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  • शिवपुरी में बीआरसीसी और एपीसी की नियुक्तियों पर फिर लगी रोक, राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी किए नए निर्देश

    शिवपुरी में बीआरसीसी और एपीसी की नियुक्तियों पर फिर लगी रोक, राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी किए नए निर्देश

    मध्य प्रदेश । के शिवपुरी जिले में बीआरसीसी और एपीसी पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। 30 अक्टूबर को जिला पंचायत सभागार में प्रस्तावित काउंसलिंग के जरिए 12 रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जानी थीं, लेकिन राज्य शिक्षा केंद्र से मिले नए निर्देशों के बाद फिलहाल इस प्रक्रिया पर रोक लग गई है। निर्देशों के अनुसार, संबंधित न्यायालयीन प्रकरणों का निराकरण होने तक नियुक्ति की आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे नियुक्ति की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को फिलहाल इंतजार करना पड़ेगा।

    जिला परियोजना समन्वयक दफेदार सिंह सिकरवार के अनुसार, शिवपुरी में नियुक्ति प्रक्रिया के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। निर्धारित कार्यक्रम के तहत 30 अक्टूबर को जिला पंचायत सभागार में काउंसलिंग होनी थी। इसके बाद परीक्षा के परिणाम के आधार पर रिक्त पदों पर चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी। हालांकि, राज्य स्तर से मिले नए दिशा-निर्देशों के कारण तय कार्यक्रम को रोकना पड़ा है।

    यह मामला सहायक परियोजना समन्वयक यानी एपीसी और बीआरसीसी पदों पर नियोजन से जुड़ा है। राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल ने न्यायालय के निर्णय और उसके अनुपालन को लेकर कलेक्टर को पत्र जारी किया है। इसमें उच्च प्रभार और कूलिंग पीरियड से संबंधित प्रावधानों के तहत आवेदकों को परीक्षा में शामिल करने के न्यायालयीन निर्देशों का उल्लेख किया गया है।

    इन निर्देशों के अनुपालन में शिवपुरी जिले में 16 याचिकाकर्ताओं को परीक्षा में शामिल किया गया था। योजना के अनुसार, परीक्षा परिणाम के आधार पर 30 अक्टूबर को होने वाली काउंसलिंग के बाद नियुक्ति से संबंधित अगली प्रक्रिया पूरी की जानी थी। लेकिन नियुक्तियों से जुड़े न्यायालयीन मामलों के चलते अब पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि काउंसलिंग की अगली तारीख कब निर्धारित की जाएगी।

    राज्य शिक्षा केंद्र ने अपने नए निर्देशों में न्यायालयीन प्रकरणों से निपटने के लिए जिला स्तर पर जिम्मेदारी तय करने को कहा है। जिन जिलों में नियुक्ति से जुड़े मामले न्यायालय में लंबित हैं, वहां संबंधित याचिका के अनुसार एक प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया जाना है। इस अधिकारी को प्रकरण से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय में जवाबदावा प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

    निर्देशों में यह भी कहा गया है कि जवाबदावा तत्काल प्रस्तुत किया जाए और न्यायालय से मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया जाए। इसका उद्देश्य लंबित प्रकरणों में न्यायालय के समक्ष संबंधित पक्ष का जवाब समय पर प्रस्तुत करना है। राज्य शिक्षा केंद्र ने उन जिलों के लिए भी स्थिति स्पष्ट की है, जहां इस प्रकार के न्यायालयीन प्रकरण नहीं हैं। ऐसे जिलों में 2 सितंबर 2026 को जारी पूर्व पत्र के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जानी है।

    ये निर्देश राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह की ओर से 29 अक्टूबर को जारी किए गए। इसके बाद शिवपुरी में नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय न्यायालयीन मामलों से संबंधित निर्देशों के पालन की तैयारी शुरू कर दी गई है।

    दफेदार सिंह सिकरवार ने बताया कि नए आदेश के बाद नियुक्ति प्रक्रिया कब शुरू हो सकेगी, इसका पता आगे की स्थिति स्पष्ट होने पर ही चलेगा। फिलहाल जिला स्तर पर प्रभारी अधिकारी नियुक्त करने और निर्देशों के अनुपालन की तैयारी की जा रही है। ऐसे में 12 पदों पर चयन की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को काउंसलिंग और नियुक्ति के लिए नई तारीख घोषित होने तक इंतजार करना होगा।

  • मोहन सरकार ने मध्य प्रदेश में 1.24 लाख पदों को दी मंजूरी, ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा पद

    मोहन सरकार ने मध्य प्रदेश में 1.24 लाख पदों को दी मंजूरी, ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा पद

    मध्य प्रदेश: में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में बड़े पैमाने पर पदों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने कैबिनेट के माध्यम से कुल 1.24 लाख पद स्वीकृत किए हैं। इनमें ऊर्जा, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, गृह और परिवहन विभाग सहित अन्य पद शामिल हैं। इस फैसले से प्रदेश में सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने की योजना सामने आई है।

    स्वीकृत पदों की संख्या के लिहाज से ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग सबसे आगे हैं। हालांकि, पदों को मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि सभी पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया एक साथ शुरू हो जाएगी। उम्मीदवारों को संबंधित विभागों की आधिकारिक भर्ती अधिसूचनाओं और नियुक्ति कार्यक्रम का इंतजार करना होगा।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ऊर्जा विभाग में 52 हजार पदों को मंजूरी दी गई है। वहीं, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 47 हजार पद स्वीकृत किए गए हैं। इन दोनों विभागों में पदों की संख्या सबसे अधिक है। भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने पर इन क्षेत्रों में विभिन्न योग्यताओं वाले अभ्यर्थियों के लिए अवसर सामने आ सकते हैं। हालांकि, पदों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और अन्य पात्रता शर्तों की जानकारी संबंधित भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

    महिला एवं बाल विकास विभाग में 13,200 पदों को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा गृह विभाग में 9,662 और परिवहन विभाग में 1,800 पद स्वीकृत किए गए हैं। राज्य में तीन नए जिलों के लिए भी 1,240 पदों को मंजूरी मिली है। इन विभागों और नए जिलों से जुड़े पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया किस चरण में और कब शुरू होगी, इसकी जानकारी आगे जारी होने वाले सरकारी आदेशों और भर्ती सूचनाओं से मिलेगी।

    पुलिस में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी भर्ती बोर्ड से जुड़ा प्रस्ताव महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती के लिए अलग बोर्ड गठित करने की योजना है। फिलहाल इसका गठन प्रस्तावित है और प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। बोर्ड के गठन के बाद पुलिस भर्ती से संबंधित व्यवस्था को स्वतंत्र रूप से संचालित करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, भर्ती बोर्ड के गठन, पदों की संख्या और आवेदन की तारीख को लेकर आधिकारिक घोषणा के बिना किसी निश्चित समयसीमा का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

    सरकार की योजना में नियमित नियुक्तियों के साथ संविदा और आउटसोर्स पद भी शामिल हैं। इसलिए मंजूर किए गए 1.24 लाख पदों को एक साथ निकलने वाली सरकारी नौकरियों की संख्या समझना सही नहीं होगा। स्वीकृत पदों में से किस विभाग में कितनी नियुक्तियां होंगी और भर्ती किस चरण में आगे बढ़ेगी, यह संबंधित विभागों की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए अब विभागवार भर्ती विज्ञापनों पर नजर रखना अहम होगा। आवेदन करने से पहले पद का विवरण, शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, चयन प्रक्रिया और आवेदन की अंतिम तारीख की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना से जांचनी चाहिए। पदों को मंजूरी मिलना भर्ती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन वास्तविक अवसरों की स्थिति भर्ती प्रक्रिया शुरू होने और अधिसूचनाएं जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट मास्टर के 20 पदों पर भर्ती, ग्रेजुएट उम्मीदवार 15 नवंबर तक कर सकते हैं आवेदन

    सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट मास्टर के 20 पदों पर भर्ती, ग्रेजुएट उम्मीदवार 15 नवंबर तक कर सकते हैं आवेदन

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में नौकरी पाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए भर्ती का अवसर सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट मास्टर (शॉर्टहैंड) के 20 संभावित रिक्त पदों पर सीधी भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 25 अक्टूबर 2026 से शुरू हो चुकी है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी 15 नवंबर 2026 को रात 11:55 बजे तक आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को निर्धारित समयसीमा के भीतर आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

    इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से स्नातक की डिग्री होना आवश्यक है। इसके साथ ही अंग्रेजी शॉर्टहैंड में 120 शब्द प्रति मिनट की गति और कंप्यूटर संचालन का ज्ञान होना चाहिए। उम्मीदवार की कंप्यूटर पर अंग्रेजी टाइपिंग स्पीड कम से कम 40 शब्द प्रति मिनट होनी जरूरी है।

    शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी दक्षता के अलावा संबंधित पदों पर कार्य अनुभव भी अनिवार्य रखा गया है। अभ्यर्थियों के पास सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों या वैधानिक निकायों में प्राइवेट सेक्रेटरी, सीनियर पर्सनल असिस्टेंट, पर्सनल असिस्टेंट या सीनियर स्टेनोग्राफर के पद पर कम से कम पांच वर्ष की नियमित सेवा का अनुभव होना चाहिए। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे निर्धारित शैक्षणिक, तकनीकी और अनुभव संबंधी शर्तों को पूरा करते हैं।

    भर्ती के लिए न्यूनतम आयु सीमा 30 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 1 अक्टूबर 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित श्रेणियों से संबंधित उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा। अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पहले अपनी आयु और श्रेणी से संबंधित पात्रता की जांच कर लेनी चाहिए।

    उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में किया जाएगा। सबसे पहले प्राप्त आवेदनों की स्क्रीनिंग होगी। इसके बाद वस्तुनिष्ठ प्रकार की परीक्षा, अंग्रेजी शॉर्टहैंड परीक्षा, कंप्यूटर पर अंग्रेजी टाइपिंग स्पीड टेस्ट और व्यक्तिगत साक्षात्कार आयोजित किया जाएगा। चयन प्रक्रिया के सभी निर्धारित चरणों को पूरा करने वाले उम्मीदवारों के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा।

    कोर्ट मास्टर पद पर चयनित उम्मीदवारों को 67,700 रुपये से लेकर 2,08,700 रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिलेगा। इसके अतिरिक्त नियमानुसार अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। वेतनमान को देखते हुए यह भर्ती उन योग्य अभ्यर्थियों के लिए अवसर है, जिनके पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता के साथ शॉर्टहैंड, टाइपिंग और संबंधित कार्य का अनुभव है।

    आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को अपनी श्रेणी के अनुसार निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा। सामान्य और अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क 1,500 रुपये और बैंक शुल्क निर्धारित है। वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग की नॉन-क्रीमी लेयर श्रेणी और पूर्व सैनिकों के लिए आवेदन शुल्क 750 रुपये तथा बैंक शुल्क देना होगा।

    सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट मास्टर के इन पदों पर आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवारों को 15 नवंबर की अंतिम समयसीमा का ध्यान रखना होगा। आवेदन से पहले पात्रता,

  • मध्यप्रदेश में 750 पुलिस बैंड पदों पर भर्ती की तैयारी, मोहन यादव सरकार 2027 को मनाएगी युवा वर्ष

    मध्यप्रदेश में 750 पुलिस बैंड पदों पर भर्ती की तैयारी, मोहन यादव सरकार 2027 को मनाएगी युवा वर्ष


    मध्यप्रदेश:
    में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और पुलिस विभाग की व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए करीब 750 पुलिस बैंड पदों पर भर्ती की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार आगामी वर्ष को युवा वर्ष के रूप में मनाने की योजना बना रही है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की विशेष परीक्षा जनवरी-फरवरी में आयोजित कराने की भी तैयारी है। इन पहलों का उद्देश्य युवाओं को अवसर उपलब्ध कराने के साथ पुलिस विभाग की कार्यक्षमता और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना है।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य सरकार चाहती है कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में पुलिस बैंड की व्यवस्था हो। इसके लिए करीब 750 पदों पर भर्ती की जा रही है। इस पहल से जिलों में पुलिस बैंड तैयार करने और राष्ट्रीय पर्वों पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को अधिक व्यवस्थित तथा आकर्षक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसरों पर पुलिस बैंड की प्रस्तुति समारोह का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

    मुख्यमंत्री ने गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान पुलिस बैंड की प्रस्तुति, मधुर भजनों और पुलिसकर्मियों की दक्षता की सराहना की। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व शासन के लिए भी दीपावली के समान महत्व रखते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से देशभक्ति, राष्ट्रीय गौरव और अनुशासन की भावना व्यक्त होती है। प्रत्येक जिले में पुलिस बैंड की उपलब्धता से ऐसे आयोजनों को बेहतर ढंग से संपन्न कराने में सहायता मिल सकती है।

    सरकार की योजना केवल पुलिस बैंड तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग को नए संशोधित कानूनों के अनुरूप मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने और विभिन्न स्तरों पर नई भर्तियों सहित अन्य व्यवस्थाओं को विकसित करने पर काम किया जा रहा है। पुलिस की विवेचना और अनुसंधान प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के साथ न्यायालयों में मामलों की बेहतर पैरवी तथा संचालन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

    पुलिस विभाग की जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मी चौबीसों घंटे जनसेवा में जुटे रहते हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें कई बार लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ती है। इस दौरान वे अपने परिवार से दूर भी रहते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों के साथ उनके परिवारों का योगदान भी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि उन्हें भी ड्यूटी की परिस्थितियों के अनुसार अपने जीवन में बदलाव करने पड़ते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पुलिसकर्मियों के व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन से जुड़ी जरूरतों के प्रति संवेदनशील है। उनके कल्याण और आवश्यक सहयोग के लिए उचित कदम उठाने की प्रतिबद्धता भी जताई गई। पुलिसकर्मियों की कार्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उनकी जरूरतों पर ध्यान देना विभाग की कार्यक्षमता और सेवा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

    गार्ड ऑफ ऑनर में महिला पुलिसकर्मियों की भागीदारी को भी मुख्यमंत्री ने सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की क्षमताओं को लेकर पुरानी सोच बदलने की जरूरत है। महिलाएं अपनी योग्यता, दक्षता और सामर्थ्य के बल पर हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं और जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा सकती हैं। महिला पुलिसकर्मियों की भागीदारी को इसी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया गया।

    मुख्यमंत्री ने विजयादशमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कामना की कि दशहरे का पर्व लोगों के जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल लेकर आए। उन्होंने इस त्योहार को असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक बताया।

    मध्यप्रदेश में करीब 750 पुलिस बैंड पदों पर भर्ती, हर जिले में बैंड स्थापित करने की तैयारी और एमपीपीएससी की विशेष परीक्षा की योजना युवाओं तथा पुलिस विभाग से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणाएं हैं। सरकार ने आगामी वर्ष को युवा वर्ष के रूप में मनाने की तैयारी भी जताई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में भर्ती की विस्तृत अधिसूचना, आवेदन की तारीख और पात्रता संबंधी शर्तों का उल्लेख नहीं किया गया है।

  • मध्यप्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला, 13% होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग को तीन महीने में नियुक्ति के निर्देश

    मध्यप्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला, 13% होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग को तीन महीने में नियुक्ति के निर्देश

    मध्यप्रदेश। में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने 27 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी नहीं दी और कहा कि ओबीसी वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है। कोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में पर्याप्त आंकड़े प्रस्तुत नहीं कर सकी। अदालत ने यह भी माना कि सरकारी नौकरियों में ओबीसी वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिखाई देता है। आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा से आगे जाने के लिए जरूरी असाधारण परिस्थितियां भी सरकार साबित नहीं कर पाई।

    इस फैसले से सरकारी भर्तियों में लंबे समय से अटके 13 प्रतिशत पदों को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है। हाईकोर्ट ने इन होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने सरकार को तीन महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। इन पदों पर नियुक्तियां लंबे समय से लंबित थीं, जिससे संबंधित अभ्यर्थियों को इंतजार करना पड़ रहा था। फैसले के बाद अनारक्षित वर्ग के उन उम्मीदवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी नियुक्तियां आरक्षण विवाद के कारण रुकी हुई थीं।

    अदालत ने पहले से नियुक्त उम्मीदवारों को भी राहत दी है। फैसले के अनुसार, मार्च 2019 से 29 सितंबर 2022 के बीच हुई कुछ नियुक्तियां रद्द नहीं की जाएंगी। इस अवधि में 14 प्रतिशत से अधिक ओबीसी आरक्षण के आधार पर नियुक्ति पाने वाले उम्मीदवारों की नौकरी पर भी फैसले का असर नहीं पड़ेगा। इस तरह अदालत ने लंबित पदों पर नियुक्तियों के साथ पहले से कार्यरत अभ्यर्थियों की स्थिति को लेकर भी निर्देश दिए हैं।

    यह फैसला जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डबल बेंच ने सुनाया। दोनों न्यायाधीशों ने लाइव कोर्ट में पांच प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से निर्णय का सार समझाया। इनमें ओबीसी वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण को सही मानना, 27 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में पर्याप्त आंकड़े नहीं होना, 50 प्रतिशत की सीमा पार करने के लिए असाधारण परिस्थितियों का साबित नहीं होना, 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर नियुक्तियां और पहले से नियुक्त उम्मीदवारों को राहत देना शामिल है।

    मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का विवाद वर्ष 2019 से चल रहा है। तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने मार्च 2019 में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का फैसला लिया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर हुईं और बढ़े हुए आरक्षण को लागू करने पर कानूनी रोक लगी। जुलाई 2019 में राज्य सरकार ने संबंधित आरक्षण कानून में संशोधन कर 27 प्रतिशत आरक्षण को वैधानिक आधार देने की कोशिश की, लेकिन विवाद जारी रहा।

    भर्तियों के परिणाम अटकने के बीच सितंबर 2022 में सरकार ने 87-13 प्रतिशत का फार्मूला अपनाया। इसके तहत 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के आधार पर 87 प्रतिशत पदों के परिणाम जारी करने और शेष 13 प्रतिशत पदों को होल्ड रखने की व्यवस्था की गई। इससे कई भर्तियों में नियुक्तियों का मामला लंबित रहा। ओबीसी वर्ग की ओर से प्रदेश में अपनी आबादी लगभग 52 प्रतिशत होने का दावा करते हुए 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग की जाती रही, जबकि सामान्य वर्ग के कुछ संगठनों ने इसका विरोध किया।

    यह मुद्दा राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा में रहा। राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने और होल्ड किए गए 13 प्रतिशत पदों पर निर्णय लेने की मांग की थी। इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद भी यह मुद्दा उठाया गया था। अब हाईकोर्ट के फैसले से आरक्षण और नियुक्तियों से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण दिशा सामने आई है। हालांकि, फैसले के सभी कानूनी प्रभावों की विस्तृत स्थिति लिखित आदेश के सामने आने के बाद स्पष्ट होगी।

  • गाजियाबाद में पुलिस भर्ती दौड़ के दौरान दो अभ्यर्थियों की मौत, 12 की तबीयत बिगड़ी

    गाजियाबाद में पुलिस भर्ती दौड़ के दौरान दो अभ्यर्थियों की मौत, 12 की तबीयत बिगड़ी


    नई दिल्ली ।
    गाजियाबाद के गोविंदपुरम स्थित पीएसी की 47वीं बटालियन के मैदान में उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान दो अभ्यर्थियों की मौत हो गई। यह घटना पांच और छह अक्टूबर को आयोजित दौड़ के दौरान हुई। मृतकों में मथुरा निवासी 26 वर्षीय अतुल कुमार और शामली निवासी 23 वर्षीय विवेक कुमार शामिल हैं। वहीं, मंगलवार को दौड़ के दौरान तबीयत बिगड़ने पर 12 अभ्यर्थियों को संयुक्त जिला अस्पताल ले जाया गया। इनमें कुछ अभ्यर्थियों को सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द और कमजोरी की शिकायत हुई, जबकि तीन के पैर में फ्रैक्चर भी सामने आया।

    पुलिस के अनुसार, मथुरा जिले के गांव कारब निवासी अतुल कुमार पुत्र सतीश चंद्र 5 अक्टूबर को सिपाही भर्ती की दौड़ में शामिल हुए थे। दौड़ के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत गंभीर होने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं, शामली जिले के गांव पुरमाफी निवासी 23 वर्षीय विवेक कुमार पुत्र बालेंद्र सिंह की मंगलवार को दौड़ के बाद तबीयत बिगड़ गई। उन्हें संयुक्त जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

    एसीपी कविनगर अभय डागा के मुताबिक, दोनों अभ्यर्थियों की दौड़ के दौरान तबीयत बिगड़ी थी और इसी दौरान उनकी मौत हुई। मौत की सही वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगी। दोनों शवों का पोस्टमॉर्टम कराया गया है। पुलिस ने मामले में मौत के सटीक कारण का पता लगाने के लिए रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कही है।

    संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय गुप्ता के अनुसार, मंगलवार को 12 अभ्यर्थियों को उपचार के लिए अस्पताल लाया गया। इनमें विवेक को मृत अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया था। अन्य अभ्यर्थियों में किसी को सांस लेने में परेशानी हुई तो किसी ने सीने में दर्द और कमजोरी की शिकायत की। शामली निवासी अंकुर के दाएं पैर में परेशानी थी, जबकि मथुरा निवासी योगेश को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत के बाद उपचार दिया गया। गोविंदपुरम निवासी राहुल को सामान्य कमजोरी की शिकायत थी। भाविक और गौरव को सांस लेने में परेशानी हुई, जबकि सूरज को सीने में दर्द के बाद इमरजेंसी में इलाज दिया गया।

    मथुरा निवासी हेमेंद्र और बंटी को भी सांस संबंधी परेशानी के कारण अस्पताल में भर्ती किया गया। मथुरा निवासी अंकित को सीने में दर्द होने पर हायर सेंटर रेफर किया गया, जबकि सचिन को सांस लेने में परेशानी के कारण इमरजेंसी में भर्ती किया गया। इलाज के बाद कुछ अभ्यर्थियों की हालत में सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ का उपचार जारी रहा। इससे पहले सोमवार को भी दौड़ के दौरान कई अभ्यर्थियों को चोट और तबीयत बिगड़ने के कारण अस्पताल पहुंचाया गया था। मेरठ निवासी गौरव और मुकीमपुर निवासी कृष्णा के पैर में फ्रैक्चर होने पर उन्हें रेफर किया गया था। मेरठ के भासुमा गांव निवासी सौरव भी गंभीर रूप से घायल हुए थे।

    यूपी पुलिस आरक्षी भर्ती की दौड़ 3 से 9 अक्टूबर तक आयोजित की जा रही है। 3, 5 और 6 अक्टूबर को पुरुष अभ्यर्थियों की दौड़ हुई, जिसमें प्रतिदिन करीब 875 अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। 7 अक्टूबर को महिला अभ्यर्थियों की दौड़ निर्धारित है, जिसमें करीब 650 अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है। दौड़ के लिए सुबह पांच बजे से प्रवेश शुरू होता है और पूरी प्रक्रिया सुबह नौ बजे तक पूरी की जाती है। अतुल और विवेक के परिजन उन्हें पुलिस की वर्दी में देखने का सपना लेकर भर्ती में भेजे थे, लेकिन दोनों की मौत के बाद परिवारों में मातम छा गया।

  • MP News: 3,357 कर्मचारियों की पदोन्नति, 44 आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति, अगले साल 1 लाख भर्तियों का लक्ष्य

    MP News: 3,357 कर्मचारियों की पदोन्नति, 44 आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति, अगले साल 1 लाख भर्तियों का लक्ष्य


    भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के रवींद्र भवन में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के पदोन्नत शासकीय सेवकों द्वारा आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में कर्मचारियों और उनके परिवारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी। इस दौरान विभिन्न विभागों के 44 दिवंगत शासकीय सेवकों के आश्रित सदस्यों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों की पदोन्नति केवल उनके लिए खुशी का विषय नहीं है, बल्कि सरकार के लिए भी संतोष की बात है कि वह अपने अधिकारी-कर्मचारियों के हितों की चिंता कर रही है।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, कुल 3,357 शासकीय सेवकों को पदोन्नति मिली है। इनमें 1,725 अधिकारी-कर्मचारी, कृषि विपणन बोर्ड के 1,439 कर्मचारी और कृषि अभियांत्रिकी के 139 कर्मचारी शामिल हैं। उन्होंने सभी पदोन्नत शासकीय सेवकों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ-साथ उन परिवारों की भी चिंता कर रही है, जिन्होंने असमय अपने किसी स्वजन को खोया है। इसी क्रम में अब तक करीब 300 अनुकंपा प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है और 44 युवाओं को सहायक वर्ग-3 के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जा रही है।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े बाकी लंबित प्रकरणों का भी जल्द निराकरण किया जाए और इन्हें शून्य लंबित मामलों की स्थिति तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि असमय अपने लोगों को खोने वाले परिवारों के दर्द को समझना जरूरी है। इसी संवेदनशीलता के साथ सरकार और संबंधित विभाग इन परिवारों के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हर विभाग में कर्मचारियों की समय पर पदोन्नति और अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।

    रोजगार को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष मंडियों में 600 उपनिरीक्षकों सहित 1,500 से अधिक पदों पर नई भर्तियां की जाएंगी। उन्होंने बताया कि अब तक 85,000 नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। इसके साथ ही अगले वर्ष 1 लाख भर्तियों का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पदोन्नति, अनुकंपा नियुक्ति और नई भर्ती की प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर सरकार का जोर है, ताकि कर्मचारियों से जुड़े मामलों का निपटारा समय पर हो सके और विभागों में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध रहे।

  • JPSC पेपर लीक मामले में SIT का एक्शन, दो सफल सगे भाई गिरफ्तार, 20 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ जारी

    JPSC पेपर लीक मामले में SIT का एक्शन, दो सफल सगे भाई गिरफ्तार, 20 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ जारी

    नई दिल्ली ।झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितता के मामले में जांच कर रही एसआईटी ने शनिवार को दो सफल सगे भाइयों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए अभ्यर्थियों की पहचान दिलीप राणा और ओमप्रकाश राणा के रूप में हुई है। दोनों ने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की थी। दोनों की गिरफ्तारी केस संख्या 16/2026 में की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों पर परीक्षा में अनुचित तरीके से सफलता हासिल करने के लिए सेटिंग कराने का आरोप है।

    जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार, दोनों भाइयों ने अभय तिवारी के लिए एजेंट के तौर पर काम करने वाले बुद्धेश्वर भगत के माध्यम से परीक्षा में सेटिंग कराई थी। आरोप है कि ओएमआर शीट में हेरफेर के जरिए उन्हें 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण कराया गया। बुद्धेश्वर भगत की गिरफ्तारी के बाद उससे 11 अभ्यर्थियों के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद इन सभी अभ्यर्थियों को जांच के दायरे में रखा गया। इनमें कपिल कुमार महतो, संतोष कुमार, वंदना कुमारी, दिलीप कुमार राणा, ओमप्रकाश राणा, शिवम सिंह, पवन कुमार मुंडा, राकी सचिन लकड़ा, रोशन केरकेट्टा और उमांकांत उरांव के नाम शामिल हैं।

    इस मामले में रोशन केरकेट्टा और उमाकांत उरांव की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है और उनसे पूछताछ भी की जा चुकी है। शनिवार की कार्रवाई के बाद हजारीबाग से गिरफ्तार किए गए सफल अभ्यर्थियों की संख्या तीन हो गई है। जेपीएससी मेधा घोटाले की जांच में अब तक कुल 27 आरोपितों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। इनमें नौ ऐसे अभ्यर्थी शामिल हैं, जिन्होंने विभिन्न परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी। गिरफ्तार सफल अभ्यर्थियों में हजारीबाग के सुमन सौरभ, दीपक राणा और ओमप्रकाश राणा, लोहरदगा के उमाकांत उरांव, रांची के रोशन केरकेट्टा और मनोज कुमार, उत्तर प्रदेश के रक्षक सिंह तथा एफआरओ और एसीएफ परीक्षा में सफल ऋतिक रौशन और पंकज प्रसून्न शामिल हैं।

    इसी जांच से जुड़े सीजीएल पेपर लीक मामले में पहले गिरफ्तार किए जा चुके एजेंट दिलीप पासवान को तीन दिनों की रिमांड पर लिया गया है। उसे 14 सितंबर को पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले से गिरफ्तार किया गया था। जांच में यह बात सामने आई है कि सीजीएल परीक्षा से पहले दिलीप पासवान ने अभ्यर्थियों को आसनसोल के एक होटल में ठहराया था और उन्हें प्रश्नोत्तर रटवाए थे। शनिवार को जांच टीम ने 20 सफल अभ्यर्थियों से भी पूछताछ की। इसके अलावा जेपीएससी भर्ती परीक्षा में कथित धांधली के मामले में जेल में बंद आयोग के पूर्व अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव एल ख्यांग्ते ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है।

    एल ख्यांग्ते को इस मामले में तीन दिनों तक पूछताछ के बाद 10 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और गिरफ्तारी के बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं। उन्होंने इससे पहले रांची सिविल कोर्ट स्थित सीआईडी कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद अब उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत की मांग की है। जेपीएससी परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच में गिरफ्तारियों और पूछताछ का सिलसिला जारी है।

  • OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए सरकार ने मांगा दो साल का समय

    OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए सरकार ने मांगा दो साल का समय

    नई दिल्ली । अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC क्रीमी लेयर से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने दो साल का समय मांगा है। सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि फैसले को लागू करने की प्रक्रिया इस तरह तय की जानी चाहिए, जिससे पहले से चल रही और पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं पर अचानक असर न पड़े। अदालत ने केंद्र की इस मांग पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है।

    सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को OBC क्रीमी लेयर से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम यानी PSU या निजी क्षेत्र में कार्यरत माता या पिता के वेतन अथवा आय को अकेले ही इस आधार के रूप में नहीं माना जा सकता कि संबंधित परिवार OBC क्रीमी लेयर के दायरे में आता है। अदालत ने क्रीमी लेयर निर्धारित करने के लिए माता-पिता के पद और उनकी श्रेणी की स्थिति के साथ आय या संपत्ति से जुड़े निर्धारित मानकों को भी ध्यान में रखने की बात कही थी।

    इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सरकार का पक्ष रखा। केंद्र ने आग्रह किया कि फैसले को भविष्य में प्रभावी तरीके से लागू करने की अनुमति दी जाए। सरकार का कहना था कि अदालत द्वारा तय किए गए कानूनी सिद्धांत को लागू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त तैयारी की जरूरत होगी।

    सरकार ने दो साल की अवधि इसलिए मांगी है ताकि नई व्यवस्था लागू करते समय पहले से शुरू हो चुकी भर्ती प्रक्रियाओं में अनिश्चितता पैदा न हो। केंद्र के अनुसार, इस अवधि में अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़े मामलों को व्यवस्थित करने, प्रतिस्पर्धी उम्मीदवारों के अधिकारों में संतुलन बनाने और प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक बदलाव करने का अवसर मिलेगा।

    सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़े मामलों पर अलग-अलग उच्च न्यायालयों में विचार किया गया है। केंद्र की ओर से बताया गया कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों को सुप्रीम कोर्ट या किसी एक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने के लिए भी याचिका दायर की गई है। इससे जुड़े मामलों में एकरूपता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

    सुप्रीम कोर्ट के मूल फैसले का केंद्र सरकार ने विरोध नहीं किया है। सरकार की मांग मुख्य रूप से फैसले को लागू करने की समयसीमा से जुड़ी है। केंद्र का कहना है कि दो साल का समय मिलने से व्यवस्था में अचानक बदलाव के कारण पैदा होने वाली प्रशासनिक कठिनाइयों को कम किया जा सकेगा।

    11 मार्च के फैसले में अदालत ने OBC क्रीमी लेयर की पहचान से जुड़े मानकों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। अदालत के अनुसार, केवल माता-पिता की आय को देखकर निर्णय नहीं किया जा सकता, बल्कि उनके पद और सेवा की स्थिति को भी निर्धारित नियमों के साथ देखा जाना जरूरी है। इस व्यवस्था का संबंध उन उम्मीदवारों की पात्रता से है जो OBC आरक्षण का लाभ लेना चाहते हैं।

    अब केंद्र की ओर से मांगी गई दो साल की मोहलत पर आगे की सुनवाई में स्थिति स्पष्ट होगी। इस मामले का असर OBC क्रीमी लेयर की पात्रता और भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े प्रशासनिक नियमों पर पड़ सकता है।

  • दफ्तरों में फिर नौकरियों की बहार…., अगस्त माह में भर्तियों में हुआ 14 फीसदी का इजाफा

    दफ्तरों में फिर नौकरियों की बहार…., अगस्त माह में भर्तियों में हुआ 14 फीसदी का इजाफा


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में पिछले माह कार्यालय आधारित नौकरियों (Office-Based Jobs) में सालाना आधार पर 14 फीसदी की बढ़ोतरी (Office Jobs Rise 14 Percent) दर्ज की गई। इसमें ऑटो, स्वास्थ्य सेवा और रिटेल जैसे सेक्टरों का अहम योगदान रहा। नौकरी.डॉम (Naukri.com) की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल नौकरी जॉबस्पीक इंडेक्स पिछले साल अगस्त के 2,664 के मुकाबले बढ़कर 3,028 पर पहुंच गया। यह एक मासिक सूचकांक है, जो देश में व्हाइट-कॉलर (कार्यालय आधारित) नौकरियों के बाजार और भर्ती गतिविधियों की स्थिति को ट्रैक करता है।

    रिपोर्ट के अनुसार, वाहन क्षेत्र में भर्ती 19 फीसदी बढ़ी जबकि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में 16 प्रतिशत और खुदरा क्षेत्र में 15 फीसदी की वृद्धि हुई। इनके अलावा, बीमा क्षेत्र में 12 प्रतिशत, आईटी में 11 प्रतिशत, बैंकिंग व दैनिक उपभोग की वस्तुओं से जुड़े क्षेत्र में 10-10 प्रतिशत तथा बीपीओ/आईटीईएस, तेल एवं गैस और रियल एस्टेट क्षेत्र में 8-8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, दवा/जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भर्ती स्थिर रही, जबकि आतिथ्य एवं यात्रा क्षेत्र में भर्ती 4%घटी और शिक्षा क्षेत्र में 8 फीसदी की गिरावट आई।

    रिपोर्ट में 14 फीसदी वृद्धि को त्योहारी सीजन के कैलेंडर के संदर्भ में देखने की बात कही गई है, क्योंकि पिछले साल त्योहारी अवधि का बड़ा हिस्सा अगस्त में था, जबकि इस साल यह सितंबर में आ गया है। इन्फो एज (इंडिया) के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ हितेश ओबेरॉय ने कहा, त्योहारों वाली तिमाही के दौरान आगे बढ़ने के साथ हमें भर्ती के अंतर्निहित रुझान की अधिक स्पष्ट तस्वीर मिलेगी। नौकरी.कॉम इन्फो एज का प्रमुख ब्रांड है।


    नए स्नातकों की भर्ती 15% बढ़ी

    रिपोर्ट के अनुसार, सभी अनुभव स्तरों पर भर्ती में वृद्धि रही। नए स्नातकों की भर्ती सालाना आधार पर 15 फीसदी बढ़ी, जबकि चार से सात वर्ष के अनुभव वाले लोगों के लिए इसमें 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मध्यम से वरिष्ठ अनुभव वाले वर्गों में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। आठ से 12 वर्ष के अनुभव वालों के लिए भर्ती 16 प्रतिशत, 13 से 16 वर्ष के लिए 18 प्रतिशत और 16 वर्ष से अधिक अनुभव वालों के लिए 13 प्रतिशत बढ़ी।