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  • सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले में कहा कि धार्मिक प्रथाओं में अंधविश्वास की समीक्षा करना न्यायपालिका का अधिकार है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले में कहा कि धार्मिक प्रथाओं में अंधविश्वास की समीक्षा करना न्यायपालिका का अधिकार है।

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के विषय पर चल रही समीक्षा याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि धार्मिक प्रथाओं में अंधविश्वास और असंवैधानिक प्रथाओं की समीक्षा करना न्यायपालिका का अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा कि अदालत धर्म विशेषज्ञ नहीं है, लेकिन यदि कोई प्रथा मानवता, संविधान और न्याय की मूल भावना के खिलाफ जाती है, तो उस पर समीक्षा करना न्यायपालिका का संवैधानिक कर्तव्य है। सुप्रीम कोर्ट ने उदाहरण के तौर पर सती प्रथा, मानव बलि और नरभक्षण जैसी प्रथाओं का जिक्र किया और स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर अंधविश्वास को हमेशा अपरिवर्तनीय नहीं माना जा सकता।

    सुनवाई इस 2018 के निर्णय के पुनरीक्षण से जुड़ी है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 10 से 50 वर्ष आयु की महिलाओं का प्रवेश रोकना असंवैधानिक है। अब यह समीक्षा याचिका नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष है, जो व्यापक संवैधानिक सवालों पर विचार कर रही है कि धार्मिक अभ्यासों पर न्यायिक हस्तक्षेप किस हद तक संभव और उचित है। अदालत ने यह भी कहा कि केवल यह मान लेना कि सरकार का निर्णय अंतिम होगा, सही नहीं है और कोर्ट के पास यह देखने का अधिकार है कि कोई प्रथा अंधविश्वास पर आधारित है या नहीं।

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि धार्मिक स्वतंत्रता संवैधानिक रूप से सुरक्षित है और अदालत को केवल धार्मिक विश्वास के आधार पर समीक्षा नहीं करनी चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि धार्मिक स्वतंत्रता को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 25 आदि के तहत संतुलित रूप से देखा जाएगा और यदि कोई प्रथा मूलभूत अधिकारों के खिलाफ है तो न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।

    विशेष सुनवाई में कुछ न्यायाधीशों ने कहा कि यदि कोई प्रथा केवल धार्मिक मान्यता पर आधारित है और संवैधानिक मूल्यों को चुनौती देती है, तो उसकी समीक्षा अवश्य होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान जरूरी है, लेकिन यह असीमित नहीं है, और अदालत के पास यह शक्ति सुरक्षित है कि वह सामाजिक और नैतिक मूल्यों के अनुरूप न्याय सुनिश्चित करे।

    सबरीमाला मामला लंबे समय से महिलाओं के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संवेदनशील संतुलन से जुड़ा हुआ है। समीक्षा सुनवाई के निर्णायक चरण में सुप्रीम कोर्ट का यह रुख न्यायिक परंपरा, मूल्यों और संविधान की व्याख्या की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • धर्म कर्म: फाल्गुन अमावस्या पर पितरों के लिए करें यह पवित्र कर्म, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति

    धर्म कर्म: फाल्गुन अमावस्या पर पितरों के लिए करें यह पवित्र कर्म, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति


    नई दिल्ली। फाल्गुन मास की अमावस्या हिंदू धर्म में पितरों की शांति और पितृ दोष से मुक्ति के लिए एक अत्यंत शुभ और पुण्यदायी दिन माना जाता है। इस वर्ष यह तिथि 16 फरवरी, 2026 की शाम 05:34 बजे से प्रारंभ होकर 17 फरवरी, 2026 की सायं 05:30 बजे तक रहेगी, इसलिए साल 2026 में फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी।

    धार्मिक मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा अर्चना, तर्पण पिंडदान और दान पुण्य कर्म से पितृ दोष होने पर भी मुक्ति प्राप्त होती है और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। यह अवसर आत्मिक शुद्धि, मृत्यु के बाद के कर्जों का निवारण तथा परिवार में सुख शांति, समृद्धि और संतुलन लाने के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

    सबसे पहले पवित्र स्नान करना शुभफलदायी होता है। ब्रह्म मुहूर्त या सुबह जल्दी उठकर आप पवित्र नदी जैसे गंगा में स्नान करें। यदि नदी का स्नान संभव न हो, तो घर पर गंगाजल में तिल, कुश और काले तिल मिलाकर स्नान करना भी पुण्यदायी माना जाता है। स्नान के बाद अपने पूर्वजों को पितृ तर्पण और पिंडदान करना चाहिए, जिसमें जल, तिल, अन्न और शुद्ध मन से प्रार्थना शामिल हो।

    तर्पण करते समय दक्षिण की ओर मुख करके जल को कंठ के पास से बहाते हुए ॐ पितृभ्यो नमः जैसे मंत्र का उच्चारण किया जाता है, जिससे पूर्वजों को शांति स्वास्थ्य और मोक्ष प्राप्त होने की मान्यता प्रचलित है। पिंडदान में शुद्ध अन्न और तिल से बनाए गए पिंड को गंगा यमुना जैसे पवित्र नदी के तट पर या किसी पवित्र स्थान पर अर्पित करें। इससे पितृलोक में निवास करने वाले पूर्वजों को संतुष्टि और पुण्य की प्राप्ति होती है।

    अमावस्या तिथि में दान पुण्य का भी विशेष महत्व है। ब्राह्मणों को भोजन कराना, गरीबों को अन्न, वस्त्र, मसाले, दाल चावल आदि दान करना तथा गो दैनिक सेवा या पशु पक्षियों को पानी भोजन देना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। इससे जीवन में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और संपन्नता आती है।

    शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और उसके चारों ओर सात परिक्रमा करना लाभकारी होता है। इससे पितरों की शांति और परिवार में सुख समृद्धि का आगमन होता है, साथ ही गृहस्थ जीवन में बाधाएँ कम होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    धार्मिक परंपरा के अनुसार अमावस्या पितरों से जुड़ी तिथि है, इसलिए इस दिन स्नान, दान पुण्य, तर्पण पिंडदान तथा मंत्र जाप करने से पितृ दोष से मुक्ति पाई जा सकती है और पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है।

  • Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति से जुड़े 7 जरूरी काम जो पुण्य की प्राप्ति के लिए हर किसी को करने चाहिए

    Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति से जुड़े 7 जरूरी काम जो पुण्य की प्राप्ति के लिए हर किसी को करने चाहिए

    नई दिल्ली| Makar Sankranti 2026 Puja Ke Upay: सनातन परंपरा में हर साल 14 या 15 जनवरी को मकर संक्रांति का महापर्व मनाया जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान सूर्य धनु राशि से निकलकर अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं. इस दिन स्नान, ध्यान और दान करने का बहुत ज्यादा महत्व होता है. मान्यता है कि इस दिन व्यक्ति सूर्य रश्मियों के पुण्य प्रभाव से पूरे साल सुख, सौभाग्य और आरोग्य को प्राप्त करता है. अलग-अलग प्रां​तों में अलग-अलग नाम से मनाए जाने वाले इस पावन पर्व को उत्तर भारत में खिचड़ी के नाम से जाना जाता है. आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति के दिन व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति के लिए कौन से 7 काम जरूर करने चाहिए.

    1. तिल के तेल से करें मालिश

    हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के पर्व पर तिल का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता है कि संक्रांति के दिन व्यक्ति द्वारा तिल के तेल से मालिश करने से शुभता सूर्य की कृपा प्राप्त होती है. मान्यता है कि सूर्य देव की कृपा से पूरे साल व्यक्ति स्वस्थ रहता है.

    2. तिल का उबटन लगाएं

    हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गुडलक को पाने के लिए न सिर्फ तिल का तेल बल्कि तिल का उबटन भी लगाना चाहिए. मान्यता है कि तिल का उबटन लगाने से व्यक्ति कांतिवान बनता है.

    3. गंगा स्नान

    हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता कि संक्रांति के दिन पुण्यदायिनी मां गंगा के अमृतजल में लगाई गई तीन डुबकी अनंत पुण्य प्रदान करने वाली होती है.

    4. तिलयुक्त जल से करें स्नान

    हिंदू मान्यता के अनुसार यदि आप तिल के तेल से मालिश या उससे बना उबटन न लगा पाएं तो कम से कम अपने नहाने के पानी में तिल डालकर स्नान करें. मान्यता है​ कि ​मकर संक्रांति पर तिलयुक्त जल से स्नान करने पर व्यक्ति को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

    5. पूजा में तिल से करें हवन

    हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन स्नान-ध्यान के बाद हवन करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है. मकर संक्रांति के दिन आपके द्वारा की जाने वाली साधना-आराधना का पुण्यफल तब और बढ़ जाता है जब आप हवन सामग्री में तिल मिलाकर देवताओं के लिए विशेष रूप से हवन करते हैं. मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन तिल से हवन करने पर व्यक्ति पर लक्ष्मी और नारायण दोनों की कृपा बरसती है.

    6. जरूरतमंद लोगों को करें तिल का दान

    मकर संक्रांति के पावन पर्व पर स्नान के साथ दान का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन काले तिल के साथ गुड़ का दान करने पर न सिर्फ भगवान सूर्य बल्कि शनिदेव की कृपा भी अवश्य प्राप्त होती है.

    7. जरूर करें तिल से बना भोजन

    मकर संक्रांति पर पूजा के तमाम उपायों की तरह तिल से बना भोजन भी शुभ फल प्रदान करता है. ऐसे में आप इस दिन तिल से बने लड्डू, गजक, रेवड़ी आदि का सेवन अवश्य करें. मान्यता है कि प्रसाद स्वरूप तिल से बनी चीजों का सेवन करने पर सूर्य देव की विशेष कृपा बरसती है.