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  • रूस में ईंधन संकट गहराया, रिफाइनरियों पर हमलों के बाद पेट्रोल-डीजल सप्लाई प्रभावित, पुतिन ने मानी चुनौतियां

    रूस में ईंधन संकट गहराया, रिफाइनरियों पर हमलों के बाद पेट्रोल-डीजल सप्लाई प्रभावित, पुतिन ने मानी चुनौतियां

    नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष का प्रभाव अब युद्धक्षेत्र से निकलकर आम नागरिकों के दैनिक जीवन तक पहुंचने लगा है। रूस के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें सामने आ रही हैं। ईंधन संकट को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि देश वर्तमान में कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा अवसंरचना पर लगातार हमले होने की रिपोर्टें सामने आ रही हैं।

    रूस विश्व के प्रमुख तेल उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा ऊर्जा क्षेत्र पर निर्भर करता है। हालांकि हाल के महीनों में ऊर्जा सुविधाओं पर बढ़ते हमलों ने उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ा दिया है। कई क्षेत्रों से पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों और ईंधन की सीमित उपलब्धता की जानकारी मिल रही है, जिससे आम नागरिकों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।

    रूसी नेतृत्व का कहना है कि सरकार हालात को नियंत्रित करने और आवश्यक आपूर्ति बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कृषि क्षेत्र और आवश्यक सेवाओं के लिए ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। फसल सीजन को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में डीजल की मांग बढ़ी हुई है, इसलिए सरकार इस क्षेत्र को प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम कर रही है।

    ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि तेल रिफाइनरियों पर हमलों से केवल उत्पादन ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि वितरण व्यवस्था भी बाधित होती है। कच्चे तेल को सीधे उपयोग में नहीं लाया जा सकता। इसे रिफाइनरियों में प्रसंस्कृत कर पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पादों में बदला जाता है। यदि रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होती है तो घरेलू बाजार में तैयार ईंधन की उपलब्धता कम हो सकती है, भले ही देश के पास पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल मौजूद हो।

    रूस सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए ऊर्जा निर्यात नीति की समीक्षा की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर कुछ ईंधन उत्पादों के निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों को नियंत्रित करना है।

    युद्ध के दौरान ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाए जाने से रूस की आर्थिक चुनौतियां भी बढ़ी हैं। तेल और गैस निर्यात से होने वाली आय रूस के लिए महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत मानी जाती है। यदि उत्पादन और निर्यात दोनों प्रभावित होते हैं, तो इसका असर सरकारी राजस्व और व्यापक आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि ऊर्जा सुरक्षा वर्तमान समय में रूस की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हो गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रूस को घरेलू आपूर्ति, निर्यात प्रतिबद्धताओं और ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना होगा। युद्ध के लंबे खिंचने और ऊर्जा परिसंपत्तियों पर बढ़ते दबाव के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। फिलहाल सरकार आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रही है, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियां रूस के लिए एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखी जा रही हैं।

  • केंद्र सरकार के निर्देश पर देश की तेल रिफाइनरियों ने एलपीजी का उत्पादन 10 फीसदी बढ़ाया

    केंद्र सरकार के निर्देश पर देश की तेल रिफाइनरियों ने एलपीजी का उत्पादन 10 फीसदी बढ़ाया


    नई दिल्ली।
    घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस (एलपीजी) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद देश की तेल रिफाइनरियों ने एलपीजी का उत्पादन करीब 10 फीसदी बढ़ा दिया है। सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते एलएनजी आपूर्ति में आई बाधा के बीच एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए देश की तेल रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए थे। उत्पादन बढ़ाने के बाद सभी रिफाइनरियां 100 फीसदी क्षमता पर काम कर रही हैं।


    एलपीजी की आपूर्ति को लेकर पीएम ने की उच्च स्तरीय बैठक

    एलपीजी की आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में रसोई गैस की संभावित कमी से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई।


    रसोई गैस सिलिंडर की बुकिंग का प्रतीक्षा समय बढ़ा

    केंद्र सरकार के निर्देश के बाद उत्पादन बढ़ाने के इस कदम से संभावित आपूर्ति बाधित होने को लेकर उठ रही चिंताओं को कम करने में मदद मिली है। सरकार ने घरेलू एलपीजी के दुरुपयोग और अनियमितताओं को रोकने के लिए नए गैस सिलिंडर की बुकिंग के बीच प्रतीक्षा की अवधि भी 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है।


    वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की किल्लत पर मंत्रालय ने बनाई समिति

    वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की अचानक किल्लत होने से होटल और रेस्तरां उद्योग में चिंता बढ़ने के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने आपूर्ति से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक रेस्तरां, होटलों और अन्य उद्योगों को एलपीजी आपूर्ति से संबंधित मांगों की समीक्षा के लिए तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के तीन कार्यकारी निदेशकों की एक समिति बनाई गई है।


    एलपीजी उत्पादन करने वाली इकाइयों को गैस आवंटन में मिलेगी प्राथमिकता

    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण आयात प्रभावित होने के बीच सरकार की एक अधिसूचना में कहा गया है कि अब घरेलू रूप से उत्पादित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर उन इकाइयों को की जाएगी, जो इसका उपयोग एलपीजी उत्पादन के लिए करती हैं। अभी तक संपीडित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) और घरों में पाइप के जरिये पहुंचाई जाने वाली रसोई गैस (पीएनजी) ही ऐसे दो प्राथमिकता वाले क्षेत्र थे जिन्हें कच्चे माल के रूप में घरेलू प्राकृतिक गैस मिलती थी।

    भारत में सालाना लगभग 3.13 करोड़ टन एलपीजी की खपत होती है, इसमें लगभग 87 फीसदी हिस्सा घरेलू रसोई गैस का है, जबकि बाकी का उपयोग होटल, रेस्तरां और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में होता है। देश की कुल एलपीजी जरूरत का करीब 62 प्रतिशत आयात से पूरा होता है। भारत को सऊदी अरब जैसे देशों से एलपीजी आयात का 85 से 90 फीसदी हिस्सा मिलता है।