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  • चारधाम यात्रा: अंतिम चरण में भी उमड़ रही भीड़.. रिकॉर्ड 60 लाख के पार पहुंची दर्शनार्थियों की संख्या

    चारधाम यात्रा: अंतिम चरण में भी उमड़ रही भीड़.. रिकॉर्ड 60 लाख के पार पहुंची दर्शनार्थियों की संख्या


    देहरादून।
    चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra 2026) अंतिम चरण में है। केदारनाथ व बदरीनाथ धाम (Kedarnath and Badrinath Dhams) में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की काफी भीड़ है। अब तक दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 60 लाख पार हो गया है। 16 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद यात्रा शीतकाल के लिए स्थगित होगी। चारधामों के शीतकालीन प्रवास स्थल से शीतकालीन यात्रा का संचालन किया जाएगा।

    19 अप्रैल को चारधाम यात्रा का आगाज हुआ था। बीते वर्ष की तुलना में इस बार मानसून सीजन में चारधाम यात्रा का संचालन निर्बाध रूप से जारी रही। पहली बार केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के अलावा हेमकुंड साहिब में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया है।

    बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया, केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी के दिशानिर्देश पर यात्रा सुचारू रूप से संचालित है। पहली बार श्रद्धालुओं के दर्शन करने का नया रिकॉर्ड बना है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने कहा कि इस वर्ष चारधाम यात्रा में 60 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या उत्तराखंड के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास को दर्शाती है। राज्य सरकार श्रद्धालुओं की सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। यात्रा मार्गों पर सड़क, स्वास्थ्य, यातायात और सुरक्षा संबंधी सुविधाओं को बेहतर बनाया जा रहा है।


    धाम – दर्शनार्थियों की संख्या

    केदारनाथ – 17,65,520
    बदरीनाथ – 20,70,500
    गंगोत्री – 8,38,422
    यमुनोत्री – 9,45,572
    हेमकुंड साहिब – 3,90,696

  • : अभिषेक शर्मा ने टी20 इंटरनेशनल में सबसे तेज 2000 रन बनाकर रचा इतिहास, सूर्यकुमार यादव का रिकॉर्ड तोड़कर हासिल की बड़ी उपलब्धि..

    : अभिषेक शर्मा ने टी20 इंटरनेशनल में सबसे तेज 2000 रन बनाकर रचा इतिहास, सूर्यकुमार यादव का रिकॉर्ड तोड़कर हासिल की बड़ी उपलब्धि..

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करते हुए इतिहास रच दिया। इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में अभिषेक ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 2,000 रन पूरे किए और इस उपलब्धि तक सबसे कम गेंदों में पहुंचने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने भारत के पूर्व टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। अभिषेक ने अपने आक्रामक अंदाज से गेंदबाजों पर दबाव बनाया और महज 18 गेंदों में अर्धशतक जड़कर अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाया।

    अभिषेक शर्मा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 2,000 रन पूरे करने के लिए केवल 1,024 गेंदों का सामना किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड सूर्यकुमार यादव के नाम था, जिन्होंने दिसंबर 2023 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गकेबरहा में 1,164 गेंदों में इस आंकड़े को हासिल किया था। इस तरह अभिषेक ने सूर्यकुमार से 140 गेंदें कम खेलकर यह उपलब्धि हासिल की। उनकी इस कामयाबी ने टी20 क्रिकेट में उनकी तेज रन बनाने की क्षमता को फिर सामने रखा। अभिषेक पहले भी अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के कारण चर्चा में रहे हैं और इस रिकॉर्ड के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत की।

    वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले में अभिषेक शुरुआत से ही आक्रामक नजर आए। उन्होंने पारी के दूसरे ओवर में रोस्टन चेज की गेंदों पर दो शानदार छक्के लगाए और कवर के ऊपर से चौका भी जड़ा। इसके बाद उन्होंने शमर स्प्रिंगर और शमर जोसेफ के खिलाफ भी बड़े शॉट लगाए। अभिषेक ने मैदान के अलग-अलग हिस्सों में रन बटोरते हुए वेस्टइंडीज के गेंदबाजों को लगातार दबाव में रखा। उनकी बल्लेबाजी में चौकों और छक्कों का अच्छा तालमेल दिखाई दिया, जिससे भारतीय टीम की रन गति तेज बनी रही।

    अभिषेक ने केवल 18 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। यह इस श्रृंखला में उनका पहला अर्धशतक था और टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का 14वां अर्धशतक भी रहा। उन्होंने अपनी पारी में शुरुआत से ही तेजी बनाए रखी और गेंदबाजों को संभलने का मौका नहीं दिया। इससे पहले श्रृंखला के शुरुआती मुकाबले में वह 21 रन बनाकर आउट हो गए थे। तीसरे मैच में उन्होंने उस प्रदर्शन को पीछे छोड़ते हुए दमदार वापसी की। उनकी बल्लेबाजी ने दर्शकों का ध्यान खींचा और भारतीय पारी को तेज शुरुआत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

    दूसरे छोर पर संजू सैमसन के जल्दी आउट होने के बाद अभिषेक को ईशान किशन का साथ मिला। दोनों बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाते हुए केवल 20 गेंदों में अर्धशतकीय साझेदारी पूरी कर ली। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के कारण वेस्टइंडीज के गेंदबाजों को लगातार अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। ईशान किशन ने भी उपयोगी योगदान दिया, लेकिन रोस्टन चेज ने उनकी पारी समाप्त कर दी। ईशान ने 37 रन बनाए। इसके बाद भी अभिषेक ने रन बनाने की गति बनाए रखी और भारतीय पारी को मजबूती दी।

    अभिषेक शर्मा की शानदार पारी का अंत दसवें ओवर में हुआ, जब शमर स्प्रिंगर ने उन्हें कैच आउट कर दिया। अभिषेक ने 30 गेंदों में 69 रन बनाए, जिसमें छह चौके और पांच छक्के शामिल थे। उनकी पारी ने भारत को मजबूत स्कोर की दिशा में आगे बढ़ाया। 2,000 रन का रिकॉर्ड और 18 गेंदों में अर्धशतक इस मुकाबले की प्रमुख उपलब्धियां रहीं। अभिषेक के प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया कि टी20 प्रारूप में तेजी से रन बनाना उनकी बल्लेबाजी की सबसे बड़ी ताकत है।

  • डीजल निर्यात पर रोक के पक्ष में ट्रंप, अमेरिका में रिकॉर्ड कीमतों के बीच फैसला; वैश्विक बाजार पर भी असर की आशंका

    डीजल निर्यात पर रोक के पक्ष में ट्रंप, अमेरिका में रिकॉर्ड कीमतों के बीच फैसला; वैश्विक बाजार पर भी असर की आशंका


    वाशिंगटन।
    अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी डीजल के निर्यात पर रोक लगाने के विचार का समर्थन किया है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका बड़ी मात्रा में डीजल का उत्पादन करता है और यदि इसका अधिक हिस्सा घरेलू बाजार में उपलब्ध कराया जाए तो ईंधन की बढ़ती कीमतों से अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी कहा है कि प्रशासन पूर्ण या आंशिक निर्यात प्रतिबंध की व्यवहार्यता का आकलन कर रहा है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

    अमेरिका में 6.52 डॉलर प्रति गैलन पहुंचा डीजल

    अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के अनुसार 22 सितंबर को अमेरिका में डीजल की राष्ट्रीय औसत खुदरा कीमत 6.5276 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई। यह अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। एक साल पहले यही कीमत 3.6880 डॉलर प्रति गैलन थी। यानी एक साल में डीजल की कीमत में करीब 77 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

    डीजल की कीमत बढ़ने का असर केवल निजी वाहनों तक सीमित नहीं है। अमेरिका में ट्रक, कृषि मशीनरी, निर्माण उपकरण और माल ढुलाई में डीजल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इसलिए ईंधन महंगा होने पर परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

    ट्रंप ने क्या कहा?

    संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पहले भी अमेरिकी डीजल को विदेश भेजने के बजाय घरेलू बाजार में रखने की बात कही है। उनके मुताबिक इससे अमेरिकी बाजार में आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है और डीजल के साथ पेट्रोल की कीमतों पर भी कुछ असर पड़ सकता है। बेसेंट ने कहा कि प्रशासन यह देख रहा है कि पूर्ण या आंशिक निर्यात रोक व्यावहारिक होगी या नहीं और इससे अमेरिकी रिफाइनरियों के संचालन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

    यह मुद्दा नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले भी महत्वपूर्ण हो गया है। कई रिपब्लिकन सांसद और चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए निर्यात प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं।

    रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व संकट का असर

    वैश्विक डीजल बाजार पहले से ही आपूर्ति दबाव का सामना कर रहा है। रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों, मध्य-पूर्व में संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की उपलब्धता प्रभावित हुई है। रॉयटर्स के अनुसार रूस, मध्य-पूर्व और प्रमुख एशियाई आपूर्तिकर्ताओं से डीजल निर्यात जुलाई में पिछले साल की तुलना में करीब 13 लाख बैरल प्रतिदिन कम रहा।

    ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ बैठक से पहले रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों से रूस को नुकसान हुआ है, लेकिन इसका असर डीजल की कीमतों पर भी पड़ रहा है।

    अमेरिका निर्यात रोकता है तो वैश्विक बाजार पर क्या असर?

    अमेरिका दुनिया के प्रमुख रिफाइंड ईंधन आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। अमेरिकी डीजल का एक बड़ा हिस्सा विदेशों में जाता है। ऐसे में यदि अमेरिका निर्यात पर पूर्ण या बड़ी आंशिक रोक लगाता है तो घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी ईंधन की कमी पैदा हो सकती है।

    इसका असर खास तौर पर यूरोप पर पड़ सकता है, जहां रूस से ऊर्जा आयात पर प्रतिबंधों के बाद अमेरिकी ईंधन की भूमिका बढ़ी है। वैश्विक बाजार पहले से ही तंग है, इसलिए अमेरिकी निर्यात घटने पर अन्य क्षेत्रों में डीजल की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है।

    हालांकि निर्यात रोकने से अमेरिकी घरेलू कीमतों में कितनी कमी आएगी, यह भी निश्चित नहीं है। रिफाइनरियां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच कीमतों के अंतर के आधार पर उत्पादन और बिक्री के फैसले लेती हैं। लंबे समय में निर्यात पर रोक का असर उत्पादन, रिफाइनिंग मार्जिन और आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

    पेट्रोल की कीमतों पर असर कितना?

    ट्रंप ने संकेत दिया है कि डीजल को घरेलू बाजार में रखने से पेट्रोल की कीमतों पर भी कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि डीजल और पेट्रोल के बाजार अलग-अलग हैं और दोनों की कीमतों पर कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनिंग क्षमता, क्षेत्रीय मांग तथा वैश्विक आपूर्ति जैसे कई कारकों का असर पड़ता है। इसलिए केवल डीजल निर्यात रोकने से पेट्रोल की कीमत कितनी घटेगी, इसका अभी कोई निश्चित अनुमान नहीं है।

    भारत पर भी पड़ सकता है अप्रत्यक्ष असर

    अमेरिकी डीजल निर्यात पर रोक का भारत पर सीधा असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इससे वैश्विक ईंधन बाजार में आपूर्ति कितनी प्रभावित होती है। यदि अमेरिकी निर्यात में बड़ी कमी आती है और अन्य उत्पादक इसकी भरपाई नहीं कर पाते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय डीजल और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आयात बिल और परिवहन लागत पर असर पड़ सकता है। हालांकि भारत पर वास्तविक प्रभाव कच्चे तेल की कीमत, रुपये की विनिमय दर, घरेलू ईंधन मूल्य नीति और दुनिया भर में उपलब्ध वैकल्पिक आपूर्ति पर निर्भर करेगा।

    फिलहाल अंतिम फैसला नहीं

    ट्रंप के समर्थन के बावजूद अमेरिकी प्रशासन ने डीजल निर्यात पर रोक लगाने का अंतिम फैसला नहीं किया है। सरकार पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध के संभावित लाभ और अमेरिकी रिफाइनिंग उद्योग तथा वैश्विक ईंधन बाजार पर उसके प्रभाव का आकलन कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन का फैसला अमेरिका के साथ-साथ वैश्विक डीजल बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा।

  • टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 29 साल से कायम है श्रीलंका का 952 रनों का ऐतिहासिक और अटूट ऑल-टाइम रिकॉर्ड।

    टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 29 साल से कायम है श्रीलंका का 952 रनों का ऐतिहासिक और अटूट ऑल-टाइम रिकॉर्ड।

    नई दिल्ली ।टी20 क्रिकेट के आधुनिक दौर में बल्लेबाजी के तौर-तरीकों और रन बनाने की गति में व्यापक परिवर्तन आया है। पावर हिटिंग, उन्नत फिटनेस और नई रणनीतियों के कारण खेल का स्वरूप काफी आक्रामक हो चुका है। इसके बावजूद टेस्ट क्रिकेट के लंबे इतिहास में एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है, जिसे लगभग तीन दशकों के बीत जाने के बाद भी कोई देश पार नहीं कर सका है। वर्ष 1997 में श्रीलंका की राष्ट्रीय टीम द्वारा भारत के विरुद्ध कोलंबो में बनाया गया 952 रनों का ऐतिहासिक स्कोर आज भी सर्वोच्च बना हुआ है।

    कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में आयोजित उस ऐतिहासिक टेस्ट मुकाबले में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में 537 रनों का विशाल स्कोर बनाकर पारी घोषित की थी। भारत की ओर से कप्तान सचिन तेंदुलकर, मोहम्मद अजहरुद्दीन और नवजोत सिंह सिद्धू ने शानदार शतकीय पारियां खेली थीं। उस दौर में 500 से अधिक रनों का स्कोर मैच में बेहद मजबूत स्थिति माना जाता था, किंतु इसके जवाब में उतरी श्रीलंकाई टीम ने ऐसी बल्लेबाजी की जिसने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास के पन्नों को पूरी तरह से बदलकर रख दिया।

    श्रीलंका की पहली पारी में सलामी बल्लेबाज सनत जयसूर्या ने 340 रनों की मैराथन पारी खेली, जबकि रोशन महानामा ने 225 रनों का योगदान दिया। इन दोनों दिग्गजों ने दूसरे विकेट के लिए 576 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी निभाई, जो आज भी टेस्ट इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी मानी जाती है। इसके अतिरिक्त मध्यक्रम के प्रमुख बल्लेबाज अरविंद डी सिल्वा ने भी 126 रन बनाए। श्रीलंकाई टीम ने 271 ओवरों की लंबी बल्लेबाजी के बाद 6 विकेट पर 952 रन बनाकर अपनी पारी घोषित की थी।

    क्रिकेट आंकड़ों के दृष्टिकोण से श्रीलंका का यह स्कोर टेस्ट इतिहास का सबसे बड़ा टीम स्कोर है। इस सूची में इंग्लैंड द्वारा बनाया गया 903/7 का स्कोर दूसरे स्थान पर आता है, जबकि हाल के वर्षों में इंग्लैंड ने पाकिस्तान के खिलाफ 823/7 का स्कोर बनाकर इस आंकड़े के समीप पहुंचने का प्रयास अवश्य किया था। हालांकि 952 रनों की यह ऐतिहासिक उपलब्धि पिछले 29 वर्षों से एवरेस्ट की भांति अडिग खड़ी है।

    वर्तमान टी20 युग में यह प्रश्न बार-बार उठता है कि क्या आधुनिक टेस्ट क्रिकेट में कोई टीम 1000 रनों के तिलिस्म को तोड़ सकती है। खेल विशेषज्ञों के अनुसार, 1000 रन के आंकड़े को छूने के लिए केवल तेज गति से रन बनाना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए अत्यंत सपाट पिच, दो से तीन बड़ी और लंबी साझेदारियों तथा विपक्षी गेंदबाजों के पूरी तरह प्रभावहीन रहने की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही टीम के कप्तान को व्यक्तिगत या टीम रिकॉर्ड तथा मैच के परिणाम के बीच संतुलन बनाना होगा। मध्य प्रदेश सहित देश भर के खेल प्रेमी इस रिकॉर्ड के महत्व को भली-भांति समझते हैं।

    अधिकांश अवसरों पर टेस्ट मैच जीतने के लिए कप्तानों को समय रहते पारी घोषित करनी पड़ती है, ताकि विपक्षी टीम के 20 विकेट निकाले जा सकें। ऐसे में केवल रिकॉर्ड बनाने के उद्देश्य से बल्लेबाजी जारी रखना मैच के नतीजे को जोखिम में डाल सकता है। श्रीलंका ने 1997 में यह दर्शाया था कि टेस्ट क्रिकेट में धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी की क्या सीमाएं हो सकती हैं। आज के आक्रामक दौर में भी 952 रनों की यह क्रिकेटीय दीवार पूरी मजबूती से खड़ी है।

  • टी20 क्रिकेट में जोस बटलर ने रचा नया इतिहास, वेस्टइंडीज के कीरोन पोलार्ड का महारिकॉर्ड किया ध्वस्त

    टी20 क्रिकेट में जोस बटलर ने रचा नया इतिहास, वेस्टइंडीज के कीरोन पोलार्ड का महारिकॉर्ड किया ध्वस्त

    नई दिल्ली । इंग्लैंड के अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज जोस बटलर ने टी20 क्रिकेट में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। उन्होंने अपने खेल के इस प्रारूप में सर्वाधिक रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करने के क्रम में उन्होंने वेस्टइंडीज के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर कीरोन पोलार्ड के लंबे समय से चले आ रहे रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। बटलर की इस उपलब्धि से दुनिया भर के क्रिकेट जगत में उनके खेल कौशल की सराहना हो रही है।

    अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी शैली के लिए मशहूर बटलर ने मैच की शुरुआत से ही गेंदबाजों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने एक ताबड़तोड़ अर्धशतकीय पारी खेलकर अपनी टीम को न केवल एक आसान और महत्वपूर्ण जीत दिलाई, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी एक बड़ा मुकाम हासिल किया। उनकी इस मैच जिताऊ पारी की बदौलत टीम ने अंक तालिका में अपनी स्थिति को काफी मजबूत कर लिया है और लगातार मिल रही हार के सिलसिले पर भी विराम लगा दिया है।

    इस रिकॉर्ड को अपने नाम करने के बाद इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे कीर्तिमान हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के लिए गर्व की बात होती है। बटलर ने खेल भावना का परिचय देते हुए यह भी कहा कि रिकॉर्ड बनते ही टूटने के लिए हैं और आने वाले समय में नई पीढ़ी के युवा खिलाड़ी इससे भी बड़े मुकाम तय करेंगे। उनके इस सकारात्मक रुख की खेल प्रेमियों ने काफी सराहना की।

    यह ऐतिहासिक उपलब्धि बटलर के लिए इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ समय से वह अपनी खराब फॉर्म को लेकर आलोचकों के निशाने पर थे। लगातार असफलताओं के बाद भी उन्होंने अपनी मेहनत और तकनीक पर काम करना जारी रखा। कठिन दौर से गुजरने के बाद की गई यह धमाकेदार वापसी उनके आत्मविश्वास और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

    हालांकि टी20 क्रिकेट के इस शीर्ष स्थान के लिए आने वाले समय में मुकाबला और दिलचस्प होने की उम्मीद है। कीरोन पोलार्ड अभी भी विभिन्न वैश्विक लीगों में सक्रिय हैं और उनके पास वापसी का मौका रहेगा। इसके अलावा एलेक्स हेल्स, डेविड वॉर्नर और विराट कोहली जैसे दिग्गज बल्लेबाज भी इस रेस में ज्यादा पीछे न

  • जामनगर के बाल हनुमान मंदिर में 60 वर्षों से अविरल जारी है राम नाम का अखंड जाप, गिनीज बुक में दर्ज हुआ नाम

    जामनगर के बाल हनुमान मंदिर में 60 वर्षों से अविरल जारी है राम नाम का अखंड जाप, गिनीज बुक में दर्ज हुआ नाम

    नई दिल्ली । भारतीय अध्यात्म और सांस्कृतिक धरोहर की दुनिया में गुजरात का जामनगर शहर एक अनूठी आस्था का केंद्र बना हुआ है। शहर की प्रसिद्ध लखोटा झील के समीप स्थित श्री बाल हनुमान संकीर्तन मंदिर अपने आप में एक अद्भुत और ऐतिहासिक रिकॉर्ड समेटे हुए है। इस पावन धाम में पिछले छह दशकों से बिना एक सेकंड रुके भगवान श्री राम का संकीर्तन निरंतर जारी है, जिसे देखने और सुनने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु खींचे चले आते हैं।

    मंदिर में अखंड जाप की यह पावन परंपरा 1 अगस्त 1964 को शुरू की गई थी। तब से लेकर आज तक, दिन हो या रात, श्री राम, जय राम, जय जय राम की रामधुन निरंतर गूंज रही है। इस संकीर्तन को निर्बाध रूप से चलाने के लिए साधक, पुजारी और श्रद्धालु बारी-बारी से बैठते हैं, जिससे जाप की गति एक क्षण के लिए भी धीमी या बंद नहीं होती। चौबीसों घंटे चलने वाले इस सबसे लंबे अखंड कीर्तन के कारण मंदिर का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया जा चुका है।

    इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अनुष्ठान की नींव महान संत श्री प्रेमभिक्षुजी महाराज ने रखी थी। उन्होंने समाज में आध्यात्मिक चेतना और ईश्वर भक्ति के विस्तार के लिए इस निरंतर संकीर्तन की शुरुआत की थी। स्थानीय निवासियों का यह अटूट विश्वास है कि इस मंदिर में गूंजने वाले राम नाम के महामंत्र और दिव्य वातावरण के प्रभाव से ही जामनगर शहर हमेशा बड़ी प्राकृतिक आपदाओं और संकटों से सुरक्षित रहता है।

    संत प्रेमभिक्षुजी महाराज द्वारा शुरू की गई यह पावन परंपरा केवल जामनगर तक ही सीमित नहीं रही। उनकी प्रेरणा से गुजरात के द्वारका, राजकोट, पोरबंदर, जूनागढ़ और महुवा के साथ-साथ बिहार के मुजफ्फरपुर में भी इसी तरह के मंदिरों की स्थापना की गई, जहां 24 घंटे अखंड रामधुन का गायन होता है। देश के 40 से अधिक छोटे-बड़े शहरों में रोजाना विशेष संकीर्तन सभाओं का आयोजन किया जाता है।

    मध्य प्रदेश और देश के विभिन्न प्रांतों से आने वाले श्रद्धालु इस मंदिर में पहुंचकर अद्भुत मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए दिन-रात खुले रहते हैं, जिससे दूर-दराज से आने वाले भक्त किसी भी समय रात्रि में रुककर संकीर्तन का हिस्सा बन सकते हैं। रामनवमी, हनुमान जयंती और विजयदशमी जैसे बड़े पर्वों पर यहां आस्था का भारी सैलाब उमड़ता है।

  • हरारे में वैभव सूर्यवंशी का धमाका, 20 रन की तूफानी पारी से तोड़ा महेला जयवर्धने का रिकॉर्ड

    हरारे में वैभव सूर्यवंशी का धमाका, 20 रन की तूफानी पारी से तोड़ा महेला जयवर्धने का रिकॉर्ड


    नई दिल्ली।
    भारतीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भले ही बड़ी पारी नहीं खेली, लेकिन अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से रिकॉर्ड बुक में जगह बना ली। महज 9 गेंदों में 20 रन की तेजतर्रार पारी खेलकर उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआती पांच पारियों में सर्वाधिक स्ट्राइक रेट से रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरा स्थान हासिल कर लिया।

    9 गेंदों में 20 रन, गेंदबाजों पर बोला हमला

    वैभव ने क्रीज पर उतरते ही आक्रामक तेवर दिखाए। उन्होंने 9 गेंदों का सामना करते हुए 3 चौके और 1 छक्का लगाया तथा 222.22 की स्ट्राइक रेट से 20 रन बनाए। हालांकि, बड़ी पारी की ओर बढ़ते हुए पुल शॉट खेलने के प्रयास में वह बाउंड्री पर कैच आउट हो गए, लेकिन उनकी छोटी पारी भी रिकॉर्ड बनाने के लिए काफी साबित हुई।

    महेला जयवर्धने को छोड़ा पीछे

    इस पारी के बाद वैभव सूर्यवंशी ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआती पांच पारियों में सर्वाधिक स्ट्राइक रेट के मामले में श्रीलंका के पूर्व कप्तान महेला जयवर्धने को पीछे छोड़ दिया। वैभव ने अपने पहले पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 112 रन 211.32 की स्ट्राइक रेट से बनाए हैं, जिसमें एक अर्धशतक भी शामिल है। वहीं, महेला जयवर्धने ने अपने शुरुआती पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 201.82 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए थे।

    युवराज सिंह अब भी नंबर-1

    इस खास सूची में भारत के पूर्व स्टार ऑलराउंडर युवराज सिंह अब भी शीर्ष पर बने हुए हैं। युवराज ने अपने शुरुआती पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 235.09 की शानदार स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की थी। अब तक कोई भी बल्लेबाज उनके इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ सका है।

    सबसे अधिक स्ट्राइक रेट (पहली 5 टी20 अंतरराष्ट्रीय पारियां):

    • युवराज सिंह (भारत) – 235.09
    • वैभव सूर्यवंशी (भारत) – 211.32
    • महेला जयवर्धने (श्रीलंका) – 201.82
    • मोहम्मद अशरफुल (बांग्लादेश) – 201.67
    • रिचर्ड लेवी (दक्षिण अफ्रीका) – 200.00

    निडर बल्लेबाजी से बढ़ा भरोसा

    कम उम्र में वैभव सूर्यवंशी का बेखौफ अंदाज भारतीय क्रिकेट के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है। वह पहली ही गेंद से बड़े शॉट खेलने में विश्वास रखते हैं और विपक्षी गेंदबाजी आक्रमण पर दबाव बनाने की क्षमता रखते हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 में उनकी पारी भले ही लंबी नहीं चली, लेकिन उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और लगातार ऊंची स्ट्राइक रेट यह संकेत देती है कि आने वाले समय में वह भारतीय टी20 टीम के अहम मैच विजेता खिलाड़ियों में शामिल हो सकते हैं।

  • ऑस्ट्रिया पर जीत के साथ मेसी ने रचा इतिहास वर्ल्ड कप के सर्वाधिक गोल का नया कीर्तिमान

    ऑस्ट्रिया पर जीत के साथ मेसी ने रचा इतिहास वर्ल्ड कप के सर्वाधिक गोल का नया कीर्तिमान


    नई दिल्ली। डलास में खेले गए फीफा वर्ल्ड कप मुकाबले में अर्जेंटीना ने ऑस्ट्रिया को 2 0 से हराकर नॉकआउट चरण में अपनी जगह पक्की कर ली। इस मुकाबले में सबसे बड़ा आकर्षण लियोनेल मेसी रहे जिन्होंने दो गोल करके इतिहास रच दिया। इसी प्रदर्शन के साथ Lionel Messi ने वर्ल्ड कप इतिहास में सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

    मैच की शुरुआत में अर्जेंटीना को पेनल्टी का मौका मिला। लॉटारो मार्टिनेज को बॉक्स के अंदर फाउल किया गया था। पूरे स्टेडियम में उम्मीद थी कि मेसी इस मौके को गोल में बदल देंगे लेकिन उनकी किक गोल पोस्ट से बाहर चली गई। इस चूक के बाद कुछ पल के लिए मैच का माहौल बदल गया और ऑस्ट्रिया की टीम को राहत मिली।

    हालांकि मेसी का खेल यहां से और खतरनाक हो गया। उन्होंने पहले हाफ के अंत से ठीक पहले गेंद को बॉक्स के किनारे लिया और शानदार नियंत्रण के साथ गोलकीपर के ऊपर से गेंद को नेट में पहुंचा दिया। यह गोल न केवल खूबसूरत था बल्कि ऐतिहासिक भी था क्योंकि इसी के साथ उन्होंने वर्ल्ड कप में सर्वाधिक गोल का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

    इस मैच में अर्जेंटीना की टीम ने मजबूत संतुलन दिखाया। मिडफील्ड में लगातार पासिंग और तेज मूवमेंट से टीम ने ऑस्ट्रिया पर दबाव बनाए रखा। ऑस्ट्रिया ने भी कुछ आक्रामक प्रयास किए लेकिन अर्जेंटीना के डिफेंस और गोलकीपर ने उन्हें सफल नहीं होने दिया।

    दूसरे हाफ में ऑस्ट्रिया ने वापसी की कोशिश की। फ्री किक और तेज काउंटर अटैक से उन्होंने अर्जेंटीना की रक्षा को चुनौती दी। लेकिन कप्तान मेसी लगातार टीम को आगे बढ़ाते रहे और मैच पर पकड़ बनाए रखी।

    स्टॉपेज टाइम में मेसी ने अपना दूसरा गोल भी दाग दिया। इस बार उन्होंने राइट साइड से अंदर की ओर ड्रिबल करते हुए गेंद को गोल की ओर भेजा। पहले शॉट को उनके साथी खिलाड़ी जूलियन अल्वारेज पूरा नहीं कर सके लेकिन गेंद रिबाउंड हुई और मेसी ने तुरंत मौके का फायदा उठाकर उसे नेट में डाल दिया। यह उनका इस टूर्नामेंट में दूसरा गोल था और कुल मिलाकर वर्ल्ड कप में 18वां गोल भी बन गया।

    मैच खत्म होते ही स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने मेसी के नाम के नारे लगाए। अर्जेंटीना की यह लगातार दूसरी जीत थी जिससे टीम ने बिना किसी हार के नॉकआउट में प्रवेश किया। इस प्रदर्शन के बाद टीम को टूर्नामेंट की सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल माना जा रहा है।

    अर्जेंटीना अब अपना अगला ग्रुप मैच 27 जून को जॉर्डन के खिलाफ खेलेगा। टीम का लक्ष्य लगातार जीत के साथ आगे बढ़ते हुए खिताब बचाने का है।

  • धर्मशाला वनडे: शुभमन गिल संग तालमेल में भारी चूक, रन आउट होकर गुस्से में पवेलियन लौटे रोहित शर्मा, तोड़ा 37 साल पुराना रिकॉर्ड

    धर्मशाला वनडे: शुभमन गिल संग तालमेल में भारी चूक, रन आउट होकर गुस्से में पवेलियन लौटे रोहित शर्मा, तोड़ा 37 साल पुराना रिकॉर्ड

    नई दिल्ली। भारत और अफगानिस्तान के बीच धर्मशाला के सुरम्य मैदान पर खेले गए पहले वनडे मुकाबले में एक ऐसा नाटकीय मोड़ देखने को मिला, जिसने मैदान पर मौजूद दर्शकों के साथ-साथ करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर दिया। शानदार बल्लेबाजी कर रहे अनुभवी सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा अपने जोड़ीदार और कप्तान शुभमन गिल के साथ रन लेने के दौरान हुई एक बड़ी गलतफहमी का शिकार हो गए। इस तालमेल की कमी के कारण ‘हिटमैन’ को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट होकर क्रीज छोड़नी पड़ी, जिसके बाद वे मैदान से बाहर जाते समय अपने गुस्से और निराशा को छुपा नहीं सके।

    बारिश के खलल के कारण इस मुकाबले को अंपायरों द्वारा 25-25 ओवर का कर दिया गया था, जहां भारतीय टीम को जीत के लिए 195 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य मिला था। इस कठिन लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय सलामी जोड़ी ने टीम को एक बेहद सधी हुई और आक्रामक शुरुआत दिलाई। रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने अफगानी गेंदबाजों पर शुरुआत से ही दबाव बनाते हुए पहले विकेट के लिए महज 46 रन जोड़ दिए थे। दोनों ही खिलाड़ी बिना किसी जोखिम के आसानी से रन चुरा रहे थे और बाउंड्री बटोर रहे थे, जिससे भारतीय पारी बेहद मजबूत स्थिति की तरफ बढ़ रही थी।

    यह पूरा वाकया भारतीय पारी के छठे ओवर के दौरान घटित हुआ, जब अफगानिस्तान के युवा मिस्ट्री स्पिनर अल्लाह गजनफर गेंदबाजी मोर्चे पर तैनात थे। रोहित शर्मा ने उनकी एक गेंद को हल्के हाथों से मिडविकेट की दिशा में ढकेला और एक त्वरित सिंगल चुराने के लिए तेजी से दौड़ पड़े। उनके जोड़ीदार शुभमन गिल ने भी शुरुआत में इस रन के लिए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और अपने कदम आगे बढ़ाए, लेकिन फील्डर की फुर्ती को देखते हुए गिल ने अचानक अपना मन बदल लिया और बीच रास्ते से ही रोहित को वापस लौटने की ‘ना’ कह दी।

    शुभमन गिल का यह फैसला रोहित के लिए काफी देर से आया क्योंकि तब तक वे क्रीज से बहुत आगे निकल चुके थे और उनके लिए वापस मुड़ना लगभग असंभव था। इसके बावजूद रोहित शर्मा ने डाइव लगाकर क्रीज में सुरक्षित लौटने का पूरा प्रयास किया, लेकिन अफगानिस्तान के स्टार स्पिनर राशिद खान ने बिना कोई गलती किए बेहद फुर्ती से गेंद को विकेटकीपर की तरफ थ्रो किया, जिन्होंने तुरंत गिल्लियां बिखेर दीं। यह रन आउट इतना साफ था कि थर्ड अंपायर द्वारा रिप्ले देखे जाने की औपचारिकता पूरी होने से पहले ही रोहित शर्मा बेहद गुस्से और झुंझलाहट में पवेलियन की तरफ चल दिए।

    रोहित शर्मा भले ही केवल 16 रन बनाकर आउट हो गए और एक बड़ी पारी खेलने से चूक गए, लेकिन इस संक्षिप्त उपस्थिति के दौरान भी उन्होंने भारतीय क्रिकेट इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा लिया। 39 साल और 44 दिन की उम्र में इस मुकाबले में उतरते ही वे भारत के लिए वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए। इसके साथ ही उन्होंने साल 1983 की विश्व विजेता टीम के महान सदस्य मोहिंदर अमरनाथ का करीब 37 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया, जिन्होंने 1989 में 39 साल और 36 दिन की उम्र में अपना आखिरी वनडे खेला था।

    इसके अतिरिक्त रोहित शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बतौर ओपनर खेलते हुए अपने 16000 रन भी पूरे कर लिए और ऐसा करने वाले वे देश के पहले सलामी बल्लेबाज बन गए हैं। हालांकि भारतीय टीम ने कप्तान शुभमन गिल की शानदार कप्तानी पारी की बदौलत इस मुकाबले को सात विकेट से अपने नाम कर लिया और सीरीज में बढ़त बना ली, लेकिन रोहित का यह रन आउट क्रिकेट पंडितों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बना रहा। अब भारतीय टीम के पूर्व कप्तान लखनऊ में होने वाले अगले वनडे मुकाबले में अपनी इस निराशा को भुलाकर एक धाकड़ पारी खेलने के इरादे से मैदान पर उतरेंगे।

  • 'अगर सचिन क्रिकेट के भगवान हैं, तो वैभव हो सकते हैं भगवान का बेटा': पूर्व मुख्य चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत का बड़ा बयान, टीम मैनेजमेंट को दी खास सलाह

    'अगर सचिन क्रिकेट के भगवान हैं, तो वैभव हो सकते हैं भगवान का बेटा': पूर्व मुख्य चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत का बड़ा बयान, टीम मैनेजमेंट को दी खास सलाह

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है, जहां मात्र 15 वर्ष की आयु में एक युवा बल्लेबाज ने अपनी असाधारण प्रतिभा के दम पर सीनियर राष्ट्रीय टीम का दरवाजा खटखटाया है। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 में अपने बल्ले से रनों का अंबार लगाने वाले युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी को चयनकर्ताओं ने आगामी आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए घोषित भारतीय टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में शामिल कर लिया है। इस चयन के साथ ही वैभव के पास मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का दशकों पुराना ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ने का एक बेहद सुनहरा अवसर आ गया है।

    यदि वैभव सूर्यवंशी को आगामी दौरों पर किसी भी मुकाबले में भारत की ओर से खेलने का अवसर प्राप्त होता है, तो वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन जाएंगे। इस अभूतपूर्व प्रतिभा को लेकर भारतीय क्रिकेट जगत में भारी उत्साह देखा जा रहा है। पूर्व भारतीय कप्तान और राष्ट्रीय चयन समिति के पूर्व मुख्य चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत ने वैभव की जमकर सराहना की है। उन्होंने अपने आधिकारिक डिजिटल मंच पर बयान देते हुए यहां तक कह दिया कि यदि सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का भगवान माना जाता है, तो वैभव सूर्यवंशी में क्रिकेट के भगवान का बेटा बनने की पूरी क्षमता दिखाई देती है।

    पूर्व मुख्य चयनकर्ता श्रीकांत ने हालांकि टीम प्रबंधन को एक बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी सलाह भी दी है। उनका मानना है कि इस युवा खिलाड़ी के चयन में उम्र कोई बाधा नहीं है क्योंकि उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन और रनों के आधार पर टीम में जगह बनाई है। इसके बावजूद, टीम मैनेजमेंट को उन्हें अंतिम एकादश (प्लेइंग XI) में शामिल करने की जल्दबाजी से बचना चाहिए। श्रीकांत के अनुसार, वैभव को आगामी तीन वर्षों के लिए 16 सदस्यीय मुख्य टीम में स्थान की गारंटी दी जानी चाहिए, ताकि वे बिना किसी मानसिक दबाव के वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ रहकर खेल की बारीकियों को सीख सकें और खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए पूरी तरह परिपक्व कर सकें।

    क्रिकेट समीक्षकों के अनुसार, वैभव का यह फास्ट्रैक चयन उनके आईपीएल 2026 के अविश्वसनीय प्रदर्शन का परिणाम है, जहां उन्होंने पूरे सीजन में कुल 776 रन बनाकर प्रतिष्ठित ‘ऑरेंज कैप’ पर अपना अधिकार जमाया था। अपने करियर के दूसरे ही सीजन में यह कीर्तिमान रचने वाले वे दुनिया के सबसे युवा बल्लेबाज बने। इतना ही नहीं, इस 15 वर्षीय खब्बू बल्लेबाज ने एक ही आईपीएल सीजन में कुल 72 गगनचुंबी छक्के जड़कर वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज क्रिस गेल के बरसों पुराने ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी नेस्तनाबूद कर दिया था, जिसने चयनकर्ताओं को उन्हें सीनियर टीम में शामिल करने के लिए मजबूर किया।

    भारतीय टीम का आगामी आयरलैंड दौरा 26 जून से आधिकारिक तौर पर शुरू होने जा रहा है, जिसके तुरंत बाद टीम को इंग्लैंड के खिलाफ भी सीमित ओवरों की श्रृंखला खेलनी है। इसके अतिरिक्त, चयनकर्ताओं ने दूरगामी सोच का परिचय देते हुए वैभव सूर्यवंशी को आगामी एशियन गेम्स के लिए घोषित भारतीय क्रिकेट दल में भी स्थान दिया है। वर्तमान में शीर्ष क्रम में संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा जैसे आक्रामक सलामी बल्लेबाजों की मौजूदगी के बीच, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि भारतीय टीम प्रबंधन इस युवा खिलाड़ी को कब और किस तरह अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदार्पण करने का ऐतिहासिक अवसर प्रदान करता है।