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  • पितृ पक्ष में क्यों टालते हैं प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री? जानिए राजपाल यादव से जुड़े मामले में क्या आया सामने

    पितृ पक्ष में क्यों टालते हैं प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री? जानिए राजपाल यादव से जुड़े मामले में क्या आया सामने

    नई दिल्ली ।अभिनेता राजपाल यादव से जुड़े एक मामले में पितृ पक्ष के दौरान संपत्ति की रजिस्ट्री रुकने का जिक्र सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके वकील ने अदालत में बताया कि जिस संपत्ति को बेचकर रकम जुटाई जानी है, उसकी रजिस्ट्री पितृ पक्ष के कारण रुकी हुई है और नवरात्र की शुरुआत में सौदा पूरा होने की उम्मीद है। इस बात के बाद पितृ पक्ष के दौरान जमीन, मकान या दूसरी बड़ी संपत्ति की खरीद और रजिस्ट्री को टालने की धार्मिक परंपरा एक बार फिर चर्चा में आ गई है। कई हिंदू परिवार इस अवधि में नई संपत्ति खरीदने या बड़े शुभ कार्य शुरू करने से बचते हैं।

    हिंदू धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए विशेष समय माना जाता है। इस दौरान परिवार अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इन दिनों ध्यान नए उत्सव या सांसारिक शुभ कार्यों की बजाय पूर्वजों से जुड़े धार्मिक कर्मों पर रखा जाता है। इसी वजह से कई परिवार नई जमीन या मकान खरीदने, प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराने और बड़े निवेश की शुरुआत जैसे कामों को आगे के शुभ समय तक टालना पसंद करते हैं।

    पितृ पक्ष में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री रोकने की मान्यता मुख्य रूप से धार्मिक और पारंपरिक विश्वास से जुड़ी है। इस अवधि को आमतौर पर मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय नहीं माना जाता। इसलिए कुछ परिवार नई शुरुआत से जुड़े काम नवरात्र, दीपावली या किसी अन्य शुभ मुहूर्त तक स्थगित कर देते हैं। हालांकि, केवल पितृ पक्ष होने के कारण संपत्ति की खरीद या रजिस्ट्री पर कोई कानूनी रोक नहीं होती। कोई व्यक्ति अपने कानूनी, व्यावहारिक या आर्थिक कारणों के आधार पर इस अवधि में संपत्ति खरीद या रजिस्ट्री करा सकता है। यह फैसला धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत परंपरा से जुड़ा विषय है।

    पितृ पक्ष के दौरान हर तरह की खरीदारी को अशुभ नहीं माना जाता। रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। भोजन, कपड़े, दवाएं, घर की जरूरी सामग्री और कामकाज से संबंधित सामान की खरीद पर सामान्य रूप से ऐसी रोक नहीं मानी जाती, जो सभी लोगों पर लागू हो। श्राद्ध और पितरों से जुड़े धार्मिक कर्मों के लिए अनाज, फल, सब्जियां, घी, दूध और भोजन सामग्री खरीदना भी इसी अवधि की जरूरतों का हिस्सा हो सकता है। कई परिवार इस दौरान ब्राह्मण भोजन, जरूरतमंदों को दान और पितरों की पसंद की वस्तुओं का दान भी करते हैं।

    वहीं नई जमीन या मकान खरीदने, नई प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री, गृह प्रवेश, विवाह और अन्य बड़े मांगलिक कार्यों को कई परिवार पितृ पक्ष में करने से बचते हैं। कुछ लोग नया वाहन खरीदने, महंगे आभूषण लेने या बड़े निवेश की शुरुआत को भी इस अवधि के बाद करना पसंद करते हैं। इसके पीछे मुख्य आधार धार्मिक मान्यता है, न कि कोई कानूनी नियम। इसलिए अलग-अलग परिवार अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार निर्णय लेते हैं।

    पहले से तय संपत्ति की रजिस्ट्री के मामले में भी परिवारों की प्राथमिकता अलग हो सकती है। यदि संपत्ति का सौदा पहले ही तय हो चुका है और रजिस्ट्री की तारीख पितृ पक्ष में पड़ती है, तो धार्मिक मान्यता मानने वाले लोग तारीख आगे बढ़ाना पसंद कर सकते हैं। दूसरी ओर, जिन लोगों के लिए कानूनी प्रक्रिया, समय या आर्थिक कारण महत्वपूर्ण हैं, वे तय तारीख पर रजिस्ट्री करा सकते हैं। ऐसे में पितृ पक्ष के दौरान प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री को लेकर फैसला धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल से की मुलाकात, सेवा संकल्प अभियान और नि:शुल्क रजिस्ट्री की दी जानकारी

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल से की मुलाकात, सेवा संकल्प अभियान और नि:शुल्क रजिस्ट्री की दी जानकारी

    मध्य प्रदेश। के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को लोक भवन पहुंचकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल से सौजन्य भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से शुरू होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत प्रदेश में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की जानकारी राज्यपाल को दी।

    मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ के तहत होने वाले विशेष अभियान के बारे में भी बताया। इसके तहत प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्र के 50 लाख से अधिक लोगों के पट्टों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने की योजना है। इस रजिस्ट्री का पूरा खर्च सरकारी स्तर पर वहन किया जाएगा।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के साथ ही सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए गए कार्यों को स्मरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर दीपोत्सव का आयोजन भी किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि 17 सितंबर को ग्रामीण क्षेत्रों के 50 लाख से अधिक पट्टों की रजिस्ट्री निशुल्क कराई जाएगी। इसके लिए होने वाला पूरा सरकारी खर्च शासन की ओर से वहन किया जाएगा। इस अभियान को प्रधानमंत्री के जनसेवा के संकल्प से जुड़ी विकास यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किए जा रहे सेवा संकल्प अभियान का हिस्सा बताया गया है।

    ‘सेवा-संकल्प अभियान’ 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक पूरे मध्य प्रदेश में संचालित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की अविरल सेवा-संकल्प की यात्रा को प्रदेश के लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से इस अभियान में शामिल होने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि सभी लोग इस महाअभियान का हिस्सा बनें और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की यात्रा में सहभागी बनें।

    राज्यपाल से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने अभियान से संबंधित कार्यक्रमों और नि:शुल्क रजिस्ट्री की योजना की जानकारी साझा की। ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ के तहत होने वाली रजिस्ट्री ग्रामीण क्षेत्र के पट्टाधारकों से जुड़ी है और इसमें सरकारी स्तर पर खर्च वहन किए जाने की बात कही गई है।

    सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर होगी और इसका संचालन एक महीने तक किया जाएगा। इस दौरान प्रदेश में अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इसे प्रधानमंत्री की जनसेवा से जुड़ी 25 वर्षों की यात्रा को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बताया है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल को मुख्यमंत्री द्वारा दी गई जानकारी में अभियान के कार्यक्रमों के साथ-साथ 50 लाख से अधिक ग्रामीण पट्टों की नि:शुल्क रजिस्ट्री से संबंधित योजना भी शामिल रही। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अभियान में सहभागिता की अपील करते हुए इसे विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ी यात्रा में भागीदारी का अवसर बताया।

  • स्वामित्व योजना के अतिरिक्त काम से नाराज पटवारियों का प्रदर्शन, 55 जिलों में कलमबंद हड़ताल की दी चेतावनी

    स्वामित्व योजना के अतिरिक्त काम से नाराज पटवारियों का प्रदर्शन, 55 जिलों में कलमबंद हड़ताल की दी चेतावनी

    मध्य प्रदेश । के छतरपुर जिले में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना के तहत अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपे जाने के विरोध में पटवारियों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। मध्य प्रदेश पटवारी संघ जिला शाखा के आह्वान पर दर्जनों पटवारी रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने नारेबाजी करते हुए धरना दिया और अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया। पटवारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की बात कही।

    पटवारी संघ की मुख्य मांग है कि आबादी भूमि के पंजीयन और निष्पादन की प्रक्रिया, ई-केवाईसी तथा व्यक्तिगत दायित्व से जुड़े अन्य कार्यों से पटवारी संवर्ग को अलग रखा जाए। संघ का कहना है कि इन कार्यों में जमीन की सीमा, क्षेत्रफल, मालिकाना हक या दस्तावेजों से जुड़ी किसी भी त्रुटि की स्थिति में पटवारियों पर व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी आने की आशंका है। इसी वजह से संघ इन अतिरिक्त दायित्वों को लेकर विरोध कर रहा है।

    मध्य प्रदेश पटवारी संघ संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष हारून अहमद ने कहा कि पंजीयन से संबंधित कार्यों के लिए शासन के पास अलग विभाग मौजूद है। इसके बावजूद राजस्व विभाग के मैदानी कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रशासनिक और कानूनी जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण आबादी क्षेत्र का भू-स्वरूप कृषि भूमि से अलग है और पंचायत राज व्यवस्था के तहत सर्वेक्षण से जुड़े कार्य पंचायत विभाग से संबंधित हैं।

    पटवारियों ने किसान हितैषी फार्मर आईडी और जियो-टैग गिरदावरी में सामने आ रही तकनीकी खामियों का भी मुद्दा उठाया। संघ के अनुसार, तकनीकी समस्याओं के कारण मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है। पटवारी संघ का कहना है कि पहले से ही कई जिम्मेदारियां निभा रहे कर्मचारियों पर लगातार नई योजनाओं का काम बढ़ाया जा रहा है।

    संघ ने ग्रेड-पे, वेतन विसंगति और कैडर रिव्यू जैसी लंबित मांगों का भी उल्लेख किया। पटवारियों के मुताबिक इन मुद्दों का अभी निराकरण नहीं हुआ है और इसके साथ ही अतिरिक्त कार्यभार लगातार बढ़ रहा है। इसी वजह से संघ ने शासन से आबादी पंजीयन एवं निष्पादन योजना से पटवारियों को तत्काल अलग करने की मांग की है।

    कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान पटवारी इस बात पर भी अड़े रहे कि मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन केवल जिला कलेक्टर को ही सौंपा जाएगा। डिप्टी कलेक्टर और एडीएम विनय द्विवेदी ज्ञापन लेने पहुंचे, लेकिन पटवारियों ने उन्हें ज्ञापन देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों अधिकारी बिना आवेदन लिए वापस लौट गए और पटवारी धरने पर बैठे रहे।

    पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई और अतिरिक्त जिम्मेदारियों को लेकर दबाव जारी रहा, तो प्रदेश के सभी 55 जिलों में पटवारी काम बंद कर कलमबंद हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे। संघ ने ऐसी स्थिति के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार बताया है।