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  • अनोखा शिव धाम: कच्छ के कल्याणेश्वर महादेव मंदिर में सदियों से टूटे शिवलिंग की होती है पूजा

    अनोखा शिव धाम: कच्छ के कल्याणेश्वर महादेव मंदिर में सदियों से टूटे शिवलिंग की होती है पूजा


    नई दिल्ली । गुजरात के कच्छ जिला में भुज के पास स्थित माधापार गांव का कल्याणेश्वर महादेव मंदिर आस्था और रहस्य का अनोखा संगम माना जाता है। इस मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित शिवलिंग है जो सदियों से टूटी अवस्था में होने के बावजूद पूरी श्रद्धा और विधि विधान से पूजित हो रहा है।

    मान्यता है कि यह शिवलिंग मंदिर निर्माण से पहले से ही इसी स्वरूप में मौजूद था। समय के साथ जहां अन्य शिवलिंगों में परिवर्तन देखने को मिलता है वहीं यहां का शिवलिंग प्रारंभ से ही खंडित अवस्था में बताया जाता है। इसके बावजूद श्रद्धालु इसे भगवान शिव का साक्षात रूप मानकर जल दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं।

    खंडित होने पर भी पूजनीय

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग किसी भी अवस्था में पूजनीय होता है। यही कारण है कि यहां टूटा हुआ शिवलिंग भी उतनी ही आस्था के साथ पूजित है। जबकि अन्य देवी देवताओं की मूर्तियों के लिए खंडित होने पर पूजा के अलग नियम बताए जाते हैं।

    रहस्यमयी मान्यताएं
    मंदिर से जुड़ी कई रहस्यमयी बातें भी श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित हैं। कहा जाता है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल या दूध कहां जाता है यह स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। इसके अलावा मंदिर परिसर में सांप दिखाई देने की भी स्थानीय लोगों द्वारा चर्चा की जाती है जिसे शिव की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है।

    पौराणिक जुड़ाव
    इस मंदिर का संबंध पौराणिक कथाओं से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि पांडव ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां तपस्या की थी और शिवलिंग की स्थापना की थी। कुछ लोककथाओं में कर्ण और छत्रपति शिवाजी महाराज के यहां पूजा करने का भी उल्लेख मिलता है। आज भी दूर दूर से श्रद्धालु इस अद्भुत शिवधाम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर भगवान शिव की शरण में आते हैं।

  • मंत्री परमार ने चित्रकूट के पंचवटी घाट पर किया श्रमदान, मां मंदाकिनी नदी को स्वच्छ रखने का संदेश दिया

    मंत्री परमार ने चित्रकूट के पंचवटी घाट पर किया श्रमदान, मां मंदाकिनी नदी को स्वच्छ रखने का संदेश दिया


    भोपाल । चित्रकूट की पवित्र घाटियों में सोमवार को एक जीवंत दृश्य देखने को मिला जब उच्च शिक्षा तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने पंचवटी घाट पर माँ मंदाकिनी नदी के स्वच्छता अभियान में स्वयं हाथ बंटाया। मंत्री ने घाट परिसर में सफाई करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं स्थानीय नागरिकों और प्रशासनिक अधिकारियों को स्वच्छता के महत्व की याद दिलाई और जनभागीदारी की प्रेरणा दी।

    मंत्री परमार ने कहा कि चित्रकूट धार्मिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ बहने वाली माँ मंदाकिनी नदी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इसकी स्वच्छता बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छता केवल सरकारी अभियान नहीं बल्कि जनभागीदारी से ही सफल होने वाला एक जनआंदोलन है।

    घाट परिसर में पहुंचे सभी लोगों के साथ मिलकर मंत्री ने कचरा एकत्रित किया आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित किया और लोगों से आग्रह किया कि वे नदी में कोई कचरा न डालें। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय समुदाय प्रशासन और आगंतुकों का सहयोग ही स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक पर्यावरण सुनिश्चित कर सकता है।

    इस अवसर पर जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारी सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर माँ मंदाकिनी की स्वच्छता के लिए श्रमदान किया और इस पहल का उत्साहजनक समर्थन किया। मंत्री परमार ने आशा जताई कि इस प्रकार के अभियान स्थानीय लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी को बढ़ाएंगे।

    मंत्री ने यह भी कहा कि स्वच्छता के लिए छोटे छोटे प्रयास भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। नदी और घाट का पर्यावरण केवल प्रशासनिक कर्मियों का कार्यक्षेत्र नहीं बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखें और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाएं।

    इस मौके पर उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कहा कि इस तरह के अभियान धार्मिक स्थलों की साफ सफाई के साथ साथ स्थानीय पर्यटन और स्वास्थ्य के लिए भी बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि पंचवटी घाट जैसे धार्मिक स्थल स्वच्छ रहेंगे तो वहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का अनुभव भी सकारात्मक होगा।

    घाट पर श्रमदान करते हुए मंत्री परमार ने यह संदेश भी दिया कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का काम केवल सरकार के हाथ में नहीं छोड़ना चाहिए। हर नागरिक की भागीदारी से ही माँ मंदाकिनी और अन्य नदियों का जल स्वच्छ और सुरक्षित रहेगा। यह कदम चित्रकूट के धार्मिक और सामाजिक जीवन में स्वच्छता के प्रति नई चेतना का प्रतीक बन गया है।