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  • चीनी की बढ़ती कीमतों पर विशेषज्ञों ने साफ किया रुख, एथेनॉल डायवर्जन नहीं बल्कि गन्ने की कमी और कम रिकवरी जिम्मेदार

    चीनी की बढ़ती कीमतों पर विशेषज्ञों ने साफ किया रुख, एथेनॉल डायवर्जन नहीं बल्कि गन्ने की कमी और कम रिकवरी जिम्मेदार

    नई दिल्ली । देश में चीनी की कीमतों में हालिया तेजी को लेकर एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी डायवर्जन को जिम्मेदार ठहराए जाने के बीच कृषि और चीनी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने अलग तस्वीर पेश की है। विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा तेजी की मुख्य वजह एथेनॉल उत्पादन नहीं, बल्कि गन्ने के उत्पादन, गुणवत्ता और चीनी रिकवरी में आई कमी है। उनका कहना है कि सरकार चीनी की घरेलू जरूरत, एथेनॉल उत्पादन और निर्यात के बीच लगातार संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती है।

    नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट, कानपुर के पूर्व निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन के अनुसार देश में हर वर्ष घरेलू खपत के लिए करीब 280 लाख टन चीनी की आवश्यकता होती है। इसके बाद उपलब्ध अतिरिक्त मात्रा में से ही एथेनॉल उत्पादन या निर्यात के लिए चीनी के इस्तेमाल की अनुमति दी जाती है। चालू वर्ष में करीब 31 लाख टन चीनी के बराबर मात्रा एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल की गई, जबकि लगभग सात लाख टन चीनी का निर्यात हुआ है।

    विशेषज्ञ के मुताबिक चालू वर्ष में देश का चीनी उत्पादन लगभग 306 लाख टन रहा है और इसके साथ पिछले वर्ष का कैरी-ओवर स्टॉक भी उपलब्ध था। सामान्य परिस्थितियों में देश में पर्याप्त बफर स्टॉक रखा जाता है, ताकि उत्पादन या आपूर्ति में अचानक कमी आने की स्थिति में घरेलू बाजार प्रभावित न हो। इसलिए केवल एथेनॉल के लिए चीनी डायवर्जन को मौजूदा कीमत वृद्धि का सीधा कारण मानना उचित नहीं है।

    प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने एथेनॉल को चीनी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण बदलाव वाला क्षेत्र बताया। पहले जब देश में चीनी का उत्पादन घरेलू मांग से काफी अधिक हो जाता था, तब अतिरिक्त चीनी की वजह से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ता था। इससे चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती थी और किसानों को गन्ने का भुगतान मिलने में भी परेशानी पैदा होती थी। निर्यात एक विकल्प जरूर था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों और प्रतिस्पर्धा के कारण यह हमेशा लाभदायक नहीं रहता था।

    ऐसी परिस्थितियों में अतिरिक्त चीनी को एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करने की नीति ने उद्योग को एक वैकल्पिक बाजार दिया। इससे चीनी की अधिकता को नियंत्रित करने के साथ ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिला और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिली। विशेषज्ञों के अनुसार सरकार उत्पादन के अनुमान और घरेलू जरूरतों को देखते हुए समय-समय पर एथेनॉल डायवर्जन तथा चीनी निर्यात से जुड़े फैसले ले सकती है।

    बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के गन्ना शोध विभाग के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरिओम ने मौजूदा स्थिति में गुणवत्तापूर्ण गन्ने के उत्पादन और चीनी रिकवरी को महत्वपूर्ण कारक बताया। उनके अनुसार उत्तर भारत में इस समय गन्ना पेराई का अपेक्षाकृत कमजोर दौर चल रहा है। मुख्य पेराई सीजन शुरू होने के बाद बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ने की संभावना है, जिससे कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

    गन्ने की फसल अवधि और रिकवरी में राज्यों के बीच अंतर भी चीनी उत्पादन को प्रभावित करता है। उत्तर भारत में किसान सामान्यतः करीब 10 से 11 महीने में तैयार होने वाली फसल लेते हैं, जबकि महाराष्ट्र में गन्ना लगभग 13 से 14 महीने और तमिलनाडु में कुछ परिस्थितियों में 18 महीने तक खेत में रहता है। लंबी अवधि से गन्ने में चीनी संचय और रिकवरी बेहतर हो सकती है।

    डॉ. हरिओम के अनुसार उत्तर भारत में किसान धान की कटाई के बाद अक्टूबर-नवंबर में गन्ने की खेती शुरू करने के साथ गेहूं, सरसों, मसूर, चना और सब्जियों जैसी अंतरवर्ती फसलों का विकल्प अपना सकते हैं। इससे अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ सकते हैं और गन्ने की खेती की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार की संभावना बन सकती है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी की कीमतों को समझने के लिए केवल एथेनॉल डायवर्जन पर ध्यान देने के बजाय गन्ने के उत्पादन, रिकवरी, पेराई चक्र और बाजार में उपलब्ध स्टॉक को भी समान रूप से देखना जरूरी है।

  • डॉक्टर की चेतावनी, परिवार से छुपाया सच और फिर नई शुरुआत, राम कपूर ने सुनाई संघर्ष से वापसी की कहानी

    डॉक्टर की चेतावनी, परिवार से छुपाया सच और फिर नई शुरुआत, राम कपूर ने सुनाई संघर्ष से वापसी की कहानी

    नई दिल्ली ।लोकप्रिय अभिनेता राम कपूर ने रियलिटी शो ‘लॉक अप 2’ में अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने सभी को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि करियर के शिखर पर पहुंचने के बावजूद वह मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन दौर से गुजर रहे थे। अभिनेता ने स्वीकार किया कि एक समय उनकी सेहत इतनी खराब हो गई थी कि डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर परिणामों की चेतावनी दी थी। सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने इस स्थिति की जानकारी अपनी पत्नी गौतमी कपूर और परिवार के अन्य सदस्यों से भी लंबे समय तक छुपाकर रखी।

    राम कपूर ने कहा कि जिस समय उन्हें टीवी धारावाहिक ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ से व्यापक लोकप्रियता मिल रही थी, उसी दौरान उनका निजी जीवन कई चुनौतियों से घिरा हुआ था। बाहर से सब कुछ सामान्य और सफल दिखाई देता था, लेकिन भीतर वह लगातार मानसिक तनाव और अवसाद का सामना कर रहे थे। उन्होंने बताया कि लगातार काम का दबाव, अनियमित दिनचर्या और अपनी सेहत की अनदेखी ने उनकी स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया।

    अभिनेता ने बताया कि समय के साथ उनका वजन लगातार बढ़ता गया और जीवनशैली पूरी तरह असंतुलित हो गई। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौर में उन्होंने अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं दी। जब चिकित्सकीय जांच कराई गई तो डॉक्टरों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उन्होंने तुरंत अपनी आदतों में सुधार नहीं किया, तो आने वाले समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनका ब्लड शुगर स्तर कई बार सामान्य सीमा से काफी ऊपर पहुंच जाता था, जिससे जोखिम लगातार बढ़ रहा था।

    राम कपूर ने अपने व्यवहार को याद करते हुए आत्मस्वीकृति भी जताई। उन्होंने कहा कि सफलता और व्यस्तता के बीच वह खुद को खो बैठे थे। उन्होंने माना कि वह शूटिंग पर समय से नहीं पहुंचते थे, कई बार अनुशासन का पालन नहीं करते थे और सहकर्मियों के साथ भी उनका व्यवहार पहले जैसा नहीं रह गया था। उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय की अपनी गलतियों को याद करके आज भी उन्हें अफसोस होता है और वह उस दौर को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी सीख मानते हैं।

    उन्होंने यह भी बताया कि अपनी मानसिक और शारीरिक परेशानियों के बारे में उन्होंने परिवार को पूरी सच्चाई नहीं बताई थी। उनका मानना था कि इससे उनके अपने लोग अनावश्यक रूप से चिंतित हो जाएंगे। हालांकि समय के साथ उन्हें यह एहसास हुआ कि मुश्किल परिस्थितियों में परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने कहा कि उनके बच्चों ने उन्हें जीवन को नए नजरिए से देखने की प्रेरणा दी और आगे बढ़ने का हौसला दिया। उनके अनुसार यदि परिवार का भावनात्मक सहारा नहीं मिलता, तो परिस्थितियां और अधिक कठिन हो सकती थीं।

    राम कपूर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपने जीवन में कई सकारात्मक बदलाव किए हैं। उन्होंने अपनी दिनचर्या, खानपान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना शुरू किया तथा मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी लगातार प्रयास किए। अभिनेता का कहना है कि अब वह पहले की तुलना में अधिक संतुलित, खुश और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। उन्होंने अपने अनुभव के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि सफलता के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य, अनुशासित जीवनशैली और परिवार का साथ भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यही कठिन समय में व्यक्ति को संभालने की सबसे बड़ी ताकत बनते हैं।

  • घाटे से उबरने की तैयारी कर रही Air India, अगले 18 महीनों में बेड़े में जुड़ेंगे 50-60 नए विमान

    घाटे से उबरने की तैयारी कर रही Air India, अगले 18 महीनों में बेड़े में जुड़ेंगे 50-60 नए विमान


    नई दिल्‍ली । एयरलाइन सेक्‍टर के इतिहास में टाटा ग्रुप की तरफ से एअर इंडिया का अध‍िग्रहण करना सबसे बड़ी डील में एक रहा. घाटे में चल रही एयरलाइन को फ‍िर से प्रॉफ‍िट में लाने के लि‍ए टाटा ग्रुप ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम चला रहा है. हालांकि, ग्‍लोबल लेवल पर एयरलाइन इंडस्‍ट्री को प्रभावित करने वाली कई घटनाओं के बाद एअर इंडिया का यह मिशन सही रास्ते पर आगे बढ़ रहा है. एअर इंडिया ग्रुप के एक अध‍िकारी के अनुसार एयरलाइन आने वाले डेढ़ साल के अंदर अपने बेड़े में 50 से 60 नए और आधुन‍िक व‍िमान शामिल करने जा रही है.

    एअर इंडिया के सीओओ और एअर इंडिया एक्सप्रेस के चेयरमैन निपुण अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत के दौरान एअर इंडिया के रीस्‍ट्रक्‍चर‍िंग को लेकर जानकारी दी. उन्होंने माना क‍ि जनवरी 2022 में टाटा ग्रुप की तरफ से कमान संभालने के बाद से पिछले कुछ साल में मैनेजमेंट को काफी सीखने को मिला है. उन्‍होंने कहा क‍ि एयरलाइन इंडस्‍ट्री पिछले कुछ समय से क्राइस‍िस से गुजर रही है. इस बदलाव की यात्रा की शुरुआत हुई तब किसी ने भी ग्‍लोबल लेवल पर आने वाली इन बाधाओं का अनुमान नहीं लगाया था.

    कई घटनाओं से एयरलाइन की रफ्तार पर लगा ब्रेक
    सप्लाई चेन की ग्‍लोबल द‍िक्‍कतें, अलग-अलगी देशों के एयरस्पेस से जुड़े विवाद, तेल की कीमत में उतार-चढ़ाव और जियोपॉलिटिकल टेंशन जैसी कई अप्रत्याशित घटनाओं ने एयरलाइन की रफ्तार को प्रभावित करने की कोशिश की है. एयर इंड‍िया ने पिछले कुछ समय के दौरान कई गंभीर और दर्दनाक झटकों का सामना किया है. इन मुश्किलों और मीडिया में आ रही ऐसी खबरों के बीच, जिनमें कहा जा रहा था कि एयर इंड‍िया का ट्रांसफॉर्मेशन प्लान तय समय से पिछड़ सकता है, निपुण अग्रवाल ने स्थिति साफ की है.

    विमानों की मेंटीनेंस पर भारी खर्च क‍िया जा रहा
    एयर इंडिया ने पांच साल का जो खाका तैयार किया है, उसके तहत विमानों के आधुनिकीकरण से लेकर विमानों की मरम्मत और रखरखाव के क्षेत्र में भारी निवेश किया जा रहा है. एअर इंडिया ने करीब 600 नए विमानों का विशाल ऐतिहासिक ऑर्डर दे रखा है, जिसमें से अभी तक 10 प्रतिशत से भी कम विमानों की डिलीवरी हो पाई है. यह ऑर्डर बुक इतनी बड़ी है कि इसके तहत विमानों की सप्‍लाई अगले दशक के म‍िड यानी 2035 तक जारी रहेगी. अगले सात से आठ साल तक हर साल बेड़े में 50 से 60 नए विमान जोड़े जाएंगे.

    मौजूदा बेड़े को पूरी तरह बदलने की तैयारी
    इस रणनीति के तहत एयर इंड‍िया को हर साल 10 से 15 बड़े साइज के विमान (वाइड-बॉडी) और 45 से 50 छोटे साइज के नैरो-बॉडी व‍िमान की स्ट्रीम मिलती रहेगी. अगले 18 महीने के अंदर ग्रुप के पास करीब 60 नए विमान उपलब्ध होंगे. नए विमानों को शामिल करने के साथ ही एअर इंडिया अपने मौजूदा बेड़े को पूरी तरह बदलने में जुटी है. वाइड-बॉडी प्‍लेन को अगले दो से तीन साल में पूरी तरह नया रूप दे दिया जाएगा. कंपनी के बोइंग 787 (ड्रीमलाइनर) विमानों का नवीनीकरण अगले साल के म‍िड तक पूरा हो जाएगा, जबकि बोइंग 777 विमानों के केबिन को बदलने में थोड़ा अधिक समय लगेगा.

    अभी 290 से ज्‍यादा प्‍लेन का बेड़ा
    कंपनी को बोइंग मैक्स 8 विमानों की डिलीवरी लगातार मिल रही है और एअर इंडिया दुनिया की उन चुनिंदा एयरलाइंस में शामिल होगी, जिसे बोइंग मैक्स 10 विमानों की पहली खेप मिलेगी. मौजूदा समय में एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के पास 290 से ज्‍यादा प्‍लेन का बेड़ा है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और तेल की आसमान छूती कीमत के कारण एयरलाइन को अपनी कुछ इंटरनेशनल फ्लाइट और सर्व‍िस में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा था.

  • '10 मिनट तक थम गई थी धड़कन', श्रेयस तलपड़े ने सुनाया जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई का दर्दनाक अनुभव

    '10 मिनट तक थम गई थी धड़कन', श्रेयस तलपड़े ने सुनाया जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई का दर्दनाक अनुभव

    नई दिल्ली । अभिनेता श्रेयस तलपड़े ने हाल ही में अपने जीवन के सबसे कठिन दौर को याद करते हुए उस घटना का जिक्र किया, जब उन्हें अचानक कार्डियक अरेस्ट आया था। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उनकी दिल की धड़कन करीब 10 मिनट तक बंद रही थी। यह अनुभव उनके लिए जीवन बदल देने वाला साबित हुआ और इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बना लिया।

    श्रेयस ने कहा कि घटना से पहले उन्हें लगातार थकान महसूस हो रही थी, लेकिन व्यस्त दिनचर्या के कारण उन्होंने इन संकेतों को गंभीरता से नहीं लिया। काम पूरा करने के बाद उन्हें बेचैनी, सांस लेने में परेशानी और हाथ में दर्द महसूस हुआ। शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य समस्या समझा, लेकिन कुछ ही देर में उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। समय रहते अस्पताल पहुंचने के कारण उन्हें तुरंत आपातकालीन उपचार मिल सका।

    अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर देखते हुए तुरंत आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया शुरू की। उपचार के दौरान उनकी एंजियोप्लास्टी की गई और लगातार प्रयासों के बाद उनकी जान बचाई जा सकी। होश में आने के बाद जब उन्हें पूरी घटना के बारे में जानकारी मिली तो उन्हें एहसास हुआ कि वह मौत के बेहद करीब पहुंच चुके थे। उन्होंने कहा कि उस पल ने उन्हें जीवन की असली अहमियत समझा दी।

    श्रेयस के अनुसार इस घटना के बाद उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। पहले वह लगातार काम को प्राथमिकता देते थे, लेकिन अब परिवार, स्वास्थ्य और मानसिक शांति को सबसे अधिक महत्व देते हैं। उन्होंने अपनी दिनचर्या में नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को शामिल किया है। उनका मानना है कि शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, अत्यधिक थकान या किसी भी तरह की असामान्य शारीरिक परेशानी महसूस हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। उनके अनुसार कई बार लोग व्यस्तता या लापरवाही के कारण शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है। समय पर इलाज मिलने से कई गंभीर परिस्थितियों से बचा जा सकता है।

    अभिनेता ने यह भी कहा कि इस अनुभव ने उन्हें परिवार और रिश्तों की अहमियत पहले से कहीं अधिक समझाई। अब वह हर दिन को एक नए अवसर की तरह जीने की कोशिश करते हैं और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने माना कि सफलता और व्यस्तता से कहीं अधिक जरूरी स्वस्थ रहना है, क्योंकि अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। कार्डियक अरेस्ट से उबरने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपने पेशेवर जीवन में वापसी की और अब अपने अनुभव के जरिए लोगों को हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी दे रहे हैं।

  • दो महीने की मुश्किल रिकवरी के बाद लौटीं सुमोना चक्रवर्ती, बीमारी से जंग जीतकर महिलाओं के लिए बनीं नई उम्मीद

    दो महीने की मुश्किल रिकवरी के बाद लौटीं सुमोना चक्रवर्ती, बीमारी से जंग जीतकर महिलाओं के लिए बनीं नई उम्मीद

    नई दिल्ली । टीवी अभिनेत्री सुमोना चक्रवर्ती ने एंडोमेट्रियोसिस जैसी गंभीर बीमारी से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद अपनी सेहत को लेकर भावुक अनुभव साझा किया है। करीब दो महीने तक सार्वजनिक जीवन और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने के बाद उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्होंने पूरी तरह अपनी रिकवरी पर ध्यान दिया। अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में बीमारी के कठिन दौर, सर्जरी, मानसिक संघर्ष और जीवन के प्रति बदले नजरिए का जिक्र करते हुए कहा कि अब वह पहले से बेहतर महसूस कर रही हैं।

    सुमोना ने बताया कि 4 मई को उनकी एंडोमेट्रियोसिस की सर्जरी हुई थी। उन्होंने काफी समय तक दवाइयों और उपचार के जरिए बीमारी को नियंत्रित रखने की कोशिश की, लेकिन जब स्थिति अधिक जटिल हो गई तो ऑपरेशन कराना आवश्यक हो गया। सर्जरी के बाद डॉक्टरों की देखरेख और नियमित उपचार के कारण उनकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है।

    अभिनेत्री ने कहा कि पिछले दो महीनों ने उन्हें जीवन को बेहद करीब से समझने का अवसर दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि बीमारी के दौरान कई ऐसे पल आए जब उन्हें लगा कि शायद अब जिंदगी का सबसे कठिन मोड़ सामने है। हालांकि उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और सकारात्मक सोच के साथ इलाज और रिकवरी की प्रक्रिया को अपनाया। उनके अनुसार मानसिक मजबूती ने इस कठिन समय से बाहर निकलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    सुमोना ने अपनी पोस्ट में मेडिकल टीम और डॉक्टरों का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की देखरेख और परिवार तथा करीबी लोगों के सहयोग ने उन्हें इस चुनौतीपूर्ण दौर से उबरने का आत्मविश्वास दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अब वह पहले की तुलना में अधिक स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस कर रही हैं।

    उन्होंने यह भी साझा किया कि शुरुआत में उनका मन सोशल मीडिया से हमेशा के लिए दूर हो जाने का था। लेकिन बाद में उन्हें महसूस हुआ कि उनके अनुभव कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने तय किया कि वह अपने मंच का उपयोग महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस और महिलाओं से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए करेंगी। उनका उद्देश्य ऐसा सुरक्षित वातावरण तैयार करना है, जहां महिलाएं बिना झिझक अपने अनुभव साझा कर सकें और एक-दूसरे का मनोबल बढ़ा सकें।

    रिकवरी के दौरान सुमोना ने अपने 38वें जन्मदिन को भी बेहद सादगी से मनाया। उन्होंने आखिरी समय में इस्तांबुल की यात्रा का निर्णय लिया और बिना किसी बड़े समारोह के अपना जन्मदिन बिताया। उन्होंने बताया कि इस बार उन्होंने यात्रा, पसंदीदा जापानी भोजन और एक साधारण चीज़केक के साथ इस खास दिन को यादगार बनाया। उनके लिए यह यात्रा मानसिक रूप से नई शुरुआत का प्रतीक रही।

    गौरतलब है कि सुमोना चक्रवर्ती ने वर्ष 2021 में पहली बार सार्वजनिक रूप से बताया था कि वह स्टेज-4 एंडोमेट्रियोसिस से जूझ रही हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने इस बीमारी के कारण कई शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना किया था। अब सफल सर्जरी और बेहतर स्वास्थ्य के बाद उन्होंने अपने अनुभव साझा कर इस बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया है। अभिनय के क्षेत्र में सुमोना कई लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों, कॉमेडी शोज और फिल्मों का हिस्सा रह चुकी हैं तथा उनके प्रशंसक जल्द ही उन्हें नए प्रोजेक्ट्स में देखने की उम्मीद कर रहे हैं।

  • वैश्विक तनाव घटा, घरेलू बाजार चमका; बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर, मिडकैप-स्मॉलकैप में भी जोरदार तेजी

    वैश्विक तनाव घटा, घरेलू बाजार चमका; बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर, मिडकैप-स्मॉलकैप में भी जोरदार तेजी

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र की मजबूती ने भारतीय पूंजी बाजार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तक पहुंचा दिया है। निवेशकों के बढ़ते भरोसे, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण एक बार फिर 5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर गया। यह लगभग छह सप्ताह का सर्वोच्च स्तर माना जा रहा है और इससे बाजार की सकारात्मक धारणा को नई मजबूती मिली है।

    हाल के दिनों में वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों में आए बदलावों का असर भारतीय बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। पश्चिम एशिया से जुड़े तनावों में नरमी और अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर सामने आए सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों की चिंताओं को कम किया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए राहत का माहौल बनाया है। इसका सीधा प्रभाव निवेशकों के विश्वास और बाजार की दिशा पर देखा गया।

    विश्लेषकों का मानना है कि तेल की कीमतों में कमी से महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही चालू खाते के घाटे पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। इन परिस्थितियों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया है, जिसके परिणामस्वरूप शेयर बाजार में खरीदारी का माहौल मजबूत हुआ है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान बाजार में आई तेजी ने कंपनियों के कुल मूल्यांकन को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है।

    बाजार की यह मजबूती केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रही है। व्यापक बाजार में भी उत्साह दिखाई दिया है। मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप श्रेणी के शेयरों ने हाल के महीनों में बड़े शेयरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में तेजी केवल चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेशकों की भागीदारी विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों में फैल रही है। व्यापक भागीदारी को किसी भी तेजी के टिकाऊ होने का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।

    हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से बिकवाली का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है, फिर भी घरेलू निवेशकों की लगातार सक्रियता बाजार को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। व्यवस्थित निवेश योजनाओं और खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने बाजार को स्थिरता देने में अहम भूमिका निभाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले समय में विदेशी निवेश का प्रवाह भी सकारात्मक होता है तो बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।

    भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाएं भी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। संरचनात्मक सुधारों, मजबूत कॉरपोरेट बैलेंस शीट, बढ़ते पूंजीगत निवेश और बेहतर नकदी प्रवाह जैसे कारक कंपनियों की विकास क्षमता को मजबूत बना रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कॉरपोरेट क्षेत्र ने कर्ज के स्तर को नियंत्रित करने और परिचालन क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है, जिसका लाभ अब बाजार मूल्यांकन में दिखाई दे रहा है।

    बुधवार के कारोबार में भी प्रमुख सूचकांकों ने सकारात्मक रुख बनाए रखा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए, जिससे निवेशकों का उत्साह और मजबूत हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चरण में बैंकिंग, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    कुल मिलाकर, वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और घरेलू आर्थिक मजबूती के संयुक्त प्रभाव ने भारतीय शेयर बाजार को नई ऊर्जा प्रदान की है। बीएसई का बाजार पूंजीकरण 5 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचना न केवल निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है।

  • अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद कमोडिटी बाजार में जोरदार उछाल, सोना-चांदी की कीमतों ने छुए नए शिखर

    अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद कमोडिटी बाजार में जोरदार उछाल, सोना-चांदी की कीमतों ने छुए नए शिखर

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव में कमी आने और शांति समझौते की पुष्टि के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला है। इस घटनाक्रम का असर भारतीय कमोडिटी बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जहां सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोना और चांदी की कीमतों में मजबूत तेजी दर्ज की गई। निवेशकों की बढ़ती सक्रियता और बाजार की बेहतर होती धारणा के बीच दोनों प्रमुख कीमती धातुओं ने शुरुआती कारोबार में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की।

    कमोडिटी बाजार में कारोबारी गतिविधियों की शुरुआत के साथ ही सोने की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। बाजार खुलते ही सोना अपने पिछले बंद स्तर की तुलना में हजारों रुपये की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती सत्र में कीमतें लगातार मजबूत बनी रहीं और दिन के उच्च स्तर तक पहुंच गईं। निवेशकों ने इसे वैश्विक परिस्थितियों में आए बदलाव और बाजार की स्थिरता की दिशा में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा।

    चांदी के बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। कारोबार शुरू होते ही चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी आई और शुरुआती घंटों में ही यह तीन प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज करने में सफल रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग और निवेशकों की नई खरीदारी ने चांदी को अतिरिक्त समर्थन प्रदान किया है। इसके चलते चांदी ने महत्वपूर्ण स्तरों को पार करते हुए नई मजबूती के संकेत दिए हैं।

    विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की पुष्टि से वैश्विक निवेशकों में विश्वास बढ़ा है। लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता कम होने से वित्तीय बाजारों में स्थिरता लौटने की उम्मीद जगी है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की खबर को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय तेल और ऊर्जा व्यापार की दृष्टि से अत्यंत अहम माना जाता है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोना फिलहाल एक महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। यदि कीमतें मौजूदा प्रतिरोध क्षेत्र के ऊपर स्थिर रहने में सफल होती हैं तो निकट अवधि में इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, प्रमुख समर्थन स्तरों के नीचे फिसलने पर कीमतों में सीमित गिरावट की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल बाजार का रुख सकारात्मक बना हुआ है और निवेशक आगे के वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं।

    चांदी के संबंध में भी विशेषज्ञों का दृष्टिकोण उत्साहजनक बना हुआ है। प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार करने की स्थिति में इसमें और मजबूती देखने को मिल सकती है। हालांकि बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा तेजी को बनाए रखने के लिए कीमतों का ऊंचे स्तरों पर टिके रहना आवश्यक होगा। यदि ऐसा होता है तो निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है।

    वित्तीय बाजारों के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतक, ऊर्जा बाजार की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम सोना एवं चांदी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फिलहाल शांति समझौते से पैदा हुए सकारात्मक माहौल ने निवेशकों को राहत दी है और कीमती धातुओं के बाजार में नई ऊर्जा का संचार किया है।

  • पये की कमजोरी पर विशेषज्ञों की राय ने बढ़ाया भरोसा: अस्थिर वैश्विक माहौल खत्म होते ही दिख सकती है रिकवरी

    पये की कमजोरी पर विशेषज्ञों की राय ने बढ़ाया भरोसा: अस्थिर वैश्विक माहौल खत्म होते ही दिख सकती है रिकवरी


    नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में लगातार हो रहे बदलाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय रुपये की स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। डॉलर के मुकाबले रुपये में आई कमजोरी ने बाजार और आम लोगों के बीच चिंता बढ़ाई है, लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति को घबराहट के नजरिए से देखने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियां अस्थायी हैं और जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता कम होगी, भारतीय मुद्रा में भी धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है।

    आर्थिक जानकारों का मानना है कि वैश्विक बाजार इस समय कई तरह के दबावों से गुजर रहे हैं। दुनिया के कई हिस्सों में जारी तनाव, बढ़ती आर्थिक चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं ने मुद्रा बाजार पर भी असर डाला है। ऐसे समय में किसी भी देश की मुद्रा पर दबाव बनना असामान्य नहीं माना जाता। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति अभी भी मजबूत है और अस्थायी उतार-चढ़ाव को स्थायी संकट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यदि डॉलर के मुकाबले रुपया मनोवैज्ञानिक स्तर तक भी पहुंचता है तो यह केवल एक आंकड़ा होगा, न कि किसी गंभीर आर्थिक संकट का संकेत। कई बार बाजार परिस्थितियों के अनुसार मुद्राएं अपने आप संतुलन बनाती हैं और ऐसी स्थितियों में अत्यधिक हस्तक्षेप लंबे समय में नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। उनका मानना है कि बाजार आधारित समायोजन कई बार कृत्रिम नियंत्रण की तुलना में अधिक प्रभावी और टिकाऊ साबित होते हैं।

    इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि केंद्रीय संस्थाएं अत्यधिक दबाव बनाकर मुद्रा को एक तय स्तर पर रोकने की कोशिश करती हैं तो इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। आर्थिक नीतियों का उद्देश्य केवल तात्कालिक राहत देना नहीं बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता बनाए रखना भी होना चाहिए। इसलिए कई विशेषज्ञ विनिमय दर को अपनी स्वाभाविक प्रक्रिया के अनुसार काम करने देने की बात कर रहे हैं।

    कच्चे तेल की कीमतों को लेकर भी आर्थिक जगत में चर्चा बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि का असर घरेलू बाजारों पर धीरे-धीरे दिखाई देना स्वाभाविक माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी उत्पाद की कीमतों को लंबे समय तक कृत्रिम रूप से नियंत्रित रखना व्यवहारिक नहीं होता। बाजार की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप ही आर्थिक नीतियां अधिक प्रभावी साबित होती हैं।

    इसके अलावा विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए अल्पकालिक उपायों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आर्थिक जानकारों का कहना है कि ऐसे कदम शुरुआती राहत तो दे सकते हैं, लेकिन भविष्य में अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव भी पैदा कर सकते हैं। फिलहाल विशेषज्ञों की राय यही है कि मौजूदा हालात को धैर्य और संतुलन के साथ देखने की आवश्यकता है, क्योंकि वैश्विक परिस्थितियां सामान्य होते ही भारतीय रुपये में मजबूती की संभावना अभी भी बरकरार मानी जा रही है।

  • पोरसा में सराफा व्यापारी के बैग से कटकर निकले डेढ़ लाख, सीसीटीवी में दो संदिग्ध, UP के पिनाहट में दबिश

    पोरसा में सराफा व्यापारी के बैग से कटकर निकले डेढ़ लाख, सीसीटीवी में दो संदिग्ध, UP के पिनाहट में दबिश


    मुरैना । मुरैना के पोरसा कस्बे में सराफा व्यापारी के बैग से डेढ़ लाख रुपए चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कलकत्ता के दासपुर निवासी 38 वर्षीय सराफा व्यापारी शेख शाहरुल, जो लंबे समय से मुरैना में रहकर गहने बनाने का काम कर रहे हैं, शनिवार को पोरसा कस्बे में एक सराफा दुकान से पेमेंट लेकर वापस मुरैना लौट रहे थे। बताया गया है कि वे पोरसा के संतोष वर्मा की दुकान से डेढ़ लाख रुपए लेकर यात्री बस में सवार होने ही लगे थे कि तभी पीछे से दो लोग भी बस में चढ़े।

    इसी दौरान बदमाशों ने व्यापारी के बैग की चैन काटकर उसमें रखे 1.5 लाख रुपए निकाल लिए और घटनास्थल से फरार हो गए। घटना की जानकारी होते ही व्यापारी ने तुरंत बस से उतरकर पोरसा थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पोरसा पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

    पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें दो संदिग्ध दिखाई दिए। दोनों की पहचान व्यापारी ने भी की है। CCTV फुटेज में दिख रहा है कि आरोपी शातिराना ढंग से बैग की चैन काटते हैं और रुपए निकालकर मौके से भागते हैं। यह वारदात एक ऐसे समय में हुई जब व्यापारी बस में चढ़ रहे थे, इसलिए बदमाशों को पुलिस ने “फुर्तीला और योजनाबद्ध” बताया है।

    एसडीओपी रवि भदौरिया ने बताया कि पोरसा में सराफा व्यापारियों से वसूली के दौरान यह घटना हुई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पोरसा से लगे उत्तर प्रदेश के पिनाहट इलाके में दबिश शुरू कर दी है। पुलिस टीम आरोपियों की तलाश में विभिन्न जगहों के CCTV फुटेज भी खंगाल रही है और स्थानीय स्तर पर पूछताछ भी की जा रही है।

    मामला बढ़ता देख व्यापारी और भी सावधान दिखे। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से मुरैना में सराफा व्यापारियों के लिए गहने बनाने का काम कर रहे हैं। इसी काम के भुगतान के लिए वह शनिवार को पोरसा पहुंचे थे और शाम करीब 4 बजे पैसा लेकर बस में चढ़ रहे थे। लेकिन इसी दौरान यह घटना घटी, जिससे उनके लिए आर्थिक नुकसान के साथ-साथ सुरक्षा की चिंता भी बढ़ गई।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी ने संदिग्धों को देखा हो या किसी भी तरह की जानकारी हो तो तुरंत थाने को सूचित करें। साथ ही यात्रियों को भी सलाह दी गई है कि यात्रा के दौरान नकदी या महत्वपूर्ण दस्तावेज़ को सुरक्षित रखें और बैग की चैन तथा लॉक का विशेष ध्यान रखें। पुलिस के अनुसार, इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पिनाहट क्षेत्र में दबिश जारी है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।