Tag: Religious Conversion Case

  • नासिक TCS केस में 25 दिन की तलाश के बाद गिरफ्तार हुई थी निदा खान अब कोर्ट ने दी जमानत पुलिस के सामने लगानी होगी हाजिरी

    नासिक TCS केस में 25 दिन की तलाश के बाद गिरफ्तार हुई थी निदा खान अब कोर्ट ने दी जमानत पुलिस के सामने लगानी होगी हाजिरी


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के नासिक में TCS कार्यालय से जुड़े कथित धर्म परिवर्तन मामले में आरोपी निदा खान को अदालत से जमानत मिल गई है। कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर राहत दी है। हालांकि जमानत के साथ अदालत ने शर्त रखी है कि निदा खान को नियमित रूप से संबंधित पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगानी होगी। यानी मामले की जांच पूरी होने तक उन्हें समय समय पर पुलिस के सामने उपस्थित होकर जांच में सहयोग करना होगा। अदालत के इस आदेश के बाद फिलहाल आरोपी को राहत मिली है लेकिन मामले की कानूनी जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

    यह मामला नासिक के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज केस नंबर 166/2026 से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि TCS कार्यालय में कुछ कर्मचारियों पर नमाज पढ़ने और इस्लाम से जुड़े रीति रिवाज अपनाने के लिए कथित तौर पर दबाव बनाया जाता था। शिकायत में हिंदू धर्म को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने जैसे आरोप भी लगाए गए थे। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस केस में BNS की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

    शुरुआत में इस मामले में चार लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें तौसीफ बिलाल अत्तार दानिश एजाज शेख शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी और रजा रफीक मेमन के नाम शामिल थे। जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने निदा खान का नाम भी मामले में जोड़ा और उन्हें आरोपी नंबर पांच बनाया। यानी शुरुआती एफआईआर में उनका नाम नहीं था बल्कि जांच के दौरान सामने आई जानकारी के आधार पर पुलिस ने उन्हें मामले में आरोपी बनाया।

    पुलिस के अनुसार निदा खान की गिरफ्तारी से पहले करीब 25 दिनों तक उनकी तलाश की गई। इसके बाद नासिक क्राइम ब्रांच और छत्रपति संभाजीनगर पुलिस की टीम ने उन्हें नारेगांव इलाके से गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि वह कैसर कॉलोनी स्थित एक फ्लैट में मौजूद थीं और वहां उनके चार रिश्तेदार भी मौजूद थे। गिरफ्तारी के बाद मामले में उनकी भूमिका को लेकर पुलिस ने पूछताछ की।

    जमानत की सुनवाई के दौरान निदा खान की ओर से अदालत में कहा गया कि वह जांच में सहयोग कर रही हैं। अदालत के सामने उनकी गर्भावस्था की बात भी रखी गई। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर जमानत दे दी। हालांकि राहत के साथ नियमित पुलिस हाजिरी की शर्त लगाई गई है। इससे साफ है कि जमानत मिलने के बावजूद जांच की प्रक्रिया में उनकी भूमिका और आरोपों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल जारी रहेगी।

    इस मामले की जांच फरवरी 2026 में शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई थी। शिकायत में एक निजी कंपनी में काम करने वाली हिंदू महिला के रमजान के दौरान रोजे रखने का भी जिक्र किया गया था। पुलिस ने मामले की पड़ताल के लिए महिला कांस्टेबलों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में कंपनी में भेजकर वहां की गतिविधियों की जानकारी जुटाई थी। जांच के दौरान कुछ टीम लीडरों पर कर्मचारियों को परेशान करने और अपने पद का कथित रूप से गलत इस्तेमाल करने के आरोप भी सामने आए थे।

    मामला सामने आने के बाद पुलिस ने सात पुरुषों और एक महिला को गिरफ्तार किया था। अब निदा खान को भी अदालत से जमानत मिल गई है। हालांकि जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले में पुलिस की जांच जारी रहेगी और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी। फिलहाल निदा खान को कोर्ट की शर्तों का पालन करते हुए नियमित रूप से पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगानी होगी और जांच में सहयोग करना होगा।

  • डिजिटल सिस्टम से धर्मांतरण का खेल उजागर, खरगोन में बाइबिल लैपटॉप ,और प्रोजेक्टर बरामद

    डिजिटल सिस्टम से धर्मांतरण का खेल उजागर, खरगोन में बाइबिल लैपटॉप ,और प्रोजेक्टर बरामद


    खरगोन । मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में एक कथित धर्मांतरण नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है जहां डिजिटल उपकरणों के जरिए प्रार्थना सभा के नाम पर गतिविधियां संचालित किए जाने की बात सामने आई है यह मामला ग्राम बमनाला का है जहां सेल्दा रोड पर स्थित पेट्रोल पंप के पीछे खेत में बने एक मकान में यह गतिविधियां चल रही थीं

    सूचना मिलने पर पुलिस ने बुधवार को मौके पर दबिश दी और कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया पुलिस ने मौके से बाइबिल धार्मिक साहित्य लैपटॉप प्रोजेक्टर और साउंड सिस्टम सहित कई उपकरण जब्त किए हैं जिनका उपयोग कथित रूप से लोगों को एकत्र कर धार्मिक प्रचार प्रसार के लिए किया जा रहा था

    बमनाला चौकी प्रभारी राजेंद्र आवास्या के अनुसार दोपहर करीब 12 बजे पुलिस टीम मौके पर पहुंची जहां से 13 बाइबिल 7 ईसाई साहित्य की पुस्तकें एक लैपटॉप एक प्रोजेक्टर और साउंड सिस्टम बरामद किया गया प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि इन डिजिटल साधनों के माध्यम से लोगों को प्रार्थना के लिए बुलाया जाता था और उन्हें कथित रूप से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता था

    ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह गतिविधियां लंबे समय से चल रही थीं और आदिवासी क्षेत्र के लोगों को बीमारी दूर होने और चमत्कारिक लाभ का दावा करके प्रार्थना सभा में शामिल किया जाता था इसके साथ ही हिंदू रीति रिवाज छोड़ने और ईसाई धर्म अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जाता था

    पुलिस ने इस मामले में धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 की धाराओं 3 और 5 के तहत केस दर्ज किया है और सभी चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है गिरफ्तार आरोपियों में गांव के राजू बड़ोले बबलू जमरे उमरिया झाबुआ निवासी सेतु मेड़ा और कल्यापुरा निवासी पंकज बारिया शामिल हैं पुलिस के अनुसार बबलू जमरे ने लगभग दो से तीन साल पहले ही खेत में यह मकान बनवाया था जहां से यह गतिविधियां संचालित की जा रही थीं

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तलाशी के दौरान कुछ गोपनीय दस्तावेज भी जब्त किए हैं जिनकी जांच की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस कथित नेटवर्क के पीछे और कौन लोग जुड़े हैं और यह गतिविधियां कितने समय से चल रही थीं फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है और इलाके में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है