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  • ट्रेन लेट होने पर टिकट कैंसिल करने से न करें गलती, मुआवजे का दावा हो सकता है खारिज

    ट्रेन लेट होने पर टिकट कैंसिल करने से न करें गलती, मुआवजे का दावा हो सकता है खारिज


    भोपाल । भोपाल ट्रेन देरी से चलने पर यात्री जल्दबाजी में टिकट कैंसिल करने की गलती न करें क्योंकि ऐसा करने से उन्हें न तो पूरा रिफंड मिलेगा और न ही मानसिक क्षतिपूर्ति का दावा स्वीकार होगा। भोपाल के एक मामले में उपभोक्ता आयोग ने यह स्पष्ट किया कि यदि यात्री ट्रेन के लेट होने के कारण बिना रेलवे की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए टिकट कैंसिल कर देते हैं तो वे मुआवजे से हाथ धो सकते हैं। यह फैसला उन लाखों यात्रियों के लिए एक अहम संदेश है जो ट्रेन के समय से लेट होने पर बिना सही प्रक्रिया का पालन किए जल्दबाजी में टिकट कैंसिल कर देते हैं।

    क्या है पूरा मामला

    भोपाल के एक निवासी ने सितंबर 2023 में भोपाल से नई दिल्ली जाने के लिए आंध्रप्रदेश एक्सप्रेस में AC-2 श्रेणी का टिकट बुक किया था। ट्रेन निर्धारित समय से करीब तीन घंटे की देरी से नई दिल्ली पहुंची। इस देरी के कारण यात्री की आगे की यात्रा भी प्रभावित हुई, क्योंकि उसे नई दिल्ली से चंडीगढ़ जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस का कनेक्शन छूट गया। इस स्थिति में यात्री ने दोनों यात्रा टिकट कैंसिल करवा दिए। लेकिन, जब उसे पूरा रिफंड नहीं मिला तो उसने रेलवे पर सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट किया कि सिर्फ ट्रेन की देरी के आधार पर टिकट कैंसिल करना और रिफंड की मांग करना सही नहीं है। यदि यात्री ने रेलवे द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है, तो उसे पूरा रिफंड और मानसिक क्षतिपूर्ति का दावा नहीं मिल सकता।

    उपभोक्ता आयोग का फैसला

    उपभोक्ता आयोग ने यह कहा कि जब भी ट्रेन की देरी हो, तो यात्री को पहले रेलवे द्वारा दी जाने वाली अन्य सुविधाओं और विकल्पों का लाभ उठाना चाहिए, जैसे कि मुआवजे के लिए आवेदन करना या ट्रेनों का अन्य विकल्प तलाशना। सिर्फ टिकट कैंसिल करके और बिना प्रक्रिया का पालन किए मुआवजे का दावा करना गलत है और यह न केवल यात्रियों के लिए बल्कि रेलवे के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है। यह फैसला यात्रियों को यह सिखाता है कि ट्रेन लेट होने पर घबराहट में कोई जल्दबाजी का कदम न उठाएं और सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का नुकसान न हो।

  • आयकर विभाग की कार्रवाई चुनावी चंदे और फर्जी रसीदों पर 150 से अधिक करदाताओं को समंस

    आयकर विभाग की कार्रवाई चुनावी चंदे और फर्जी रसीदों पर 150 से अधिक करदाताओं को समंस


    इंदौर। आयकर विभाग की इंवेस्टिगेशन विंग ने चुनावी चंदे की रसीदों के जरिए अवैध तरीके से आयकर छूट लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग ने ऐसे करदाताओं को समंस भेजना शुरू कर दिया हैजिन पर बोगस चुनावी चंदेट्यूशन फीसऔर मेडिकल खर्च जैसे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आयकर छूट लेने का आरोप है। इंदौर-उज्जैन परिक्षेत्र में अब तक सवा सौ से अधिक करदाताओं को समंस भेजे जा चुके हैंऔर उन्हें आयकर छूट को संदिग्ध मानते हुए बयान दर्ज करवाने का निर्देश दिया गया है। यह कार्रवाई जुलाई और अगस्त में किए गए आयकर विभाग के छापों के बाद की जा रही हैजिसे अगले दौर की जांच माना जा रहा है।

    छापों में खुलासा हुआ बड़ा रैकेट

    जुलाई और अगस्त में आयकर विभाग ने देशभर में लगभग 200 स्थानों पर छापेमारी की थी। इन छापों के दौरान आयकर विभाग को कुछ गंभीर तथ्य सामने आए थेजिनमें बोगस चुनावी चंदे के साथ-साथ ट्यूशन फीस और मेडिकल खर्च के लिए भी फर्जी रसीदें लगाने का खुलासा हुआ था। इन रसीदों के आधार पर कुछ करदाताओं ने गलत तरीके से आयकर छूट का फायदा उठाया और रिफंड प्राप्त किया। विभाग ने यह भी पाया कि इस रैकेट में कुछ टैक्स पेशेवरों की संलिप्तता थीजिन्होंने इन फर्जी रसीदों को तैयार किया और करदाताओं को फायदा पहुंचाया।

    फर्जी रिफंड दिलवाने का पूरा रैकेट

    विभाग के अनुसारयह पूरा रैकेट फर्जी रसीदों के माध्यम से करदाताओं को आयकर रिफंड दिलवाने के लिए काम कर रहा था। चुनावी चंदे के नाम पर फर्जी रसीदें जारी की जा रही थींजिनसे करदाताओं ने टैक्स छूट का लाभ उठाया। इसके अलावाट्यूशन फीस और मेडिकल खर्च की फर्जी रसीदों के जरिए भी रिफंड प्राप्त किए गए। इन रसीदों को पेश करने वाले करदाताओं को आयकर छूट का लाभ मिलाजबकि असल में ये खर्चे नहीं हुए थे। इस मामले में विभाग ने करदाताओं और टैक्स पेशेवरों से बयान लेने के लिए समंस जारी किए हैं। विभाग ने इन फर्जी रसीदों को लेकर जांच की गति तेज कर दी है और मामले में संलिप्त सभी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की योजना बनाई है।

    आयकर विभाग की कार्रवाई के परिणाम

    आयकर विभाग का कहना है कि वह चुनावी चंदे और अन्य फर्जी रसीदों से जुड़ी इस कार्रवाई में पूरी गंभीरता से काम कर रहा है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी करदाता के पास सही दस्तावेज नहीं हैंतो उनके खिलाफ कर चोरी की कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ हीविभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि टैक्स पेशेवरों को भी इस प्रकार के रैकेट में संलिप्त पाए जाने पर कड़ी सजा दी जाएगी। इस मामले में विभाग का उद्देश्य यह है कि करदाताओं के बीच टैक्स चोरी को रोकने के लिए चेतना फैलाना और करदाताओं को यह समझाना कि वे किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचें।

    संदिग्ध करदाताओं को सख्त चेतावनी

    आयकर विभाग ने सभी संदिग्ध करदाताओं को चेतावनी दी है कि वे अपने दस्तावेजों की जांच कर लें और कोई भी फर्जी रसीद या गलत तरीके से प्राप्त आयकर छूट को साबित करने के प्रयास न करें। विभाग की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में और सख्त हो सकती हैऔर यह करदाताओं और टैक्स पेशेवरों के लिए एक गंभीर संदेश है। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि आयकर विभाग अब अवैध तरीके से कर छूट लेने वालों के खिलाफ पूरी तरह से सख्त है और उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगाजो टैक्स चोरी में शामिल हैं।