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  • पश्चिम बंगाल उपचुनाव में भाजपा की मजबूत बढ़त, नंदीग्राम में हंसी रानी रथ 50 हजार और रेजीनगर में शंकरावह सरकार 23 हजार वोटों से आगे

    पश्चिम बंगाल उपचुनाव में भाजपा की मजबूत बढ़त, नंदीग्राम में हंसी रानी रथ 50 हजार और रेजीनगर में शंकरावह सरकार 23 हजार वोटों से आगे

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की मतगणना के दौरान भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार बड़ी बढ़त बनाए हुए हैं। 9 अक्टूबर 2026 को दोपहर तक सामने आए रुझानों के मुताबिक, नंदीग्राम में भाजपा प्रत्याशी हंसी रानी रथ 50 हजार से अधिक वोटों से आगे चल रही हैं। वहीं, रेजीनगर सीट पर भाजपा उम्मीदवार शंकरावह सरकार ने करीब 23 हजार वोटों की बढ़त बना रखी है। इन दोनों सीटों पर मुकाबले के दौरान कांग्रेस और आम जनता उन्नयन पार्टी के उम्मीदवार पीछे चल रहे हैं। मतगणना जारी रहने के कारण अंतिम परिणाम की स्थिति आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

    नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भाजपा की हंसी रानी रथ को अब तक 50 हजार से अधिक वोटों की बढ़त मिली है। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान दूसरे स्थान पर हैं, जिन्हें करीब 13 हजार वोट मिले हैं। यह सीट शुभेंदु अधिकारी के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी। भाजपा ने यहां से हंसी रानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया है। शुरुआती मतगणना में भाजपा प्रत्याशी की बढ़त काफी बड़ी दिखाई दे रही है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार उनसे पीछे हैं।

    नंदीग्राम सीट पर चुनावी मुकाबला उस समय चर्चा में आया, जब तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन दिया था। कांग्रेस उम्मीदवार को एक मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन चुनाव लड़ने के लिए उन्हें जमानत मिल गई। इसके बाद इस सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच केंद्रित हो गया। मतगणना के दौरान भाजपा प्रत्याशी की बढ़त ने इस मुकाबले को महत्वपूर्ण बना दिया है।

    रेजीनगर विधानसभा सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार शंकरावह सरकार आगे चल रहे हैं। इस सीट पर उन्होंने करीब 23 हजार वोटों की बढ़त बनाई है। दूसरे स्थान पर आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद हैं, जिन्हें अब तक करीब 12 हजार वोट मिले हैं। कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुल्लाहिल काफी तीसरे स्थान पर चल रहे हैं। रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के विधायक पद छोड़ने के बाद खाली हुई थी। वह मुर्शिदाबाद जिले की नवादा विधानसभा सीट से विधायक हैं। इस सीट के परिणाम पर भी राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।

    नंदीग्राम और रेजीनगर, दोनों विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान हुआ था। मतगणना के दौरान सामने आए रुझानों में भाजपा उम्मीदवारों की बढ़त दर्ज की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रेजीनगर में पांच दौर की गिनती पूरी हुई थी और दस दौर की गिनती बाकी थी। ऐसे में मतगणना पूरी होने से पहले बढ़त के आंकड़ों में बदलाव की संभावना बनी हुई थी। इसलिए इन रुझानों को अंतिम चुनाव परिणाम नहीं माना जा सकता।

    पश्चिम बंगाल की इन दोनों सीटों के अलावा पुडुचेरी और असम के चुनाव परिणाम भी चर्चा में रहे। पुडुचेरी की थट्टनचावडी विधानसभा सीट पर एनडीए समर्थित ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस के उम्मीदवार अशोक आनंद ने 13,358 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। कांग्रेस उम्मीदवार ई. विनायगम को 4,876 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे। यह सीट मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी। रंगासामी 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में थट्टनचावडी और मंगलम, दोनों सीटों से जीते थे। बाद में उन्होंने थट्टनचावडी सीट छोड़ दी थी, जिसके बाद पार्टी ने अशोक आनंद को उम्मीदवार बनाया।

    असम की नगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव की मतगणना में भाजपा उम्मीदवार देवाशीष शर्मा 77 हजार से अधिक वोटों से आगे चल रहे थे। उन्हें दो लाख 26 हजार से अधिक वोट मिले थे। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल करीब 1.49 लाख वोटों के साथ दूसरे स्थान पर थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार शिवमणि बोरा को लगभग 38 हजार वोट मिले थे। इन आंकड़ों के आधार पर नगांव में भी भाजपा की बढ़त दिखाई दे रही थी। हालांकि, उपलब्ध रुझानों के आधार पर ही स्थिति का आकलन किया जा सकता है और अंतिम नतीजों की पुष्टि आधिकारिक घोषणा के बाद होगी।

  • सायोनी घोष की संभावित नई भूमिका, नंदीग्राम और रेजीनगर में भाजपा के लिए प्रचार की चर्चा

    सायोनी घोष की संभावित नई भूमिका, नंदीग्राम और रेजीनगर में भाजपा के लिए प्रचार की चर्चा

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI ने दोनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करने का फैसला किया है। हालांकि, पार्टी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि प्रचार अभियान में कौन-कौन से नेता शामिल होंगे। इसी वजह से सांसद सायोनी घोष की संभावित भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

    सायोनी घोष उन सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अलग होने के बाद NCPI में विलय किया था। इससे पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में वह भाजपा की मुखर विरोधी रही हैं। अब NCPI के भाजपा समर्थित प्रचार अभियान के फैसले के बाद उनकी संभावित भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी तक पार्टी की ओर से सायोनी घोष के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    NCPI ने दोनों विधानसभा सीटों पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। पार्टी का कहना है कि इसी वजह से उसने भाजपा के समर्थन में प्रचार करने का निर्णय लिया है। पार्टी ने खुद को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में भाजपा के बाद सबसे बड़ा साझेदार भी बताया है। NCPI के अनुसार, उसके साथ कुल 20 सांसद हैं।

    पार्टी नेतृत्व ने पश्चिम बंगाल में लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक टकराव को कम करने और मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया है। NCPI की ओर से आने वाले समय में गठबंधन नेतृत्व के साथ एक बड़ी बैठक किए जाने की बात भी कही गई है। इसमें राज्य से जुड़े राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

    हालांकि, भाजपा ने NCPI के इस समर्थन को औपचारिक चुनावी गठबंधन नहीं माना है। भाजपा की ओर से स्पष्ट किया गया है कि दोनों सीटों पर समर्थन में प्रचार करने का अर्थ भविष्य में सीटों के बंटवारे या किसी औपचारिक चुनावी समझौते से नहीं है। यानी फिलहाल NCPI का समर्थन प्रचार तक सीमित बताया गया है।

    उधर, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए नेताओं का एक गुट भी उपचुनाव को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर रहा है। इस गुट ने नंदीग्राम सीट से मोहम्मद एतेशामुल हक को उम्मीदवार बनाया है। गुट की ओर से चुनाव को तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे राजनीतिक मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है, जबकि 9 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के विधानसभा सदस्य पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई है। रेजीनगर सीट भी रिक्त होने के बाद उपचुनाव के लिए निर्धारित की गई है।

    उपचुनाव से पहले दोनों सीटों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। NCPI के भाजपा समर्थन वाले फैसले ने इन चुनावों में एक नया राजनीतिक समीकरण जरूर सामने रखा है। वहीं, सायोनी घोष की भूमिका अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यदि पार्टी उन्हें प्रचार अभियान में शामिल करती है, तो उनकी सार्वजनिक भूमिका में बदलाव को लेकर चर्चा और बढ़ सकती है।

    फिलहाल आधिकारिक तौर पर इतना ही स्पष्ट है कि NCPI नंदीग्राम और रेजीनगर में भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करेगी। सायोनी घोष समेत किन नेताओं को प्रचार अभियान में उतारा जाएगा, इसकी तस्वीर पार्टी की अंतिम घोषणा के बाद ही साफ होगी।

  • रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर का बड़ा ऐलान, बेटे के लिए प्रचार से बनाई दूरी, प्रशासन पर लगाए पक्षपात के आरोप

    रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर का बड़ा ऐलान, बेटे के लिए प्रचार से बनाई दूरी, प्रशासन पर लगाए पक्षपात के आरोप

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर ने अपने बेटे और पार्टी उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद के लिए चुनाव प्रचार नहीं करने का ऐलान किया है। उन्होंने प्रशासन पर पक्षपात और दुश्मनी का आरोप लगाते हुए कहा कि वह अब जनता के फैसले को स्वीकार करेंगे।

    हुमायूं कबीर का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रेजीनगर उपचुनाव को लेकर पहले ही कई राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों से वह मिलते हैं या बातचीत करते हैं, उनके खिलाफ गिरफ्तारी या धमकी जैसी कार्रवाई की जा रही है। कबीर के मुताबिक उनकी पार्टी के करीब 25 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।

    उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पार्टी को पारंपरिक तरीके से प्रचार करने की जरूरत नहीं है। वह सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाएंगे और मतदान के दिन जमीन पर मौजूद रहेंगे। उनका कहना है कि पार्टी का चुनाव चिह्न टेबल है और मतदाता इसे पहचानते हैं।

    हुमायूं कबीर ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन का रवैया उनकी पार्टी के प्रति पक्षपातपूर्ण है। उनका कहना था कि सरकारी अधिकारियों को संविधान और कानून के मुताबिक काम करना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दल के पक्ष में। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ऐसे किसी दबाव के सामने पीछे नहीं हटेगी।

    इस बीच हुमायूं कबीर के प्रचार से दूरी बनाने के बाद उनके बेटे गुलाम नबी आजाद ने भी प्रचार से दूर रहने का फैसला किया है। इससे रेजीनगर उपचुनाव में एजेयूपी की चुनावी रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी की ओर से अब मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया और मतदान के दिन की सक्रियता पर जोर दिया जा रहा है।

    रेजीनगर उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी को लेकर भी हाल में बड़ा घटनाक्रम सामने आया था। उन्होंने पहले चुनाव से अपना नाम वापस लेने की घोषणा की थी। कुछ समय बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया और चुनाव मैदान में बने रहने का ऐलान किया। इसके बाद उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गईं।

    रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के लिए भी महत्वपूर्ण रही है। हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने इस सीट से जीत दर्ज की थी। उन्हें करीब 51 प्रतिशत वोट मिले थे और उन्होंने 58,876 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। उन्होंने नौदा विधानसभा सीट से भी चुनाव जीता था। बाद में उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ने का फैसला किया, जिसके कारण यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।

    अब 6 अक्टूबर को होने वाले रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर का प्रचार से हटना चुनावी समीकरणों में एक नया घटनाक्रम है। उनके आरोपों पर प्रशासन और अन्य राजनीतिक पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी आगे महत्वपूर्ण होंगी। फिलहाल एजेयूपी ने जनता के फैसले को स्वीकार करने की बात कही है और चुनावी प्रक्रिया के अगले चरण पर नजर बनी हुई है।

  • ममता बनर्जी ने कांग्रेस से मांगी चुनावी मदद, नंदीग्राम छोड़ने की पेशकश के बावजूद दोनों सीटों पर गठबंधन से इनकार

    ममता बनर्जी ने कांग्रेस से मांगी चुनावी मदद, नंदीग्राम छोड़ने की पेशकश के बावजूद दोनों सीटों पर गठबंधन से इनकार

    नई दिल्ली । ममता बनर्जी के सामने पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा उपचुनावों को लेकर चुनौती बढ़ती दिखाई दे रही है। खबरों के अनुसार, उन्होंने नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की कोशिश की थी। इसके तहत नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने और रेजीनगर में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार को समर्थन देने की पेशकश किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, टीएमसी या कांग्रेस की ओर से इस बातचीत को लेकर अब तक आधिकारिक रूप से कोई पुष्टि नहीं की गई है।

    रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार शाम ममता बनर्जी ने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल से बातचीत की थी। बताया गया है कि बातचीत के दौरान उन्होंने उपचुनाव में साथ आने का प्रस्ताव रखा। ममता बनर्जी की ओर से नंदीग्राम में कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने और रेजीनगर सीट पर टीएमसी उम्मीदवार के लिए कांग्रेस का समर्थन मांगे जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही नंदीग्राम से टीएमसी उम्मीदवार का नाम वापस लेने की पेशकश किए जाने का भी दावा किया गया है।

    हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया। सामने आई जानकारी के मुताबिक, पार्टी ने टीएमसी के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार किया है। कांग्रेस की ओर से कथित तौर पर कहा गया है कि यदि टीएमसी गठबंधन चाहती है तो उसे नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर कांग्रेस का समर्थन करना होगा। टीएमसी शासन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ कथित अत्याचारों को भी इस फैसले की वजह बताया गया है।

    ममता बनर्जी की ओर से कांग्रेस से संपर्क किए जाने की खबर ऐसे समय आई है, जब दोनों दल उपचुनाव में अलग-अलग मैदान में उतर रहे हैं। कांग्रेस ने नंदीग्राम से मिलन प्रधान और रेजीनगर से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल कफी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, टीएमसी ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को टिकट दिया है।

    नंदीग्राम सीट ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण रही है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में वह इसी सीट से चुनाव हार गई थीं। आगामी उपचुनाव को लेकर ऐसी अटकलें भी थीं कि ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से मैदान में उतर सकती हैं, लेकिन टीएमसी ने यहां संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया है। उनकी उम्मीदवारी को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं और उनके नाम को वर्ष 2014 के शिक्षक भर्ती घोटाले से जोड़कर चर्चा की जा रही है।

    इस बीच टीएमसी के भीतर बगावत का असर भी दोनों सीटों पर दिखाई दे रहा है। ऋताब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट ने नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। नंदीग्राम से मोहम्मद एतेशामुल हक और रेजीनगर से सफीउज्जमां शेख को उम्मीदवार बनाया गया है। यह गुट टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है।

    नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के कारण उपचुनाव की स्थिति बनी है। इसी बीच टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी निर्वाचन आयोग में मामला चल रहा है। बताया जा रहा है कि आयोग 17 सितंबर से पहले इस पर फैसला ले सकता है।

    विधानसभा चुनाव में अविभाजित टीएमसी ने 80 सीटें जीती थीं। बाद में 60 से अधिक विधायकों के ऋताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के साथ चले जाने का दावा किया गया। ऐसे में उपचुनाव से पहले कांग्रेस से गठबंधन की कथित कोशिश और बागी गुट की सक्रियता ने ममता बनर्जी के सामने राजनीतिक चुनौती को और बढ़ा दिया है।

  • TMC Symbol Row: उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने दोनों गुटों की दलीलें सुनीं, 16 सितंबर से पहले निर्णय की तैयारी

    TMC Symbol Row: उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने दोनों गुटों की दलीलें सुनीं, 16 सितंबर से पहले निर्णय की तैयारी

    नई दिल्ली ।तृणमूल कांग्रेस के नाम, लोगो और चुनाव चिह्न को लेकर ममता बनर्जी गुट और बागी गुट के बीच चल रही खींचतान के बीच चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडलों से चर्चा की। आयोग ने दोनों गुटों के पांच-पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली बुलाया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े दावों पर निर्णय ले सकता है।

    दोनों प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठक राष्ट्रीय राजधानी स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट में हुई। बागी गुट के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई ऋतब्रत बनर्जी ने की। इस गुट के साथ बैठक का समय शनिवार सुबह 11 बजे निर्धारित किया गया था। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के प्रतिनिधिमंडल के साथ दोपहर 12 बजे चर्चा का समय तय किया गया।

    चुनाव आयोग के सचिव अश्वनी कुमार मोहल ने 9 सितंबर को दोनों गुटों को बैठक के लिए संदेश भेजा था। बैठक के लिए भेजे गए संदेश में मुलाकात के एजेंडे का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था। हालांकि, बैठक का मुख्य विषय दोनों पक्षों के पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर किए जा रहे दावों से संबंधित बताया गया।

    आयोग दोनों गुटों की ओर से प्रस्तुत किए गए तर्कों को सुनने के बाद इस संबंध में आगे का निर्णय ले सकता है। पार्टी के नाम, लोगो और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों पक्षों के दावों के बीच चुनाव आयोग की यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा उपचुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।

    पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों नंदीग्राम और रेजिनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। नंदीग्राम पूर्वी मिदनापुर जिले में स्थित है। इन दोनों सीटों पर उपचुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो चुकी है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर निर्धारित है।

    ऐसे में चुनाव आयोग को उपचुनाव की अंतिम नामांकन तारीख से पहले पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले पर फैसला लेना होगा। दोनों गुटों के दावों को लेकर आयोग की ओर से होने वाला निर्णय आगामी चुनाव प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।

    उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी आगे बढ़ रही हैं। कांग्रेस ने नंदीग्राम और रेजिनगर दोनों विधानसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। वहीं हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी ने रेजिनगर विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी घोषित किया है।

    टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों पक्षों के बीच जारी विवाद के बीच आयोग की ओर से प्रतिनिधिमंडलों को अलग-अलग समय पर बुलाकर उनकी बात सुनी गई। अब दोनों पक्षों के दावों और उनके पक्ष में दिए गए तर्कों पर विचार करने के बाद चुनाव आयोग को अपना निर्णय लेना है।

    इस पूरे मामले में 16 सितंबर की नामांकन अंतिम तारीख महत्वपूर्ण है। इसके बाद 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। इसलिए चुनाव आयोग के फैसले का सीधा संबंध आगामी उपचुनाव की प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है।