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  • ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर केंद्र का बड़ा फोकस, सभी मंत्रालयों को सुधार लागू करने के निर्देश

    ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर केंद्र का बड़ा फोकस, सभी मंत्रालयों को सुधार लागू करने के निर्देश

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने आम नागरिकों के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ और उद्योगों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को सुधारों की पहचान कर उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना और उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सुधारों की निगरानी और प्रगति के मूल्यांकन के लिए पीएमरेफ पोर्टल पर नया ‘रिफॉर्म’ मॉड्यूल भी शुरू किया है।

    सरकार के अनुसार नया मॉड्यूल मंगलवार से कार्य करना शुरू कर चुका है और यह सभी मंत्रालयों एवं विभागों के लिए एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा। इस पोर्टल पर विभिन्न मंत्रालय अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक उपायों और सुशासन से जुड़ी पहलों का विस्तृत विवरण अपलोड करेंगे। इससे सभी सुधारात्मक प्रयासों का एकीकृत रिकॉर्ड तैयार होगा और उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा करना आसान होगा।

    केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक मंत्रालय ऐसे सुधारों की पहचान करे जो आम नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच को सरल बनाएं, प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाएं तथा उद्योगों के लिए कारोबार करना अधिक सुगम बनाएं। ये सुधार उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) की सिफारिशों, अनौपचारिक मंत्रिसमूह (आईजीओएम) के सुझावों अथवा संबंधित मंत्रालयों द्वारा स्वयं तैयार किए गए प्रस्तावों पर आधारित हो सकते हैं। सरकार का मानना है कि विभागीय स्तर पर नवाचार और सुधारों को बढ़ावा देने से प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    नई व्यवस्था के तहत सभी मंत्रालयों और विभागों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपनी सभी सुधार संबंधी पहलों का विवरण पीएमरेफ पोर्टल पर अपलोड करें और समय-समय पर उनकी प्रगति को अपडेट करते रहें। जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मंत्रालय को हर सप्ताह शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक अपनी साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इससे विभिन्न योजनाओं और सुधारों की वास्तविक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी तथा आवश्यक होने पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।

    सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सुधार प्रक्रिया को एक व्यवस्थित और संस्थागत ढांचे के तहत संचालित करना है, ताकि विभिन्न मंत्रालयों में लागू किए जा रहे नीतिगत और प्रशासनिक सुधारों की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन किया जा सके। इससे मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और सुधार संबंधी पहलों के क्रियान्वयन में भी गति आएगी। साथ ही विभिन्न विभागों के सफल अनुभवों को साझा कर अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने का अवसर मिलेगा।

    पीएमरेफ (प्रधानमंत्री रिफरेंस/रिफॉर्म्स) पोर्टल प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी विभागों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक सुरक्षित डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म है। यह नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक पहलों और प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं की निगरानी के साथ-साथ अन्य सरकारी निगरानी प्रणालियों से भी जुड़ा हुआ है। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों, निर्णयों और विभिन्न संदर्भों की प्रगति पर भी नजर रखी जाती है। सरकार को उम्मीद है कि नया ‘रिफॉर्म’ मॉड्यूल प्रशासनिक सुधारों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • नीट विवाद के बाद परीक्षा सुधार की बड़ी पहल, छह विशेषज्ञों की टास्क फोर्स करेगी प्रवेश परीक्षा प्रणाली की समीक्षा

    नीट विवाद के बाद परीक्षा सुधार की बड़ी पहल, छह विशेषज्ञों की टास्क फोर्स करेगी प्रवेश परीक्षा प्रणाली की समीक्षा

    नई दिल्ली । देश की प्रवेश परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नीट परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में छह सदस्यीय उच्चस्तरीय परीक्षा सुधार टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इस समिति की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी करेंगे। टास्क फोर्स का उद्देश्य सरकारी प्रवेश परीक्षाओं में संरचनात्मक और तकनीकी सुधारों के लिए व्यापक सुझाव तैयार करना है, ताकि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और लीक-रोधी बनाया जा सके।

    सरकार का मानना है कि बढ़ती तकनीकी चुनौतियों और बड़े स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को देखते हुए मौजूदा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से गठित यह समिति विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को एक मंच पर लेकर आई है। इसमें तकनीक, शिक्षा, सुरक्षा, अंतरिक्ष विज्ञान, प्रशासन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं, जो परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया का अध्ययन कर सुधार संबंधी सुझाव देंगे।

    समिति के अध्यक्ष नंदन नीलेकणी को बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने और सुरक्षित तकनीकी ढांचे तैयार करने का व्यापक अनुभव है। उनसे अपेक्षा की जा रही है कि वे डिजिटल पहचान, डेटा सुरक्षा और आधुनिक तकनीकी समाधान के आधार पर परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में सुझाव देंगे। सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, अभ्यर्थियों की पहचान और परीक्षा संचालन के प्रत्येक चरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

    टास्क फोर्स में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी को भी शामिल किया गया है। कंप्यूटर विज्ञान, सूचना सुरक्षा और उन्नत तकनीकी प्रणालियों में उनका अनुभव समिति को तकनीकी दृष्टि से मजबूत सुझाव देने में सहायक माना जा रहा है। परीक्षा से जुड़े डिजिटल ढांचे को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने में उनकी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    समिति में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अनीता करवाल को भी स्थान दिया गया है। शिक्षा नीति और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें शामिल किया गया है। इसके अलावा पूर्व खुफिया प्रमुख तपन डेका भी इस समिति का हिस्सा हैं। सुरक्षा और संवेदनशील मामलों से जुड़े उनके अनुभव के आधार पर परीक्षा प्रक्रिया में गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उपायों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ को बड़े वैज्ञानिक और तकनीकी मिशनों के संचालन का अनुभव है। जटिल परियोजनाओं के सफल प्रबंधन और तकनीकी संस्थानों के संचालन में उनकी विशेषज्ञता परीक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण में उपयोगी मानी जा रही है। वहीं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमृत लाल मीणा को प्रशासनिक और लॉजिस्टिक प्रबंधन के अनुभव के आधार पर समिति में शामिल किया गया है, जिससे देशभर में बड़े स्तर पर आयोजित होने वाली परीक्षाओं के संचालन संबंधी व्यावहारिक सुझाव मिल सकें।

    सरकार का कहना है कि यह उच्चस्तरीय टास्क फोर्स राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली का व्यापक मूल्यांकन करेगी और ऐसे उपाय सुझाएगी, जिनसे भविष्य में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों का संचालन, डिजिटल निगरानी, अभ्यर्थियों की सत्यापन प्रक्रिया तथा परीक्षा प्रबंधन के सभी चरण अधिक प्रभावी बन सकें। समिति की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार लागू किए जाने की संभावना है, जिससे देशभर के लाखों अभ्यर्थियों का विश्वास और मजबूत किया जा सके।

  • प्रह्लाद जोशी ने संभाली शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी, पहले दिन वरिष्ठ अधिकारियों संग शिक्षा सुधारों पर मंथन

    प्रह्लाद जोशी ने संभाली शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी, पहले दिन वरिष्ठ अधिकारियों संग शिक्षा सुधारों पर मंथन

    नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया। मंत्रालय की जिम्मेदारी ग्रहण करने के तुरंत बाद उन्होंने शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर विभाग की मौजूदा स्थिति, प्राथमिकताओं और आगे की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की। ऐसे समय में उन्हें यह अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है, जब देश में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर व्यापक विमर्श जारी है।

    पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं, लंबित मामलों और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी ली। मंत्रालय के लिए यह शुरुआती बैठक आगे की नीतिगत दिशा तय करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    देश की शिक्षा व्यवस्था में हाल के वर्षों में कई बड़े बदलाव हुए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न प्रावधानों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। ऐसे में नए शिक्षा मंत्री के सामने इन सुधारों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने, राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों की गति बनाए रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। विद्यालयी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा और अनुसंधान तक अनेक क्षेत्रों में नीतिगत निर्णयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के अनुभवी मंत्रियों में शामिल हैं। वह पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके अतिरिक्त वह संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व भी कर चुके हैं। लंबे प्रशासनिक अनुभव और संसदीय कार्यप्रणाली की गहरी समझ के कारण उन्हें सरकार में लगातार महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे जाते रहे हैं।

    कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके प्रह्लाद जोशी को संगठनात्मक क्षमता और प्रभावी प्रशासनिक शैली के लिए भी जाना जाता है। शिक्षा मंत्रालय की नई जिम्मेदारी के साथ अब उनसे ऐसी नीतियों को आगे बढ़ाने की अपेक्षा की जा रही है, जो विद्यार्थियों, शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए अधिक प्रभावी और परिणामकारी साबित हों।

    मंत्रालय के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को और मजबूत करना, परीक्षा प्रक्रिया में भरोसा कायम रखना तथा तकनीक आधारित मूल्यांकन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना शामिल माना जा रहा है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान को प्रोत्साहन, डिजिटल शिक्षा का विस्तार, कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा और विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार भी आगामी कार्ययोजना का अहम हिस्सा रह सकते हैं।

    कार्यभार संभालने के साथ ही मंत्रालय में प्रारंभिक समीक्षा बैठकों का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में शिक्षा मंत्रालय परीक्षा सुधार, विश्वविद्यालयों के विकास, अनुसंधान को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों से जुड़े लंबित विषयों पर तेजी से निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ेगा। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों की निगाह अब इस बात पर रहेगी कि नए शिक्षा मंत्री अपने अनुभव के आधार पर शिक्षा प्रणाली में सुधारों को किस गति और प्रभावशीलता के साथ आगे बढ़ाते हैं।

  • कोयला क्षेत्र में बड़ा सुधार, बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा श्योरिटी बॉन्ड को मंजूरी; कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार

    कोयला क्षेत्र में बड़ा सुधार, बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा श्योरिटी बॉन्ड को मंजूरी; कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने कोयला क्षेत्र में कारोबार को अधिक सरल, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने आवंटित कोयला ब्लॉकों के लिए निष्पादन बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा श्योरिटी बॉन्ड के उपयोग को मंजूरी दे दी है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य कोयला ब्लॉक आवंटियों को अधिक वित्तीय लचीलापन प्रदान करना और खनन परियोजनाओं के विकास की प्रक्रिया को गति देना है।

    नए प्रावधान के तहत कोयला ब्लॉक आवंटी अब अपनी निष्पादन सुरक्षा संबंधी अनिवार्यता पूरी करने के लिए बैंक गारंटी या बीमा श्योरिटी बॉन्ड, दोनों में से किसी एक विकल्प का चयन कर सकेंगे। यह सुविधा केवल नए आवंटियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पहले से आवंटित कोयला ब्लॉकों पर भी लागू होगी। ऐसे आवंटी निर्धारित नियमों के अनुसार पहले से जमा बैंक गारंटी को बीमा श्योरिटी बॉन्ड से प्रतिस्थापित कर सकेंगे।

    सरकार का मानना है कि इस बदलाव से पारंपरिक बैंक गारंटी व्यवस्था से जुड़े वित्तीय दबाव में कमी आएगी। अब कंपनियों को बड़ी राशि बैंक गारंटी के रूप में लंबे समय तक रोककर नहीं रखनी पड़ेगी। इससे उनके पास उपलब्ध पूंजी का उपयोग खदानों के विकास, आधारभूत ढांचे के निर्माण, मशीनरी की खरीद और परिचालन गतिविधियों में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

    नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य निवेशकों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करना भी है। बीमा श्योरिटी बॉन्ड के विकल्प से कंपनियों के लिए पूंजी प्रबंधन आसान होगा और उन्हें अन्य वित्तीय आवश्यकताओं के लिए संसाधन उपलब्ध रहेंगे। इसके साथ ही सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस व्यवस्था के बावजूद निष्पादन सुरक्षा से जुड़े सभी सरकारी हित पूरी तरह सुरक्षित बने रहेंगे।

    प्रारंभिक चरण में यह सुविधा उन कोयला ब्लॉकों के लिए लागू की जाएगी जिनका आवंटन खान एवं खनिज संबंधी प्रावधानों के तहत किया गया है। इसके बाद सरकार इस व्यवस्था का विस्तार अन्य संबंधित कानूनों के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों तक भी करने की दिशा में आगे बढ़ेगी, ताकि पूरे क्षेत्र में समान और आधुनिक वित्तीय ढांचा विकसित किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुधार से कोयला क्षेत्र में निवेश का माहौल और बेहतर होगा। परियोजनाओं के समयबद्ध विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा नई खदानों के संचालन में आने वाली वित्तीय बाधाएं कम होंगी। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सहायता मिलने की संभावना है।

    सरकार पिछले कुछ वर्षों से खनन क्षेत्र में प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है। बीमा श्योरिटी बॉन्ड को मंजूरी भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे भविष्य में कोयला क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी, आधुनिक और निवेशकों के लिए आकर्षक बन सकेगा, जबकि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भी अपेक्षित गति आने की उम्मीद है।

  • भारत की विकास यात्रा मजबूत लेकिन चुनौतियां बरकरार, निर्मला सीतारमण बोलीं- सतत प्रगति के लिए सुधार, नवाचार और तैयारी जरूरी

    भारत की विकास यात्रा मजबूत लेकिन चुनौतियां बरकरार, निर्मला सीतारमण बोलीं- सतत प्रगति के लिए सुधार, नवाचार और तैयारी जरूरी

    नई दिल्ली । भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है, लेकिन दीर्घकालिक और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता बनी हुई है। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि देश ने आर्थिक मोर्चे पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, फिर भी विकास की इस गति को स्थायी बनाए रखने के लिए आत्मसंतोष की बजाय निरंतर सुधार, नवाचार और संस्थागत मजबूती पर ध्यान देना होगा।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी बड़ी और जटिल अर्थव्यवस्था के लिए केवल विकास दर हासिल करना पर्याप्त नहीं होता। वास्तविक सफलता तब मानी जाती है जब आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे और विकास समावेशी तथा टिकाऊ स्वरूप ग्रहण करे। उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थानों, प्रभावी नीतियों और सक्षम प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बिना दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बनाए रखना कठिन हो सकता है।

    सीतारमण ने कहा कि भारत वर्तमान में कई आर्थिक संकेतकों पर बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन यह स्थिति स्थायी रूप से सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती। उनके अनुसार समय-समय पर नीतियों का मूल्यांकन करना और उन क्षेत्रों की पहचान करना आवश्यक है जहां सुधार की गुंजाइश अभी भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि बदलती घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत ढांचे को लगातार अद्यतन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

    वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विकास को गति देने के लिए देश की उत्पादन क्षमता, कार्यकुशलता और प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, लेकिन कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं जिन्हें अतिरिक्त नीति समर्थन और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है। विशेष रूप से जटिल विनिर्माण, मध्यवर्ती उत्पादों और विशिष्ट सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में नई रणनीतियों की जरूरत महसूस की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि लंबे समय से जिन चुनौतियों पर चर्चा होती रही है, अब उनके व्यावहारिक समाधान तलाशने का समय है। इसके लिए बेहतर क्रियान्वयन, संस्थागत क्षमता निर्माण और आवश्यकतानुसार नई नीतियों का निर्माण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है ताकि भविष्य की आर्थिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

    वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए सीतारमण ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में भारत को भी अपनी नीतियों को लचीला और परिस्थितियों के अनुरूप बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया स्वतः संचालित नहीं होती, बल्कि इसके लिए निरंतर निगरानी, सुधार और दूरदर्शी योजना की आवश्यकता होती है।

    कोविड-19 महामारी के प्रभावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महामारी से जुड़े कुछ असर अब भी आर्थिक योजना और अपेक्षाओं को प्रभावित करते हैं। हालांकि वर्तमान समय में किसी बड़े व्यवधान की आशंका नहीं है, फिर भी सरकार संभावित जोखिमों पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक तैयारियां कर रही है।

    वित्त मंत्री ने मौसम संबंधी चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एल नीनो प्रभाव के कारण सामान्य से कमजोर मानसून की संभावना को ध्यान में रखते हुए सरकार पहले से तैयारी कर रही है। कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति और कुछ इलाकों में अत्यधिक वर्षा की आशंका को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

    उन्होंने विश्वास जताया कि उचित नीतियों, मजबूत संस्थागत ढांचे और निरंतर सुधारों के माध्यम से भारत अपनी दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को और अधिक सशक्त बना सकेगा तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।