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  • बैंक कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल स्थगित, नागरिकों ने ली राहत की सांस

    बैंक कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल स्थगित, नागरिकों ने ली राहत की सांस


    नई दिल्ली।
    इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (Indian Banks’ Association- IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (United Forum of Bank Unions- UFBU) के बीच रविवार को हुई बैठक के बाद प्रस्तावित बैंक हड़ताल टाल दी गई है. बैठक में बैंक सुधार, स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए PLI स्कीम में बदलाव समेत अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

    रविवार रात लगभग 9:30 बजे इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (UFBU) की बैंक हड़ताल को लेकर बैठक हुई. इस बैठक में बैंक यूनियन की मांगों समेत अन्य अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच कुछ फैसलों को लेकर सहमति बनी है।

    शनिवार को छुट्टी घोषित किए जाने के मु्द्दे पर इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (UFBU) की एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया जाएगा. यह कमेटी सभी संभावित विकल्पों पर विचार करेगी और हितधारकों के साथ चर्चा कर कोई समाधान निकालेगी, जिससे किसी को भी कोई असुविधा न हो. कमेटी एक ऐसा हल निकालने की कोशिश करेगी जो बैंक यूनियन और ग्राहक, दोनों को स्वीकार्य हों।

    वहीं, स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए PLI(प्रदर्शन से जुड़ी प्रोत्साहन) स्कीम को लेकर यूनियनों और एसोसिएशनों की आपत्तियों और सुझावों के मद्देनजर इसमें बदलाव का प्रस्ताव सरकार को भेजे जाने पर IBA के साथ चर्चा शुरू की जाएगी. इसके अलावा, 8 मार्च 2024 की बैठक के कार्यवृत्त(मिनट्स) में दर्ज बाकी मुद्दों के समाधान के लिए भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत होगी।

    इन सभी फैसलों को देखते हुए यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (UFBU) ने प्रस्तावित आंदोलन और हड़ताल के कार्यक्रमों पर टालने पर सहमति जताई, जिसके बाद बैंकों की प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल टल गई है।

  • बिहार में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे शिवराज सिंह चौहान, सम्राट चौधरी के साथ बोट से प्रभावित गांवों और खेतों का किया दौरा

    बिहार में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे शिवराज सिंह चौहान, सम्राट चौधरी के साथ बोट से प्रभावित गांवों और खेतों का किया दौरा

    नई दिल्ली । केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को बिहार के दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। दोनों नेताओं ने बोट से हाजीपुर के तेरसिया और सरायपुर गांवों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ के पानी में डूबे खेतों और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को करीब से देखा।

    बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने लोगों से बाढ़ के कारण हुए नुकसान के बारे में पूछा। ग्रामीणों से फसलों, मकानों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान की जानकारी ली गई। इस दौरान प्रभावित लोगों ने बाढ़ के कारण सामने आ रही परेशानियों के बारे में भी केंद्रीय मंत्री को बताया।

    शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बोट के जरिए उन इलाकों का निरीक्षण किया, जहां बाढ़ का पानी फैला हुआ है। तेरसिया और सरायपुर गांवों के साथ आसपास के खेतों में पानी भरने की स्थिति को भी देखा गया। दौरे का उद्देश्य बाढ़ से प्रभावित लोगों की मौजूदा स्थिति और उन्हें हो रही परेशानियों की जानकारी प्रत्यक्ष रूप से लेना था।

    मौके पर मौजूद अधिकारियों से भी बाढ़ की स्थिति के बारे में जानकारी ली गई। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत और बचाव कार्यों की स्थिति से केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री को अवगत कराया। शिवराज सिंह चौहान ने राहत कार्यों की प्रगति भी देखी और प्रभावित इलाकों में लोगों तक पहुंचाई जा रही सहायता की जानकारी ली।

    दौरे के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बाढ़ से प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को समझने के लिए ग्रामीणों से बातचीत की और नुकसान की जानकारी ली।

    बिहार के हाजीपुर क्षेत्र में बाढ़ के कारण गांवों और खेतों में पानी पहुंचने से प्रभावित लोगों के सामने कई तरह की परेशानियां खड़ी हुई हैं। ऐसे में केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री का बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का संयुक्त दौरा स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लेने के उद्देश्य से किया गया। निरीक्षण के दौरान प्रभावित गांवों, जलमग्न खेतों और राहत कार्यों की स्थिति पर ध्यान दिया गया।

    शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीणों से बातचीत के दौरान उनके सामने मौजूद समस्याओं को समझने का प्रयास किया। उन्होंने फसल और मकानों को हुए नुकसान की जानकारी ली, जबकि अधिकारियों से बाढ़ की स्थिति और राहत-बचाव कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की। दौरे के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की ओर से प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराने की बात दोहराई गई।

  • सहारा समूह में फंसे पैसों के रिफंड का इंतजार कर रहे निवेशकों को राहत… 20 लाख अटके क्लेम की प्रोसेसिंग शुरू

    सहारा समूह में फंसे पैसों के रिफंड का इंतजार कर रहे निवेशकों को राहत… 20 लाख अटके क्लेम की प्रोसेसिंग शुरू


    नई दिल्ली।
    सहारा समूह (Sahara Group) की चार सहकारी समितियों (Four Cooperative Societies) में फंसे पैसे के रिफंड का इंतजार कर रहे लाखों निवेशकों (Millions Investors) के लिए राहत भरी जरूरी खबर है। केंद्र सरकार ने CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल को फिर से एक्टिव कर दिया है। इसके साथ ही लंबे समय से अटके करीब 20 लाख क्लेम की जांच और प्रोसेसिंग दोबारा शुरू हो गई है। पोर्टल के मुताबिक सत्यापित और पात्र क्लेम पर ₹10 लाख तक रिफंड दिया जा रहा है। इससे पहले इसकी लिमिट केवल ₹50,000 तक थी।


    9,267 करोड़ रुपये रिफंड

    सहकारिता मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 41.56 लाख से अधिक जमाकर्ताओं को करीब 9,267 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं। यह राशि आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी गई है। अब लंबित आवेदनों की जांच कर पात्र निवेशकों को रिफंड देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    क्यों बंद हुई थी रिफंड की प्रकिया?
    सरकार के अनुसार नवंबर 2025 के बाद पोर्टल की IT इंफ्रास्ट्रक्चर, लाइसेंस, हार्डवेयर, AMC और कर्मचारियों से जुड़ी कुछ समस्याओं के कारण क्लेम की प्रोसेसिंग प्रभावित हुई थी। अब इन तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को दूर कर पोर्टल बहाल किया गया है।


    45 दिन में पैसा आएगा?

    रिफंड व्यवस्था में पात्र क्लेम पूरा होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया को सामान्य तौर पर 45 दिनों के भीतर पूरा करने का प्रावधान बताया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अप्लाई करते ही 45 दिन में पैसा खाते में आना तय है।

    पहले Aadhaar e-KYC, बैंक खाते की जानकारी, सदस्यता/जमा रिकॉर्ड और संबंधित सहकारी समिति के रिकॉर्ड का सत्यापन होता है। किसी तरह की कमी मिलने पर क्लेम अटक सकता है।


    क्लेम रिजेक्ट या Deficiency में गया है तो क्या करें?

    जिन निवेशकों के आवेदन में कमी बताई गई है, उनके लिए Resubmission Portal की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे निवेशकों को बताई गई कमी दूर करके अपना दावा दोबारा जमा करना चाहिए। ध्यान रखें कि रिफंड के नाम पर किसी अनधिकृत व्यक्ति या वेबसाइट को OTP, बैंक डिटेल या अन्य संवेदनशील जानकारी न दें। आवेदन और स्टेटस के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल करें।


    31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी प्रक्रिया

    सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद सहारा समितियों के जमाकर्ताओं को रिफंड देने की समयसीमा 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। ऐसे में आने वाले महीनों में लंबित क्लेम की प्रोसेसिंग और भुगतान महत्वपूर्ण रहेगा।


    किसी भी सहायता के लिए नीचे दिए नंबरों पर करें कॉल
    पोर्टल हेल्प डेस्क नंबर:

    01120909044 / 01120909045
    सोसायटी के नंबर:
    0522 6937100
    0522 3108400
    0522 6931000
    08069208210
    संपर्क का समय: सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक (केंद्र सरकार की छुट्टियों को छोड़कर)

  • ट्रंप प्रशासन के वीजा नियम पर कोर्ट की रोक, विदेशी छात्रों और पत्रकारों को मिली राहत

    ट्रंप प्रशासन के वीजा नियम पर कोर्ट की रोक, विदेशी छात्रों और पत्रकारों को मिली राहत


    वॉशिंगटन। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन को संघीय अदालत से झटका लगा है। बोस्टन के एक फेडरल जज ने विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और पत्रकारों के अमेरिका में रहने की अवधि सीमित करने वाले नए नियम पर रोक लगा दी है। अमेरिकी जिला जज एफ. डेनिस सेलॉर ने यूनियनों और उच्च शिक्षा की वकालत करने वाले संगठनों के गठबंधन के पक्ष में फैसला सुनाया। यह आदेश नए नियम के लागू होने से ठीक एक दिन पहले आया।

    जज बोले- पांच दशक पुरानी व्यवस्था बदलने का तर्क कमजोर
    जज सेलॉर ने कहा कि डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने नियम में बदलाव के लिए पर्याप्त मजबूत तर्क नहीं दिए। विभाग ने वीजा व्यवस्था में धोखाधड़ी रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया था, लेकिन अदालत के मुताबिक DHS ने नियम बदलने से जुड़ी समस्याओं का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया और आसान विकल्पों पर भी विचार नहीं किया।

    पूर्व रिपब्लिकन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश द्वारा नियुक्त जज ने कहा कि प्रस्तावित नियम अमेरिका में करीब पांच दशक से चली आ रही व्यवस्था को बदल देता। मौजूदा व्यवस्था के तहत विदेशी छात्र अपने कोर्स की अवधि पूरी होने तक अमेरिका में रह और काम कर सकते हैं। अदालत ने इस व्यवस्था के योगदान को भी रेखांकित किया। जज के मुताबिक, इससे करोड़ों छात्रों और शोधकर्ताओं को विज्ञान, मेडिकल और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिला और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा हुआ।

    क्या बदलाव करना चाहता था ट्रंप प्रशासन?
    DHS ने जुलाई में नया नियम प्रस्तावित किया था, जिसमें अमेरिका में विदेशी नागरिकों के रहने की अवधि के लिए निश्चित समयसीमा तय करने का प्रावधान था। इसके तहत विदेशी छात्रों के F वीजा और सांस्कृतिक एक्सचेंज विजिटर्स के J वीजा की अवधि अधिकतम चार साल तक सीमित की जानी थी। इसके अलावा विदेशी पत्रकारों को दिए जाने वाले I वीजा, जो कई वर्षों तक वैध रहते हैं, उनकी अवधि घटाकर केवल 240 दिन करने का प्रस्ताव था। नियम का मकसद वीजा व्यवस्था में धोखाधड़ी रोकना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करना बताया गया था।

    21 लाख से ज्यादा वीजा धारकों पर पड़ सकता था असर
    उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अमेरिका में फिलहाल करीब 16 लाख F वीजा और 5 लाख J वीजा धारक हैं। ऐसे में प्रस्तावित बदलाव का असर बड़ी संख्या में विदेशी छात्रों और एक्सचेंज विजिटर्स पर पड़ सकता था। जज सेलॉर ने उच्च शिक्षा संस्थानों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, नई नीति लागू होने पर बड़े विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों के दाखिले कम हो सकते हैं और संस्थानों को करोड़ों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    MIT-हार्वर्ड जैसे विश्वविद्यालयों पर असर की आशंका
    फैसले में अमेरिका के प्रमुख रिसर्च विश्वविद्यालयों का भी उल्लेख किया गया। जज ने कहा कि MIT और हार्वर्ड जैसे संस्थानों में स्नातक स्तर पर बड़ी संख्या में विदेशी छात्र अध्ययन करते हैं। अदालत के मुताबिक, विदेशी छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट का असर सिर्फ विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिकी उच्च शिक्षा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हो सकता है। जज ने इसे संभावित रूप से विनाशकारी बताया।

    इस तरह अदालत की रोक ने फिलहाल विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और पत्रकारों के लिए प्रस्तावित नई समयसीमा को लागू होने से रोक दिया है। मामले में अदालत की आगे की कार्रवाई और प्रशासन की अगली रणनीति पर अब नजर रहेगी।

  • आपदा के बीच नेपाल को राहत: चीन बॉर्डर के पास बनी ग्लेशियर झील का खतरा टला, पानी का स्‍तर घटा

    आपदा के बीच नेपाल को राहत: चीन बॉर्डर के पास बनी ग्लेशियर झील का खतरा टला, पानी का स्‍तर घटा


    बीजिंग। चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से बनी झील के अचानक फटने का खतरा फिलहाल कम हो गया है। चीनी अधिकारियों के मुताबिक झील का पानी धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से बाहर निकल रहा है और इसका आकार लगातार घट रहा है। इससे नीचे के इलाकों में अचानक बाढ़ आने की आशंका पहले के मुकाबले कम हुई है। हालांकि, अधिकारी अभी भी झील की 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं।

    यह झील उसी इलाके में बनी है, जहां बुधवार को ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

    तीन दिन में 21 हजार वर्ग मीटर घटा झील का क्षेत्र

    चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार गुरुवार से शनिवार सुबह तक लिए गए सैटेलाइट चित्रों में झील के पानी में लगातार कमी दर्ज की गई है। यह झील तिब्बत क्षेत्र में चीन-नेपाल सीमा के पास दो नदियों के संगम वाले इलाके में बनी है। शनिवार दोपहर तक इसके कुछ हिस्सों में जमीन भी दिखाई देने लगी थी।

    शनिवार सुबह झील का सतही क्षेत्र करीब 99 हजार वर्ग मीटर रह गया था। यह लगभग 14 फुटबॉल मैदानों के बराबर है। गुरुवार की तुलना में झील का क्षेत्रफल करीब 21 हजार वर्ग मीटर घट चुका है। पानी के प्राकृतिक बहाव से झील का आकार कम होने के कारण अधिकारियों ने फिलहाल इसके अचानक फटने के खतरे को कम माना है।

    बाढ़ के बाद मंडरा रहा था दूसरी आपदा का खतरा

    बुधवार को ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद चट्टान, बर्फ, कीचड़ और मलबे के साथ पानी तेजी से नीचे की ओर बहा था। इससे हिमालयी नदी तंत्र में भारी तबाही हुई। चीन और नेपाल को जोड़ने वाला एक सीमा बंदरगाह परिसर भी बाढ़ की चपेट में आ गया था।

    इसके बाद ग्लेशियर के मलबे से बनी झील में पानी बढ़ने पर इसके अचानक फटने की आशंका जताई गई थी। विशेषज्ञों को डर था कि अगर झील फटती है तो नीचे के इलाकों में दूसरी बार अचानक बाढ़ आ सकती है। इससे राहत और बचाव अभियान भी खतरे में पड़ सकता था।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगले दो-तीन दिनों में झील का जलस्तर और तेजी से घटता है तो निचले इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य अपेक्षाकृत सुरक्षित तरीके से जारी रखा जा सकेगा।

    30 मिनट पहले दी जाएगी खतरे की चेतावनी

    अधिकारियों के मुताबिक झील में किसी भी असामान्य बदलाव की स्थिति में बचाव दलों को तत्काल सूचना दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर हटाया जा सकता है। प्रशासन ने ऐसी व्यवस्था भी की है कि संभावित खतरे की स्थिति में 30 मिनट से अधिक पहले चेतावनी जारी की जा सके।

    रडार और ड्रोन से 24 घंटे निगरानी

    चीन की सरकारी इंजीनियरिंग और बचाव कंपनी चाइना एनेंग ने गुरुवार से झील की निगरानी शुरू कर दी है। इलाके में रडार और ड्रोन तैनात किए गए हैं, जिनकी मदद से झील और आसपास के क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    शुक्रवार को झील से पानी के शुरुआती बहाव के कारण कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोकना पड़ा था। स्थिति का आकलन करने के बाद जोखिम को फिलहाल नियंत्रण में माना गया और अभियान फिर शुरू करने की अनुमति दी गई।

    नीचे एक और बड़ी झील मिली, 1.20 लाख वर्ग मीटर से ज्यादा क्षेत्र

    अधिकारियों ने ग्लेशियर टूटने वाली जगह के नीचे एक और बड़ी झील की पहचान की है। एक इंजीनियर के मुताबिक इसका क्षेत्रफल 1.20 लाख वर्ग मीटर से ज्यादा है। यह मौजूदा झील से भी बड़ी है। इसलिए इस झील की भी लगातार निगरानी की जा रही है।

    चीन में 7 मौतें, 554 लोग अब भी लापता

    इस बीच चीन में आपदा से मरने वालों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक 554 लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता निचले इलाकों में राहत और बचाव अभियान को सुरक्षित रखना है।

  • भीषण बाढ़ की तबाही से कराहते असम के लिए आगे आए बॉलीवुड सितारे, आलिया भट्ट और सलमान खान ने संभाला राहत मोर्चा

    भीषण बाढ़ की तबाही से कराहते असम के लिए आगे आए बॉलीवुड सितारे, आलिया भट्ट और सलमान खान ने संभाला राहत मोर्चा

    नई दिल्ली । पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख राज्य असम इन दिनों विनाशकारी बाढ़ की चपेट में है, जिससे व्यापक स्तर पर जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच फिल्म जगत की हस्तियों ने प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए मदद के प्रयास तेज कर दिए हैं। अभिनेत्री आलिया भट्ट ने सोशल मीडिया के जरिए आम जनता से आगे आकर राहत कार्यों में योगदान देने की अपील की है, वहीं अभिनेता सलमान खान की संस्था जमीनी स्तर पर राहत सामग्री पहुंचाने के काम में जुट गई है।

    असम में बने हालात पर गहरी चिंता जताते हुए आलिया भट्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक भावुक संदेश साझा किया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ की वजह से अब तक साठ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होने को मजबूर हुए हैं। हर साल असम को इस भीषण त्रासदी का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद बुनियादी स्तर पर तैयारियां नाकाफी नजर आती हैं। उन्होंने आपदा प्रभावितों को तत्काल और दीर्घकालिक पुनर्वास सहायता देने की जरूरत पर जोर दिया।

    अभिनेत्री ने स्पष्ट किया है कि वह जल्द ही जमीनी स्तर पर कार्य कर रही प्रामाणिक संस्थाओं का विवरण साझा करेंगी, ताकि लोग सही माध्यमों से आर्थिक या सामग्री के रूप में योगदान दे सकें। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों का सहारा बनने की गुजारिश की है। कई परिवारों द्वारा अपने प्रियजनों, मवेशियों और आजीविका के साधनों को खो देने की घटना बेहद पीड़ादायक है।

    दूसरी ओर, अभिनेता सलमान खान ने अपने धर्मार्थ संगठन और स्थानीय प्रशंसक समूहों के माध्यम से राहत अभियान शुरू कर दिया है। गुवाहाटी से राहत सामग्री जुटाकर बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में पहुंचाई जा रही है। विशेषकर शिवसागर जिले के ग्रामीण इलाकों में जलभराव से जूझ रहे परिवारों को तत्काल राहत के रूप में भोजन के पैकेट और दैनिक आवश्यकता का सामान वितरित किया जा रहा है।

    आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के कई प्रमुख जिलों में जलस्तर खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट, कामरूप समेत सात से अधिक जिलों के सैकड़ों गांव पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न होने से फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है। ऐसे विकट समय में सामाजिक संगठनों और मशहूर हस्तियों की ओर से की जा रही पहल से राहत कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • कोविड महामारी के दौरान मिले केंद्रीय कोष और उपकरणों के अप्रयुक्त रहने तथा वित्तीय अनियमितताओं पर विपक्षी दल ने जताई आपत्ति

    कोविड महामारी के दौरान मिले केंद्रीय कोष और उपकरणों के अप्रयुक्त रहने तथा वित्तीय अनियमितताओं पर विपक्षी दल ने जताई आपत्ति

    नई दिल्ली । राज्य विधानमंडल में प्रस्तुत की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नवीनतम रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। प्रतिवेदन में स्वास्थ्य सेवाओं, प्राकृतिक आपदा राहत वितरण तथा बजटीय आवंटन के निष्पादन में कई स्तरों पर पाई गई कमियों को रेखांकित किया गया है। महामारी के संवेदनशील दौर में उपलब्ध कराए गए संसाधनों के पूर्ण उपयोग न होने और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में अनुपालन की अनिमितताओं पर विपक्षी दलों ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है।

    लेखा परीक्षा रिपोर्ट के मुख्य अंशों के अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में आवंटित बजट का एक बड़ा हिस्सा निर्धारित समय सीमा तक अप्रयुक्त पड़ा रहा। वैश्विक महामारी के समय उपलब्ध कराए गए महत्वपूर्ण चिकित्सा संसाधनों, जैसे ऑक्सीजन संयंत्रों और सघन चिकित्सा इकाई उपकरणों के कई केंद्रों पर चालू न होने का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त, गंभीर प्राकृतिक आपदाओं के उपरांत राहत राशि के पुनरावृत्त वितरण के मामले भी सामने आए हैं, जिससे राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा। इन निष्कर्षों ने आपदा प्रबंधन और लाभार्थी सत्यापन प्रणालियों की दक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्रतिवेदन में औद्योगिक विकास हेतु भूमि आवंटन और विभिन्न राज्य स्तरीय कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में भी प्रक्रियागत त्रुटियों की ओर संकेत किया गया है। निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन न होने से हुए वित्तीय नुकसान के साथ-साथ राज्य के समग्र राजकोषीय घाटे और बढ़ते ऋण भार को लेकर चिंता जताई गई है। बजट के एक बड़े हिस्से का वर्ष के अंत तक बिना खर्च हुए रह जाना और अतिरिक्त व्यय के लिए आवश्यक विधायी स्वीकृतियों के लंबित रहने को वित्तीय अनुशासन के दृष्टिकोण से गंभीर माना जा रहा है।

    संसदीय पटल पर रिपोर्ट की प्रति रखे जाने के उपरांत मुख्य विपक्षी दल ने इन निष्कर्षों को प्रशासनिक विफलता करार देते हुए कड़े दंडात्मक कदमों की मांग की है। विपक्षी प्रतिनिधियों का कहना है कि जनकल्याणकारी योजनाओं में पाई गई यह ढिलाई राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक विकास को प्रभावित करती है। दूसरी ओर, प्रशासनिक सूत्रों का तर्क है कि ऑडिट रिपोर्ट में उठाए गए अधिकांश बिंदु प्रक्रियागत और तकनीकी प्रकृति के हैं, जिन पर विभागीय समीक्षा के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जाएगी। फिलहाल, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य के प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

  • MP: प्रयागराज महाकुंभ में वायरल दंपति को HC से राहत…. अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक

    MP: प्रयागराज महाकुंभ में वायरल दंपति को HC से राहत…. अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर पीठ (Indore Bench) ने सोमवार को 2025 के प्रयागराज महाकुंभ (Prayagraj Mahakumbh) के दौरान चर्चा में आए एक दंपति को बड़ी राहत दी है. अदालत ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी. मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।

    जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह अंतरिम आदेश पारित किया. अदालत ने कहा कि खरगोन जिले के महेश्वर थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाए।

    दंपति ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर महेश्वर नगर परिषद की ओर से युवती का जन्म प्रमाण पत्र रद्द किए जाने को चुनौती दी है. याचिका में कहा गया है कि अंतरधार्मिक विवाह के बाद कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना युवती का जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर दिया गया. इसके बाद बदले हुए रिकॉर्ड के आधार पर उसके पति के खिलाफ महेश्वर थाने में एफआईआर दर्ज कर दी गई।

    एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(2) (अपहरण), धारा 81 (विवाह का झांसा देकर धोखाधड़ी या यौन संबंध), धारा 83 (नाबालिग लड़की को बहलाना-फुसलाना) और धारा 87 (अपहरण), बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की धारा 9 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।

    इससे पहले पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत आरोपी पति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुकी है. अब दंपति ने हाईकोर्ट का रुख किया है।


    याचिका में युवती को नाबालिग बताया गया

    याचिका में आरोप लगाया गया है कि युवती को विवाह के समय नाबालिग साबित करने के लिए उसके जन्म संबंधी रिकॉर्ड में आपराधिक साजिश के तहत छेड़छाड़ की गई. दंपति का कहना है कि उन्होंने 11 मार्च को केरल के एक मंदिर में विवाह किया था।

    याचिका के अनुसार, युवती की वास्तविक जन्म तिथि 1 जनवरी 2008 है. यही तिथि महेश्वर नगर परिषद द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों में भी दर्ज है. इसके बावजूद विवाह के बाद उसके परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया और बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए जन्म प्रमाण पत्र निरस्त करा दिया।


    “लव जिहाद” से जोड़ा गया मामला

    दंपति ने यह भी आरोप लगाया है कि बदले हुए दस्तावेजों के आधार पर पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई. साथ ही उनके अंतरधार्मिक विवाह को “लव जिहाद” से जोड़कर सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई, जिससे उनकी सुरक्षा को भी खतरा पैदा हो गया है।

    हाईकोर्ट ने फिलहाल दंपति को अंतरिम राहत देते हुए राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है. अब इस मामले में अगली सुनवाई 27 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी, जहां अदालत आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगी।

  • ईरान युद्ध के चलते कई देशों में आसमान पर पहुंचे पेट्रोल-डीजल के दाम… भारत में अब तक राहत

    ईरान युद्ध के चलते कई देशों में आसमान पर पहुंचे पेट्रोल-डीजल के दाम… भारत में अब तक राहत


    नई दिल्ली।
    ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध (Iran–US–Israel War.) शुरू होने के बाद से अबतक कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम (Petrol-Diesel Price) आसमान पर पहुंच गए। फिलीपिंस में डीजल के रेट में 172 प्रतिशत उछाल आया तो म्यांमार में पेट्रोल के रेट डबल हो गए। लेकिन, भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट में अभी राहत है। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर पिछले कई साल से अटका हुआ है। यह आशंका प्रबल है कि यह राहत चुनाव के बाद छिन सकती है।


    पेट्रोल के दाम सबसे अधिक बढ़ाने वाले देश

    globalpetrolprices.com के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक पेट्रोल के सबसे अधिक दाम बढ़ाने वाले देशों में म्यांमार (101.1%), फिलीपींस (72.6%), मलेशिया (68.1%), लाओस (45.6%), जिम्बाब्वे (42.9%) पाकिस्तान (42.0%), यूएई (40.8%), कंबोडिया (40.4%) और नेपाल (39.5%)।


    डीजल के दाम सबसे अधिक बढ़ाने वाले देश

    फिलीपींस 172.0%
    लाओस 169.5%
    म्यांमार 161.4%
    मलेशिया 124.7%
    न्यूजीलैंड 89.9%
    यूएई 86.1%
    कंबोडिया 84.0%
    लेबनान 80.5%
    वियतनाम 77.9%
    ऑस्ट्रेलिया 65.3%
    स्रोत: globalpetrolprices.com


    कई देशों को क्यों बढ़ाने पड़े पेट्रोल-डीजल के दाम

    युद्ध के शुरू होने के बाद ्रबेंट क्रूड की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 111 डॉलर तक पहुंच गईं। सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ी, जिससे मार्च के मध्य तक ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के ऊपर पहुंच गया। 6 अप्रैल तक यह 111.73 डॉलर पर था। हालांकि, सीजफायर के बीच इसमें गिरावट आई और कीमत 95.49 डॉलर पर आ गई।

    इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा। दुनिया भर में औसत पेट्रोल कीमत 1.2 डॉलर प्रति लीटर से बढ़कर 1.44 डॉलर और डीजल 1.2 से 1.6 डॉलर प्रति लीटर तक पहुंच गया। डेटा के अनुसार कुछ देशों में ईंधन कीमतों में विस्फोटक उछाल देखने को मिली। खासतौर पर एशिया और छोटे आयात-निर्भर देशों में दाम तेजी से बढ़े।


    भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं बढ़े?

    एक ओर जब पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतो में आग लगी हई है तो दूसरी ओर भारत में शांति है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि भारत में इस दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बंगाल समेत 5 राज्यों का चुनाव और सरकार द्वारा टैक्स में कटौती। केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल को महंगा होने से बचाने के लिए 10-10 रुपये टैक्स कम कर दिए। वहीं, निर्यात पर टैक्स बढ़ाया, ताकि घरेलू सप्लाई में दिक्कत न हो।

    क्या चुनाव बाद पेट्रोल-डीजल हो जाएगा महंगा?
    चाय की दुकानों से लेकर चौक-चौराहों तक यह चर्चा आम है कि पेट्रोल-डीजल के दाम 5 राज्यों के चुनाव के बाद बढ़ जाएंगे। Macquarie Group ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पेट्रोल पर कंपनियों को 18 और डीजल पर 35 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा होने की संभावना है। क्यांकि, एक बैरल कच्चे तेल में 10 डॉलर की बढ़ोतरी की वजह से कंपनियों को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होता है।

  • संकट के बीच राहत की खबर…. 6000 PNG उपभोक्ताओं ने सरेंडर किए LPG कनेक्शन

    संकट के बीच राहत की खबर…. 6000 PNG उपभोक्ताओं ने सरेंडर किए LPG कनेक्शन


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) द्वारा पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) (PNG – Piped Natural Gas) को बढ़ावा देने और एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) (LPG – Liquefied Petroleum Gas) की सप्लाई को सुव्यवस्थित करने के प्रयासों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, शनिवार तक 6000 पीएनजी उपभोक्ताओं ने अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं।

    इस विषय पर मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इन उपभोक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा, ‘कल तक 6000 पीएनजी उपभोक्ताओं ने अपनी एलपीजी सरेंडर कर दी! उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद!!’ उन्होंने अन्य पीएनजी यूजर्स से भी अपील की कि वे उन लोगों की मदद के लिए अपना एलपीजी कनेक्शन छोड़ दें, जिनके पास अभी तक पीएनजी की सुविधा नहीं है।


    तीन महीने बाद बंद हो सकती है एलपीजी सप्लाई

    सरकार की योजना है कि जिन घरों में पीएनजी का एक्सेस यानी पाइपलाइन की पहुंच है, लेकिन उन्होंने अभी तक कनेक्शन नहीं लिया है तो वहां तीन महीने बाद एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई रोक दी जाएगी। यह नियम उन जगहों पर लागू नहीं होगा जहां पीएनजी की सप्लाई तकनीकी रूप से संभव नहीं है, बशर्ते किसी अधिकृत संस्था द्वारा ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) जारी किया गया हो।

    पश्चिमी एशिया से आयात में आ रही बाधाओं के कारण एलपीजी आपूर्ति पर दबाव है। सरकार का लक्ष्य पाइपलाइन वाले क्षेत्रों के लोगों को पीएनजी पर शिफ्ट करना है, ताकि वहां की एलपीजी को उन ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में भेजा जा सके जहां पाइपलाइन का बुनियादी ढांचा नहीं है।


    गैस आपूर्ति में घरेलू और परिवहन क्षेत्र को प्राथमिकता

    – मौजूदा स्थिति को देखते हुए गैस क्षेत्र में आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर बांटा गया है।
    – पीएनजी और सीएनजी: घरेलू पीएनजी और परिवहन के लिए सीएनजी को 100% (पूर्ण आवंटन) गैस दी जा रही है।
    – औद्योगिक और वाणिज्यिक: इन उपभोक्ताओं को उनके औसत उपयोग का लगभग 80% गैस मिल रही है।
    – उर्वरक संयंत्र: इन्हें 70-75% क्षमता पर गैस की आपूर्ति की जा रही है। कमी को पूरा करने के लिए अतिरिक्त एलएनजी कार्गो की व्यवस्था की जा रही है।

    एलपीजी की स्थिति और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई
    भू-राजनीतिक स्थितियों के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार डिलीवरी सामान्य है और कहीं से भी किसी कमी की सूचना नहीं है। प्रतिदिन 55 लाख से अधिक गैस सिलेंडरों की डिलीवरी की जा रही है। कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति को संकट-पूर्व के स्तर के लगभग 70% तक बहाल कर दिया गया है। इसमें हॉस्पिटैलिटी (होटल-रेस्तरां), खाद्य सेवाओं और प्रमुख उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है।

    छापेमारी और जब्ती: सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। हाल के दिनों में लगभग 2,900 छापेमारी की गई हैं और करीब 1,000 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। इसके अलावा राज्यों का केरोसिन आवंटन भी बढ़ाया गया है।

    पीएनजी को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों के इंसेंटिव्स
    पीएनजी नेटवर्क (सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन) के विस्तार को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। अकेले मार्च महीने में 2,90,000 से अधिक नए पीएनजी कनेक्शन जोड़े गए हैं। इंद्रप्रस्थ गैस (IGL), महानगर गैस (MGL), गेल गैस (GAIL Gas) और बीपीसीएल (BPCL) जैसी कंपनियां लोगों को एलपीजी से पीएनजी पर शिफ्ट होने के लिए कई तरह के इंसेंटिव्स (प्रोत्साहन/छूट) भी दे रही हैं।

    सरकार की अपील
    केंद्र सरकार ने राज्यों से निगरानी तेज करने, दैनिक ब्रीफिंग आयोजित करने और गैस बुनियादी ढांचे के लिए अप्रूवल में तेजी लाने को कहा है। सरकार ने जनता से यह भी अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।