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  • एमपी टीईटी 2026 में शिक्षकों का विरोध बरकरार, तारीख तीन बार बढ़ाने और ऑफलाइन परीक्षा के फैसले के बावजूद आवेदन कम

    एमपी टीईटी 2026 में शिक्षकों का विरोध बरकरार, तारीख तीन बार बढ़ाने और ऑफलाइन परीक्षा के फैसले के बावजूद आवेदन कम

    मध्य प्रदेश। में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी 2026 को लेकर शिक्षकों का विरोध जारी है। आवेदन की समयसीमा तीन बार बढ़ाए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षकों ने परीक्षा के लिए पंजीयन नहीं कराया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, परीक्षा के लिए करीब 30 हजार शिक्षकों ने ही आवेदन किया है, जबकि प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख शिक्षक इसके दायरे में आते हैं। इस तरह करीब 1.20 लाख शिक्षकों ने निर्धारित समय तक फॉर्म नहीं भरा। आवेदन की अंतिम तारीख 11 अक्टूबर थी।

    आवेदन प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों को अतिरिक्त समय देने के लिए तीन बार समयसीमा बढ़ाई गई थी। इसके बावजूद पंजीयन की संख्या अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ी। कुल डेढ़ लाख शिक्षकों की तुलना में लगभग 30 हजार पंजीयन का आंकड़ा बताता है कि बड़ी संख्या में शिक्षक अभी भी परीक्षा से दूर हैं। इस स्थिति के पीछे शिक्षकों का विरोध प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। शिक्षक संगठन लंबे समय से सेवा दे रहे अध्यापकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।

    शिक्षक संगठनों का कहना है कि जो शिक्षक पहले से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर प्रदेश में आंदोलन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षकों की समस्या के समाधान के लिए आयोग बनाने का भरोसा दिया था और उनसे परीक्षा के फॉर्म भरने की अपील की थी। इसके बाद शिक्षकों ने अपना आंदोलन स्थगित किया, लेकिन उनकी मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में दोबारा प्रदर्शन करने का विकल्प खुला रखा है। टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग अब भी विवाद का मुख्य विषय बनी हुई है।

    सरकार ने परीक्षा के तरीके को लेकर भी बदलाव का फैसला किया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन परीक्षा कराने की घोषणा की थी। इसके बाद ऑफलाइन परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। यह कदम शिक्षकों की मांगों के बीच उठाया गया था, लेकिन इससे विरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। शिक्षकों की मुख्य मांग परीक्षा के माध्यम को बदलने के बजाय टीईटी की अनिवार्यता से राहत देने की है।

    शुरुआत में परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी ईएसबी को दी गई थी। इसके तहत 12 अक्टूबर से परीक्षा कराने की तैयारी की गई थी, लेकिन ऑफलाइन परीक्षा के लिए जरूरी व्यवस्थाएं पूरी नहीं हो सकीं। इसी कारण तय कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा नहीं हो पाई। ऑफलाइन परीक्षा में अभ्यर्थियों को कंप्यूटर के बजाय कागज पर प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। इसके लिए परीक्षा केंद्रों और अन्य जरूरी संसाधनों की अलग व्यवस्था करनी पड़ती है।

    अब परीक्षा कराने के लिए दूसरी एजेंसी की तलाश की जा रही है। हायर एजुकेशन बोर्ड के माध्यम से दिसंबर में परीक्षा आयोजित कराने की तैयारी बताई गई है। हालांकि, यह योजना अभी तैयारी के स्तर पर है और परीक्षा की नई तारीख या आगे की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में शिक्षकों के सामने परीक्षा की तारीख और अनिवार्यता से जुड़ी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार बना हुआ है। आवेदन के आंकड़े बताते हैं कि तारीख बढ़ाने और परीक्षा के तरीके में बदलाव के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक अब तक पंजीयन से दूर हैं।

  • इंदौर के तीन सरकारी कॉलेजों में वोटर रजिस्ट्रेशन कैंप, पहली बार मतदाता बनने के लिए 96 विद्यार्थियों ने कराया पंजीयन

    इंदौर के तीन सरकारी कॉलेजों में वोटर रजिस्ट्रेशन कैंप, पहली बार मतदाता बनने के लिए 96 विद्यार्थियों ने कराया पंजीयन

    मध्य प्रदेश। के इंदौर में युवाओं को मतदाता सूची से जोड़ने और मतदान के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से तीन सरकारी कॉलेजों में विशेष मतदाता पंजीयन शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के विद्यार्थियों को पहली बार मतदाता पहचान पत्र बनवाने और मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में सहायता दी गई। कॉलेज परिसरों में ही पंजीयन की सुविधा मिलने से विद्यार्थियों को आवेदन संबंधी जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।

    यह अभियान श्री अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, शासकीय होलकर साइंस कॉलेज और शासकीय न्यू लॉ कॉलेज में चलाया गया। शिविरों का उद्देश्य ऐसे पात्र विद्यार्थियों को मतदाता सूची में शामिल करने में मदद करना था, जिन्होंने अभी तक अपना पंजीयन नहीं कराया है। इसके साथ ही युवाओं को मतदान के महत्व और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया।

    श्री अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में आयोजित शिविर के दौरान कुल 96 विद्यार्थियों ने मतदाता पंजीयन कराया। इनमें पहले दिन 39 विद्यार्थियों ने आवेदन किया, जबकि अंतिम दिन 57 विद्यार्थियों ने पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की। इस तरह दोनों दिनों में पंजीयन कराने वाले विद्यार्थियों की कुल संख्या 96 रही। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. ममता चंद्रशेखर ने बताया कि मध्य प्रदेश के अन्य सरकारी कॉलेजों में भी इसी तरह के शिविर आयोजित किए गए हैं। इनका उद्देश्य पात्र विद्यार्थियों के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने में सहायता करना है।

    शासकीय होलकर साइंस कॉलेज में भी विद्यार्थियों ने शिविर में हिस्सा लिया। कॉलेज के कर्मचारी राजेंद्र चौरसिया के अनुसार, यहां छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ पंजीयन प्रक्रिया में भाग लिया। शिविर के दौरान लगभग 15 से 20 विद्यार्थी मतदाता पंजीयन के लिए शामिल हुए। इन शिविरों के माध्यम से विद्यार्थियों को आवेदन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई गई और पंजीयन प्रक्रिया को समझने में मदद मिली।

    शासकीय न्यू लॉ कॉलेज में 5 और 9 अक्टूबर को विशेष मतदाता पंजीयन शिविर लगाए गए। दोनों दिन शिविर का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक निर्धारित था। विद्यार्थियों को आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेजों की जानकारी दी गई और फॉर्म भरने की प्रक्रिया पूरी करने में सहायता की गई। उनसे कक्षा 10वीं की मार्कशीट, बिजली का बिल, आधार कार्ड, पासपोर्ट आकार की फोटो और माता-पिता के मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज लाने को कहा गया था।

    न्यू लॉ कॉलेज की छात्रा डिंपल वर्मा ने बताया कि शिविर में अधिकारियों ने आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाया। उनके अनुसार, दूसरे शहरों से आकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को मतदाता पहचान पत्र बनवाने और उससे जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कॉलेज परिसर में आयोजित शिविर उनके लिए उपयोगी साबित होते हैं, क्योंकि यहां उन्हें पंजीयन की प्रक्रिया समझने और आवेदन पूरा करने में मदद मिलती है।

    इंदौर जिले में दो लोकसभा क्षेत्र, नौ विधानसभा क्षेत्र और कुल 3,210 मतदान केंद्र हैं। ऐसे में नए मतदाताओं को मतदाता सूची से जोड़ने के लिए कॉलेजों में आयोजित शिविर महत्वपूर्ण गतिविधि के रूप में सामने आए हैं। 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नागरिक मतदाता बनने के पात्र होते हैं, लेकिन मतदान करने के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज होना आवश्यक है। कॉलेजों में चलाए जा रहे इस अभियान के जरिए विद्यार्थियों को पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने और चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने की दिशा में सहायता दी जा रही है।

  • मध्यप्रदेश में MSP पर खरीफ फसलों की खरीद की तैयारी, 3 लाख 5 हजार से अधिक किसानों का पंजीयन, जानें जरूरी नियम

    मध्यप्रदेश में MSP पर खरीफ फसलों की खरीद की तैयारी, 3 लाख 5 हजार से अधिक किसानों का पंजीयन, जानें जरूरी नियम


    मध्यप्रदेश।
    में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार और बाजरा उपार्जन के लिए किसानों का पंजीयन जारी है। अब तक 3 लाख 5 हजार 82 किसान अपना पंजीयन करा चुके हैं। किसान 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से निर्धारित समय सीमा में पंजीयन कराने का आह्वान किया है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। पंजीयन व्यवस्था को किसानों के लिए सहज और सुगम बनाया गया है और प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं।

    अब तक जबलपुर संभाग में 1 लाख 47 हजार 824, रीवा संभाग में 94 हजार 384, शहडोल संभाग में 21 हजार 456, नर्मदापुरम संभाग में 16 हजार 398, सागर संभाग में 16 हजार 155 और भोपाल संभाग में 8 हजार 599 किसानों ने पंजीयन कराया है। किसानों के लिए नि:शुल्क पंजीयन की व्यवस्था ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों के अलावा सहकारी समितियों तथा सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केंद्रों पर की गई है।

    सशुल्क पंजीयन की सुविधा एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर कियोस्क, लोक सेवा केंद्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर उपलब्ध है। प्रति पंजीयन 50 रुपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकेगा। पंजीयन के दौरान किसान के भूमि संबंधी दस्तावेज, आधार कार्ड और अन्य फोटो पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। सिकमी, बटाईदार, कोटवार और वन पट्टाधारी किसानों के लिए पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन संस्था द्वारा संचालित पंजीयन केंद्रों पर उपलब्ध होगी। इन श्रेणियों के सभी किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा।

    किसानों की सुविधा के लिए जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केंद्रों को भी क्रियाशील रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसान अपना मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक अपडेट करा सकें। इस काम के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केंद्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर को बैंक खाते से लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ समन्वय किया जाएगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिए पंजीयन के दौरान ही मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन और जेआईटी पोर्टल के माध्यम से एक रुपये का लेनदेन कराया जाएगा।

    पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। यह सत्यापन आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी या बायोमेट्रिक डिवाइस के माध्यम से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन तभी होगा, जब उसके भू-अभिलेख के खाते और खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। नाम में अंतर होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा और सत्यापन के बाद ही ऐसा पंजीयन मान्य होगा।

  • CBDT ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 में किए बदलाव, वैल्यूअर और टैक्स प्रैक्टिशनर के लिए नए फॉर्म जारी

    CBDT ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 में किए बदलाव, वैल्यूअर और टैक्स प्रैक्टिशनर के लिए नए फॉर्म जारी

    नई दिल्ली । केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन संशोधनों में वैल्यूअर और अधिकृत इनकम टैक्स प्रैक्टिशनर्स के रजिस्ट्रेशन, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन और टैक्स रिकवरी से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया गया है। संशोधित नियमों के कुछ प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माने गए हैं, जबकि अन्य बदलाव 17 सितंबर 2026 से लागू किए गए हैं।

    इनकम टैक्स अधिनियम, 2026 में चौथे संशोधन के तहत वैल्यूअर और टैक्स प्रैक्टिशनर के रजिस्ट्रेशन से संबंधित प्रक्रियाओं को संशोधित किया गया है। इसके तहत मौजूदा फॉर्म में भी जरूरी सुधार किए गए हैं, ताकि रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जा सके।

    नए प्रावधानों के तहत वैल्यूअर के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने वाले व्यक्ति को Form-169 में अपनी शैक्षणिक योग्यता, पिछली नौकरी और संबंधित पेशेवर अनुभव की जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही पिछले तीन वर्षों के दौरान किए गए वैल्यूएशन का विवरण भी उपलब्ध कराना होगा।

    इस बदलाव का उद्देश्य रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति की योग्यता और अनुभव से जुड़ी जानकारी को स्पष्ट रूप से दर्ज करना है। इससे वैल्यूअर के पेशेवर रिकॉर्ड और उनके द्वारा किए गए वैल्यूएशन से संबंधित विवरण प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।

    इसी तरह टैक्स प्रैक्टिशनर्स के लिए Form-171 पेश किया गया है। इस फॉर्म में आवेदक को अपनी शैक्षणिक योग्यता और जरूरी प्रमाणपत्रों से संबंधित जानकारी देनी होगी। इसके अलावा यदि आवेदक से जुड़ी कोई अयोग्यता या डिस्क्वालिफिकेशन है, तो उसका विवरण भी देना आवश्यक होगा।

    इनकम टैक्स नियमों में किए गए बदलावों का एक प्रमुख हिस्सा टैक्स कंप्लायंस प्रक्रिया से जुड़ा है। नए प्रावधानों के तहत प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया है। कंप्लायंस से संबंधित समयसीमा में विस्तार से संबंधित करदाताओं और टैक्स प्रोफेशनल्स को अपनी जरूरी जानकारी दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

    समयसीमा बढ़ाए जाने से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कॉरपोरेट्स और अन्य संबंधित टैक्सपेयर्स को अंतिम समय में होने वाली जल्दबाजी से राहत मिलने की संभावना है। इसके साथ ही सर्वर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण होने वाली परेशानियों को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

    CBDT ने टैक्स रिकवरी से जुड़े नियम 225 में भी संशोधन किया है। संशोधित प्रावधानों के तहत इस नियम से जुड़े कई प्रावधानों को हटा दिया गया है। इनमें गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं।

    संशोधन के तहत एक महत्वपूर्ण बदलाव प्रक्रिया की समयसीमा को लेकर किया गया है। पहले जिन प्रक्रियाओं को 30 सितंबर 2026 तक पूरा किया जाना था, उनकी समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है।

    इन बदलावों के साथ इनकम टैक्स नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन, अनुपालन और टैक्स रिकवरी से जुड़ी प्रक्रियाओं में संशोधन किया गया है। नए फॉर्म और विस्तारित समयसीमा का सीधा संबंध संबंधित पेशेवरों और करदाताओं की प्रक्रियात्मक

  • अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति और CJP फंड पर उठे सवाल, वित्तीय जांच की मांग तेज

    अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति और CJP फंड पर उठे सवाल, वित्तीय जांच की मांग तेज

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और उनके संगठन से जुड़े वित्तीय एवं कानूनी मामलों को लेकर नया विवाद सामने आया है। गुजरात के सूरत निवासी एक RTI कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग और संबंधित कर अधिकारियों से कई बिंदुओं पर विस्तृत जांच कराने की मांग की है। शिकायत में अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति, पार्टी की वैधानिक स्थिति तथा हाल ही में घोषित लीगल डिफेंस फंड के वित्तीय और कर संबंधी पहलुओं की निष्पक्ष जांच का आग्रह किया गया है।

    शिकायत में कहा गया है कि अभिजीत दिपके के पिता महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी रहे हैं। ऐसे में यह जानने की आवश्यकता बताई गई है कि परिवार की आय और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर विदेश में उच्च शिक्षा के लिए होने वाले खर्च का प्रबंध किस प्रकार किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि इस संबंध में सभी वित्तीय स्रोत वैध हैं तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, जबकि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

    विवाद केवल व्यक्तिगत संपत्ति तक सीमित नहीं है। शिकायत में कॉकरोच जनता पार्टी की कानूनी स्थिति पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि संगठन राजनीतिक दल की तरह सक्रिय दिखाई देता है, इसलिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या उसका पंजीकरण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत राजनीतिक दल के रूप में हुआ है या नहीं। शिकायतकर्ता ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि संगठन की वैधानिक स्थिति की आधिकारिक जांच कर आवश्यक तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि कोई संगठन राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर धन जुटा रहा है या बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहा है, तो उसके कानूनी स्वरूप और नियामकीय अनुपालन की पुष्टि होना आवश्यक है। उनका तर्क है कि इससे राजनीतिक वित्तपोषण की पारदर्शिता बनी रहती है और आम नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होता है।

    इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू लीगल डिफेंस फंड से भी जुड़ा है। यह फंड उन लोगों की कानूनी सहायता के लिए घोषित किया गया था जो विभिन्न मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। इसी संदर्भ में वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा चर्चा का विषय बनी। अब शिकायतकर्ता ने इस राशि पर लागू होने वाले कर नियमों और GST अनुपालन की भी जांच कराने की मांग की है।

    कर अधिकारियों को भेजे गए पत्र में यह आग्रह किया गया है कि संबंधित राशि पर वस्तु एवं सेवा कर के प्रावधान लागू होते हैं या नहीं, तथा यदि लागू होते हैं तो निर्धारित नियमों का पालन किया गया है या नहीं, इसकी जांच की जाए। शिकायतकर्ता का मानना है कि बड़ी वित्तीय घोषणाओं के मामलों में कर संबंधी सभी औपचारिकताओं का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    फिलहाल संबंधित संस्थाओं की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। यदि चुनाव आयोग और कर विभाग इस मामले में जांच प्रारंभ करते हैं, तो उसके निष्कर्षों से संगठन की वैधानिक स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और कर अनुपालन से जुड़े कई प्रश्नों पर स्पष्टता आ सकती है। वहीं, मामले में लगाए गए सभी आरोप अभी जांच और आधिकारिक पुष्टि के अधीन हैं तथा संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • रणबीर कपूर का पुणे में बड़ा निवेश, 16.42 करोड़ रुपये में खरीदी 25 एकड़ से अधिक जमीन, रियल एस्टेट पोर्टफोलियो को मिला नया विस्तार

    रणबीर कपूर का पुणे में बड़ा निवेश, 16.42 करोड़ रुपये में खरीदी 25 एकड़ से अधिक जमीन, रियल एस्टेट पोर्टफोलियो को मिला नया विस्तार

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर ने फिल्मों के साथ-साथ रियल एस्टेट निवेश के क्षेत्र में भी एक बड़ा कदम उठाया है। अयोध्या में जमीन खरीदने के बाद अब उन्होंने महाराष्ट्र के पुणे जिले के मुलशी तालुका में करीब 25.7 एकड़ भूमि खरीदकर अपने निवेश पोर्टफोलियो का विस्तार किया है। इस सौदे की कुल कीमत 16.42 करोड़ रुपये बताई गई है। यह निवेश ऐसे समय में सामने आया है जब देश के प्रमुख शहरों और पर्यटन क्षेत्रों के आसपास भूमि निवेश को लेकर रुचि लगातार बढ़ रही है।

    उपलब्ध पंजीकरण दस्तावेजों के अनुसार यह भूमि पुणे के मुलशी तालुका स्थित पिंपरी गांव में खरीदी गई है। इस पूरी डील का पंजीकरण 30 अप्रैल 2026 को कराया गया था। खरीदी गई संपत्ति चार अलग-अलग लेकिन आपस में जुड़े भूखंडों से मिलकर बनी है। इन सभी प्लॉटों का कुल क्षेत्रफल लगभग 1,04,000 वर्ग मीटर है, जो करीब 25.7 एकड़ के बराबर है। एक साथ जुड़े हुए इन भूखंडों को भविष्य की संभावित विकास योजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दस्तावेजों के अनुसार सबसे बड़ा भूखंड लगभग 43,800 वर्ग मीटर का है, जिसकी खरीद 7.07 करोड़ रुपये में की गई। दूसरा प्लॉट करीब 29,900 वर्ग मीटर का है और इसकी कीमत 4.62 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। तीसरे भूखंड का क्षेत्रफल लगभग 21,400 वर्ग मीटर है, जिसे 3.31 करोड़ रुपये में खरीदा गया। वहीं सबसे छोटा 8,900 वर्ग मीटर का प्लॉट 1.39 करोड़ रुपये में खरीदा गया। चारों भूखंड एक-दूसरे से जुड़े होने के कारण यह सौदा एकीकृत भूमि निवेश के रूप में देखा जा रहा है।

    इस खरीद के लिए रणबीर कपूर ने 82.13 लाख रुपये का स्टाम्प शुल्क भी अदा किया है। हालांकि इस पूरे लेनदेन को लेकर अभिनेता या उनकी टीम की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। ऐसे में इस भूमि के संभावित उपयोग को लेकर किसी प्रकार की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी केवल संपत्ति पंजीकरण से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों तक सीमित है।

    रणबीर कपूर इससे पहले भी रियल एस्टेट में निवेश कर चुके हैं। उन्होंने अयोध्या में विकसित हो रही एक प्रीमियम टाउनशिप में लगभग 3.31 करोड़ रुपये का प्लॉट खरीदा था। यह भूमि सरयू नदी के निकट विकसित की जा रही परियोजना का हिस्सा है, जहां आधुनिक आवासीय सुविधाओं और लाइफस्टाइल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की योजना बनाई गई है। लगातार दूसरे बड़े भूमि निवेश ने यह संकेत दिया है कि अभिनेता दीर्घकालिक संपत्ति निवेश पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

    वर्कफ्रंट की बात करें तो रणबीर कपूर अपनी आगामी फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भी लगातार चर्चा में हैं। इस बहुप्रतीक्षित फिल्म में वह भगवान राम की भूमिका निभाते नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी कर रहे हैं और इसमें साई पल्लवी, यश, सनी देओल तथा रवि दुबे भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। यह फिल्म दो भागों में रिलीज होगी, जिसमें पहला भाग दीपावली 2026 और दूसरा भाग दीपावली 2027 के अवसर पर सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जाएगा। ऐसे में एक ओर जहां उनका फिल्मी करियर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर रियल एस्टेट क्षेत्र में उनका बढ़ता निवेश भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • सेबी का बड़ा फैसला, विदेशी निवेशकों की पंजीकरण फीस अब डॉलर नहीं बल्कि रुपये में होगी, छह महीने बाद लागू होंगे नए नियम

    सेबी का बड़ा फैसला, विदेशी निवेशकों की पंजीकरण फीस अब डॉलर नहीं बल्कि रुपये में होगी, छह महीने बाद लागू होंगे नए नियम

    नई दिल्ली । भारतीय पूंजी बाजार के नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) और विदेशी वेंचर कैपिटल निवेशकों (एफवीसीआई) के लिए पंजीकरण शुल्क व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब इन निवेशकों की पंजीकरण फीस अमेरिकी डॉलर के बजाय भारतीय रुपये में निर्धारित की जाएगी। यह बदलाव करीब छह महीने बाद लागू होगा, ताकि सभी संबंधित संस्थाओं और निवेशकों को नई व्यवस्था के अनुरूप अपनी प्रक्रियाएं व्यवस्थित करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

    नए शुल्क ढांचे के अनुसार अब पहले लागू 1,000 अमेरिकी डॉलर की पंजीकरण फीस के स्थान पर 90,000 रुपये का भुगतान करना होगा। इसी प्रकार कैटेगरी-1 एफपीआई और एफवीसीआई के लिए पहले निर्धारित 2,500 अमेरिकी डॉलर की फीस को बदलकर 2.30 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही विलंब शुल्क और पंजीकरण जारी रखने से संबंधित शुल्कों में भी संशोधन किया गया है, जिससे पूरी शुल्क प्रणाली भारतीय मुद्रा पर आधारित हो जाएगी।

    सेबी का मानना है कि रुपये में शुल्क निर्धारित करने से विदेशी मुद्रा आधारित भुगतान व्यवस्था से जुड़ी कई व्यावहारिक चुनौतियां समाप्त होंगी। अब तक डॉलर आधारित शुल्क प्रणाली के कारण लेखांकन, बिलिंग, भुगतान मिलान और वित्तीय रिपोर्टिंग जैसी प्रक्रियाओं में अतिरिक्त समय और संसाधनों की आवश्यकता पड़ती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

    संशोधित नियमों के तहत डिपॉजिटरी संस्थानों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। अब उन्हें एफपीआई और एफवीसीआई से प्राप्त शुल्क पंजीकरण स्वीकृत होने के पांच कार्य दिवसों के भीतर सेबी के पास जमा कराना होगा। इससे शुल्क संग्रह और नियामकीय प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है। नियामक का उद्देश्य पूरी प्रणाली को समयबद्ध और डिजिटल प्रक्रियाओं के अनुरूप बनाना है।

    सेबी ने पंजीकरण प्रक्रिया को भी पहले की तुलना में अधिक सरल बनाने की दिशा में कदम उठाया है। अब सामान्य आवेदन पत्र में व्यक्तिगत निवेशकों के लिए जन्मतिथि तथा संस्थागत आवेदकों के लिए कंपनी की स्थापना तिथि जैसी आवश्यक जानकारियों को शामिल किया गया है। इससे आवेदन प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी और अन्य नियामकीय औपचारिकताओं को पूरा करना भी आसान हो जाएगा।

    यह बदलाव कर संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की व्यापक पहल के अनुरूप भी माना जा रहा है। विशेष रूप से स्थायी खाता संख्या (पैन) के आवेदन और उससे जुड़ी औपचारिकताओं को आसान बनाने के उद्देश्य से विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाया गया है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय पूंजी बाजार में प्रवेश और अनुपालन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सहज हो सकती है।

    इसके अतिरिक्त सेबी ने कस्टोडियन संस्थानों के शुल्क भुगतान के तरीके में भी संशोधन किया है। पहले जहां उन्हें वार्षिक आधार पर शुल्क जमा करना पड़ता था, वहीं अब मासिक भुगतान व्यवस्था लागू की गई है। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक नियमित और प्रबंधन के लिहाज से सुविधाजनक बनने की उम्मीद है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रुपये में शुल्क निर्धारण से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, विनिमय दर के उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम होगा और विदेशी निवेशकों के लिए अनुपालन प्रक्रिया अधिक स्पष्ट बनेगी। यह कदम भारतीय पूंजी बाजार को और अधिक पारदर्शी, आधुनिक और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

  • अमरनाथ यात्रा को लेकर बड़ा अपडेट, रजिस्ट्रेशन ने पकड़ी रफ्तार; सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर

    अमरनाथ यात्रा को लेकर बड़ा अपडेट, रजिस्ट्रेशन ने पकड़ी रफ्तार; सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर


    नई दिल्ली । अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है और इसका असर रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। अब तक 3.5 लाख से अधिक भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि इस वर्ष यात्रा को लेकर आस्था और उत्साह दोनों चरम पर हैं। यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी और यह 57 दिनों तक चलेगी, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

    प्रशासन और श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की ओर से यात्रा को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। यात्रा मार्गों पर बर्फ हटाने और ट्रैक बहाली का कार्य तेजी से चल रहा है, जिसमें बालटाल और पहलगाम दोनों प्रमुख मार्गों पर कई किलोमीटर तक बर्फ हटाई जा चुकी है। हालांकि अभी भी कुछ ऊंचाई वाले हिस्सों में भारी बर्फ जमा है, जिसे हटाने का काम जारी है। अधिकारियों का मानना है कि जून के मध्य तक दोनों मार्ग पूरी तरह से यात्रा के लिए तैयार कर दिए जाएंगे।

    श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार कई नए यात्री निवास तैयार किए गए हैं, जहां हजारों यात्रियों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की जा रही है। पहलगाम, बालटाल, सोनमर्ग और बिजबेहड़ा जैसे प्रमुख स्थानों पर सुविधाओं को बेहतर बनाया गया है ताकि यात्रा के दौरान किसी भी तरह की असुविधा न हो। इसके साथ ही मेडिकल सुविधा, पेयजल, बिजली और संचार व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। यात्रा मार्गों के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की योजना बनाई गई है और निगरानी व्यवस्था को भी और मजबूत किया जा रहा है। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि जो लोग अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए हैं, वे जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करें ताकि अंतिम समय में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इसके साथ ही यात्रियों को मौसम और स्वास्थ्य से जुड़ी सभी आवश्यक सावधानियों का पालन करने की सलाह दी गई है, क्योंकि यह यात्रा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से होकर गुजरती है। बदलते मौसम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों को देखते हुए प्रशासन ने सभी तैयारियों को अंतिम रूप देने की दिशा में काम तेज कर दिया है।

    कुल मिलाकर, इस बार अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह और प्रशासन की तैयारियां दोनों ही उच्च स्तर पर हैं, जिससे उम्मीद की जा रही है कि यह यात्रा अब तक की सबसे व्यवस्थित और सुरक्षित यात्राओं में से एक होगी।

  • मध्यप्रदेश में अब दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस अनिवार्य, मिलावटी दूध पर कड़ा नियंत्रण

    मध्यप्रदेश में अब दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस अनिवार्य, मिलावटी दूध पर कड़ा नियंत्रण



    भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब डेयरी सहकारी समितियों को छोड़कर सभी दूध उत्पादक और विक्रेता लाइसेंस या पंजीकरण के बिना अपने कारोबार को जारी नहीं रख सकते। यह निर्णय एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है।

    सरकार ने दूध संग्रह और परिवहन में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और भंडारण व्यवस्थाओं की नियमित जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे मिलावटी दूध और नकली दुग्ध उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। राज्य में ऐसे दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की पहचान की जाएगी जो अभी तक पंजीकृत नहीं हैं। साथ ही, दूध से जुड़ी हर गतिविधि की मासिक निगरानी रिपोर्ट 15 और 30 या 31 तारीख को तैयार कर प्राधिकरण को भेजी जाएगी।

    मध्यप्रदेश देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहाँ कुल 213 लाख टन दूध का उत्पादन होता है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 9 प्रतिशत है। राज्य में भैंस के दूध का हिस्सा लगभग 48 प्रतिशत है। वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 652 से 707 ग्राम प्रतिदिन रही।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में दूध उत्पादन को वर्तमान 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ अनुबंध भी किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में दूध संग्रह को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 381 नई सहकारी समितियां भी संचालित हो रही हैं।

    प्रदेश सरकार ने दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना भी शुरू की है। इस योजना के तहत यदि कोई किसान 25 गायों की यूनिट स्थापित करता है, तो उसे 10 लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादन बढ़ाना और किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है।

    केंद्र सरकार भी दूध उत्पादन और बिक्री पर नजर रख रही है। एफएसएसएआई ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र में दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की निगरानी बढ़ाएं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य इस अनिवार्यता से छूट प्राप्त हैं, लेकिन अन्य सभी को खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार पंजीकरण या लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।

    एफएसएसएआई ने विशेष पंजीकरण अभियान चलाकर उन दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की पहचान करने को कहा है जो अब तक पंजीकृत नहीं हैं। साथ ही, दूध संग्रह, परिवहन और भंडारण की जांच को नियमित रूप से लागू करने का निर्देश भी दिया गया है।

  • नियम तोड़े, नहीं बख्शेंगे! RBI ने 35 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द

    नियम तोड़े, नहीं बख्शेंगे! RBI ने 35 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द

    नई दिल्‍ली। वित्तीय अनुशासन को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। रेगुलेटरी नियमों का लगातार उल्लंघन करने पर आरबीआई ने 35 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। इस कार्रवाई के साथ ही केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि ये कंपनियां अब किसी भी तरह का एनबीएफसी से जुड़ा कारोबार नहीं कर सकेंगी। यह फैसला आम निवेशकों और कर्ज लेने वालों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है।

    दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक ने यह कार्रवाई आरबीआई एक्ट, 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए की है। केंद्रीय बैंक के अनुसार ये कंपनियां लंबे समय से जरूरी शर्तों और नियामकीय मानकों का पालन नहीं कर रही थीं, जिसके चलते उन्हें एनबीएफसी के रूप में काम करने की अनुमति वापस ले ली गई।

    मामले में सामने आया है कि आरबीआई द्वारा सात जनवरी 2026 को जारी सर्कुलर में बताया गया है कि इन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने के आदेश अलग-अलग तारीखों पर 9 दिसंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच जारी किए गए थे। इसका सीधा मतलब है कि इन तारीखों के बाद ये कंपनियां कानूनी रूप से किसी भी तरह का एनबीएफसी कारोबार नहीं कर सकतीं।

    क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?

    आरबीआई के मुताबिक, जिन 35 एनबीएफसी के खिलाफ यह कदम उठाया गया है, उन्होंने कई अहम नियमों का उल्लंघन किया। इनमें न्यूनतम नेट ओन्ड फंड (NOF) बनाए न रखना, पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) का पालन न करना, समय पर वित्तीय रिपोर्टिंग न करना और एसेट क्लासिफिकेशन से जुड़े मानकों की अनदेखी शामिल है। कई कंपनियां लंबे समय से निष्क्रिय (डोरमेंट) स्थिति में थीं, लेकिन इसके बावजूद उनका रजिस्ट्रेशन बरकरार था, जो वित्तीय प्रणाली के लिए जोखिम पैदा कर रहा था।

    आर्थ‍िक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई आरबीआई के ‘स्केल-बेस्ड रेगुलेशन’ और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की नीति का हिस्सा है। इससे पहले भी 2023 और 2024 में कई एनबीएफसी के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं।

    ये है 35 NBFCs की पूरी सूची

    सत्य प्रकाश कैपिटल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड

    AG सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड

    ALB लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड

    ATM क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    कॉर्पोरेट कैपिटल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड

    डेसिसिव फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड

    डिवाइन इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    लिबर्टी प्राइवेट लिमिटेड सेल्स

    पर्ल्स हायर परचेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड

    क्वासर इंडिया फिनकैप प्राइवेट लिमिटेड

    सनलाइफ सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड

    सनराइज मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड

    स्वितो फाइनेंस एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड

    त्रिवेणी विनिमय प्राइवेट लिमिटेड

    ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी मार्केटिंग लिमिटेड

    यूनिट्रॉन फिनलीज लिमिटेड

    वीरा सिक्योरिटीज एंड फिनलीज प्राइवेट लिमिटेड

    विनी फाइनेंशियल एंड मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    शिवोम इन्वेस्टमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड

    अधिनाथ इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    एग्रोहा सेविंग्स लिमिटेड

    अहुसंस फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    अल्टर इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड

    एसोसिएटेड लीजिंग लिमिटेड

    अटलांटिक लीजिंग लिमिटेड

    BHL फॉरेक्स एंड फिनलीज लिमिटेड

    भरतपुरिया फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड

    दादा देव फाइनेंस एंड लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड

    ईस्ट दिल्ली लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड

    इकोनॉमिक कैपिटल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड

    ESN फाइनेंस एंड कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड

    FMI इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    गणपति फिनकैप सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड

    गुडवर्थ सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड

    गोपाल ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड

    बाजार और निवेशकों पर असर

    आरबीआई के इस कदम को वित्तीय बाजार में सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। कमजोर और नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों के बाहर होने से एनबीएफसी सेक्टर की साख मजबूत होगी। दूसरी ओर इससे जुड़ा एक पक्ष ये भी है कि जिन निवेशकों या ग्राहकों का पैसा इन कंपनियों में फंसा है, उनके लिए यह स्थिति चिंता का विषय हो सकती है। ऐसे मामलों में निवेशकों को कानूनी रास्ता अपनाना पड़ सकता है, क्योंकि आरबीआई इन कंपनियों के लेन-देन की गारंटी नहीं देता।

    आम जनता के लिए आरबीआई की अहम सलाह

    आरबीआई ने इस मौके पर आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि किसी भी निवेश, लोन या वित्तीय लेन-देन से पहले यह जरूर जांच लें कि संबंधित कंपनी आरबीआई में पंजीकृत है या नहीं। इसके लिए आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध एनबीएफसी की सूची देखी जा सकती है।