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  • सगाई तोड़ने के फैसले के बाद फिर साथ आए पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल, बोले- अब अपने भरोसे और समझ से तय करेंगे भविष्य

    सगाई तोड़ने के फैसले के बाद फिर साथ आए पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल, बोले- अब अपने भरोसे और समझ से तय करेंगे भविष्य

    नई दिल्ली ।भारतीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ और अभिनेत्री-इन्फ्लुएंसर आकृति अग्रवाल ने अपने रिश्ते को लेकर नया फैसला किया है। सगाई तोड़ने और अलग होने की जानकारी देने के कुछ सप्ताह बाद दोनों ने फिर से साथ रहने का निर्णय लिया है। 12 अक्टूबर 2026 को दोनों ने एक साझा व्यक्तिगत स्पष्टीकरण जारी कर अपने रिश्ते में आए बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब वे अपने भविष्य से जुड़े फैसले आपसी बातचीत, समझ और भरोसे के आधार पर लेना चाहते हैं।

    पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल ने इसी साल मार्च में सगाई की थी। दोनों ने 8 मार्च को अपने रिश्ते को नया नाम देते हुए सगाई की तस्वीरें साझा की थीं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों के बीच इस रिश्ते को लेकर उत्साह देखा गया था। हालांकि, कुछ समय बाद दोनों के बीच अनबन की खबरें सामने आने लगीं। अगस्त से उनके रिश्ते में तनाव की चर्चाएं होने लगी थीं। इसके बाद 17 सितंबर 2026 को आकृति ने एक पोस्ट के जरिए अलग होने के फैसले की जानकारी दी थी।

    12 अक्टूबर को साझा किए गए स्पष्टीकरण में सगाई तोड़ने के फैसले के पीछे की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया। इसमें बताया गया कि उस समय करीबी लोगों की बातों को अधिक महत्व दिया गया और उनके सुझावों के आधार पर रिश्ता खत्म करने का निर्णय लिया गया। पोस्ट में कहा गया कि कुछ लोग उनके रिश्ते के बारे में उनसे भी अधिक जानते होने का दावा करते थे और उनके फैसलों पर उनका काफी प्रभाव था। इसी वजह से रिश्ते को लेकर गलत निर्णय लिया गया।

    साझा संदेश में इस बात पर भी जोर दिया गया कि उस समय दोनों के बीच बातचीत की कमी रही। पोस्ट के अनुसार, सगाई तोड़ने से पहले एक-दूसरे के साथ खुलकर बात करना जरूरी था। अब दोनों ने बीते घटनाक्रम पर चर्चा की है और एक-दूसरे के नजरिए को समझने की कोशिश की है। इसी बातचीत के बाद उन्होंने अपने रिश्ते को फिर से आगे बढ़ाने का फैसला किया।

    संदेश में आगे कहा गया कि सगाई तोड़ने के फैसले और उससे हुई तकलीफ की जिम्मेदारी स्वीकार की गई है। दोनों ने स्पष्ट किया कि वे एक-दूसरे के लिए पर्याप्त हैं और अपने रिश्ते को लेकर बाहरी लोगों के हस्तक्षेप पर निर्भर नहीं रहना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि आगे का जीवन किस दिशा में बढ़ेगा, इसका फैसला उनकी अपनी समझ, आपसी भरोसे और प्यार के आधार पर होगा।

    इससे पहले 17 सितंबर को आकृति अग्रवाल ने अलग होने की जानकारी देते हुए कहा था कि दोनों के भविष्य के लक्ष्य और परिस्थितियां अलग थीं। इसी कारण उन्होंने अलग होने का फैसला किया था। उस समय उनके बयान से सगाई टूटने की पुष्टि हुई थी। अब नए साझा संदेश के जरिए दोनों ने अपने फैसले में बदलाव की जानकारी दी है।

    पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल ने अपने रिश्ते को एक और अवसर देने का निर्णय लेते हुए लोगों से उनकी निजता और फैसले का सम्मान करने की अपील की है। दोनों के मुताबिक, वे अब नई शुरुआत कर रहे हैं और अपने रिश्ते का भविष्य आपसी समझ तथा विश्वास के आधार पर तय करना चाहते हैं।

  • बंगाल में TMC की अंदरूनी कलह के बीच मुस्लिम विधायक की घर वापसी, ममता के नेतृत्व में फिर जताया भरोसा

    बंगाल में TMC की अंदरूनी कलह के बीच मुस्लिम विधायक की घर वापसी, ममता के नेतृत्व में फिर जताया भरोसा

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान के बीच पार्टी को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बढ़त मिली है। उत्तर 24 परगना जिले की आमडांगा विधानसभा सीट से विधायक कासेम सिद्दीकी ने बागी गुट छोड़कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे में वापस लौटने की घोषणा की है। वापसी के बाद सिद्दीकी ने ममता बनर्जी के प्रति अपनी राजनीतिक निष्ठा दोहराते हुए कहा कि उनके लिए दीदी ही सब कुछ हैं।

    कासेम सिद्दीकी की वापसी ऐसे समय हुई है जब विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक मतभेद सामने आए हैं। पार्टी के कई विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए अलग गुट का रुख किया था। इस गुट के साथ बड़ी संख्या में विधायक जुड़े थे और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोलने की कोशिश हुई थी।

    सिद्दीकी भी कुछ समय के लिए इसी बागी गुट के साथ थे। हालांकि अब उन्होंने वहां से अलग होकर ममता बनर्जी के साथ बने रहने का फैसला किया है। उन्होंने अपने निर्णय के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि उन्हें बागी गुट के उद्देश्य को लेकर अलग जानकारी दी गई थी।

    सिद्दीकी के अनुसार, उन्हें बताया गया था कि कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं और ये दस्तावेज ममता बनर्जी तक पहुंचाए जाएंगे। उन्हें यह भी बताया गया था कि बागी गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व में ही काम करेगा। लेकिन बाद में जब उन्होंने गुट की गतिविधियों को देखा तो उन्हें वहां तृणमूल कांग्रेस प्रमुख के नेतृत्व या भूमिका का स्पष्ट उल्लेख दिखाई नहीं दिया।

    इसके बाद उन्होंने बागी गुट से अलग होने का फैसला किया। सिद्दीकी ने कहा कि उन्हें ममता बनर्जी ने टिकट दिया और उनके नेतृत्व में ही वह विधानसभा तक पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान उन्होंने ममता बनर्जी की तस्वीर के साथ लोगों के बीच जाकर समर्थन मांगा था और मतदाताओं ने भी उनके नेतृत्व को ध्यान में रखते हुए उन्हें समर्थन दिया।

    कासेम सिद्दीकी का राजनीतिक प्रभाव केवल उनके विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं माना जाता। उनका संबंध हुगली जिले के फुरफुरा शरीफ से जुड़े धार्मिक और सामाजिक प्रभाव वाले समुदाय से है। मुस्लिम समुदाय के बीच उनकी पकड़ को देखते हुए उनकी राजनीतिक स्थिति तृणमूल कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। पिछले साल पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें संगठन में राज्य महासचिव की जिम्मेदारी भी दी गई थी।

    इसके बाद विधानसभा चुनाव में उन्हें आमडांगा सीट से उम्मीदवार बनाया गया और उन्होंने जीत दर्ज की। अब उनका ममता बनर्जी के खेमे में लौटना पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

    हालांकि कासेम सिद्दीकी की वापसी के बावजूद तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। पार्टी के दोनों पक्षों के बीच संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस को लेकर भी दोनों गुटों की ओर से अलग-अलग तैयारियां की जा रही हैं।

    28 अगस्त को मेयो रोड पर गांधी प्रतिमा के पास छात्र परिषद का स्थापना दिवस मनाने को लेकर विवाद सामने आया है। दोनों पक्षों ने कार्यक्रम की अनुमति के लिए अदालत का रुख किया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला खेमे पारंपरिक स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति चाहता है।

    ऐसे समय में कासेम सिद्दीकी की वापसी को पार्टी नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी वापसी यह संकेत देती है कि बागी खेमे के भीतर भी सभी विधायक एकजुट नहीं हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी किस दिशा में जाती है और कितने अन्य नेता या विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व में वापस आते हैं।

  • पार्टी विवाद के बीच कल्याण बनर्जी का यू-टर्न, बोले- ‘बेटे से गलती हो जाए तो उसे माफ करना पिता का कर्तव्य’

    पार्टी विवाद के बीच कल्याण बनर्जी का यू-टर्न, बोले- ‘बेटे से गलती हो जाए तो उसे माफ करना पिता का कर्तव्य’


    नई दिल्ली ।
    पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress में हाल के दिनों में उभरे आंतरिक मतभेदों के बीच वरिष्ठ सांसद Kalyan Banerjee के बदले हुए तेवर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं। कुछ समय पहले तक पार्टी महासचिव Abhishek Banerjee पर तीखे आरोप लगाने वाले कल्याण बनर्जी अब उनके प्रति नरम रुख अपनाते दिखाई दिए हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि अभिषेक उनके बेटे जैसे हैं और यदि बेटे से कोई गलती हो जाए तो उसे माफ करना पिता का दायित्व होता है।

    कल्याण बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक मुद्दों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हाल के दिनों में उन्होंने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि वरिष्ठ नेताओं को अपेक्षित सम्मान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि पार्टी के भीतर अनुभव और नई पीढ़ी के नेतृत्व के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है।

    हालांकि अब उनके बयान का स्वर पहले की तुलना में काफी अलग नजर आया। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचारों में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका अर्थ व्यक्तिगत रिश्तों में कटुता नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके और अभिषेक के बीच कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है तथा पार्टी हित सर्वोपरि है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान पार्टी के भीतर बढ़ती अटकलों को शांत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है। हालिया विवादों के बाद टीएमसी के भीतर विभिन्न नेताओं के बीच मतभेदों को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही थीं। ऐसे में कल्याण बनर्जी का सार्वजनिक रूप से नरम रुख अपनाना संगठनात्मक एकजुटता का संदेश माना जा रहा है।

    इस दौरान उन्होंने पार्टी सांसद Shatabdi Roy को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कुछ राजनीतिक टिप्पणियां कीं, जो राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इसके अलावा लोकसभा में बैठने की व्यवस्था को लेकर अलग मांग उठाने वाले कुछ सांसदों पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए और उनके राजनीतिक उद्देश्यों पर संदेह व्यक्त किया।

    कल्याण बनर्जी ने यह भी कहा कि पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को जरूरत से ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि संगठन के भीतर मतभेदों को पार्टी मंच पर सुलझाया जा सकता है और सार्वजनिक विवादों से बचना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी नेतृत्व इन विषयों पर उचित समय पर निर्णय लेने में सक्षम है।

    इस बीच राज्य की राजनीति में टीएमसी के भविष्य और संगठनात्मक स्थिति को लेकर भी चर्चा जारी है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और कुछ नेताओं के इस्तीफों के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आई थीं। हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि संगठन एकजुट है और आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।

    कल्याण बनर्जी ने पार्टी के किसी अन्य दल में विलय की अटकलों को भी पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक दिशा तय करने में सक्षम है और इस तरह की चर्चाओं का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। उनके इस बयान को पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए आश्वस्त करने वाले संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार आने वाले समय में टीएमसी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक मुद्दों पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल कल्याण बनर्जी के बदले हुए रुख ने पार्टी के अंदर चल रही चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है।