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  • महाकाल की नगरी उज्जैन में भक्ति का उत्सव: लगातार 16 घंटे नृत्यांजलि, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

    महाकाल की नगरी उज्जैन में भक्ति का उत्सव: लगातार 16 घंटे नृत्यांजलि, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़


    उज्जैन। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में गंगा दशहरा के अवसर पर भक्ति और कला का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। मंगलवार सुबह 6:30 बजे से यहां अखंड नृत्य आराधना का आयोजन शुरू हुआ, जो लगातार 16 घंटे तक बिना रुके चलेगा और भगवान महाकाल की शयन आरती तक भक्तिमय प्रस्तुतियों का सिलसिला जारी रहेगा।

    इस विशेष आयोजन में विभिन्न आयु वर्ग के कलाकार भाग ले रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि 4 वर्ष की छोटी बच्चियों से लेकर 40 वर्ष तक की महिला कलाकार इस नृत्यांजलि में अपनी प्रस्तुतियां दे रही हैं। सभी कलाकार भगवान शिव, गणेश वंदना, माता की आराधना, भजन और लोकगीतों पर आधारित नृत्य प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया है।

    कार्यक्रम में 50 से अधिक कलाकारों की भागीदारी है। प्रत्येक समूह को 15 से 20 मिनट का समय निर्धारित किया गया है, ताकि लगातार चलने वाली इस नृत्य आराधना में भक्ति की धारा निर्बाध रूप से बहती रहे। इसके साथ ही विद्यार्थियों द्वारा किया जा रहा तबला वादन भी कार्यक्रम का विशेष आकर्षण बना हुआ है।

    महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित यह नृत्य आराधना केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भक्ति और परंपरा का जीवंत रूप है। मंदिर परिसर में गूंजते भजनों और नृत्य की लय ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया है। दूर-दूर से आए भक्त इस अद्भुत दृश्य को देखकर भावविभोर हो रहे हैं।

    इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निरंतरता और अनुशासन है, जिसमें कलाकार बिना किसी विराम के अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं। पूरा वातावरण शिव भक्ति में डूबा हुआ नजर आ रहा है।

    यह परंपरा रसराज प्रभात नृत्य संस्थान द्वारा पिछले 38 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। संस्थान द्वारा इस आयोजन की तैयारी लगभग एक महीने पहले से शुरू कर दी जाती है। कलाकारों ने शहर के विभिन्न स्थानों पर अभ्यास कर इस भव्य प्रस्तुति के लिए खुद को तैयार किया है।

    कार्यक्रम में संस्थापक राज कुमुद ठोलिया सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि अर्पण भारद्वाज और गोविंद गंधे ने भी आयोजन की सराहना की। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में संजय मिश्रा, पंडित विशाल शुक्ला और भारती सिंह राजपूत की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।

    महाकाल मंदिर का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति, नृत्य और संगीत की समृद्ध परंपरा को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।

  • उज्जैन में धार्मिक आयोजन की तैयारी तेज: शिप्रा परिक्रमा को लेकर अहम बैठक

    उज्जैन में धार्मिक आयोजन की तैयारी तेज: शिप्रा परिक्रमा को लेकर अहम बैठक


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के Ujjain में हर वर्ष आयोजित होने वाली शिप्रा तीर्थ परिक्रमा इस बार भी भव्य रूप में शुरू होने जा रही है। 25 मई को सुबह 9 बजे रामघाट से मां क्षिप्रा और धर्म ध्वजा के पूजन के साथ यात्रा का शुभारंभ होगा। इस धार्मिक आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

     सीएम मोहन यादव होंगे शामिल
    इस वर्ष परिक्रमा के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री Mohan Yadav स्वयं कार्यक्रम में शामिल होंगे। वे 26 मई को गंगा दशहरा के अवसर पर रामघाट पर मां क्षिप्रा को चुनरी अर्पित करेंगे और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे। भाजपा नगर मंडल की बैठकों में यात्रा की तैयारियों और व्यवस्थाओं को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं ताकि आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित बनाया जा सके।

     रामघाट से शुरू होकर शहर के मार्गों से गुजरेगी यात्रा
    परिक्रमा की शुरुआत रामघाट से होगी, जिसके बाद यह नृसिंह घाट, लालपुल और त्रिवेणी होते हुए शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए वापस रामघाट पहुंचेगी। 26 मई को गंगा दशहरा के दिन यात्रा का समापन होगा, जहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

     23 वर्षों पुरानी परंपरा
    यह परिक्रमा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 23 वर्ष पहले मां शिप्रा के संरक्षण और धार्मिक आस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। तब से यह परंपरा लगातार जारी है और हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं।

     भव्य आयोजन की तैयारियां तेज
    इस वर्ष आयोजन को सफल और भव्य बनाने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सेवा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

    शिप्रा तीर्थ परिक्रमा 2026 न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह उज्जैन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को भी मजबूत करती है। मुख्यमंत्री की मौजूदगी इस आयोजन को और अधिक भव्य और महत्वपूर्ण बना देगी।

  • गुना में 200 बीघा में भव्य यज्ञशाला तैयार, 25 हजार श्रद्धालुओं के साथ श्रीराम महायोगी यज्ञ शुरू

    गुना में 200 बीघा में भव्य यज्ञशाला तैयार, 25 हजार श्रद्धालुओं के साथ श्रीराम महायोगी यज्ञ शुरू

    गुना। गुना जिले के भैंसाना गांव में 200 बीघा क्षेत्र में भव्य श्रीराम महायोगी यज्ञ की शुरुआत हो गई है, जिसमें सुबह निकाली गई कलश यात्रा में 25 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। पार्वती नदी से जल भरकर महिलाओं ने सिर पर कलश और पुरुषों ने भागवत ग्रंथ लेकर यज्ञ स्थल की परिक्रमा की।

    15 साल बाद आयोजित इस महायज्ञ के लिए खेतों के बीच मिनी महाकुंभ जैसी व्यवस्था की गई है, जहां 225 क्विंटल हवन सामग्री से आहुति दी जाएगी और 151 वेदियों पर यज्ञ संपन्न होगा। आयोजन स्थल पर 200 ट्रॉली बांस और घास से मंडप, कुटियां और परिक्रमा मार्ग तैयार किए गए हैं, जबकि निर्माण में किसी भी हरे पेड़ को नहीं काटा गया।

    कार्यक्रम में करीब 15 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई गई है, जिनके लिए भोजनशाला और आवास की व्यवस्था की गई है। यहां 108 मंडपों में रामचरितमानस और भागवत पाठ के साथ-साथ प्रतिदिन शिवलिंग निर्माण भी चल रहा है, जिसका लक्ष्य सवा करोड़ शिवलिंग बनाना है।

    गुड्डा महाराज के नेतृत्व में चल रहे इस आयोजन में 250 से अधिक स्वयंसेवक और कारीगर लगातार सेवा कार्य में जुटे हैं। प्रशासनिक और धार्मिक स्तर पर इसे विश्व कल्याण का बड़ा अनुष्ठान बताया जा रहा है।

  • श्रद्धालुओं की सुविधा पर जोर: घाट तक पहुंचने के लिए प्लान A और B तैयार

    श्रद्धालुओं की सुविधा पर जोर: घाट तक पहुंचने के लिए प्लान A और B तैयार


    उज्जैन  धार्मिक नगरी उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महापर्व 2028 को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन को ध्यान में रखते हुए पार्किंग और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

    मेला अधिकारी और कलेक्टर ने किया स्थलीय निरीक्षण

    सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह और कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इंदौर-देवास मार्ग से आने वाले वाहनों के लिए प्रस्तावित पार्किंग स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान विभिन्न स्थानों की व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया और आवश्यक सुधारों के निर्देश दिए गए।

    संभागायुक्त का निर्देश: घाट तक आसान हो पहुंच

    निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पार्किंग स्थल से शिप्रा नदी घाट तक श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी तरह सुगम और सुरक्षित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में श्रद्धालुओं को घाट तक पहुंचने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।

    प्रमुख स्नान पर्वों के लिए वैकल्पिक योजना तैयार

    प्रशासन ने प्रमुख स्नान तिथियों के दौरान भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए प्लान A और प्लान B तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि यदि एक पार्किंग स्थल पर दबाव बढ़े, तो तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जा सके और यातायात बाधित न हो।

    कई गांवों में विकसित होंगे पार्किंग स्थल

    निरीक्षण के दौरान ग्राम गंगेडी, धरमबड़ला, सिकंदरी, दाऊदखेड़ी, हाटकेश्वर और गोठड़ा क्षेत्रों का दौरा किया गया। इन स्थानों पर बड़े स्तर पर पार्किंग व्यवस्था विकसित करने की योजना है, जिससे बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों को व्यवस्थित रूप से रोका जा सके।

    कलेक्टर का निर्देश: जल्द बने विस्तृत कार्य योजना

    कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने कहा कि सिंहस्थ महापर्व में पार्किंग व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। उन्होंने सभी विभागों को समन्वय बनाकर जल्द से जल्द विस्तृत कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि समय रहते सभी व्यवस्थाएं पूरी की जा सकें।

    बेहतर यातायात के लिए प्रशासन का फोकस

    उज्जैन विकास प्राधिकरण, एमपीआईडीसी और यातायात विभाग के अधिकारी भी इस निरीक्षण में शामिल रहे। सभी विभाग मिलकर इस महापर्व को सफल और व्यवस्थित बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।