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  • भोपाल में विश्व शांति महायज्ञ के साथ निकली भव्य शोभायात्रा, संभव सागर बोले- संयम ही भारत की असली संपदा

    भोपाल में विश्व शांति महायज्ञ के साथ निकली भव्य शोभायात्रा, संभव सागर बोले- संयम ही भारत की असली संपदा


    मध्य प्रदेश । भोपाल में धार्मिक आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के आठ दिवसीय आयोजन का भव्य समापन विश्व शांति महायज्ञ और भगवान जिनेंद्र की विशाल शोभायात्रा के साथ किया गया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालु तप, संयम और आराधना में लीन रहे, वहीं अंतिम दिन शहर का वातावरण जयकारों, भक्ति गीतों और धार्मिक उत्साह से सराबोर दिखाई दिया।

    समापन अवसर पर निकाली गई भगवान जिनेंद्र की भव्य शोभायात्रा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। रजतमय पालकी में विराजित भगवान जिनेंद्र के दर्शन के लिए मार्गभर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। केसरिया ध्वज लहराते श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए शोभायात्रा में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने रास्ते में श्रीफल अर्पित कर भगवान से परिवार और समाज की सुख-समृद्धि तथा विश्व कल्याण की कामना की। पूरे मार्ग पर आध्यात्मिक उल्लास और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।

    समाज प्रवक्ता अंशुल जैन के अनुसार, आठ दिवसीय इस धार्मिक आयोजन में अभिषेक, जाप, पूजन और विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धा और साधना का अनूठा संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंडल की परिक्रमा कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का भी संचार किया।

    पूरे आयोजन के दौरान अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने व्रत और उपवास रखकर तपस्या का मार्ग अपनाया। श्रद्धालुओं ने भौतिक सुख-सुविधाओं से दूरी बनाकर आठ दिनों तक धार्मिक आराधना और आत्मचिंतन में समय बिताया। जैन धर्म की परंपराओं के अनुरूप संयम, त्याग और आत्मशुद्धि के संदेश को जीवन में उतारने का प्रयास किया गया। धार्मिक वातावरण में लोगों ने आत्मिक शांति और आध्यात्मिक संतोष का अनुभव किया।

    आयोजन के दौरान मुनि संभव सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि संयम भारत की सबसे बड़ी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपदा है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का वास्तविक विकास केवल भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि आत्मसंयम और सदाचार से होता है। उन्होंने समाज से पर्यावरण संरक्षण, जीवदया और नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि धर्म का वास्तविक स्वरूप सभी जीवों के प्रति करुणा और संवेदनशीलता में निहित है।

    कार्यक्रम का संचालन एवं निर्देशन अविनाश भैया के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। पूजन एवं अर्घ्य समर्पण में धर्म इंद्र, प्रियंका, महेंद्र, श्रीपाल, मेना सुंदरी, ऋषभ, मंजू, कुबेर, आशा, विजेंद्र सहित अनेक पात्रों ने भाग लिया। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता निभाई।

    विश्व शांति महायज्ञ और भव्य शोभायात्रा के साथ संपन्न हुआ यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम भर नहीं रहा, बल्कि समाज में शांति, सद्भाव, संयम और मानवीय मूल्यों के प्रसार का एक प्रेरणादायी संदेश भी बन गया। आयोजन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक किया।

  • सोमनाथ मंदिर में भव्य आयोजन: पीएम मोदी की विशेष पूजा, 75 वर्ष पूरे होने पर भावुक संदेश

    सोमनाथ मंदिर में भव्य आयोजन: पीएम मोदी की विशेष पूजा, 75 वर्ष पूरे होने पर भावुक संदेश

    नई दिल्ली ।
    गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में स्थित ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर एक बार फिर आस्था और सांस्कृतिक भव्यता का केंद्र बन गया, जहां ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ के अवसर पर भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया और पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

    प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर में पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया और इस पवित्र स्थल के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यहां आकर उन्हें एक दिव्य और भावनात्मक अनुभूति हुई है, जो शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। उनके अनुसार सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और सभ्यता की निरंतरता का प्रतीक है।

    इस अवसर पर सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया, जिसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस मौके को भारत की आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यह स्थान सदियों से आस्था, विश्वास और शक्ति का केंद्र रहा है।

    कार्यक्रम के दौरान पूरे मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंचे और आयोजन का हिस्सा बने। मार्गों पर लोगों का उत्साह देखते ही बनता था, जहां पारंपरिक झांकियां, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और लोक नृत्य ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।

    इस आयोजन का एक खास आकर्षण वह दृश्य रहा जब आकाश में वायुसेना की एरोबेटिक टीम ने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी का ध्यान खींचा। यह प्रस्तुति न केवल तकनीकी कौशल का प्रदर्शन थी, बल्कि आधुनिक भारत की क्षमताओं का प्रतीक भी बनी।

    प्रधानमंत्री के आगमन पर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल रहा। हजारों लोगों ने सड़कों के किनारे खड़े होकर उनका स्वागत किया और वातावरण जयघोषों से गूंज उठा। यह दृश्य इस बात का संकेत था कि यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा एक व्यापक उत्सव बन चुका है।

    सोमनाथ मंदिर का यह भव्य आयोजन भारत की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक परंपराओं को एक बार फिर जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। यह अवसर न केवल श्रद्धा का प्रतीक रहा, बल्कि इसने देश की सभ्यतागत निरंतरता और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत संदेश दिया।

  • मथुरा अधिक मास मेला: व्यवस्था, सत्यापन और सुरक्षा को लेकर उठा मुद्दा, प्रशासन से सख्ती की मांग

    मथुरा अधिक मास मेला: व्यवस्था, सत्यापन और सुरक्षा को लेकर उठा मुद्दा, प्रशासन से सख्ती की मांग



    नई दिल्ली। मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र में लगने वाले तीन वर्ष में एक बार आयोजित होने वाले अधिक मास मेले (Adhik Maas Mela) को लेकर इस बार प्रशासनिक और धार्मिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मेले की व्यवस्थाओं को लेकर कुछ अहम सुझाव और चिंताएं साझा की हैं।

    पत्र में कहा गया है कि मेले के दौरान सभी दुकानदारों और व्यापारियों का सख्त सत्यापन होना चाहिए, ताकि आयोजन की शुचिता और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे। साथ ही यह भी मांग की गई है कि केवल सत्यापित और नियमों का पालन करने वाले व्यापारियों को ही दुकान लगाने की अनुमति दी जाए।

    आयोजकों का कहना है कि गोवर्धन क्षेत्र में लगने वाला यह धार्मिक मेला लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की अव्यवस्था या सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। पत्र में मेले की पारंपरिक और धार्मिक गरिमा बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।

    स्थानीय प्रशासन ने अभी इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पत्र सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अधिकारियों के अनुसार मेले की तैयारी पहले से ही सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखकर की जा रही है।

    गोवर्धन क्षेत्र में यह मेला धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसमें देशभर से श्रद्धालु और व्यापारी शामिल होते हैं।

  • झांसी के जंगल में गूंजा राम नाम, 21 कुंडी महायज्ञ में उमड़ा आस्था का सैलाब; रासलीला ने बांधा समां

    झांसी के जंगल में गूंजा राम नाम, 21 कुंडी महायज्ञ में उमड़ा आस्था का सैलाब; रासलीला ने बांधा समां



    झांसी। झांसी जनपद के नोटा हाटी गांव के जंगल में स्थित प्राचीन पटना सरकार हनुमान मंदिर इन दिनों भक्ति और आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। यहां आयोजित 21 कुंडी श्रीराम महायज्ञ में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सुबह से ही मंदिर परिसर और यज्ञ मंडप में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर रहे हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा ले रहे हैं।

    महायज्ञ में महिला, पुरुष और बच्चों सहित आसपास के कई गांवों के लोग बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति संगीत, वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक वातावरण से श्रद्धालु भावविभोर नजर आ रहे हैं। आयोजन स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक माहौल में डूबा हुआ दिखाई दे रहा है।

    मथुरा-वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा भव्य रासलीला का मंचन
    इस धार्मिक आयोजन की खास बात यह भी है कि दिन के समय मथुरा-वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा भव्य रासलीला का मंचन किया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण और रामायण प्रसंगों पर आधारित प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को खूब आकर्षित कर रही हैं। दूर-दराज से आए लोग देर रात तक रासलीला का आनंद ले रहे हैं। कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो रहे हैं।

    महायज्ञ का संचालन और नेतृत्व यज्ञ आयोजक श्री बिनेका बाबा जी महाराज साकेत धाम के निर्देशन में किया जा रहा है। आयोजन को सफल बनाने के लिए ग्रामीणों और भक्तों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। गांव के लोग दिन-रात सेवा कार्यों में जुटे हुए हैं और श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पानी और अन्य व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

    भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
    आयोजकों के अनुसार, यह 21 कुंडी श्रीराम महायज्ञ 12 तारीख तक चलेगा। समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसकी तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं। आयोजकों का कहना है कि भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

    धार्मिक आयोजन के चलते पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस महायज्ञ में शामिल होने और पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। लगातार बढ़ रही भीड़ को देखते हुए आयोजन समिति और स्थानीय प्रशासन भी व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए है।

  • मध्यप्रदेश के कटनी में दावा: जमीन से प्रकट हुई हनुमान प्रतिमा, पूरे इलाके में भक्ति का माहौल

    मध्यप्रदेश के कटनी में दावा: जमीन से प्रकट हुई हनुमान प्रतिमा, पूरे इलाके में भक्ति का माहौल

    मध्य प्रदेश /कटनी जिले के बहोरीबंद क्षेत्र में इन दिनों एक ऐसी घटना की चर्चा है, जिसने पूरे इलाके को आस्था और आश्चर्य के माहौल में बदल दिया है। रूपनाथ क्षेत्र के पास एक खेत में खुदाई के दौरान कथित तौर पर पवनपुत्र हनुमान की एक प्रतिमा मिलने का दावा सामने आया है। जैसे ही यह बात फैली, आसपास के गांवों में हलचल मच गई और लोग बड़ी संख्या में उस स्थान की ओर पहुंचने लगे।

    यह घटना उस समय हुई जब ग्राम सजहरी मोहनिया के कुछ किसान अपने खेत में सामान्य खुदाई का कार्य कर रहे थे। बताया जाता है कि मिट्टी हटाने के दौरान अचानक जमीन के भीतर एक पत्थरनुमा आकृति दिखाई दी। धीरे-धीरे जब खुदाई आगे बढ़ी, तो वहां मौजूद लोगों के अनुसार एक प्रतिमा जैसी संरचना स्पष्ट होने लगी, जिसे उन्होंने बजरंगबली की मूर्ति बताया।

    यह स्थान पहले से ही धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहां एक गऊ समाधि भी स्थित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले से ही श्रद्धा और आस्था का वातावरण रहा है, लेकिन इस घटना के बाद इसकी धार्मिक मान्यता और भी गहरी हो गई है। ग्रामीण इसे एक सामान्य घटना नहीं बल्कि आस्था से जुड़ा एक विशेष संकेत मान रहे हैं।

    जैसे ही यह खबर आसपास के गांवों तक पहुंची, लोग बिना देर किए उस स्थान पर पहुंचने लगे। कुछ ही घंटों में वहां श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हो गई। लोग प्रतिमा के दर्शन कर पूजा-अर्चना करने लगे और पूरा वातावरण भक्ति भाव से भर गया। कई जगहों पर जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी और माहौल पूरी तरह धार्मिक ऊर्जा से भर गया।

    स्थानीय लोगों ने इस घटना को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि जब उन्होंने खुद मिट्टी हटाई, तो उन्हें पहले समझ नहीं आया कि यह क्या है, लेकिन जैसे-जैसे प्रतिमा सामने आती गई, सभी लोग आश्चर्य में पड़ गए। कई ग्रामीणों ने इसे अपने जीवन का एक अनोखा अनुभव बताया और इसे ईश्वर की कृपा से जोड़कर देखा।

    हालांकि इस पूरे मामले को लेकर अभी तक किसी आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं की गई है। न ही यह स्पष्ट हो पाया है कि यह प्रतिमा कितनी पुरानी है या इसका ऐतिहासिक महत्व क्या हो सकता है। इसके बावजूद लोगों की आस्था लगातार बढ़ती जा रही है और श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

    यह स्थान अब केवल एक खेत नहीं रह गया है, बल्कि आस्था और उत्सुकता का केंद्र बन चुका है। कोई इसे चमत्कार मान रहा है, तो कोई इसे पुरातात्विक जांच का विषय बता रहा है। लेकिन फिलहाल वहां का माहौल पूरी तरह श्रद्धा, विश्वास और भावनाओं से भरा हुआ है।

    कटनी की यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि ग्रामीण भारत में आस्था कितनी गहराई से लोगों के जीवन से जुड़ी हुई है, जहां एक छोटी सी घटना भी पूरे समाज के लिए बड़े धार्मिक अनुभव में बदल जाती है।

  • सोमनाथ दौरे पर अमित शाह, पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक और सामाजिक पहलों की शुरुआत

    सोमनाथ दौरे पर अमित शाह, पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक और सामाजिक पहलों की शुरुआत

    नई दिल्ली। गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ धाम में एक विशेष धार्मिक अवसर देखने को मिला, जब देश के गृह मंत्री अमित शाह ने यहां पहुंचकर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी उपस्थित रहे।

    मंदिर पहुंचने के बाद उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। ध्वजा पूजा, तग पूजा और महापूजा जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने अपनी आस्था प्रकट की। इस दौरान एक विशेष भेंट भी अर्पित की गई, जो भारतीय परंपरा और ऐतिहासिक विरासत से प्रेरित थी। इस पूरे आयोजन ने मंदिर की प्राचीन परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

    पूजा के बाद मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराने की परंपरा भी निभाई गई, जिसे अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान मंदिर प्रशासन द्वारा उनका स्वागत किया गया और उन्हें स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह पूरा दृश्य श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहा।

    इस अवसर पर एक विशेष धार्मिक आयोजन की शुरुआत भी की गई, जिसमें भक्तों को भाग लेने का अवसर मिलेगा। इस आयोजन के तहत भगवान शिव का अभिषेक पंचामृत, दूध और अन्य पवित्र सामग्री से किया जाएगा। साथ ही वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच पूजा संपन्न होगी। इसमें गौ-पूजा, ब्राह्मण भोजन और अन्य पारंपरिक अनुष्ठान भी शामिल किए गए हैं, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

    धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सांस्कृतिक और ज्ञानवर्धक पहल भी इस मौके पर शुरू की गई। इसके तहत एक डिजिटल माध्यम के जरिए प्राचीन भारतीय ज्ञान और परंपराओं को लोगों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और उन्हें भारतीय परंपरा के महत्व से अवगत कराना है।

    इसके अलावा, सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए जरूरतमंद लोगों के लिए एक विशेष पहल भी की गई। स्वास्थ्य से जुड़ी इस पहल के अंतर्गत पोषण सामग्री का वितरण किया गया, जिससे जरूरतमंदों को सहायता मिल सके। यह कदम दर्शाता है कि धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ समाज सेवा को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है।

    इस पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में आस्था, संस्कृति और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। यह दौरा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं रहा, बल्कि इसमें समाज और संस्कृति के प्रति समर्पण का व्यापक संदेश भी निहित था, जिसे वहां मौजूद लोगों ने गहराई से अनुभव किया।

  • उज्जैन में चेट्रीचंड की धूम: CM मोहन यादव ने दिखाई हरी झंडी, झूलेलाल के संदेश से दिया एकता का आह्वान

    उज्जैन में चेट्रीचंड की धूम: CM मोहन यादव ने दिखाई हरी झंडी, झूलेलाल के संदेश से दिया एकता का आह्वान


    उज्जैन । मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंधी समाज ने भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव चेट्रीचंड का पर्व बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया। इस अवसर पर टॉवर चौक पर भव्य आयोजन किया गया जहां से आकर्षक चल समारोह निकाला गया। कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहुंचकर समारोह को भगवा झंडी दिखाकर रवाना किया और समाजजनों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान झूलेलाल जैसे महान संत और गुरुजन सदैव समाज को सही दिशा दिखाते हैं। उनका आशीर्वाद सभी के जीवन में सुख समृद्धि और शांति बनाए रखता है। उन्होंने प्रार्थना की कि किसी के जीवन में कोई कष्ट न आए और यह नववर्ष सभी के लिए नई ऊर्जा आशा और खुशियां लेकर आए।

    उन्होंने समाज में आपसी प्रेम भाईचारे और एकता बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि यही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने कहा कि सुख दुख में एक दूसरे का साथ देना ही समाज को मजबूत बनाता है। विकास के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज का हर व्यक्ति महत्वपूर्ण है और सभी के सामूहिक प्रयासों से ही शहर प्रदेश और देश को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    इस भव्य आयोजन में बॉलीवुड और टीवी जगत की कई जानी मानी हस्तियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम की रौनक और बढ़ा दी। प्रसिद्ध अभिनेत्री जयाप्रदा अभिनेता आफताब शिवदासानी और लोकप्रिय टीवी शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा में ‘गोली’ का किरदार निभाने वाले कुश शाह भी विशेष रूप से शामिल हुए।

    इसके अलावा कार्यक्रम में सांसद अनिल फिरोजिया विधायक सतीश मालवीय भाजपा नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल समेत कई जनप्रतिनिधि और समाजसेवी भी उपस्थित रहे।चेट्रीचंड का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा बल्कि समाज में एकता प्रेम और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश भी देता नजर आया। रंग बिरंगे झांकियों भजन कीर्तन और उत्साह से भरे इस चल समारोह ने पूरे शहर को भक्तिमय माहौल में रंग दिया।

  • आज महिला दिवस पर काशी विश्वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए खास पहल, वीआईपी दर्शन और फ्री एंट्री

    आज महिला दिवस पर काशी विश्वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए खास पहल, वीआईपी दर्शन और फ्री एंट्री


    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर ने महिलाओं के लिए एक खास पहल की है। इस दिन मंदिर प्रशासन ने महिलाओं को विशेष वीआईपी दर्शन और मुफ्त प्रवेश की सुविधा देने की घोषणा की है, ताकि श्रद्धालु महिलाएं बाबा विश्वनाथ के दर्शन आसानी से कर सकें और महिला दिवस को एक आध्यात्मिक अनुभव के रूप में मना सकें।

    गेट नंबर 4-बी से मिलेगा निशुल्क प्रवेश

    मंदिर प्रशासन के अनुसार आज रविवार को सभी महिला श्रद्धालुओं के लिए गेट नंबर 4-बी से विशेष प्रवेश की व्यवस्था की गई है। चाहे महिलाएं काशी की निवासी हों या बाहर से आई हों, सभी को इस दिन निशुल्क दर्शन का अवसर मिलेगा। इस व्यवस्था के तहत महिलाएं सीधे बाबा विश्वनाथ की झांकी तक पहुँच सकेंगी और किसी भी प्रकार का टिकट लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

    बच्चों के साथ आई महिलाओं को मिलेगी प्राथमिकता

    काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने यह भी कहा कि जो महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ आएंगी, उन्हें विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। बालक या बालिका के साथ आई महिलाओं को पहले प्रवेश मिलेगा। मंदिर में आने वाली महिलाओं को भीड़ से बचाने और सहज दर्शन कराने के लिए अलग व्यवस्था की गई है, ताकि लंबी कतारों में खड़े होने की परेशानी न हो।

    सीईओ ने दी जानकारी

    काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि महिला दिवस पर सुबह चार बजे से पांच बजे तक और शाम चार बजे से पांच बजे तक का समय काशीवासियों के लिए आरक्षित रहेगा। इस दौरान पहले से चल रही विशेष दर्शन व्यवस्था जारी रहेगी। दिन के बाकी समय में महिलाओं के लिए वीआईपी प्रवेश और दर्शन की विशेष सुविधा लागू रहेगी।

    आसान और सम्मानजनक दर्शन का उद्देश्य

    मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को सम्मान देना और उन्हें सहज तरीके से दर्शन कराने का अवसर प्रदान करना है। हर साल बड़ी संख्या में महिलाएं काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने आती हैं और महिला दिवस पर यह सुविधा उनके लिए एक विशेष उपहार की तरह है।

    महिलाओं के लिए अनूठा अनुभव

    वीआईपी दर्शन और मुफ्त प्रवेश की यह व्यवस्था महिला श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार अनुभव साबित होगी। कई महिलाएं दूर-दूर से बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने आती हैं, और इस सुविधा के कारण उनकी यात्रा और भी सुखद और आरामदायक बन जाएगी।

    काशी विश्वनाथ मंदिर की धार्मिक महत्ता

    काशी विश्वनाथ मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। काशी को भगवान शिव की नगरी माना जाता है और मंदिर के पुनर्विकास के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और भी बढ़ गई है।

    मंदिर प्रशासन की सकारात्मक पहल

    महिला दिवस पर वीआईपी दर्शन की यह सुविधा मंदिर प्रशासन की एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है। इससे न केवल महिलाओं को विशेष सम्मान मिलेगा, बल्कि यह दिखाता है कि धार्मिक स्थलों पर भी महिलाओं की सुविधा और सम्मान का ध्यान रखा जा रहा है।

  • 19 फरवरी महाकाल भस्म आरती: त्रिपुंड-त्रिनेत्र और ॐ के साथ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार

    19 फरवरी महाकाल भस्म आरती: त्रिपुंड-त्रिनेत्र और ॐ के साथ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार


    उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि गुरुवार को सुबह 4 बजे कपाट खोले गए और भस्म आरती का आयोजन धूमधाम से संपन्न हुआ। इस अवसर पर बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार विशेष विधि-विधान के साथ किया गया। मंदिर के गर्भगृह में पुजारियों ने सभी देवी-देवताओं का पूजन और जलाभिषेक के बाद पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से भगवान का अभिषेक किया।

    भगवान महाकाल का भांग और चंदन से राजा स्वरूप में श्रृंगार किया गया। भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। इसके साथ ही शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पों की माला अर्पित की गई, जिससे बाबा महाकाल का अलंकरण और भी भव्य और मनोहारी दिखाई दिया।

    सुबह-सुबह सैकड़ों श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल हुए। उन्होंने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान के समीप अपनी मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद मांगा। श्रद्धालु बाबा महाकाल की जयकारे लगाते रहे, जिससे पूरा मंदिर जयकारों की गूंज से गुंजायमान हो उठा।

    मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ सुबह से ही रही और हर कोई भक्ति और श्रद्धा भाव से बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहा था। भस्म आरती के दौरान मंदिर में शांतिपूर्ण वातावरण, मंत्रोच्चार और दिव्य गंध ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।

  • मां नर्मदा प्रकटोत्सव: कड़ाके की ठंड में भी नहीं डिगी आस्था, बरमान घाट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की अपार भीड़

    मां नर्मदा प्रकटोत्सव: कड़ाके की ठंड में भी नहीं डिगी आस्था, बरमान घाट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की अपार भीड़


    नरसिंहपुर । मध्यप्रदेश में मां नर्मदा प्रकटोत्सव का पावन पर्व रविवार को पूरे श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नजर नहीं आई। नरसिंहपुर जिले के प्रसिद्ध और पवित्र बरमान घाट पर रविवार तड़के से ही नर्मदा भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
    नर्मदा जन्मोत्सव को लेकर बरमान घाट पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शनिवार रात से ही शुरू हो गई थी। आधी रात के बाद से ही घाट पर भक्तों का सैलाब उमड़ने लगा। जैसे ही सुबह सूर्य की पहली किरण मां नर्मदा के जल पर पड़ी श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ पवित्र स्नान कर पूजा-अर्चना प्रारंभ की। पूरा घाट नर्मदे हर के जयघोष से गूंज उठा।

    कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। ठंड से बचने के लिए लोग ऊनी कपड़ों में घाट पहुंचे लेकिन स्नान के समय आस्था ने ठंड पर जीत हासिल कर ली। श्रद्धालुओं का कहना था कि मां नर्मदा में स्नान मात्र से तन-मन दोनों पवित्र हो जाते हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरमान घाट का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इसी स्थान पर सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने कठोर तपस्या की थी। यही कारण है कि नर्मदा प्रकटोत्सव के अवसर पर यहां स्नान और पूजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते आज लाखों की संख्या में श्रद्धालु मां रेवा के दर्शन और पूजन के लिए बरमान घाट पहुंचे।

    घाट पर सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा की आरती की, दीपदान किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई श्रद्धालु दूर-दराज के क्षेत्रों से पैदल यात्रा कर यहां पहुंचे। भक्तों का कहना है कि नर्मदा केवल एक नदी नहीं बल्कि जीवनदायिनी मां हैं जिनके दर्शन मात्र से मन को शांति मिलती है। प्रशासन की ओर से भी आयोजन को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात रहा, वहीं गोताखोरों की टीम और स्वास्थ्य अमला भी घाट पर मौजूद रहा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए साफ-सफाई, पेयजल और यातायात व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया।

    नर्मदा प्रकटोत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई और कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन भी किया गया। दोपहर तक घाट पर श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रहने की संभावना है। कुल मिलाकर, मां नर्मदा प्रकटोत्सव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आस्था के आगे ठंड, दूरी और कठिनाइयां कोई मायने नहीं रखतीं। मां नर्मदा के प्रति श्रद्धालुओं की भक्ति और विश्वास हर साल इसी तरह बरमान घाट पर उमड़ता रहता है।