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  • रामचरितमानस पर सपा का बदला रुख: अखिलेश यादव ने इसे बताया ‘सांस्कृतिक संविधान’, यूपी की राजनीति में फिर गरमाई बहस

    रामचरितमानस पर सपा का बदला रुख: अखिलेश यादव ने इसे बताया ‘सांस्कृतिक संविधान’, यूपी की राजनीति में फिर गरमाई बहस




    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर रामचरितमानस को लेकर समाजवादी पार्टी का रुख चर्चा में है। लोकसभा चुनाव से पहले जिस मुद्दे पर सपा के भीतर विवाद और राजनीतिक टकराव देखने को मिला था, अब उसी पर पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का रुख काफी नरम और अलग नजर आ रहा है।

    हाल ही में लखनऊ में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक वकील के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद मामला फिर सुर्खियों में आया। बताया गया कि वकील के हाथ में रामचरितमानस की प्रति थी। इसी घटना के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए रामचरितमानस को “सांस्कृतिक संविधान का एक रूप” और “नैतिक आचार संहिता” बताया, जिससे राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है।

    पहले विवाद, अब नया रुख
    लोकसभा चुनाव 2024 से पहले समाजवादी पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस के कुछ दोहों को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने इन दोहों को महिलाओं, दलितों और पिछड़ों के प्रति अपमानजनक बताते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी। इस बयान के बाद बीजेपी ने सपा पर तीखा हमला बोला था और मामला राजनीतिक रूप से काफी गरमा गया था।

    बाद में यह विवाद इतना बढ़ा कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उस समय अखिलेश यादव ने इस पूरे विवाद पर खुलकर कोई सख्त रुख नहीं अपनाया था, लेकिन अब उनका बदला हुआ स्टैंड राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    चुनावी रणनीति या जनभावना का असर?
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी अपनी छवि को व्यापक जनसमर्थन के अनुरूप ढालने की कोशिश कर रही है। रामचरितमानस जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर नरम रुख अपनाकर सपा आम मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

    वहीं बीजेपी का आरोप है कि सपा राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए अब धार्मिक प्रतीकों का सहारा ले रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे हैं, वे अब धार्मिक ग्रंथों का सम्मान दिखा रहे हैं।

    विपक्ष और सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया
    इस मुद्दे पर कांग्रेस ने अखिलेश यादव के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि रामचरितमानस भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का हिस्सा है और इसे राजनीति से अलग रखकर देखा जाना चाहिए। वहीं बसपा ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी से दूरी बनाए रखी है।

    यूपी की सियासत में नया मोड़
    रामचरितमानस को लेकर सपा के बदले सुर ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सांस्कृतिक और धार्मिक विमर्श को केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों में यह मुद्दा सियासी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।फिलहाल यह साफ है कि यूपी की राजनीति में धर्म और संस्कृति एक बार फिर रणनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा बनते जा रहे हैं।

  • बांग्लादेश में राजनीतिक दलों के मुस्लिम समर्थक कट्टरपंथी दिखने की होड़ में हैंपूर्व राजदूत महेश सचदेवा

    बांग्लादेश में राजनीतिक दलों के मुस्लिम समर्थक कट्टरपंथी दिखने की होड़ में हैंपूर्व राजदूत महेश सचदेवा


    नई दिल्ली । बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ने 17 सालों के बाद घर वापसी की है। रहमान ने घर लौटने पर मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए देश के लोगों का दिल से शुक्रिया अदा किया। दूसरी ओर बांग्लादेश में हफ्तेभर में लगातार दूसरे अल्पसंख्यक हिंदू की हत्या का मामला सामने आया है। इन मुद्दों को लेकर पूर्व राजदूत महेश सचदेवा ने आईएएनएस से खास बातचीत की।

    पूर्व राजदूत महेश सचदेवा ने कहाकुछ हफ्तों में हिंदू युवक की हत्या की यह दूसरी घटना सामने आई हैजिसमें ज्यादातर सांप्रदायिक नफरत की वजह से हत्या की गई है। इससे कई तरह की चिंताएं पैदा हुई हैं। सबसे पहलेइससे पता चलता है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा पक्की करने के लिए संघर्ष कर रही है।

    उन्होंने आगे कहादूसरा यह बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल में गहरी पैठ जमाए हुए ‘इस्लामवाद’ को दिखाता हैजिसमें पार्टियां अपने विरोधियों से ज्यादा मुस्लिम समर्थक और कट्टरपंथी दिखने की होड़ में हैं। तीसराइससे यह सवाल उठता है कि क्या 12 फरवरी के चुनाव के बाद सांप्रदायिक दुश्मनी की यह लहर कम हो जाएगी या अगर ये ताकतें सत्ता में आती हैंतो क्या हालात और बिगड़ सकते हैं।

    तारिक रहमान की वापसी को लेकर महेश सचदेवा ने कहा17 साल के निर्वासन के बादतारिक रहमान बांग्लादेश लौट आए हैं। इस बात का चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता हैक्योंकि 12 फरवरी के चुनाव में बीएनपी को सबसे आगे देखा जा रहा है। उन्होंने सुलह वाली बातें कहीइस बात पर जोर दिया कि बांग्लादेश मुसलमानों और ईसाइयों समेत सभी का है। निर्वासन के दौरान देश के विकास की तारीफ की और अवामी लीग सरकार के सुधारों को भी माना। जानकार बांग्लादेश की मौजूदा उथल-पुथल के बीच भारत और उनके आर्थिक और सामाजिक एजेंडे पर नरम रुख पर नजर रख रहे हैं।

    बता देंढाका नॉर्थ सिटी यूनिट ने पुरबाचल इलाके में जुलाई 36 एक्सप्रेसवे पर बीएनपी ने सफाई अभियान चलाया। इस सड़क का इस्तेमाल तारिक रहमान की रैली के लिए किया गया था। जुलाई 36 एक्सप्रेसवे को 300-फीट रोड के नाम से जाना जाता है। सफाई अभियान के दौरान ढाका नॉर्थ सिटी कॉर्पोरेशन डीएसीसी के वर्करपार्टी कार्यकर्ता और 300 किराए के सफाई कर्मचारी शामिल रहे और कचरे-मलबे को हटाया।

    ढाका नॉर्थ बीएनपी के संयोजक अमीनुल हक ने इस अभियान का नेतृत्व किया। कचरे को जल्दी हटाने के लिए सोलह ट्रक किराए पर लिए गए। इसके अलावाराजधानी के अलग-अलग इलाकों से 300 सफाई कर्मचारी लाए गए। इस बीचडीएनसीसी के सफाई कर्मचारी भी सड़क से कचरा साफ करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।