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  • अमरनाथ यात्राः 15 अप्रैल से शुरू होंगे रजिस्ट्रेशन…. पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिलेगा परमिट

    अमरनाथ यात्राः 15 अप्रैल से शुरू होंगे रजिस्ट्रेशन…. पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिलेगा परमिट


    जम्मू।
    अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) के लिए 15 अप्रैल से पंजीकरण (Registration) कराया जा सकेगा। श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (Shri Amarnathji Shrine Board) ने बुधवार को इसका एलान कर दिया। पंजीकरण देश भर के निर्धारित बैंक शाखाओं के माध्यम से होगा। यात्रा परमिट (Travel permit.) ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर जारी होगा। यात्रा की तारीख भी जल्द घोषित की जाएगी। देश भर की 554 बैंक शाखाओं में पंजीकरण होगा।

    पंजीकरण के दौरान प्रत्येक बैंक शाखा को प्रतिदिन, प्रति मार्ग एक निश्चित कोटा आवंटित किया गया है। 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों का पंजीकरण नहीं होगा। इसी तरह छह सप्ताह से अधिक की गर्भवती का भी पंजीकरण नहीं होगा।

    बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष यात्रा परमिट आधार-आधारित बायोमीट्रिक ई-केवाईसी प्रमाणीकरण के बाद सिस्टम से एनआईसी पोर्टल (https://jksasb.nic.in) पर जारी किया जाएगा। यदि प्रमाणीकरण में तकनीकी खराबी आती है तो बैंक शाखा मैनुअल फोटो और डेटा प्रविष्टि के माध्यम से पंजीकरण कर सकेगी।


    पंजीकरण के लिए आवश्यक जानकारियां

    – यात्रियों को पंजीकरण के लिए वैध अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जमा करना होगा। यह आठ अप्रैल या उसके बाद अधिकृत डॉक्टर/मेडिकल संस्थान की ओर से जारी किया गया हो। पंजीकरण शुल्क प्रति यात्रा परमिट 150 रुपये निर्धारित किया गया है।
    – यात्रा परमिट पर मार्ग (बालटाल या पहलगाम और यात्रा तिथि स्पष्ट रूप से अंकित होगी। बैंक शाखाओं में पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएंगे। शाखाओं के कर्मचारियों को यात्रियों के अग्रिम पंजीकरण के हर पहलू में प्रशिक्षित किया जाएगा।
    – यात्री सही मोबाइल और आधार नंबर का उपयोग करें। सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा कराएं।
    – यात्रियों को मौसम और ऊंचाई के अनुसार उचित स्वास्थ्य व सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रा की तारीख की घोषणा के साथ ही सभी आवश्यक दिशानिर्देश सार्वजनिक किए जाएंगे।

  • MP: लाड़ली बहना योजना के पंजीकरण दोबारा शुरू करने की मांग… HC ने खारिज की याचिका

    MP: लाड़ली बहना योजना के पंजीकरण दोबारा शुरू करने की मांग… HC ने खारिज की याचिका


    नई दिल्ली।
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Scheme) में दोबारा पंजीकरण शुरू करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज (PIL Rejected) कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि किसी योजना का संचालन कैसे करना है ये सरकार के जिम्मे में आता है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की बेंच ने ये फैसला सुनाया। जनहित याचिका रतलाम के पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने दायर की थी।

    सकलेचा ने मांग की थी कि राज्य सरकार द्वारा किए गए वादे के मुताबिक, हर लाभार्थी को 3,000 रुपये प्रति माह दिया जाए, नए लाभार्थियों का दोबारा पंजीयन शुरू करने और न्यूनतम पात्रता उम्र को 21 से घटाकर 18 किया जाए। उन्होंने याचिका में कहा था कि योजना के जारी रहने के बावजूद 20 अगस्त 2023 से नए पंजीकरण पर रोक लगाना मनमाना और भेदभावपूर्ण था। याचिका में कहा गया था कि पंजीयन रोके जाने से 21 वर्ष का उम्र पूरी कर चुकी कई महिलाएं योजना का लाभ नहीं उठा पा रही हैं।


    राज्य सरकार ने दी ये दलील

    वहीं सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि यह एक नीतिगत फैसला था और योजना का लाभ लेने वाली या चाहने वाली किसी भी महिला ने अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील में दम न होने की बात कही और साथ ही ये माना कि राज्या सरकार का फैसला मनमाना और भेदभावपूर्ण नहीं था। कोर्ट ने कहा कि ‘योजना कब शुरू करनी है और इसे कब बंद करना है इसकी तारीख तय करना सरकार का काम है। हम एक ऐसे शख्स (याचिकाकर्ता) के कहने पर इसपर विचार नहीं कर सकते जो कि खुद योजना का लाभार्थी नहीं है।’


    क्या है लाडली बहना योजना?

    लाड़ली बहना योजना बीजेपी सरकार ने 2023 के विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले शुरू की थी। मौजूदा समय में, मध्य प्रदेश की 1.26 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को इस योजना के तहत हर महीने 1500 रुपये मिलते हैं। सरकार का कहना है कि 2028 तक इस राशि को बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया जाएगा।


    बीते महीने ही जारी की गई है 32वीं किस्त

    बीते महीने ही महिलाओं को 1500-1500 रुपये की सौगात दी गई है। आपको बता दें कि इस योजना की किस्त राशि में 250 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी जो कि नवंबर महीने से लागू है पहले किस्त के रूप में 1250 रुपये दिए जाते थे।