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  • अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया पर की वापसी, बोले- अभी और आराम की जरूरत

    अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया पर की वापसी, बोले- अभी और आराम की जरूरत

    नई दिल्ली । अभिनेता अमिताभ बच्चन ने कुछ दिनों तक सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने के बाद एक बार फिर वापसी की है। उन्होंने अपनी सेहत और आराम को लेकर पहले ही जानकारी दी थी कि उन्हें कुछ समय के लिए बातचीत और लिखने से दूर रहने की सलाह दी गई है। अब करीब तीन दिन बाद उनकी वापसी से प्रशंसकों को राहत मिली है। हालांकि, अभिनेता ने यह भी स्पष्ट किया है कि उन्हें अभी पूरी तरह सहज होने के लिए और आराम की जरूरत है।

    अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग पर लिखे नए संदेश में बताया कि उन्हें फिलहाल आराम जारी रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वह अपनी मौजूदा स्थिति के अनुरूप खुद को ढालने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही, वह इंसानी शरीर की विशेषताओं और उसकी कार्यप्रणाली के बारे में भी विचार कर रहे हैं। उनके इस संदेश से संकेत मिलता है कि वह अभी अपनी दिनचर्या को संभलकर आगे बढ़ा रहे हैं और रिकवरी के लिए समय दे रहे हैं।

    अभिनेता ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी एक छोटा-सा संदेश साझा किया। उन्होंने केवल ‘चलो’ लिखा, जिसके बाद उनके प्रशंसकों को उनकी वापसी की जानकारी मिली। इससे पहले उन्होंने कुछ दिनों तक सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं रह पाने के लिए अपने चाहने वालों से माफी मांगी थी। उन्होंने बताया था कि उन्हें आराम करने और अपनी स्थिति में सुधार लाने के लिए समय निकालने की सलाह दी गई है। इसी कारण वह नियमित रूप से लिख नहीं पा रहे थे और बातचीत भी सीमित रखनी पड़ रही थी।

    अमिताभ बच्चन ने दशहरे के अवसर पर प्रशंसकों को शुभकामनाएं देते हुए भी अपनी स्थिति का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें सख्त आराम करने और रिकवरी पर ध्यान देने के लिए कहा गया है। इस वजह से वह पहले की तरह अधिक बातचीत नहीं कर सकेंगे। उनके इस संदेश के बाद प्रशंसकों के बीच उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई थी। अब उनके दोबारा सक्रिय होने से लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन अभिनेता ने अभी अपनी पूरी तरह स्वस्थ होने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई है।

    अमिताभ बच्चन की सेहत को लेकर चिंता उस समय भी बढ़ी थी, जब उन्होंने टेलीविजन कार्यक्रम ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ के सेट पर अपने घुटने में चोट लगने की जानकारी दी थी। अभिनेता ने कार्यक्रम के दौरान बताया था कि शूटिंग से एक दिन पहले वह फिसलकर गिर गए थे, जिससे उनके घुटने में चोट आई थी। उन्होंने बताया था कि आमतौर पर वह मंच के बीच में खड़े होकर अपना संवाद बोलते हैं, लेकिन चोट के कारण उस दिन ऐसा करना मुश्किल हो रहा था।

    हालांकि, उस समय अमिताभ बच्चन ने चोट को बहुत गंभीर नहीं बताया था। फिलहाल उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह घुटने की चोट के कारण दी है या इसका कोई अन्य कारण है। इसलिए उनकी मौजूदा रिकवरी और पहले लगी चोट के बीच संबंध को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। फिलहाल अभिनेता आराम कर रहे हैं और धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर सक्रिय हो रहे हैं।

  • CBDT ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 में किए बदलाव, वैल्यूअर और टैक्स प्रैक्टिशनर के लिए नए फॉर्म जारी

    CBDT ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 में किए बदलाव, वैल्यूअर और टैक्स प्रैक्टिशनर के लिए नए फॉर्म जारी

    नई दिल्ली । केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन संशोधनों में वैल्यूअर और अधिकृत इनकम टैक्स प्रैक्टिशनर्स के रजिस्ट्रेशन, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन और टैक्स रिकवरी से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया गया है। संशोधित नियमों के कुछ प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माने गए हैं, जबकि अन्य बदलाव 17 सितंबर 2026 से लागू किए गए हैं।

    इनकम टैक्स अधिनियम, 2026 में चौथे संशोधन के तहत वैल्यूअर और टैक्स प्रैक्टिशनर के रजिस्ट्रेशन से संबंधित प्रक्रियाओं को संशोधित किया गया है। इसके तहत मौजूदा फॉर्म में भी जरूरी सुधार किए गए हैं, ताकि रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जा सके।

    नए प्रावधानों के तहत वैल्यूअर के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने वाले व्यक्ति को Form-169 में अपनी शैक्षणिक योग्यता, पिछली नौकरी और संबंधित पेशेवर अनुभव की जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही पिछले तीन वर्षों के दौरान किए गए वैल्यूएशन का विवरण भी उपलब्ध कराना होगा।

    इस बदलाव का उद्देश्य रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति की योग्यता और अनुभव से जुड़ी जानकारी को स्पष्ट रूप से दर्ज करना है। इससे वैल्यूअर के पेशेवर रिकॉर्ड और उनके द्वारा किए गए वैल्यूएशन से संबंधित विवरण प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।

    इसी तरह टैक्स प्रैक्टिशनर्स के लिए Form-171 पेश किया गया है। इस फॉर्म में आवेदक को अपनी शैक्षणिक योग्यता और जरूरी प्रमाणपत्रों से संबंधित जानकारी देनी होगी। इसके अलावा यदि आवेदक से जुड़ी कोई अयोग्यता या डिस्क्वालिफिकेशन है, तो उसका विवरण भी देना आवश्यक होगा।

    इनकम टैक्स नियमों में किए गए बदलावों का एक प्रमुख हिस्सा टैक्स कंप्लायंस प्रक्रिया से जुड़ा है। नए प्रावधानों के तहत प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया है। कंप्लायंस से संबंधित समयसीमा में विस्तार से संबंधित करदाताओं और टैक्स प्रोफेशनल्स को अपनी जरूरी जानकारी दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

    समयसीमा बढ़ाए जाने से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कॉरपोरेट्स और अन्य संबंधित टैक्सपेयर्स को अंतिम समय में होने वाली जल्दबाजी से राहत मिलने की संभावना है। इसके साथ ही सर्वर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण होने वाली परेशानियों को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

    CBDT ने टैक्स रिकवरी से जुड़े नियम 225 में भी संशोधन किया है। संशोधित प्रावधानों के तहत इस नियम से जुड़े कई प्रावधानों को हटा दिया गया है। इनमें गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं।

    संशोधन के तहत एक महत्वपूर्ण बदलाव प्रक्रिया की समयसीमा को लेकर किया गया है। पहले जिन प्रक्रियाओं को 30 सितंबर 2026 तक पूरा किया जाना था, उनकी समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है।

    इन बदलावों के साथ इनकम टैक्स नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन, अनुपालन और टैक्स रिकवरी से जुड़ी प्रक्रियाओं में संशोधन किया गया है। नए फॉर्म और विस्तारित समयसीमा का सीधा संबंध संबंधित पेशेवरों और करदाताओं की प्रक्रियात्मक

  • राजेश शर्मा की तबीयत बिगड़ने पर बड़ा खुलासा, एक्टर ने जहरीले कीड़े के काटने की खबर को बताया झूठ, डायबिटीज को बताया असली वजह

    राजेश शर्मा की तबीयत बिगड़ने पर बड़ा खुलासा, एक्टर ने जहरीले कीड़े के काटने की खबर को बताया झूठ, डायबिटीज को बताया असली वजह


    नई दिल्ली ।
    अभिनेता राजेश शर्मा ने अपनी सेहत को लेकर चल रही खबरों पर सफाई दी है। कुछ समय पहले ऐसी खबरें सामने आई थीं कि शूटिंग के दौरान उन्हें किसी जहरीले कीड़े ने काट लिया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अब अभिनेता ने खुद इन खबरों को गलत बताया है और अपनी तबीयत खराब होने की असली वजह बताई है।

    राजेश शर्मा ने बताया कि उनके सीधे पैर में लंबे समय से त्वचा से जुड़ी समस्या चल रही थी। बाद में वहां संक्रमण हो गया, जिसके कारण उन्हें इलाज कराना पड़ा। अभिनेता के मुताबिक उनका इलाज अब पूरा हो चुका है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि वह एक-दो सप्ताह में दोबारा काम पर लौट सकेंगे।

    कीड़े के काटने की खबर पर सफाई देते हुए राजेश शर्मा ने कहा कि यह गलत खबर थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभास की फिल्म के सेट पर उनके साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के लिए न तो प्रभास जिम्मेदार थे और न ही फिल्म की यूनिट। अभिनेता के मुताबिक हैदराबाद में शूटिंग के दौरान उनके साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी।

    राजेश शर्मा ने बताया कि हैदराबाद से कोलकाता लौटने के बाद उनकी स्थिति ज्यादा बिगड़ गई। उन्होंने इसके पीछे अपनी डायबिटीज का स्तर काफी बढ़ जाना भी एक बड़ी वजह बताया। अभिनेता ने स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्होंने अपनी स्वास्थ्य स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया था। इसके बाद समस्या बढ़ती गई और उन्हें उपचार की जरूरत पड़ी।

    इससे पहले अभिनेत्री सुदीपा चटर्जी ने राजेश शर्मा की तबीयत को लेकर जानकारी साझा की थी। उन्होंने बताया था कि अभिनेता को कीड़े ने काट लिया है और उनकी हालत खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अब राजेश शर्मा ने इस दावे को गलत बताया है।

    अभिनेता ने कहा कि सुदीपा उनकी दोस्त हैं और वह उनकी सेहत को लेकर चिंतित थीं। हालांकि, उस समय उन्हें भी पूरी और सही जानकारी नहीं थी। इसी वजह से कीड़े के काटने की बात सामने आई।

    जुलाई में सुदीपा चटर्जी ने सोशल मीडिया पर राजेश शर्मा की तबीयत को लेकर एक पोस्ट साझा किया था। उस पोस्ट के मुताबिक रामोजी फिल्म सिटी में फिल्म की शूटिंग के दौरान अभिनेता वहां के एक तकनीशियन से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक जहरीले कीड़े के काटने की बात कही गई थी। पोस्ट में बताया गया था कि इसके बाद उनकी हालत खराब हुई और वह हैदराबाद से कोलकाता के लिए फ्लाइट से रवाना हुए।

    यात्रा के दौरान उन्हें बुखार और बेचैनी जैसी परेशानी हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, अब अभिनेता की ओर से सामने आई जानकारी ने उस समय बताई गई वजह को गलत साबित किया है। राजेश शर्मा ने अपनी बीमारी के पीछे पैर के संक्रमण और बढ़ी हुई डायबिटीज को प्रमुख कारण बताया है।

    अभिनेता फिलहाल उपचार के बाद रिकवरी कर रहे हैं और जल्द ही काम पर लौटने की उम्मीद जता रहे हैं। उनकी सफाई के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि उनकी तबीयत बिगड़ने की वजह जहरीले कीड़े का काटना नहीं थी, जैसा कि पहले बताया गया था।

  • रीवा में तालाब में नहाते समय 22 वर्षीय युवक डूबा, कई घंटे की तलाश के बाद मिला शव, गांव में पसरा मातम

    रीवा में तालाब में नहाते समय 22 वर्षीय युवक डूबा, कई घंटे की तलाश के बाद मिला शव, गांव में पसरा मातम

    मध्य प्रदेश: के रीवा जिले में तालाब में नहाने के दौरान एक युवक की डूबने से मौत हो गई। हादसा पनवार थाना क्षेत्र के देवरी गांव में हुआ, जहां 22 वर्षीय रामेश्वर कोल दोपहर के समय गांव के पास स्थित तालाब में नहाने गया था। नहाते समय वह अचानक गहरे पानी में चला गया और देखते ही देखते पानी में डूब गया।

    घटना के समय तालाब के आसपास मौजूद लोगों ने युवक को पानी में डूबते देखा। उन्होंने तत्काल उसके परिजनों और गांव के अन्य लोगों को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण तालाब के पास पहुंच गए। इसके बाद युवक की तलाश शुरू की गई।

    ग्रामीणों ने काफी देर तक तालाब में अलग अलग स्थानों पर युवक को खोजने का प्रयास किया। पानी की गहराई अधिक होने के कारण तलाश में परेशानी सामने आई। लगातार कोशिशों के बावजूद शुरुआती दौर में युवक का कोई पता नहीं चल सका। इसके बाद घटना की जानकारी पनवार पुलिस को दी गई।

    सूचना मिलने पर पनवार थाना प्रभारी कन्हैया सिंह बघेल पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी में ग्रामीणों ने दोबारा तालाब में युवक की तलाश शुरू की। कई घंटे तक चले प्रयास के बाद आखिरकार रामेश्वर कोल का शव तालाब से बरामद कर लिया गया।

    शव मिलने की जानकारी जैसे ही परिवार के लोगों को हुई, वहां चीख पुकार मच गई। युवक की अचानक मौत से परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया। हादसे की खबर गांव में फैलने के बाद पूरे देवरी क्षेत्र में शोक का माहौल बन गया। ग्रामीण भी घटना से दुखी नजर आए।

    बताया गया कि रामेश्वर कोल गांव का रहने वाला था और सामान्य रूप से तालाब में नहाने के लिए गया था। इसी दौरान वह गहरे पानी में पहुंच गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार पानी की गहराई अधिक होने के कारण वह खुद को संभाल नहीं सका और डूब गया। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तत्काल उसकी तलाश शुरू की, लेकिन सफलता कई घंटे बाद मिली।

    पुलिस ने युवक के शव को आवश्यक कार्रवाई के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जवा भेज दिया। यहां शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। पुलिस ने घटना से संबंधित आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

    इस हादसे ने एक बार फिर गांवों में स्थित तालाबों और जलाशयों में नहाने के दौरान सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बारिश के मौसम में तालाबों और अन्य जलस्रोतों में पानी का स्तर बढ़ने के साथ गहराई और फिसलन का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे स्थानों पर सावधानी नहीं बरतने की स्थिति में हादसे की आशंका बनी रहती है।

    देवरी गांव में हुए इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भी शोक है। ग्रामीणों का कहना है कि युवक की मौत से परिवार को बड़ा सदमा लगा है। पुलिस की कार्रवाई के बाद घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस ने शव बरामद कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

  • रामदेवरा में भादवा मेले के दौरान पार्किंग शुल्क को लेकर श्रद्धालुओं ने जबरन वसूली और दोहरी रकम लेने के आरोप लगाए

    रामदेवरा में भादवा मेले के दौरान पार्किंग शुल्क को लेकर श्रद्धालुओं ने जबरन वसूली और दोहरी रकम लेने के आरोप लगाए


    नई दिल्ली ।राजस्थान के जैसलमेर जिले स्थित रामदेवरा में बाबा रामदेव के दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं को भादवा मेले के दौरान पार्किंग व्यवस्था को लेकर परेशानी का सामना करने के आरोप सामने आए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर क्षेत्र के आसपास वाहनों के प्रवेश और पार्किंग के नाम पर निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली की जा रही है और कई स्थानों पर रास्ते रोककर पैसे लिए जा रहे हैं।

    रामदेवरा में बाबा रामदेव का वार्षिक भादवा मेला शुरू हो चुका है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में वाहनों की आवाजाही और पार्किंग की व्यवस्था प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण रहती है। इस बार पार्किंग शुल्क को लेकर सामने आई शिकायतों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

    श्रद्धालुओं के अनुसार, मेले के दौरान मुख्य रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है और वाहनों को रोककर करीब 100 रुपये का पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है। उनका आरोप है कि कई मामलों में वाहन को पार्किंग स्थल में खड़ा नहीं करने के बावजूद शुल्क लिया जाता है। कुछ श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने आगे होटल या अन्य स्थान पर वाहन खड़ा करने की व्यवस्था कर रखी थी, फिर भी उन्हें रास्ते से आगे बढ़ने के लिए शुल्क देना पड़ा।

    श्रद्धालुओं ने यह भी आरोप लगाया कि एक बार पार्किंग शुल्क जमा करने के बाद यदि वाहन किसी काम से बाहर निकलकर दोबारा लौटता है तो फिर से भुगतान करने के लिए कहा जाता है। कुछ लोगों के मुताबिक पुरानी रसीद दिखाने के बावजूद दोबारा शुल्क मांगा गया। इसके अलावा मुख्य प्रवेश मार्ग पर भुगतान करने के बाद अंदर अलग पार्किंग के नाम पर दोबारा रकम मांगने की शिकायत भी सामने आई है।

    इस व्यवस्था को लेकर श्रद्धालुओं में नाराजगी है। उनका कहना है कि वे बाबा रामदेव के दर्शन और धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए दूर-दूर से आते हैं। ऐसे में यदि पार्किंग की आवश्यकता नहीं होने के बावजूद शुल्क लिया जाता है या एक ही वाहन से अलग-अलग जगहों पर भुगतान कराया जाता है तो इससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी होती है।

    मामले में पार्किंग ठेके से जुड़े कर्मचारियों का अलग पक्ष है। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर पर 72 लाख रुपये से अधिक की बोली के बाद नियमानुसार पार्किंग का ठेका लिया गया है। कर्मचारियों के मुताबिक भादवा मेले के दौरान हर वर्ष पार्किंग व्यवस्था के लिए ठेका दिया जाता है और शुल्क उसी प्रक्रिया के तहत लिया जा रहा है।

    दूसरी ओर श्रद्धालुओं का कहना है कि शुल्क वसूलने और वाहनों को रोकने की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए। उनका आरोप है कि पार्किंग व्यवस्था के नाम पर रास्ता रोकना उचित नहीं है और जिन लोगों को वाहन पार्क नहीं करना है, उनसे भी शुल्क लेना सवाल खड़ा करता है।

    श्रद्धालु दिनेश सारस्वत ने भी व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा कि रास्ते रोककर बिना रसीद शुल्क दिए लोगों को आगे नहीं जाने देना उचित नहीं है। उन्होंने इसे कुछ वर्षों से शुरू हुई व्यवस्था बताते हुए इसे बंद कराने और श्रद्धालुओं के साथ कथित गलत व्यवहार पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने स्थानीय विधायक से भी मामले में हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई।

    भादवा मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए पार्किंग व्यवस्था, शुल्क वसूली और यातायात प्रबंधन को लेकर पारदर्शिता महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं की शिकायतों के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि निर्धारित शुल्क की वसूली किस तरह हो रही है और क्या पार्किंग नहीं करने वाले वाहनों से भी रकम लेना नियमों के अनुरूप है। इन आरोपों पर प्रशासन की स्पष्ट कार्रवाई और स्थिति की जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

  • चीनी की बढ़ती कीमतों पर विशेषज्ञों ने साफ किया रुख, एथेनॉल डायवर्जन नहीं बल्कि गन्ने की कमी और कम रिकवरी जिम्मेदार

    चीनी की बढ़ती कीमतों पर विशेषज्ञों ने साफ किया रुख, एथेनॉल डायवर्जन नहीं बल्कि गन्ने की कमी और कम रिकवरी जिम्मेदार

    नई दिल्ली । देश में चीनी की कीमतों में हालिया तेजी को लेकर एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी डायवर्जन को जिम्मेदार ठहराए जाने के बीच कृषि और चीनी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने अलग तस्वीर पेश की है। विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा तेजी की मुख्य वजह एथेनॉल उत्पादन नहीं, बल्कि गन्ने के उत्पादन, गुणवत्ता और चीनी रिकवरी में आई कमी है। उनका कहना है कि सरकार चीनी की घरेलू जरूरत, एथेनॉल उत्पादन और निर्यात के बीच लगातार संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती है।

    नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट, कानपुर के पूर्व निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन के अनुसार देश में हर वर्ष घरेलू खपत के लिए करीब 280 लाख टन चीनी की आवश्यकता होती है। इसके बाद उपलब्ध अतिरिक्त मात्रा में से ही एथेनॉल उत्पादन या निर्यात के लिए चीनी के इस्तेमाल की अनुमति दी जाती है। चालू वर्ष में करीब 31 लाख टन चीनी के बराबर मात्रा एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल की गई, जबकि लगभग सात लाख टन चीनी का निर्यात हुआ है।

    विशेषज्ञ के मुताबिक चालू वर्ष में देश का चीनी उत्पादन लगभग 306 लाख टन रहा है और इसके साथ पिछले वर्ष का कैरी-ओवर स्टॉक भी उपलब्ध था। सामान्य परिस्थितियों में देश में पर्याप्त बफर स्टॉक रखा जाता है, ताकि उत्पादन या आपूर्ति में अचानक कमी आने की स्थिति में घरेलू बाजार प्रभावित न हो। इसलिए केवल एथेनॉल के लिए चीनी डायवर्जन को मौजूदा कीमत वृद्धि का सीधा कारण मानना उचित नहीं है।

    प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने एथेनॉल को चीनी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण बदलाव वाला क्षेत्र बताया। पहले जब देश में चीनी का उत्पादन घरेलू मांग से काफी अधिक हो जाता था, तब अतिरिक्त चीनी की वजह से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ता था। इससे चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती थी और किसानों को गन्ने का भुगतान मिलने में भी परेशानी पैदा होती थी। निर्यात एक विकल्प जरूर था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों और प्रतिस्पर्धा के कारण यह हमेशा लाभदायक नहीं रहता था।

    ऐसी परिस्थितियों में अतिरिक्त चीनी को एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करने की नीति ने उद्योग को एक वैकल्पिक बाजार दिया। इससे चीनी की अधिकता को नियंत्रित करने के साथ ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिला और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिली। विशेषज्ञों के अनुसार सरकार उत्पादन के अनुमान और घरेलू जरूरतों को देखते हुए समय-समय पर एथेनॉल डायवर्जन तथा चीनी निर्यात से जुड़े फैसले ले सकती है।

    बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के गन्ना शोध विभाग के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरिओम ने मौजूदा स्थिति में गुणवत्तापूर्ण गन्ने के उत्पादन और चीनी रिकवरी को महत्वपूर्ण कारक बताया। उनके अनुसार उत्तर भारत में इस समय गन्ना पेराई का अपेक्षाकृत कमजोर दौर चल रहा है। मुख्य पेराई सीजन शुरू होने के बाद बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ने की संभावना है, जिससे कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

    गन्ने की फसल अवधि और रिकवरी में राज्यों के बीच अंतर भी चीनी उत्पादन को प्रभावित करता है। उत्तर भारत में किसान सामान्यतः करीब 10 से 11 महीने में तैयार होने वाली फसल लेते हैं, जबकि महाराष्ट्र में गन्ना लगभग 13 से 14 महीने और तमिलनाडु में कुछ परिस्थितियों में 18 महीने तक खेत में रहता है। लंबी अवधि से गन्ने में चीनी संचय और रिकवरी बेहतर हो सकती है।

    डॉ. हरिओम के अनुसार उत्तर भारत में किसान धान की कटाई के बाद अक्टूबर-नवंबर में गन्ने की खेती शुरू करने के साथ गेहूं, सरसों, मसूर, चना और सब्जियों जैसी अंतरवर्ती फसलों का विकल्प अपना सकते हैं। इससे अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ सकते हैं और गन्ने की खेती की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार की संभावना बन सकती है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी की कीमतों को समझने के लिए केवल एथेनॉल डायवर्जन पर ध्यान देने के बजाय गन्ने के उत्पादन, रिकवरी, पेराई चक्र और बाजार में उपलब्ध स्टॉक को भी समान रूप से देखना जरूरी है।

  • डॉक्टर की चेतावनी, परिवार से छुपाया सच और फिर नई शुरुआत, राम कपूर ने सुनाई संघर्ष से वापसी की कहानी

    डॉक्टर की चेतावनी, परिवार से छुपाया सच और फिर नई शुरुआत, राम कपूर ने सुनाई संघर्ष से वापसी की कहानी

    नई दिल्ली ।लोकप्रिय अभिनेता राम कपूर ने रियलिटी शो ‘लॉक अप 2’ में अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने सभी को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि करियर के शिखर पर पहुंचने के बावजूद वह मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन दौर से गुजर रहे थे। अभिनेता ने स्वीकार किया कि एक समय उनकी सेहत इतनी खराब हो गई थी कि डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर परिणामों की चेतावनी दी थी। सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने इस स्थिति की जानकारी अपनी पत्नी गौतमी कपूर और परिवार के अन्य सदस्यों से भी लंबे समय तक छुपाकर रखी।

    राम कपूर ने कहा कि जिस समय उन्हें टीवी धारावाहिक ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ से व्यापक लोकप्रियता मिल रही थी, उसी दौरान उनका निजी जीवन कई चुनौतियों से घिरा हुआ था। बाहर से सब कुछ सामान्य और सफल दिखाई देता था, लेकिन भीतर वह लगातार मानसिक तनाव और अवसाद का सामना कर रहे थे। उन्होंने बताया कि लगातार काम का दबाव, अनियमित दिनचर्या और अपनी सेहत की अनदेखी ने उनकी स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया।

    अभिनेता ने बताया कि समय के साथ उनका वजन लगातार बढ़ता गया और जीवनशैली पूरी तरह असंतुलित हो गई। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौर में उन्होंने अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं दी। जब चिकित्सकीय जांच कराई गई तो डॉक्टरों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उन्होंने तुरंत अपनी आदतों में सुधार नहीं किया, तो आने वाले समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनका ब्लड शुगर स्तर कई बार सामान्य सीमा से काफी ऊपर पहुंच जाता था, जिससे जोखिम लगातार बढ़ रहा था।

    राम कपूर ने अपने व्यवहार को याद करते हुए आत्मस्वीकृति भी जताई। उन्होंने कहा कि सफलता और व्यस्तता के बीच वह खुद को खो बैठे थे। उन्होंने माना कि वह शूटिंग पर समय से नहीं पहुंचते थे, कई बार अनुशासन का पालन नहीं करते थे और सहकर्मियों के साथ भी उनका व्यवहार पहले जैसा नहीं रह गया था। उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय की अपनी गलतियों को याद करके आज भी उन्हें अफसोस होता है और वह उस दौर को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी सीख मानते हैं।

    उन्होंने यह भी बताया कि अपनी मानसिक और शारीरिक परेशानियों के बारे में उन्होंने परिवार को पूरी सच्चाई नहीं बताई थी। उनका मानना था कि इससे उनके अपने लोग अनावश्यक रूप से चिंतित हो जाएंगे। हालांकि समय के साथ उन्हें यह एहसास हुआ कि मुश्किल परिस्थितियों में परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने कहा कि उनके बच्चों ने उन्हें जीवन को नए नजरिए से देखने की प्रेरणा दी और आगे बढ़ने का हौसला दिया। उनके अनुसार यदि परिवार का भावनात्मक सहारा नहीं मिलता, तो परिस्थितियां और अधिक कठिन हो सकती थीं।

    राम कपूर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपने जीवन में कई सकारात्मक बदलाव किए हैं। उन्होंने अपनी दिनचर्या, खानपान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना शुरू किया तथा मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी लगातार प्रयास किए। अभिनेता का कहना है कि अब वह पहले की तुलना में अधिक संतुलित, खुश और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। उन्होंने अपने अनुभव के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि सफलता के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य, अनुशासित जीवनशैली और परिवार का साथ भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यही कठिन समय में व्यक्ति को संभालने की सबसे बड़ी ताकत बनते हैं।

  • घाटे से उबरने की तैयारी कर रही Air India, अगले 18 महीनों में बेड़े में जुड़ेंगे 50-60 नए विमान

    घाटे से उबरने की तैयारी कर रही Air India, अगले 18 महीनों में बेड़े में जुड़ेंगे 50-60 नए विमान


    नई दिल्‍ली । एयरलाइन सेक्‍टर के इतिहास में टाटा ग्रुप की तरफ से एअर इंडिया का अध‍िग्रहण करना सबसे बड़ी डील में एक रहा. घाटे में चल रही एयरलाइन को फ‍िर से प्रॉफ‍िट में लाने के लि‍ए टाटा ग्रुप ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम चला रहा है. हालांकि, ग्‍लोबल लेवल पर एयरलाइन इंडस्‍ट्री को प्रभावित करने वाली कई घटनाओं के बाद एअर इंडिया का यह मिशन सही रास्ते पर आगे बढ़ रहा है. एअर इंडिया ग्रुप के एक अध‍िकारी के अनुसार एयरलाइन आने वाले डेढ़ साल के अंदर अपने बेड़े में 50 से 60 नए और आधुन‍िक व‍िमान शामिल करने जा रही है.

    एअर इंडिया के सीओओ और एअर इंडिया एक्सप्रेस के चेयरमैन निपुण अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत के दौरान एअर इंडिया के रीस्‍ट्रक्‍चर‍िंग को लेकर जानकारी दी. उन्होंने माना क‍ि जनवरी 2022 में टाटा ग्रुप की तरफ से कमान संभालने के बाद से पिछले कुछ साल में मैनेजमेंट को काफी सीखने को मिला है. उन्‍होंने कहा क‍ि एयरलाइन इंडस्‍ट्री पिछले कुछ समय से क्राइस‍िस से गुजर रही है. इस बदलाव की यात्रा की शुरुआत हुई तब किसी ने भी ग्‍लोबल लेवल पर आने वाली इन बाधाओं का अनुमान नहीं लगाया था.

    कई घटनाओं से एयरलाइन की रफ्तार पर लगा ब्रेक
    सप्लाई चेन की ग्‍लोबल द‍िक्‍कतें, अलग-अलगी देशों के एयरस्पेस से जुड़े विवाद, तेल की कीमत में उतार-चढ़ाव और जियोपॉलिटिकल टेंशन जैसी कई अप्रत्याशित घटनाओं ने एयरलाइन की रफ्तार को प्रभावित करने की कोशिश की है. एयर इंड‍िया ने पिछले कुछ समय के दौरान कई गंभीर और दर्दनाक झटकों का सामना किया है. इन मुश्किलों और मीडिया में आ रही ऐसी खबरों के बीच, जिनमें कहा जा रहा था कि एयर इंड‍िया का ट्रांसफॉर्मेशन प्लान तय समय से पिछड़ सकता है, निपुण अग्रवाल ने स्थिति साफ की है.

    विमानों की मेंटीनेंस पर भारी खर्च क‍िया जा रहा
    एयर इंडिया ने पांच साल का जो खाका तैयार किया है, उसके तहत विमानों के आधुनिकीकरण से लेकर विमानों की मरम्मत और रखरखाव के क्षेत्र में भारी निवेश किया जा रहा है. एअर इंडिया ने करीब 600 नए विमानों का विशाल ऐतिहासिक ऑर्डर दे रखा है, जिसमें से अभी तक 10 प्रतिशत से भी कम विमानों की डिलीवरी हो पाई है. यह ऑर्डर बुक इतनी बड़ी है कि इसके तहत विमानों की सप्‍लाई अगले दशक के म‍िड यानी 2035 तक जारी रहेगी. अगले सात से आठ साल तक हर साल बेड़े में 50 से 60 नए विमान जोड़े जाएंगे.

    मौजूदा बेड़े को पूरी तरह बदलने की तैयारी
    इस रणनीति के तहत एयर इंड‍िया को हर साल 10 से 15 बड़े साइज के विमान (वाइड-बॉडी) और 45 से 50 छोटे साइज के नैरो-बॉडी व‍िमान की स्ट्रीम मिलती रहेगी. अगले 18 महीने के अंदर ग्रुप के पास करीब 60 नए विमान उपलब्ध होंगे. नए विमानों को शामिल करने के साथ ही एअर इंडिया अपने मौजूदा बेड़े को पूरी तरह बदलने में जुटी है. वाइड-बॉडी प्‍लेन को अगले दो से तीन साल में पूरी तरह नया रूप दे दिया जाएगा. कंपनी के बोइंग 787 (ड्रीमलाइनर) विमानों का नवीनीकरण अगले साल के म‍िड तक पूरा हो जाएगा, जबकि बोइंग 777 विमानों के केबिन को बदलने में थोड़ा अधिक समय लगेगा.

    अभी 290 से ज्‍यादा प्‍लेन का बेड़ा
    कंपनी को बोइंग मैक्स 8 विमानों की डिलीवरी लगातार मिल रही है और एअर इंडिया दुनिया की उन चुनिंदा एयरलाइंस में शामिल होगी, जिसे बोइंग मैक्स 10 विमानों की पहली खेप मिलेगी. मौजूदा समय में एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के पास 290 से ज्‍यादा प्‍लेन का बेड़ा है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और तेल की आसमान छूती कीमत के कारण एयरलाइन को अपनी कुछ इंटरनेशनल फ्लाइट और सर्व‍िस में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा था.

  • '10 मिनट तक थम गई थी धड़कन', श्रेयस तलपड़े ने सुनाया जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई का दर्दनाक अनुभव

    '10 मिनट तक थम गई थी धड़कन', श्रेयस तलपड़े ने सुनाया जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई का दर्दनाक अनुभव

    नई दिल्ली । अभिनेता श्रेयस तलपड़े ने हाल ही में अपने जीवन के सबसे कठिन दौर को याद करते हुए उस घटना का जिक्र किया, जब उन्हें अचानक कार्डियक अरेस्ट आया था। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उनकी दिल की धड़कन करीब 10 मिनट तक बंद रही थी। यह अनुभव उनके लिए जीवन बदल देने वाला साबित हुआ और इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बना लिया।

    श्रेयस ने कहा कि घटना से पहले उन्हें लगातार थकान महसूस हो रही थी, लेकिन व्यस्त दिनचर्या के कारण उन्होंने इन संकेतों को गंभीरता से नहीं लिया। काम पूरा करने के बाद उन्हें बेचैनी, सांस लेने में परेशानी और हाथ में दर्द महसूस हुआ। शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य समस्या समझा, लेकिन कुछ ही देर में उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। समय रहते अस्पताल पहुंचने के कारण उन्हें तुरंत आपातकालीन उपचार मिल सका।

    अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर देखते हुए तुरंत आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया शुरू की। उपचार के दौरान उनकी एंजियोप्लास्टी की गई और लगातार प्रयासों के बाद उनकी जान बचाई जा सकी। होश में आने के बाद जब उन्हें पूरी घटना के बारे में जानकारी मिली तो उन्हें एहसास हुआ कि वह मौत के बेहद करीब पहुंच चुके थे। उन्होंने कहा कि उस पल ने उन्हें जीवन की असली अहमियत समझा दी।

    श्रेयस के अनुसार इस घटना के बाद उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। पहले वह लगातार काम को प्राथमिकता देते थे, लेकिन अब परिवार, स्वास्थ्य और मानसिक शांति को सबसे अधिक महत्व देते हैं। उन्होंने अपनी दिनचर्या में नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को शामिल किया है। उनका मानना है कि शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, अत्यधिक थकान या किसी भी तरह की असामान्य शारीरिक परेशानी महसूस हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। उनके अनुसार कई बार लोग व्यस्तता या लापरवाही के कारण शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है। समय पर इलाज मिलने से कई गंभीर परिस्थितियों से बचा जा सकता है।

    अभिनेता ने यह भी कहा कि इस अनुभव ने उन्हें परिवार और रिश्तों की अहमियत पहले से कहीं अधिक समझाई। अब वह हर दिन को एक नए अवसर की तरह जीने की कोशिश करते हैं और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने माना कि सफलता और व्यस्तता से कहीं अधिक जरूरी स्वस्थ रहना है, क्योंकि अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। कार्डियक अरेस्ट से उबरने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपने पेशेवर जीवन में वापसी की और अब अपने अनुभव के जरिए लोगों को हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी दे रहे हैं।

  • दो महीने की मुश्किल रिकवरी के बाद लौटीं सुमोना चक्रवर्ती, बीमारी से जंग जीतकर महिलाओं के लिए बनीं नई उम्मीद

    दो महीने की मुश्किल रिकवरी के बाद लौटीं सुमोना चक्रवर्ती, बीमारी से जंग जीतकर महिलाओं के लिए बनीं नई उम्मीद

    नई दिल्ली । टीवी अभिनेत्री सुमोना चक्रवर्ती ने एंडोमेट्रियोसिस जैसी गंभीर बीमारी से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद अपनी सेहत को लेकर भावुक अनुभव साझा किया है। करीब दो महीने तक सार्वजनिक जीवन और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने के बाद उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्होंने पूरी तरह अपनी रिकवरी पर ध्यान दिया। अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में बीमारी के कठिन दौर, सर्जरी, मानसिक संघर्ष और जीवन के प्रति बदले नजरिए का जिक्र करते हुए कहा कि अब वह पहले से बेहतर महसूस कर रही हैं।

    सुमोना ने बताया कि 4 मई को उनकी एंडोमेट्रियोसिस की सर्जरी हुई थी। उन्होंने काफी समय तक दवाइयों और उपचार के जरिए बीमारी को नियंत्रित रखने की कोशिश की, लेकिन जब स्थिति अधिक जटिल हो गई तो ऑपरेशन कराना आवश्यक हो गया। सर्जरी के बाद डॉक्टरों की देखरेख और नियमित उपचार के कारण उनकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है।

    अभिनेत्री ने कहा कि पिछले दो महीनों ने उन्हें जीवन को बेहद करीब से समझने का अवसर दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि बीमारी के दौरान कई ऐसे पल आए जब उन्हें लगा कि शायद अब जिंदगी का सबसे कठिन मोड़ सामने है। हालांकि उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और सकारात्मक सोच के साथ इलाज और रिकवरी की प्रक्रिया को अपनाया। उनके अनुसार मानसिक मजबूती ने इस कठिन समय से बाहर निकलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    सुमोना ने अपनी पोस्ट में मेडिकल टीम और डॉक्टरों का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की देखरेख और परिवार तथा करीबी लोगों के सहयोग ने उन्हें इस चुनौतीपूर्ण दौर से उबरने का आत्मविश्वास दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अब वह पहले की तुलना में अधिक स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस कर रही हैं।

    उन्होंने यह भी साझा किया कि शुरुआत में उनका मन सोशल मीडिया से हमेशा के लिए दूर हो जाने का था। लेकिन बाद में उन्हें महसूस हुआ कि उनके अनुभव कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने तय किया कि वह अपने मंच का उपयोग महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस और महिलाओं से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए करेंगी। उनका उद्देश्य ऐसा सुरक्षित वातावरण तैयार करना है, जहां महिलाएं बिना झिझक अपने अनुभव साझा कर सकें और एक-दूसरे का मनोबल बढ़ा सकें।

    रिकवरी के दौरान सुमोना ने अपने 38वें जन्मदिन को भी बेहद सादगी से मनाया। उन्होंने आखिरी समय में इस्तांबुल की यात्रा का निर्णय लिया और बिना किसी बड़े समारोह के अपना जन्मदिन बिताया। उन्होंने बताया कि इस बार उन्होंने यात्रा, पसंदीदा जापानी भोजन और एक साधारण चीज़केक के साथ इस खास दिन को यादगार बनाया। उनके लिए यह यात्रा मानसिक रूप से नई शुरुआत का प्रतीक रही।

    गौरतलब है कि सुमोना चक्रवर्ती ने वर्ष 2021 में पहली बार सार्वजनिक रूप से बताया था कि वह स्टेज-4 एंडोमेट्रियोसिस से जूझ रही हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने इस बीमारी के कारण कई शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना किया था। अब सफल सर्जरी और बेहतर स्वास्थ्य के बाद उन्होंने अपने अनुभव साझा कर इस बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया है। अभिनय के क्षेत्र में सुमोना कई लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों, कॉमेडी शोज और फिल्मों का हिस्सा रह चुकी हैं तथा उनके प्रशंसक जल्द ही उन्हें नए प्रोजेक्ट्स में देखने की उम्मीद कर रहे हैं।