Tag: religious dispute

  • भोपाल में तनाव: ताजुल मस्जिद के बाहर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

    भोपाल में तनाव: ताजुल मस्जिद के बाहर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले


    नई दिल्ली। भोपाल राजधानी भोपाल के गौतम नगर इलाके में हिंदू युवती के साथ होटल में मिले एक मुस्लिम युवक से मारपीट और धार्मिक टिप्पणी के मामले ने मंगलवार रात बड़ा तनाव पैदा कर दिया। वायरल वीडियो के विरोध में हजारों लोग Taj-ul-Masajid, पीरगेट और इमामीगेट इलाके में जमा हो गए। देर रात तक प्रदर्शन, नारेबाजी और पुलिस के साथ झड़प का माहौल बना रहा।
    स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। वहीं पुराने शहर के संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लागू कर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
    जानकारी के अनुसार, 9 मई को गौतम नगर स्थित एक होटल में हिंदू संगठन से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने एक मुस्लिम युवक और हिंदू युवती को पकड़ लिया था। आरोप है कि युवक के साथ मारपीट की गई, उसके चेहरे पर स्याही और गोबर पोता गया तथा अर्धनग्न अवस्था में पुलिस के हवाले किया गया। इस दौरान धार्मिक भावनाएं आहत करने वाली कथित टिप्पणियां भी की गईं, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।
    घटना के विरोध में मंगलवार दोपहर मुस्लिम समाज के लोग Taj-ul-Masajid के बाहर जुटे। बाद में शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी, विधायक Arif Masood और विधायक Atif Arif Aqueel ने पुलिस कमिश्नर संजय सिंह से मुलाकात कर आरोपियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की।
    रात करीब साढ़े आठ बजे प्रदर्शन और उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई में देरी का आरोप लगाते हुए आरोपियों पर एनएसए लगाने और बुल्डोजर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद किए और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया।
    मोती मस्जिद क्षेत्र में कुछ युवकों द्वारा पुलिस पर पथराव किए जाने की भी सूचना सामने आई। पथराव में थाना तलैया का एक वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद पुलिस ने हालात संभालने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।
    इधर, पूछताछ के दौरान युवती ने पुलिस को बताया कि वह पिछले करीब पांच वर्षों से युवक आरिफ खान के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही है और उसके साथ किसी प्रकार की जबरदस्ती नहीं हुई। युवती ने कहा कि वह युवक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहती।
    पुलिस के अनुसार, धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में थाना गोविंदपुरा में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लिया है जबकि अन्य आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मामले में एक नाबालिग भी शामिल बताया गया है। शाहजहांनाबाद संभाग के एसीपी अनिल वाजपेयी ने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और संवेदनशील इलाकों में लगातार पुलिस गश्त की जा रही है।
    वहीं हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने भी बयान जारी कर कहा कि शहर का माहौल खराब नहीं किया जाना चाहिए और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना जरूरी है।

  • महाशिवरात्रि पूजा पर रोक की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची दरगाह कमेटी, CJI ने जताई नाराजगी

    महाशिवरात्रि पूजा पर रोक की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची दरगाह कमेटी, CJI ने जताई नाराजगी


    नई दिल्ली । कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के आलंद स्थित लाडले मशाइक दरगाह एक बार फिर धार्मिक विवाद के केंद्र में आ गई है। दरगाह कमेटी ने महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रस्तावित पूजा-अर्चना पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कमेटी का कहना है कि दरगाह परिसर में किसी भी तरह की पूजा या निर्माण गतिविधि से उसकी मूल धार्मिक पहचान प्रभावित हो सकती है, इसलिए शीर्ष अदालत हस्तक्षेप करे और यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दे।

    यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया गया। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, दरगाह कमेटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्ता मखीजा ने अदालत से अनुरोध किया कि 15 फरवरी, यानी महाशिवरात्रि से पहले इस याचिका पर त्वरित सुनवाई की जाए। उन्होंने अदालत को बताया कि दरगाह परिसर में शिवरात्रि मनाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई का आश्वासन देने के बजाय इस पर विचार करने की बात कही। साथ ही अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि ऐसे मामलों में सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जा रहा है, जबकि पहले संबंधित हाई कोर्ट में जाना चाहिए। सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की, सब कुछ अनुच्छेद 32 के तहत क्यों आ रहा है? इससे यह धारणा बनती है कि याचिकाएं इसलिए दायर की जा रही हैं क्योंकि कानून सुविधाजनक है। इससे यह संदेश जाता है कि हाई कोर्ट निष्क्रिय हो चुका है। हम इसकी जांच करेंगे।”

    दरअसल, यह विवाद उस ऐतिहासिक स्थल से जुड़ा है जो 14वीं शताब्दी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी, जिन्हें लाडले मशाइक के नाम से जाना जाता है, और 15वीं शताब्दी के हिंदू संत राघव चैतन्य से संबंधित है। दोनों संतों के अवशेष इसी परिसर में बताए जाते हैं। परिसर में राघव चैतन्य शिवलिंग नामक एक संरचना भी मौजूद है। वर्षों से यहां हिंदू श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते रहे हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय दरगाह में अकीदत पेश करता रहा है।

    साल 2022 में यह मामला तब गरमा गया जब कुछ उपद्रवियों द्वारा कथित रूप से शिवलिंग पर आपत्तिजनक कृत्य किए जाने की घटना सामने आई, जिसके बाद सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया। इसके बाद पूजा-अधिकार को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हुई।

    फरवरी 2025 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने हिंदू समुदाय के 15 सदस्यों को राघव चैतन्य शिवलिंग पर महाशिवरात्रि के दिन पूजा करने की अनुमति दी थी। यह पूजा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुई थी और किसी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई थी। एक वर्ष पूर्व भी अदालत के आदेश के आधार पर सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को प्रवेश और अनुष्ठान की अनुमति दी गई थी, जो शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई थी।

    अब दरगाह कमेटी की नई याचिका ने इस संवेदनशील मामले को फिर से कानूनी और सामाजिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस विवाद में क्या रुख अपनाता है और महाशिवरात्रि से पहले क्या कोई अंतरिम आदेश जारी होता है।

  • जहाँ देवी का मंदिर है, वहाँ इबादत कैसे स्वीकार होगी? भोजशाला विवाद पर विधायक रामेश्वर शर्मा का बड़ा बयान

    जहाँ देवी का मंदिर है, वहाँ इबादत कैसे स्वीकार होगी? भोजशाला विवाद पर विधायक रामेश्वर शर्मा का बड़ा बयान


    भोपाल । मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद में अब सियासी बयानबाजी ने तूल पकड़ लिया है। बसंत पंचमी के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूजा और नमाज दोनों की अनुमति दिए जाने के बाद, भाजपा के प्रखर विधायक रामेश्वर शर्मा ने एक बड़ा और तीखा बयान जारी किया है। उन्होंने सीधे तौर पर मुस्लिम समुदाय से सद्भावना की अपील करते हुए सवाल उठाया है कि जिस स्थान पर देवी का अधिष्ठान है, वहाँ की गई इबादत का क्या अर्थ है।

    विधायक रामेश्वर शर्मा ने अपने संबोधन में तर्क दिया कि इबादत और आस्था के बीच एक स्पष्ट समझ होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मुसलमानों को स्वयं यह समझना चाहिए कि जहाँ मां वाग्देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, वहाँ आपकी इबादत कैसे स्वीकार हो सकती है? हमारे सनातनी समाज की यह मांग सदियों से रही है कि जहाँ विद्या की देवी माँ सरस्वती विराजमान हैं, उस पवित्र स्थल पर केवल पूजन और अर्चना ही होनी चाहिए।’ शर्मा ने आगे जोड़ा कि स्वयं मुस्लिम समाज के मान्यताओं में भी यह उल्लेख मिलता है कि मंदिर परिसर के भीतर की गई इबादत जायज नहीं होती, ऐसे में इस मुद्दे को राजनीति से प्रेरित करने के बजाय समझदारी से सुलझाना चाहिए।

    ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए विधायक ने याद दिलाया कि भोजशाला का निर्माण महान राजा भोज ने माँ सरस्वती की आराधना और ज्ञान के केंद्र के रूप में किया था। उन्होंने कहा कि यह विद्या की देवी का मंदिर है और इसे अनावश्यक विवादों में नहीं घसीटना चाहिए। ‘माँ जगत जननी की निरंतर पूजा-अर्चना हमारा अधिकार है। हम इसके लिए लोकतंत्र की चौखट पर भी जाएंगे और सर्वोच्च न्यायालय से भी बार-बार प्रार्थना करेंगे कि यहाँ केवल सनातन परंपरा का निर्वहन हो,’ उन्होंने स्पष्ट किया।

    रामेश्वर शर्मा का यह बयान ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब धार प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बसंत पंचमी पर हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग समय और स्थान नियत किए हैं। जहाँ एक ओर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पूजा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर विधायक की इस अपील ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सबको मिलकर माँ सरस्वती की आरती-पूजा होने देनी चाहिए ताकि धार्मिक सौहार्द बना रहे और इतिहास के साथ न्याय हो सके।

  • मध्य प्रदेश जावरा में कुरान जलाने पर बवाल महिला पर आरोप मुस्लिम समुदाय ने किया सड़क पर विरोध

    मध्य प्रदेश जावरा में कुरान जलाने पर बवाल महिला पर आरोप मुस्लिम समुदाय ने किया सड़क पर विरोध


    रतलाम । मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के जावरा में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है जिसमें मुस्लिम समुदाय की पवित्र धार्मिक किताब कुरान को जलाने का आरोप एक रिटायर्ड शिक्षिका पर लगा है। घटना के बाद मुस्लिम समाज में आक्रोश फैल गया और इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार यह घटना गुरुवार दोपहर 1 बजे के आसपास हुई जब रिटायर्ड शिक्षिका अतिया खान अपने घर में पुरानी किताबों को जला रही थीं। उनका दावा है कि उनके पास बहुत सी पुरानी किताबें थीं और उन्होंने इन किताबों को जलाने का फैसला किया। इस दौरान उसने दावा किया कि उसे यह नहीं पता था कि किताबों के ढेर में कुरान शरीफ की एक पुरानी प्रति भी थी।

    हालांकि वहां मौजूद कुछ लोगों ने जलती हुई किताबों में कुरान को पहचान लिया। बाद में इन्हीं लोगों ने मुस्लिम समुदाय को इस घटना के बारे में सूचित किया। मुस्लिम समाज के लोग तुरंत जावरा औद्योगिक क्षेत्र थाना पहुंचे और कार्रवाई की मांग की लेकिन पुलिस की ओर से समय पर कोई कार्रवाई न होने पर गुस्साए लोग सड़क पर उतर आए और थाने का घेराव किया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब महिला ने कुरान को जलते देखा तो वह उसे लेकर भाग गई। एक शख्स ने कुरान की आग बुझाई और उसके अवशेष को संरक्षित कर लिया। इसके बाद मुस्लिम समुदाय ने पुलिस से शिकायत की और आरोप लगाया कि पुलिस ने घटना के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    रतलाम जिले के एएसपी राकेश खाखा ने मामले की जानकारी दी और बताया कि आरोपी महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और निष्पक्ष तरीके से पूरे मामले की जांच की जाएगी।

    विरोध प्रदर्शन के दौरान मुस्लिम समुदाय ने सख्त कार्रवाई की मांग की और आरोपी के खिलाफ जल्द से जल्द कानूनी कार्रवाई की अपील की। पुलिस इस मामले में जल्द से जल्द निष्कर्ष पर पहुंचने का वादा कर रही है ताकि दोनों समुदायों के बीच शांति बनी रहे।