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  • रविवार व्रत शुरू करने से पहले जानें जरूरी नियम और सावधानियां

    रविवार व्रत शुरू करने से पहले जानें जरूरी नियम और सावधानियां


    नई दिल्ली। रविवार का व्रत, जिसे रवि व्रत भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और प्रभावशाली माना गया है। यह व्रत सूर्य देव को समर्पित होता है और माना जाता है कि इसे विधिपूर्वक करने से व्यक्ति के जीवन में तेज, सम्मान, आत्मविश्वास और सफलता का संचार होता है। खासकर वे लोग जो अपने करियर या जीवन में नई शुरुआत करना चाहते हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।

    व्रत की सही शुरुआत कैसे करें
    रविवार के दिन व्रत रखने की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर स्नान करने से होती है। इसके बाद घर के मंदिर या खुले स्थान पर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल फूल, रोली और अक्षत मिलाकर सूर्य देव को जल अर्पित करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ फल देने वाला माना गया है। इससे सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और मानसिक शांति मिलती है।

    व्रत के दौरान क्या करें और क्या न करें
    इस व्रत में सात्विक भोजन का विशेष महत्व होता है। कई श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखते हैं और केवल फलाहार ग्रहण करते हैं। शाम के समय सूर्य देव की आरती करना और उनकी कृपा के लिए प्रार्थना करना आवश्यक माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ होता है, क्योंकि यह सूर्य देव का प्रिय रंग माना जाता है। व्रत के दौरान क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।

    व्रत के महत्वपूर्ण नियम और सावधानियां
    रवि व्रत का पूरा लाभ पाने के लिए कुछ नियमों का पालन जरूरी है। व्रत में अनुशासन और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। बिना श्रद्धा या गलत विधि से किया गया व्रत अपेक्षित फल नहीं देता। इसके अलावा व्रत रखने वाले व्यक्ति को मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखनी चाहिए। किसी का अपमान करना या विवाद में पड़ना व्रत के प्रभाव को कम कर सकता है।

    रवि व्रत का महत्व
    मान्यता है कि रविवार का व्रत व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता दूर कर सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है। इससे आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और मान-सम्मान में सुधार होता है। साथ ही यह व्रत पिता से जुड़े संबंधों को मजबूत करने वाला भी माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग श्रद्धा और नियम के साथ यह व्रत करते हैं, उन्हें सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

  • देश के 5 अद्भुत हनुमान मंदिर, जहां अलग-अलग रूपों में मिलते हैं बजरंगबली के दर्शन

    देश के 5 अद्भुत हनुमान मंदिर, जहां अलग-अलग रूपों में मिलते हैं बजरंगबली के दर्शन


    नई दिल्ली । हनुमान जयंती के पावन अवसर पर देशभर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिलता है। इस दिन भक्त भगवान हनुमान के मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। भारत में कई ऐसे प्रसिद्ध और चमत्कारी हनुमान धाम हैं, जहां बजरंगबली अलग-अलग रूपों में विराजमान हैं और जिनसे जुड़ी मान्यताएं भक्तों की आस्था को और गहरा बनाती हैं।

    सबसे पहले बात करते हैं लेटे हुए हनुमान मंदिर की, जो प्रयागराज में स्थित है। यहां हनुमान जी की प्रतिमा लेटी हुई मुद्रा में स्थापित है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है। मान्यता है कि गंगा नदी हर वर्ष आकर उन्हें स्नान कराती है। संगम में स्नान करने वाले श्रद्धालु यहां दर्शन करना नहीं भूलते और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना करते हैं।

    इसके बाद महावीर मंदिर का नाम आता है, जो Patna में स्थित है। यह मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में से एक माना जाता है। यहां हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और माना जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है।

    छत्तीसगढ़ के गिरिजाबंध हनुमान मंदिर की विशेषता इसे और भी अनोखा बनाती है। यहां हनुमान जी को स्त्री स्वरूप में पूजा जाता है, जो पूरे विश्व में अपनी तरह का एकमात्र मंदिर माना जाता है। यह मंदिर आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम है।

    राजधानी Delhi में स्थित हनुमान मंदिर कनॉट प्लेस भी श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। यह मंदिर पांडवकालीन माना जाता है और यहां हनुमान जी के बाल स्वरूप के दर्शन होते हैं। मान्यता है कि यहां सिंदूर और इत्र चढ़ाने से जीवन के संकट दूर होते हैं।

    उत्तर प्रदेश के Chitrakoot में स्थित हनुमान मंदिर भी भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। यहां प्रतिमा के ऊपर स्थित कुंडों से लगातार जलधारा बहती रहती है, जिसे चमत्कारी माना जाता है। श्रद्धालु इस जल को पवित्र मानकर ग्रहण करते हैं और अपनी समस्याओं से मुक्ति की कामना करते हैं।

    इसके अलावा हनुमानगढ़ी का विशेष महत्व है। Ayodhya में स्थित इस मंदिर को हनुमान जी का प्रमुख धाम माना जाता है। यहां हनुमान जी बाल रूप में विराजमान हैं और उन्हें अयोध्या का रक्षक कहा जाता है। मान्यता है कि रामलला के दर्शन से पहले हनुमानगढ़ी के दर्शन करना आवश्यक होता है।

    इन सभी मंदिरों की विशेषता यही है कि यहां हनुमान जी अलग-अलग रूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं। कहीं वे लेटे हुए हैं, तो कहीं बाल स्वरूप में, तो कहीं अनोखे रूप में पूजे जाते हैं। यही विविधता और आस्था इन धामों को खास बनाती है। इस प्रकार भारत के ये प्रसिद्ध हनुमान मंदिर न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि चमत्कार और विश्वास की अनोखी मिसाल भी पेश करते हैं, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा लेकर पहुंचते हैं।

  • उज्जैन में आस्था का संगम मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अंगारेश्वर महादेव के चरणों में टेका माथा प्रदेश की खुशहाली की कामना

    उज्जैन में आस्था का संगम मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अंगारेश्वर महादेव के चरणों में टेका माथा प्रदेश की खुशहाली की कामना


    उज्जैन । धार्मिक नगरी उज्जैन एक बार फिर आस्था और भक्ति के विशेष माहौल में डूबी नजर आई जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव गुरुवार सुबह श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे जहां उन्होंने पूरे विधि विधान के साथ भगवान शिव की पूजा अर्चना की मुख्यमंत्री अपने परिवार के साथ प्रातःकाल मंदिर पहुंचे और वहां पहुंचते ही उन्होंने भगवान महादेव के चरणों में माथा टेककर प्रदेश की सुख शांति और समृद्धि की कामना की

    मंदिर परिसर में उस समय का दृश्य अत्यंत आध्यात्मिक और भावनात्मक था जब मुख्यमंत्री ने पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक किया और श्रद्धा भाव से पूजन संपन्न किया जैसे ही पूजन प्रारंभ हुआ मंदिर परिसर हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा और वहां उपस्थित श्रद्धालु भी इस भक्ति के वातावरण में पूरी तरह लीन नजर आए मुख्यमंत्री का यह दौरा पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक विश्वास से जुड़ा हुआ था जिसमें उन्होंने अपने परिवार के साथ भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया

    पूजन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना करते हुए भगवान से प्रार्थना की कि मध्यप्रदेश निरंतर विकास की ओर अग्रसर हो और यहां के नागरिकों के जीवन में सुख और समृद्धि बनी रहे उन्होंने विशेष रूप से प्रदेश की शांति और खुशहाली के लिए भी आशीर्वाद मांगा इस अवसर पर मंदिर में उपस्थित लोगों ने भी मुख्यमंत्री के साथ मिलकर भगवान शिव की आराधना की जिससे पूरे परिसर में एक सकारात्मक और ऊर्जावान वातावरण बन गया

    श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जहां दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं इस मंदिर का महत्व विशेष रूप से शिवभक्तों के बीच अत्यधिक माना जाता है और यहां नियमित रूप से पूजा अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते रहते हैं मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर मंदिर परिसर में पहले से ही तैयारियां की गई थीं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किए गए थे ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके

    मुख्यमंत्री के इस धार्मिक दौरे ने न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि आम जनमानस के बीच भी एक सकारात्मक संदेश दिया है कि आस्था और विश्वास भारतीय संस्कृति की मजबूत नींव हैं और जब जनप्रतिनिधि स्वयं इन परंपराओं से जुड़े रहते हैं तो समाज में भी आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है उज्जैन की पावन भूमि पर हुआ यह पूजन कार्यक्रम एक बार फिर यह दर्शाता है कि धर्म और आस्था का संबंध केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का यह दौरा भले ही अल्पकालिक रहा हो लेकिन इसने श्रद्धालुओं के बीच एक गहरी छाप छोड़ी है और लोगों ने इसे प्रदेश की उन्नति और कल्याण के लिए एक शुभ संकेत के रूप में देखा है

  • चारधाम में नो एंट्री पर इमाम की दो टूक: मक्का-मदीना की तरह ,गंगोत्री के भी अपने नियम मुस्लिमों का वहां क्या काम?

    चारधाम में नो एंट्री पर इमाम की दो टूक: मक्का-मदीना की तरह ,गंगोत्री के भी अपने नियम मुस्लिमों का वहां क्या काम?

    नई दिल्ली । देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थलों बद्रीनाथ केदारनाथ और गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित करने की सुगबुगाहट ने देश के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर इसे लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने इस संभावित फैसले का पुरजोर समर्थन कर सबको चौंका दिया है। इमाम इलियासी ने इसे पूरी तरह आस्था का विषय करार देते हुए तर्क दिया है कि जिस प्रकार इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है उसी तरह हिंदू धर्मस्थलों को भी अपने नियम तय करने का पूरा अधिकार है।

    आस्था और मर्यादा की दलील इमाम उमर अहमद इलियासी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर धर्मस्थल की अपनी गरिमा और मर्यादा होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक मुसलमान का गंगोत्री या केदारनाथ जैसे पवित्र सनातनी केंद्रों में क्या काम? उनके अनुसार यदि कोई मुस्लिम ऐसी जगहों पर जाता है जहां सदियों पुरानी सनातनी परंपराएं जुड़ी हैं तो वहां वैचारिक या शारीरिक टकराव की स्थिति बन सकती है। उन्होंने नसीहत दी कि मुसलमानों को दूसरे धर्मों की अत्यंत पवित्र जगहों पर जाने से परहेज करना चाहिए। इमाम ने तिरुपति बालाजी मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी इसी प्रकार के कड़े नियम लागू हैं और सभी समुदायों को एक-दूसरे के धार्मिक नियमों और सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। उनके मुताबिक इस मुद्दे पर राजनीति करना व्यर्थ है क्योंकि यह सीधे तौर पर किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है।

    मंदिर समितियों की एकजुटता वर्तमान स्थिति यह है कि गंगोत्री मंदिर समिति ने पहले ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय ले लिया है। वहीं बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने सभी संबंधित हितधारकों और तीर्थ पुरोहितों के साथ इस विषय पर आम सहमति बना ली है। अब बस बोर्ड की बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया जाना बाकी है। हालांकि समितियों ने यह स्पष्ट किया है कि सनातन धर्म में सच्ची आस्था रखने वाले किसी भी व्यक्ति का स्वागत किया जाएगा चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि का हो। दूसरी ओर हरिद्वार की गंगा सभा ने भी हर की पौड़ी पर इसी तरह की पाबंदी लगाने की मांग तेज कर दी है जिससे यह अभियान पूरे उत्तराखंड में फैलता दिख रहा है।

    सियासी घमासान और विरोध के स्वर जैसे-जैसे यह मामला चर्चा में आ रहा है उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे भारतीय जनता पार्टी की सोची-समझी रणनीति बताया है। उत्तराखंड कांग्रेस का आरोप है कि सरकार बेरोजगारी और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के भावनात्मक विवाद पैदा कर रही है। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गंगोत्री जैसे ऊंचे और पवित्र स्थानों पर पहले से ही कोई मुसलमान नहीं जाता लेकिन वहां पहचान साबित करने जैसी अनिवार्य शर्तें लगाना समाज में नफरत का जहर घोलने जैसा है। फिलहाल उत्तराखंड सरकार ने इस संवेदनशील विषय पर फूंक-फूंक कर कदम रखने का संकेत दिया है और कहा है कि सभी मंदिर समितियों का पक्ष सुनने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।

  • प्रधानमंत्री मोदी का गुजरात दौरा: धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों मे

    प्रधानमंत्री मोदी का गुजरात दौरा: धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों मे


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम से गुजरात दौरे की शुरुआत करेंगे। वे शाम 8 बजे सोमनाथ मंदिर में ओंकार मंत्र का जाप करने वाले भक्तों के साथ शामिल होंगे। इसके बाद मंदिर परिसर में आयोजित विशेष ड्रोन शो का अवलोकन करेंगे, जो धार्मिक और सांस्कृतिक समर्पण का प्रतीक माना जा रहा है।

    सोमनाथ स्वाभिमान पर्व और शौर्य यात्रा

    11 जनवरी को प्रधानमंत्री सुबह 9:45 बजे ‘शौर्य यात्रा’ में भाग लेंगे, जिसमें उन वीर योद्धाओं को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इसके बाद सुबह 10:15 बजे मंदिर में दर्शन और पूजा होगी। सुबह 11 बजे ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के तहत एक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित होगा।

    राजकोट में वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन

    सोमनाथ के कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री राजकोट के लिए रवाना होंगे। वहां वे कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए आयोजित ‘वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन’ में शामिल होंगे। दोपहर 1:30 बजे वे सम्मेलन के व्यापार शो और प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे, इसके बाद दोपहर 2 बजे मारवाड़ी विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन होगा और प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे।

    अहमदाबाद मेट्रो का उद्घाटन

    राजकोट से प्रधानमंत्री अहमदाबाद जाएंगे। शाम 5:15 बजे महात्मा मंदिर मेट्रो स्टेशन पर सेक्टर 10A से महात्मा मंदिर तक अहमदाबाद मेट्रो के चरण 2 के शेष खंड का उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना शहर की परिवहन सुविधा को और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    अहमदाबाद में जर्मन चांसलर से द्विपक्षीय बैठक

    12 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी अहमदाबाद में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से मुलाकात करेंगे। सुबह 9:30 बजे दोनों नेता साबरमती आश्रम का दौरा करेंगे और 10 बजे साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भाग लेंगे। इसके बाद 11:15 बजे महात्मा मंदिर, गांधीनगर में द्विपक्षीय वार्ता होगी। यह बैठक भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी की 25 वर्ष की प्रगति की समीक्षा करेगी।

    तीन दिवसीय दौरे का महत्व

    प्रधानमंत्री मोदी का यह तीन दिवसीय दौरा धार्मिक स्थलों, क्षेत्रीय विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को जोड़ने वाला माना जा रहा है। सोमनाथ और अहमदाबाद में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ राजकोट में वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में उद्योग और व्यापार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह दौरा गुजरात की सामाजिक, आर्थिक और कूटनीतिक महत्वाकांक्षाओं को मजबूत करने में सहायक होगा।