच्छी तरह दबाएं, ताकि तलते समय भरावन बाहर न निकले।

    कड़ाही में तेल या घी गर्म करें और गुजिया को मध्यम से धीमी आंच पर तलें। तेज आंच पर तलने से बाहरी हिस्सा जल्दी भूरा हो सकता है, जबकि अंदर की परत ठीक से नहीं सिकती। धीमी आंच पर तलने से गुजिया अच्छी तरह कुरकुरी और सुनहरी बनती है।

    गुजिया सुनहरी होने के बाद उसे निकालकर अतिरिक्त तेल या घी निकलने दें। कुछ देर ठंडा होने के बाद इसे परिवार के साथ परोसा जा सकता है। ऊपर से बारीक कटे पिस्ते या बादाम डालने से इसका स्वाद और प्रस्तुति दोनों बेहतर हो सकते हैं।

    खस्ता मावा गुजिया के लिए सबसे जरूरी बात आटे की सही consistency, मावे को ठंडा करना और तलते समय उचित तापमान बनाए रखना है। इन बातों का ध्यान रखकर रक्षाबंधन पर घर में स्वादिष्ट और कुरकुरी मिठाई तैयार की जा सकती है।

  • वेट लॉस के लिए मूंग दाल क्यों मानी जाती है बेहतर, जानिए प्रोटीन फाइबर से भरपूर हेल्दी रेसिपी का आसान तरीका

    वेट लॉस के लिए मूंग दाल क्यों मानी जाती है बेहतर, जानिए प्रोटीन फाइबर से भरपूर हेल्दी रेसिपी का आसान तरीका

    नई दिल्ली । वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करना जरूरी माना जाता है, जो स्वाद के साथ शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी दें। रोजाना के भोजन में शामिल दाल इस लिहाज से एक उपयोगी विकल्प हो सकती है। खास तौर पर मूंग दाल को हल्के और संतुलित भोजन के तौर पर डाइट में शामिल किया जा सकता है।

    मूंग दाल में प्रोटीन और फाइबर पाए जाते हैं। प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है, जबकि फाइबर युक्त भोजन लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है। इससे बार बार कुछ खाने की इच्छा को नियंत्रित करने और भोजन के बीच अनहेल्दी स्नैकिंग कम करने में सहायता मिल सकती है।

    वजन घटाने के लिए मूंग दाल को बनाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। यदि दाल में बहुत अधिक तेल, घी या क्रीम का इस्तेमाल किया जाए तो भोजन की कुल कैलोरी बढ़ सकती है। इसलिए इसे हल्के मसालों और सीमित मात्रा में तेल के साथ तैयार करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

    मूंग दाल की आसान रेसिपी बनाने के लिए सबसे पहले दाल को अच्छी तरह साफ करके धो लें। इसे करीब 15 से 20 मिनट के लिए पानी में भिगोया जा सकता है। इसके बाद दाल को कुकर में पानी, हल्दी, नमक और कटे हुए टमाटर के साथ डालकर पकाएं। दाल के अच्छी तरह नरम होने के बाद इसमें जीरा, हींग और लहसुन का हल्का तड़का लगाया जा सकता है।

    वेट लॉस डाइट के दौरान तड़के में तेल या घी की मात्रा कम रखना बेहतर रहता है। स्वाद बढ़ाने के लिए धनिया, हरी मिर्च और दूसरे हल्के मसालों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे दाल स्वादिष्ट भी रहेगी और भोजन को अनावश्यक रूप से भारी बनाने से भी बचा जा सकेगा।

    मूंग दाल को और ज्यादा पौष्टिक बनाने के लिए इसमें अलग अलग सब्जियां भी मिलाई जा सकती हैं। पालक, लौकी, गाजर, टमाटर और तोरई जैसी सब्जियों को दाल के साथ पकाने से भोजन में पोषक तत्व और फाइबर की मात्रा बढ़ सकती है। इस तरह तैयार दाल दोपहर या रात के भोजन का हिस्सा बन सकती है।

    हालांकि वजन कम करने के लिए केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है। दाल के साथ भोजन में हरी सब्जियां और सलाद शामिल किए जा सकते हैं। जरूरत के अनुसार रोटी या चावल की संतुलित मात्रा भी ली जा सकती है। भोजन की मात्रा और पूरे दिन की कुल कैलोरी का ध्यान रखना भी वजन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।

    इसके अलावा नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त पानी और संतुलित भोजन की आदत वजन घटाने की कोशिश में मददगार हो सकती है। हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरत अलग हो सकती है, इसलिए किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति या लंबे समय से चल रही समस्या में व्यक्तिगत डाइट के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहता है।

    मूंग दाल को इसलिए वजन घटाने की कोई जादुई चीज नहीं माना जाना चाहिए। यह प्रोटीन और फाइबर वाले संतुलित भोजन का एक हिस्सा हो सकती है। सही मात्रा, कम तेल में तैयारी और सब्जियों के साथ इसका सेवन रोजाना की डाइट को अधिक संतुलित और पौष्टिक बनाने में मदद कर सकता है।

  • सावन व्रत में आलू चोखा की जगह बनाएं स्वादिष्ट टमाटर चोखा, 10 मिनट में तैयार होगी चटपटी और सात्विक डिश

    सावन व्रत में आलू चोखा की जगह बनाएं स्वादिष्ट टमाटर चोखा, 10 मिनट में तैयार होगी चटपटी और सात्विक डिश

    नई दिल्ली । सावन का महीना आते ही घरों में व्रत, पूजा और सात्विक भोजन का महत्व बढ़ जाता है। इस दौरान अधिकांश लोग प्याज और लहसुन से परहेज करते हैं और खाने में आलू आधारित व्यंजनों का उपयोग अधिक करने लगते हैं। हालांकि लगातार आलू से बनी चीजें खाने के कारण कई बार स्वाद में एकरसता आ जाती है। ऐसे में टमाटर का चोखा एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ हल्का और झटपट बनने वाला व्यंजन भी है।

    टमाटर का चोखा उत्तर भारत के कई हिस्सों में पसंद किया जाता है। इसका खट्टा-तीखा स्वाद साधारण व्रत के भोजन को भी खास बना देता है। इस रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे तैयार करने में ज्यादा समय नहीं लगता और बहुत कम सामग्री की आवश्यकता होती है। घर में उपलब्ध कुछ सामान्य चीजों की मदद से इसे आसानी से बनाया जा सकता है।

    इस व्यंजन को बनाने के लिए सबसे पहले तीन से चार पके हुए टमाटर और दो हरी मिर्च लें। इन्हें हल्का सा तेल लगाकर सीधे गैस की आंच पर अच्छी तरह भून लें। जब टमाटर नरम हो जाएं और उनका छिलका काला पड़ने लगे, तब उन्हें निकालकर ठंडा होने दें। इसके बाद टमाटर और मिर्च का छिलका उतार लें। भूनने की प्रक्रिया से इसमें एक विशेष स्मोकी फ्लेवर आता है, जो चोखे के स्वाद को और बेहतर बनाता है।

    अब भुने हुए टमाटर और मिर्च को सिलबट्टे या किसी बर्तन में डालकर हल्का दरदरा कूट लें। इसके साथ दो बड़े चम्मच भूनी हुई मूंगफली, एक छोटा चम्मच भूना जीरा, आधा छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर और स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाएं। इन सभी सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाएं, लेकिन ध्यान रखें कि मिश्रण पूरी तरह पेस्ट न बने। हल्का दरदरा टेक्सचर ही इस रेसिपी की पहचान माना जाता है।

    इसके बाद इसमें बारीक कटा हुआ हरा धनिया और एक छोटा चम्मच ताजा नींबू का रस मिलाएं। सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाने के बाद टमाटर का चोखा तैयार हो जाता है। नींबू का रस इसमें अतिरिक्त ताजगी और स्वाद जोड़ता है, जबकि मूंगफली हल्का कुरकुरापन प्रदान करती है।

    टमाटर का यह चोखा व्रत में खाए जाने वाले कई व्यंजनों के साथ परोसा जा सकता है। इसे कुट्टू या सिंहाड़े की पूरी, साबूदाना टिक्की, राजगीरा पराठा और सामक के चावल के साथ खाया जा सकता है। इसका तीखा और खट्टा स्वाद साधारण भोजन को भी स्वादिष्ट बना देता है। यही कारण है कि यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    पोषण के दृष्टिकोण से भी यह व्यंजन अच्छा माना जाता है। टमाटर में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। वहीं मूंगफली प्रोटीन और हेल्दी फैट का अच्छा स्रोत है। इस वजह से यह केवल स्वाद ही नहीं बल्कि पोषण भी प्रदान करता है।

    अगर आप सावन के व्रत या सात्विक भोजन के दौरान कुछ नया, हल्का और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं, तो टमाटर का चोखा एक शानदार विकल्प हो सकता है। कम समय, कम सामग्री और बेहतरीन स्वाद की वजह से यह रेसिपी हर उम्र के लोगों को पसंद आ सकती है और व्रत के भोजन में एक नया स्वाद जोड़ सकती है।

  • घर पर सिर्फ 15 मिनट में बनाएं होटल जैसा खिला-खिला जीरा राइस, स्वाद और खुशबू से मेहमान भी पूछेंगे रेसिपी

    घर पर सिर्फ 15 मिनट में बनाएं होटल जैसा खिला-खिला जीरा राइस, स्वाद और खुशबू से मेहमान भी पूछेंगे रेसिपी

    नई दिल्ली । घर पर मेहमान आने वाले हों और खाने की टेबल पर कुछ स्वादिष्ट और खास परोसना हो तो जीरा राइस एक बेहतरीन विकल्प है। इसकी खुशबूदार महक, लंबे और खिले-खिले चावल के दाने और घी में भुने जीरे का स्वाद साधारण खाने को भी खास बना देता है। अच्छी बात यह है कि सही तरीका अपनाकर इसे घर पर कम समय में आसानी से तैयार किया जा सकता है।

    जीरा राइस बनाने के लिए सबसे पहले लंबे दाने वाले बासमती चावल लें। करीब दो कप चावल को दो से तीन बार साफ पानी से धो लें, ताकि अतिरिक्त स्टार्च निकल जाए। इसके बाद चावल को लगभग 15 से 20 मिनट के लिए पानी में भिगोकर रखें। इससे चावल के दाने अच्छी तरह फूलते हैं और पकने के बाद लंबे दिखाई देते हैं।

    अब चावल को पर्याप्त पानी और थोड़ा नमक डालकर पकाएं। ध्यान रखें कि चावल को पूरी तरह गलने तक न पकाएं। जीरा राइस के लिए चावल लगभग 90 प्रतिशत पकना चाहिए। जब दाने अंदर से हल्के कड़े रहें, तब अतिरिक्त पानी निकाल दें। पके हुए चावल को कुछ देर खुला रखने से उनकी भाप निकल जाएगी और वे आपस में चिपकेंगे नहीं।

    अब एक चौड़ी कड़ाही या पैन को मध्यम आंच पर गर्म करें। इसमें करीब दो बड़े चम्मच घी डालें। घी गर्म होने के बाद उसमें एक से डेढ़ चम्मच जीरा डालें। जब जीरा चटकने लगे तो इसमें तेजपत्ता, हरी इलायची, छोटी दालचीनी और लौंग डालकर कुछ सेकंड भूनें। इसके बाद लंबाई में कटी हुई हरी मिर्च डालें। साबुत मसालों का यह तड़का जीरा राइस की खुशबू को काफी बढ़ा देता है।

    तड़का तैयार होने के बाद पके हुए चावल को कड़ाही में धीरे-धीरे डालें। यहां सबसे ज्यादा सावधानी रखने की जरूरत होती है। चावल को तेज हाथ से चलाने के बजाय हल्के हाथ से पलटें। ज्यादा चलाने से बासमती के लंबे दाने टूट सकते हैं और चावल देखने में चिपचिपे लगने लगते हैं।

    अब स्वाद के अनुसार नमक डालें और थोड़ा सा नींबू का रस मिलाएं। नींबू की हल्की खटास जीरा राइस के स्वाद को संतुलित करने में मदद करती है। इसके बाद कड़ाही को ढककर धीमी आंच पर करीब दो से तीन मिनट तक पकाएं। फिर गैस बंद कर दें और चावल को कुछ मिनट के लिए ढका रहने दें।

    जीरा राइस को होटल जैसा बनाने की सबसे महत्वपूर्ण ट्रिक यही है कि चावल ज्यादा न पकाएं और उन्हें तड़के के साथ मिलाते समय ज्यादा न चलाएं। साथ ही चौड़े बर्तन का इस्तेमाल करने से चावल आसानी से फैल जाते हैं और दाने टूटने की संभावना कम रहती है। घी में जीरे और साबुत मसालों को सही समय तक भूनना भी इसके स्वाद में बड़ा अंतर पैदा करता है।

    तैयार जीरा राइस को ऊपर से बारीक कटे हरे धनिये से सजाकर गरमा-गरम परोसें। इसे दाल तड़का, राजमा, छोले, मटर पनीर या शाही पनीर के साथ सर्व किया जा सकता है। चाहें तो परोसते समय ऊपर से थोड़ा गर्म घी डाल सकते हैं। इस आसान तरीके से घर पर तैयार जीरा राइस न केवल स्वादिष्ट लगेगा, बल्कि इसके लंबे और अलग-अलग दाने इसे बिल्कुल होटल स्टाइल लुक भी देंगे।

  • सावन के दूसरे सोमवार पर फलाहार में बनाएं कुरकुरी कुट्टू की पकौड़ी, आसान है इसकी रेसिपी

    सावन के दूसरे सोमवार पर फलाहार में बनाएं कुरकुरी कुट्टू की पकौड़ी, आसान है इसकी रेसिपी


    नई दिल्ली । 
    सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान आने वाले सोमवार को श्रद्धालु व्रत रखते हैं और पूरे दिन फलाहार करते हुए भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। इस साल सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ रहा है। ऐसे में व्रत रखने वाले लोगों के सामने अक्सर यह सवाल रहता है कि फलाहार में ऐसा क्या बनाया जाए जो स्वादिष्ट होने के साथ आसानी से तैयार भी हो जाए।

    व्रत के दौरान कुट्टू का आटा कई घरों में इस्तेमाल किया जाता है। इससे पूरी, चीला, पराठा और पकौड़ी जैसे कई व्यंजन बनाए जा सकते हैं। अगर सोमवार के व्रत में कुछ अलग और स्वादिष्ट खाने का मन है, तो कुट्टू के आटे से बनने वाली आलू की पकौड़ी एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

    कुट्टू की पकौड़ी बनाने के लिए मुख्य रूप से कुट्टू का आटा और आलू की जरूरत होती है। इसके साथ स्वाद के लिए सेंधा नमक, हरी मिर्च, अदरक, धनिया और काली मिर्च का इस्तेमाल किया जा सकता है। व्रत के दौरान सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का ही प्रयोग किया जाता है।

    इस रेसिपी के लिए करीब एक कटोरी कुट्टू का आटा लिया जा सकता है। इसके साथ छह आलू, एक हरी मिर्च, एक चम्मच अदरक, धनिया, काली मिर्च और सेंधा नमक की जरूरत होगी। सामग्री की मात्रा स्वाद और जरूरत के अनुसार कम या ज्यादा की जा सकती है।

    सबसे पहले आलू को उबालकर ठंडा कर लें और फिर उन्हें अच्छी तरह मैश कर लें। इसके बाद इसमें बारीक कटी हरी मिर्च, अदरक, धनिया, काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाएं। सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाने के बाद इसमें कुट्टू का आटा डालकर मिश्रण तैयार किया जा सकता है।

    कुट्टू का आटा मिलाते समय मिश्रण की स्थिरता का ध्यान रखना जरूरी है। इसे इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि पकौड़ी आसानी से आकार ले सके। जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी डालकर मिश्रण को तैयार किया जा सकता है। इसके बाद तैयार मिश्रण से छोटे-छोटे हिस्से लेकर पकौड़ी का आकार दिया जा सकता है।

    अब एक कड़ाही में तेल गर्म करें। तेल पर्याप्त गर्म होने के बाद तैयार पकौड़ियों को सावधानी से डालें और उन्हें मध्यम आंच पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक पकाएं। पकौड़ियों को बीच-बीच में पलटते रहें, ताकि वे सभी तरफ से अच्छी तरह पक जाएं।

    तैयार होने के बाद पकौड़ियों को कड़ाही से निकालकर कुछ देर के लिए अतिरिक्त तेल निकलने दें। इसके बाद इन्हें व्रत में खाई जाने वाली चटनी या दही के साथ परोसा जा सकता है। अगर आप व्रत के दौरान तेल कम इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो पकौड़ी तैयार करने की अपनी पसंदीदा कम तेल वाली विधि भी अपना सकते हैं।

    कुट्टू की पकौड़ी सावन सोमवार के फलाहार में स्वाद में बदलाव लाने का आसान तरीका है। आलू और कुट्टू के आटे से तैयार यह व्यंजन कम सामग्री में बनाया जा सकता है और परिवार के अन्य सदस्य भी इसे पसंद कर सकते हैं। हालांकि व्रत में भोजन को लेकर अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार ही सामग्री का इस्तेमाल करना उचित है।