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  • 70 की उम्र में मौसमी चटर्जी की बेटी को खास सलाह, बोलीं- बॉयफ्रेंड रखो लेकिन शादी सोच-समझकर करना

    70 की उम्र में मौसमी चटर्जी की बेटी को खास सलाह, बोलीं- बॉयफ्रेंड रखो लेकिन शादी सोच-समझकर करना


    नई दिल्ली। दिग्गज अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने बेहद कम उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते अपनी अलग पहचान बना ली। बंगाली फिल्म बालिका वधू से किशोरावस्था में अभिनय की शुरुआत करने वाली मौसमी ने आगे चलकर हिंदी और बंगाली सिनेमा में कई यादगार फिल्मों में काम किया। हालांकि उनका निजी जीवन भी उनके फिल्मी सफर जितना ही दिलचस्प रहा है। कम उम्र में शादी करने वाली मौसमी अब अपनी बेटी और आज की युवा पीढ़ी को रिश्तों तथा शादी को लेकर जल्दबाजी नहीं करने की सलाह देती हैं

    जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026 में बातचीत के दौरान मौसमी ने अपनी बेटी मेघा मुखर्जी को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वह अपनी बेटी से कहती हैं कि जीवन में किसी को पसंद करना या बॉयफ्रेंड होना अलग बात है लेकिन उससे शादी करना जरूरी नहीं है। मौसमी की इस सलाह में रिश्ते को समझने और अपने फैसले खुद लेने पर जोर दिखाई देता है। उन्होंने युवा महिलाओं को सतर्क रहने और परिस्थितियों के अनुसार अपने विवेक से निर्णय लेने की बात भी कही

    मौसमी ने आज की युवा पीढ़ी के तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि समय के साथ समाज काफी बदला है। उनके मुताबिक लड़कियों को बचपन से घर और ससुराल की जिम्मेदारियों के बारे में बताया जाता है लेकिन लड़कों को भी घरेलू जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि जीवन में अपनी पसंद के काम करने चाहिए लेकिन किसी भी चीज की अति नहीं होनी चाहिए। गलती हो जाए तो उससे सीख लेकर उसे दोबारा नहीं दोहराना चाहिए

    अपनी शादी का किस्सा बताते हुए मौसमी ने एक बेहद भावुक घटना का जिक्र किया था। बालिका वधू की सफलता के बाद उनके लिए कई रिश्ते आने लगे थे। इसी दौरान उनकी एक बीमार बुआ की तबीयत बेहद खराब थी। बताया जाता है कि उनकी बुआ कैंसर की गंभीर अवस्था में थीं और उनकी इच्छा थी कि वह मौसमी की शादी देख सकें। बुआ ने मौसमी के होने वाले ससुर हेमंत कुमार का हाथ पकड़कर अपनी इच्छा जाहिर की थी। इसके बाद परिस्थितियां तेजी से बदलीं और करीब एक महीने के भीतर ही मौसमी की शादी जयंत मुखर्जी से हो गई

    मौसमी ने बहुत कम उम्र में शादी के साथ अपनी फिल्मी यात्रा भी जारी रखी। 1970 के दशक में वह हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हुईं। अनुराग रोटी कपड़ा और मकान बेनाम स्वर्ग नरक मंजिल अंगूर और स्वयंवर जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने पसंद किया। उन्होंने अमिताभ बच्चन राजेश खन्ना धर्मेंद्र जितेंद्र विनोद खन्ना और संजीव कुमार जैसे बड़े कलाकारों के साथ भी काम किया

    आज 70 वर्ष की उम्र में मौसमी जब पीछे मुड़कर अपने जीवन को देखती हैं तो उनके अनुभवों में रिश्तों और स्वतंत्रता को लेकर एक अलग नजरिया दिखाई देता है। उनका कहना है कि नई पीढ़ी को अपनी जिंदगी को केवल दूसरों की अपेक्षाओं के हिसाब से नहीं चलाना चाहिए। उन्हें अपने फैसले सोच समझकर लेने चाहिए और हर अनुभव से सीखना चाहिए। मौसमी की बातों में उनकी अपनी जिंदगी के अनुभवों की झलक भी नजर आती है क्योंकि उन्होंने खुद बेहद कम उम्र में शादी और साथ ही लंबे फिल्मी करियर का दौर देखा है

  • रिश्ते में 'स्पेस' जरूरी: घंटों बातें करने से बढ़ती है बोरियत, थोड़ी दूरी लाती है ताजगी

    रिश्ते में 'स्पेस' जरूरी: घंटों बातें करने से बढ़ती है बोरियत, थोड़ी दूरी लाती है ताजगी


    नई दिल्ली । रिश्तों में प्यार और नजदीकी की शुरुआत अक्सर रोमांचक होती है। नए प्यार में लोग सुबह की गुड मॉर्निंगसे लेकर रात की गुड नाइटतक हर पल एक-दूसरे के साथ साझा करना चाहते हैं। घंटों फोन पर बातें करनाहर छोटी-छोटी बात साझा करना शुरू में सुखद अनुभव लगता है। लेकिन समय के साथ यही आदत रिश्ते में बोझ बन सकती है। लगातार संपर्क में रहने से बातचीत की गुणवत्ता गिरती हैरोमांच खत्म होता है और रिश्ते में बोरियत और चिड़चिड़ापन आने लगता है। सोचिए अगर आपको गुलाब जामुन बेहद पसंद हैलेकिन दिन में बार-बार वही परोसा जाएतो कुछ ही दिनों में उसका स्वाद फीका लगने लगेगा। रिश्तों का गणित भी कुछ ऐसा ही है। जरूरत से ज्यादा जुड़े रहने से रिश्ते में भावनात्मक दूरी बन सकती है। जब बातचीत केवल और बताओ या तुम बताओ? जैसे सवालों तक सीमित रह जाएतो समझ लेना चाहिए कि अब रिश्ते में रोमांच नहींबल्कि आदत रह गई है।

    घंटों बात करने के कई नुकसान हैं। लगातार हर छोटी बात साझा करने से मिलने पर कुछ खास बचता ही नहीं। हर समय रिप्लाई देने का दबाव मानसिक थकान और झुंझलाहट पैदा करता है। साथ ही अगर आप अपने शौकदोस्तों और परिवार को छोड़कर पूरी तरह पार्टनर में खो जाएंतो यह स्वस्थ रिश्ते का संकेत नहीं है। रिश्ते में स्पेस देना जरूरी है। स्पेस का मतलब यह नहीं कि प्यार कम हैबल्कि इसका अर्थ है कि दोनों को अपने लिए थोड़ा समय चाहिए। अपनी हॉबीरुचियों और दोस्तों के लिए समय निकालने से व्यक्ति बेहतर बनता है और रिश्ते में लौटने पर बातचीत और मिलन और खास महसूस होता है।

    थोड़ी दूरी पार्टनर की कमी का एहसास कराती है। यही दूरी रिश्ते में ताजगी और गहराई बनाए रखती है। कहावत है दूरी से चाहत बढ़ती है। जब आप अपने लिए समय लेते हैंतो पार्टनर भी आपकी कमी महसूस करता है और मिलने पर बातचीत अधिक रोमांचक और दिलचस्प होती है। रिश्तों में संतुलन बनाए रखना इसलिए जरूरी है। प्यार और नजदीकी होनी चाहिएलेकिन लगातार संपर्क में रहने से बचना चाहिए। थोड़ी दूरी रिश्ते को नया उत्साह देती हैबोरियत कम करती है और मानसिक तनाव से राहत दिलाती है। रिश्ते की लंबी उम्र और खुशी के लिए स्पेसएक आवश्यक तत्व है। कुल मिलाकररिश्ते में ताजगी बनाए रखने के लिए जरूरत से ज्यादा बात करने से बचें। पार्टनर को थोड़ा स्पेस देंअपने लिए समय निकालें और बातचीत को खास बनाकर लौटें। यही तरीका रिश्ते को मजबूतस्वस्थ और रोमांचक बनाता है।