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  • कोयला क्षेत्र में बड़ा सुधार, बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा श्योरिटी बॉन्ड को मंजूरी; कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार

    कोयला क्षेत्र में बड़ा सुधार, बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा श्योरिटी बॉन्ड को मंजूरी; कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने कोयला क्षेत्र में कारोबार को अधिक सरल, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने आवंटित कोयला ब्लॉकों के लिए निष्पादन बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा श्योरिटी बॉन्ड के उपयोग को मंजूरी दे दी है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य कोयला ब्लॉक आवंटियों को अधिक वित्तीय लचीलापन प्रदान करना और खनन परियोजनाओं के विकास की प्रक्रिया को गति देना है।

    नए प्रावधान के तहत कोयला ब्लॉक आवंटी अब अपनी निष्पादन सुरक्षा संबंधी अनिवार्यता पूरी करने के लिए बैंक गारंटी या बीमा श्योरिटी बॉन्ड, दोनों में से किसी एक विकल्प का चयन कर सकेंगे। यह सुविधा केवल नए आवंटियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पहले से आवंटित कोयला ब्लॉकों पर भी लागू होगी। ऐसे आवंटी निर्धारित नियमों के अनुसार पहले से जमा बैंक गारंटी को बीमा श्योरिटी बॉन्ड से प्रतिस्थापित कर सकेंगे।

    सरकार का मानना है कि इस बदलाव से पारंपरिक बैंक गारंटी व्यवस्था से जुड़े वित्तीय दबाव में कमी आएगी। अब कंपनियों को बड़ी राशि बैंक गारंटी के रूप में लंबे समय तक रोककर नहीं रखनी पड़ेगी। इससे उनके पास उपलब्ध पूंजी का उपयोग खदानों के विकास, आधारभूत ढांचे के निर्माण, मशीनरी की खरीद और परिचालन गतिविधियों में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

    नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य निवेशकों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करना भी है। बीमा श्योरिटी बॉन्ड के विकल्प से कंपनियों के लिए पूंजी प्रबंधन आसान होगा और उन्हें अन्य वित्तीय आवश्यकताओं के लिए संसाधन उपलब्ध रहेंगे। इसके साथ ही सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस व्यवस्था के बावजूद निष्पादन सुरक्षा से जुड़े सभी सरकारी हित पूरी तरह सुरक्षित बने रहेंगे।

    प्रारंभिक चरण में यह सुविधा उन कोयला ब्लॉकों के लिए लागू की जाएगी जिनका आवंटन खान एवं खनिज संबंधी प्रावधानों के तहत किया गया है। इसके बाद सरकार इस व्यवस्था का विस्तार अन्य संबंधित कानूनों के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों तक भी करने की दिशा में आगे बढ़ेगी, ताकि पूरे क्षेत्र में समान और आधुनिक वित्तीय ढांचा विकसित किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुधार से कोयला क्षेत्र में निवेश का माहौल और बेहतर होगा। परियोजनाओं के समयबद्ध विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा नई खदानों के संचालन में आने वाली वित्तीय बाधाएं कम होंगी। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सहायता मिलने की संभावना है।

    सरकार पिछले कुछ वर्षों से खनन क्षेत्र में प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है। बीमा श्योरिटी बॉन्ड को मंजूरी भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे भविष्य में कोयला क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी, आधुनिक और निवेशकों के लिए आकर्षक बन सकेगा, जबकि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भी अपेक्षित गति आने की उम्मीद है।

  • भारत की विकास यात्रा मजबूत लेकिन चुनौतियां बरकरार, निर्मला सीतारमण बोलीं- सतत प्रगति के लिए सुधार, नवाचार और तैयारी जरूरी

    भारत की विकास यात्रा मजबूत लेकिन चुनौतियां बरकरार, निर्मला सीतारमण बोलीं- सतत प्रगति के लिए सुधार, नवाचार और तैयारी जरूरी

    नई दिल्ली । भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है, लेकिन दीर्घकालिक और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता बनी हुई है। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि देश ने आर्थिक मोर्चे पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, फिर भी विकास की इस गति को स्थायी बनाए रखने के लिए आत्मसंतोष की बजाय निरंतर सुधार, नवाचार और संस्थागत मजबूती पर ध्यान देना होगा।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी बड़ी और जटिल अर्थव्यवस्था के लिए केवल विकास दर हासिल करना पर्याप्त नहीं होता। वास्तविक सफलता तब मानी जाती है जब आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे और विकास समावेशी तथा टिकाऊ स्वरूप ग्रहण करे। उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थानों, प्रभावी नीतियों और सक्षम प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बिना दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बनाए रखना कठिन हो सकता है।

    सीतारमण ने कहा कि भारत वर्तमान में कई आर्थिक संकेतकों पर बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन यह स्थिति स्थायी रूप से सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती। उनके अनुसार समय-समय पर नीतियों का मूल्यांकन करना और उन क्षेत्रों की पहचान करना आवश्यक है जहां सुधार की गुंजाइश अभी भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि बदलती घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत ढांचे को लगातार अद्यतन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

    वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विकास को गति देने के लिए देश की उत्पादन क्षमता, कार्यकुशलता और प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, लेकिन कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं जिन्हें अतिरिक्त नीति समर्थन और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है। विशेष रूप से जटिल विनिर्माण, मध्यवर्ती उत्पादों और विशिष्ट सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में नई रणनीतियों की जरूरत महसूस की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि लंबे समय से जिन चुनौतियों पर चर्चा होती रही है, अब उनके व्यावहारिक समाधान तलाशने का समय है। इसके लिए बेहतर क्रियान्वयन, संस्थागत क्षमता निर्माण और आवश्यकतानुसार नई नीतियों का निर्माण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है ताकि भविष्य की आर्थिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

    वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए सीतारमण ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में भारत को भी अपनी नीतियों को लचीला और परिस्थितियों के अनुरूप बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया स्वतः संचालित नहीं होती, बल्कि इसके लिए निरंतर निगरानी, सुधार और दूरदर्शी योजना की आवश्यकता होती है।

    कोविड-19 महामारी के प्रभावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महामारी से जुड़े कुछ असर अब भी आर्थिक योजना और अपेक्षाओं को प्रभावित करते हैं। हालांकि वर्तमान समय में किसी बड़े व्यवधान की आशंका नहीं है, फिर भी सरकार संभावित जोखिमों पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक तैयारियां कर रही है।

    वित्त मंत्री ने मौसम संबंधी चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एल नीनो प्रभाव के कारण सामान्य से कमजोर मानसून की संभावना को ध्यान में रखते हुए सरकार पहले से तैयारी कर रही है। कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति और कुछ इलाकों में अत्यधिक वर्षा की आशंका को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

    उन्होंने विश्वास जताया कि उचित नीतियों, मजबूत संस्थागत ढांचे और निरंतर सुधारों के माध्यम से भारत अपनी दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को और अधिक सशक्त बना सकेगा तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।